एम्स भोपाल में 25 मार्च को अंगदान, प्रत्यारोपण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अहम विषयों पर राष्ट्रीय स्तर का सीएमई आयोजित की गई। नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (NAMS) के साथ हो रहे इस कार्यक्रम में न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच दिया, बल्कि भविष्य की हेल्थकेयर दिशा भी तय की गई। खास बात यह है कि इसमें अंगों की कमी, ट्रांसप्लांट सिस्टम की चुनौतियों और AI के जरिए इलाज को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा की जा रही है। कार्यक्रम में एक्सपर्ट ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर फोकस रहेगा। इसमें बताया जाएगा कि AI कैसे बीमारी की पहचान, इलाज के फैसले और रिसर्च को बेहतर बना रहा है। हाल ही में विकसित AI मॉडल जैसे सिस्टम ट्रांसप्लांट में बेकार होने वाले प्रयासों को 60% तक कम कर सकते हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। एम्स में दिनभर चलेगा अकादमिक मंथन कौटिल्य भवन स्थित लेक्चर थिएटर में सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक यह कार्यक्रम चलेगा। इस दौरान एक्सपर्ट भविष्य के ट्रांसप्लांट प्लान को शेयर करेंगे। कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य प्रो. विनोद के. पॉल मुख्य अतिथि होंगे। इसके अलावा पीजीआई चंडीगढ़ के पूर्व निदेशक प्रो. योगेश चावला, मेडांटा के डॉ. अरविंद कुमार, एस्टर अस्पताल के डॉ. सोनल अस्थाना, IIT इंदौर की डॉ. अतरेयी घोष और कई राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ भाग लेंगे। अंगदान और ट्रांसप्लांट पर फोकस पहले सत्र में देश में अंगों की कमी, ट्रांसप्लांट की जरूरत, कानूनी ढांचा और अस्पतालों की तैयारियों पर चर्चा होगी। विशेषज्ञ बताएंगे कि कैसे अंगदान को बढ़ावा देकर ज्यादा मरीजों को जीवन दिया जा सकता है। पैनल डिस्कशन और ओपन हाउस भी कार्यक्रम में पैनल डिस्कशन, एक्सपर्ट लेक्चर और ओपन हाउस सेशन होंगे। इससे डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को सीधे विशेषज्ञों से सवाल पूछने और अनुभव साझा करने का मौका मिलेगा। स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की पहल एम्स भोपाल के अनुसार यह कार्यक्रम अंगदान को बढ़ावा देने और AI जैसी तकनीकों को अपनाने की दिशा में अहम कदम है। इससे भविष्य में मरीजों को बेहतर, तेज और सटीक इलाज मिल सकेगा।
















































