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न्यूयॉर्क के रेस्टोरेंट्स में अब ‘रिजर्वेशन वॉर’:पसंदीदा टेबल चाहिए तो मेंबरशिप के तौर पर चुकानी पड़ रही 23 लाख रुपए तक की फीस

न्यूयॉर्क के रेस्टोरेंट्स में अब ‘रिजर्वेशन वॉर’:पसंदीदा टेबल चाहिए तो मेंबरशिप के तौर पर चुकानी पड़ रही 23 लाख रुपए तक की फीस

अमेरिका में रेस्टोरेंट इंडस्ट्री बदलाव से गुजर रही है। यहां के पॉश रेस्टोरेंट में टेबल मिलना अब “किस्मत’ नहीं, बल्कि ‘सब्सक्रिप्शन’ का खेल बन चुका है। यानी अब जंग स्वाद के लिए नहीं, बल्कि उस मेज को हासिल करने के लिए हो रही है। इसे ‘रेस्टोरेंट रिजर्वेशन वॉर’ कहा जा रहा है। करीब ₹11,293 करोड़ के बड़े सौदों और लाखों की मेंबरशिप फीस के बीच मोना पंजवानी जैसे रेस्टोरेंट मालिकों के लिए यह केवल बुकिंग का सवाल नहीं है, यह उस ‘कस्टमर डेटा’ पर कब्जे की जंग है, जो तय करता है कि आपकी अगली डिनर डेट कहां और कैसी होगी। पिछले साल जब मोना ने लोअर मैनहट्टन में अपना आलीशान रेस्टोरेंट ‘वन40 रूफटॉप’ खोला, तो उनके पास बेहतरीन शेफ और शानदार मेन्यू था, लेकिन एक बड़ी उलझन थी। बुकिंग किस प्लेटफॉर्म से ली जाए? पंजवानी ने सीएनएन को बताया, ‘यह शहर में मेरा पहला रेस्टोरेंट है, मैं अपनी पहचान बना रही हूं, इसलिए मुझे उन प्लेटफॉर्म्स की जरूरत है जो मुझे लोगों की नजरों में ला सकें।’ आज के दौर में यह फैसला मामूली नहीं है। एक तरफ येगव का सर्वे कहता है कि करीब 40% लोग पैसे बचाने के लिए बाहर खाना कम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बुकिंग एप्स के बीच होड़ मची है कि कौन सबसे ‘एक्सक्लूसिव’ मेज अपने कब्जे में रखेगा। करीब एक दशक से इस बाजार पर ओपन-टेबल (1998) का राज था, जिसके पास आज 60,000 रेस्टोरेंट्स का नेटवर्क है। फिर 2014 में रेजी आया, जिसने प्रीमियम अनुभव पर फोकस किया। पंजवानी ने ‘रेजी’ को चुना क्योंकि यह अमेरिकन एक्सप्रेस से जुड़ा है, जो हाई-एंड क्लाइंट्स को सीधे उन तक पहुंचाता है। लेकिन अब कहानी में डोर्सिया की एंट्री से ट्विस्ट आया है। इस एप का नाम साल 2000 की मशहूर फिल्म ‘अमेरिकन साइको’ के उस काल्पनिक रेस्टोरेंट पर रखा गया है जहां बुकिंग मिलना नामुमकिन था। यहां मेज पाने के लिए लोग सालभर की मेंबरशिप फीस देते हैं, जो 18,822 रुपए से 23,52,750 रुपए तक जाती है। इसके फाउंडर मार्क लोटेनबर्ग कहते हैं, “रिजर्वेशन की जंग सच में हो रही है।’ डोर्सिया आज रोजाना लगभग 94.11 लाख से 1.88 करोड़ का रेवेन्यू बना रहा है। रेस्टोरेंट सुकून की जगह न रहकर ‘टिकटिंग सिस्टम’ बनकर रह जाएंगे इस बहती गंगा में हाथ धोने के लिए उबर ईट्स और डोरडैश जैसे दिग्गज भी कूद पड़े हैं। डोरडैश ने तो बुकिंग प्लेटफॉर्म ‘सेवनरूम्स’ को करीब 11,293 करोड़ रुपए में खरीद लिया। विशेषज्ञ मार्को शाल्मा कहते हैं, ‘रिजर्वेशन पर कब्जा करने का मतलब है ग्राहक के पूरे अनुभव और डेटा पर कब्जा करना।’ लेकिन लोटेनबर्ग इस पर तंज कसते हैं, ‘लोग उसी एप पर लग्जरी डिनर टेबल बुक नहीं करना चाहते, जिससे वे मैकडॉनल्ड्स का बर्गर मंगाते हैं।’ शाल्मा कहते हैं, ‘जब हर सीट ‘डिजिटल इन्वेंट्री’ बन जाती है, तो रेस्टोरेंट कोई सुकून वाली जगह नहीं, बल्कि एक ‘टिकटिंग सिस्टम’ बन कर रह जाता है।’

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