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रागी या चावल का डोसा: सेहत के लिए कौन अधिक फायदेमंद, वजन घटाने से लेकर शुगर कंट्रोल तक, जानें दोनों के बेनिफिट्स

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रागी या चावल: सेहत के लिए कौन सा डोसा है बेस्ट? जानें दोनों के बेनिफिट्स

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Rice Dosa Vs Ragi Dosa Heath Benefits : ब्रेकफास्ट की प्‍लेट में इन दिनों रागी डोसा काफी पॉपुलर हो रहा है. इसे अधिक न्‍यूट्रिशन से भरपूर माना जा रहा है. तो क्या सच में पारंपरिक डोसा सेहत के मामले में रागी से पीछे छूट गया है? जानें वजन घटाने से लेकर शुगर कंट्रोल तक, कौन सा डोसा है आपके लिए बेहतर.

जब भी हम दक्षिण भारतीय खाने की बात करते हैं, तो सबसे पहले मन में ‘डोसा’ का ही खयाल आता है. इसे बनाना आसान है और ये सेहत के लिए भी काफी अच्‍छा होता है. यही वजह है कि देशभर में यह काफी पॉपुलर है और घर घर के किचन में इसे बनाया जा रहा है. लेकिन आज-कल हेल्‍थ कॉन्‍शस लोगों के दिमाग में एक बड़ा सवाल चल रहा है कि क्या पारंपरिक सफेद चावल का डोसा सेहत के लिए अच्‍छा है? या फिर ‘रागी’ का डोसा सेहत(ragi dosa benefits) का नया ‘सुपरफूड’ है.

सफेद चावल के डोसे के फायदे: सफेद चावल का डोसा सदियों से भारतीय थाली का हिस्सा रहा है. यह बहुत ही हल्का होता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) देता है, जो सुबह के नाश्ते के लिए इसे एक परफेक्ट विकल्प बनाता है. फर्मेंटेशन के कारण, यह प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जिससे यह पचने में बेहद आसान हो जाता है और पेट से जुड़ी समस्याएं नहीं होतीं. यह कार्बोहाइड्रेट का एक प्रमुख स्रोत है, जो आपको पूरा दिन एक्टिव रखता है.

रागी डोसा: दूसरी तरफ, रागी (जिसे नाचनी या फिंगर मिलेट भी कहते हैं) एक ऐसा मिलेट है जो पुराने समय से ही भारत में खाया जाता रहा है, लेकिन अब यह वापस ट्रेंड में है. इसे ‘न्यूट्रिशनल पावरहाउस’ कहा जाता है, क्योंकि इसमें सफेद चावल की तुलना में बहुत अधिक मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और आयरन होता है. रागी डोसा न केवल सेहतमंद है, बल्कि यह पारंपरिक डोसा की तरह ही स्वादिष्ट और कुरकुरा बनता है.

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वेट लॉस के लिए कौन बेहतर- अगर आपका लक्ष्य ‘वजन घटाना’ है, तो रागी डोसा एक बेहतर विकल्‍प है. इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो आपको लंबे समय तक ‘फुल’ (पेट भरा हुआ) महसूस कराती है. इससे आप बार-बार नहीं खाते और कैलोरी इनटेक पर कंट्रोल रहता है. इसके विपरीत, सफेद चावल के डोसा में फाइबर कम और कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है, जिससे भूख जल्दी लग सकती है.

डायबिटीज और शुगर कंट्रोल के लिए बेस्ट ऑप्‍शन- डायबिटीज के मरीजों के लिए भी रागी डोसा एक वरदान से कम नहीं है. सफेद चावल का ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ (GI) बहुत ज्यादा होता है, जिसका मतलब है कि इसे खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. रागी का ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ बहुत कम होता है और इसमें ‘पॉलीफेनोल्स’ होते हैं, जो ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा करते हैं, जिससे शुगर लेवल को मैनेज करना आसान हो जाता है.

हड्डियों की मजबूती के लिए रागी बेस्‍ट- कैल्शियम की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए रागी डोसा बेहतर है. रागी में दूध से भी अधिक कैल्शियम होता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के लिए बहुत जरूरी है. सफेद चावल में कैल्शियम बहुत कम होता है. इसलिए, अगर आप अपनी हड्डियों की सेहत में सुधार करना चाहते हैं या बढ़ते बच्चों को सही पोषण देना चाहते हैं, तो रागी डोसा को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें.

इसके अलावा, रागी डोसा एमीनो एसिड्स, जैसे ट्रिप्टोफैन, का एक अच्छा स्रोत है, जो तनाव (Stress) को कम करने और बेहतर नींद दिलाने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं, जिससे उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं और त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है.

इसके अलावा, रागी डोसा एमीनो एसिड्स, जैसे ट्रिप्टोफैन, का एक अच्छा स्रोत है, जो तनाव (Stress) को कम करने और बेहतर नींद दिलाने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं, जिससे उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं और त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है.

आपकी थाली के लिए क्या है सही? अगर आपका मुख्य उद्देश्य ‘वजन घटाना’, ‘शुगर कंट्रोल’ करना या ‘हड्डियों को मजबूत’ बनाना है, तो रागी डोसा एक बेहतर विकल्प है. हालांकि, अगर आप सिर्फ तुरंत ऊर्जा चाहते हैं और पाचन बिल्कुल सही है, तो चावल का डोसा भी कभी-कभी खाया जा सकता है. सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी डाइट में दोनों को शामिल करें ताकि स्वाद और सेहत का संतुलन बना रहे.

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जब भी हम दक्षिण भारतीय खाने की बात करते हैं, तो सबसे पहले मन में ‘डोसा’ का ही खयाल आता है. इसे बनाना आसान है और ये सेहत के लिए भी काफी अच्‍छा होता है. यही वजह है कि देशभर में यह काफी पॉपुलर है और घर घर के किचन में इसे बनाया जा रहा है. लेकिन आज-कल हेल्‍थ कॉन्‍शस लोगों के दिमाग में एक बड़ा सवाल चल रहा है कि क्या पारंपरिक सफेद चावल का डोसा सेहत के लिए अच्‍छा है? या फिर ‘रागी’ का डोसा सेहत(ragi dosa benefits) का नया ‘सुपरफूड’ है.

सफेद चावल के डोसे के फायदे: सफेद चावल का डोसा सदियों से भारतीय थाली का हिस्सा रहा है. यह बहुत ही हल्का होता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) देता है, जो सुबह के नाश्ते के लिए इसे एक परफेक्ट विकल्प बनाता है. फर्मेंटेशन के कारण, यह प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जिससे यह पचने में बेहद आसान हो जाता है और पेट से जुड़ी समस्याएं नहीं होतीं. यह कार्बोहाइड्रेट का एक प्रमुख स्रोत है, जो आपको पूरा दिन एक्टिव रखता है.

रागी डोसा: दूसरी तरफ, रागी (जिसे नाचनी या फिंगर मिलेट भी कहते हैं) एक ऐसा मिलेट है जो पुराने समय से ही भारत में खाया जाता रहा है, लेकिन अब यह वापस ट्रेंड में है. इसे ‘न्यूट्रिशनल पावरहाउस’ कहा जाता है, क्योंकि इसमें सफेद चावल की तुलना में बहुत अधिक मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और आयरन होता है. रागी डोसा न केवल सेहतमंद है, बल्कि यह पारंपरिक डोसा की तरह ही स्वादिष्ट और कुरकुरा बनता है.

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वेट लॉस के लिए कौन बेहतर- अगर आपका लक्ष्य ‘वजन घटाना’ है, तो रागी डोसा एक बेहतर विकल्‍प है. इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो आपको लंबे समय तक ‘फुल’ (पेट भरा हुआ) महसूस कराती है. इससे आप बार-बार नहीं खाते और कैलोरी इनटेक पर कंट्रोल रहता है. इसके विपरीत, सफेद चावल के डोसा में फाइबर कम और कार्बोहाइड्रेट अधिक होता है, जिससे भूख जल्दी लग सकती है.

डायबिटीज और शुगर कंट्रोल के लिए बेस्ट ऑप्‍शन- डायबिटीज के मरीजों के लिए भी रागी डोसा एक वरदान से कम नहीं है. सफेद चावल का ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ (GI) बहुत ज्यादा होता है, जिसका मतलब है कि इसे खाने के तुरंत बाद ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. रागी का ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’ बहुत कम होता है और इसमें ‘पॉलीफेनोल्स’ होते हैं, जो ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा करते हैं, जिससे शुगर लेवल को मैनेज करना आसान हो जाता है.

हड्डियों की मजबूती के लिए रागी बेस्‍ट- कैल्शियम की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए रागी डोसा बेहतर है. रागी में दूध से भी अधिक कैल्शियम होता है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के लिए बहुत जरूरी है. सफेद चावल में कैल्शियम बहुत कम होता है. इसलिए, अगर आप अपनी हड्डियों की सेहत में सुधार करना चाहते हैं या बढ़ते बच्चों को सही पोषण देना चाहते हैं, तो रागी डोसा को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें.

इसके अलावा, रागी डोसा एमीनो एसिड्स, जैसे ट्रिप्टोफैन, का एक अच्छा स्रोत है, जो तनाव (Stress) को कम करने और बेहतर नींद दिलाने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं, जिससे उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं और त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है.

इसके अलावा, रागी डोसा एमीनो एसिड्स, जैसे ट्रिप्टोफैन, का एक अच्छा स्रोत है, जो तनाव (Stress) को कम करने और बेहतर नींद दिलाने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को फ्री रेडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं, जिससे उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं और त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है.

आपकी थाली के लिए क्या है सही? अगर आपका मुख्य उद्देश्य ‘वजन घटाना’, ‘शुगर कंट्रोल’ करना या ‘हड्डियों को मजबूत’ बनाना है, तो रागी डोसा एक बेहतर विकल्प है. हालांकि, अगर आप सिर्फ तुरंत ऊर्जा चाहते हैं और पाचन बिल्कुल सही है, तो चावल का डोसा भी कभी-कभी खाया जा सकता है. सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी डाइट में दोनों को शामिल करें ताकि स्वाद और सेहत का संतुलन बना रहे.

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