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India Ramps Up Russian Crude Oil Imports Amid Hormuz Strait Crisis 2026

India Ramps Up Russian Crude Oil Imports Amid Hormuz Strait Crisis 2026

नई दिल्ली3 मिनट पहले

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भारत रूसी तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट में सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत ने एक बार फिर रूस की ओर रुख किया है। अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 90% आयात करने वाले भारत ने पिछले दो महीनों में रूसी क्रूड की खरीदारी में भारी बढ़ोतरी की है।

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत बढ़ गई है, जिसके चलते भारतीय रिफाइनर्स अब रूस से ज्यादा से ज्यादा तेल जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

मार्च में रूस से आयात 18.48 करोड़ बैरल प्रति दिन पहुंचा

इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के डेटा के मुताबिक, मार्च के महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात औसत 1.98 मिलियन यानी 18.48 करोड़ बैरल प्रति दिन (bpd) रहा। यह जून 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

हालांकि, अप्रैल में यह आंकड़ा गिरकर 1.57 मिलियन यानी 14.65 करोड़ बैरल प्रति दिन रह गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह गिरावट मांग की कमी की वजह से नहीं, बल्कि नयारा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस के लिए किए गए शटडाउन के कारण आई है। अगले महीने से इसमें फिर से उछाल आने की उम्मीद है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा

सिंगापुर स्थित कंसल्टेंसी ‘वांडा इनसाइट्स’ की फाउंडर वंदना हरि का कहना है कि भारत वह सारा रूसी तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है जो उसे मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि जब तक फारस की खाड़ी से होने वाली सप्लाई में दिक्कत बनी रहेगी, भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा।

दरअसल, अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रिफाइनर्स को छूट की उम्मीद

भारत ने पहले रूसी कंपनी रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से खरीदारी कम कर दी थी। पिछले साल डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के दबाव के कारण भारत को कुछ पाबंदियां झेलनी पड़ी थीं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में समीकरण बदल गए हैं।

भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के अधिकारियों का मानना है कि रूस से तेल आयात के लिए मिली अमेरिकी छूट को आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर छूट नहीं भी बढ़ती है, तो भी सप्लाई के अन्य विकल्प सीमित होने के कारण भारत खरीदारी जारी रख सकता है।

भारत का तर्क: ‘घरेलू मांग पूरी करना हमारी प्राथमिकता’

तेल मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘हमारी प्राथमिकता घरेलू मांग को पूरा करने के लिए जरूरी ऊर्जा जुटाना है।’

जब उनसे अमेरिकी छूट की अनिवार्यता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि रूसी तेल खरीदने का फैसला पूरी तरह से कॉमर्शियल और टेक्निकल फिजिबिलिटी पर आधारित है।

यानी अगर भारतीय रिफाइनर्स को रूस से तेल लेना किफायती लग रहा है, तो वे इसे जारी रखेंगे।

समुद्र में खड़े टैंकरों की संख्या घटी

वोर्टेक्सा के डेटा के अनुसार, पिछले साल के अंत में जब भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से कदम पीछे खींचे थे, तब समुद्र में रूसी कच्चे तेल का स्टॉक काफी बढ़ गया था।

जनवरी की शुरुआत तक करीब 155 मिलियन यानी 1,447 करोड़ बैरल तेल समुद्र में खड़े टैंकरों में जमा था, जो अब घटकर 100 मिलियन यानी 933 करोड़ बैरल के करीब आ गया है।

इसका मतलब है कि भारतीय रिफाइनर्स ने पुराने अटके हुए शिपमेंट्स को भी अब प्रोसेस करना शुरू कर दिया है।

क्या है होर्मुज रूट, भारत के लिए क्यों है अहम?

  • होर्मुज रूट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। यह ओमान और ईरान के बीच स्थित है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल यहीं से होकर गुजरता है।
  • ईरान-अमेरिका के बीच तनाव के चलते अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकी दी जाती है, जिससे ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ने लगती हैं।
  • भारत के लिए यह रूट इसलिए अहम है क्योंकि सऊदी अरब, इराक और यूएई से आने वाला तेल इसी रास्ते से आता है।

ये खबर भी पढ़ें…

सरकार बोली- देश में गैस की कोई कमी नहीं: पैनिक बाइंग से बचने को कहा, 95% ग्राहक अब डिजिटल माध्यम से कर रहे बुकिंग

देश में LPG सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह स्थिर और पर्याप्त है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें घबराने या पैनिक बाइंग करने की जरूरत नहीं है।

मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत है और देशभर में बिना रुकावट गैस पहुंच रही है। सरकार इसकी लगातार निगरानी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…

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अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत बढ़ गई है, जिसके चलते भारतीय रिफाइनर्स अब रूस से ज्यादा से ज्यादा तेल जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

मार्च में रूस से आयात 18.48 करोड़ बैरल प्रति दिन पहुंचा

इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के डेटा के मुताबिक, मार्च के महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात औसत 1.98 मिलियन यानी 18.48 करोड़ बैरल प्रति दिन (bpd) रहा। यह जून 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

हालांकि, अप्रैल में यह आंकड़ा गिरकर 1.57 मिलियन यानी 14.65 करोड़ बैरल प्रति दिन रह गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह गिरावट मांग की कमी की वजह से नहीं, बल्कि नयारा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस के लिए किए गए शटडाउन के कारण आई है। अगले महीने से इसमें फिर से उछाल आने की उम्मीद है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

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सिंगापुर स्थित कंसल्टेंसी ‘वांडा इनसाइट्स’ की फाउंडर वंदना हरि का कहना है कि भारत वह सारा रूसी तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है जो उसे मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि जब तक फारस की खाड़ी से होने वाली सप्लाई में दिक्कत बनी रहेगी, भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा।

दरअसल, अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रिफाइनर्स को छूट की उम्मीद

भारत ने पहले रूसी कंपनी रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से खरीदारी कम कर दी थी। पिछले साल डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के दबाव के कारण भारत को कुछ पाबंदियां झेलनी पड़ी थीं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में समीकरण बदल गए हैं।

भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के अधिकारियों का मानना है कि रूस से तेल आयात के लिए मिली अमेरिकी छूट को आगे बढ़ाया जा सकता है। अगर छूट नहीं भी बढ़ती है, तो भी सप्लाई के अन्य विकल्प सीमित होने के कारण भारत खरीदारी जारी रख सकता है।

भारत का तर्क: ‘घरेलू मांग पूरी करना हमारी प्राथमिकता’

तेल मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘हमारी प्राथमिकता घरेलू मांग को पूरा करने के लिए जरूरी ऊर्जा जुटाना है।’

जब उनसे अमेरिकी छूट की अनिवार्यता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि रूसी तेल खरीदने का फैसला पूरी तरह से कॉमर्शियल और टेक्निकल फिजिबिलिटी पर आधारित है।

यानी अगर भारतीय रिफाइनर्स को रूस से तेल लेना किफायती लग रहा है, तो वे इसे जारी रखेंगे।

समुद्र में खड़े टैंकरों की संख्या घटी

वोर्टेक्सा के डेटा के अनुसार, पिछले साल के अंत में जब भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से कदम पीछे खींचे थे, तब समुद्र में रूसी कच्चे तेल का स्टॉक काफी बढ़ गया था।

जनवरी की शुरुआत तक करीब 155 मिलियन यानी 1,447 करोड़ बैरल तेल समुद्र में खड़े टैंकरों में जमा था, जो अब घटकर 100 मिलियन यानी 933 करोड़ बैरल के करीब आ गया है।

इसका मतलब है कि भारतीय रिफाइनर्स ने पुराने अटके हुए शिपमेंट्स को भी अब प्रोसेस करना शुरू कर दिया है।

क्या है होर्मुज रूट, भारत के लिए क्यों है अहम?

  • होर्मुज रूट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। यह ओमान और ईरान के बीच स्थित है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल यहीं से होकर गुजरता है।
  • ईरान-अमेरिका के बीच तनाव के चलते अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकी दी जाती है, जिससे ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ने लगती हैं।
  • भारत के लिए यह रूट इसलिए अहम है क्योंकि सऊदी अरब, इराक और यूएई से आने वाला तेल इसी रास्ते से आता है।

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सरकार बोली- देश में गैस की कोई कमी नहीं: पैनिक बाइंग से बचने को कहा, 95% ग्राहक अब डिजिटल माध्यम से कर रहे बुकिंग

देश में LPG सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह स्थिर और पर्याप्त है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें घबराने या पैनिक बाइंग करने की जरूरत नहीं है।

मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत है और देशभर में बिना रुकावट गैस पहुंच रही है। सरकार इसकी लगातार निगरानी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…

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