The return of football’s ‘lost’ generation

Hindi News Sports Veteran Women’s Club: The Return Of Football’s ‘lost’ Generation लंदन29 मिनट पहले कॉपी लिंक फीफा की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के बाद से संगठित रूप से फुटबॉल खेलने वाली महिलाओं और लड़कियों की संख्या 24% बढ़कर 1.66 करोड़ के पार पहुंच गई है।- प्रतीकात्मक फोटो मौजूदा दौर में जब लड़कियां टीवी पर महिला वर्ल्ड कप और यूरोपियन चैम्पियनशिप जैसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट देख रही हैं, तब एक पीढ़ी ऐसी भी है जिसके दिल में एक गहरी टीस है। यह उन महिलाओं की ‘खोई हुई’ पीढ़ी है जो 70, 80 और 90 के दशक में फुटबॉल के जुनून के साथ बड़ी तो हुईं, लेकिन उन्हें खेलने का कोई मंच नहीं मिला। अब जब यही महिलाएं 40 या 50 की उम्र पार कर चुकी हैं, तो वे अपने उस छूटे हुए ख्वाब को फिर से जी रही हैं। भावनाएं इस कदर जुड़ी हैं कि जब एक 46 साल की महिला ने जिंदगी में पहली बार पूरी किट (बूट्स, शिन पैड्स और जर्सी) पहनकर मैदान पर कदम रखा, तो आंखों से आंसू छलक पड़े। फीफा की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के बाद से संगठित रूप से फुटबॉल खेलने वाली महिलाओं और लड़कियों की संख्या 24% बढ़कर 1.66 करोड़ के पार पहुंच गई है। 2027 तक इसे 6 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है। लेकिन, ग्रासरूट लेवल पर उन महिलाओं की एक बड़ी तादाद है, जिन्हें उनके दौर में सुविधाओं और सामाजिक नजरिए के अभाव में पीछे छोड़ दिया गया था। करीब 40-50 साल पहले, लड़कियों के लिए शौक के तौर पर भी फुटबॉल खेलना एक बड़ा संघर्ष था। जो लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं, उन्हें अक्सर ‘टॉमबॉय’ कहकर चिढ़ाया जाता था। स्कूलों में भी खेल बंटे हुए थे। लड़कियों को नेटबॉल और हॉकी की तरफ भेज दिया जाता था, जबकि फुटबॉल और रग्बी लड़कों के लिए आरक्षित माने जाते थे। महिलाओं की कोई स्थानीय टीम या क्लब नहीं होते थे। ऐसे में लड़कियों को ऊबड़-खाबड़ मैदानों पर लड़कों की टीमों के बीच अपना खेल साबित करना पड़ता था। वर्षों बाद अब यह पीढ़ी अपने उस छूटे हुए खेल को दोबारा गले लगा रही है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में ‘वेटरन विमंस क्लब’ बन रहे हैं, जहां उम्रदराज महिलाएं प्रतिस्पर्धी फुटबॉल खेल रही हैं। 2015 में कैरल बेट्स ने 25 से 80 साल की महिलाओं के लिए ‘क्रॉली ओल्ड गर्ल्स’ नाम से एक क्लब बनाया। बेट्स खुद उसी पीढ़ी से आती हैं, जिनसे उनका खेल छिन गया था। इसी तर्ज पर जो ट्रेहर्न ने उन महिलाओं के लिए ‘कैंटरबरी ओल्ड बैग्स’ की शुरुआत की, जो जिंदगी के इस पड़ाव पर खेल का हिस्सा बनना चाहती हैं। 35 से 50 साल की उम्र में मैदान पर लौट रहीं इन महिलाओं की कहानियां भावुक करने वाली हैं। इनमें से कई ने बचपन में बिना गोलपोस्ट या बुनियादी सुविधाओं के खेला था। अब जब ये महिलाएं पूरी किट पहनकर मैदान पर उतरती हैं, तो यह उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं रह जाता, बल्कि एक तरह का सशक्तिकरण बन जाता है। जो महिलाएं खेल नहीं पा रही हैं, वे अब लड़कियों की टीमों को कोचिंग देकर अपना सपना पूरा कर रही हैं। यह केवल फुटबॉल की वापसी नहीं है, बल्कि उस पीढ़ी की जीत है जिसने अपने खेल से कभी हार नहीं मानी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Saiyara Recording Emotional | Singer Fahim Ulla Talks AI & Performance

फहीम अब्दुल्ला ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। बॉलीवुड के मशहूर सिंगर फहीम अब्दुल्ला रविवार को रायपुर पहुंचे, जहां उन्होंने SSIPMT मुजगहन में ऑर्गेनाइज लाइव कॉन्सर्ट में शानदार परफॉर्मेंस देकर ऑडियंस का दिल जीत लिया। उन्होंने एक के बाद एक अपने सुपरहिट गाने इश्क, झेलम और सैयारा गाकर युवाओं को झूमन . सिंगर फहीम अब्दुल्ला ने ‘दैनिक भास्कर डिटिजल’ से खास बातचीत की और अपने जर्नी के बारे में बताया। इसके अलावा उन्होंने AI को लेकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टाइल ले सकता है, लेकिन हमारी अदायगी नहीं ले सकता। फहीम ने बताया कि सैयारा सॉन्ग रिकॉर्ड करने के दौरान वे बहुत इमोशनल हो गए थे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… देखिए पहले ये तस्वीरें- फहीम अब्दुल्ला ने एक के बाद एक अपने सुपरहिट गाने गाकर फैंस को झूमने पर मजबूर कर दिया। SSIPMT में लाइव कॉन्सर्ट ऑर्गेनाइज किया गया था। फहीम के कॉन्सर्ट में पहुंचे लोगों ने खूब इंजॉय किया। सवाल: बचपन से लेकर अब तक का आपके सिंगिंग का सफर कैसा रहा? जवाब: घर में म्यूजिक बैकग्राउंड से कोई भी नहीं था। मुझे ही म्यूजिक में इंटरेस्ट था। मैं एक सामान्य कश्मीरी लड़के की लाइफ जिया हूं। मेरा परिवार कश्मीर का एक मध्यमवर्गीय परिवार है, मेरे बचपन से जो सिंगिंग के प्रति रुचि थी, बाद में पैशन बन गई। सवाल: अपने झेलम से शुरुआत की, फिर इश्क गाया और अब सैयारा गाना सुपरहिट हुआ है? आप अपने करियर से कितने संतुष्ट हैं। जवाब: मेरा सफर बहुत खूबसूरत था। मैंने हमेशा कोशिश की कि मैं वह गाने गाऊ, जो मेरे दिल को अच्छा लगे और दिल से ही निकले। कहा जाता है जब दिल से कोई बात निकलती है तो वहा दिल तक ही जाती है। मेरे पूरे सफर की यही एक खास बात रही, जो मैं आगे भी अपने साथ रखना चाहूंगा। सवाल: हम लोग जो गाने सुनते हैं वह स्टूडियो में तैयार होकर पूरे फिल्टर के साथ हम तक पहुंचते हैं। गाने रिकॉर्डिंग करने के समय क्या चुनौतियां होती हैं? जवाब: मुझे लगता है स्टूडियो में गाना रिकॉर्ड करने में कोई चुनौती नहीं होती, जितना लाइव कॉन्सर्ट में होती है। यह ठीक वैसा ही है जैसे फिल्म में एक्टिंग और थिएटर करने में। हम जब स्टूडियो में रिकॉर्ड करते हैं तो कई टेक ले सकते हैं, लेकिन कॉन्सर्ट में अपना बेस्ट देना पड़ता है। रही बात ऑटोट्यून की तो इसे सभी लोग इस्तेमाल करते हैं, लेकिन लाइव कॉन्सर्ट में हम रियल सिंगिंग करते हैं और लोग हमसे कनेक्ट कर जाते हैं। फहीम अब्दुल्ला ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। सवाल: यंग जनरेशन में सैयारा सॉन्ग सुनकर कई लोग रो पड़े, जब आप गाना रिकॉर्ड कर रहे थे उस दौरान आपका इमोशंस किस तरह था? जवाब: इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान मैं भी काफी भावुक हो गया था, और वही एहसास गाने में झलकता है। शायद इसी वजह से यह लोगों को पसंद आया। इसकी कंपोजिशन, म्यूजिक और लिरिक्स सभी बहुत प्यार और मेहनत से बनाए गए थे। जब लोगों ने इस गाने को सुना, तो उन्होंने उस भाव और प्यार को भी महसूस किया। सवाल: आपने एआर रहमान के साथ भी कुछ म्यूजिक्स बनाए हैं, उनसे आपको क्या सीखने को मिला? जवाब- रहमान सर के साथ काम करना एक अलग ही अनुभव होता है। वे आपको किसी तरह का दबाव महसूस नहीं होने देते, जिससे आप पूरी तरह फ्री होकर काम कर पाते हैं। अगर आपकी कोई अदायगी उन्हें पसंद आ जाती है, तो वे कहते हैं कि इसे दोहराइए। फिर उसमें कुछ और सुधार करके बेहतर ट्रैक बनाने की कोशिश करते हैं। इस दौरान आप उनके साथ काफी सहज और घुला-मिला महसूस करते हैं। मैंने बचपन से उनका संगीत सुना है, इसलिए मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं उनके साथ पहली बार काम कर रहा हूं। लाइव कॉन्सर्ट के दौरान फहीम एक युवक को सिंगिंग के लिए स्टेज पर बुला लिया। युवक ने भी फहीम के साथ गाने की कुछ लाइन दोहराई। सवाल: किसी भी कॉन्सर्ट करने से पहले क्या तैयारी करते हैं? जवाब: यह सब का अपना अलग-अलग तरीका होता है। मैं हाइड्रेट रहना पसंद करता हूं। कॉन्सर्ट के एक-दो दिन पहले ही ज्यादा पानी पीना शुरू कर देता हूं। कॉन्सर्ट के पहले थोड़ा रियाज इसलिए भी किया जाता है, जिससे पता चले कि आप सही साउंड कर रहे हैं कि नहीं। सवाल: आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) लोगों की आवाज कॉपी कर रहा है। इसे सिंगिंग के भविष्य के लिए आप किस तरह देखते हैं? जवाब: AI आपके टेक्सचर कॉपी कर सकता है, आपकी अदायगी कॉपी नहीं कर सकता न ही प्रोजेक्शन कॉपी कर सकता है। ज्यादा से ज्यादा एआईं आपका स्टाइल कॉपी कर सकता है, जैसे कि आप ज्यादातर किस तरीके से गाते हैं उसे पकड़ लेगा। लेकिन इसके अलावा जो इमोशन और डेप्थ है, उसे नहीं पकड़ पाएगा। जैसे मैं यह डिसाइड कर सकता हूं कि कोई गाने की एक लाइन को मैं सॉफ्ट गाऊंगा और कोई दूसरे लाइन को हार्ड करूंगा। एआई कैन नॉट डू डिस। कॉन्सर्ट में लोगों ने मोबाइल फोन के टॉर्च जलाकार फहीम का वेलकम किया। सवाल: आप खाली समय पर क्या करते हैं आपकी हॉबी क्या है? जवाब: मुझे बाइक चलाना खूब पसंद है, मैं पेंटिंग भी खूब किया करता था, लेकिन मसरूफियत की वजह से अब समय नहीं दे पा रहा हूं। मुझे गार्डनिंग भी बहुत पसंद है, लेकिन अभी भी जब फ्री रहता हूं तो यही सब करता हूं। सवाल: ऐसा सुना है कि आप इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर सिंगिंग की लाइन में आए, ये पूरा किस्सा क्या है? जवाब: इंटरनेट पर कुछ बातें गड़बड़ तरीके से मिक्स हो गई हैं। यह मेरे दोस्त असलान की कहानी है। वह इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर मेरे साथ मुंबई आया था। उस दौरान मैं भी अपनी मास्टर्स की पढ़ाई कर रहा था। बाद में मैंने भी अपना मास्टर्स पूरा कर लिया। फहीम के साथ फैन्स फोटो खिचवाते नजर आए। सवाल: सिंगिंग की दुनिया में कई बार प्रतिस्पर्धा बहुत व्यक्तिगत हो जाती है। बॉलीवुड में भी ऐसा कई बार देखा गया है। इस बारे में आप क्या सोचते हैं? जवाब: मैं कॉम्पिटिशन में यकीन नहीं करता। कला की दुनिया में और भी संभव नहीं है, क्योंकि से नापने और
न्यूक्लियर अटैक हुआ तो रेडिएशन से कैसे बचें? डॉक्टर से जानें अगले 48 घंटों का ‘लाइफ-सेविंग’ प्लान; ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी!

Nuclear Attack Survival Guide : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है. जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं, दुनिया पर ‘परमाणु हमले’ (Nuclear Attack) की आशंका ने लोगों की नींद उड़ा दी है. ऐसे में सवाल यह नहीं है कि धमाका कितना बड़ा होगा, बल्कि सवाल यह है कि उस भयावह पल के बाद जो ‘रेडियोएक्टिव फॉलआउट’ (Radioactive Fallout) हवा में घुलेगा, उससे अपनी और अपने परिवार की जान कैसे बचाई जाए? ज्यादातर लोग मानते हैं कि परमाणु हमले में मौत सिर्फ धमाके से होती है, लेकिन इतिहास गवाह है कि असली तबाही वह अदृश्य रेडिएशन लाता है जो मीलों तक हवा के साथ फैलता है. जीपी और कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर हूमा शेख के अनुसार, ऐसी स्थिति में ‘पैनिक’ रेडिएशन से भी ज्यादा जानलेवा साबित हो सकता है. डॉक्टर ने परमाणु हमले के बाद के शुरुआती 48 घंटों को ‘गोल्डन पीरियड’ बताया है. अगर इन घंटों में सही फैसले लिए जाएं, तो रेडिएशन के घातक असर से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं डॉक्टर की वो ‘लाइफ-सेविंग’ गाइड, जो युद्ध के इन हालातों में आपके लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकती है. धमाका नहीं, ‘फॉलआउट’ है असली दुश्मनडॉ. हूमा शेख बताती हैं कि धमाके के बाद धूल और धुएं के कण रेडियोएक्टिव हो जाते हैं और हवा के साथ दूर-दूर तक फैलते हैं. इसे ही ‘फॉलआउट’ कहा जाता है. यह हवा में अगले 24 से 48 घंटों तक सबसे ज्यादा सक्रिय और घातक होता है. इसलिए, तैयारी डर नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है. शुरुआती 42 घंटों के ‘गोल्डन रूल्स’ क्या हैं- 1. बाहर निकलने की गलती न करें: धमाके के बाद अगर बाहर सब कुछ सामान्य भी दिख रहा हो, तब भी घर से बाहर कदम न रखें. रेडिएशन आंखों से दिखाई नहीं देता. अगले 48 घंटों तक अंदर रहना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है क्योंकि इस समय के बाद रेडिएशन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है. 2. घर को बनाएं अभेद्य किला:हवा के जरिए रेडिएशन घर के अंदर न आए, इसके लिए घर की सभी खिड़कियां, दरवाजे, रोशनदान और एग्जॉस्ट फैन बंद कर दें. डॉक्टर की सलाह है कि इन सभी जोड़ों को टेप (Tape) की मदद से पूरी तरह सील कर दें ताकि बाहर की हवा अंदर प्रवेश न कर सके. 3. घर के बीच वाले हिस्से (Center of the Building) में रहें:रेडिएशन से बचने के लिए कंक्रीट की दीवारें सबसे अच्छी सुरक्षा प्रदान करती हैं. कोशिश करें कि घर के सबसे बीच वाले कमरे में रहें, जहां आपके और बाहरी दुनिया के बीच कम से कम दो या तीन कंक्रीट की दीवारों का प्रोटेक्शन हो. बेसमेंट इसके लिए सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है. अगर आप हमले के समय बाहर थे, तो क्या करें?अगर ब्लास्ट के वक्त आप घर से बाहर थे, तो डॉक्टर कुछ कड़े प्रोटोकॉल फॉलो करने की सलाह देती हैं: कपड़े बदलें:घर में प्रवेश करते ही सबसे पहले अपने कपड़े उतारें. इन कपड़ों पर रेडियोएक्टिव कण हो सकते हैं. इन्हें तुरंत एक पॉलीथीन बैग में सील करके घर से दूर या सुरक्षित कोने में रख दें. शावर लें: शरीर को अच्छी तरह साफ करें, लेकिन याद रखें कंडीशनर का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. कंडीशनर रेडिएशन के कणों को आपके बालों और त्वचा से चिपका सकता है, जिससे खतरा बढ़ जाता है. खान-पान की सावधानी- सील्ड पानी: केवल बोतलबंद या पूरी तरह सील्ड पानी ही पिएं. नल का पानी या खुला रखा पानी दूषित हो सकता है. पैकेज्ड फूड: केवल वही भोजन लें जो पूरी तरह सील पैक हो. खाने से पहले डिब्बे या पैकेट को बाहर से गीले कपड़े से साफ जरूर कर लें. View this post on Instagram
बुरहानपुर में अध्यापक संगठनों ने बनाया संयुक्त शिक्षा मोर्चा:प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना, TET रद्द करने की मांग पर आंदोलन

मध्य प्रदेश के अध्यापक संगठनों ने 29 मार्च को भोपाल के गांधी भवन में एक संयुक्त बैठक की। इस बैठक में सभी प्रदेश अध्यक्षों की सहमति से एक प्रदेश स्तरीय चरणबद्ध आंदोलन पर निर्णय लिया गया। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा गणना और टीईटी (TET) परीक्षा को निरस्त करवाना है। साथ ही, सरकार से सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष रखने की मांग भी की गई है। मोर्चा के सदस्य ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने बताया कि आंदोलन के तहत 8 अप्रैल को जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर धरना आयोजित कर जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। अंत में, 18 अप्रैल को भोपाल में एक सामूहिक धरना प्रदर्शन करने पर सहमति बनी है। इस संयुक्त मोर्चे में कई प्रमुख अध्यापक संगठन और उनके पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें शिल्पी सिवान (प्रदेश अध्यक्ष, आजाद अध्यापक संघ), मनोहर दुबे (प्रदेश अध्यक्ष, प्रांतीय शिक्षक संघ), जगदीश यादव (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य शिक्षक संघ), राकेश दुबे (प्रदेश अध्यक्ष, शासकीय शिक्षक संगठन), भरत पटेल (प्रदेश अध्यक्ष, आजाद अध्यापक शिक्षक संघ), राकेश नायक (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य शिक्षक कांग्रेस), शालिगराम चौधरी (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य अध्यापक संघ), परमानंद डेहरिया (प्रदेश अध्यक्ष, NMOPS), डीके सिंगोर (प्रदेश अध्यक्ष, ट्रायबल वेलफेयर एसोसिएशन), राकेश पटेल (प्रदेश अध्यक्ष, गुरुजी शिक्षक संघ), रमाशंकर पांडे (प्रदेश अध्यक्ष, नवीन शिक्षक गुरुजी संघ), विनोद राठौर (महासचिव, PMUMS), पवन खरे (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, PMUMS), राजिक कुरैशी (प्रदेश अध्यक्ष, मध्यप्रदेश शिक्षक अध्यापक संघ), वीरेंद्र पटेल, भरत भार्गव (प्रदेश अध्यक्ष, अध्यापक अधिकार संघ), महेश भादे (प्रदेश अध्यक्ष, अध्यापक संघर्ष समिति) और राजा भैय्या गुर्जर (प्रदेश अध्यक्ष, क्रांतिकारी जनशिक्षक मोर्चा) प्रमुख हैं। मंडी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने भी संयुक्त शिक्षा मोर्चा को अपना सहयोग और समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि वे कर्मचारी हित में शिक्षकों के साथ खड़े हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में जाति समीकरण: प्रमुख मतदान कारक और क्यों 2026 एक निर्णायक मोड़ हो सकता है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 30, 2026, 12:28 IST तमिलनाडु चुनाव 2026: गौंडर्स, थेवर, वन्नियार और दलित जैसे प्रमुख जाति समूह अभी भी मायने रखते हैं, लेकिन उनका राजनीतिक संरेखण स्थिर होने के बजाय तेजी से अस्थिर हो रहा है तमिलनाडु में 23 अप्रैल, 2026 को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा और वोटों की गिनती 4 मई, 2026 को होगी। (पीटीआई/फ़ाइल) तमिलनाडु की चुनावी राजनीति अब भी जाति के आधार पर आकार ले रही है, लेकिन उस कठोर, पूर्वानुमानित तरीके से नहीं जैसा कि पहले हुआ करता था। आज मतदान का व्यवहार जाति समूहों, क्षेत्रीय प्रभुत्व, कल्याणकारी राजनीति, नेतृत्व की विश्वसनीयता और युवा और महिला मतदाताओं जैसे उभरते सामाजिक कारकों के स्तरित मिश्रण से प्रभावित होता है। प्रमुख जाति समूह – पश्चिम में गाउंडर्स, दक्षिण में थेवर, उत्तर में वन्नियार, और आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में दलित – अभी भी तमिलनाडु चुनावों में मायने रखते हैं, लेकिन उनका राजनीतिक संरेखण स्थिर होने के बजाय तेजी से अस्थिर हो रहा है। साथ ही, भूगोल, पार्टी गठबंधन, उम्मीदवार चयन, कल्याण वितरण और स्थानीय नेतृत्व नेटवर्क समान रूप से निर्णायक बन गए हैं। तमिलनाडु के चार प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र – कोंगु नाडु, कावेरी डेल्टा, उत्तरी बेल्ट (टोंडिमंडलम) और दक्षिणी जिले – अलग-अलग जाति संरचनाओं को दर्शाते हैं जो चुनावी परिणामों को आकार देते हैं। ये गतिशीलता अक्सर उच्च जोखिम वाले युद्ध के मैदानों में सबसे तेजी से काम करती है, जिसमें प्रमुख स्विंग निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल हैं जो शक्ति संतुलन को झुका सकते हैं। जैसे-जैसे राज्य 2026 के चुनावी मुकाबले के करीब पहुंच रहा है, गठबंधन-निर्माण और सीट-बंटवारे की बातचीत जटिलता की एक और परत जोड़ रही है, जो अक्सर जमीन पर पारंपरिक जाति संरेखण को नया आकार दे रही है। ये बदलाव अंततः एक कड़े संरचित चुनाव कैलेंडर के भीतर सामने आएंगे, जहां समय, चरण और अभियान की गति भी मतदाता व्यवहार को प्रभावित करती है। फिर भी, जैसा कि विश्लेषकों का कहना है, ‘जाति एल्गोरिदम’ अब परिणामों का गारंटीकृत भविष्यवक्ता नहीं है। क्षेत्रीय जाति समूह: तमिलनाडु में किसी भी चुनावी रणनीति की रीढ़ तमिलनाडु की राजनीति गहन रूप से क्षेत्रीय है और प्रत्येक क्षेत्र का अपना जातीय गणित और राजनीतिक झुकाव है। पश्चिमी तमिलनाडु में कोंगु नाडु गौंडर समुदाय का प्रभुत्व है। इसका झुकाव परंपरागत रूप से अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) और, विस्तार से, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर रहा है। 2021 के विधानसभा चुनावों में, गठबंधन ने यहां जोरदार प्रदर्शन किया, सेलम, इरोड और तिरुप्पुर जैसे जिलों में अधिकांश सीटें जीतीं। हालाँकि, हाल के रुझानों से पता चलता है कि इस प्रभुत्व की अब कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि कल्याणकारी योजनाएं और स्थानीय डीएमके नेटवर्क घुसपैठ कर रहे हैं। मध्य तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा इसे अक्सर ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है। यह द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) का गढ़ बना हुआ है। इस क्षेत्र में मुक्कुलाथोर उप-जातियों और एक महत्वपूर्ण दलित आबादी का मिश्रण है। 2021 में, DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यहां अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की, जिससे यह उजागर हुआ कि जाति संरेखण कृषि राजनीति और कल्याण वितरण के साथ कैसे मेल खाता है। उत्तरी तमिलनाडु, या टोंडिमंडलम, वन्नियार समुदाय का गढ़ है, जो एक प्रमुख सर्वाधिक पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) समूह है। पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) ने ऐतिहासिक रूप से इस वोट बैंक को जुटाया है, जो अक्सर गठबंधन के नतीजों को प्रभावित करता है। हालाँकि, उसी क्षेत्र में दलित मतदाता, विशेष रूप से विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन करने वाले, एक असंतुलन पैदा करते हैं, जिससे प्रतियोगिता अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हो जाती है। दक्षिणी तमिलनाडु या पांड्य नाडु मुक्कुलाथोर (थेवर) समुदाय का वर्चस्व है, जो परंपरागत रूप से एआईएडीएमके का समर्थन करता रहा है। लेकिन आंतरिक विभाजन और प्रतिस्पर्धी नेताओं ने एक समय एकजुट रहने वाले इस वोट बैंक को खंडित कर दिया है, जिससे यह क्षेत्र और अधिक अप्रत्याशित हो गया है। द बिग फोर: टीएन में प्रमुख जाति समूह और उनका प्रभाव दशकों से, तमिलनाडु चुनावों का विश्लेषण चार प्रमुख जाति समूहों के माध्यम से किया जाता रहा है: गौंडर्स (पश्चिम): ऐतिहासिक रूप से एआईएडीएमके के साथ गठबंधन किया थेवर/मुक्कुलाथोर (दक्षिण): एआईएडीएमके का पारंपरिक आधार वन्नियार (उत्तर): पीएमके द्वारा लामबंद, अक्सर गठबंधन पर निर्भर दलित (राज्यव्यापी उपस्थिति): आरक्षित सीटों पर प्रभावशाली, अक्सर द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधनों का समर्थन करते हैं तमिलनाडु में 2021 विधानसभा चुनावों के सीएसडीएस-लोकनीति चुनाव बाद सर्वेक्षण ने इन पैटर्न को स्पष्ट रूप से उजागर किया: थेवर और गौंडर मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर एआईएडीएमके गठबंधन का समर्थन किया, जबकि दलित, अल्पसंख्यक और उच्च जातियां डीएमके गठबंधन की ओर झुक गईं। लेकिन ये पैटर्न अब तनाव के संकेत दे रहे हैं। पारंपरिक वोट बैंकों का विखंडन तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़े बदलावों में से एक जाति-आधारित मतदान का विखंडन है। दक्षिणी जिलों में, एक बार समेकित मुक्कुलाथोर वोट अब कई नेताओं और गठबंधनों में विभाजित हो गया है। अलग-अलग खेमों में काम कर रहे एक ही समुदाय के राजनीतिक लोगों ने गुट के सामूहिक प्रभाव को कम कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि जब जाति नेतृत्व विखंडित होता है, तो वोट भी उसी के अनुरूप होते हैं। इसी तरह, कोंगु बेल्ट में, यह धारणा कमजोर हो रही है कि गौंडर मतदाता स्वचालित रूप से एआईएडीएमके का समर्थन करेंगे। कल्याण वितरण, आर्थिक चिंताएं और मजबूत स्थानीय डीएमके नेताओं ने मतदाता प्राथमिकताओं को नया आकार देना शुरू कर दिया है। संघीय राजनीतिक विश्लेषक आर इलंगोवन के हवाले से कहा गया है कि हालांकि जाति समूह अभी भी तमिलनाडु चुनावों में प्रमुख खिलाड़ी हैं, “मतदाता अब कठोर गुटों में नहीं जा रहे हैं”। उन्होंने कहा कि नेतृत्व की विश्वसनीयता, कल्याण वितरण और स्थानीय बिजली नेटवर्क मतदाता व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं। द्रविड़ विचारधारा बनाम जाति अंकगणित तमिलनाडु एक अनोखा विरोधाभास प्रस्तुत करता है। इसकी राजनीतिक नींव पेरियार के नेतृत्व वाले जाति-विरोधी द्रविड़ आंदोलन में निहित है, जिन्होंने सामाजिक न्याय और आरक्षण का समर्थन किया था। फिर भी, चुनावी प्रथा जाति गणना पर निर्भर रहती है। द्रमुक और अन्नाद्रमुक जैसी प्रमुख पार्टियाँ अक्सर प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में प्रमुख स्थानीय समुदायों से उम्मीदवारों को मैदान में उतारती हैं। लगभग 70% आबादी को ओबीसी के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बावजूद, उप-जाति की
Gold Silver Prices Surge | India

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी की कीमत में आज यानी 30 मार्च को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 3 हजार रुपए बढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 6 हजार रुपए बढ़कर 2.28 लाख रुपए पर पहुंच गई है। सोना इस साल ₹13 हजार महंगा हुआ इस साल सोने की कीमत में तेजी देखने को मिली है। बीते साल के आखिर में सोना 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जो अब 1.46 लाख रुपए पर है। यानी इसकी कीमत इस साल अब तक 22 हजार बढ़ चुकी है। हालांकि चांदी की कीमत में 2 हजार की कमी आई है। अमेरिका-ईरान तनाव पर निर्भर रहेगा बाजार जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की अगली चाल इन दो बातों पर निर्भर करेगी: मिडिल ईस्ट संकट: अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछलती हैं तो सोने-चांदी में दोबारा तेजी आ सकती है। अमेरिकी डेटा: अगर अमेरिका के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो डॉलर मजबूत होगा और इससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। एक्सपर्ट की राय: क्या अभी सोना खरीदना सही है? एक्सपर्ट्स के इनुसार, रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोना फिलहाल ‘करेक्शन फेज’ (कीमतों में सुधार) में है। शॉर्ट टर्म में मोमेंटम थोड़ा कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन लॉन्ग टर्म में तेजी का रुझान बरकरार है। ऐसे में निवेशक सोने में थोड़ा-थोड़ा करके निवेश कर सकते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Gold Silver Prices Surge | India

नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी की कीमत में आज यानी 30 मार्च को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 3 हजार रुपए बढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 6 हजार रुपए बढ़कर 2.28 लाख रुपए पर पहुंच गई है। सोना इस साल ₹13 हजार महंगा हुआ इस साल सोने की कीमत में तेजी देखने को मिली है। बीते साल के आखिर में सोना 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जो अब 1.46 लाख रुपए पर है। यानी इसकी कीमत इस साल अब तक 22 हजार बढ़ चुकी है। हालांकि चांदी की कीमत में 2 हजार की कमी आई है। अमेरिका-ईरान तनाव पर निर्भर रहेगा बाजार जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की अगली चाल इन दो बातों पर निर्भर करेगी: मिडिल ईस्ट संकट: अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछलती हैं तो सोने-चांदी में दोबारा तेजी आ सकती है। अमेरिकी डेटा: अगर अमेरिका के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो डॉलर मजबूत होगा और इससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। एक्सपर्ट की राय: क्या अभी सोना खरीदना सही है? एक्सपर्ट्स के इनुसार, रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोना फिलहाल ‘करेक्शन फेज’ (कीमतों में सुधार) में है। शॉर्ट टर्म में मोमेंटम थोड़ा कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन लॉन्ग टर्म में तेजी का रुझान बरकरार है। ऐसे में निवेशक सोने में थोड़ा-थोड़ा करके निवेश कर सकते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
बंगाली एक्टर राहुल बनर्जी की समुद्र में डूबने से मौत:शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, पुलिस का दावा- बिना इजाजत हुई शूटिंग; ममता बनर्जी ने दी श्रद्धांजलि

बंगाली सिनेमा के एक्टर राहुल अरुणोदय बनर्जी की कल हादसे में मौत हो गई। वह ओडिशा के तलसरी समुद्र तट पर टीवी शो ‘भोले बाबा पार करेगा’ की शूटिंग कर रहे थे, तभी डूब गए। इस हादसे में उनकी को-एक्ट्रेस श्वेता मिश्रा की जान बच गई। जांच में सामने आया कि प्रोडक्शन टीम ने न तो इजाजत ली थी और न ही प्रशासन को जानकारी दी थी। एक्टर की मौत पर बालासोर (ओडिशा) के एसपी ने बताया, ‘कल तलसरी पुलिस को दीघा पुलिस से सूचना मिली कि एक बंगाली अभिनेता की मौत हो गई और शव दीघा अस्पताल में है। जांच में पता चला कि शाम करीब 5:30 बजे राहुल बनर्जी और श्वेता मिश्रा शूटिंग के दौरान घुटने तक पानी में डांस कर रहे थे, तभी गड्ढे में गिर गए। टीम उन्हें तुरंत अस्पताल ले गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।’ एसपी ने आगे कहा, ‘टीम ने शूटिंग के लिए न जानकारी दी थी और न अनुमति ली थी। आगे की कार्रवाई के लिए तलसरी और दीघा पुलिस मिलकर काम कर रही है।’ को-स्टार का दावा- पैकअप के बाद हुआ हादसा पुलिस के अनुसार शूटिंग के दौरान एक्टर की मौत हुई, लेकिन को-स्टार दिंगता बागची ने पीटीआई से कहा कि पैकअप के बाद वह अकेले समुद्र में गए थे, जहां उनका पैर फंस गया। लहरों में फंसने के बाद सेट पर अफरा-तफरी मच गई। टीम उन्हें निकालकर दीघा अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पत्नी ने की प्राइवेसी की मांग एक्टर राहुल बनर्जी की पत्नी प्रियंका सरकार ने इस मुश्किल समय में प्राइवेसी की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है, यह हमारे लिए बहुत दुख का समय है। इस मुश्किल घड़ी में हम आपसे थोड़ा समय और प्राइवेसी देने की अपील करते हैं। हमारे परिवार में एक बच्चा, एक मां और बाकी सभी लोग मिलकर इस दुख को सहने की कोशिश कर रहे हैं। हम मीडिया से निवेदन करते हैं कि हमारी भावनाओं और सीमाओं का सम्मान करें, ज्यादा दखल न दें और हमें शांति से दुख मनाने दें। इस समय आपका साथ और समझ हमारे लिए बहुत मायने रखती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने श्रद्धांजलि दी एक्टर राहुल बनर्जी के निधन की खबर के बाद रविवार रात पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘युवा और लोकप्रिय अभिनेता राहुल अब हमारे बीच नहीं रहे। यह खबर सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ है और मैं हैरान हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि ऐसा कैसे हुआ। वह मेरे पसंदीदा कलाकारों में से एक थे और बहुत अच्छे इंसान थे। मैं उनके परिवार, करीबियों और चाहने वालों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं। राहुल का अचानक जाना बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ा नुकसान है।’ राहुल अरुणोदय बनर्जी को 2008 की फिल्म ‘चिरोदिनी तुमी जे अमार’ से पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘तुमी असबे बोले’ (2014), ‘जुल्फीकार’ (2016), ‘ब्योमकेश गोत्रो’ (2018), ‘बिदय ब्योमकेश’ (2018) और ‘द एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स’ (2025) में काम किया। उन्होंने टीवी सीरियल्स ‘होरोगौरी पिसे होटल’ और ‘मोहोना’ में भी काम किया।
बंगाली एक्टर राहुल बनर्जी की समुद्र में डूबने से मौत:शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, पुलिस का दावा- बिना इजाजत हुई शूटिंग; ममता बनर्जी ने दी श्रद्धांजलि

बंगाली सिनेमा के एक्टर राहुल अरुणोदय बनर्जी की कल हादसे में मौत हो गई। वह ओडिशा के तलसरी समुद्र तट पर टीवी शो ‘भोले बाबा पार करेगा’ की शूटिंग कर रहे थे, तभी डूब गए। इस हादसे में उनकी को-एक्ट्रेस श्वेता मिश्रा की जान बच गई। जांच में सामने आया कि प्रोडक्शन टीम ने न तो इजाजत ली थी और न ही प्रशासन को जानकारी दी थी। एक्टर की मौत पर बालासोर (ओडिशा) के एसपी ने बताया, ‘कल तलसरी पुलिस को दीघा पुलिस से सूचना मिली कि एक बंगाली अभिनेता की मौत हो गई और शव दीघा अस्पताल में है। जांच में पता चला कि शाम करीब 5:30 बजे राहुल बनर्जी और श्वेता मिश्रा शूटिंग के दौरान घुटने तक पानी में डांस कर रहे थे, तभी गड्ढे में गिर गए। टीम उन्हें तुरंत अस्पताल ले गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।’ एसपी ने आगे कहा, ‘टीम ने शूटिंग के लिए न जानकारी दी थी और न अनुमति ली थी। आगे की कार्रवाई के लिए तलसरी और दीघा पुलिस मिलकर काम कर रही है।’ को-स्टार का दावा- पैकअप के बाद हुआ हादसा पुलिस के अनुसार शूटिंग के दौरान एक्टर की मौत हुई, लेकिन को-स्टार दिंगता बागची ने पीटीआई से कहा कि पैकअप के बाद वह अकेले समुद्र में गए थे, जहां उनका पैर फंस गया। लहरों में फंसने के बाद सेट पर अफरा-तफरी मच गई। टीम उन्हें निकालकर दीघा अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पत्नी ने की प्राइवेसी की मांग एक्टर राहुल बनर्जी की पत्नी प्रियंका सरकार ने इस मुश्किल समय में प्राइवेसी की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है, यह हमारे लिए बहुत दुख का समय है। इस मुश्किल घड़ी में हम आपसे थोड़ा समय और प्राइवेसी देने की अपील करते हैं। हमारे परिवार में एक बच्चा, एक मां और बाकी सभी लोग मिलकर इस दुख को सहने की कोशिश कर रहे हैं। हम मीडिया से निवेदन करते हैं कि हमारी भावनाओं और सीमाओं का सम्मान करें, ज्यादा दखल न दें और हमें शांति से दुख मनाने दें। इस समय आपका साथ और समझ हमारे लिए बहुत मायने रखती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने श्रद्धांजलि दी एक्टर राहुल बनर्जी के निधन की खबर के बाद रविवार रात पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘युवा और लोकप्रिय अभिनेता राहुल अब हमारे बीच नहीं रहे। यह खबर सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ है और मैं हैरान हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि ऐसा कैसे हुआ। वह मेरे पसंदीदा कलाकारों में से एक थे और बहुत अच्छे इंसान थे। मैं उनके परिवार, करीबियों और चाहने वालों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं। राहुल का अचानक जाना बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ा नुकसान है।’ राहुल अरुणोदय बनर्जी को 2008 की फिल्म ‘चिरोदिनी तुमी जे अमार’ से पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘तुमी असबे बोले’ (2014), ‘जुल्फीकार’ (2016), ‘ब्योमकेश गोत्रो’ (2018), ‘बिदय ब्योमकेश’ (2018) और ‘द एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स’ (2025) में काम किया। उन्होंने टीवी सीरियल्स ‘होरोगौरी पिसे होटल’ और ‘मोहोना’ में भी काम किया।
फेस मास्क: गर्मियों में धूप, बालों से लेकर त्वचा और पिंपल्स तक की चिंता, तो आज ही अपनाएं ये फेस मास्क, 15 मिनट में इनसेंट ग्लोम

चेहरे के लिए मास्क: गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, धूल-मिट्टी लेकर आता है, जिसका सीधा असर हमारी त्वचा पर पड़ता है। इस वजह से सिल्क ऑयली, बेजान और मुंहासों से भरी नजर आती है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि त्वचा को ठंडक, गहराई से सफाई और ग्लोब ग्लॉप के लिए सही देखभाल रूटीन को जोड़ा जाए। इस समय सोशल मीडिया पर एक आसान और प्रभावशाली समर फेस मास्क वायरल हो रहा है, जिसे घर पर बेहद आसानी से तैयार किया जा सकता है। जानें कि इसका उपयोग कैसे किया जा सकता है। इस समर फेस मास्क को बनाने के लिए आपको सबसे ज्यादा जरूरत नहीं है। इसके लिए सिर्फ मुल्तानी मिट्टी, गुलाब जल और थोड़ा सा पानी काफी है, जो हर घर में आसानी से मिल जाता है। फेस मास्क बनाने और बनाने का तरीका इस फेस मास्क को बनाने के लिए एक कटोरी में एक उत्पाद मुल्तानी मिट्टी लें और इसमें गुलाब जल मिला लें। इसे अच्छे से मिक्स कर लें ताकि लॉजिस्टिक पेस्ट तैयार हो जाए। अब इस पेस्ट को फेस पर लगाएं और करीब 15 मिनट तक का समय बर्बाद करें। इसके बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। कुछ ही मिनटों में आपकी त्वचा ताजा और साफ नजर आने वाली है। मुल्तानी मिट्टी के फेस मास्क के फायदे जेंटल क्लींजिंगमुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल का ये फेस मास्क त्वचा को गहराई से साफ करता है, जिससे चेहरे पर जमी हुई गंदगी और अतिरिक्त तेल हट जाता है और त्वचा ताजा लगती है। ग्लोइंग स्किनयह फेस मास्क स्किन टोन को निखारने में मदद करता है और दाग-धब्बों को दिखाकर चेहरे पर कीन ग्लो लाता है। तेल नियंत्रणगर्मियों में तैलीय त्वचा एक बड़ी समस्या है। मुल्तानी मिट्टी के तेल को सोखकर त्वचा को मैट और साफ बनाने में मदद करता है। मुहानसन से राहतइस फेस मास्क में मौजूद एंटी-साइंटेंट और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पिंपल्स को कम करने और नए मुंहासों को आने से रोकने में मदद करते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट) गर्मियों में फेस मास्क (टी) मुल्तानी मिट्टी फेस पैक (टी) गुलाब जल त्वचा के फायदे (टी) चमकती त्वचा के लिए घरेलू उपचार (टी) तैलीय त्वचा का उपचार गर्मियों में (टी) घर पर प्राकृतिक फेस मास्क (टी) मुँहासे नियंत्रण फेस पैक (टी) DIY फेस मास्क भारत (टी) त्वचा देखभाल युक्तियाँ गर्मियों में (टी) चमकती त्वचा के लिए घरेलू उपचार









