क्या अल्ट्रावायलेट किरणें आंखों के लिए भी खतरनाक? गर्मियों में इससे कैसे करें बचाव, डॉक्टर से जानिए टिप्स

Last Updated:April 06, 2026, 10:04 IST Eye Care Tips in Summer: गर्मी में तेज धूप और अल्ट्रावायलेट किरणें आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं. इससे आंखों में जलन, रेडनेस और नजर कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है. डॉक्टर्स की मानें तो गर्मी में आंखों को हेल्दी रखने के लिए UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस पहनें, धूप से बचें और आंखों की सही देखभाल करें. सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणें आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती हैं. Summer Eye Safety Tips: गर्मी में तेज धूप लोगों से लोगों का बुरा हाल हो जाता है. सूरज की किरणें तपिश लेकर आती हैं और इससे सेहत भी प्रभावित होती है. सूरज की किरणों में अल्ट्रावॉयलेट किरणें होती हैं, जिन्हें स्किन के लिए नुकसानदायक माना जाता है. गर्मियों के मौसम में तेज धूप और बढ़ती गर्मी के साथ अल्ट्रावायलेट किरणों का प्रभाव भी काफी बढ़ जाता है. आमतौर पर लोग स्किन पर इसके असर को लेकर अलर्ट रहते हैं और सनस्क्रीन लगाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि UV किरणें आंखों के लिए भी उतनी ही खतरनाक हो सकती हैं. लंबे समय तक बिना सुरक्षा के धूप में रहने से आंखों की सेहत बिगड़ सकती है. नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया कि गर्मी में लोगों को तेज धूप में ज्यादा समय बिताने से बचना चाहिए. धूप की अल्ट्रावायलेट किरणें गर्मी में आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. ये किरणें आंखों की बाहरी सतह कॉर्निया से लेकर अंदर के लेंस तक असर डाल सकती हैं. यूवी किरणों के ज्यादा एक्सपोजर से फोटोकेराटाइटिस यानी आंखों की सनबर्न जैसी स्थिति हो सकती है. इसमें आंखों में जलन, रेडनेस, पानी आना और धुंधला दिखना जैसे लक्षण नजर आते हैं. कई बार धूल-मिट्टी भी आंखों में चली जाती है, जिससे इंफेक्शन की कंडीशन पैदा हो जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ग्रोवर के मुताबिक तेज धूप हमारी आंखों की रेटिना को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे धीरे-धीरे नजर कमजोर हो सकती है. लंबे समय तक UV किरणों के संपर्क में रहने से आंखों में मोतियाबिंद का खतरा भी बढ़ सकता है. बच्चों और बुजुर्गों की आंखें UV किरणों के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होती हैं. इसलिए उन्हें गर्मियों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है. दोपहर के समय धूप सबसे ज्यादा तेज होती है. इस दौरान बाहर निकलने से बचें या कम से कम समय के लिए ही बाहर जाएं. धूप में ज्यादा देर रहेंगे, तो इससे आंखों पर ही नहीं, बल्कि अन्य ऑर्गन्स पर भी बुरा असर पड़ सकता है. अब सवाल है कि गर्मियों में आंखों को नुकसान से कैसे बचाएं? इस पर डॉक्टर ने कहा कि गर्मी के मौसम में आंखों को UV किरणों से बचाने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं. सबसे जरूरी है कि बाहर निकलते समय UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस पहनें. इसके अलावा चौड़ी टोपी या कैप पहनना भी फायदेमंद होता है, जिससे सीधी धूप आंखों पर नहीं पड़ती. अगर आपको बाहर रहना जरूरी है, तो छाया में रहने की कोशिश करें. साथ ही आंखों को बार-बार ठंडे पानी से धोना और हाइड्रेटेड रहना भी जरूरी है, ताकि आंखों में ड्राइनेस न हो. अगर आंखों में लगातार जलन, लालिमा या नजर में बदलाव महसूस हो, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें, ताकि समय रहते सही इलाज किया जा सके. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 10:04 IST
सीहोर में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज:दिन में गर्मी, रात में बारिश; जानिए पिछले हफ्ते किस तरह बदलता रहा टेम्प्रेचर

सीहोर जिले में अप्रैल माह के पहले सप्ताह में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। दिन में जहां तेज धूप और गर्मी रहती है, वहीं शाम को अचानक मौसम बदलकर आसमान में काले बादल छा जाते हैं। बीते 24 घंटे के दौरान सीहोर में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अप्रैल माह की शुरुआत से ही मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दोपहर में तेज धूप के कारण लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। पिछले 24 घंटों में जिले के कई स्थानों पर हल्की बारिश भी दर्ज की गई। आज का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कल के 38 डिग्री सेल्सियस से एक डिग्री अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ सिस्टम के कारण मौसम का मिजाज बदला है। इस समय वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी सक्रिय है। बताया गया है कि आगामी दिनों में बारिश का एक और सिस्टम सक्रिय होने वाला है, जिसके कारण अगले कुछ दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अप्रैल के पहले सप्ताह के तापमान का विवरण इस प्रकार है… 01 अप्रैल: 36 डिग्री सेल्सियस 02 अप्रैल: 32 डिग्री सेल्सियस 03 अप्रैल: 38 डिग्री सेल्सियस 04 अप्रैल: 34 डिग्री सेल्सियस 05 अप्रैल: 38 डिग्री सेल्सियस 06 अप्रैल: 39 डिग्री सेल्सियस
सिर्फ सब्जी नहीं… सेहत का भी स्वाद बढाता है ये जीरा, इम्यूनिटी करेगा बूस्ट और खून की कमी को करेगा दूर

X रोजाना खाएं सफेद जीरा, इम्यूनिटी बढ़ाए और खून की कमी करे दूर Benefits of White Cumin: सफेद जीरा रसोई में इस्तेमाल होने वाला सामान्य मसाला है. लेकिन इसके कई औषधीय फायदे भी है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र चौधरी के अनुसार सफेद जीरा पाचन शक्ति को मजबूत करता है और पेट की गर्मी कम करने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से वजन नियंत्रित रहता है और शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ती है. इसमें आयरन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते है जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक होते है और खून की कमी दूर करने में मदद करते है. यह शरीर से विषैले तत्व निकालने और त्वचा को साफ रखने में भी उपयोगी माना जाता है. सफेद जीरे का सेवन रात में पानी में भिगोकर सुबह पीने, सब्जी में मिलाकर या दही-छाछ में डालकर किया जा सकता है. नियमित और संतुलित उपयोग से यह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित हो सकता है.
भीषण गर्मी में लू की मार से बचाने में मदद करेगा ये शरबत, जानें इसे घर पर बनाने की आसान विधि – News18 हिंदी

X भीषण गर्मी में लू की मार से बचाने में मदद करेगा ये शरबत, जानें बनाने की विधि Palash Flower Benefits: गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांवों-जंगलों में पलाश (टेसू) के फूल खिलने लगते हैं, जो आग की तरह लाल-नारंगी रंग के नजर आते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसे टेसू के नाम से जाना जाता है. आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है. खास बात ये कि इन फूलों से बनने वाला शरबत गर्मियों में किसी वरदान से कम नहीं माना जाता. पलाश के फूलों का शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ कई समस्याओं में राहत देता है. लू और गर्मी से बचाव पलाश का शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखता है. तेज धूप में निकलने पर होने वाली थकान, सिरदर्द और बेचैनी को कम करने में मदद करता है. इसे पीने से लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है. यह शरबत पाचन तंत्र को मजबूत करता है. गैस, कब्ज, दस्त और पेट की जलन जैसी समस्याओं में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह काफी फायदेमंद माना जाता है.
पहलवान बिस्वा शर्मा का बड़ा आरोप- ‘कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के आधार पर मेरी पत्नी पर लगाया आरोप’

असम के मुख्यमंत्री हिमंत शर्मा विश्व ने अपने परिवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने मेरी पत्नी के खिलाफ आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा,” मेरी पत्नी के खिलाफ ग़रीब पति-पत्नी को लेकर कांग्रेस नेता पवन सह-लेखक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मेरी पत्नी के खिलाफ कांग्रेस के आरोप में असमंजस की स्थिति को प्रभावित करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं, इसके लिए कॉलेज की सजा हो सकती है।” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर कंपनी का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उन्होंने रिंकी के नाम से एक और बनाई कंपनी…कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से प्राप्त पासपोर्ट और शेयरहोल्डिंग की स्थिति का इस्तेमाल किया। गौरव गोगोई ने भी एक सोशल मीडिया ग्रुप की मदद की। पाकिस्तान किस तरह असम चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, यह बहुत महत्वपूर्ण है।” #घड़ी | गुवाहाटी: असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कहते हैं, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करके एक कंपनी पंजीकृत कर सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, उन्होंने रिनिकी के नाम पर एक और कंपनी बनाई…कांग्रेस ने एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया से प्राप्त पासपोर्ट और दस्तावेजों की छवियों का इस्तेमाल किया… https://t.co/S5bBLdtBKn pic.twitter.com/zPQr9lJs0V – एएनआई (@ANI) 6 अप्रैल 2026 क्या है मामला असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन अलग-अलग पासपोर्ट कैसे हैं? उन्हें तीन पासपोर्ट रखने की क्या आवश्यकता है? क्या वे कोई अपराधी हैं? कांग्रेस के एक्स हैंडल पर पवन एसोसिएट का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया, ”असम की जनता पूछ रही है।” हिमंता बिस्वा सरमा की पूरी राजनीतिक छवि के खिलाफ अपमान पर आधारित है, लेकिन उनकी पत्नी दो मुस्लिम देशों के पासपोर्ट दर्ज हैं, कैसे? भारत के कानून के खाते से आप द्विपक्षीय नागरिकता नहीं रख सकते हैं, तो क्या रिंकी भू लाइसेंस सरमा भारत का पासपोर्ट भी रखता है? हिमंता बिस्वा सरमा, अमित शाह के दत्तक पुत्र क्या हैं? और किस देश के मठाधीश को ये जानकारी थी कि उनके दत्तक पुत्र की पत्नी के 3 पासपोर्ट हैं? अमित शाह का जवाब- वो एसआईटी सहायक इस मामले की जांच क्या करेगी?” (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस
जाह्नवी बोलीं- मैं पूरी तरह से मां पर निर्भर थी:उनके जाने के बाद कई गलत फैसले लिए, कई लोगों ने निजी जिंदगी में दखल दिया

बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी मां और सुपरस्टार श्रीदेवी के निधन और उसके बाद आई मुश्किलों पर बात की है। जाह्नवी ने बताया कि वे अपनी जिंदगी के हर छोटे-बड़े फैसले के लिए मां पर निर्भर थीं। उनके अचानक चले जाने के बाद जाह्नवी को न सिर्फ अकेले फैसले लेना सीखना पड़ा, बल्कि दुनिया के कड़े व्यवहार और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। हर छोटी बात के लिए मां पर थीं निर्भर राज शमानी के पॉडकास्ट में जाह्नवी ने बताया कि श्रीदेवी के रहते उन्होंने कभी खुद से कोई फैसला नहीं लिया था। जाह्नवी ने कहा, “मैं उन पर पूरी तरह निर्भर थी। मैं उनसे हर बात पूछती थी की क्या कपड़े पहनूं? क्या करूं? क्या सही है और क्या गलत? उनके जाने के बाद मुझे अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेना सीखना पड़ा।” जाह्नवी ने यह भी माना कि इस दौरान उन्होंने कई गलत फैसले लिए और उन लोगों को अपनी निजी जिंदगी में दखल देने दिया, जिनका वहां कोई काम नहीं था। दुनिया मेरे दुख को जज कर रही थी जाह्नवी ने उस दौर के तनाव को याद करते हुए बताया कि लोग उनके दुख का पैमाना तय कर रहे थे। एक्ट्रेस के मुताबिक, “दुनिया मुझे तोड़ने की कोशिश कर रही थी। लोग कमेंट करते थे कि देखो वह अब कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रही है, वह उतनी दुखी नहीं है जितनी उसे होना चाहिए। मेरे परिवार पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए।” मां के जाने से बदल गए बोनी कपूर अपनी मां के मजाकिया स्वभाव को याद करते हुए जाह्नवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि श्रीदेवी की जगह दुनिया में कोई नहीं ले सकता। जाह्नवी ने अपने पिता बोनी कपूर के बारे में कहा, उस दिन मैंने सिर्फ परिवार का एक सदस्य नहीं खोया था, बल्कि अपने पिता को भी खो दिया था। जब मां हमारे साथ थीं, तब पापा बिल्कुल अलग इंसान थे। आज वह जैसे हैं मैं उससे खुश हूं, लेकिन वह पहले जैसे नहीं रहे।” जाह्नवी के मुताबिक, उनकी फैमिली की खुशी और पॉजिटिविटी में श्रीदेवी का सबसे बड़ा योगदान था। डेब्यू फिल्म के दौरान हुआ था निधन श्रीदेवी का निधन 24 फरवरी 2018 को यूएई में हुआ था। यह वह समय था जब जाह्नवी अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म ‘धड़क’ की तैयारी कर रही थीं। जाह्नवी की फिल्म तो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही, लेकिन उनकी इस सफलता को देखने के लिए उनकी मां उनके साथ नहीं थीं। श्रीदेवी ने करीब तीन दशकों तक हिंदी, तमिल और तेलुगू सिनेमा पर राज किया था।
जाह्नवी बोलीं- मैं पूरी तरह से मां पर निर्भर थी:उनके जाने के बाद कई गलत फैसले लिए, कई लोगों ने निजी जिंदगी में दखल दिया

बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी मां और सुपरस्टार श्रीदेवी के निधन और उसके बाद आई मुश्किलों पर बात की है। जाह्नवी ने बताया कि वे अपनी जिंदगी के हर छोटे-बड़े फैसले के लिए मां पर निर्भर थीं। उनके अचानक चले जाने के बाद जाह्नवी को न सिर्फ अकेले फैसले लेना सीखना पड़ा, बल्कि दुनिया के कड़े व्यवहार और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। हर छोटी बात के लिए मां पर थीं निर्भर राज शमानी के पॉडकास्ट में जाह्नवी ने बताया कि श्रीदेवी के रहते उन्होंने कभी खुद से कोई फैसला नहीं लिया था। जाह्नवी ने कहा, “मैं उन पर पूरी तरह निर्भर थी। मैं उनसे हर बात पूछती थी की क्या कपड़े पहनूं? क्या करूं? क्या सही है और क्या गलत? उनके जाने के बाद मुझे अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेना सीखना पड़ा।” जाह्नवी ने यह भी माना कि इस दौरान उन्होंने कई गलत फैसले लिए और उन लोगों को अपनी निजी जिंदगी में दखल देने दिया, जिनका वहां कोई काम नहीं था। दुनिया मेरे दुख को जज कर रही थी जाह्नवी ने उस दौर के तनाव को याद करते हुए बताया कि लोग उनके दुख का पैमाना तय कर रहे थे। एक्ट्रेस के मुताबिक, “दुनिया मुझे तोड़ने की कोशिश कर रही थी। लोग कमेंट करते थे कि देखो वह अब कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रही है, वह उतनी दुखी नहीं है जितनी उसे होना चाहिए। मेरे परिवार पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए।” मां के जाने से बदल गए बोनी कपूर अपनी मां के मजाकिया स्वभाव को याद करते हुए जाह्नवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि श्रीदेवी की जगह दुनिया में कोई नहीं ले सकता। जाह्नवी ने अपने पिता बोनी कपूर के बारे में कहा, उस दिन मैंने सिर्फ परिवार का एक सदस्य नहीं खोया था, बल्कि अपने पिता को भी खो दिया था। जब मां हमारे साथ थीं, तब पापा बिल्कुल अलग इंसान थे। आज वह जैसे हैं मैं उससे खुश हूं, लेकिन वह पहले जैसे नहीं रहे।” जाह्नवी के मुताबिक, उनकी फैमिली की खुशी और पॉजिटिविटी में श्रीदेवी का सबसे बड़ा योगदान था। डेब्यू फिल्म के दौरान हुआ था निधन श्रीदेवी का निधन 24 फरवरी 2018 को यूएई में हुआ था। यह वह समय था जब जाह्नवी अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म ‘धड़क’ की तैयारी कर रही थीं। जाह्नवी की फिल्म तो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही, लेकिन उनकी इस सफलता को देखने के लिए उनकी मां उनके साथ नहीं थीं। श्रीदेवी ने करीब तीन दशकों तक हिंदी, तमिल और तेलुगू सिनेमा पर राज किया था।
Cancer treatment in India: कैंसर के ये डॉक्टर हो गए बेकार! मरीजों का नहीं कर सकते इलाज,PMJAY का नया नियम बना नासूर

PMJAY rules for Oncologist: कैंसर भारत की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक बनता जा रहा है. फिलहाल देश में 15 लाख से ज्यादा कैंसर के मरीज हैं और एक अनुमान के मुताबिक आने वाले 20 सालों में यह संख्या करीब 25 लाख के आसपास पहुंचने वाली है, जो कि किसी बड़े शहर की आबादी जितनी होगी, लेकिन इससे भी बड़ी समस्या अब इन मरीजों के इलाज को लेकर पैदा होने वाली है और इसकी वजह है आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के नए नियम. ऑन्कोलॉजिस्टों ने बताया कि पीएमजेएवाई के नए नियमों का हवाला देकर कई राज्य प्राइवेट सेक्टर के सैकड़ों अनुभवी, फेलोशिप-ट्रेनिंग पाए ऑन्कोलॉजिस्ट को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के मरीजों का इलाज करने से रोक रहे हैं. डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें इसलिए नहीं रोका जा रहा कि उनकी ट्रेनिंग या अनुभव कम है, बल्कि इसलिए इलाज नहीं करने दिया जा रहा है कि उनके पास एनएमसी से मान्यता प्राप्त DM, MCh या DrNB जैसी सुपर-स्पेशियलिटी डिग्रियां नहीं हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर में इस कदम से प्रभावित डॉक्टरों ने बताया कि कुछ दशक पहले तक, ऑन्कोलॉजी में आने का एकमात्र रास्ता फेलोशिप ही था. तब कोई औपचारिक कोर्स मौजूद नहीं थे. आज भी, पीजी डॉक्टरों के लिए कैंसर अस्पतालों में सिर और गर्दन की सर्जरी, स्त्री रोग-ऑन्कोलॉजी, रक्त-ऑन्कोलॉजी या बच्चों की कैंसर सर्जरी में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए 2-3 साल की फेलोशिप हासिल करना बहुत प्रतिष्ठित माना जाता है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों को अब नए नियम के चलते अयोग्य बताया जा रहा है उनमें से कई आगे चलकर डिपार्टमेंट के हेड, मेडिकल डायरेक्टर, टीचर और सीनियर सर्जन बन चुके हैं. ये दशकों से कैंसर के मरीजों का इलाज कर रहे हैं. सूरत के डॉ. हेमिश कानिया, जिन्होंने राज्यों भर में प्रभावित ऐसे 300 से ज्यादा डॉक्टरों का डेटा इकट्ठा किया है, ने बताया कि जिन डॉक्टरों को अब रोका जा रहा है, उनमें से कुछ ने तो DM या DrNB के छात्रों को ऑन्कोलॉजी भी पढ़ाई है. इस नियम से बढ़ रही डॉक्टरों की कमी योग्यता के नियमों में यह बदलाव न केवल भारत में कैंसर के बढ़ते बोझ की वजह से चौंकाने वाला है, बल्कि कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी की वजह से भी हैरान करने वाला है. भारत में हर दस लाख लोगों पर लगभग एक मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट है और सिर्फ 4,000 के करीब ऑन्कोसर्जन हैं. ऐसे में PMJAY से जुड़े इलाज से 300 प्रशिक्षित स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को बाहर करने से इलाज तक पहुंच कम हो सकती है, खासकर छोटे शहरों में जहां प्राइवेट इंश्योरेंस की पहुंच कम है, और उन गरीब मरीजों के लिए तो यह बहुत बड़ी दिक्कत बन सकती है जो सरकारी मेडिकल इंश्योरेंस का लाभ उठाते हैं. क्या फेलोशिप बेकार हैं?डॉ. किशन(बदला हुआ नाम) UP के एक 42 साल के जनरल सर्जन ने बताया कि उन्होंने टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, परेल से सिर और गर्दन के कैंसर में तीन साल की फेलोशिप पूरी की थी, 2021 में, वह अपने टियर-II शहर में वापस लौटे, इस उम्मीद के साथ कि कैंसर देखभाल में मौजूद कमी को पूरा कर सकेंगे, लेकिन शहर में केवल छह ऑन्कोसर्जन थे, जिनमें से चार फेलोशिप-प्रशिक्षित थे. हालांकि, उन्होंने पाया कि उन्हें PMJAY के कैंसर मरीजों का ऑपरेशन करने से रोक दिया गया है. उन्होंने कहा, अगर छह में से चार निजी क्षेत्र के कैंसर सर्जनों को बाहर कर दिया जाए, तो PMJAY के मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है.’ वहीं एक अन्य डॉक्टर ने बताया कि वह सुरक्षित हैं क्योंकि वह एक सरकारी अस्पताल में काम करते हैं. उन्होंने कहा,’सरकारी अस्पतालों में टीम में कम से कम एक सदस्य ऐसा होने की संभावना होती है जिसे PMJAY के तहत मान्यता प्राप्त हो, लेकिन अगर मैं निजी क्षेत्र में कदम रखता हूं, तो स्थिति अलग हो सकती है.’ कुछ डॉक्टरों ने बताया कि उनके नाम HEM 2.0 पोर्टल से हटा दिए गए हैं. इस पोर्टल का इस्तेमाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा PMJAY के प्रबंधन के लिए किया जाता है. डॉक्टरों ने कहा कि अस्पताल अपने अनुबंध खत्म कर रहे हैं क्योंकि ये विशेषज्ञ अब PMJAY के तहत क्लेम (दावे) जेनरेट नहीं कर सकते. क्यों हो रही ये दिक्कत डॉक्टरों ने बताया कि कई मुद्दों के कारण यह मौजूदा समस्या खड़ी हुई है, विशेष रूप से राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा एनएचए और एनएमसी के नियमों की व्याख्या का तरीका. इस समस्या की जड़ 2018 से पहले के समय में ढूंढी जा सकती है, जब तत्कालीन भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) ने ऑन्कोलॉजी शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के प्रयास शुरू किए थे. टाटा मेमोरियल सेंटर के पूर्व अकादमिक डीन, डॉ. केएस शर्मा ने कहा कि 2002 और 2010 के बीच, मेडिकल और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में DM और MCh की सीटें बहुत कम थीं. 2011 में, जब वह तत्कालीन MCI के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल हुए, तो उन्होंने प्रतिष्ठित कैंसर अस्पतालों में फेलोशिप कार्यक्रमों का विस्तार करके शिक्षकों की कमी को दूर करने की एक योजना बनाई. उन्होंने कहा, ‘इन फेलोशिप को MCI द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं थी, लेकिन इनका अपना एक महत्व और विश्वसनीयता थी.’ फिर एमसीआई ने लागू किया नियम MCI ने एक नियम लागू किया जिसके तहत MS या MD की डिग्री वाले पोस्ट-ग्रेजुएट डॉक्टरों को, जिन्होंने किसी विशेष कैंसर अस्पताल में सीनियर रेजिडेंट या फेलो के तौर पर दो साल का अनुभव प्राप्त किया हो, तब तक शिक्षक माना जा सकता था जब तक कि भारत में पर्याप्त संख्या में डिग्रीधारी ऑन्कोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं हो जाते. इस प्रकार, कई प्रशिक्षित फेलो ने सरकारी कैंसर संस्थानों में शिक्षण के पद संभाले, और समय के साथ, उनमें से कुछ छोटे शहरों में चले गए ताकि वे अपनी स्वतंत्र प्रैक्टिस शुरू कर सकें. लेकिन 2020 में, MCI की जगह एनएमसी ने ले ली, जिसने ऐसे दिशानिर्देश जारी किए जिनके अनुसार ऑन्कोलॉजिस्ट के पास मान्यता प्राप्त डिग्रियां होना अनिवार्य था. इन दिशानिर्देशों में फेलोशिप का कोई जिक्र नहीं किया गया था. अब फिर से उठा है मुद्दा एनएचए के CEO डॉ. सुनील कुमार बर्नवाल ने कहा कि NHA अस्पतालों को पैनल में शामिल करता है, डॉक्टरों को नहीं, और डॉक्टरों की योग्यता NMC तय करता है. 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‘अपना ब्लाउज फाड़ो…’: केरल कांग्रेस नेता ने पार्टीजनों से चुनावी प्रतिद्वंद्वियों को फंसाने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करने को कहा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 09:35 IST इडुक्की कांग्रेस नेता सीपी मैथ्यू ने कथित तौर पर सुझाव दिया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ टकराव की स्थिति में महिला नेता अपने कपड़े फाड़ सकती हैं और शिकायत दर्ज करा सकती हैं। केरल कांग्रेस नेता सीपी मैथ्यू ने भी कथित तौर पर मामलों को कानूनी रूप से अधिक गंभीर बनाने के लिए एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए एससी/एसटी महिलाओं को शामिल करने की बात कही। (न्यूज़18 मलयालम) चुनावी राज्य केरल में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है जब एक वीडियो सामने आया जिसमें इडुक्की जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्ष सीपी मैथ्यू कथित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करने के लिए कह रहे हैं। यह टिप्पणी कथित तौर पर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के उम्मीदवार रॉय के पॉलोस के लिए वज़हथॉप में एक चुनाव अभियान कार्यक्रम के दौरान की गई थी। भाषण में, मैथ्यू ने कथित तौर पर सुझाव दिया कि महिला नेता टकराव की स्थिति में अपने कपड़े फाड़ सकती हैं और शिकायत दर्ज करा सकती हैं, उनका दावा है कि इस तरह की रणनीति से प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ मामले मजबूत होंगे। उन्होंने कथित तौर पर एससी/एसटी समुदायों की महिलाओं को शामिल करके अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों का उपयोग करने के बारे में भी बात की, जिससे संकेत मिलता है कि यह कानूनी रूप से मामलों को और अधिक गंभीर बना सकता है। सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित टिप्पणियों ने राजनीतिक विरोधियों और नागरिक समाज की ओर से तीखी आलोचना शुरू कर दी है। जब यह टिप्पणी की गई तो केरल कांग्रेस के उपाध्यक्ष जैसन जोसेफ सहित वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अब तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सत्तारूढ़ सीपीआई (एम) ने बयानों की कड़ी निंदा की, पार्टी नेताओं ने विपक्षी कांग्रेस पर चुनाव अवधि के दौरान हिंसा भड़काने और कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने विरोधियों को फंसाने और चुनावी नतीजे को प्रभावित करने की सोची-समझी रणनीति का आरोप लगाया। यह पहली बार नहीं है जब मैथ्यू गर्म पानी में उतरा है। वह हाल ही में एक घटना को लेकर सुर्खियों में थे, जिसमें उन्होंने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एक पार्टी कार्यकर्ता के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। केरल में, कांग्रेस विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का हिस्सा है, जो सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ वाम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। राज्य में 9 अप्रैल को मतदान होगा और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। जगह : इडुक्की, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 06 अप्रैल, 2026, 09:35 IST न्यूज़ इंडिया ‘अपना ब्लाउज फाड़ो…’: केरल कांग्रेस नेता ने पार्टीजनों से चुनावी प्रतिद्वंद्वियों को फंसाने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करने को कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल राजनीतिक विवाद(टी)सीपी मैथ्यू वीडियो(टी)इडुक्की कांग्रेस प्रमुख(टी)झूठी शिकायतों का आरोप(टी)राजनीति में महिलाओं का इस्तेमाल(टी)एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग(टी)यूडीएफ बनाम एलडीएफ केरल(टी)केरल चुनाव 2026
प्राकृतिक शुगर, कार्बोहाइड्रेट से होता है भरपूर, महुआ का फूल है सेहत का खजाना, शरीर को रखता है पावरफुल

Last Updated:April 06, 2026, 09:34 IST महुआ एक पेड़ का फूल होता है, जो मुख्य रूप से भारत के जंगलों और ग्रामीण इलाकों में पाया जाता है. इसका स्वाद प्राकृतिक रूप से मीठा होता है, इसलिए लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. महुआ के फूल को आमतौर पर सुखाकर रखा जाता है, ताकि इसे लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सके. इससे कई तरह के पारंपरिक पकवान, मिठाइयां भी बनाए जाते हैं. वहीं सेहत के लिए फायदेमंद होता है. गर्मी का मौसम आते ही जंगलों और गांवों में एक खास फूल की खुशबू फैलने लगती है, जिसे महुआ कहा जाता है. महुआ का फूल न सिर्फ स्वाद में मीठा होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है. खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग इसे सुखाकर साल भर इस्तेमाल करते हैं. वैद्य का मानना है कि महुआ में कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं और कई बीमारियों से बचाते हैं. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि महुआ में प्राकृतिक शुगर और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करते हैं. खासकर गर्मियों में जब शरीर जल्दी थक जाता है या कमजोरी महसूस होती है, तब महुआ का सेवन काफी फायदेमंद साबित होता है. यह शरीर को ताकत देने के साथ-साथ दिनभर एक्टिव बनाए रखने में भी मदद करता है. वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार महुआ पेट के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इसका सेवन करने से कब्ज, गैस और अपच जैसी आम समस्याओं में राहत मिलती है. महुआ में ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं, जो पाचन क्रिया को सुधारते हैं और आंतों को स्वस्थ रखते हैं. अगर इसे नियमित और संतुलित मात्रा में लिया जाए, तो यह पेट को साफ रखने के साथ-साथ भोजन को अच्छे से पचाने में मदद करता है, जिससे शरीर हल्का और स्वस्थ महसूस करता है. Add News18 as Preferred Source on Google महुआ का सेवन गर्मियों में शरीर के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इस मौसम में अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में महुआ शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है और तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है. यही कारण है कि गांवों में लोग गर्मी के दिनों में इसका अधिक उपयोग करते हैं, ताकि शरीर ठंडा रहे और लू जैसी समस्याओं से बचाव हो सके. महुआ में आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में मदद करते हैं. इसका नियमित और संतुलित सेवन शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक होता है. खासकर जो लोग कमजोरी, थकान या चक्कर जैसी समस्या महसूस करते हैं, उनके लिए महुआ काफी फायदेमंद माना जाता है और शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. महुआ में ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं, जो शरीर के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं. जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, इसका सेवन करने या महुआ के तेल से मालिश करने पर जोड़ों के दर्द में आराम मिल सकता है. यह मांसपेशियों को ढीलापन देता है और शरीर की जकड़न को कम करता है. नियमित उपयोग से चलने-फिरने में आसानी होती है और शरीर हल्का महसूस करता है, जिससे खासकर बुजुर्गों और मेहनत करने वाले लोगों को राहत मिलती है. महुआ दुबले-पतले लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसमें कैलोरी और प्राकृतिक शुगर की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा देती है. नियमित और संतुलित सेवन से धीरे-धीरे वजन बढ़ाने में मदद करता है. साथ ही यह शरीर को ताकत देता है और कमजोरी दूर करता है. खासकर जो लोग कमजोर महसूस करते हैं या वजन बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए महुआ एक प्राकृतिक और आसान विकल्प हो सकता है, जो शरीर को स्वस्थ तरीके से पोषण देता है. First Published : April 06, 2026, 09:33 IST







