Wednesday, 10 Jun 2026 | 04:50 PM

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DNPA Appoints Puneet Gupta President; Mary Mathew VP

DNPA Appoints Puneet Gupta President; Mary Mathew VP

1 दिन पहले कॉपी लिंक पुनीत गुप्त टाइम्स इंटरनेट के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर हैं। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने टाइम्स इंटरनेट के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर पुनीत गुप्त को अपना नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे मनोरमा ऑनलाइन की CEO मरियम मम्मेन मैथ्यू का स्थान लेंगे, जिनका दो साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। हाल ही में हुई DNPA बोर्ड की बैठक में इस नियुक्ति की पुष्टि की गई। इससे पहले उपाध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके पुनीत गुप्ता डीएनपीए के प्रमुख इनीशिएटिव्स और उद्योग जगत के साथ जुड़ाव में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं, जिससे नेतृत्व का सुचारू रूप से हस्तांतरण संभव हो सका है। DNPA की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण गुप्त ने कहा- AI संचालित दुनिया में कंटेंट की खोज से लेकर इसके मूल्यांकन तक डिजिटल समाचार प्रकाशक अब तक के सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक का सामना कर रहे हैं। DNPA की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। मेरा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर होगा कि हमारे सदस्य न केवल इन परिवर्तनों पर प्रतिक्रिया दें, बल्कि इनसे संबंधित नीति और इंडस्ट्री फ्रेमवर्क में सक्रिय रूप से योगदान भी दें। इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के कार्यकारी निदेशक अनंत गोयनका को DNPA का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जबकि एबीपी ग्रुप के CEO ध्रुबा मुखर्जी कोषाध्यक्ष के रूप में अपने पद पर बने रहेंगे। इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के कार्यकारी निदेशक अनंत गोयनका को DNPA का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। प्रकाशकों का एक साथ आना महत्वपूर्ण गोयनका ने कहा- यह DNPA और भारत में डिजिटल समाचार प्रकाशन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। प्रकाशकों का एक साथ आना, अपने विचार साझा करना और आगे आने वाले अवसरों और चुनौतियों की एक साझा समझ विकसित करना वास्तव में मूल्यवान है। मैं डीएनपीए सदस्यों के साथ इस प्रयास में योगदान देने के लिए उत्सुक हूं। नई टीम की हर सफलता की कामना करती हूं- मैथ्यू अपने कार्यकाल पर के बारे में निवर्तमान अध्यक्ष मरियम मम्मेन मैथ्यू ने कहा- उद्योग के लिए ऐसे महत्वपूर्ण समय में DNPA का नेतृत्व करना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही है। मुझे विश्वास है कि पुनीत के नेतृत्व में DNPA का प्रभाव और परिणाम लगातार बढ़ता रहेगा। मैं नई टीम की हर सफलता की कामना करती हूं। नए अध्याय की शुरुआत DNPA की महासचिव और CEO सुजाता गुप्ता ने कहा कि नेतृत्व में यह परिवर्तन एसोसिएशन के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा, “यह परिवर्तन DNPA के लिए एक रोमांचक नए अध्याय की शुरुआत है। हमने पिछले कुछ वर्षों में विश्वसनीयता, संबंध और ढांचा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो हमें अपने सदस्यों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक रूप से काम करने में सक्षम बनाता है। पुनीत और अनंत के नेतृत्व में, हम इस आधार को ठोस परिणामों में बदलने के लिए अच्छी स्थिति में हैं – नीतिगत मामलों में, निष्पक्ष कॉमर्शियल फ्रेमवर्क पर और यह सुनिश्चित करने में कि डिजिटल समाचार प्रकाशन भारत के सूचना इकोसिस्टम का एक स्थायी और महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे। DNPA प्रौद्योगिकी, नीति और सतत विकास से संबंधित चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए डिजिटल समाचार प्रकाशकों के हितों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। DNPA : DNPA भारत के प्रमुख मीडिया संगठनों की डिजिटल शाखाओं का प्रतिनिधित्व करता है। यह नीतिगत वकालत, उद्योग सहयोग और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र में उभरते अवसरों और चुनौतियों से संबंधित मामलों पर डिजिटल समाचार प्रकाशकों की सामूहिक आवाज के रूप में कार्य करता है। ——————————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

सेलिना जेटली बोलीं- महीनों से बेटों की आवाज नहीं सुनी:बच्चों के 14वें बर्थडे पर इमोशनल पोस्ट की; पति पर लगा चुकीं टॉर्चर के गंभीर आरोप

सेलिना जेटली बोलीं- महीनों से बेटों की आवाज नहीं सुनी:बच्चों के 14वें बर्थडे पर इमोशनल पोस्ट की; पति पर लगा चुकीं टॉर्चर के गंभीर आरोप

बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली इस वक्त अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। एक तरफ जहां वे पति पीटर हाग से तलाक और बच्चों की कस्टडी के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं, वहीं उनके भाई भी यूएई सरकार की हिरासत में हैं। इस तनाव के बीच सेलिना अपने जुड़वां बेटों को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट शेयर कर बताया कि वे महीनों से अपने बच्चों की आवाज तक नहीं सुन पाई हैं। 14वें जन्मदिन पर नहीं देख पाईं चेहरा सेलिना के जुड़वां बेटों विंस्टन और विराज का 14वां जन्मदिन है, लेकिन एक्ट्रेस उनसे कोसों दूर हैं। इंस्टाग्राम पर बच्चों के साथ पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, मेरे प्यारे विंस्टन और विराज, जन्मदिन की शुभकामनाएं। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं तुम्हारे पास नहीं रह पाऊंगी। इतने महीनों से तुम्हारी आवाज नहीं सुनी और न चेहरा देख पाई हूं। एक मां अपने बच्चों को पालने के लिए बहुत कुछ सहती है, आज मैं उस दर्द को अपनी हर सांस में महसूस कर रही हूं। पति पर लगाए गंभीर आरोप सेलिना और उनके पति पीटर हाग के बीच विवाद काफी गहरा चुका है। कुछ महीने पहले भारत लौटने के बाद सेलिना ने मुंबई की एक अदालत में पीटर के खिलाफ घरेलू हिंसा और मारपीट का केस दर्ज कराया था। एक्ट्रेस ने पति पर फिजिकल, सेक्शुअल और इमोशनल एब्यूज के संगीन आरोप लगाए हैं। सेलिना का दावा है कि पीटर उन पर कंपनी के डायरेक्टर्स के साथ संबंध बनाने का दबाव डालते थे और उनके प्राइवेट पार्ट में रॉड डालने तक की धमकी देते थे। 50 करोड़ का मुआवजा और बच्चों की कस्टडी की मांग कानूनी लड़ाई में सेलिना ने पति से 50 करोड़ रुपये का मुआवजा और हर महीने 10 लाख रुपए मेंटेनेंस की मांग की है। इसके साथ ही वे अपने तीनों बेटों विंस्टन, विराज और आर्थर की कस्टडी भी चाहती हैं। फिलहाल ये तीनों बच्चे अपने पिता के साथ ऑस्ट्रिया में रह रहे हैं। सेलिना ने अपने पोस्ट में लिखा कि वे जो कुछ भी कर रही हैं, अपने बच्चों के भविष्य और परिवार को फिर से एक करने के लिए कर रही हैं। भाई भी यूएई की जेल में बंद सेलिना की मुश्किलें सिर्फ पति तक सीमित नहीं हैं। उनके भाई भी इस वक्त यूएई सरकार की हिरासत में हैं, जिन्हें छुड़ाने के लिए वे लगातार प्रयास कर रही हैं। एक्ट्रेस ने अपने पोस्ट के अंत में बच्चों को हिम्मत रखने की सलाह देते हुए लिखा कि चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में रहें, वे हमेशा उनकी मां बनी रहेंगी और यह लड़ाई जारी रखेंगी।

Korean Skin पाने की चाह? बस सुबह-शाम करें ये छोटा सा काम, इस खास पानी से स्किन होगी टाइट, साफ और दमकती

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Last Updated:March 25, 2026, 14:07 IST आज हर कोई साफ और दमकती त्वचा चाहता है, लेकिन महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स या पार्लर ट्रीटमेंट अक्सर नाकाफी साबित होते हैं. ऐसे में चावल का पानी एक आसान और प्राकृतिक उपाय के रूप में सामने आता है. विटामिन B, E और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह घरेलू नुस्खा त्वचा को पोषण देता है, साफ करता है और प्राकृतिक चमक लौटाता है. आज के समय में हर कोई साफ और चमकदार त्वचा चाहता है. इसके लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और पार्लर ट्रीटमेंट पर हजारों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन कई बार इसके बावजूद मनचाहा निखार नहीं मिल पाता है. ऐसे में घरेलू उपाय एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आते हैं. इन्हीं में से एक है चावल का पानी, जिसे त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. नियमित रूप से चावल के पानी से चेहरा धोने से त्वचा की रंगत सुधरती है और प्राकृतिक चमक लौट आती है. दरअसल, रायबरेली जिले के एसबीवीपी इंटर कॉलेज के गृह विज्ञान के प्रवक्ता अरुण कुमार सिंह (एम ए बीएड लखनऊ विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि चावल के पानी में विटामिन B, विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को पोषण देने में मदद करते हैं. यह त्वचा को साफ करता है और जमा गंदगी को हटाने का काम करता है. साथ ही चावल का पानी त्वचा को टाइट करने में भी मददगार होता है, जिससे चेहरे पर कसाव आता है और झुर्रियों की समस्या कम हो सकती है. चावल का पानी तैयार करना बेहद आसान है. इसके लिए आधा कप चावल लें और उसे साफ पानी से हल्का धो लें. इसके बाद एक कटोरी पानी में चावल को 20 से 30 मिनट के लिए भिगोकर छोड़ दें. जब पानी हल्का सफेद हो जाए, तो उसे छानकर अलग कर लें. Add News18 as Preferred Source on Google यही पानी त्वचा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. चाहें तो इसे फ्रिज में रखकर एक-दो दिन तक उपयोग किया जा सकता है. इस्तेमाल करने के लिए सुबह और शाम कॉटन की मदद से चावल के पानी को चेहरे पर लगाएं या सीधे इससे चेहरा धो लें. इसे 10 मिनट तक त्वचा पर रहने दें और फिर साफ पानी से चेहरा धो लें. नियमित उपयोग से त्वचा धीरे-धीरे साफ, मुलायम और चमकदार बनने लगती है. अरुण कुमार सिंह बताते हैं कि चावल का पानी ऑयली स्किन वालों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है. यह अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करता है और मुंहासों की समस्या को कम करने में मदद करता है. वहीं, ड्राई स्किन वालों के लिए यह त्वचा को हाइड्रेट रखने का काम करता है. हालांकि, जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है, उन्हें पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए. अगर किसी तरह की जलन या एलर्जी हो, तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें. इस तरह बिना किसी महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट के सिर्फ चावल के पानी से ही आप अपने चेहरे पर प्राकृतिक निखार ला सकते हैं. नियमित उपयोग से त्वचा स्वस्थ, साफ और दमकती नजर आएगी. First Published : March 25, 2026, 11:20 IST

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

वॉशिंगटन डीसी4 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा युद्ध अब इतना बढ़ गया है कि होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है। इस वजह से सैकड़ों तेल टैंकर दोनों तरफ खड़े हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि वह इस समुद्री रास्ते को ‘किसी भी तरह’ फिर से खोलेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह काम इतना आसान नहीं है। अगर ईरान से कोई समझौता नहीं होता या अमेरिका कोई बड़ा मिलिट्री एक्शन नहीं लेता, तो इस रास्ते पर पूरी तरह से आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। संकरे रास्ते का फायदा उठाता है ईरान ईरान की मजबूती की सबसे बड़ी वजह इस इलाके की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं। ट्रम्प के लिए होर्मुज का हल ढूंढना बहुत मुश्किल ट्रम्प ने इस रास्ते को खोलने के लिए कई बार अलग-अलग दावे कर चुके हैं। एक बार तो उन्होंने यह भी कहा कि वह ईरान के सुप्रीम लीडर के साथ मिलकर इस रास्ते को कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन असल में अमेरिका जिन विकल्पों पर विचार कर रहा है, उनमें ज्यादातर सैन्य कार्रवाई ही शामिल है। अगर अमेरिका सैन्य ताकत से इस रास्ते को खोलना चाहता है, तो सबसे पहले उसे ईरान की हमले की क्षमता खत्म करनी होगी। यानी उसे मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और उन ठिकानों को नष्ट करना होगा जहां से ईरान जहाजों पर हमला कर सकता है। लेकिन अब तक अमेरिका और इजराइल के हजारों हमलों के बावजूद ईरान की यह क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के पास कई जगहों पर मिसाइल बैटरी हो सकती हैं और वे मोबाइल भी होती हैं, यानी उन्हें जल्दी-जल्दी एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसलिए उन्हें ढूंढना और खत्म करना बहुत मुश्किल है। अमेरिकी वॉरशिप भी होर्मुज में सुरक्षित नहीं ट्रम्प ने यह भी कहा है कि जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना के जहाज उनके साथ चल सकते हैं। इसे एस्कॉर्ट ऑपरेशन कहा जाता है। इसमें वॉरशिप टैंकरों के साथ चलेंगे, ऊपर से विमान निगरानी करेंगे, ड्रोन को मार गिराएंगे और तट पर मौजूद मिसाइल ठिकानों पर हमला करेंगे। इसके साथ ही समुद्र में अगर बारूदी सुरंगें (माइंस) बिछाई गई हैं, तो उन्हें हटाने के लिए माइंसवीपर जहाजों को लगाया जाएगा। लेकिन यह सब करना बहुत बड़ा और जटिल सैन्य अभियान होगा। इसमें काफी समय, संसाधन और जोखिम शामिल होंगे। वॉरशिप खुद भी इस इलाके में पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि होर्मुज जैसे संकरे इलाके में जहाजों को चारों तरफ से खतरा रहता है। ड्रोन और मिसाइल से बचाव करना यहां और मुश्किल हो जाता है। समुद्र में बिछी माइंस सबसे बड़ा खतरा सबसे बड़ा खतरा समुद्र में बिछाई गई माइंस से है। अगर पानी में माइंस होने का जरा सा भी शक हो, तो कोई भी देश अपने बड़े जहाज वहां भेजने का जोखिम नहीं उठाएगा। माइंस हटाने का काम बहुत धीमा होता है और इसमें कई हफ्ते लग सकते हैं। इस दौरान जो टीमें माइंस हटाती हैं, उन्हें भी सुरक्षा की जरूरत होती है, क्योंकि वे खुद हमले का आसान निशाना बन सकती हैं। जमीन पर कार्रवाई का विकल्प भी मौजूद है। अमेरिकी मरीन सैनिक इस इलाके की तरफ भेजे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें स्ट्रेट के आसपास के छोटे-छोटे द्वीपों पर तैनात किया जा सकता है, जहां से वे हमले रोकने या एयर डिफेंस सिस्टम लगाने का काम कर सकते हैं। लेकिन ईरान की बड़ी आर्मी को देखते हुए उसके मुख्य इलाके में घुसना बहुत जोखिम भरा होगा। अगर अमेरिकी सैनिक मारे गए या पकड़ लिए गए, तो इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और युद्ध और बढ़ सकता है। मान लें कि अमेरिका किसी तरह इस रास्ते को खोल भी देता है, तब भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। सिर्फ एक मिसाइल या ड्रोन हमला भी फिर से डर पैदा कर सकता है और जहाज कंपनियां दोबारा इस रास्ते से गुजरने से बचेंगी। फारस की खाड़ी में फंसे 500 तेल टैंकर इस समय फारस की खाड़ी में करीब 500 तेल टैंकर खड़े हैं और ज्यादातर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। युद्ध से पहले हर दिन लगभग 80 तेल और गैस के टैंकर इस रास्ते से गुजरते थे। अब जहाज मालिक और बीमा कंपनियां तभी तैयार होंगी जब उन्हें लगेगा कि खतरा काफी कम हो गया है। अगर जोखिम ज्यादा रहा, तो वे इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करेंगे। भले ही अमेरिका बड़ा एस्कॉर्ट ऑपरेशन शुरू कर दे, लेकिन वह एक समय में सीमित जहाजों को ही सुरक्षा दे सकता है। यानी सभी टैंकरों को एक साथ सुरक्षित निकालना संभव नहीं होगा। इसके अलावा, ईरान ने सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट में ही नहीं, बल्कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में भी जहाजों पर हमले किए हैं। इसका मतलब है कि जहाजों को पूरे रास्ते में सुरक्षा देनी होगी, जिससे यह मिशन और लंबा और जटिल हो जाता है। इतना बड़ा सैन्य अभियान अमेरिका की बाकी सैन्य ताकत पर भी दबाव डाल सकता है, क्योंकि उसे अपने संसाधन दूसरे इलाकों से हटाने पड़ सकते हैं। आखिर में विशेषज्ञ यही मानते हैं कि जब तक ईरान की तरफ से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

वॉशिंगटन डीसी4 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा युद्ध अब इतना बढ़ गया है कि होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है। इस वजह से सैकड़ों तेल टैंकर दोनों तरफ खड़े हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि वह इस समुद्री रास्ते को ‘किसी भी तरह’ फिर से खोलेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह काम इतना आसान नहीं है। अगर ईरान से कोई समझौता नहीं होता या अमेरिका कोई खतरनाक मिलिट्री एक्शन नहीं लेता, तो इस रास्ते पर पूरी तरह से आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। संकरे रास्ते का फायदा उठाता है ईरान इसकी सबसे बड़ी वजह इस इलाके की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं। ट्रम्प के लिए होर्मुज का हल ढूंढना बहुत मुश्किल ट्रम्प ने इस रास्ते को खोलने के लिए कई बार अलग-अलग दावे कर चुके हैं। एक बार तो उन्होंने यह भी कहा कि वह ईरान के सुप्रीम लीडर के साथ मिलकर इस रास्ते को कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन असल में अमेरिका जिन विकल्पों पर विचार कर रहा है, उनमें ज्यादातर सैन्य कार्रवाई ही शामिल है। अगर अमेरिका सैन्य ताकत से इस रास्ते को खोलना चाहता है, तो सबसे पहले उसे ईरान की हमले की क्षमता खत्म करनी होगी। यानी उसे मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और उन ठिकानों को नष्ट करना होगा जहां से ईरान जहाजों पर हमला कर सकता है। लेकिन अब तक अमेरिका और इजराइल के हजारों हमलों के बावजूद ईरान की यह क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के पास कई जगहों पर मिसाइल बैटरी हो सकती हैं और वे मोबाइल भी होती हैं, यानी उन्हें जल्दी-जल्दी एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसलिए उन्हें ढूंढना और खत्म करना बहुत मुश्किल है। अमेरिकी वॉरशिप भी होर्मुज में सुरक्षित नहीं ट्रम्प ने यह भी कहा है कि जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना के जहाज उनके साथ चल सकते हैं। इसे एस्कॉर्ट ऑपरेशन कहा जाता है। इसमें वॉरशिप टैंकरों के साथ चलेंगे, ऊपर से विमान निगरानी करेंगे, ड्रोन को मार गिराएंगे और तट पर मौजूद मिसाइल ठिकानों पर हमला करेंगे। इसके साथ ही समुद्र में अगर बारूदी सुरंगें (माइंस) बिछाई गई हैं, तो उन्हें हटाने के लिए माइंसवीपर जहाजों को लगाया जाएगा। लेकिन यह सब करना बहुत बड़ा और जटिल सैन्य अभियान होगा। इसमें काफी समय, संसाधन और जोखिम शामिल होंगे। वॉरशिप खुद भी इस इलाके में पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि होर्मुज जैसे संकरे इलाके में जहाजों को चारों तरफ से खतरा रहता है। ड्रोन और मिसाइल से बचाव करना यहां और मुश्किल हो जाता है। समुद्र में बिछी माइंस सबसे बड़ा खतरा सबसे बड़ा खतरा समुद्र में बिछाई गई माइंस से है। अगर पानी में माइंस होने का जरा सा भी शक हो, तो कोई भी देश अपने बड़े जहाज वहां भेजने का जोखिम नहीं उठाएगा। माइंस हटाने का काम बहुत धीमा होता है और इसमें कई हफ्ते लग सकते हैं। इस दौरान जो टीमें माइंस हटाती हैं, उन्हें भी सुरक्षा की जरूरत होती है, क्योंकि वे खुद हमले का आसान निशाना बन सकती हैं। जमीन पर कार्रवाई का विकल्प भी मौजूद है। अमेरिकी मरीन सैनिक इस इलाके की तरफ भेजे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें स्ट्रेट के आसपास के छोटे-छोटे द्वीपों पर तैनात किया जा सकता है, जहां से वे हमले रोकने या एयर डिफेंस सिस्टम लगाने का काम कर सकते हैं। लेकिन ईरान की बड़ी जमीनी सेना को देखते हुए उसके मुख्य इलाके में घुसना बहुत जोखिम भरा होगा। अगर अमेरिकी सैनिक मारे गए या पकड़ लिए गए, तो इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और युद्ध और बढ़ सकता है। मान लें कि अमेरिका किसी तरह इस रास्ते को खोल भी देता है, तब भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। सिर्फ एक मिसाइल या ड्रोन हमला भी फिर से डर पैदा कर सकता है और जहाज कंपनियां दोबारा इस रास्ते से गुजरने से बचेंगी। फारस की खाड़ी में फंसे 500 तेल टैंकर इस समय फारस की खाड़ी में करीब 500 तेल टैंकर खड़े हैं और ज्यादातर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। युद्ध से पहले हर दिन लगभग 80 तेल और गैस के टैंकर इस रास्ते से गुजरते थे। अब जहाज मालिक और बीमा कंपनियां तभी तैयार होंगी जब उन्हें लगेगा कि खतरा काफी कम हो गया है। अगर जोखिम ज्यादा रहा, तो वे इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करेंगे। भले ही अमेरिका बड़ा एस्कॉर्ट ऑपरेशन शुरू कर दे, लेकिन वह एक समय में सीमित जहाजों को ही सुरक्षा दे सकता है। यानी सभी टैंकरों को एक साथ सुरक्षित निकालना संभव नहीं होगा। इसके अलावा, ईरान ने सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट में ही नहीं, बल्कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में भी जहाजों पर हमले किए हैं। इसका मतलब है कि जहाजों को पूरे रास्ते में सुरक्षा देनी होगी, जिससे यह मिशन और लंबा और जटिल हो जाता है। इतना बड़ा सैन्य अभियान अमेरिका की बाकी सैन्य ताकत पर भी दबाव डाल सकता है, क्योंकि उसे अपने संसाधन दूसरे इलाकों से हटाने पड़ सकते हैं। आखिर में विशेषज्ञ यही मानते हैं कि जब तक ईरान की तरफ से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक इस स्ट्रेट

कुमार सानू के साथ AI फोटो पर भड़कीं कुनिका सदानंद:कहा-शर्म करो, ये आदमी शादीशुदा है, मानहानि केस की चेतावनी दी

कुमार सानू के साथ AI फोटो पर भड़कीं कुनिका सदानंद:कहा-शर्म करो, ये आदमी शादीशुदा है, मानहानि केस की चेतावनी दी

एक्ट्रेस कुनिका सदानंद सिंगर कुमार सानू के साथ AI जनरेटेड फोटो को लेकर भड़क गईं। एक यूजर ने फेक तस्वीर शेयर की, जिसे कुनिका ने गलत बताते हुएपोस्ट हटाने और मानहानि का केस दर्ज करने की चेतावनी दी। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर AI जनरेटेड फोटो शेयर कर कुनिका को टैग करते हुए यूजर ने लिखा, “कृपया मैम, #Sanuncka को भी एक रिप्लाई दे दीजिए।” इस पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए एक्ट्रेस ने लिखा, “शर्म करो, ये आदमी शादीशुदा है और इनके बच्चे भी हैं। कोर्ट ने उन्हें पर्सनैलिटी राइट्स भी दिए हैं। इसके लिए तुम मुश्किल में पड़ सकते हो।” उन्होंने आगे लिखा, “उन्हें या मेरी पर्सनल लाइफ को फैन वॉर में घसीटना बंद करो। किसी व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान करो। मैं तुम्हारे खिलाफ मानहानि की शिकायत कर रही हूं, इसे हटा दो।” बता दें कि कुनिका सदानंद हाल ही में टीवी शो बिग बॉस 19 में नजर आई थीं। उन्होंने बेटा, गुमराह और खिलाड़ी जैसी कई फिल्मों में काम किया है। कुनिका और कुमार सानू रिलेशनशिप में थे सिद्धार्थ कन्नन को दिए एक इंटरव्यू में कुनिका सदानंद ने बताया था कि उनका सिंगर कुमार सानू के साथ छह साल तक रिश्ता रहा। एक्ट्रेस ने कहा था, “मैं चाहती थी कि मैं उनके साथ घर बसाऊं, लेकिन उनका घर पहले से बसा हुआ था और सब ठीक था। हो सकता है कि अगर मैं उनकी पत्नी होती, तो मैं वह सब नहीं कर पाती जो मैंने आज किया है, क्योंकि मेरे काम पर उनकी काफी बंदिशें थीं। जैसे-तुम आउटडोर नहीं जाओगी, तुम दुबई शूटिंग करने नहीं जाओगी। इस तरह की कई पाबंदियां थीं।”

Vande Mataram Not Mandatory for Public Events

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नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गाने के संबंध में MHA के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह निर्देश अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका समय से पहले दायर की गई है और यह भेदभाव की अस्पष्ट आशंका पर आधारित है। CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में वंदेमातरम न गाने पर किसी भी तरह की सजा का प्रावधान नहीं है। बेंच ने कहा- ये दिशानिर्देश केवल एक प्रोटोकॉल हैं और इनका पालन करना अनिवार्य नहीं है। जब दंडात्मक कार्रवाई होगी या इसे गाना अनिवार्य किया जाएगा, तब हम इन सब बातों पर ध्यान देंगे। याचिकाकर्ता का दावा- सलाह देने के बहाने साथ गाने मजबूर किया जाएगा याचिका मुहम्मद सईद नूरी ने दायर की थी। याचिकाकर्ता के वकील संजय हेगड़े ने कहा कि वंदेमातरम गाते समय व्यवधान करने पर सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा- “जो व्यक्ति वंदेमातरम गाने या राष्ट्रगीत के समय खड़े होने से इनकार करता है, उस पर हमेशा बहुत बड़ा बोझ होता है। सलाह देने के बहाने लोगों को साथ गाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।” गणतंत्र दिवस के बाद जारी किए गए थे दिशा-निर्देश गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को एक आदेश जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ, लेकिन मीडिया में इसकी जानकारी 11 फरवरी को आई। आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे। पढ़ें पूरी खबर… बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं। ‘वंदे मातरम’ एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ‘वंदे मातरम’ भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Tech revolution in golf; 80% will be virtual by 2028

Tech revolution in golf; 80% will be virtual by 2028

लंदन29 मिनट पहले कॉपी लिंक गोल्फ के वर्चुअल रूप की शुरुआत लगभग 40 साल पहले जापान में छोटे-छोटे गेम्स से हुई। गोल्फ की दुनिया में एक खामोश लेकिन बड़ा बदलाव आ रहा है। एक प्रमुख खेल टेक्नोलॉजी कंपनी के अनुसार, साल 2028 के अंत तक ब्रिटेन में आउटडोर (मैदान पर) गोल्फ से ज्यादा इंडोर (वर्चुअल) गोल्फ के राउंड खेले जाएंगे। अगले दो वर्षों में दुनिया भर में खेले जाने वाले कुल गोल्फ राउंड्स का 80% हिस्सा वर्चुअल होगा। यह बदलाव अचानक नहीं आया है। गोल्फ के दीवाने देश दक्षिण कोरिया में यह टर्निंग पॉइंट एक दशक पहले ही आ चुका था, जहां ‘स्क्रीन गोल्फ’ ने ‘फील्ड गोल्फ’ को पछाड़ दिया है। वहां 87% गोल्फर वर्चुअल गोल्फ पसंद करते हैं। दिग्गज पेशेवर खिलाड़ी भी इससे अछूते नहीं हैं। टाइगर वुड्स और रोरी मैक्लरॉय का टीजीएल वेंचर 64×53 फीट की विशाल स्क्रीन पर इंडोर गोल्फ को नए स्तर पर ले जा रहा है। वहीं, गेविन मैकफर्सन जैसे खिलाड़ी सिमुलेटर टूर्नामेंट जीतकर ऑस्ट्रेलिया के असली ‘एनएसडब्ल्यू ओपन’ के लिए क्वालिफाई कर रहे हैं। इंडोर गोल्फ की शुरुआत 40 साल पहले जापान से हुई थी। इंडोर गोल्फ की बढ़ती लोकप्रियता का बड़ा कारण मौसम भी है। ब्रिटेन और दुनिया के कई हिस्सों में खराब मौसम गोल्फरों को महीनों तक मैदान से दूर रखता है। ‘पिच गोल्फ’ के सह-संस्थापक क्रिस इंघम कहते हैं कि ब्रिटेन में साल के सिर्फ 5 महीने ही गोल्फ के लिए अच्छे होते हैं, बाकी समय सिमुलेटर ही काम आते हैं। आंकड़ों के अनुसार, अब दुनिया में असली गोल्फ कोर्स की तुलना में ‘ऑफ-कोर्स’ (सिमुलेटर या रेंज पर) खेलने वालों की संख्या अधिक हो गई है। अमेरिका में 2023 में 3.29 करोड़ ऑफ-कोर्स खिलाड़ी थे, जबकि ऑन-कोर्स खिलाड़ी 2.66 करोड़ ही थे। हालांकि, पारंपरिक गोल्फ खत्म नहीं हो रहा है। साल 2025 में ब्रिटेन में 9 करोड़ फुल ऑन-कोर्स राउंड खेले गए, जो पिछले 5 वर्षों में सबसे ज्यादा हैं। दरसअल, 82% पारंपरिक गोल्फर सिमुलेटर का उपयोग अपनी स्विंग सुधारने या दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के लिए कर रहे हैं। सिमुलेटर नए खिलाड़ियों को जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। दुनिया भर में 10.8 करोड़ गोल्फरों (अमेरिका/मैक्सिको को छोड़कर) में से 60% गैर-पारंपरिक गोल्फ खेल रहे हैं और टीनएजर में यह आंकड़ा 80% है। इंग्लैंड में 36% खिलाड़ियों ने असली कोर्स पर जाने से पहले सिमुलेटर पर गोल्फ का अनुभव लिया। इंडोर गोल्फ सिर्फ खेल नहीं, बल्कि सोशल इवेंट बन गया है, जिसमें गोल्फ को बार, म्यूजिक, कॉर्पोरेट इवेंट्स के साथ जोड़ते हैं। जो लोग मुश्किल ऐतिहासिक कोर्स नहीं खेल पाते, उनके लिए आसान वर्चुअल कोर्स बनाए गए हैं। आउटडोर गोल्फ में 5 घंटे लगते हैं, लेकिन सिमुलेटर इसे 1 घंटे में समेट देता है। कुल मिलाकर, इंडोर गोल्फ पारंपरिक खेल का विकल्प नहीं बल्कि उसका विस्तार बनता जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

10g Gold Rs 1.45 Lakh, Silver Rs 2.34 Lakh

10g Gold Rs 1.45 Lakh, Silver Rs 2.34 Lakh

नई दिल्ली38 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी की कीमत में आज यानी 25 मार्च को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 5 हजार बढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 9 हजार बढ़कर 2.34 लाख रुपए पर पहुंच गई है। सोना इस साल ₹ 11 हजार और चांदी ₹ 3 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी देखने को मिली है। बीते साल के आखिर में सोना 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जो अब 1.45 लाख रुपए पर है। यानी इसकी कीमत इस साल अब तक 11 हजार बढ़ चुकी है। वहीं चांदी भी इस दौरान 3 हजार रुपए महंगी हुई है। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल तारीख सोना चांदी 31 दिसंबर 2025 ₹1,33,195 ₹2,30,420 20 जनवरी 2026 ₹1,47,409 ₹3,09,345 10 फरवरी 2026 ₹1,56,255 ₹2,59,100 28 फरवरी 2026 ₹1,59,097 ₹2,66,700 20 मार्च 2026 ₹1,47,218 ₹2,32,364 25 मार्च 2026 ₹1,44,643 ₹2,33,551 नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA एक्सपर्ट की राय: क्या अभी सोने में निवेश सही है? एक्सपर्ट्स के इनुसार, रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोना फिलहाल ‘करेक्शन फेज’ (कीमतों में सुधार) में है। शॉर्ट टर्म में मोमेंटम थोड़ा कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन लॉन्ग टर्म में तेजी का रुझान बरकरार है। ऐसे में निवेशक सोने में थोड़ा-थोड़ा करके निवेश कर सकते हैं। सोना खरीदते समय इन 2 बातों का ध्यान रखें 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आ सकती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

ट्रांसप्लांट में बेकार होने वाले प्रयास AI करेगा 60% कम:एम्स में अंगदान-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर CME 25, देशभर के विशेषज्ञ कर रहे भोपाल में मंथन

ट्रांसप्लांट में बेकार होने वाले प्रयास AI करेगा 60% कम:एम्स में अंगदान-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर CME 25, देशभर के विशेषज्ञ कर रहे भोपाल में मंथन

एम्स भोपाल में 25 मार्च को अंगदान, प्रत्यारोपण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अहम विषयों पर राष्ट्रीय स्तर का सीएमई आयोजित की गई। नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (NAMS) के साथ हो रहे इस कार्यक्रम में न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच दिया, बल्कि भविष्य की हेल्थकेयर दिशा भी तय की गई। खास बात यह है कि इसमें अंगों की कमी, ट्रांसप्लांट सिस्टम की चुनौतियों और AI के जरिए इलाज को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा की जा रही है। कार्यक्रम में एक्सपर्ट ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर फोकस रहेगा। इसमें बताया जाएगा कि AI कैसे बीमारी की पहचान, इलाज के फैसले और रिसर्च को बेहतर बना रहा है। हाल ही में विकसित AI मॉडल जैसे सिस्टम ट्रांसप्लांट में बेकार होने वाले प्रयासों को 60% तक कम कर सकते हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। एम्स में दिनभर चलेगा अकादमिक मंथन कौटिल्य भवन स्थित लेक्चर थिएटर में सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक यह कार्यक्रम चलेगा। इस दौरान एक्सपर्ट भविष्य के ट्रांसप्लांट प्लान को शेयर करेंगे। कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य प्रो. विनोद के. पॉल मुख्य अतिथि होंगे। इसके अलावा पीजीआई चंडीगढ़ के पूर्व निदेशक प्रो. योगेश चावला, मेडांटा के डॉ. अरविंद कुमार, एस्टर अस्पताल के डॉ. सोनल अस्थाना, IIT इंदौर की डॉ. अतरेयी घोष और कई राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। अंगदान और ट्रांसप्लांट पर फोकस पहले सत्र में देश में अंगों की कमी, ट्रांसप्लांट की जरूरत, कानूनी ढांचा और अस्पतालों की तैयारियों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञ बताएंगे कि कैसे अंगदान को बढ़ावा देकर ज्यादा मरीजों को जीवन दिया जा सकता है। पैनल डिस्कशन और ओपन हाउस भी कार्यक्रम में पैनल डिस्कशन, एक्सपर्ट लेक्चर और ओपन हाउस सेशन होंगे। इससे डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को सीधे विशेषज्ञों से सवाल पूछने और अनुभव साझा करने का मौका मिलेगा। स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की पहल एम्स भोपाल के अनुसार यह कार्यक्रम अंगदान को बढ़ावा देने और AI जैसी तकनीकों को अपनाने की दिशा में अहम कदम है। इससे भविष्य में मरीजों को बेहतर, तेज और सटीक इलाज मिल सकेगा।