Wednesday, 15 Apr 2026 | 04:05 AM

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'ये मेरी बहन है, बीवी नहीं':फरदीन खान ने बहन लैला को पत्नी समझने पर पैपराजी की गलती सुधारी, देखें वीडियो

'ये मेरी बहन है, बीवी नहीं':फरदीन खान ने बहन लैला को पत्नी समझने पर पैपराजी की गलती सुधारी, देखें वीडियो

मुंबई में हाल ही में एक अवॉर्ड फंक्शन के दौरान एक्टर फरदीन खान अपनी बहन लैला के साथ नजर आए, जहां पैपराजी ने लैला को उनकी पत्नी समझ लिया। इस पर फरदीन ने मौके पर ही साफ करते हुए कहा कि वह उनकी बहन हैं, पत्नी नहीं, जिससे कन्फ्यूजन दूर हुआ। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में फरदीन पैपराजी की गलती सुधारते नजर आते हैं। वह कहते हैं, “ये बहन है मेरी, बीवी नहीं। बहुत सारे हैंडल्स लिखते हैं कि ये मेरी बीवी है।” इस पर उनकी बहन लैला हंस पड़ती हैं और फरदीन भी मुस्कुराते दिखते हैं। फरदीन की शादी मुमताज की बेटी से हुई फरदीन खान की शादी एक्ट्रेस मुमताज की बेटी नताशा माधवानी से हुई। दोनों के दो बच्चे बेटी डायनी और बेटा अजेरियस हैं। फरदीन लंबे समय तक लंदन में रहे, लेकिन अब उन्होंने मुंबई में फिर से अपना बेस बना लिया है। उनके मुंबई शिफ्ट होने के बाद सोशल मीडिया पर नताशा से अलग होने की अफवाहें सामने आई थीं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में फरदीन ने बच्चों से दूर रहने को मुश्किल बताया था और कहा था कि वह उनसे रेगुलरली वीडियो कॉल पर कनेक्ट रहते हैं। मुमताज ने तलाक की खबरों को खारिज किया था वहीं, मुमताज ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि इस मामले में कुछ भी सीरियस नहीं है। फरदीन और नताशा अब भी पति-पत्नी हैं और उनका तलाक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा था कि शायद अब उनकी आपस में नहीं बनती, लेकिन हर शादी में उतार-चढ़ाव आते हैं। फरदीन ने 2024 में हीरामंडी से कमबैक किया फरदीन खान ने लंबे समय के बाद फिल्म इंडस्ट्री में वापसी की है। फिल्म दूल्हा मिल गया (2010) के बाद लंबे ब्रेक के पश्चात उन्होंने 2024 में वेब सीरीज हीरामंडी से कमबैक किया। इसके बाद वह ‘खेल खेल में’, ‘विस्फोट’ और ‘हाउसफुल 5’ जैसे प्रोजेक्ट्स में नजर आए। बता दें कि 1998 में ‘प्रेम अगन’ से करियर शुरू करने वाले फरदीन ‘जंगल’, ‘प्यार तूने क्या किया’ और ‘नो एंट्री’ जैसी फिल्मों में दिखे हैं।

बाल नहीं बढ़ रहे हैं? किचन में मौजूद इस नेचुरल रस का करें उपयोग, बाल होंगे घने और मजबूत

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Last Updated:March 24, 2026, 14:10 IST Hairfall Kaise Roke: आज के समय में बालों का झड़ना, डैंड्रफ और समय से पहले सफेद होना आम समस्या बन चुकी है. ऐसे में महंगे प्रोडक्ट्स की जगह अगर आप एक प्राकृतिक और किफायती उपाय ढूंढ रहे हैं, तो रसोई में मौजूद प्याज आपके बालों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. आइए जानते है कुछ जरूरी टिप्स… आज के समय में बाल झड़ने और समय से पहले सफेद होने की समस्या आम होती जा रही है. बदलती लाइफस्टाइल, तनाव, प्रदूषण और गलत खान-पान इसके मुख्य कारण माने जाते हैं. ऐसे में लोग महंगे हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई बार उनसे अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते. वहीं, रसोई में मौजूद एक साधारण चीज ”प्याज” बालों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार प्याज का रस बालों की जड़ों को मजबूत करने में मदद करता है और बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाता है. प्याज में सल्फर की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो बालों की जड़ों को पोषण देने का काम करती है. यह स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है, जिससे बालों की वृद्धि तेज होती है. इसके नियमित इस्तेमाल से डैंड्रफ की समस्या भी कम हो सकती है. साथ ही प्याज में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण स्कैल्प को संक्रमण से बचाने में सहायक होते हैं. प्याज का रस तैयार करना भी बेहद आसान है. इसके लिए एक या दो मध्यम आकार के प्याज लें और उन्हें छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. इसके बाद मिक्सर में पीसकर पेस्ट बना लें और कपड़े या छलनी की मदद से रस निकाल लें. इस रस को कॉटन की सहायता से बालों की जड़ों में लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें. लगभग 30 मिनट तक लगा रहने दें और फिर हल्के शैम्पू से बाल धो लें. Add News18 as Preferred Source on Google बेहतर परिणाम के लिए प्याज के रस में नारियल तेल या एलोवेरा जेल मिलाकर भी लगाया जा सकता है. इससे बालों को अतिरिक्त पोषण मिलता है और बाल मुलायम भी होते हैं. सप्ताह में दो बार इसका इस्तेमाल करने से कुछ ही हफ्तों में फर्क दिखने लगता है. हालांकि, जिन लोगों की स्कैल्प संवेदनशील है, उन्हें पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए. अगर जलन या खुजली महसूस हो तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें. इसके अलावा आंखों में रस जाने से बचाएं. आंखों में जाने पर नुकसान हो सकता है. महंगे उपचारों की बजाय प्याज का रस एक प्राकृतिक और किफायती उपाय है, जो बालों को मजबूत, घना और चमकदार बनाने में मदद कर सकता है. नियमित उपयोग और सही देखभाल से बालों की सेहत में सुधार देखा जा सकता है. First Published : March 24, 2026, 14:10 IST

खरगोन ने सेमीफाइनल में बड़वानी को हराया:आदित्य व्यास के 6 विकेट, फाइनल में खंडवा से मुकाबला

खरगोन ने सेमीफाइनल में बड़वानी को हराया:आदित्य व्यास के 6 विकेट, फाइनल में खंडवा से मुकाबला

खरगोन में चल रही संभागीय अंडर-13 लेदर बॉल क्रिकेट स्पर्धा के सेमीफाइनल में मेजबान खरगोन ने बड़वानी को 7 विकेट से हराकर फाइनल में जगह बना ली है। खरगोन की जीत में आदित्य व्यास की घातक गेंदबाजी का अहम योगदान रहा, जिन्होंने 6 विकेट चटकाए। अब फाइनल मुकाबला मंगलवार को खरगोन और खंडवा के बीच खेला जाएगा। सोमवार को स्टेडियम मैदान पर खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में बड़वानी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। हालांकि, खरगोन के गेंदबाज आदित्य व्यास (6 विकेट) की शानदार गेंदबाजी के सामने बड़वानी की टीम 17 ओवर में महज 56 रन पर ऑल आउट हो गई। मन नरूला और अथर्व दांगी ने भी 2-2 विकेट लिए। बड़वानी की ओर से काव्यांश मालवीय ने सर्वाधिक 37 रन बनाए। जवाब में, खरगोन की टीम ने 14 ओवर में 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और 7 विकेट से मैच जीत लिया। खरगोन के लिए पार्थ मुकाती ने 20 और विभोर पवार ने 12 रन का योगदान दिया। बड़वानी के सौरभ मालवीय ने 2 विकेट लिए। मैच के दौरान जिला आयकर अधिकारी कैलाश मीणा ने खिलाड़ियों का परिचय लिया और उन्हें बेहतर सोच के साथ खेलने व हार से निराश न होने की सलाह दी। इस अवसर पर आयकर निरीक्षक अजय गुप्ता, जिला क्रिकेट एसोसिएशन अध्यक्ष मनोज रघुवंशी, सचिव जितेंद्र गोस्वामी, स्पर्धा ऑब्जर्वर जयंत वानखेड़े, अंपायर सार्थक कुलकर्णी व कार्तिक अय्यर, और स्कोरर विक्की निषाद भी उपस्थित थे। संभागीय अंडर-13 क्रिकेट स्पर्धा का दो दिवसीय फाइनल मुकाबला मंगलवार को खरगोन और खंडवा के बीच खेला जाएगा, जिसके लिए दोनों टीमों ने जमकर अभ्यास किया है।

सेहत के लिए वरदान है ‘खीस’, सामान्य दूध की तुलना में 5 गुना प्रोटीन, डायबिटीज मरीजों के लिए अमृत

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Last Updated:March 24, 2026, 12:42 IST Sidhi News: खीस आंखों के लिए भी बहुत लाभकारी है. इसमें मौजूद उच्च मात्रा में विटामिन ए आंखों की रोशनी बढ़ाने और आंखों से जुड़ी समस्याओं को कम करने में सहायक है. साथ ही इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर के हार्मोन विकास में भी मददगार होते हैं. सीधी. गाय या भैंस के ब्याने के बाद निकलने वाला पहला दूध पोषण गुणों का खजाना माना जाता है. जिस तरह मां का पहला दूध नवजात शिशु के लिए बेहद जरूरी होता है, उसी तरह खीस भी स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में लाभकारी साबित होती है. इसमें सामान्य दूध की तुलना में कई गुना अधिक प्रोटीन, विटामिन और एंटीबॉडी पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. सीधी पशु चिकित्सालय के उप-संचालक डॉ जितेंद्र कुमार गुप्ता ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गाय या भैंस के ब्याने के बाद 2 से 3 दिनों तक जो दूध निकलता है, वही खीस कहलाता है. इस दूध में सामान्य दूध की तुलना में 4 से 5 गुना अधिक प्रोटीन और 10 से 15 गुना ज्यादा विटामिन ए पाया जाता है. इसके साथ ही इसमें मैग्नीशियम, खनिज तत्व और लैक्टोफेरिन जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में सहायक होते हैं. डॉ जितेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि खीस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. इसमें मौजूद एंटीबॉडी और प्रोटीन पाचन क्रिया को बेहतर करते हैं और दस्त जैसी समस्याओं में भी राहत देने का काम करते हैं. यही कारण है कि इसे कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा खीस मधुमेह के मरीजों के लिए भी उपयोगी माना गया है. इसमें ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में इंसुलिन के स्तर को संतुलित करने में मदद करते हैं और रक्त में शुगर को नियंत्रित रखते हैं. हालांकि मधुमेह के रोगियों को इसका सेवन बिना चीनी के ही करना चाहिए ताकि इसका पूरा लाभ मिल सके. आंखों के लिए भी लाभकारीउन्होंने आगे बताया कि खीस आंखों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है. इसमें मौजूद उच्च मात्रा में विटामिन ए आंखों की रोशनी बढ़ाने और आंखों से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद करता है. साथ ही इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व शरीर के हार्मोन विकास में भी सहायक होते हैं. पशुओं के लिए भी खीस बेहद जरूरी होता है. जन्म के तुरंत बाद यदि नवजात बछड़े या बच्चे को खीस पिलाया जाए, तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वह जल्दी बीमारियों की चपेट में नहीं आता. खीस बनाने की विधिखीस बनाने की विधि भी काफी आसान है. इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है और स्वाद के अनुसार इसमें चीनी या गुड़ मिलाया जा सकता है. इलायची पाउडर डालकर इसका स्वाद और भी बढ़ाया जा सकता है. पकने के बाद यह हल्का फटकर पनीर जैसी बनावट ले लेता है, जो खाने में स्वादिष्ट और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : March 24, 2026, 12:42 IST

30, 40 और 50 की उम्र में कैसे बदलती है यूरोलॉजिकल हेल्थ? किडनी, ब्लैडर और प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं को समय रहते पहचानें

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Urological Health: हम अक्सर तब तक अपनी सेहत की तरफ ध्यान नहीं देते जब तक कोई परेशानी साफ नजर आने न लगे. यही बात यूरोलॉजिकल हेल्थ यानी किडनी, ब्लैडर, प्रोस्टेट और यूरिन से जुड़ी सेहत पर भी लागू होती है. इन अंगों में कई समस्याएं लंबे समय तक बिना लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती रहती हैं और जब तक पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है. आज के बदलते लाइफस्टाइल, कम पानी पीने की आदत, जंक फूड, ज्यादा नमक और बैठकर काम करने की वजह से ये समस्याएं पहले से कम उम्र में ही देखने को मिल रही हैं. भारत में बढ़ती उम्र के साथ-साथ डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं, जो सीधे किडनी पर असर डालती हैं.  इसलिए जरूरी है कि हम 30, 40 और 50 की उम्र में शरीर में होने वाले बदलावों को समझें और समय रहते सही कदम उठाएं, ताकि आगे चलकर बड़ी परेशानी से बचा जा सके. 30 की उम्र में दिखते हैं छोटे संकेत, लेकिन असर बड़ा होता है30 की उम्र को आमतौर पर कम जोखिम वाला माना जाता है, लेकिन यही वो समय होता है जब हमारी रोजमर्रा की आदतें भविष्य की सेहत तय करती हैं. कम पानी पीना, ज्यादा नमक और प्रोटीन लेना, और एक्सरसाइज की कमी किडनी स्टोन जैसी समस्याओं की शुरुआत कर सकती है. शहरों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. महिलाओं में इस उम्र में यूरिन इन्फेक्शन यानी UTI ज्यादा देखने को मिलता है, और जीवन में लगभग आधी से ज्यादा महिलाएं कभी न कभी इससे प्रभावित होती हैं. अगर बार-बार इन्फेक्शन होता रहे और इलाज न हो, तो यह ब्लैडर को नुकसान पहुंचा सकता है. पुरुषों में इस उम्र में प्रोस्टेट से जुड़ी हल्की समस्याएं या टेस्टिकल दर्द भी हो सकता है, जो अक्सर लंबे समय तक बैठने या इन्फेक्शन से जुड़ा होता है. इसके अलावा डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की शुरुआती समस्या भी इसी उम्र में शुरू हो सकती है, जो धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचाती है. 40 की उम्र में शरीर देता है साफ संकेत40 की उम्र में शरीर के बदलाव साफ दिखने लगते हैं. पुरुषों में प्रोस्टेट का साइज बढ़ना शुरू हो जाता है, जिसे BPH कहा जाता है. इसके कारण बार-बार पेशाब आना, रात में उठकर पेशाब जाना और अचानक यूरिन की जरूरत महसूस होना जैसे लक्षण दिख सकते हैं. इस उम्र में सेक्स से जुड़ी समस्याएं जैसे इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी सामने आ सकती हैं, जो सिर्फ यौन समस्या नहीं बल्कि अंदरूनी स्वास्थ्य का संकेत हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. वहीं महिलाओं में मेनोपॉज के आसपास हार्मोनल बदलाव शुरू होते हैं, जिससे ब्लैडर कंट्रोल कम होना, खांसते या हंसते समय यूरिन लीक होना और बार-बार इन्फेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इस उम्र में किडनी की क्षमता भी धीरे-धीरे कम होने लगती है, इसलिए नियमित जांच जैसे ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और ब्लड प्रेशर चेक कराना बहुत जरूरी हो जाता है. 50 की उम्र में जोखिम बढ़ता है, सतर्क रहना जरूरी50 की उम्र के बाद यूरोलॉजिकल समस्याएं ज्यादा गंभीर हो सकती हैं. पुरुषों में BPH आम हो जाता है और अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यूरिन रुकने, इन्फेक्शन और किडनी डैमेज जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इसी उम्र में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए किसी भी तरह की परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर पेशाब में खून आए, पेशाब करने में दिक्कत हो या पीठ में लगातार दर्द रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. महिलाओं में इस उम्र में यूरिन लीक होना और पेल्विक मसल्स कमजोर होना आम है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है. हालांकि सही एक्सरसाइज, लाइफस्टाइल बदलाव और जरूरत पड़ने पर इलाज से इसे कंट्रोल किया जा सकता है. कैसे रखें यूरोलॉजिकल हेल्थ को बेहतरउम्र चाहे कोई भी हो, कुछ आसान आदतें अपनाकर आप अपनी किडनी और ब्लैडर को स्वस्थ रख सकते हैं. दिनभर में पर्याप्त पानी पीना, संतुलित खाना खाना, नमक और जंक फूड कम करना, नियमित एक्सरसाइज करना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना बेहद जरूरी है. अगर किसी भी तरह का लक्षण दिखे तो उसे नजरअंदाज न करें. सही समय पर जांच और इलाज से बड़ी समस्याओं को रोका जा सकता है और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

मॉल जाकर शॉपिंग करना पसंद कर रही जेन-जी‎:हर साल 5% बढ़ रही अमेरिका के ए-क्लास मॉल्स की आय‎

मॉल जाकर शॉपिंग करना पसंद कर रही जेन-जी‎:हर साल 5% बढ़ रही अमेरिका के ए-क्लास मॉल्स की आय‎

अमेरिका में रियल एस्टेट डेवलपर ऐसा सोचते‎ रहे हैं कि शॉपिंग मॉल्स खत्म हो गए हैं। लेकिन ‎‎अब स्थिति बदल रही है। नई पीढ़ी (जेन-जी)‎खुद जाकर शॉपिंग करना पसंद कर रही है। ‎लिहाजा खास किस्म के मॉल चलने लगे हैं।‎ अमेरिका में ज्यादातर ए-क्लास मॉल्स की ‎‎मालिक साइमन प्रॉपर्टी के न्यूयॉर्क शहर के ‎‎रूजवेल्ट फील्ड पर स्थित मॉल की 96.3‎%‎जगह किराए पर है। एक्स फेंटी, अरमानी, हर्मीस ‎‎और रोलेक्स उसकी किराएदार हैं।‎शॉपिंग मॉल्स की नई सफलता और‎ इनोवेशन में युवाओं खास तौर पर जेन-जी की‎ अहम भूमिका है। इस्पॉस कंज्यूमर ट्रैकर के सर्वे‎ के अनुसार 18 से 34 वर्ष आयु के 58%‎खरीदारों ने बताया कि वे अक्सर मॉल्स में ‎शॉपिंग करते हैं। उनकी ये दर 55 साल की‎आयु के लोगों से दोगुनी है।‎ ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎1990 के दशक में शॉपिंग मॉल किसी बड़ी ‎कंपनी या स्टोर के कारण ही सफल हो पाते थे।‎आज साइमन व जीजीपी जैसी कंपनियों के ‎मॉल रिटेल, खानपान, मनोरंजन सहित कुछ नए‎ स्टोर की वजह से चलने लगे हैं। हालांकि बी‎ और सी क्लास के मॉल्स की आय हर साल 5%‎कम हो रही है।‎ ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎शॉपिंग मॉल्स K-आकार की रिकवरी कर रहे‎ हैं। इसका मतलब है कि अच्छे मॉल और ‎ऊंचाइयों पर जा रहे हैं, वहीं पुराने और साधारण ‎मॉल तेजी से बंद हो रहे हैं। ग्रोथ फैक्टर के‎ अनुसार 2024 में मॉल्स में आने वाले कंज्यूमर ‎की संख्या में 9.7% बढ़ोतरी हुई है।‎ टॉप 100 मॉल्स की हिस्सेदारी 50%‎ अमेरिका में लगभग 900 मॉल हैं। लेकिन उनमें ‎कुछ ही कामयाब हैं। टॉप 100 मॉल्स का मूल्य‎ पूरे सेक्टर का 50 फीसदी है। जबकि सबसे ‎निचले 350 मॉल का मूल्य सिर्फ दस प्रतिशत है।‎ए-मॉल्स की आय हर साल पांच फीसदी बढ़ रही‎ है। ब्रुकफील्ड प्रॉपर्टीज के मॉल्स डिवीजन‎ जीजीपी के किराएदारों की बिक्री 2019 के बाद‎ बीस प्रतिशत बढ़ी है। कंपनी हर साल किराया ‎बढ़ा रही है।‎

अमृतसर के बलविंदर ने रणवीर-अक्षय के लिए पगड़ी:फिल्म धुरंधर-2 में बॉलीवुड अभिनेताओं ने पहनी, बोले- AI पोस्टर की पगड़ी मेरी नहीं

अमृतसर के बलविंदर ने रणवीर-अक्षय के लिए पगड़ी:फिल्म धुरंधर-2 में बॉलीवुड अभिनेताओं ने पहनी, बोले- AI पोस्टर की पगड़ी मेरी नहीं

अमृतसर के कोट खालसा इलाके के इंदर पगड़ी हाउस के मालिक बलविंदर सिंह ने फिल्म “धुरंधर 2” में अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना जैसे अभिनेताओं के लिए पगड़ियां तैयार कीं। बलविंदर सिंह ने हाल ही में चल रहे AI पोस्टर विवाद पर भी बात की, जिसमें उन्होंने कहा कि पोस्टर में दिख रही पगड़ी उनके हाथ की नहीं लगती। बलविंदर सिंह को यह अवसर पहले एक हॉलीवुड प्रोजेक्ट में किए गए काम के कारण मिला था। उस प्रोजेक्ट में उन्होंने अभिनेता अनुपम खेर से जुड़े एक किरदार के लिए पगड़ी तैयार की थी, जिससे उन्हें पहचान मिली। “धुरंधर 2” के लिए उनसे लगभग डेढ़ साल बाद संपर्क किया गया। वे करीब ढाई महीने तक फिल्म की टीम के साथ जुड़े रहे। इस दौरान, उन्होंने रणवीर सिंह के लिए पटियाला शाही और सेमी पटियाला शाही स्टाइल की पगड़ियां बनाईं। अक्षय खन्ना के लिए उन्होंने बलोचिस्तानी स्टाइल की पगड़ी तैयार की, जिसे उन्होंने वीडियो और तस्वीरों के माध्यम से सीखा और घर पर अभ्यास किया। रणबीर सिंह के साथ काम करना शानदार अनुभव : बलविंदर सिंह बलविंदर सिंह ने रणवीर सिंह के साथ काम करने के अनुभव को बेहद शानदार बताया। शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात अमृतसर, लुधियाना, चंडीगढ़, पटियाला, हरियाणा बॉर्डर और दिल्ली सहित कई स्थानों पर रणबीर सिंह से हुई। उन्होंने एक घटना साझा करते हुए बताया कि जब वे बीमार हो गए थे, तो रणवीर सिंह ने व्यक्तिगत रूप से उनका हाल-चाल पूछा, जिससे उन्हें बहुत गर्व महसूस हुआ। AI पोस्टर विवाद पर बोले- पगड़ी में काफी अंतर AI पोस्टर को लेकर चल रहे विवाद पर बलविंदर सिंह ने अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि वे पूरी तरह निश्चित नहीं हैं, लेकिन पोस्टर में दिखाई गई पगड़ी उनके द्वारा बनाई हुई नहीं लगती। उनके अनुसार, पोस्टर की पगड़ी और उनकी बनाई पगड़ी में काफी अंतर है, जिससे यह संभावना बनती है कि वह AI के जरिए तैयार की गई हो। युवाओं को संदेश देते हुए बलविंदर सिंह ने कहा, “केश रखें, पगड़ी सजाएं और सिखी से जुड़ें। बलविंदर सिंह ने पंजाब के युवाओं को संदेश दिया कि वे अपने केशों को संभालें, पगड़ी बांधने की परंपरा अपनाएं और सिखी से जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि जो युवा सिखी से दूर हो गए हैं, वे वापस जुड़ें और इसे मजबूत बनाने में अपना योगदान दें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो युवा पगड़ी बांधना सीखना चाहते हैं, वे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

सर, नए गठबंधन और ‘डबल इंजन सरकार’ की अपील: क्या बंगाल चुनाव में मुस्लिम वोट प्रभावित होंगे? | राय समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 24, 2026, 13:47 IST हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ गठबंधन कर लिया है. उनकी पार्टियों के क्रमशः 182 और 8 सीटों पर चुनाव लड़ने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल में लगभग 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जिससे ममता बनर्जी को संरचनात्मक बढ़त मिलती है। (छवि: पीटीआई फ़ाइल) क्या इस बार मुसलमान ममता बनर्जी का साथ छोड़ देंगे? 2026 का पश्चिम बंगाल चुनाव 2021 की तरह नहीं है, जब – अपेक्षित मुस्लिम वोट विभाजन के बावजूद – वह अभी भी अपने वोट बैंक को काफी हद तक बरकरार रखने में कामयाब रही। तो अब हम यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं? क्योंकि जमीन पर कई चीजें बदल गई हैं, और यहां तक ​​कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी जानती हैं कि वह अब अपने पारंपरिक और बड़े पैमाने पर वफादार वोट आधार – मुसलमानों – को लेकर आत्मसंतुष्ट नहीं रह सकतीं। सबसे पहले, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास है। इससे संदिग्ध अवैध आप्रवासियों की जांच शुरू हो गई है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे बांग्लादेश से आए थे। उनमें से कई ने कथित तौर पर आधार कार्ड और फिर मतदाता पहचान पत्र हासिल किए और कहा गया कि उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस को वोट दिया है। भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि ये “वोट बैंक” थे जिन्हें टीएमसी ने जीत हासिल करने के लिए तैयार किया था – इस आरोप को ममता बनर्जी लगातार खारिज करती रही हैं। बीजेपी का मानना ​​है कि अगर ऐसे नामों को हटा दिया गया तो इस वोट बेस में खासी सेंध लग सकती है. उनका तर्क है कि इसका प्रभाव मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में सबसे अधिक दृढ़ता से महसूस किया जाएगा, जहां इस मुद्दे को अधिक स्पष्ट माना जाता है। राजनीतिक गणना सरल है: यहां कोई भी क्षरण ममता की चुनावी किस्मत को नुकसान पहुंचा सकता है। जनसांख्यिकीय कारक भी है. पश्चिम बंगाल में लगभग 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जिससे ममता बनर्जी को संरचनात्मक बढ़त मिलती है। 294 विधानसभा सीटों में से करीब 174 सीटों पर मुस्लिम आबादी 15 फीसदी से ज्यादा है। आम धारणा यह है कि वह प्रभावी रूप से लगभग 50 सीटों के साथ मुकाबले की शुरुआत करती है। इसका मतलब है कि किसी भी चुनौती देने वाले को इस बढ़त को तोड़ने के लिए एक मजबूत जवाबी रणनीति की जरूरत है। एक और नया कारक एक ताज़ा राजनीतिक गठबंधन है जिससे भाजपा को उम्मीद है कि मुस्लिम वोट विभाजित हो सकते हैं। हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ गठबंधन कर लिया है. उनकी पार्टियों के क्रमशः 182 और 8 सीटों पर चुनाव लड़ने की उम्मीद है। कभी टीएमसी के साथ रहे कबीर अलग हो गए और अब मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद को दोहराने की कोशिश और एक मुस्लिम मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री के विचार को आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं। वह मुस्लिम मतदाताओं से कहते रहे हैं कि ममता सरकार ने उनके लिए पर्याप्त काम नहीं किया है। ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने 2021 में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन उन्हें इस गठबंधन से और ममता के मुस्लिम समर्थन आधार में किसी भी बिखराव से फायदा होने की उम्मीद है। मिसाल भी है. 2021 में फुरफुरा शरीफ के लोकप्रिय मौलवी अब्बास सिद्दीकी ने एक पार्टी बनाई और लेफ्ट और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। उनका सफाया कर दिया गया. मुस्लिम मतदाताओं ने बदलाव करने से इनकार कर दिया, यह मानने को तैयार नहीं थे कि “दीदी” का कोई व्यवहार्य विकल्प है। क्या 2026 कुछ अलग होगा? उत्तर प्रदेश और बिहार में चुनाव नतीजे बताते हैं कि मुस्लिम मतदाता किसी अन्य मतदाता की तरह ही व्यवहार करते हैं – वे विकास और शासन चाहते हैं। वहीं, ममता बनर्जी ने एसआईआर को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया है, उनका तर्क है कि इसकी आड़ में, मुसलमान भाजपा शासित व्यवस्था में असुरक्षित महसूस कर सकते हैं। डर की वह कहानी अभी भी उसके पक्ष में काम कर सकती है। लेकिन जैसे-जैसे बंगाल का चुनाव तेजी से विकास के इर्द-गिर्द घूमता है, एक महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है: क्या मुस्लिम मतदाता निरंतरता पसंद करेंगे, या इस बार “डबल इंजन सरकार” का विचार उन पर हावी होगा? पहले प्रकाशित: मार्च 24, 2026, 13:47 IST समाचार राय सर, नए गठबंधन और ‘डबल इंजन सरकार’ की अपील: क्या बंगाल चुनाव में मुस्लिम वोट प्रभावित होंगे? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी मुस्लिम वोट(टी)मुस्लिम मतदाता पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी मुस्लिम वोट बैंक(टी)पश्चिम बंगाल में बीजेपी की रणनीति(टी)विशेष गहन संशोधन एसआईआर पश्चिम बंगाल(टी)हुमायूं कबीर ओवेसी गठबंधन(टी)डबल इंजन सरकार पश्चिम बंगाल

गोल्डमैन सैक्स ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया:2026 के लिए 7% से 5.9% किया; युद्ध-कच्चे तेल की कीमतों के चलते रेपो रेट 0.50% बढ़ने के आसार

गोल्डमैन सैक्स ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाया:2026 के लिए 7% से 5.9% किया; युद्ध-कच्चे तेल की कीमतों के चलते रेपो रेट 0.50% बढ़ने के आसार

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स ने साल 2026 के लिए भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की GDP ग्रोथ अब 5.9% रहने की उम्मीद है, जो कि ईरान युद्ध से पहले लगाए गए 7% के अनुमान से काफी कम है। गोल्डमैन ने चेतावनी दी है कि रुपए की कमजोरी और महंगाई को काबू करने के लिए RBI को ब्याज दरों में 0.50% (50 बेसिस पॉइंट्स) की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। कच्चे तेल की कीमतों ने कैलकुलेशन बिगाड़ा गोल्डमैन सैक्स ने ग्रोथ अनुमान में कटौती की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई में आ रही दिक्कतों को बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई अप्रैल के मध्य तक बंद रह सकती है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार, राजकोषीय घाटा और महंगाई तीनों पर बुरा असर पड़ता है। ब्रेंट क्रूड $115 तक जा सकता है बैंक के एनालिस्ट्स का मानना है कि मार्च में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत $105 और अप्रैल में $115 प्रति बैरल रह सकती है। हालांकि, साल की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) तक इसके गिरकर $80 प्रति बैरल पर आने की उम्मीद है। इसी अस्थिरता को देखते हुए गोल्डमैन ने 13 मार्च को भी भारत की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.5% किया था, जिसे अब और कम कर दिया गया है। महंगाई 4.6% तक पहुंचने का अनुमान गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, भारत में महंगाई दर 2026 में 4.6% तक जा सकती है। इससे पहले बैंक ने इसके 3.9% रहने का अनुमान जताया था। हालांकि, यह अभी भी रिजर्व बैंक के 2% से 6% के कंफर्ट जोन में है, लेकिन रुपए की गिरती वैल्यू RBI की चिंता बढ़ा सकती है। 0.50% तक बढ़ सकती है ब्याज दर रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरते रुपये को सहारा देने और महंगाई के ‘सेकंड राउंड इफेक्ट’ को रोकने के लिए RBI रेपो रेट में 0.50% की बढ़ोतरी कर सकता है। बाजार के जानकारों का तो यहां तक मानना है कि आने वाले एक साल में 0.25-0.25% की 3 से 4 बढ़ोतरी (कुल 0.75% से 1%) देखने को मिल सकती है। डॉलर के मुकाबले 4% टूटा रुपया भारतीय रुपया इस साल (2026) अब तक डॉलर के मुकाबले 4% कमजोर हो चुका है। पिछले साल भी इसमें 4.7% की गिरावट देखी गई थी। जब रुपया कमजोर होता है, तो आयात महंगा हो जाता है, जिससे रिटेल मार्केट में चीजों के दाम बढ़ जाते हैं। करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ेगा गोल्डमैन ने अनुमान लगाया है कि 2026 में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी का 2% तक पहुंच सकता है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में यह 1.3% था। तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर इस घाटे को बढ़ाने का काम करती हैं। क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और यह क्यों जरूरी है? यह ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान युद्ध या किसी भी तनाव की स्थिति में अगर यह रास्ता बंद होता है, तो ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई रुक जाती है और कीमतें तेजी से बढ़ती हैं। GDP क्या है? इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए GDP का इस्तेमाल होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में बनाए गए सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दिखाती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं उन्हें भी शामिल किया जाता है। दो तरह की होती है GDP GDP दो तरह की होती है। रियल GDP और नॉमिनल GDP। रियल GDP में गुड्स और सर्विस की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर की वैल्यू या स्टेबल प्राइस पर किया जाता है। फिलहाल GDP को कैलकुलेट करने के लिए बेस ईयर 2011-12 है। वहीं नॉमिनल GDP का कैलकुलेशन करंट प्राइस पर किया जाता है। कैसे कैलकुलेट की जाती है GDP? GDP को कैलकुलेट करने के लिए एक फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है। GDP=C+G+I+NX, यहां C का मतलब है प्राइवेट कंजम्प्शन, G का मतलब गवर्नमेंट स्पेंडिंग, I का मतलब इन्वेस्टमेंट और NX का मतलब नेट एक्सपोर्ट है। GDP की घट-बढ़ के लिए जिम्मेदार कौन है? GDP को घटाने या बढ़ाने के लिए चार इम्पॉर्टेंट इंजन होते हैं। पहला है, आप और हम। आप जितना खर्च करते हैं, वो हमारी इकोनॉमी में योगदान देता है। दूसरा है, प्राइवेट सेक्टर की बिजनेस ग्रोथ। ये GDP में 32% योगदान देती है। तीसरा है, सरकारी खर्च। इसका मतलब है गुड्स और सर्विसेस प्रोड्यूस करने में सरकार कितना खर्च कर रही है। इसका GDP में 11% योगदान है। और चौथा है, नेट डिमांड। इसके लिए भारत के कुल एक्सपोर्ट को कुल इम्पोर्ट से घटाया जाता है, क्योंकि भारत में एक्सपोर्ट के मुकाबले इम्पोर्ट ज्यादा है, इसलिए इसका इम्पैक्ट GPD पर नेगेटिव ही पड़ता है। ये खबर भी पढ़ें… सोने ₹56 रुपए घटा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.39 लाख: चांदी में ₹1 हजार रुपए की तेजी, दाम 2.20 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंचे सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 मार्च को मामूली उतार-चढ़ाव है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 56 रुपए गिरकर 1.39 लाख रुपए के करीब है। चांदी में 1093 रुपए की तेजी है। ये 2.20 लाख रुपए प्रति किलो पर है। पूरी खबर पढ़ें…

शाजापुर में गर्मी बढ़ी, तेज धूप ने बढ़ाई परेशानी:जमकर तपाएगा अप्रैल का पहला सप्ताह, तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने के आसार

शाजापुर में गर्मी बढ़ी, तेज धूप ने बढ़ाई परेशानी:जमकर तपाएगा अप्रैल का पहला सप्ताह, तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने के आसार

शाजापुर में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। तीन दिन पहले बादलों के कारण मिली राहत के बाद, मंगलवार को तेज धूप ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। सुबह से ही आसमान साफ रहा और तीखी धूप का असर महसूस किया गया। दोपहर के समय शहर के व्यस्त इलाकों में भी चहल-पहल कम दिखी। गर्मी से बचने के लिए लोग गमछा, टोपी और चश्मे का उपयोग करते नजर आए। बाजारों में भी दोपहर के वक्त सन्नाटा पसरा रहा, जिससे बढ़ते तापमान का जनजीवन पर स्पष्ट प्रभाव दिखा। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को अधिकतम तापमान लगभग 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। गौरतलब है कि तीन दिन पहले अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री के बीच था, जिसमें अब तेजी से बढ़ोतरी हुई है। मौसम विशेषज्ञ सत्यंत्र धनोतिया ने बताया कि आने वाले दिनों में तापमान लगातार 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रह सकता है। वहीं, 2 अप्रैल तक अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में लोगों को आगामी दिनों में और अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।