Tuesday, 07 Apr 2026 | 12:09 PM

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Writer santosh kumar claims to write dhurandhar 2 movie, said he wrote it back in 2023

Writer santosh kumar claims to write dhurandhar 2 movie, said he wrote it back in 2023

25 मिनट पहले कॉपी लिंक साउथ फिल्मों के राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर संतोष कुमार ने हाल ही में धुरंधर 2 की स्क्रिप्ट लिखने का दावा किया है। उनका कहना है कि ये स्क्रिप्ट उन्होंने 2023 में लिखी थी, जिसे अब धुरंधर 2 के नाम से बनाया गया है। उन्होंने ये भी दावा किया है कि उनके पास इससे जुड़े कई सबूत हैं, हालांकि अब तक उन्होंने न ही सबूत पेश किए हैं और न ही मेकर्स के खिलाफ किसी तरह की शिकायत दर्ज करवाई है। राइटर संतोष कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर धुरंधर 2 की स्क्रिप्ट चुराने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘आप सबने देखा होगा कि फिल्म बहुत अच्छी चल रही है। ये मूवी देखने के बाद मुझे पता चला कि ये मेरी स्क्रिप्ट है। मेरी कहानी है। मैंने इसे बहुत मेहनत से किया था। 2023 में मैंने यहां आकर बहुत सारी कंपनियों को स्टोरी नरेट की थी। मुझे कहा गया था कि अगर आपको बड़ा एक्टर चाहिए, तो बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी लेकर आओ। मैं सोनी के पास गया, जी के पास गया, टी-सीरीज के पास गया, धर्मा प्रोडक्शन के पास गया।’ संतोष कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस की झलक। आगे उन्होंने कहा, ‘मुझे इस फिल्म की स्क्रिप्ट के लिए आदित्य रॉय कपूर चाहिए था। मैंने बहुत कोशिश की। मैंने बहुत डायरेक्टर्स को स्क्रिप्ट भेजी। मैं स्क्रीनराइटर एसोसिएशन का हिस्सा था, मैंने वहां भी स्क्रिप्ट रजिस्टर करवाई है, नवंबर 2023 में। मेरे पास सारे सबूत हैं। मेरे पास तस्वीरें हैं, स्क्रिप्ट हैं, स्केच हैं। मैं इस फिल्म के खिलाफ केस कर रहा हूं। फिल्म अच्छी है, लेकिन उन लोगों ने मेरे काम का दुरुपयोग किया है। फिल्म सिनेमा एंटरटेनमेंट थी, लेकिन उन्होंने इसे पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा बना दिया।’ दैनिक भास्कर ने इन दावों पर धुरंधर-2 के मेकर्स का पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन खबर लिखे जाने तक टीम की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। मीडिया से बातचीत में संतोष कुमार ने ये भी कहा है कि उनकी तरह साउथ से कई राइटर आते हैं, लेकिन उन्हें यहां काम नहीं मिलता और फिर उन्हीं की क्रिएटिविटी का मिसयूज किया जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

रागी या चावल का डोसा: सेहत के लिए कौन अधिक फायदेमंद, वजन घटाने से लेकर शुगर कंट्रोल तक, जानें दोनों के बेनिफिट्स

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होमफोटोलाइफ़फूड रागी या चावल: सेहत के लिए कौन सा डोसा है बेस्ट? जानें दोनों के बेनिफिट्स Last Updated:April 01, 2026, 11:17 IST Rice Dosa Vs Ragi Dosa Heath Benefits : ब्रेकफास्ट की प्‍लेट में इन दिनों रागी डोसा काफी पॉपुलर हो रहा है. इसे अधिक न्‍यूट्रिशन से भरपूर माना जा रहा है. तो क्या सच में पारंपरिक डोसा सेहत के मामले में रागी से पीछे छूट गया है? जानें वजन घटाने से लेकर शुगर कंट्रोल तक, कौन सा डोसा है आपके लिए बेहतर. जब भी हम दक्षिण भारतीय खाने की बात करते हैं, तो सबसे पहले मन में ‘डोसा’ का ही खयाल आता है. इसे बनाना आसान है और ये सेहत के लिए भी काफी अच्‍छा होता है. यही वजह है कि देशभर में यह काफी पॉपुलर है और घर घर के किचन में इसे बनाया जा रहा है. लेकिन आज-कल हेल्‍थ कॉन्‍शस लोगों के दिमाग में एक बड़ा सवाल चल रहा है कि क्या पारंपरिक सफेद चावल का डोसा सेहत के लिए अच्‍छा है? या फिर ‘रागी’ का डोसा सेहत(ragi dosa benefits) का नया ‘सुपरफूड’ है. सफेद चावल के डोसे के फायदे: सफेद चावल का डोसा सदियों से भारतीय थाली का हिस्सा रहा है. यह बहुत ही हल्का होता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) देता है, जो सुबह के नाश्ते के लिए इसे एक परफेक्ट विकल्प बनाता है. फर्मेंटेशन के कारण, यह प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जिससे यह पचने में बेहद आसान हो जाता है और पेट से जुड़ी समस्याएं नहीं होतीं. यह कार्बोहाइड्रेट का एक प्रमुख स्रोत है, जो आपको पूरा दिन एक्टिव रखता है. रागी डोसा: दूसरी तरफ, रागी (जिसे नाचनी या फिंगर मिलेट भी कहते हैं) एक ऐसा मिलेट है जो पुराने समय से ही भारत में खाया जाता रहा है, लेकिन अब यह वापस ट्रेंड में है. इसे ‘न्यूट्रिशनल पावरहाउस’ कहा जाता है, क्योंकि इसमें सफेद चावल की तुलना में बहुत अधिक मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और आयरन होता है. रागी डोसा न केवल सेहतमंद है, बल्कि यह पारंपरिक डोसा की तरह ही स्वादिष्ट और कुरकुरा बनता है. Add News18 as Preferred Source on Google वेट लॉस के लिए कौन बेहतर- अगर आपका लक्ष्य ‘वजन घटाना’ है, तो रागी डोसा एक बेहतर विकल्‍प है. इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो आपको लंबे समय तक ‘फुल’ (पेट भरा हुआ) महसूस कराती है. इससे आप बार-बार नहीं खाते और कैलोरी इनटेक पर कंट्रोल रहता है. इसके विपरीत, सफेद चावल के डोसा में फाइबर कम और कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है, जिससे भूख जल्दी लग सकती है. डायबिटीज और शुगर कंट्रोल के लिए बेस्ट ऑप्‍शन- डायबिटीज के मरीजों के लिए भी रागी डोसा एक वरदान से कम नहीं है. सफेद चावल का ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ (GI) बहुत ज्यादा होता है, जिसका मतलब है कि इसे खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. रागी का ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ बहुत कम होता है और इसमें ‘पॉलीफेनोल्स’ होते हैं, जो ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा करते हैं, जिससे शुगर लेवल को मैनेज करना आसान हो जाता है. हड्डियों की मजबूती के लिए रागी बेस्‍ट- कैल्शियम की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए रागी डोसा बेहतर है. रागी में दूध से भी अधिक कैल्शियम होता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के लिए बहुत जरूरी है. सफेद चावल में कैल्शियम बहुत कम होता है. इसलिए, अगर आप अपनी हड्डियों की सेहत में सुधार करना चाहते हैं या बढ़ते बच्चों को सही पोषण देना चाहते हैं, तो रागी डोसा को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. इसके अलावा, रागी डोसा एमीनो एसिड्स, जैसे ट्रिप्टोफैन, का एक अच्छा स्रोत है, जो तनाव (Stress) को कम करने और बेहतर नींद दिलाने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं, जिससे उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं और त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है. इसके अलावा, रागी डोसा एमीनो एसिड्स, जैसे ट्रिप्टोफैन, का एक अच्छा स्रोत है, जो तनाव (Stress) को कम करने और बेहतर नींद दिलाने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं, जिससे उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं और त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है. आपकी थाली के लिए क्या है सही? अगर आपका मुख्य उद्देश्य ‘वजन घटाना’, ‘शुगर कंट्रोल’ करना या ‘हड्डियों को मजबूत’ बनाना है, तो रागी डोसा एक बेहतर विकल्प है. हालांकि, अगर आप सिर्फ तुरंत ऊर्जा चाहते हैं और पाचन बिल्कुल सही है, तो चावल का डोसा भी कभी-कभी खाया जा सकता है. सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी डाइट में दोनों को शामिल करें ताकि स्वाद और सेहत का संतुलन बना रहे. First Published : April 01, 2026, 11:17 IST

दिल्ली के युवाओं में बढ़ रहे कोलोरेक्टल कैंसर के मामले, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, जल्द कराएं जांच

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Colon Caner Early Warning Signs: दिल्ली के युवाओं में कोलोरेक्टल कैंसर यानी आंतों के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. पहले इसे बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान की गलत आदतों के कारण अब 25 से 65 वर्ष की आयु के कामकाजी लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. हालिया गट हेल्थ अवेयरनेस सर्वे से यह साफ हुआ है कि बड़ी संख्या में लोग कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण बीमारी का पता अक्सर एडवांस स्टेज में चलता है और इलाज करना मुश्किल हो जाता है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक इस सर्वे में 14 भारतीय शहरों के 10,000 से अधिक लोगों को शामिल किया गया, जिसमें दिल्ली के आंकड़े सबसे अधिक चिंताजनक सामने आए. यहां 80% से ज्यादा लोग मल में खून आने जैसे गंभीर लक्षण को भी सामान्य समस्या समझते हैं और इसे कैंसर की चेतावनी नहीं मानते. विशेषज्ञ इसे लक्षणों का खतरनाक सामान्यीकरण बताते हैं, जहां लोग शरीर के संकेतों को हल्के में लेकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही बीमारी को गंभीर रूप देने में बड़ी भूमिका निभाती है. डॉक्टर्स के अनुसार इस स्थिति के पीछे सेल्फ-मेडिकेशन की आदत भी एक बड़ी वजह है. सर्वे में पाया गया कि लगभग 90% लोग कब्ज, दस्त या पेट दर्द जैसी समस्याओं के लिए डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय घरेलू उपाय, इंटरनेट पर मिली जानकारी या मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेना पसंद करते हैं. इससे असली बीमारी छिप जाती है और सही समय पर जांच नहीं हो पाती. केवल 10% लोग ही समय रहते विशेषज्ञ से संपर्क करते हैं, बीमारी को छिपाना एक चिंताजनक संकेत है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर्स का कहना है कि भारत में हर साल करीब 65000 कोलोरेक्टल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं, जिनमें से 50% से अधिक मामलों में देरी से पहचान के कारण मृत्यु हो जाती है. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब यह बीमारी युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है. सर्वे में शामिल करीब 40% युवाओं ने माना कि उन्होंने पाचन से जुड़ी समस्याओं को सामान्य मानकर टाल दिया, जिससे बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती गई और जब तक जांच कराई गई, तब तक यह गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी थी. इस बढ़ते खतरे के पीछे खराब लाइफस्टाइल एक प्रमुख कारण बनकर उभरी है. सर्वे के अनुसार 86% लोग नियमित रूप से बाहर का या पैकेज्ड फूड खाते हैं, जिसमें फाइबर की कमी और प्रिजर्वेटिव्स की ज्यादा मात्रा होती है. केवल 35.5% लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं और लगभग 40% लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जो कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है. इसके अलावा लंबे समय तक बैठे रहने की आदत, तनाव और अनियमित दिनचर्या भी पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं. डॉक्टर्स ने यह भी चेतावनी दी है कि कोलोरेक्टल कैंसर हमेशा दर्द के साथ नहीं होता, जिससे इसकी पहचान और भी कठिन हो जाती है. लगातार पेट फूलना, मल त्याग की आदतों में बदलाव, अधूरा पेट साफ होने का एहसास, वजन कम होना या मल में खून आना जैसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर जिन लोगों के परिवार में कैंसर का इतिहास है, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. समय पर जांच, सही जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह से इस गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है. शुरुआती स्टेज में इस कैंसर का इलाज ज्यादा सफल रहता है.

मंडला-जबलपुर हाईवे पर 30 फीट नीचे खाई में गिरा हाईवा:कैबिन में फंसा ड्राइवर-कंडक्टर; सुरक्षित निकालकर दोनों को पहुंचाया अस्पताल

मंडला-जबलपुर हाईवे पर 30 फीट नीचे खाई में गिरा हाईवा:कैबिन में फंसा ड्राइवर-कंडक्टर; सुरक्षित निकालकर दोनों को पहुंचाया अस्पताल

मंडला-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर टिकरिया थाना क्षेत्र के ग्राम सहजनी के पास बुधवार सुबह सड़क हादसा हो गया। मंडला से जबलपुर की ओर जा रहा एक हाईवा अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 20 से 30 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में वाहन चालक और हेल्पर घायल हो गए, जिन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। हादसे के बाद हेल्पर वाहन के केबिन में बुरी तरह फंस गया था। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 और टिकरिया पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। केबिन में फंसे हेल्पर को सुरक्षित बाहर निकाला पुलिस और ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद केबिन में फंसे हेल्पर को सुरक्षित बाहर निकाला। जानकारी के अनुसार, वाहन में चालक रंजीत यादव (25) निवासी जबलपुर और हेल्पर अंकित यादव (22) निवासी वल्देबाग, जबलपुर सवार थे। चालक किसी तरह वाहन से बाहर निकलने में सफल रहा था। दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया रेस्क्यू के बाद दोनों घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नारायणगंज पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की हालत खतरे से बाहर है। हेल्पर अंकित यादव के हाथ और कलाई में चोट आई है, जिसका उपचार जारी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

दातून करने से दांत को मिलता है चमत्कारिक फायदा, मसूड़ों की होती है मालिश, जाने सही तरीका

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चंदौलीः आज के इस दौर में जहां टूथब्रश और टूथपेस्ट ने हमारी दिनचर्या में स्थायी जगह बना ली है. वहीं, कभी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा रहा दातून अब धीरे-धीरे लोगों की आदतों से गायब होता जा रहा है. पहले जहां लोग नीम या बबूल के दातून से अपने दिन की शुरुआत करते थे. वहीं, अब यह परंपरा केवल गांवों या खास अवसरों तक सीमित रह गई है. हालांकि, दातून के महत्व को लेकर विशेषज्ञ आज भी इसे बेहद उपयोगी मानते हैं. इसी विषय पर डॉक्टर रिद्धि पांडेय ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि दातून का इस्तेमाल केवल एक पुरानी परंपरा नहीं, बल्कि दांतों और मसूड़ों के लिए एक प्राकृतिक औषधि के रूप में भी काम करता है. नीम के दातून में होता है ये गुण डॉक्टर पांडे ने बताया कि दातून का उपयोग अगर नियमित रूप से किया जाए, तो यह मुंह की स्वच्छता बनाए रखने में बेहद प्रभावी होता है. खासतौर पर नीम का दातून एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जो मुंह में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करने में मदद करता है. इससे पायरिया, मसूड़ों की सूजन, दांतों की सड़न और सांसों की बदबू जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. उन्होंने यह भी बताया कि दातून करने से मसूड़ों की हल्की मालिश होती है, जिससे उनमें मजबूती आती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. इसके अलावा, दांतों पर जमा प्लाक को हटाने में भी यह सहायक साबित होता है. डॉक्टर यह भी स्पष्ट करती हैं कि दातून अपनाने का मतलब यह नहीं है कि ब्रश को पूरी तरह छोड़ दिया जाए, बल्कि अगर सुबह ब्रश से पहले दातून का उपयोग किया जाए, तो यह और भी बेहतर परिणाम दे सकता है. इससे मुंह में तुरंत ताजगी का एहसास होता है और दिनभर फ्रेशनेस बनी रहती है. सभी दातून के होते हैं औषधीय गुण वहीं, उन्होंने बताया कि नीम के अलावा बबूल, अमरूद और आंवला जैसे पेड़ों के दातून भी उपयोगी माने जाते हैं. हर प्रकार के दातून के अपने-अपने औषधीय गुण होते हैं, जो न सिर्फ दांतों बल्कि पूरे शरीर के लिए लाभकारी हो सकते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग दातून का उपयोग करते हैं और उनके दांत ज्यादा स्वस्थ पाए जाते हैं. यह दर्शाता है कि पारंपरिक तरीकों में आज भी विज्ञान छिपा हुआ है. बता दें किबदलते समय के साथ जहां हम आधुनिक सुविधाओं को अपना रहे हैं. वहीं, यह भी जरूरी है कि हम अपनी पुरानी और प्राकृतिक आदतों को पूरी तरह न भूलें. दातून को अपनी जीवनशैली में शामिल कर हम न केवल अपने दांतों को मजबूत बना सकते हैं, बल्कि कई प्रकार की मौखिक बीमारियों से भी बचाव कर सकते हैं.

रिपोर्ट- ईरान जंग में शामिल हो सकता है UAE:होर्मुज को जबरन खोलने में अमेरिका की मदद करेगा; UN में सिक्योरिटी फोर्स के लिए प्रस्ताव

रिपोर्ट- ईरान जंग में शामिल हो सकता है UAE:होर्मुज को जबरन खोलने में अमेरिका की मदद करेगा; UN में सिक्योरिटी फोर्स के लिए प्रस्ताव

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) US-ईरान जंग में सीधे तौर पर शामिल होने की तैयारी कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा हैं। इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को जबरन खोलने के लिए सभी तरीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जा रही है। इसके तहत हार्मुज सिक्योरिटी फोर्स बनाई जाएई, जो जहाजों की सुरक्षा तय करेगी। होर्मुज एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को बंद कर रखा है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। UAE पहला खाड़ी देश बन सकता है जो इस जंग में सीधे तौर पर हिस्सा लेगा। हाल के दिनों में ईरान ने UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। अब तक करीब 2500 हमले हो चुके हैं, जिनमें एयरपोर्ट, रिहायशी इमारत और ऑयल फैसिलिटी जैसे नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है। UAE दूसरे देशों से गठबंधन बनाने की मांग कर रहा UAE अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों से अपील कर रहा है कि वे एक साथ गठबंधन बनाएं और स्ट्रेट को सुरक्षित करें। UAE अधिकारी ने WSJ को बताया कि ईरान अपनी जान बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है, इसलिए वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी बर्बाद करने को तैयार है। UAE का मानना है कि अगर UNSC से प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाए तो वर्तमान में झिझक रहे एशियाई और यूरोपीय देश भी हार्मुज को खुलवाने में मदद करने के लिए आगे आ सकते हैं। रूस और चीन UAE के प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और चीन इस प्रस्ताव को वीटो (रोक) कर सकते हैं। रिपोर्ट में खाड़ी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि भले ही प्रस्ताव पास न हो, UAE फिर भी सैन्य प्रयासों में समर्थन देने के लिए तैयार है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से UAE की तेल आपूर्ति, शिपिंग और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यह इसे अपनी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मानता है। UAE माइंस हटाने, लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और अमेरिकी नेतृत्व वाले ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाने पर विचार कर रहा है। उसके पास जेबेल अली पोर्ट, एयरबेस और आधुनिक फाइटर जेट जैसे संसाधन मौजूद हैं। UAE ने अमेरिका से यह सुझाव भी दिया है कि वह हार्मुज में स्थित द्वीपों, खासकर अबू मूसा द्वीप पर कब्जा कर ले। ईरान पिछले लगभग पांच दशकों से इस द्वीप पर कब्जा किए हुए है, लेकिन UAE इसे अपना बताता है। UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर बैन लगाया UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दुनिया भर में इस बात पर सहमति है कि होर्मुज में जहाजों को आने-जाने की आजादी होनी चाहिए। सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देश भी अब ईरान के खिलाफ हो गए हैं। वे चाहते हैं कि युद्ध तब तक चले जब तक ईरान की सरकार कमजोर न हो जाए। बहरीन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है। गुरुवार को इसपर वोट हो सकता है। पहले UAE ईरान को पैसे से मदद करता था और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध थे। युद्ध शुरू होने से पहले UAE शांति बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब UAE ईरान को खतरनाक पड़ोसी मान रहा है। UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर भी रोक लगा दी है। साथ ही कुछ ईरानी संस्थाओं को भी बंद कर दिया है। ईरान ने अमेरिका का साथ देने पर हमले की चेतावनी दी ईरान जंग शुरू होने के बाद कई बार खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी दे चुका है कि अगर कोई भी देश अमेरिका की जंग में मदद करेगा या हार्मुज को फिर से खोलने के प्रयासों में शामिल होगा, तो वह उस देश के अहम बुनियादी ढांचों को हमला कर नष्ट कर देगा। ईरान ने विशेष रूप से UAE को निशाना बनाते हुए कहा था कि अगर उन्होंने अमेरिका की मदद की तो उनके बंदरगाहों, एल्यूमिनियम प्लांट्स, गैस फील्ड्स, और बिजली सुविधाओं पर हमले किए जाएंगे। होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए अहम क्यों ईरान की मजबूती की सबसे बड़ी वजह हार्मुज की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं।

रिपोर्ट- ईरान जंग में शामिल हो सकता है UAE:होर्मुज को जबरन खोलने में अमेरिका की मदद करेगा; UN में सिक्योरिटी फोर्स के लिए प्रस्ताव

रिपोर्ट- ईरान जंग में शामिल हो सकता है UAE:होर्मुज को जबरन खोलने में अमेरिका की मदद करेगा; UN में सिक्योरिटी फोर्स के लिए प्रस्ताव

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) US-ईरान जंग में सीधे तौर पर शामिल होने की तैयारी कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा हैं। इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को जबरन खोलने के लिए सभी तरीकों का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी जा रही है। इसके तहत हार्मुज सिक्योरिटी फोर्स बनाई जाएई, जो जहाजों की सुरक्षा तय करेगी। होर्मुज एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जिससे दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को बंद कर रखा है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। UAE पहला खाड़ी देश बन सकता है जो इस जंग में सीधे तौर पर हिस्सा लेगा। हाल के दिनों में ईरान ने UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। अब तक करीब 2500 हमले हो चुके हैं, जिनमें एयरपोर्ट, रिहायशी इमारत और ऑयल फैसिलिटी जैसे नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है। UAE दूसरे देशों से गठबंधन बनाने की मांग कर रहा UAE अमेरिका, यूरोप और एशिया के देशों से अपील कर रहा है कि वे एक साथ गठबंधन बनाएं और स्ट्रेट को सुरक्षित करें। UAE अधिकारी ने WSJ को बताया कि ईरान अपनी जान बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है, इसलिए वह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी बर्बाद करने को तैयार है। UAE का मानना है कि अगर UNSC से प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाए तो वर्तमान में झिझक रहे एशियाई और यूरोपीय देश भी हार्मुज को खुलवाने में मदद करने के लिए आगे आ सकते हैं। रूस और चीन UAE के प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और चीन इस प्रस्ताव को वीटो (रोक) कर सकते हैं। रिपोर्ट में खाड़ी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि भले ही प्रस्ताव पास न हो, UAE फिर भी सैन्य प्रयासों में समर्थन देने के लिए तैयार है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से UAE की तेल आपूर्ति, शिपिंग और खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यह इसे अपनी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन मानता है। UAE माइंस हटाने, लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और अमेरिकी नेतृत्व वाले ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाने पर विचार कर रहा है। उसके पास जेबेल अली पोर्ट, एयरबेस और आधुनिक फाइटर जेट जैसे संसाधन मौजूद हैं। UAE ने अमेरिका से यह सुझाव भी दिया है कि वह हार्मुज में स्थित द्वीपों, खासकर अबू मूसा द्वीप पर कब्जा कर ले। ईरान पिछले लगभग पांच दशकों से इस द्वीप पर कब्जा किए हुए है, लेकिन UAE इसे अपना बताता है। UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर बैन लगाया UAE के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दुनिया भर में इस बात पर सहमति है कि होर्मुज में जहाजों को आने-जाने की आजादी होनी चाहिए। सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देश भी अब ईरान के खिलाफ हो गए हैं। वे चाहते हैं कि युद्ध तब तक चले जब तक ईरान की सरकार कमजोर न हो जाए। बहरीन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा रहा है। गुरुवार को इसपर वोट हो सकता है। पहले UAE ईरान को पैसे से मदद करता था और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध थे। युद्ध शुरू होने से पहले UAE शांति बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब UAE ईरान को खतरनाक पड़ोसी मान रहा है। UAE ने ईरानी लोगों के देश में आने पर भी रोक लगा दी है। साथ ही कुछ ईरानी संस्थाओं को भी बंद कर दिया है। ईरान ने अमेरिका का साथ देने पर हमले की चेतावनी दी ईरान जंग शुरू होने के बाद कई बार खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी दे चुका है कि अगर कोई भी देश अमेरिका की जंग में मदद करेगा या हार्मुज को फिर से खोलने के प्रयासों में शामिल होगा, तो वह उस देश के अहम बुनियादी ढांचों को हमला कर नष्ट कर देगा। ईरान ने विशेष रूप से UAE को निशाना बनाते हुए कहा था कि अगर उन्होंने अमेरिका की मदद की तो उनके बंदरगाहों, एल्यूमिनियम प्लांट्स, गैस फील्ड्स, और बिजली सुविधाओं पर हमले किए जाएंगे। होर्मुज स्ट्रेट ईरान के लिए अहम क्यों ईरान की मजबूती की सबसे बड़ी वजह हार्मुज की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं।

गर्मियों में स्विमिंग करने का है प्लान? डॉक्टर की बताई 4 बातों का रखें ध्यान, नहीं होगी आंखों की समस्या

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Last Updated:April 01, 2026, 10:37 IST Summer Swimming Tips: गर्मी से राहत पाने के लिए कई लोग रोज स्विमिंग करना पसंद करते हैं. अगर आप स्विमिंग पूल में जाना पसंद करते हैं, तो पूल में उतरने से पहले शावर लेना, गॉगल्स पहनना, कॉन्टैक्ट लेंस हटाना और बाद में आंखें धोना जरूरी है. पूल में क्लोरीन और बैक्टीरिया होते हैं, जो आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में सावधानी बरतनी चाहिए. स्विमिंग पूल में हमेशा गॉगल्स लगाकर उतरना चाहिए. Doctor Tips To Keep Eyes Healthy: गर्मियों की तपिश से बचने के लिए कई लोग स्विमिंग पूल में घंटों बिताते हैं. स्विमिंग पूल में समय बिताना बेहद आरामदायक अनुभव होता है. अक्सर लोग इस मौसम में नजदीकी स्विमिंग पूल में जाना पसंद करते हैं, लेकिन इस दौरान आंखों की सेफ्टी को इग्नोर कर देते हैं. डॉक्टर्स की मानें तो स्विमिंग पूल के पानी में मौजूद क्लोरीन और बैक्टीरिया आंखों में जलन, खुजली और गंभीर कॉर्नियल इन्फेक्शन का कारण बन सकते हैं. इससे बचने के लिए लोगों को पूल में उतरने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि आंखें सुरक्षित रहें और आप स्विमिंग का मजा भी ले पाएं. मुंबई के ASG विजन आई सेंटर के सीनियर ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु मेहता ने HT को बताया स्विमिंग पूल में उतरने से पहले शरीर और चेहरे को साफ पानी से धोना बहुत जरूरी है. चेहरे पर लगे तेल, लोशन या क्रीम क्लोरीन के साथ मिलकर क्लोरामाइन बनाते हैं. यही क्लोरामाइन आंखों में जलन और खुजली की मुख्य वजह होता है. पहले शावर लेने से इस रासायनिक प्रतिक्रिया को रोका जा सकता है. इसके अलावा स्विमिंग करते वक्त आंखों की सुरक्षा के लिए अच्छी क्वालिटी वाले गॉगल्स पहनना जरूरी है. आप ऐसे गॉगल्स चुनें, जो आंखों के चारों ओर अच्छी पकड़ बनाएं, ताकि पानी अंदर न जा सके. ये गॉगल्स पूल के केमिकल्स को आंखों से दूर रखते हैं और टियर फिल्म को सुरक्षित रखते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि स्विमिंग के दौरान कॉन्टैक्ट लेंस पहनना इन्फेक्शन के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है. पानी के संपर्क में आने पर लेंस पर बैक्टीरिया पनप सकते हैं. क्लोरीन लेंस से चिपक जाता है और बैक्टीरिया को आंखों के संपर्क में रखता है, जिससे कॉर्नियल अल्सर हो सकता है. अगर आपकी नजर कमजोर है, तो साधारण लेंस के बजाय पावर वाले चश्मे का उपयोग करें. इसके अलावा स्विमिंग पूल से बाहर निकलने के बाद अपनी आंखों को साफ पानी से धोएं. आंखें बंद करके उन पर हल्के हाथ से पानी के छींटें मारें. इससे पलकों पर जमा क्लोरीन और रसायन निकल जाते हैं. इससे आंखों की लाली, ड्राइनेस और स्विमर्स आई की समस्या से बचाव हो सकता है. अगर प्रॉब्लम ज्यादा हो, तो टियर आई ड्रॉप्स का यूज कर सकते हैं. डॉक्टर मेहता चेतावनी देते हैं कि स्विमिंग पूल के पानी के संपर्क में आने के बाद आंखों को कभी न रगड़ें, क्योंकि इससे रगड़ लगने से कॉर्निया को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है. दरअसल स्विमिंग पूल का पानी क्लोरीन और सूक्ष्म कीटाणुओं से भरा होता है. जब आप स्विमिंग के बाद अपनी आंखों को रगड़ते हैं, तो हाथों पर मौजूद गंदगी और पूल के केमिकल्स सेंसिटिव टिश्यूज के संपर्क में आ जाते हैं. सबसे बड़ा खतरा कॉर्नियल एब्रेशन का होता है. रगड़ने से आंखों की बाहरी पारदर्शी परत कॉर्निय पर बारीक खरोंचें आ सकती हैं. अगर पानी में मौजूद बैक्टीरिया इन खरोंचों में प्रवेश कर जाएं, तो यह कॉर्नियल अल्सर या गंभीर संक्रमण का रूप ले सकता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 01, 2026, 10:37 IST

कर्नाटक में कांग्रेस को हराने के लिए मतदाताओं से अपील करते हुए कहा- मरते दम तक याद रखूंगा

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय संसदीय समिति के सदस्य और पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने मंगलवार को दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के लिए प्रचार किया। पार्टी विपक्ष की बैठक को बताते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पर ‘धोखा और विश्वास’ का आरोप लगाते हुए कहा कि स्थिर सरकार ‘दिनदहाड़े लूट’ में लगी है। उन्होंने दावा किया कि बागलकोट और दावणगेरे के लोगों की जोड़ी आगामी चुनाव में सिद्धारमैया को सत्य से हटाने का फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव में पैसे के इस्तेमाल पर करोड़ों रुपये खर्च कर चुनाव लड़ने वालों को सबक सिखाया जाना चाहिए। उन्होंने पार्टी के वैयक्तिक उम्मीदवार श्रीनिवास दासकारियप्पा का पूरा समर्थन करने और उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपील की। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बंगालकोट और दावणगेरे में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए फंड को तेलंगाना की ओर मोड़ दिया गया है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर भाजपा के गठबंधन पर गरीबों के हित की कई नीतियां बंद करने का भी आरोप लगाना शुरू कर दिया। अपनी उम्र और दान का खुलासा करते हुए येदियुरप्पा ने कहा कि 85 साल की उम्र में भी वह प्रचार के लिए आए थे, लेकिन हर जगह नहीं जा सके। उन्होंने सिद्धांत से अभियान की जिम्मेदारी खुद ली और अगले दिन से खुद को सफल काम करने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा, ‘अगर आप ऐसा करेंगे तो मैं आपको अपनी आखिरी सांस तक याद रखूंगा।’ येदियुरप्पा ने कहा कि लोग कांग्रेस सरकार के कुशासन से चिंतित हैं और अपील करते हैं कि चुनावी रैली में उम्मीदवार को जिताकर जवाब दें। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बसवराज बोम्मई ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में कर आतंक शुरू हो गया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने सरकार के पहले बजट में शराब, दूध और बिजली की भारी मात्रा में बढ़ोतरी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्टाम्प ड्यूटी, जमीन की सीमा और मोटर वाहन कर सहित लगभग सभी क्षेत्रों में कर बढ़ाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ”पिछले तीन पूर्वी राज्यों में इस सरकार ने लोगों पर 60,000 करोड़ रुपये का नया टैक्स लगाया है.” बोम्मई ने यह भी दावा किया कि सरकार ने करीब 5 लाख करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है, जिसकी वजह से सिद्धारमैया को ‘रिकॉर्ड उधार लेने वाला’ कहा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘इससे ​​पहले कभी हमने इस तरह की विचारधारा वाली सरकार नहीं देखी।’ उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज में बिना रिश्वत के नियुक्ति नहीं हुई और सरकारी चावल वितरण भी नहीं हुआ. उन्होंने सॉसेज की खरीद, बिहार के शेयरधारकों और निवेशकों के लिए निवेश पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि निर्माण की शुरुआत खुद मुख्यमंत्री कार्यालय से हो रही है और आरोप लगाया गया है कि तबादले एक बड़ा उद्योग बन गया है और प्रशासन पूरी तरह से चरमरा गया है। बोम्मई ने कहा कि सरकार गरीबों के माध्यम से लोगों पर बोझ डाल रही है और उन्हें विश्वास है कि जनता भाजपा को आशीर्वाद देगी।

जमीनी विवाद में दो पक्षों में मारपीट, एक की मौत:पांच लोग घायल, मामा-बुआ के परिवार आपस में भीड़े, एक दूसरे पर लाठी-डंडे पत्थर से हमला

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हरदा जिले के सिराली थाना क्षेत्र के दीपगांव कला में बुधवार सुबह जमीनी विवाद में 65 वर्षीय व्यक्ति की हत्या कर दी गई। इस घटना में दोनों पक्षों के कुल छह लोग घायल हुए हैं। मृतक की पहचान दीपगांव निवासी अमरसिंह कलम (65) के रूप में हुई है। घायलों में अमरसिंह के भाई सूरत सिंह, रामभरोस, आनंद सिंह, हरिसिंह, सतीश राजपूत और दूसरे पक्ष से नारायण राजपूत शामिल हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए सिराली के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। इनमें से तीन गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है। मामा-बुआ के परिवार आपस में भीड़े यह विवाद दो एकड़ जमीन पर कब्जे को लेकर मामा और बुआ के परिवारों के बीच हुआ बताया जा रहा है। एएसपी अमित कुमार मिश्रा ने बताया कि ग्राम दीपगांव में दो पक्षों के बीच विवाद की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंचकर विवाद के कारणों की जांच कर रही है।