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अपने मन से वेट लॉस की दवा बेची तो खैर नहीं, सरकार ने उठाया सख्त कदम,देश में 49 जगहों पर छापेमारी

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Last Updated:March 24, 2026, 13:12 IST Govt Warn on Weight Loss Drugs: वेट लॉस की दवा पर पेटेंट खत्म होने के बाद बाजार में करीब 40 कंपनियों की जेनरिक दवा आ गई है. ये दवा बेहद सस्ती है. लेकिन इस दवा को कोई भी बिना डॉक्टरों की पर्ची से न खरीद सकता है न ही बेच सकता है.लेकिन अभी से ऐसा होने लगा है. इसी कारण सरकार ने हिदायत देते हुए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट कर दिया है. इस सिलसिले में 49 जगहों पर छापेमारी भी की गई है. सरकार को अंदेशा है कि सस्ती दवा की आड़ में लोग या केमिस्ट शॉप वाले खुद से ही दवा को दे सकते हैं. वेट लॉस दवा के गलत इस्तेमाल पर सरकार सख्त. Govt Warn on Weight Loss Drugs: वजन कम करने वाली दवा के सस्ती होने के बाद अगर किसी ने इस GLP-1 दवा को अपने मन से खरीदने या बेचने की कोशिश की तो उसकी खैर नहीं. ड्रग नियामक संस्था सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने इस पर काबू पाने के लिए सख्त गाइडलाइन जारी की है.इतना ही नहीं, इसके लिए कार्रवाई भी शुरू कर दी है. विभाग ने 49 जगहों पर छापेमारी की है. दरअसल, भारत में पहले से ही GLP-1 श्रेणी की वीगोभी और ओजेंपिक इंजेक्शन बहुत ज्यादा बिक रहे हैं. ये दवा बेहद महंगी होती है लेकिन हाल ही में सरकार ने इसे पेटेंट फ्री कर दिया है जिसके बाद कई कंपनियां इस दवा का जेनरिक वर्जन ला रही है. ये दवा अब बेहद सस्ती हो जाएगी. इसलिए सरकार को डर है कि लोग बिना डॉक्टरों की सलाह इस दवा को खरीद न लें क्योंकि बिना डॉक्टरों की सलाह यह दवा बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है. क्यों सरकार ने उठाया ये कदम यही कारण है कि वजन घटाने की सस्ती दवाओं (GLP-1) को लेकर सरकार अलर्ट हो गई है. भारत के ड्रग्स कंट्रोलर ने इन दवाओं की सप्लाई चेन पर कड़ी नजर रखते हुए सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. जेनरिक वर्जन दवाओं की बाजार में भरमार हो गई है. ये दवाएं मेडिकल स्टोर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और वेलनेस क्लीनिक पर आसानी से मिलने लगी हैं. लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह इनका इस्तेमाल करना खतरनाक साबित हो सकता है. इसी को देखते हुए सरकार ने दवा कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी तरह का भ्रामक विज्ञापन या छिपा प्रचार न करें, जिससे लोग गुमराह हों या बिना जरूरत दवा लें. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पिछले कुछ हफ्तों में बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर में 49 जगहों पर छापेमारी और जांच की गई. इनमें ऑनलाइन फार्मेसी, थोक विक्रेता, मेडिकल स्टोर और स्लिमिंग क्लीनिक शामिल हैं. जांच में जहां-जहां गड़बड़ी मिली, वहां नोटिस भी जारी किए गए हैं. सरकार का साफ कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है. बिना डॉक्टर की निगरानी के इन दवाओं का इस्तेमाल करने से गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं. नियमों के मुताबिक, ये दवाएं सिर्फ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह पर ही दी जा सकती हैं. सरकार ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने, जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे. मरीजों की सुरक्षा सर्व प्रमुख 10 मार्च को सीडीएससीओ ने दवा कंपनियों को विस्तृत गाइडलाइन जारी की थी जिसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इस दवा से संबंधित भ्रामक विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा. अगर दिखाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने बताया कि GLP-1 दवाएं केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही दी जाती हैं और इन्हें मेडिकल निगरानी में ही इस्तेमाल करना चाहिए. भारत में इस दवा को एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ और कुछ मामलों में कार्डियोलॉजिस्ट ही लिख सकते हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल गंभीर साइड इफेक्ट और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है. सीडीएससीओ ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और इस कार्रवाई का उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है. आने वाले समय में निगरानी और सख्त की जाएगी और नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi First Published : March 24, 2026, 13:12 IST

World TB Day 2026: टीबी की बीमारी कितने दिनों में हो सकती है ठीक? क्या है बेस्ट ट्रीटमेंट, डॉक्टर से जानिए

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Last Updated:March 24, 2026, 13:10 IST World TB Day 2026: हर साल 24 मार्च को वर्ल्ड टीबी डे मनाया जाता है. टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जिसका सही इलाज करने पर यह पूरी तरह ठीक हो सकती है. सामान्य टीबी का इलाज लगभग 6 महीने में पूरा होता है, जबकि गंभीर मामलों में ज्यादा समय लग सकता है. DOTS जैसी पद्धति और नियमित दवा लेने से इस बीमारी पर प्रभावी कंट्रोल पाया जा सकता है. टीबी का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन से किया जाता है. Tuberculosis Treatment: हमारे देश में आज भी टीबी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है. टीबी शरीर के हर अंग में हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में फेफड़ों को प्रभावित करती है. टीबी का बैक्टीरिया कई लोगों के शरीर में हो सकता है, लेकिन बीमारी तब होती है, जब शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. यह कमजोरी खराब पोषण, अस्वच्छ जीवनशैली या किसी अन्य बीमारी की वजह से हो सकती है. टीबी होने पर लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना और कभी-कभी खून की खांसी जैसे लक्षण नजर आते हैं. फेफड़ों के अलावा टीबी लिम्फ नोड्स, दिमाग, किडनी, हड्डियां और आंखों को भी प्रभावित कर सकती है. ग्रेटर नोएडा के ओमेगा 1 स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सर्विंदर सिंह ने बताया कि भारत में टीबी का बोझ बहुत ज्यादा है और दुनिया के करीब 25% टीबी मरीज भारत में हैं. हर साल लाखों नए मामले सामने आते हैं. हालांकि कुल मामलों में धीरे-धीरे कमी आ रही है, लेकिन दवाओं से न ठीक होने वाली टीबी चिंता का विषय बनी हुई है. टीबी को कंट्रोल करने के लिए समय पर जांच, पूरा इलाज, अच्छा पोषण और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना बहुत जरूरी है. टीबी से बचाव और इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए जागरुकता और सही समय पर कदम उठाना जरूरी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि आमतौर पर टीबी का इलाज 6 महीने तक चलता है. इसमें मरीज को नियमित रूप से दवाएं लेनी होती हैं. पहले 2 महीने के इलाज को इंटेंसिव फेज कहा जाता है और उसके बाद 4 महीने के ट्रीटमेंट को कंटीनुएशन फेज कहा जाता है. अगर मरीज समय पर दवा लेता है और इलाज बीच में नहीं छोड़ता, तो ज्यादातर मामलों में टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है. हालांकि अगर टीबी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (MDR-TB) हो जाए और उस पर दवाएं बेअसर होने लगें, तो इलाज 9 से 24 महीने तक भी चल सकता है. टीबी का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन से किया जाता है. भारत में सरकार की डायरेक्टली ऑब्जर्ब्ड ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स (DOTS) पद्धति सबसे प्रभावी मानी जाती है. इस उपचार में स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी में मरीज को नियमित दवा दी जाती है, जिससे इलाज अधूरा न छूटे. सरकार के निक्षय कार्यक्रम के तहत टीबी की जांच और दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं. यह कार्यक्रम मरीजों को आर्थिक और पोषण संबंधी सहायता भी प्रदान करता है. टीबी का इलाज तभी सफल होता है जब मरीज कुछ जरूरी बातों का पालन करे. दवाएं रोजाना और समय पर लें, बीच में न छोड़ें. पौष्टिक आहार लें, जैसे दाल, फल, हरी सब्जियां. पर्याप्त आराम करें और शरीर को मजबूत बनाएं. खांसते समय मुंह ढकें और मास्क का उपयोग करें और नियमित जांच कराते रहें. इलाज बीच में छोड़ने से बीमारी दोबारा हो सकती है और दवाओं का असर कम हो सकता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 24, 2026, 13:10 IST

पैन इंडिया फिल्म में पवन सिंह की एंट्री:‘डकैत एक प्रेम कथा’ में गाएंगे गाना ‘टच बेबी’, 28 मार्च को होगा रिलीज

पैन इंडिया फिल्म में पवन सिंह की एंट्री:‘डकैत एक प्रेम कथा’ में गाएंगे गाना ‘टच बेबी’, 28 मार्च को होगा रिलीज

भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह को अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर की अपकमिंग पैन-इंडिया फिल्म ‘डकैत: एक प्रेम कथा’ में शामिल किया गया है। मेकर्स ने आधिकारिक पोस्टर के जरिए यह जानकारी दी। पवन सिंह फिल्म के गाने में अपनी आवाज देंगे। फिल्म के मेकर्स ने सोमवार को आधिकारिक पोस्टर जारी कर पवन सिंह की एंट्री कंफर्म की। पोस्टर के साथ बताया गया कि पवन सिंह फिल्म के हिंदी वर्जन में एक डांस नंबर गाएंगे। मेकर्स के अनुसार, फिल्म का गाना ‘टच बेबी’, 28 मार्च को रिलीज किया जाएगा। पोस्टर में दर्शकों को धमाकेदार गाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। गौरतलब है कि पवन सिंह भोजपुरी इंडस्ट्री के बड़े स्टार माने जाते हैं और उनकी मजबूत फैन फॉलोइंग है। उन्होंने फिल्म ‘स्त्री 2’ में गाना ‘आई नहीं’ गाया था, जिसके बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी मांग बढ़ी है। फिल्म डकैत: एक प्रेम कथा में अदिवि शेष और मृणाल ठाकुर के अलावा अनुराग कश्यप एक पुलिस ऑफिसर के किरदार में नजर आएंगे। इस फिल्म का डायरेक्शन शेनिल देव कर रहे हैं। कहानी लव, धोखे और रिवेंज पर आधारित है, जिसमें एक एक्स-लवर अपने साथ हुए विश्वासघात का बदला लेने निकलता है। यह एक बाइलिंगुअल फिल्म है, जिसे हिंदी और तेलुगु में साथ-साथ शूट किया गया है। अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों को जोड़कर इसे बड़े स्केल पर बनाया गया है। फिल्म 10 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

Supreme Court: Caste Status Lost on Religious Conversion

Supreme Court: Caste Status Lost on Religious Conversion

Hindi News National Supreme Court: Caste Status Lost On Religious Conversion | Hindu, Buddhist, Sikh Only नई दिल्ली1 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ईसाई धर्म अपनाने वाला दलित व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मिलने वाले किसी भी लाभ का दावा नहीं कर सकता है। यह फैसला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मई 2025 के फैसले के खिलाफ सुनाया गया। धर्म परिवर्तन के बाद पादरी बने चिंथदा आनंद ने याचिका लगाई थी कि उन्हें अक्काला रामिरेड्डी समेत कुछ लोगों से जातिगत भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। चिंथदा ने SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर इस पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद चिंथदा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। यह था पूरा मामला यह मामला विशाखापट्टनम जिले के अनाकापल्ली का है, जहां मूल रूप से एससी (माला समुदाय) के चिंथदा ने ईसाई धर्म अपना लिया और पादरी बन गया। केस की जांच के दौरान पता चला था कि ईसाई धर्म अपनाने के कारण चिंथदा का अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया था। चिंथदा एक चर्च में करीब 10 साल से पादरी के तौर पर काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका- आरक्षण का लाभ लेने धर्म बदलना, संविधान से धोखा कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले में स्पष्ट किया था कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाने के बाद दोबारा हिंदू धर्म में लौटता है, तो उसे एससी दर्जा प्राप्त करने के लिए विश्वसनीय प्रमाण और समुदाय की स्वीकृति की जरूरत होगी। केवल लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करने को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के साथ धोखा करार दिया। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने क्या कहा था… जब पीड़ित ने खुद कहा कि वह पिछले 10 साल से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है, तो पुलिस को आरोपियों पर एससी/एसटी अधिनियम नहीं लगाना चाहिए था। एससी/एसटी अधिनियम का उद्देश्य उन समूहों (अनुसूचित जातियों) से जुड़े लोगों की रक्षा करना है, न कि उन लोगों की जो दूसरे धर्मों में परिवर्तित हो गए हैं। केवल इस आधार पर एससी/एसटी अधिनियम लागू करना कि उसका जाति प्रमाण पत्र रद्द नहीं किया गया है, वैध आधार नहीं हो सकता। संविधान में क्या प्रावधान है संविधान (अनुसूचित जातियों) आदेश, 1950 के अनुसार केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुसूचित जाति समुदायों को एससी का दर्जा प्राप्त है। अगर कोई ईसाई या मुस्लिम धर्म अपना लेता है तो उनका यह दर्जा समाप्त हो जाता है। ​ आंध्र प्रदेश विधानसभा ने भी मार्च 2023 में एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया कि ईसाई धर्म अपना चुके दलितों को भी एससी दर्जा प्रदान किया जाए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

कर्नाटक विधानसभा में गूंजा हिमाचल का आर्थिक संकट:बीजेपी MLA ने सैलरी डेफर पर उठाए सवाल, मंत्री बोले- हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत

कर्नाटक विधानसभा में गूंजा हिमाचल का आर्थिक संकट:बीजेपी MLA ने सैलरी डेफर पर उठाए सवाल, मंत्री बोले- हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत

हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति अब राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर अन्य राज्यों की विधानसभाओं में भी चर्चा का विषय बन गई है। कर्नाटक विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान सोमवार को हिमाचल का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा, जहां विपक्ष ने बढ़ती सब्सिडी और आर्थिक प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए। विधानसभा में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के विधायक वी सुनील कुमार ने कहा कि कर्नाटक में करीब 14 प्रतिशत बजट सब्सिडी योजनाओं पर खर्च हो रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो राज्य को हिमाचल प्रदेश जैसी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि ‘गारंटी योजनाओं’ पर एक लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुका है, जिससे ‘सब्सिडी कल्चर’ बढ़ रहा है। एस सुनील कुमार ने हिमाचल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कांग्रेस सरकार को गारंटी योजनाओं के चलते वेतन में कटौती और भुगतान स्थगित करने जैसे कदम उठाने पड़े। उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी राज्य के लिए चिंताजनक है और कर्नाटक को इससे सबक लेना चाहिए। हिमाचल सरकार ने 3% से 50% तक सैलरी डेफर की दरअसल, हिमाचल में हाल ही में सरकार ने वित्तीय दबाव के चलते बड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू का 50 प्रतिशत वेतन छह महीने के लिए डेफर किया है। इसके अलावा, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की 30 प्रतिशत और विधायकों की 20 प्रतिशत सैलरी डेफर की गई है। इसी तरह राज्य सरकार ने 2025-26 की तुलना में 2026-27 में 4 हजार 577 करोड़ रुपए कम का बजट पेश किया है। साल 2025-26 में राज्य के बजट का आकार 58 हजार 514 करोड़ रुपए था, जबकि इस बार घटकर 54 हजार 928 करोड़ रुपए रह गया है। इस वजह से भी दूसरे राज्यों में हिमाचल के आर्थिक हालात को लेकर चर्चा हो रही है। हिमाचल सीएम ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर फोड़ा ठीकरा इसी वजह से कर्नाटक विधानसभा में भी यह मामला गूंजा। वहां विपक्ष हिमाचल की आर्थिक स्थिति को मुद्दा बनाकर सत्तारूढ़ कांग्रेस को घेर रहा है। वहीं हिमाचल सीएम का कहना है कि संघीय ढांचे में केंद्र का रवैया ठीक नहीं है। पहले GST कंपनसेशन बंद किया गया। इसके बाद NPS के अंगेस्ट मिलने वाला लोन और फिर राज्य की लोन लेने की सीमा 5 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी की। अब राज्य को हर साल मिलने वाली लगभग 10 हजार करोड़ की रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट भी बंद कर दी गई है। कर्नाटक सरकार ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया वहीं, कर्नाटक सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। राज्य के राजस्व मंत्री कृष्णा बायर गौड़ा ने कहा कि उनकी सरकार वित्तीय चुनौतियों को लेकर पूरी तरह सजग है और कर्नाटक की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। उन्होंने बताया कि राज्य की विकास दर 11 प्रतिशत है, जो महाराष्ट्र और गुजरात से अधिक है। गौड़ा ने यह भी कहा कि सब्सिडी को नकारात्मक रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ‘डिमांड-साइड इकोनॉमिक्स’ के तहत लोगों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता से बाजार में मांग बढ़ती है और इससे आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। उन्होंने “मल्टीप्लायर इफेक्ट” का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों के हाथ में दिया गया पैसा कई बार खर्च होता है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। कुल मिलाकर, हिमाचल की वित्तीय स्थिति अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती जा रही है। कर्नाटक विधानसभा में उठा यह मुद्दा संकेत देता है कि छोटे राज्यों की आर्थिक नीतियों और उनके प्रभाव पर देशभर में नजर रखी जा रही है।

राजस्थान के युवक ने गुना में फांसी लगाई:मामा के लड़के के साथ घूमने आया था; कमरे में फंदे पर मिला

राजस्थान के युवक ने गुना में फांसी लगाई:मामा के लड़के के साथ घूमने आया था; कमरे में फंदे पर मिला

राजस्थान के बारां जिले से गुना में अपने मामा के लड़के के पास घूमने आए 26 वर्षीय युवक शिवचरण मीणा ने सोमवार शाम हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलने पर कैंट पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को फंदे से उतरवाया और जिला अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मंगलवार सुबह परिजनों के पहुंचने पर पोस्टमार्टम के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया है और पुलिस मर्ग कायम कर आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। 2 दिन पहले ही राजस्थान के बारां से आया था गुना जानकारी के अनुसार, शिवचरण मीणा (26) पुत्र सत्यनारायण मीणा राजस्थान के बारां जिले का रहने वाला था। वह दो दिन पहले ही राजस्थान से गुना घूमने आया था। उसके मामा का लड़का गुना में ही एक स्कूल में टीचर है। वह उसी के पास हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने और घूमने के लिए आया था। मामा का लड़का पहुंचा तो फंदे पर लटका मिला शिवचरण सोमवार शाम शिवचरण ने हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित मामा के लड़के के घर में अज्ञात कारणों के चलते फांसी लगा ली। जब उसका मामा का लड़का घर पहुंचा, तो वह फंदे पर लटका हुआ मिला। इसके बाद उसने तत्काल कैंट पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस ने मर्ग कायम किया, सुसाइड का कारण अज्ञात सूचना पर मौके पर पहुंची कैंट पुलिस ने शव को नीचे उतरवाया और जिला अस्पताल भिजवाया। यहां डॉक्टरों ने शिवचरण को मृत घोषित कर दिया और शव को पीएम रूम में रखवा दिया गया। मंगलवार सुबह परिवार वालों के पहुंचने पर शव का पोस्टमार्टम किया गया। पीएम के बाद शव परिवार वालों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि उसने सुसाइड क्यों किया, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है।

किम जोंग बोले- परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था:ईरान पर हमले ने हमें सच साबित किया, ताकत से ही सुरक्षा मिलती है

किम जोंग बोले- परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था:ईरान पर हमले ने हमें सच साबित किया, ताकत से ही सुरक्षा मिलती है

नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन ने देश के पास परमाणु हथियार होने को लेकर खुशी जताई है। सरकारी मीडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर किए गए हमले साबित करते हैं, कि उनके देश का परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था। किम ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध दिखाता है कि आज की दुनिया में सिर्फ मजबूत सैन्य ताकत ही किसी देश को सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने यह बयान सोमवार को संसद में लंबे भाषण के दौरान दिया। अपने भाषण में किम ने दक्षिण कोरिया के प्रति सख्त रुख दोहराया और कहा कि वह अपने देश की परमाणु ताकत को और मजबूत करेंगे ताकि अमेरिका को रोका जा सके। किम जोंग बोले- और ज्यादा परमाणु हथियार बनाएंगे किम जोंग उन का यह भाषण मंगलवार को लिखित रूप में जारी हुआ है। इसमें उन्होंने कहा कि 2019 में ट्रम्प के साथ बातचीत टूटने के बाद परमाणु हथियार बढ़ाने का फैसला उनका सबसे सही कदम था। किम ने देश को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने, ज्यादा परमाणु हथियार और उन्हें ले जाने वाली मिसाइलें बनाने पर जोर दिया। किम ने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों की वजह से नॉर्थ कोरिया अब ज्यादा सुरक्षित है और इसी वजह से वह अपने संसाधनों का इस्तेमाल आर्थिक विकास के लिए भी कर पा रहा है। किम जोंग उन के भाषण की अहम बातें… साउथ कोरिया को दुश्मन देश का दर्जा देंगे किम साउथ कोरिया को लेकर उन्होंने कहा कि वह उसे सबसे बड़ा दुश्मन मानेंगे और पूरी तरह नजरअंदाज करेंगे। अगर साउथ कोरिया कोई भी कदम उठाता है जो उनके देश को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। कई दशकों से अमेरिका और उसके सहयोगी देश, प्रतिबंध और बातचीत के जरिए नॉर्थ कोरिया को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन अब तक सभी प्रयास असफल रहे हैं। व्हाइट हाउस में दोबारा आने के बाद ट्रम्प ने किम से फिर बातचीत करने की इच्छा जताई है। हालांकि, किम का कहना है कि बातचीत तभी हो सकती है जब अमेरिका आधिकारिक तौर पर नॉर्थ कोरिया को परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता दे। नॉर्थ कोरिया लंबे समय से यह कहता रहा है कि अगर लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी और इराक के सद्दाम हुसैन के पास परमाणु हथियार होते, तो उनका अंत इस तरह नहीं होता। 2019 में अमेरिका-नॉर्थ कोरिया की बातचीत टूटी थी अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को लेकर साल 2018 में बातचीत शुरू हुई थी। इसे लेकर जून 2018 में सिंगापुर में पहली बार ट्रम्प और किम जोंग उन की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। इसके बाद फरवरी 2019 में वियतनाम के हनोई में दूसरी बैठक हुई, लेकिन यहीं बातचीत टूट गई क्योंकि दोनों पक्ष शर्तों पर सहमत नहीं हो पाए। इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने कहा था कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और सुरक्षा के लिए उसे अपनी सैन्य ताकत बढ़ानी होगी। इसी सोच के तहत उसने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। नॉर्थ कोरिया का मानना है कि मजबूत परमाणु क्षमता ही उसे बाहरी हमलों से बचा सकती है। नॉर्थ कोरिया के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने धीरे-धीरे अपनी पुरानी रणनीति पर वापसी कर ली। उसने मिसाइल टेस्टिंग बढ़ा दी और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने लगा। कई बार लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का भी परीक्षण किया गया। फिलहाल नॉर्थ कोरिया के पास कुल कितनी मिसाइलें हैं, इसका सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक नॉर्थ कोरिया के पास सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और और लंबी दूरी (ICBM) की मिसाइलें शामिल हैं ICBM यानी लंबी दूरी की मिसाइलें ऐसी हैं जो अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। नॉर्थ कोरिया ने ह्वासोंग-15, ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी मिसाइलों की टेस्टिंग की है। इन मिसाइलों की रेंज लगभग 10,000 से 15,000 किलोमीटर तक मानी जाती है। इसका मतलब है कि ये अमेरिका के बड़े हिस्से तक पहुंच सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स यह भी मानती हैं कि नॉर्थ कोरिया के पास करीब 50–100 के आसपास परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें हो सकती हैं, लेकिन यह पक्का आंकड़ा नहीं है। किम जोंग से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… किम जोंग-उन की साउथ कोरिया को चेतावनी, बोले- खतरा हुआ तो ‘पूरी तरह तबाह’ कर देंगे नॉर्थ कोरिया के शासक किम जोंग-उन ने साउथ कोरिया को कड़ी चेतावनी दी है। किम ने कहा है कि उनके देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो वे साउथ कोरिया को ‘पूरी तरह नष्ट’ कर सकते हैं। प्योंगयांग में सात दिन चली वर्कर्स पार्टी कांग्रेस के समापन पर किम ने अगले पांच वर्षों के लिए परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को तेज करने का खाका पेश किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सोने ₹56 रुपए घटा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.39 लाख:चांदी में ₹1 हजार रुपए की तेजी, दाम 2.20 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंचे

सोने ₹56 रुपए घटा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.39 लाख:चांदी में ₹1 हजार रुपए की तेजी, दाम 2.20 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंचे

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 मार्च को मामूली उतार-चढ़ाव है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 56 रुपए गिरकर 1.39 लाख रुपए के करीब है। चांदी में 1093 रुपए की तेजी है। ये 2.20 लाख रुपए प्रति किलो पर है। रिकॉर्ड हाई से 37 हजार रुपए सस्ता हुआ सोना रिकॉर्ड हाई से 1.66 लाख रुपए सस्ती हुई चांदी सोना खरीदते समय इन 2 बातों का ध्यान रखें 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

केरल में एलडीएफ बनाम यूडीएफ: ओपिनियन पोल में 2026 के चुनावों में करीबी मुकाबले की भविष्यवाणी; एनडीए के लिए लाभ | राजनीति समाचार

RBSE Rajasthan Board Shala Darpan 5th, 8th Result 2026: Steps to check. (AI Generated Image)

आखरी अपडेट:मार्च 24, 2026, 12:29 IST वोटवाइब के वोट ट्रैकर ओपिनियन पोल के अनुसार, पिनाराई विजयन मतदाताओं की शीर्ष पसंद बने हुए हैं, कांग्रेस के वीडी सतीसन उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। केरल के सीएम पिनाराई विजयन की फाइल फोटो। (पीटीआई) सीएनएन-न्यूज18 पर विशेष रूप से जारी वोटवाइब के नवीनतम वोट ट्रैकर ओपिनियन पोल के अनुसार, केरल 2026 के बेहद प्रतिस्पर्धी विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ रहा है, जिसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) को कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के साथ कड़ी टक्कर मिल रही है। चुनाव पूर्व सर्वेक्षण के अनुसार, एलडीएफ और यूडीएफ लगभग 36 प्रतिशत मतदाताओं की पसंद होने के साथ एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देते नजर आ रहे हैं। इस बीच, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) करीब 14.9 फीसदी वोट शेयर के साथ बढ़त बनाती दिख रही है, हालांकि उसे कुछ सीटें ही मिल सकती हैं। सर्वेक्षण में एलडीएफ को 140 सदस्यीय विधानसभा में 68-73 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है, जबकि यूडीएफ को 64-70 सीटों पर संतोष करने की उम्मीद है। वहीं, एनडीए को सिर्फ दो सीटों के आसपास ही जीत मिल सकती है। एलडीएफ यूडीएफ एनडीए 71 (+/-3) 67 (+/-3) 2 (+/-1) मतदाताओं की पार्टी प्राथमिकता केरल में चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच है, हालांकि भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) दावेदार बना हुआ है। केरल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाताओं की पार्टी प्राथमिकता यूडीएफ (इंडिया ब्लॉक) एलडीएफ (वाम मोर्चा) एनडीए अन्य अभी तक तय नहीं हुआ कह नहीं सकता 36.6% 36.5% 14.9% 2.2% 6.7% 3.1% 2026 केरल विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को एक ही चरण में होंगे, वोटों की गिनती 4 मई को होगी। और पढ़ें | तमिलनाडु चुनाव 2026: ओपिनियन पोल में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच बहुत कम प्रतिस्पर्धा की भविष्यवाणी की गई है केरल के अगले मुख्यमंत्री की पसंद वोटवाइब के वोट ट्रैकर ओपिनियन पोल के अनुसार, पिनाराई विजयन मतदाताओं की शीर्ष पसंद बने हुए हैं, कांग्रेस के वीडी सतीसन उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। विजयन और सतीसन दोनों 29 प्रतिशत पर बराबरी पर हैं। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर, सीपीएम के केके शैलजा और कांग्रेस के शशि थरूर भी क्रमशः 10.8 प्रतिशत, 9.3 प्रतिशत और 8.4 प्रतिशत वोटों के साथ आगामी केरल विधानसभा चुनावों के लिए मतदाताओं की पसंद बनकर उभरे। 2021 केरल विधानसभा चुनाव 2021 विधानसभा चुनाव में, केरल चुनाव एक ही चरण में आयोजित किए गए थे। एलडीएफ ने 99 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रखकर इतिहास रच दिया – राज्य में लगातार दूसरी बार जीत का दावा करने वाली पहली पार्टी। यूडीएफ 41 सीटों पर कामयाब रही, जबकि एनडीए 11.4 फीसदी वोट हासिल करने के बावजूद अपना खाता खोलने में असफल रही। जगह : केरल, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 24, 2026, 12:29 IST समाचार राजनीति केरल में एलडीएफ बनाम यूडीएफ: ओपिनियन पोल में 2026 के चुनावों में करीबी मुकाबले की भविष्यवाणी; एनडीए के लिए लाभ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

5 साल सड़कें नापी, लाखों दांतों को पढ़ा, भारतीय डेंटिस्ट प‍िल्‍लई ने खोजा ऐसा खजाना, दांत बताएगा, कौन था वो?

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Dentist Success Story: डेंटिस्ट आमतौर पर अस्पतालों में या अपने क्लिनिकों में बैठते हैं और दांतों की बीमारियों का का इलाज करते हैं.आप और हम सभी को यही मालूम है न? लेकिन अहमदाबाद के इन डेंटिस्ट ने असल में बताया है कि एक डेंटिस्ट का काम सिर्फ दांतों की नाप सीधी करना, कैविटी का इलाज करना या दाढ़ निकालना नहीं होता. 23 राज्यों में 37,000 किलोमीटर सड़कें नापने के दौरान अहमदाबाद के रहने वाले गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज और हॉस्पिटल के डॉ. जयशंकर पी. पिल्लई ने 2.2 लाख दांतों की गहन स्टडी की. इस काम में उन्हें पूरे पांच साल लगे, लेकिन इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा बना दिया जो भारत में अभी तक मौजूद नहीं था और आने वाली पीढ़ियां इस पर गर्व करेंगी. डॉ जयशंकर पिल्लई ने एक ऐसा व्यवस्थित नक्शा यानि डेटाबेस तैयार किया है, जिसमें दांतों के माध्यम से यह पता चल जाता है कि देश भर में दांतों में किस तरह के बदलाव होते हैं, और उन बदलावों से किसी व्यक्ति की पहचान और उसके मूल स्थान के बारे में क्या पता चलता है. यानि आपदाओं में खो चुके लोगों को उनके दांतों के माध्यम से पहचाना जा सकता है कि वे कौन थे? महिला थे या पुरुष थे? दांत से ही किसी अपराधी का भी पता चल सकता है कि ये किसका है. इन भारतीय डेंटिस्ट ने जो फॉरेंसिक डेंटल डेटाबेस तैयार किया है उसे न केवल सदियां याद रखेंगी बल्कि इनके काम की बदौलत सदियों पुरानी उलझी गुत्थियों को भी सुलझाया जा सकेगा. यह लाखों दांतों के विश्लेषण के बाद तैयार भारत का शायद सबसे व्यापक फोरेंसिक डेंटल मॉर्फोलॉजी डेटाबेस है. इस काम के लिए उन्हें हाल ही में नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) से PhD की उपाधि मिली है. यह काम भारत में आपदाओं और अपराधों के पीड़ितों की पहचान करने के तरीके को बदल सकता है. क्या है इस फॉरेंसिक डेंटल डेटाबेस में? व्यावहारिक फोरेंसिक के लिहाज से देखें तो डॉ.पिल्लई की वर्गीकरण पद्धति अभी किसी व्यक्ति के मूल क्षेत्र की पहचान करने में 36 फीसदी और सिर्फ दांतों के नमूनों के आधार पर लिंग निर्धारित करने में 63 फीसदी सफलता दर हासिल करती है. उनका मानना ​​है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एक बड़े डेटाबेस के इस्तेमाल से इन दोनों आंकड़ों में काफी सुधार किया जा सकता है. अभी तक भारत का रिकॉर्ड था कमजोरवास्तव में देखें तो डॉ. पिल्लई का काम एक बेहद महत्वपूर्ण कमी को पूरा करता है. कई पश्चिमी देशों की तुलना में भारत का डेंटल रिकॉर्ड डेटाबेस काफी कमजोर है, जिससे फोरेंसिक पहचान करना मुश्किल हो जाता है. जांचकर्ताओं को कभी-कभी डेंटल सबूतों से मिलान करने के लिए लोगों की मुस्कुराती हुई तस्वीरों पर निर्भर रहना पड़ता है. हालांकि एनएफएसयू के कुलपति और डॉ. पिल्लई के डॉक्टोरल गाइड डॉ. जेएम व्यास ने बताया कि आपदा पीड़ितों की पहचान करने में दांत अमूल्य होते हैं. सदियों तक सुरक्षित रहते हैं दांत डॉ. पिल्लई ने कहा कि दांत दशकों और सदियों तक सुरक्षित रह सकते हैं और पहचान के एक भरोसेमंद निशान के तौर पर काम कर सकते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक इस डेटाबेस के आधार पर एक राष्ट्रीय डेंटल रजिस्ट्री स्थापित करने के प्रयास चल रहे हैं. डॉ. पिल्लई ने आगे बताया, ‘मैंने दशकों से ओडोंटोलॉजी (दांतों की संरचना) के फोरेंसिक अनुप्रयोंगों पर बड़े पैमाने पर काम किया है, और इसलिए मैंने भारत के लिए दांतों की एक व्यवस्थित प्रोफाइल तैयार करने का फैसला किया. 2020 से 2025 के बीच, मैंने 23 राज्यों और छह अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से नमूने इकट्ठा किए. कुल विश्लेषण में 2.23 लाख दांतों के मॉर्फोलॉजिकल (आकार-संबंधी) लक्षणों को शामिल किया गया.’ दांतों को लेकर म‍िले अहम सुराग  डॉ. पिल्लई ने हर नमूने का 15 पैमानों पर मूल्यांकन किया. कुछ निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरणों से पूरी तरह मेल खाते थे. ‘दांतों की बनावट कई कारकों पर निर्भर करती है, लेकिन मेरे अध्ययन में, मुख्य ध्यान आनुवंशिक लक्षणों पर था. अलग-अलग जीन पूल के लिए, हमें अलग-अलग विशेषताएं मिलीं. इनमें से कई अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण से भी मेल खाती थीं.’ उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के लिए, ‘कस्प ऑफ कैराबेलि’ एक ऐसी विशेषता है जो कोकेशियाई आबादी में ऊपरी जबड़े के पहले या दूसरे मोलर (दाढ़) पर पाई जाती है .भारत के कुछ हिस्सों में भी देखने को मिली.’ उनके नमूनों में मध्य एशियाई और पश्चिमी यूरोपीय आनुवंशिक आबादी के साथ भी संबंध दिखाई दिए.