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न्यूक्लियर अटैक हुआ तो रेडिएशन से कैसे बचें? डॉक्टर से जानें अगले 48 घंटों का ‘लाइफ-सेविंग’ प्लान; ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी!

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Nuclear Attack Survival Guide : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है. जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं, दुनिया पर ‘परमाणु हमले’ (Nuclear Attack) की आशंका ने लोगों की नींद उड़ा दी है. ऐसे में सवाल यह नहीं है कि धमाका कितना बड़ा होगा, बल्कि सवाल यह है कि उस भयावह पल के बाद जो ‘रेडियोएक्टिव फॉलआउट’ (Radioactive Fallout) हवा में घुलेगा, उससे अपनी और अपने परिवार की जान कैसे बचाई जाए?

ज्यादातर लोग मानते हैं कि परमाणु हमले में मौत सिर्फ धमाके से होती है, लेकिन इतिहास गवाह है कि असली तबाही वह अदृश्य रेडिएशन लाता है जो मीलों तक हवा के साथ फैलता है. जीपी और कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर हूमा शेख के अनुसार, ऐसी स्थिति में ‘पैनिक’ रेडिएशन से भी ज्यादा जानलेवा साबित हो सकता है.

डॉक्टर ने परमाणु हमले के बाद के शुरुआती 48 घंटों को ‘गोल्डन पीरियड’ बताया है. अगर इन घंटों में सही फैसले लिए जाएं, तो रेडिएशन के घातक असर से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं डॉक्टर की वो ‘लाइफ-सेविंग’ गाइड, जो युद्ध के इन हालातों में आपके लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकती है.

धमाका नहीं, ‘फॉलआउट’ है असली दुश्मन
डॉ. हूमा शेख बताती हैं कि धमाके के बाद धूल और धुएं के कण रेडियोएक्टिव हो जाते हैं और हवा के साथ दूर-दूर तक फैलते हैं. इसे ही ‘फॉलआउट’ कहा जाता है. यह हवा में अगले 24 से 48 घंटों तक सबसे ज्यादा सक्रिय और घातक होता है. इसलिए, तैयारी डर नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है.

शुरुआती 42 घंटों के ‘गोल्डन रूल्स’ क्‍या हैं-

1. बाहर निकलने की गलती न करें:
धमाके के बाद अगर बाहर सब कुछ सामान्य भी दिख रहा हो, तब भी घर से बाहर कदम न रखें. रेडिएशन आंखों से दिखाई नहीं देता. अगले 48 घंटों तक अंदर रहना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है क्योंकि इस समय के बाद रेडिएशन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है.

2. घर को बनाएं अभेद्य किला:
हवा के जरिए रेडिएशन घर के अंदर न आए, इसके लिए घर की सभी खिड़कियां, दरवाजे, रोशनदान और एग्जॉस्ट फैन बंद कर दें. डॉक्टर की सलाह है कि इन सभी जोड़ों को टेप (Tape) की मदद से पूरी तरह सील कर दें ताकि बाहर की हवा अंदर प्रवेश न कर सके.

3. घर के बीच वाले हिस्से (Center of the Building) में रहें:
रेडिएशन से बचने के लिए कंक्रीट की दीवारें सबसे अच्छी सुरक्षा प्रदान करती हैं. कोशिश करें कि घर के सबसे बीच वाले कमरे में रहें, जहां आपके और बाहरी दुनिया के बीच कम से कम दो या तीन कंक्रीट की दीवारों का प्रोटेक्शन हो. बेसमेंट इसके लिए सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है.

अगर आप हमले के समय बाहर थे, तो क्या करें?
अगर ब्लास्ट के वक्त आप घर से बाहर थे, तो डॉक्टर कुछ कड़े प्रोटोकॉल फॉलो करने की सलाह देती हैं:

  • कपड़े बदलें:
    घर में प्रवेश करते ही सबसे पहले अपने कपड़े उतारें. इन कपड़ों पर रेडियोएक्टिव कण हो सकते हैं. इन्हें तुरंत एक पॉलीथीन बैग में सील करके घर से दूर या सुरक्षित कोने में रख दें.
  • शावर लें:
    शरीर को अच्छी तरह साफ करें, लेकिन याद रखें कंडीशनर का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. कंडीशनर रेडिएशन के कणों को आपके बालों और त्वचा से चिपका सकता है, जिससे खतरा बढ़ जाता है.

खान-पान की सावधानी-

  • सील्ड पानी: केवल बोतलबंद या पूरी तरह सील्ड पानी ही पिएं. नल का पानी या खुला रखा पानी दूषित हो सकता है.
  • पैकेज्ड फूड: केवल वही भोजन लें जो पूरी तरह सील पैक हो. खाने से पहले डिब्बे या पैकेट को बाहर से गीले कपड़े से साफ जरूर कर लें.

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Nuclear Attack Survival Guide : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है. जैसे-जैसे दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं, दुनिया पर ‘परमाणु हमले’ (Nuclear Attack) की आशंका ने लोगों की नींद उड़ा दी है. ऐसे में सवाल यह नहीं है कि धमाका कितना बड़ा होगा, बल्कि सवाल यह है कि उस भयावह पल के बाद जो ‘रेडियोएक्टिव फॉलआउट’ (Radioactive Fallout) हवा में घुलेगा, उससे अपनी और अपने परिवार की जान कैसे बचाई जाए?

ज्यादातर लोग मानते हैं कि परमाणु हमले में मौत सिर्फ धमाके से होती है, लेकिन इतिहास गवाह है कि असली तबाही वह अदृश्य रेडिएशन लाता है जो मीलों तक हवा के साथ फैलता है. जीपी और कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर हूमा शेख के अनुसार, ऐसी स्थिति में ‘पैनिक’ रेडिएशन से भी ज्यादा जानलेवा साबित हो सकता है.

डॉक्टर ने परमाणु हमले के बाद के शुरुआती 48 घंटों को ‘गोल्डन पीरियड’ बताया है. अगर इन घंटों में सही फैसले लिए जाएं, तो रेडिएशन के घातक असर से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं डॉक्टर की वो ‘लाइफ-सेविंग’ गाइड, जो युद्ध के इन हालातों में आपके लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकती है.

धमाका नहीं, ‘फॉलआउट’ है असली दुश्मन
डॉ. हूमा शेख बताती हैं कि धमाके के बाद धूल और धुएं के कण रेडियोएक्टिव हो जाते हैं और हवा के साथ दूर-दूर तक फैलते हैं. इसे ही ‘फॉलआउट’ कहा जाता है. यह हवा में अगले 24 से 48 घंटों तक सबसे ज्यादा सक्रिय और घातक होता है. इसलिए, तैयारी डर नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है.

शुरुआती 42 घंटों के ‘गोल्डन रूल्स’ क्‍या हैं-

1. बाहर निकलने की गलती न करें:
धमाके के बाद अगर बाहर सब कुछ सामान्य भी दिख रहा हो, तब भी घर से बाहर कदम न रखें. रेडिएशन आंखों से दिखाई नहीं देता. अगले 48 घंटों तक अंदर रहना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है क्योंकि इस समय के बाद रेडिएशन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है.

2. घर को बनाएं अभेद्य किला:
हवा के जरिए रेडिएशन घर के अंदर न आए, इसके लिए घर की सभी खिड़कियां, दरवाजे, रोशनदान और एग्जॉस्ट फैन बंद कर दें. डॉक्टर की सलाह है कि इन सभी जोड़ों को टेप (Tape) की मदद से पूरी तरह सील कर दें ताकि बाहर की हवा अंदर प्रवेश न कर सके.

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  • कपड़े बदलें:
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  • शावर लें:
    शरीर को अच्छी तरह साफ करें, लेकिन याद रखें कंडीशनर का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. कंडीशनर रेडिएशन के कणों को आपके बालों और त्वचा से चिपका सकता है, जिससे खतरा बढ़ जाता है.

खान-पान की सावधानी-

  • सील्ड पानी: केवल बोतलबंद या पूरी तरह सील्ड पानी ही पिएं. नल का पानी या खुला रखा पानी दूषित हो सकता है.
  • पैकेज्ड फूड: केवल वही भोजन लें जो पूरी तरह सील पैक हो. खाने से पहले डिब्बे या पैकेट को बाहर से गीले कपड़े से साफ जरूर कर लें.

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