सरकार तीनों सेनाओं के ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत अब थल, वायु और नौसेना संयुक्त रूप से थियेटर कमान के तौर पर काम करेंगी। पाकिस्तान से निपटने के लिए वेस्टर्न तो चीन से मुकाबले के लिए नार्दर्न थियेटर कमान होगी। हिंद महासागर के बड़े समुद्री क्षेत्र की रखवाली के लिए मैरीटाइम कमान बनेगी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान की अगुवाई में डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स ने पिछले सैन्य संघर्षों के अनुभवों से सबक लेते हुए इनके ब्लू प्रिंट तैयार किए हैं। इन्हें अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पास भेजेंगे। फिर कैबिनेट समिति मुहर लगाएगी। CDS का विस्तारित कार्यकाल मई अंत में पूरा हो रहा है। सूत्रों ने बताया कि जनरल चौहान के अवकाश ग्रहण करने के बाद CDS के साथ वाइस CDS का पद भी बनेगा। नए रोडमैप के तहत रक्षा बलों का भी विस्तार होगा। इसके अलावा, स्पेस और साइबर कमांड भी गठित करने की योजना है। जल्द मिलेंगी 4 नई फोर्स… देश को डिफेंस जियो स्पेशियली एजेंसी, डेटा, ड्रोन और कॉग्नेटिव वॉरफेयर एक्शन फोर्स मिलेंगी। कॉग्नेटिव फोर्स ह्यूमन माइंड्स के बैटलफील्ड पर काम करेगी। प्रतिद्वंद्वी की सैन्य ताकत को मानसिक स्तर पर प्रभावित करने के तरीके अपनाएगी। वेस्टर्न कमान वायुसेना संभालेगी 10 साल में 5 बार चीन-पाकिस्तान से टकराव सैन्य सूत्रों के अनुसार, एक दशक में पाकिस्तान और चीन के साथ हुए 5 टकरावों से मिले कौशल, चुनौतियों और खामियों को फिल्टर कर नया ढांचा तैयार किया है। इनमें, पाकिस्तान के खिलाफ 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 में 88 घंटे चला ऑपरेशन सिंदूर शामिल है। वहीं, चीन के खिलाफ 2017 के डोकलाम और 2020 के गलवान संघर्ष के सबक शामिल हैं। इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग सेवाओं की स्वतंत्र कार्रवाई में कम्युनिकेशन गैप और रिसोर्स ओवरलैप जैसी समस्याएं सामने आईं। ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार 88 घंटे के भीतर तीनों सेनाओं का कम्पलीट इंटीग्रेशन देखा गया। मिसाइल स्ट्राइक्स, ड्रोन स्वार्म, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और ग्राउंड फोर्स का तालमेल भरपूर रहा। आजादी के बाद सबसे बड़ा सैन्य सुधार रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन के मुताबिक- यह 1947 के बाद सबसे बड़ा सैन्य ओवरहॉल है। मई 2026 में पहली थिएटर कमान सक्रिय होने पर हमारी सेनाएं न सिर्फ जॉइंट होंगी, बल्कि थिएटर-रेडी भी होंगी। ठीक ऑपरेशन सिंदूर के 88 घंटों की तरह। हर थिएटर में साइबर, स्पेस और स्पेशल ऑपरेशंस सब-कमांड होंगी। तीनों सेनाओं का कॉमन सप्लाई चेन और मेंटेनेंस होगा। इंटेलिजेंस फ्यूजन सेंटर्स होंगे। दो मोर्चों पर युद्ध के प्रोटोकोल होंगे। संसाधन साझा करने की ऑटोमैटिक व्यवस्था होगी। हर थिएटर में साल में कम से कम दो फुल-स्केल जॉइंट एक्सरसाइज होंगी। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… 2026 के लिए भारतीय सेना का रोडमैप तैयार, शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म में प्लानिंग ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के साथ 88 घंटे की जंग के विश्लेषण के बाद सेना ने अहम बदलावों की रूपरेखा तैयार की है। सेना ने इसे तीन हिस्सों अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म), मध्यकालिक (मीडियम टर्म) और दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) रणनीति में बांटा है। पूरी खबर पढ़ें…















































