महिला का शव लटका मिला, बच्ची के मुंह में ढूंसी:गुना में मां बोली- ससुराल वाले करते थे मारपीट, बेटी ने लगाई फांसी

गुना के नानाखेड़ी इलाके में एक नवविवाहिता का शव फांसी फंदे पर लटका मिला। उसकी नाबालिग बेटी के मुंह में रुई ठूंस हुई थी। उसकी भी हालत बिगड़ गई। बच्ची को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं महिला के शव का पोस्टमार्टम किया गया। मिली जानकारी के अनुसार कीर्ति कुशवाह(26) की शादी नानाखेड़ी में रहने वाले नीतीश से हुई थी। दंपत्ति को दस महीने की बेटी है। शादी के कुछ समय तक तो सब ठीक था, लेकिन कुछ समय पहले से पति पत्नी के बीच अक्सर विवाद होते थे। परिवार पर एक लाख रुपए बिजली बिल बकाया था, जिस कारण उनके घर की बिजली काट दी गई थी। इस बात को लेकर भी अक्सर विवाद होता था। जेठानी मंदिर गई थी शुक्रवार सुबह कीर्ति ने अपनी जेठानी के साथ पूजा अर्चना की। इसके बाद वह अपनी बेटी को खाना खिला रही थी। बताया गया है कि कुछ देर बाद उसकी जेठानी मंदिर चली गई। इसी दौरान कीर्ति ने अपनी बच्ची के मुंह और नाक में रुई ठूंस दी। इसके बाद खुद ने घर में ही फंदा लगाकर उस पर झूल गई। जैसे ही उसकी जेठानी वापस लौटी, वह फंदे पर लटकी हुई मिली। वहीं बच्ची जमीन पर बेसुध पड़ी थी। पड़ोसियों ने आकर कीर्ति को फंदे से नीचे उतारा। साथ ही बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने कीर्ति की मृत घोषित कर दिया। वहीं उसकी बेटी का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। उसकी स्थिति गंभीर है। दोनों पक्ष हुए आमने सामने कीर्ति के ससुराल वाले और मायके वाले दोनों अस्पताल में आने सामने हो गए। उसकी सास ने कहा कि घटना के समय वह मंडी में गई हुई थी। उस दौरान उसकी दोनों बहुएं आंगन में ही बैठी थीं। कीर्ति बच्ची को खाना खिला रही थी। बड़ी बहु मंदिर चली गई। इसी दौरान उसने फांसी लगा ली। वहीं उसकी मां का कहना है कि ससुराल वाले बच्ची को लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। उसके साथ मारपीट की जा रही थी। इनकी वजह से ही उसकी बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
चेहरा छुपाकर थिएटर पहुंचीं एक्ट्रेस यामी गौतम:बहन सुरीली के साथ देखी धुरंधर 2; अपने कैमियो रोल को देखकर शर्माईं

आदित्य धर की पत्नी और एक्ट्रेस यामी गौतम छुपकर थिएटर में धुरंधर 2 देखने पहुंची हैं। फिल्म की सफलता के बीच एक्ट्रेस यामी गौतम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यामी अपनी बहन सुरीली गौतम के साथ गुपचुप तरीके से सिनेमाघर में यह फिल्म देखने पहुंचीं। खास बात यह रही कि थिएटर दर्शकों से भरा हुआ था, लेकिन किसी को पता नहीं चला कि उनके बगल में खुद फिल्म की एक्ट्रेस बैठी हैं। पहचाने ना कोई, इसलिए छुपाया चेहरा यामी गौतम ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह थिएटर के अंदर बैठी नजर आ रही हैं। पहचान छुपाने के लिए यामी ने अपना चेहरा कवर कर रखा था। वीडियो में वह अपनी बहन सुरीली को इशारा करके चुप रहने को कह रही हैं ताकि आस-पास के लोग उन्हें पहचान न लें। सुरीली ने की आदित्य धर की तारीफ यामी गौतम की बहन सुरीली गौतम ने इस फिल्म को ‘मास्टरपीस’ बताया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा, “एक बार फिर आदित्य धर को सलाम। हमें आप पर गर्व है। आपकी सफलता का जश्न मनाते हुए हम बहुत खुश हैं।” सुरीली ने अपनी बहन यामी को अपनी ‘ताकत और लक’ बताते हुए उन्हें ढेर सारा प्यार दिया। यामी ने भी बहन का शुक्रिया अदा किया और वीडियो में अपने कैमियो (विशेष भूमिका) को देखकर शरमाती नजर आईं। 8 दिनों में कमाए 1,080 करोड़ ‘धुरंधर: द रिवेंज’ सिर्फ कमाई ही नहीं कर रही, बल्कि इतिहास रच रही है। रिलीज के महज 8 दिनों के अंदर इस फिल्म ने कुल 32 रिकॉर्ड्स तोड़ दिए हैं। फिल्म ने 8 दिनों में वर्ल्डवाइड 1,080 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। वहीं, भारत में पहले हफ्ते में फिल्म ने 674.17 करोड़ का नेट कलेक्शन और 805.32 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन किया है।
रुपया 94.7 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर:इस वित्त वर्ष डॉलर के मुकाबले 10% गिरा, 14 साल का रिकॉर्ड टूटा; विदेशी सामान महंगे होंगे

भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.7 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और एनर्जी सप्लाई चैन में आई रुकावटों के कारण भारतीय रुपए में यह गिरावट दर्ज की गई। पिछले एक महीने में ही रुपया करीब 4% टूट चुका है, जबकि इस फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में इसमें 10% से ज्यादा की गिरावट आई है। यह पिछले 14 सालों की सबसे बड़ी गिरावट है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान जंग जारी रही तो रुपया जल्द ही 98 के स्तर तक जा सकता है। 2011-12 के बाद रुपए में सबसे बड़ी गिरावट भारत का वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च तक चलता है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, 14 साल में यह पहली बार है, जब रुपया एक ही साल में इतना ज्यादा गिरा है। इससे पहले साल 2011-12 में यूरोजोन संकट के दौरान रुपए में करीब 14% की गिरावट आई थी। वहीं, 31 मार्च 2025 से अब तक रुपया अपनी वैल्यू से 10% तक गिर चुका है। डॉलर महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ेगी मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष को पिछले कई दशकों का सबसे गंभीर एनर्जी संकट माना जा रहा है। इसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। तेल की कीमतें: कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ गया है। जरूरी सामान महंगा: LPG से लेकर प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित हुई है। महंगाई का डर: डॉलर महंगा होने से भारत में पेट्रोल-डीजल और इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे, जिससे रिटेल महंगाई बढ़ने का खतरा है। विदेश में पढ़ाई और घूमना महंगा: अगर आप विदेश जाने की योजना बना रहे हैं या आपका कोई बाहर पढ़ रहा है, तो आपको डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे माल के दाम: मोबाइल, लैपटॉप और विदेश से आने वाले अन्य पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि कंपनियां इनका भुगतान डॉलर में करती हैं। क्या रुपया 98 प्रति डॉलर तक जाएगा? एनालिस्ट्स ने भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमानों में कटौती करना शुरू कर दिया है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर युद्ध लंबा चलता है, तो भारत के करंट अकाउंट बैलेंस पर दबाव बढ़ेगा और रुपया इस साल 98 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर सकता है। कुछ एनालिस्ट्स ने अगले 12 महीनों में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए RBI द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी जताई है। करेंसी की कीमत कैसे तय होती है? डॉलर की तुलना में किसी भी अन्य करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना, टूटना, कमजोर होना कहते हैं। अंग्रेजी में करेंसी डेप्रिसिएशन कहते हैं। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे वह इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन करता है। फॉरेन रिजर्व के घटने और बढ़ने का असर करेंसी की कीमत पर दिखता है। अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर, अमेरिका के रुपए के भंडार के बराबर होगा तो रुपए की कीमत स्थिर रहेगी। हमारे पास डॉलर घटे तो रुपया कमजोर होगा, बढ़े तो रुपया मजबूत होगा। ये खबर भी पढ़ें… केंद्र ने कॉमर्शियल LPG कोटा 50% से बढ़ाकर 70% किया: स्टील-ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर को प्राथमिकता, रेस्टोरेंट्स के बाद बड़े उद्योगों को 20% अतिरिक्त सप्लाई केंद्र सरकार ने देश में जारी गैस संकट के बीच राज्यों को एक बार फिर LPG सप्लाई बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार ने शुक्रवार (27 मार्च) को कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के एलोकेशन यानी कोटा को 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा उन उद्योगों को मिलेगा जो पूरी तरह LPG पर निर्भर हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Vaibhav Suryavanshi Birthday 2026; IPL 2026

स्पोर्ट्स डेस्क1 घंटे पहले कॉपी लिंक भारतीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी आज 15 साल के हो गए हैं। वे अपना जन्मदिन IPL 2026 के शुरू होने से ठीक एक दिन पहले मना रहे हैं। IPL में डेब्यू करने के बाद से ही यह चर्चा लगातार चल रही थी कि वैभव को भारत की सीनियर टीम में कब मौका मिलेगा। अब 15 साल की उम्र पूरी करते ही उनका इंतजार खत्म हो गया है। ICC के प्लेयर एलिजिबिलिटी नियमों के अनुसार अब वैभव सीनियर इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने के लिए पूरी तरह पात्र हो गए हैं। 2020 में लागू हुआ था नियम ICC के प्लेयर एलिजिबिलिटी रेगुलेशंस के आर्टिकल 4.1 के अनुसार, कोई भी खिलाड़ी इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने देश का प्रतिनिधित्व तभी कर सकता है, जब सीरीज या टूर्नामेंट के पहले मैच तक उसकी उम्र कम से कम 15 साल हो। यह नियम नवंबर 2020 से लागू है। इसका मकसद युवा खिलाड़ियों की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वैभव सूर्यवंशी के टॉप-3 रिकॉर्ड वैभव IPL में फिफ्टी लगाने वाले यंगेस्ट प्लेयर वैभव सूर्यवंशी IPL में फिफ्टी लगाने वाले सबसे कम उम्र के प्लेयर बने। उन्होंने मात्र 14 साल और 32 दिन में अर्धशतक लगाया। सेकेंड पोजिशन पर कप्तान रियान पराग है, उन्होंने 17 साल 175 दिन में 2019 में फिफ्टी लगाई थी। वैभव मुश्ताक अली में शतक लगाने वाले यंगेस्ट बैटर वैभव ने 10 दिन पहले सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी शतक लगाया था। 14 साल के वैभव टूर्नामेंट में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले बल्लेबाज बने थे। उन्होंने 2 दिसंबर को ईडन गार्डन्स में महाराष्ट्र के खिलाफ 61 गेंदों में नाबाद 108 रन बनाए, जिसमें 7 चौके और 7 छक्के शामिल थे। साथ ही वैभव 14 की उम्र में 3 टी-20 सेंचुरी लगाने वाले इकलौते प्लेयर हैं। वैभव टी-20 में शतक लगाने वाले यंगेस्ट बैटर टी-20 क्रिकेट में अब तक के सबसे युवा शतक लगाने वाले खिलाड़ियों में वैभव सूर्यवंशी का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने 14 साल 32 दिन की उम्र में राजस्थान रॉयल्स के लिए गुजरात टाइटंस के खिलाफ 35 बॉल में शतक पूरा किया। इसके बाद, विजय जोल ने 18 साल 118 दिन में महाराष्ट्र के लिए मुंबई के खिलाफ 2013 में शतक लगाया था। वैभव ने 8 फर्स्ट क्लास मुकाबले खेले वैभव सूर्यवंशी ने बिहार के लिए अबतक 8 फर्स्ट क्लास और 8 ही लिस्ट-ए मुकाबले खेले हैं। वैभव ने फर्स्ट क्लास मैचों में जहां 207 रन बनाएं हैं, तो वहीं लिस्ट-ए में उनके नाम 353 रन दर्ज हैं। उनके नाम 18 टी-20 में 701 रन दर्ज हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
UPSC AIR 137 Mansi Dagars Self-Study Success Story

49 मिनट पहले कॉपी लिंक 15 मार्च को जारी UPSC सिविल सर्विस 2025 रिजल्ट्स में हरियाणा की मानसी डागर ने 137वीं रैंक हासिल की। ये रैंक उन्होंने बिना किसी कोचिंग और प्रोफेश्नल गाइडेंस के सिर्फ सेल्फ स्टडी से हासिल की। मानसी डागर हरियाणा के सोनीपत की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद सोनीपत लौटकर UPSC की तैयारी शुरू की। उनके घर या रिश्तेदारी में कोई भी ऐसा नहीं था जिससे वो गाइडेंस ले सकें। ऐसे में गूगल-यूट्यूब की हेल्प ली और जाना कि क्या और कहां से पढ़ना है। यूट्यूब से ही समझा कि एग्जाम पैटर्न क्या है और इसे कैसे क्रैक करना है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में मानसी बता रही हैं अपना UPSC क्रैक करने का फॉर्मूला… मानसी ने अपने दूसरे अटेम्प्ट में UPSC क्लियर किया। सोर्स आइडेंटिफाई कर सेल्फ स्टडी से एग्जाम क्लियर किया मैंने यूट्यूब और टॉपर्स टॉक से कई टॉपर्स की स्ट्रैटेजी समझी। उनकी वीडियोज देखकर समझा कि क्या और कहां से, खासकर कौनसी किताबों से पढ़ना है। फिर वो किताबें चुनीं जो सबमें कॉमन थीं, जैसे पॉलिटी के लिए लक्ष्मीकांत या हिस्ट्री के लिए स्पेक्ट्रम। धीरे-धीरे समझ आने लगा कि क्या जरूरी है और क्या नहीं। कॉन्सेप्ट क्लियर करना ज्यादा जरूरी आपने कितने घंटे पढ़ाई की, उससे ज्यादा जरूरी है कि आपके कॉन्सेप्ट कितने क्लियर हैं। मैंने 8 घंटे पढ़ाई की और सारी चीजें अच्छे से समझने की कोशिश की। हम सब यूपीएससी की तैयारी के लिए 12, 15 या 18 घंटे सुनने के आदी हैं, लेकिन 8 घंटे समय भी कम नहीं है। मैंने इतने घंटे में ही सारा सिलेबस कवर किया। रिवीजन और अपने आपको टेस्ट भी किया। फिर एनालाइज भी किया। ऐसे में अगर कॉन्सेप्ट क्लियर रखते हैं तो सब आसानी से हो जाता है। बड़े शहरों में डिस्ट्रैक्शन ज्यादा, घर पर तैयारी आसान तैयारी के लिए बड़े शहरों में जाने की बजाय ऑल यू नीड इज कंसिस्टेंसी एंड कॉन्फिडेंस। साथ ही किसी और की बातों में न आएं, खुद से समझें कि आपके लिए क्या जरूरी है। बड़े शहरों में सुविधाओं के साथ डिस्ट्रैक्शन भी ज्यादा है, इसलिए मैंने घर पर शांत माहौल में आराम से तैयारी की। इसके लिए इंटरनेट पर ऑनलाइन इतने सारे रिसोर्सेस हैं, कोचिंग के भी फ्री मटेरियल्स अवेलेबल हैं। आपको पेड प्रोग्राम्स में एनरोल करने की भी जरूरत नहीं। कई-कई बार प्रैक्टिस की तीनों (प्री, मेन्स और इंटरव्यू) की डिमांड्स अलग हैं। प्रीलिम्स के लिए तो बेसिक सोर्सेज पर ही निर्भर रहें। इसके अलावा जितना ज्यादा हो सके मॉक टेस्ट प्रैक्टिस करें। मेन्स के लिए आंसर राइटिंग प्रैक्टिस करें। ज्यादा से ज्यादा PYQs सोल्व करें। इंटरव्यू के लिए परिवार या दोस्तों के साथ इंटरव्यू की प्रैक्टिस करें। तीनों चीजें अलग हैं लेकिन सबमें कॉमन है प्रैक्टिस! प्रैक्टिस हर चीज की करनी पड़ेगी, कई-कई बार करनी पड़ेगी, जैसा कि मैंने किया। कोचिंग के बिना 8 घंटे सेल्फ स्टडी से क्रैक किया UPSC एग्जाम। इंट्रस्ट और अपनी समझ के हिसाब से ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना आपको ऑप्शनल सब्जेक्ट्स चुनते हुए ये ध्यान रखना चाहिए कि आप उस सब्जेक्ट में कितने इंट्रस्टेड हैं, उसको कितना पढ़ सकते हैं। ऑप्शनल सब्जेक्ट डीपर अंडरस्टैंडिंग मांगता है, इसे आपको जनरल स्टडीज से ज्यादा समय देना होगा। ऐसे में सब्जेक्ट ऐसा चुनें जिसे मैनेज करना मुश्किल न हो। मान लीजिए आपने मैथेमैटिक्स लिया है, तो ये बहुत लेंदी है इसलिए ज्यादा समय मांगता है। ऐसे में जीएस के साथ इसे मैनेज करना मुश्किल है। सब आप पर है कि कैसे जीएस, ऑप्शनल और आंसर राइटिंग के बीच में आप टाइम मैनेज करते हैैं। ऐसे में आप अपने ग्रेजुएशन सब्जेक्ट को चुन सकते हैं, इससे फायदा होगा क्योंकि आप उससे फैमिलियर होंगे। चूंकि मुझे फिजिक्स के कॉन्सेप्ट और टर्मिनोलॉजी क्लियर थे, तो मैंने वही चुुना था। फोन को टाइमपास नहीं, तरक्की का टूल बनाया आप इंटरनेट और फोन का यूज भी कर सकते हैं और टाइम पास के लिए मिस यूज भी कर सकते हैं। आपको फोन यूज करते वक्त बहुुत कॉन्शियस रहना होगा। फोन पर समय बर्बाद करने की बजाय पढ़ने के लिए या ऑनलाइन रिसोर्सेस के लिए इसका इस्तेमाल करें। मैं ज्यादातक अपडेट्स, न्यूजपेपर या बाकी मटेरियल्स की डिजिटल कॉपी पढ़ने के लिए ही फोन यूज करती थी। मैंने पढ़ने और चीजों को समझने के लिए इंटरनेट और ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल किया। असफलताओं पर अटकी नहीं, उससे आगे बढ़ी मेरा पिछले अटेंप्ट में एक क्वेश्चन से प्रीलिम्स रह गया था। ‘मेरा नहीं हुआ’, मैं इस पर अटकी नहीं। बल्कि मुझे लगा, ये तो थोड़ी और तैयारी में हो जाएगा। मैंने सोचा अगर इसके इतना करीब आ सकती हूं, तो हो जाएगा। वहीं से मैंने खुद को सीधा मेन्स के लिए तैयार करना शुरू किया। मुझे बस 3 महीने में मेन्स की तैयारी करनी थी। अगर आप भी ऐसे पढ़ाई की धुन में रहते हैं, तो निराशा आप पर ज्यादा हावी नहीं होती। शेड्यूल हेक्टिक की बजाय आसान रखा मेरी पढ़ाई स्लॉट्स में होती थी। जब पढ़ना हो तो दो घंटे और जब आसंर राइटिंग की प्रैक्टिस करनी हो तो तीन-साढ़े तीन घंटे देती थी। पूरे दिन अलग-अलग स्लॉट्स में बस एक ही सब्जेक्ट पढ़ती थी। अगर एक साथ कई सब्जेक्ट्स पढ़ने की कोशिश नहीं करते, तो आप कंफ्यूजन और प्रेशर से बचते हैं। अगर एक दिन में करना भी हो तो एक साथ बस ऑप्शनल और जनरल स्टडीज ही पढ़ती थी, वो भी आधे-आधे दिन के स्लॉट्स में बांटकर। बैकग्राउंड से अलग चैलेंजिंग सब्जेक्ट्स के लिए यूट्यूब से मदद ली मैं साइंस बैकग्राउंड से थी तो ह्यूमैनिटीज पर शिफ्ट होने में दिक्कतें आईं। पॉलिटी और संविधान से जुड़े टर्म समझने में दिक्कत होती थी। मैंने यूट्यूब पर अवेलेबल प्लेलिस्ट्स से पढ़ना शुरू किया। कुछ चैप्टर्स ऑनलाइन पढ़ने के बाद धीरे-धीरे सब समझ में आने लगा। आखिर तक मुझे चीजें समझने के लिए यूट्यूब की जरूरत भी कम हो गई। फिर कॉम्प्लैक्स टॉपिक्स भी किताबों से ही समझ में आने लगे। स्टोरी – सोनाली राय ——————- मेकअप छोड़ने वाली डेनमार्क की पीएम फ्रेडरिक्सन का इस्तीफा: देश में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना मंजूर; 27 मार्च करेंट अफेयर्स जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी
दिखने में महादेव की जटा, गुणों में औषधि, रांची के जंगलों में वैज्ञानिकों ने खोजी नई जड़ी-बूटी

Last Updated:March 27, 2026, 14:51 IST Ranchi Mahadev ki Jata: झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कृषि वैज्ञानिक ने खासतौर पर यहां के जंगलों से कुछ जड़ी बूटी खोज निकाला है. जो दिखने में एकदम महादेव की जटा जैसी है. इसलिए इस जड़ी बूटी का नाम भी महादेव का जटा रखा गया है. खासतौर पर यह माइग्रेन की समस्या को ठीक करता है. इसमें कुछ जरूरी पोषक तत्व होते हैं. जो आगे चलकर किडनी की कई सारी बीमारियों को ठीक कर सकती है. रांची फॉरेस्ट डिपार्मेंट के कृषि वैज्ञानिक प्रशांत ने बताया कि ‘हम लोगों ने इसे रांची के आसपास के जंगल जैसे खूंटी के जंगल से खोज निकाला है, जब हमने खोजा तो यह एकदम महादेव की जटा की तरह दिखने में लग रहा था तो हमें लगा क्या नाम रखा जाए तो यही रख दिया. अभी तक जो हमने रिसर्च किया है, उसमें यह पाया गया है कि जिन लोगों को यूरिन की समस्या होती है, किडनी में स्टोन होता है या गाल ब्लैडर की समस्या होती है. उनमें यह रामबाण के तौर पर काम कर सकता है.’ कृषि वैज्ञानिक प्रशांत बताते हैं कि अगर किडनी में इंफेक्शन हो जाए या स्टोन हो जाए तो खासतौर पर यूरिन में परेशानी आती है. कई बार लोगों को पेशाब में जलन जैसी समस्या देखने को मिलती है या फिर गाल ब्लैडर में स्टोन हो जाती है. यह सारी समस्याओं का यह रामबाण सॉल्यूशन है. अभी हम लोग रिसर्च कर ही रहे है. लेकिन अभी तक रिसर्च में पाया है कि एंटीबैक्टीरियल और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण प्रचुर मात्रा में है और किडनी इन्फेक्शन में होने वाले बैक्टीरिया के लिए यह दुश्मन का काम कर रहा है. यूरिन की वजह से जो इन्फेक्शन होता है या कई बार यूटीआई होती है. उसमें जो बैक्टीरिया होते हैं. वह काफी स्ट्रांग होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google इसके लिए आपको डॉक्टर की परामर्श लेने की जरूरत पड़ती है. डॉक्टर की परामर्श तो ठीक है, लेकिन अगर इस जड़ी बूटी को पानी में उबाल के इसका पानी पिया जाए तो आप कुछ ही दिनों में देखेंगे की इन्फेक्शन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और आप काफी रिलैक्स फील कर रहे हैं. दरअसल, यह सीधे किडनी को प्यूरिफाई करने का काम करता है. प्रशांत बताते हैं कि अगर आप इसका पानी पीते हैं तो इसका जो सबसे पहले अटैक होता है. वह किडनी में ही होता है, लेकिन यह सकारात्मक अटैक होता है. यह किडनी को प्यूरिफाई करता है, बैक्टीरिया को हटाता है और कहीं सूजन या इन्फ्लेशन है तो उसको कम करता है. रेगुलर यूरिन लाने में सहायक होता है. यूरिन से जुड़ी हुई कोई भी समस्या है तो उसको ठीक कर सकता है. First Published : March 27, 2026, 14:51 IST
न्यूयॉर्क के रेस्टोरेंट्स में अब ‘रिजर्वेशन वॉर’:पसंदीदा टेबल चाहिए तो मेंबरशिप के तौर पर चुकानी पड़ रही 23 लाख रुपए तक की फीस

अमेरिका में रेस्टोरेंट इंडस्ट्री बदलाव से गुजर रही है। यहां के पॉश रेस्टोरेंट में टेबल मिलना अब “किस्मत’ नहीं, बल्कि ‘सब्सक्रिप्शन’ का खेल बन चुका है। यानी अब जंग स्वाद के लिए नहीं, बल्कि उस मेज को हासिल करने के लिए हो रही है। इसे ‘रेस्टोरेंट रिजर्वेशन वॉर’ कहा जा रहा है। करीब ₹11,293 करोड़ के बड़े सौदों और लाखों की मेंबरशिप फीस के बीच मोना पंजवानी जैसे रेस्टोरेंट मालिकों के लिए यह केवल बुकिंग का सवाल नहीं है, यह उस ‘कस्टमर डेटा’ पर कब्जे की जंग है, जो तय करता है कि आपकी अगली डिनर डेट कहां और कैसी होगी। पिछले साल जब मोना ने लोअर मैनहट्टन में अपना आलीशान रेस्टोरेंट ‘वन40 रूफटॉप’ खोला, तो उनके पास बेहतरीन शेफ और शानदार मेन्यू था, लेकिन एक बड़ी उलझन थी। बुकिंग किस प्लेटफॉर्म से ली जाए? पंजवानी ने सीएनएन को बताया, ‘यह शहर में मेरा पहला रेस्टोरेंट है, मैं अपनी पहचान बना रही हूं, इसलिए मुझे उन प्लेटफॉर्म्स की जरूरत है जो मुझे लोगों की नजरों में ला सकें।’ आज के दौर में यह फैसला मामूली नहीं है। एक तरफ येगव का सर्वे कहता है कि करीब 40% लोग पैसे बचाने के लिए बाहर खाना कम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बुकिंग एप्स के बीच होड़ मची है कि कौन सबसे ‘एक्सक्लूसिव’ मेज अपने कब्जे में रखेगा। करीब एक दशक से इस बाजार पर ओपन-टेबल (1998) का राज था, जिसके पास आज 60,000 रेस्टोरेंट्स का नेटवर्क है। फिर 2014 में रेजी आया, जिसने प्रीमियम अनुभव पर फोकस किया। पंजवानी ने ‘रेजी’ को चुना क्योंकि यह अमेरिकन एक्सप्रेस से जुड़ा है, जो हाई-एंड क्लाइंट्स को सीधे उन तक पहुंचाता है। लेकिन अब कहानी में डोर्सिया की एंट्री से ट्विस्ट आया है। इस एप का नाम साल 2000 की मशहूर फिल्म ‘अमेरिकन साइको’ के उस काल्पनिक रेस्टोरेंट पर रखा गया है जहां बुकिंग मिलना नामुमकिन था। यहां मेज पाने के लिए लोग सालभर की मेंबरशिप फीस देते हैं, जो 18,822 रुपए से 23,52,750 रुपए तक जाती है। इसके फाउंडर मार्क लोटेनबर्ग कहते हैं, “रिजर्वेशन की जंग सच में हो रही है।’ डोर्सिया आज रोजाना लगभग 94.11 लाख से 1.88 करोड़ का रेवेन्यू बना रहा है। रेस्टोरेंट सुकून की जगह न रहकर ‘टिकटिंग सिस्टम’ बनकर रह जाएंगे इस बहती गंगा में हाथ धोने के लिए उबर ईट्स और डोरडैश जैसे दिग्गज भी कूद पड़े हैं। डोरडैश ने तो बुकिंग प्लेटफॉर्म ‘सेवनरूम्स’ को करीब 11,293 करोड़ रुपए में खरीद लिया। विशेषज्ञ मार्को शाल्मा कहते हैं, ‘रिजर्वेशन पर कब्जा करने का मतलब है ग्राहक के पूरे अनुभव और डेटा पर कब्जा करना।’ लेकिन लोटेनबर्ग इस पर तंज कसते हैं, ‘लोग उसी एप पर लग्जरी डिनर टेबल बुक नहीं करना चाहते, जिससे वे मैकडॉनल्ड्स का बर्गर मंगाते हैं।’ शाल्मा कहते हैं, ‘जब हर सीट ‘डिजिटल इन्वेंट्री’ बन जाती है, तो रेस्टोरेंट कोई सुकून वाली जगह नहीं, बल्कि एक ‘टिकटिंग सिस्टम’ बन कर रह जाता है।’
1957 के बाद से न तो द्रमुक और न ही अन्नाद्रमुक ने ये 2 सीटें जीती हैं। यहां जानें क्यों

तमिलनाडु के पूर्व सीएम एम करुणानिधि की दशकों पुरानी टिप्पणी, “नेल्लई मेरी सीमा है, कुमारी मेरी मुसीबत है”, राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में गूंजती रहती है और 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए नए सिरे से प्रासंगिकता तलाश रही है। तमिलनाडु में 234 विधानसभा क्षेत्र हैं, लेकिन कन्याकुमारी जिले के दो खंड, किल्लियूर और विलावनकोड, एक दुर्लभ विशिष्टता के लिए खड़े हैं। ये एकमात्र निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां दो प्रमुख द्रविड़ पार्टियों, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने कभी जीत हासिल नहीं की है। दशकों बाद भी, उनका चुनावी पैटर्न अपरिवर्तित बना हुआ है, जो उन्हें तमिलनाडु के राजनीतिक मानचित्र में स्थायी बाहरी लोगों के रूप में चिह्नित करता है। (न्यूज़18 तमिल) कन्याकुमारी जिले के पश्चिमी छोर पर स्थित, किल्लियूर केरल के साथ निकटता साझा करता है, जो इसकी भाषाई और सामाजिक प्रोफ़ाइल को आकार देता है। इसकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा तमिल और मलयालम में द्विभाषी है, जिसमें नादर और मछली पकड़ने वाले समुदाय एक बड़ा मतदाता आधार बनाते हैं। 1957 में गठित, इस निर्वाचन क्षेत्र में मार्शल नेसामोनी के साथ पहला चुनाव हुआ, जिन्हें व्यापक रूप से “कन्याकुमारी के पिता” के रूप में माना जाता है, उन्हें निर्विरोध चुना गया। तब से यह सीट काफी हद तक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय गैर-द्रविड़ खिलाड़ियों के कब्जे में रही है। कांग्रेस ने यहां आठ बार जीत हासिल की है, उसके बाद जनता पार्टी/जनता दल (चार बार), तमिल मनीला कांग्रेस (दो बार), और एक बार निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है। (न्यूज़18 तमिल) 1996 में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव हुआ जब जीके मूपनार के नेतृत्व में कांग्रेस से अलग होने के बाद गठित तमिल मनीला कांग्रेस ने अपने चुनावी पदार्पण में यह सीट हासिल की, जिसमें टी कुमारदास विजयी हुए। उन्होंने 2001 में निर्वाचन क्षेत्र बरकरार रखा। हालांकि, 2006 के बाद से, कांग्रेस ने नियंत्रण हासिल कर लिया और लगातार चार चुनावों – 2006, 2011, 2016 और 2021 के माध्यम से सीट पर कब्जा कर लिया। (न्यूज18 तमिल) 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए, किल्लियूर को एक बार फिर गठबंधन सहयोगियों को आवंटित किया गया है, एआईएडीएमके ने इसे तमिल मनीला कांग्रेस को सौंप दिया है, जबकि डीएमके ने इसे कांग्रेस को आवंटित किया है। यह प्रभावी रूप से किसी भी द्रविड़ प्रमुख द्वारा सीधे मुकाबले को खारिज कर देता है, जो निर्वाचन क्षेत्र के लंबे समय से चले आ रहे चुनावी पैटर्न को मजबूत करता है। इसी तरह की प्रवृत्ति विलावनकोड में दिखाई देती है, जो जिले का एक अन्य निर्वाचन क्षेत्र है जो अपने रबर बागानों के लिए जाना जाता है। यहां, चुनावी जीत बड़े पैमाने पर कांग्रेस और वाम दलों के बीच होती रही है, द्रविड़ संरचनाओं को अभी भी सफलता नहीं मिली है। (न्यूज़18 तमिल) इस राजनीतिक विसंगति की जड़ें इतिहास में छिपी हैं। 1940 और 1950 के दशक के दौरान, जब द्रविड़ विचारधारा पूरे तमिलनाडु में जोर पकड़ रही थी, कन्याकुमारी कुमारी विलय आंदोलन में व्यस्त होने के कारण अपेक्षाकृत अछूती रही। उस समय, यह क्षेत्र केरल के अंतर्गत पूर्ववर्ती त्रावणकोर-कोचीन राज्य का हिस्सा था। (न्यूज़18 तमिल) मार्शल नेसामोनी के नेतृत्व में लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद ही 1956 में इस क्षेत्र को तमिलनाडु में मिला दिया गया, जिससे वर्तमान कन्याकुमारी जिला बन गया। कांग्रेस के साथ नेसामोनी के मजबूत जुड़ाव को देखते हुए, विलय को व्यापक रूप से पार्टी के लिए एक राजनीतिक जीत के रूप में माना गया, एक ऐसा कारक जो जिले के चुनावी झुकाव को प्रभावित करता रहा है। (न्यूज़18 तमिल) तमिलनाडु के अधिकांश हिस्सों के विपरीत, जहां जातिगत समीकरण चुनावी नतीजों पर हावी रहते हैं, कन्याकुमारी एक अलग गतिशीलता प्रस्तुत करता है। यहां जातिगत पहचान से जुड़ा धर्म निर्णायक भूमिका निभाता है। जनसांख्यिकीय पैटर्न के अनुसार, हिंदुओं की आबादी 48.65% है, जबकि ईसाई 46.85% हैं, जो एक लगभग संतुलित मतदाता बनाता है जो राजनीतिक रणनीतियों को आकार देता है। (न्यूज़18 तमिल) इस अद्वितीय सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने के बावजूद, डीएमके-कांग्रेस गठबंधन लगातार जिले में एक मजबूत ताकत बना हुआ है। फिर भी, जैसा कि इतिहास से पता चलता है, कन्याकुमारी, विशेष रूप से किल्लियूर और विलावनकोड, करुणानिधि के स्थायी अवलोकन के प्रति सच्चे रहते हुए, द्रविड़ प्रभुत्व की व्यापक धाराओं का विरोध करना जारी रखते हैं। (न्यूज़18 तमिल)
मलाइका ने सोराब बेदी संग डेटिंग रूमर्स पर तोड़ी चुप्पी:कहा- लिंक अप की अफवाहों पर मैं और बेटे अरहान हंसते हैं

एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा ने एक्टर सोराब बेदी के साथ उनकी डेटिंग की अफवाहों को खारिज किया। हाल ही में कर्ली टेल्स को दिए इंटरव्यू में मलाइका ने उनके रिलेशनशिप स्टेटस पर चल रही चर्चाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि कभी-कभी ये इरिटेटिंग होता है, लेकिन अब मैं इसे मजाक की तरह लेती हूं। मैं इसे ज्यादा महत्व नहीं देती। मलाइका ने यह भी कहा कि इस तरह की अफवाहों पर वह और उनके बेटे अरहान खान हंसते हैं। वायरल वीडियो के बाद शुरू हुईं डेटिंग की चर्चाएं बता दें कि मलाइका का नाम सोराब बेदी से तब जुड़ा जब दोनों का एक कोजी वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में सोराब मलाइका को गले लगाए डांस करते दिखे थे। हालांकि इस पर एक्टर ने कहा था कि वो और मलाइका सिर्फ दोस्त हैं और कई सालों से एक-दूसरे को जानते हैं। सोराब ने टेली टॉक को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘डेलनाज दारूवाला और वहबिज मेहता ने मेरे मॉडलिंग के दिनों में मुझे रैंप पर चलने का मौका दिया। मेरी उनसे दोस्ती हुई और मैं उनके साथ पार्टियों में जाने लगा। उन्हीं में से एक पार्टी में मैं अपने मेंटर्स के जरिए मलाइका से मिला। वह भी डेलनाज और वहबिज की करीबी दोस्त हैं। इस तरह मलाइका और मेरी दोस्ती हुई। हमारे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है।’ सोराब ने आगे कहा था, ‘लोग हमारे बारे में तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। किसी लड़की के बारे में कुछ भी बोलने से पहले उन्हें दो बार सोचना चाहिए। इससे उसकी मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। ऐसा नहीं करना चाहिए।’ कई सालों से साथ पार्टी करते हैं सोराब-मलाइका लिंक अप की खबरों पर सफाई देते हुए सोराब ने कहा था, ‘मैं कई सालों से वहबिज, डेलनाज और मलाइका के साथ पार्टियों में जाता रहा हूं। पहले भी मैं मलाइका के साथ तस्वीरें शेयर करता था, लेकिन उस समय मैं जाना-पहचाना चेहरा नहीं था। अब मैं थोड़ा पहचाना जाने लगा हूं, इसलिए लोग इस पर ध्यान दे रहे हैं। मैंने पहले भी ऐसे वीडियो और तस्वीरें शेयर की हैं। दो लोग दोस्त हो सकते हैं। हम एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं, लेकिन लोगों ने इसे अलग ही तरह से ले लिया।’
Players of other sports are becoming fans of chess, Erling Haaland

Hindi News Sports Players Of Other Sports Are Becoming Fans Of Chess, Erling Haaland लंदन7 घंटे पहले कॉपी लिंक मैनचेस्टर सिटी के स्ट्राइकर अर्लिंग हालेंड ने हाल ही में एक ग्लोबल चेस टूर में निवेश किया है। अर्लिंग हालेंड (फुटबॉल), विक्टर वेम्बान्यामा (बास्केटबॉल) और कार्लोस अल्कारेज (टेनिस) जैसे दुनिया के शीर्ष एथलीट्स में एक बात समान है- शतरंज के प्रति उनका गहरा जुनून। शतरंज का खेल भले ही फुटबॉल के आक्रामक खेल से बिल्कुल अलग हो, लेकिन रणनीति, योजना और समस्या-समाधान जैसे इसके गुण खिलाड़ियों को अपनी ओर खींच रहे हैं। हाल ही में मैनचेस्टर सिटी के स्ट्राइकर हालेंड ने एक ग्लोबल चेस टूर में निवेश किया है। उनका मानना है कि यह बोर्ड गेम फुटबॉल की तरह ही है, जो दिमाग को तेज करता है और भविष्य की रणनीति बनाने में मदद करता है। शतरंज का क्रेज कई खेलों के दिग्गजों में देखा जा रहा है। इंग्लैंड के डिफेंडर ट्रेंट अलेक्जेंडर-अर्नोल्ड ने पांच बार के वर्ल्ड चैम्पियन मैग्नस कार्लसन के खिलाफ मैच खेला था। वहीं, एबेरेची एजे ने चेस.कॉम का चार दिवसीय एमेच्योर टूर्नामेंट अपने नाम किया और करीब 18 लाख रुपए जीते। लिवरपूल के स्टार मोहम्मद सालाह तो ऑनलाइन ‘ब्लिट्ज चेस’ (तेज गति वाला शतरंज) के इतने आदी हैं कि वे रोज गुमनाम प्रोफाइल से खेलते हैं। वेम्बान्यामा ने न्यूयॉर्क के एक पार्क में फैंस को शतरंज खेलने की चुनौती देकर सुर्खियां बटोरी थीं। इंग्लैंड की रग्बी टीम बाकायदा शतरंज की प्रतियोगिताएं आयोजित करती थी। शीर्ष स्तर के खेलों में शारीरिक क्षमता के अलावा मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। इसमें शतरंज बहुत मददगार साबित होता है। वर्ल्ड नंबर-1 टेनिस प्लेयर कार्लोस अल्कारेज कहते हैं, ‘आपको यह अनुमान लगाना होता है कि विरोधी खिलाड़ी गेंद को कहां भेजेगा। आपको समय से पहले आगे बढ़ना होता है। शतरंज इसमें बहुत मदद करता है।’ शतरंज और फुटबॉल में काफी समानताएं हैं फुटबॉल मैनेजर क्विके सेटिन के अनुसार, शतरंज और फुटबॉल में काफी समानताएं हैं। दोनों में मोहरे (या खिलाड़ी) आक्रमण और बचाव के लिए जुड़े होते हैं और बीच के हिस्से (सेंटर) पर दबदबा बनाना सबसे अहम होता है। ब्रिटिश चेस प्लेयर मैल्कम पेन का मानना है कि शतरंज खिलाड़ियों को खेल के तनाव से ‘स्विच ऑफ’ करने का मौका देता है। इसमें शांत रहना होता है; अगर भावनाएं हावी हुईं, तो हार तय है। बोरिस बेकर जब नोवाक जोकोविच के कोच थे, तो रणनीति सुधारने के लिए साथ में शतरंज खेला करते थे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔







