नयारा ने पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 महंगा किया:भोपाल में एक लीटर पेट्रोल ₹112 और डीजल ₹95 का हुआ, कच्चा तेल महंगा होना वजह

ईरान जंग के बीच ‘नायरा एनर्जी’ ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। पेट्रोल 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपए महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद भोपाल में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 111.72 रुपए और डीजल की कीमत 94.88 रुपए पर पहुंच गई है। नायरा एनर्जी की ओर से की गई यह बढ़ोतरी अलग-अलग राज्यों में वहां के लोकल टैक्स और वैट के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। कुछ राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में ₹5.30 प्रति लीटर तक का इजाफा देखा गया है। नायरा के देशभर में करीब 7 हजार पेट्रोल पंप है। प्रमुख शहरों में नायरा के पेट्रोल-डीजल की कीमतें नोट: कीमत रुपए प्रति लीटर में। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हालांकि, सरकारी तेल कंपनियां जैसे IOCL, HP और BP ने दाम नहीं बढ़ाए हैं। केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि हमारे पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। देश में किसी भी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल की कमी नहीं है। इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होगी। प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल महंगा भले ही सामान्य पेट्रोल-डीजल के दाम सरकारी कंपनियों ने न बढ़ाए हों, लेकिन पिछले हफ्ते प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़े थे। इसके अलावा, फैक्ट्रियों और बड़े यूजर्स को बेचे जाने वाले ‘बल्क डीजल’ के दाम 22 रुपए प्रति लीटर बढ़ाए थे। दिल्ली में प्रीमियम पेट्रोल 99.89 रुपए से बढ़कर 101.89 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 50% तक बढ़ गई हैं। ब्रैंड क्रूड की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बशीरहाट में बड़ा चुनावी विवाद, बीएलओ समेत 340 मुस्लिम मतदाताओं के नाम मचा घमासान पर जारी

पश्चिम बंगाल के बशीरहाट उत्तर विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ा विवाद सामने आया है। यहां एक ही मतदान केंद्र से 340 टोकियो का नाम अचानक हटा दिया गया है. सबसे पुरानी बात ये रही कि ये सभी आदिवासी एक ही समुदाय के थे, जिसके बाद इलाके में विरोध शुरू हो गया। यह मामला बशीरहाट के बोरों गोबरा गांव के बूथ नंबर 5 का है। 23 मार्च 2026 को पहली बार मतदाता सूची में पता चला कि जिन 340 लोगों के नाम पहले “अंडर एडजुडिसन” में थे, उन्हें पूरी तरह से हटा दिया गया है। सबसे पुरानी बात यह है कि निकाले गए सभी मुस्लिम लोग सुमदाय से जुड़े हुए हैं, जिससे मामला और संवेदनशीलता हो गई है। बबलो का नाम भी सूची से गायब हो गया इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि बूथ लेवल ऑफिसर (बातओ) मोहम्मद शफ़ीउल आलम का नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। इतना नहीं, उनके परिवार के दो अन्य सदस्यों के नाम की सूची भी नहीं मिली। जबकि बबलो का काम अचल के ही दस्तावेजों की जांच और सत्यापन होता है। नाम उजागर होने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि बिना किसी ठोस कारण के उनके वोट का अधिकार छीन लिया गया है. दस्तावेज़ होने के बावजूद नाम बिलाओ शफ़ीउल आलम का कहना है कि उन्होंने सभी दस्तावेज़ों की स्वयं जांच की और उन्हें डिजिटल रूप में अपलोड किया। उनके मुताबिक ज्यादातर लोगों के पेपर सही थे, फिर भी उनका नाम समझ से परे है। प्रशासन से नहीं मिला पासपोर्ट उत्तर इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि अब उनके स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता। चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) की ओर से भी कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया है। (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बशीरहाट मतदाता सूची विवाद(टी)चुनाव आयोग भारत(टी)पश्चिम बंगाल समाचार(टी)बूथ-स्तरीय अधिकारी(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बशीरहाट वोटर सूची विवाद(टी)चुनाव आयोग भारत(टी)बूथ धारक
रणवीर का पगड़ी में धूम्रपान वाला सीन पूरी तरह फेक:धुरंधर 2 के डायरेक्टर बोले- एआई मॉर्फ्ड तस्वीरें फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

फिल्ममेकर आदित्य धर ने फिल्म धुरंधर 2 को लेकर एआई और फेक एडिट की गई तस्वीरें फैलाने वालों पर सख्त चेतावनी दी। यह बयान ऐसे समय आया जब फिल्म ने 7 दिनों में दुनियाभर में 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर ली। गुरुवार को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए आदित्य धर ने दर्शकों का धन्यवाद किया और कहा कि फिल्म को देश और विदेश में अच्छा रिस्पॉन्स मिला। धर ने यह भी कहा कि कुछ लोग आधिकारिक प्रमोशनल कंटेंट को एआई की मदद से बदलकर गलत जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने एक वायरल तस्वीर का जिक्र किया, जिसमें रणवीर सिंह के किरदार को पगड़ी में धूम्रपान करते दिखाया गया, जिसे उन्होंने पूरी तरह फेक बताया। उन्होंने साफ कहा कि फिल्म में ऐसा कोई सीन नहीं है और यह जानबूझकर फैलाया गया गलत कंटेंट है। उन्होंने कहा कि वह सिख समुदाय का पूरा सम्मान करते हैं और फिल्म में हर चीज को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ दिखाया गया है। धर ने दर्शकों से अपील की कि वे सिर्फ आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और ऐसी भ्रामक खबरों से दूर रहें। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। माधवन ने भी सफाई दी थी इससे पहले आर माधवन को लेकर भी दावा किया गया था कि फिल्म के एक सीन में वे ‘दसम ग्रंथ’ की पंक्तियां बोलते समय सिगरेट पीते हैं। इस पर एक्टर ने वीडियो जारी कर सफाई दी थी। माधवन ने कहा था कि सीन से पहले उन्होंने सिगरेट बुझा दी थी और पूरे सीन में कहीं भी धुआं नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि डायरेक्टर आदित्य धर इस तरह की बातों का खास ध्यान रखते हैं। बता दें कि महाराष्ट्र में सिख इन महाराष्ट्र संगठन के अध्यक्ष गुरजोत सिंह कीर ने फिल्म पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि फिल्म के एक सीन में सिख परंपराओं और दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कंटेंट दिखाया गया। इस मामले में मुंबई के मुलुंड पुलिस थाने में निर्माता और एक्टर आर माधवन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।
Sidhu Moosewala New Song Announcement After Barota Success

सिद्धू मूसेवाला का नया गाना जल्दी रिलीज किया जाएगा। फाइल फोटो। दिवंगत पंजाबी सिंगर सुखदीप सिंह सिद्धू मूसेवाला के फेंस के लिए एक गुड न्यूज है। बरोटा की सफलता के बाद जल्दी ही उनका एक और नया गाना जारी होने वाला है। इसकी जानकारी सिद्धू मूसेवाला इंस्टाग्राम पेज पर दी गई। . इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी लगाई गई है और उस पर संदेश दिया गया है कि जल्दी ही नया गाना आने वाला है। इसके अलावा उसमें बरोटा को पसंद करने के लिए भी फेंस को धन्यवाद कहा गया है। सिद्धू मूसेवाला के नए गीत आने के संकते मिलते हुए उनके प्रशंसकों में भारी उत्साह है। इंस्टाग्राम पर 25 मार्च को यह स्टोरी शेयर की गई है। प्रशंसक अब उनके नए गाने का इंतजार कर रहे हैं। करीब तीन महीने पहले लांच हुआ बरोटा गीत ने नए रिकार्ड बना दिए हैं। यूट्यूब पर जहां इस गीत को 10 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं, वहीं इस पर 1 करोड़ से ज्यादा लोग कमेंट भी कर चुके हैं। कमेंट के मामले में यह गाना दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। सिद्धू मूसेवाला के इंस्टाग्राम पर लगाई गई स्टोरी। मौत को मई में चार साल पूरे होंगे सिद्धू मूसेवाला की मौत को मई में चार साल पूरे हो जाएंगे। उनकी मौत 29 मई 2022 को हुई थी। तब उनकी उम्र महज 28 साल थी। मौत से पहले भी उनके काफी प्रशसंक थे लेकिन मौत के बाद उनके प्रशंसकों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मौत के बाद रिलीज हुए गीतों को मिल रहा भारी समर्थन सिद्धू मूसेवाला की मौत के बाद करीब 12 गीत रिलीज हो चुके हैं। मूसेवाला के गीत जैसे ही यू-ट्यूब पर अपलोड होते हैं उनके प्रशसंक टूट पड़ते हैं। व्यूज व कमेंट करके हर बार नया रिकार्ड बना देते हैं। बरोटा के बाद अब प्रशसंकों को नए गीत का इंतजार है। सिद्धू मूसेवाला की मौत के बाद रिलीज हुए गीत एसवाईएल (SYL): 23 जून 2022, 50M+ (हटने से पहले), 10 लाख+ कमेंट वार (Vaar): 8 नवंबर 2022, 54M+ व्यू, 5–8 लाख+ कमेंट मेरा ना (Mera Na): 2023 (जुलाई के आसपास), 100M+ व्यू, 10 लाख+ कमेंट चोरनी (Chorni): 2023, 60M+ व्यू, 5 लाख+ कमेंट वॉच आउट (Watch Out): 11 नवंबर 2023, 53M+ व्यू , 4-6 लाख+ कमेंट ड्रिप्पी (Drippy): 2 फरवरी 2024, 90M+ व्यू, 6-8 लाख+ कमेंट 410 (चार सौ दस): 11 अप्रैल 2024, 57M+ व्यू , 4-6 लाख+ कमेंट अटैच (Attach): 30 अगस्त 2024, 30M+ व्यू, 3-5 लाख+ कमेंट लॉक (Lock): जनवरी 2025, 8M, 1-2 लाख+ कमेंट 008 (डबल जीरो जीरो एट) : 10 जून 2025, 49M+ व्यू, 5-7 लाख+ कमेंट बारोटा (Barota) : 2025 (लेटेस्ट), 100M+ व्यू , 10 मिलियन+ (बहुत ज्यादा एंगेजमेंट)
डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने हार के बाद दिया इस्तीफा:पर्यावरण की चिंता के चलते छोड़ दिया था मेकअप, ट्रम्प को भी चुनौती दे चुकीं मेटे

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन (48) ने आम चुनाव में हार के बाद इस्तीफा दे दिया है। बुधवार को मतगणना में उनकी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी को महज 38 सीटें मिलीं। हालांकि, अभी वहां किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ है। मेटे जून 2019 से डेनमार्क की प्रधानमंत्री थीं और 2022 में दोबारा सत्ता में लौटी थीं। वे 41 की उम्र में पद संभालने वाली देश की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री बनी थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से ग्रीनलैंड के मुद्दे पर बेबाकी से लेकर सादगी तक के उनके कई किस्से हैं। मेटे बचपन से ही शांत और संकोची रहीं। बोलने में हकलाहट के कारण स्कूल में बच्चे उनका मजाक उड़ाते थे। उन्हें लंबे समय तक स्पीच थेरेपी लेनी पड़ी। वे 90 के दशक में पर्यावरण और पशु अधिकारों को लेकर वे बेहद आक्रामक रहीं। कॉस्मेटिक कंपनियों द्वारा जानवरों पर परीक्षण के विरोध में उन्होंने मेकअप प्रोडक्ट इस्तेमाल करना ही छोड़ दिया। उनका मानना था कि जानवरों को दर्द देकर सुंदरता पाना गलत है। इसी दौर में उन्होंने ‘जेंस’ नाम की एक व्हेल को प्रतीकात्मक रूप से गोद लिया और अपनी पॉकेट मनी से समुद्री संरक्षण संस्था को राशि देकर उसकी सुरक्षा, ट्रैकिंग और प्राकृतिक आवास बचाने में सहयोग किया। 2012 में रोजगार मंत्री रहते हुए मेटे साधारण कपड़ों और फ्लैट जूतों में बच्चों को साइकिल से स्कूल छोड़ने जाती थीं। तब जनता में उनकी सादगी के खूब चर्चे होते थे। मेटे अपनी बेबाक जवाब के लिए मशहूर हैं। जनवरी 2026 में ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद पकड़ ली। जवाब में झुकने के बजाय मेटे ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए डेनिश कमांडो और सैनिक तैनात कर दिए। उन्होंने दो टूक कहा, ‘डेनमार्क बिकाऊ नहीं है। अगर अमेरिका नाटो सहयोगी पर हमला करता है, तो सब खत्म हो जाएगा।’ ट्रम्प की धमकी ने उल्टा मेटे की लोकप्रियता बढ़ाई। महिलाओं की पहचान और आत्मविश्वास पर मेटे कहती हैं, अगर लड़कियां खुद को कमतर आंकना छोड़ दें और भरोसे के साथ खड़ी हों, तो वे दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकती हैं। 15 की उम्र में शरणार्थी को बचाने में टूट गई थी नाक की हड्डी मेटे बचपन से ही निडर रहीं। 15 की उम्र में अल्बोर्ग में उन्होंने कुछ लड़कों को एक शरणार्थी को परेशान करते देखा तो अकेले ही भिड़ गईं। इसी दौरान एक लड़के ने नस्लवादी अपशब्द कहते हुए उनके चेहरे पर मुक्का मारा, जिससे उनकी नाक की हड्डी टूट गई। इसके बाद उन्हें अस्तपताल में भर्ती होकर इलाज करवाना पड़ा। मेटे कहती हैं, यह चोट डर नहीं, उनके साहस की पहचान थी।
भांग दुकानों के लाइसेंस के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू:मैहर-अमरपाटन में दो दुकानों के लिए 27 मार्च को खुलेंगे टेंडर

मैहर में साल 2026-27 के लिए भांग की फुटकर दुकानों के लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जिला आबकारी विभाग ने इच्छुक लोगों से टेंडर मंगाए हैं। यह लाइसेंस 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक के लिए रहेगा। मैहर और अमरपाटन में मिलेंगे लाइसेंस जानकारी के मुताबिक मैहर और अमरपाटन में दो दुकानों के लिए लाइसेंस जारी किए जाएंगे। इन दोनों दुकानों का कुल आरक्षित मूल्य 25 लाख 16 हजार 489 रुपए रखा गया है। वहीं, आवेदन करने के लिए 10 प्रतिशत यानी 2 लाख 51 हजार 649 रुपए की अमानत राशि तय की गई है। 27 मार्च से शुरु होगी प्रक्रिया टेंडर की प्रक्रिया 27 मार्च 2026 को कलेक्ट्रेट सभागार मैहर में होगी। दोपहर 3:30 बजे से टेंडर खोले जाएंगे। टेंडर फॉर्म 25 मार्च से 27 मार्च दोपहर 2 बजे तक मिलेंगे। आवेदन जमा करने की आखिरी समय सीमा 27 मार्च दोपहर 3 बजे रखी गई है। जिला आबकारी विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि जो लोग आवेदन करना चाहते हैं, वे तय समय के अंदर प्रक्रिया पूरी कर लें। ज्यादा जानकारी के लिए जिला आबकारी कार्यालय मैहर से संपर्क किया जा सकता है।
कश्मीर में ईरान के लिए ₹18 करोड़ चंदा जुटाया गया:बड़गाम जिला सबसे आगे, सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी फंडिंग में इस्तेमाल की आशंका

कश्मीर घाटी में ईरान के समर्थन में करोड़ों रुपए का चंदा जुटाया गया है। इससे देश की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। आशंका है कि इन पैसों का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग में हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक 17.91 करोड़ रुपए चंदा जुटाया गया है। इनमें से 85% राशि शिया समुदाय ने दान की है। कश्मीर का बड़गाम शिया बहुल इलाका है। यहां से करीब 9.5 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं। यह फंडरेजिंग अभियान जकात और सदका के जरिए लिया जा रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा संघर्ष से प्रभावित ईरानी नागरिकों की मदद करना बताया गया है। ईरानी दूतावास ने बैंक अकाउंट और क्यूआर कोड शेयर किया सूत्रों के मुताबिक भारत में ईरानी दूतावास ने सीधे पैसे ट्रांसफर करने के लिए एक विशेष बैंक अकाउंट भी खोला है, जिसमें UPI के जरिए भुगतान की सुविधा दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि चंदे की राशि और बढ़ सकती है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे सीधे दूतावास के आधिकारिक माध्यमों से ही पैसा भेजें, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। खुफिया सूत्रों ने यह भी बताया कि पहले भी चैरिटी के नाम पर जुटाए गए फंड के दुरुपयोग के मामले सामने आ चुके हैं। खुफिया एजेंसियों ने फंड की निगरानी बढ़ाई खुफिया एजेंसियां फंड की निगरानी कर रही हैं। उनका कहना है कि चंदे का कुछ हिस्सा गलत हाथों में जा सकता है या उसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। अधिकारियों ने माना कि लोगों की भावना सही हो सकती है, लेकिन बिचौलिये और बिना सत्यापन वाले संगठन पारदर्शिता को प्रभावित कर सकते हैं। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ शिया धार्मिक नेता और संगठन विभिन्न गतिविधियों के लिए ईरान से आर्थिक सहायता प्राप्त करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त निगरानी न होने पर इस तरह के फंड का इस्तेमाल राजनीतिक या अन्य गतिविधियों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
‘सपा का ल्यारी राज’: लखनऊ में पोस्टरों में ‘धुरंधर’ और पाकिस्तान संदर्भ के साथ अखिलेश यादव पर निशाना | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:26 मार्च, 2026, 12:36 IST पोस्टरों में समाजवादी पार्टी सरकार की तुलना पाकिस्तान के ल्यारी से की गई, जो अक्सर अपराध और अशांति से जुड़ा क्षेत्र है। लखनऊ में सामने आए ‘ल्यारी राज’ के पोस्टर, सपा के 2012-17 शासन पर हमला उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के शासन की तुलना पाकिस्तान के “ल्यारी राज” से करते हुए लखनऊ भर में पोस्टर सामने आए हैं, जिसमें फिल्म में इसके चित्रण के संदर्भ में अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया है। धुरंधर. यह घटनाक्रम परवेश वर्मा के एक अलग राजनीतिक तंज के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए धुरंधर फिल्म के चरित्र, गैंगस्टर रहमान डकैत का संदर्भ दिया था। ल्यारी कराची, पाकिस्तान में सबसे पुराने और सबसे अधिक आबादी वाले आवासीय इलाकों में से एक है। ‘ल्यारी राज’ तुलना पोस्टरों में समाजवादी पार्टी सरकार की तुलना पाकिस्तान के ल्यारी से की गई, जो अक्सर अपराध और अशांति से जुड़ा क्षेत्र है। नारे में लिखा था, ‘सपा का ल्यारी राज- न हम भूले हैं, न भूलेंगे।’ वीवीआईपी गेस्ट हाउस और शहर के अन्य प्रमुख इलाकों के पास कई पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे तुलना व्यापक रूप से दिखाई दे रही है। पोस्टरों में 2012 और 2017 के बीच अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार के दौरान महिलाओं के खिलाफ कथित अपराधों और भू-माफियाओं के उदय पर प्रकाश डाला गया है। राजनीतिक प्रतिक्रिया अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए, देवेंद्र ने कहा, “जैसे ल्यारी में आतंक था, वैसे ही 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश में ‘गुंडा राज’ था।” उन्होंने आगे कहा, “जब अतीक अहमद के कथित आतंकी संबंध सामने आए तो सपा नेता बौखला गए।” पहले प्रकाशित: 26 मार्च, 2026, 12:36 IST समाचार राजनीति ‘सपा का ल्यारी राज’: लखनऊ में पोस्टरों में ‘धुरंधर’ और पाकिस्तान संदर्भ के साथ अखिलेश यादव पर निशाना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ल्यारी(टी)ल्यारी पाकिस्तान(टी)ल्यारी गैंगवार(टी)ल्यारी गैंगस्टर(टी)धुरंधर(टी)पाकिस्तान(टी)अखिलेश यादव(टी)समाजवादी पार्टी ल्यारी(टी)सपा का ल्यारी राज
Pakistan Afghanistan War Ceasefire Violence Update; PAK Army

काबुल/इस्लामाबाद3 घंटे पहले कॉपी लिंक पाकिस्तानी एयरफोर्स ने 17 मार्च की रात काबुल में एयरस्ट्राइक की थी। अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर बुधवार को फिर से लड़ाई शुरू हो गई। अफगान तालिबान अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 2 आम नागरिकों की मौत हो गई और 8 घायल हो गए। वहीं पाकिस्तान का भी एक नागरिक मारा गया। अफगानिस्तान और पाकिस्तान ने मिलकर ईद को लेकर 5 दिनों का अस्थायी युद्धविराम घोषित किया था। 25 मार्च को सीजफायर खत्म होने के बाद दोनों देशों में फिर से झड़प शुरू हो गई। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक एक अफगान अधिकारी ने बताया कि युद्धविराम खत्म होते ही पाकिस्तानी सेना ने नरई और सरकानो इलाकों में दर्जनों तोप के गोले दागे। उन्होंने कहा कि जवाब में अफगान सीमा बलों ने भी गोलीबारी की और तीन पाकिस्तानी सैन्य चौकियों को तबाह कर दिया, इस हमले में 1 व्यक्ति मारा गया। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 17 मार्च को हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद पाकिस्तानी एयर फोर्स ने काबुल के कई इलाकों में मिसाइल हमले किए थे। पाकिस्तान के हमले में 400 लोगों की मौत हुई थी यह हिंसा उस समझौते के करीब एक हफ्ते बाद हुई है, जिसमें दोनों देशों ने लड़ाई रोकने पर सहमति जताई थी। यह समझौता सऊदी अरब, तुर्किये और कतर के कहने पर हुआ था। इससे पहले पाकिस्तान ने 17 मार्च की रात अफगानिस्तान में हवाई हमले किए थे। अफगान तालिबान सरकार का दावा है कि इन हमलों में काबुल के एक नशा मुक्ति अस्पताल को निशाना बनाया गया, जिसमें 400 से ज्यादा लोग मारे गए थे। हालांकि पाकिस्तान ने नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार किया है और कहा है कि उसने एक गोला-बारूद के भंडार पर हमला किया था। मीडिया और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में नशा मुक्ति केंद्र पर हमले की बात सामने आई, लेकिन पाकिस्तान की सेना ने किसी नागरिक के मारे जाने की बात स्वीकार नहीं की। इसके बजाय पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने आरोप लगाया कि तालिबान नशे के आदी लोगों को आत्मघाती हमलों के लिए इस्तेमाल करता है। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया। अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में पाकिस्तान के हमले के बाद तालिबान के सुरक्षाकर्मी एक तबाह कार के पास से गुजरते दिखे। TTP ने भी 3 दिनों का सीजफायर तोड़ा इधर, पाकिस्तान तालिबान यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने भी कहा है कि उसने ईद के 3 दिन के अपने युद्धविराम के बाद पाकिस्तान के अंदर हमले फिर से शुरू कर दिए हैं। TTP, अफगान तालिबान से अलग है लेकिन उसके साथ जुड़ा हुआ है। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से TTP ने पाकिस्तान में अपने हमले बढ़ा दिए हैं। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने TTP को आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। पाकिस्तान का आरोप है कि काबुल TTP के नेताओं और हजारों लड़ाकों को पनाह दे रहा है, जो सीमा पार से हमले करते हैं। हालांकि अफगानिस्तान इस आरोप को खारिज करता है। पाकिस्तान ने साफ कहा है कि जब तक अफगान तालिबान सरकार यह भरोसा नहीं देती कि उसकी जमीन का इस्तेमाल आतंकी हमलों के लिए नहीं होगा, तब तक वह TTP और उसके समर्थकों को अफगानिस्तान के अंदर निशाना बनाता रहेगा। PAK का भारत पर आतंक फैलाने का आरोप पाकिस्तान का कहना है कि यह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई है। उसके मुताबिक देश में आतंकी हमले बढ़े हैं और 2025 पिछले एक दशक का सबसे हिंसक साल रहा। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तालिबान अपने यहां ऐसे समूहों को पनाह देता है, जो पाकिस्तान में हमले करते हैं, और भारत पर भी ऐसे संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाता है। भारत और तालिबान दोनों ही इन आरोपों से इनकार करते हैं और कहते हैं कि पाकिस्तान में होने वाले हमले उसका आंतरिक मामला हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान में गुस्सा बढ़ता गया है। अक्सर किसी हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान के मंत्री इसका ठीकरा अफगानिस्तान पर फोड़ देते हैं, जिस पर तालिबान कड़ा जवाब देता है। अब पाकिस्तान का कहना है कि बातचीत के लिए कुछ बचा नहीं है। वहीं तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तान, अमेरिका जैसे देशों के साथ मिलकर अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने सीमा के पास सेना से जुड़े एक स्कूल को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले के लिए अफगान नागरिकों को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों? 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
‘बंगाली हिंदुओं के लिए अस्तित्व का संकट’: कैसे आरएसएस बंगाल चुनाव को ‘अस्तित्व’ की लड़ाई बता रहा है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:26 मार्च, 2026, 12:05 IST चुनाव को अस्तित्व के संघर्ष के रूप में पेश करके, आरएसएस पारंपरिक सत्ता-विरोधी या विकास संबंधी बहसों को दरकिनार करने का प्रयास करता हुआ प्रतीत होता है। हाल के राज्य चुनावों में, आरएसएस ने भाजपा के चुनावी इंजन के लिए अंतिम बूथ-स्तरीय स्नेहक के रूप में कार्य किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने लगभग 250 निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 1.75 लाख मतदाता जागरूकता अभियान बैठकों के साथ, बंगाल में हर सामाजिक स्तर में प्रवेश करने के लिए 14 सहयोगी निकायों को सक्रिय किया है। ज़मीनी स्तर पर पहुंच से लेकर रामनवमी के माध्यम से बड़े पैमाने पर लामबंदी और अब शुक्रवार को एक केंद्रित प्रयास, संघ ने एक उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित किया है – ‘बंगाली हिंदुओं’ को बचाने के लिए अपने संघर्ष को शक्ति प्रदान करना। सुर्खियां बटोरने वाली रैलियों या हाई-डेसीबल भाषणों से दूर, संघ की रणनीति लगभग व्यवस्थित दिखती है। आरएसएस के एक सूत्र ने कहा, लगभग 250 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 700 लोकमत परिषद (जनमत का स्पष्टीकरण और मतदाता जागरूकता अभियान) बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं। ऐसी बैठकों को आम तौर पर वर्तमान राजनीतिक माहौल को महज सत्ता परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि ‘अस्तित्व की लड़ाई’ के रूप में प्रस्तुत करके हिंदू वोटों को मजबूत करने के एक नैदानिक प्रयास के रूप में देखा जाता है। यह अब पूर्ण पैमाने पर आर्केस्ट्रा युद्धाभ्यास में परिवर्तित हो गया है। इस लामबंदी के मूल में पहचान की तीव्र अभिव्यक्ति निहित है। आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रचार प्रमुख (प्रवक्ता) जिष्णु बोस ने कहा, “हमारा आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं है। बंगाली हिंदू यहां अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे हैं। अस्तित्व और जीवित रहने के लिए यह हमारा संघर्ष है।” संजाल आरएसएस की रणनीति विकेंद्रीकृत है, फिर भी गहराई से एकीकृत है। बंगाल को तीन रणनीतिक क्षेत्रों में विभाजित किया गया है – उत्तर बंगा (दार्जिलिंग से मालदा तक फैला हुआ), मध्य बंगा (मुर्शिदाबाद से हुगली तक), और दक्षिण बंगा (हुगली से सागर तक)। इस वर्ष संघ के प्रकाशित दस्तावेज़ के अनुसार, संगठन राज्य भर में कम से कम 4,325 शाखाएँ चला रहा है, जिनमें उत्तर बंग में 1,127, मध्य बंग में 1,881 और दक्षिण बंग क्षेत्र में 1,317 शाखाएँ शामिल हैं। उनकी उपस्थिति का व्यापक पैमाना राम नवमी के प्रकाशिकी में परिलक्षित होता है, जिसमें 2025 में उत्तर बंगाल में 10,000 स्थानों पर, मध्य में 7,000 और दक्षिण में 12,000 स्थानों पर जुलूस देखे गए। संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि ऐसे जुलूसों की संख्या पिछले साल की तुलना में अधिक होगी। इस उछाल के पीछे 14 संबद्ध और संबद्ध संगठनों का हाथ है, जिनमें एबीवीपी की छात्र शक्ति से लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) का श्रमिक प्रभाव शामिल है। भारतीय किसान संघ के कृषि क्षेत्रों से लेकर लघु उद्योग भारती के तहत औद्योगिक एसएमई तक, संघ हर जनसांख्यिकीय तंत्रिका को छू रहा है। यहां तक कि संवेदनशील सीमावर्ती जिलों पर भी सीमांत चेतना मंच द्वारा निगरानी रखी जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राष्ट्रीय सुरक्षा की कहानी मतदाताओं के दिमाग में सामने और केंद्र में रहे। उत्तरजीविता आख्यान चुनाव को अस्तित्व के संघर्ष के रूप में पेश करके, आरएसएस पारंपरिक सत्ता-विरोधी या विकास संबंधी बहसों को दरकिनार करने का प्रयास कर रहा है, और उन्हें सांप्रदायिक सुरक्षा या बदलती जनसांख्यिकी की धारणा के लिए मौलिक आग्रह के साथ प्रतिस्थापित कर रहा है। यह एक मनोवैज्ञानिक धुरी है जिसे मतदाता को यह महसूस कराने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि उनकी पहचान तत्काल खतरे में है। हालाँकि, एक महत्वपूर्ण प्रश्न बना हुआ है – क्या यह संगठनात्मक दिग्गज वास्तव में भाजपा के लिए लड़ाई का रुख मोड़ सकता है? हाल के राज्य चुनावों में, आरएसएस ने भाजपा के चुनावी इंजन के लिए अंतिम बूथ-स्तरीय स्नेहक के रूप में कार्य किया। बंगाल में चुनौती अनोखी है. जबकि आरएसएस शाखाओं और जुलूसों के मामले में तेजी से बढ़ा है, उसे टीएमसी मशीनरी का सामना करना पड़ रहा है जो स्थानीय धरती पर समान रूप से मजबूत है। संघ की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या इसकी अस्तित्ववादी लड़ाई की कहानी बंगाल की उप-क्षेत्रीय पहचान और कल्याण राजनीति के दुर्जेय किले को भेद सकती है। पहले प्रकाशित: 26 मार्च, 2026, 12:05 IST समाचार चुनाव ‘बंगाली हिंदुओं के लिए अस्तित्व का संकट’: कैसे आरएसएस बंगाल चुनाव को ‘अस्तित्व’ की लड़ाई बता रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें









