पेड़ पर उगने वाली जलेबी! बाजार में सिर्फ 2 महीने आती है नजर, शरीर के लिए संजीवनी

Last Updated:April 14, 2026, 11:55 IST Sidhi News: बाजार में जंगल जलेबी की कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो है. इससे उन्हें रोजाना 400 से 500 रुपये तक की कमाई हो जाती है, जिससे परिवार का खर्च और बच्चों की पढ़ाई में अच्छी मदद हो जाती है. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के जंगलों में पाया जाने वाला कीकर, जिसे स्थानीय भाषा में जंगल जलेबी के नाम से जाना जाता है, इन दिनों शहरों के बाजारों में खासा लोकप्रिय हो रहा है. खट्टी-मीठी स्वाद वाला यह जंगली फल न केवल लोगों की जुबान पर चढ़ रहा है बल्कि आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं के लिए आय का साधन भी बनते जा रहा है. सीधी जिले के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में इसकी भरपूर पैदावार होती है. यह केवल दो महीने ही मिलती है. पुराने बस स्टैंड के पास जंगल जलेबी बेचने वाली फूलमती गोंड लोकल 18 को बताती हैं कि पहले वह जंगल से लकड़ियां इकट्ठा कर बेचती थीं, जिससे कम आमदनी होती थी और मेहनत भी ज्यादा लगती थी लेकिन अब जंगल जलेबी के कारण उन्हें बेहतर और सुरक्षित आय का विकल्प मिल गया है. उनका कहना है कि इस काम में जोखिम कम है और कम समय में ज्यादा कमाई हो जाती है. फूलमती ने बताया कि वह रोज सुबह तड़के जंगलों में जाकर जंगल जलेबी तोड़ती हैं और दोपहर तक शहर के मुख्य बाजार में बेचने पहुंच जाती हैं. बाजार में इसकी कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो है. इससे उन्हें प्रतिदिन 400 से 500 रुपये तक की कमाई हो जाती है, जिससे परिवार का खर्च और बच्चों की पढ़ाई में अच्छी मदद मिल रही है. सेहत के लिए फायदेमंद जंगल जलेबीआयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ आरपी परौहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गर्मी के मौसम में मिलने वाली जंगल जलेबी का सेवन शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है. इसके नियमित सेवन से इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है, त्वचा रोगों में राहत मिलती है, आंखों की रोशनी बेहतर होती है और शुगर नियंत्रण में मदद मिलती है. साथ ही यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी सहायक है. उन्होंने बताया कि यह फल शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का काम करता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. औषधीय गुणों को लेकर जागरूक हैं शहरी लोगवहीं ग्रामीण इलाकों में अभी भी इस फल को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता लेकिन शहरों में इसके स्वाद और औषधीय गुणों को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. इसके चलते जंगल जलेबी अब आदिवासी महिलाओं के लिए आय का बेहतर साधन बनती जा रही है. यह फल उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 14, 2026, 11:55 IST
टीकमगढ़ में संत सेन महाराज की 726वीं जयंती:प्रतिमा स्थल पर पूजा, समाज को व्यसन मुक्त रखने पर जोर

टीकमगढ़ में मंगलवार को राष्ट्रीय सर्व सेन समाज संगठन ने संत शिरोमणि श्री सेन महाराज की 726वीं जयंती मनाई। इस अवसर पर सिविल लाइन रोड स्थित सेन महाराज की प्रतिमा स्थल पर पूजा-अर्चना की गई। यह कार्यक्रम संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोरेलाल सेन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। जयंती समारोह में भाजपा जिला अध्यक्ष सरोज राजपूत, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी गिरी और युवा प्रदेश महामंत्री राहुल तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के संरक्षक कन्हैयालाल मुखिया ने की। रमेश कुमार ने सेन महाराज का अभिषेक, पूजा-अर्चना और कन्या पूजन करवाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उपस्थित सभी अतिथियों ने संत सेन महाराज के जीवन चरित्र पर अपने विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय अध्यक्ष गोरेलाल सेन ने समाज को एकजुट रहने और बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को व्यसन मुक्त जीवन जीने का संकल्प भी दिलाया। इस अवसर पर देवेंद्र सेन, धनीराम सेन, राहुल बंटी वर्मा, छोटे लाल अंतौरा, रामनारायण सेन, गणेश सेन, मुन्ना लाल सेन, रामरतन सेन, चंद्रभान सेन, सूदन लाल, रामबगस सेन, वीरन मुखिया, कमलेश सेन सहित सेन समाज के कई सदस्य मौजूद रहे।
क्रिकेट नहीं, आर्मी में जाना चाहते थे साकिब:मां ने गहनें गिरवी रखकर दिलाए थे जूते, IPL में डेब्यू मैच में ही लिए 4 विकेट

गोपालगंज के साकिब हुसैन ने IPL के अपने डेब्यू मैच में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने 4 ओवर में 24 रन देते हुए 4 विकेट चटकाए। इसमें यशस्वी जायसवाल, डोनोवन फरेरा, जोफ्रा आर्चर और रवि बिश्नोई का विकेट शामिल है। साकिब को सनराइजर्स हैदराबाद ने 30 लाख रुपए में खरीदा था। मुकाबले के एक दिन पहले मैच खेलने की जानकारी दी गई थी। छोटे से गांव से निकले साकिब आर्मी में जाना चाहते थे। खेलने के लिए उनकी मां ने अपने गहनें गिरवी रखे थे और जूते दिलाए थे। जसप्रीत बुमराह को अपना आइडल मानते हैं साकिब 21 साल के साकिब दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं। वह चेन्नई सुपर किंग में नेट बॉलर के रूप में चयनित हुए थे। 2024-2025 सीजन के लिए हुई नीलामी का भी हिस्सा रह चुके हैं। 2024 में साकिब हुसैन को IPL टीम KKR ने 20 लाख रुपए में खरीदा था। जसप्रीत बुमराह को साकिब अपना आइडल मानते हैं। साकिब को कई बार घर चलाने के लिए टेनिस बॉल से मैच खेलना पड़ता था। टेनिस बॉल के एक मैच के बदले में 500-700 रुपए मिलते थे। गेंदबाजी के लिए अच्छे जूते तक नहीं थे साकिब सदर प्रखंड के दरगाह मोहल्ले में रहते हैं। उनके पिता अली अहमद हुसैन पेशे से मजदूर हैं। साकिब के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उनके पास गेंदबाजी करने के लिए खास जूते तक नहीं थे। वह फटे जूतों से मैच खेलते थे। तब खेलने के लिए मां ने अपने गहने गिरवी रखे थे। शुरुआती दिनों में उनका सपना क्रिकेट नहीं, बल्कि आर्मी में जाने का था। शहर के मिंज स्टेडियम में वे दौड़ने जाते थे, जहां खिलाड़ियों को देखकर उनके भी मन में क्रिकेट खेलने की तमन्ना जागी। अंडर-19 में हाईएस्ट विकेट टेकर रहे इंटर तक पढ़ाई करने के बाद साकिब ने क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए। गोपालगंज के मिंज स्टेडियम में देवधारी गिरी टूर्नामेंट में उन्हें खेलने का मौका भी मिला। इसमें उनका बॉलिंग के लिए चयन हुआ। इसके बाद 2021 में पटना में होने वाले बिहार क्रिकेट लीग में शामिल हुए। फिर अंडर-19 खेलने चंडीगढ़ चले गए, जिसमें वह हाईएस्ट विकेट टेकर रहे। उनका मानना है कि चंडीगढ़ से ही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट शुरू हुआ, जिसने उन्हें नेशनल क्रिकेट एकेडमी बेंगलुरू तक पहुंचाया। इसके बाद मुस्ताक अली ट्रॉफी खेलने का मौका मिला। फिर उन्हें नेट बॉलिंग के लिए बुलाया गया था। धोनी ने की थी साकिब की तारीफ साकिब चेन्नई सुपर किंग्स के नेट बॉलर भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्हें महेंद्र सिंह धोनी से मिलने का मौका मिला। साकिब ने अपनी बॉलिंग को लेकर धोनी से राय ली। इस पर धोनी ने कहा, ‘अच्छा हो रहा है, तुम में अच्छा टैलेंट है। तुम ऐसे ही करते रहो। बस मेहनत करते रहो, सिलेक्शन तुम्हारे हाथ में नहीं है।’ साकिब धोनी को अपना आइडल भी मानते हैं। IPL डेब्यू मैच में पहला विकेट यशस्वी जयसवाल का लिया साकिब ने डेब्यू मैच में पहला विकेट यशस्वी जयसवाल का लिया। उन्होंने दूसरे ओवर की चौथी बॉल पर यशस्वी जयसवाल को आउट किया। 15वें ओवर की आखिरी बॉल पर उन्होंने दूसरा विकेट लिया था। साकिब ने डोनोवन फरेरा को क्लीन बोल्ड किया था और जडेजा-फरेरा की शतकीय साझेदारी तोड़ी थी। इसी के साथ उन्होंने 17वें ओवर में बैक टू बैक दो विकेट लिए थे। उन्होंने 8वां विकेट जोफ्रा आर्चर और 9वां विकेट रवि बिश्नोई का लिया था। साकिब ने रिकॉर्ड बुक में दर्ज कराया अपना नाम हुसैन ने अपनी तेज गति के साथ-साथ स्लोवर वन से प्रभावित किया। साकिब अब IPL डेब्यू में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले (संयुक्त रूप से) भारतीय गेंदबाज बने। उन्होंने अश्वनी कुमार के रिकॉर्ड की बराबरी की। MI के अश्विनी ने 2025 में KKR के खिलाफ डेब्यू करते हुए 24 रन देकर 4 विकेट चटकाए थे। साकिब ने मैच में अपनी शानदार गेंदबाजी का श्रेय टीम के गेंदबाजी कोच वरुण एरोन को दिया है। मैंने खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखा पोस्ट मैच प्रजेंटेशन में बात करते हुए साकिब ने कहा, “हर खिलाड़ी उम्मीद करता है कि उसका डेब्यू ऐसा रहे। मुझे सच में बहुत अच्छा लग रहा है। मैं बहुत खुश हूं। हमारे गेंदबाजी कोच ने एक दिन पहले बताया था कि मैं मैच खेल रहा हूं। उसके बाद से मेरा पूरा ध्यान मैच में अच्छा प्रदर्शन करने पर था। मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए मैंने खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखा।”
क्रिकेट नहीं, आर्मी में जाना चाहते थे साकिब:मां ने गहनें गिरवी रखकर दिलाए थे जूते, IPL में डेब्यू मैच में ही लिए 4 विकेट

गोपालगंज के साकिब हुसैन ने IPL के अपने डेब्यू मैच में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने 4 ओवर में 24 रन देते हुए 4 विकेट चटकाए। इसमें यशस्वी जायसवाल, डोनोवन फरेरा, जोफ्रा आर्चर और रवि बिश्नोई का विकेट शामिल है। साकिब को सनराइजर्स हैदराबाद ने 30 लाख रुपए में खरीदा था। मुकाबले के एक दिन पहले मैच खेलने की जानकारी दी गई थी। छोटे से गांव से निकले साकिब आर्मी में जाना चाहते थे। खेलने के लिए उनकी मां ने अपने गहनें गिरवी रखे थे और जूते दिलाए थे। जसप्रीत बुमराह को अपना आइडल मानते हैं साकिब 21 साल के साकिब दाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं। वह चेन्नई सुपर किंग में नेट बॉलर के रूप में चयनित हुए थे। 2024-2025 सीजन के लिए हुई नीलामी का भी हिस्सा रह चुके हैं। 2024 में साकिब हुसैन को IPL टीम KKR ने 20 लाख रुपए में खरीदा था। जसप्रीत बुमराह को साकिब अपना आइडल मानते हैं। साकिब को कई बार घर चलाने के लिए टेनिस बॉल से मैच खेलना पड़ता था। टेनिस बॉल के एक मैच के बदले में 500-700 रुपए मिलते थे। गेंदबाजी के लिए अच्छे जूते तक नहीं थे साकिब सदर प्रखंड के दरगाह मोहल्ले में रहते हैं। उनके पिता अली अहमद हुसैन पेशे से मजदूर हैं। साकिब के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। उनके पास गेंदबाजी करने के लिए खास जूते तक नहीं थे। वह फटे जूतों से मैच खेलते थे। तब खेलने के लिए मां ने अपने गहने गिरवी रखे थे। शुरुआती दिनों में उनका सपना क्रिकेट नहीं, बल्कि आर्मी में जाने का था। शहर के मिंज स्टेडियम में वे दौड़ने जाते थे, जहां खिलाड़ियों को देखकर उनके भी मन में क्रिकेट खेलने की तमन्ना जागी। अंडर-19 में हाईएस्ट विकेट टेकर रहे इंटर तक पढ़ाई करने के बाद साकिब ने क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए। गोपालगंज के मिंज स्टेडियम में देवधारी गिरी टूर्नामेंट में उन्हें खेलने का मौका भी मिला। इसमें उनका बॉलिंग के लिए चयन हुआ। इसके बाद 2021 में पटना में होने वाले बिहार क्रिकेट लीग में शामिल हुए। फिर अंडर-19 खेलने चंडीगढ़ चले गए, जिसमें वह हाईएस्ट विकेट टेकर रहे। उनका मानना है कि चंडीगढ़ से ही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट शुरू हुआ, जिसने उन्हें नेशनल क्रिकेट एकेडमी बेंगलुरू तक पहुंचाया। इसके बाद मुस्ताक अली ट्रॉफी खेलने का मौका मिला। फिर उन्हें नेट बॉलिंग के लिए बुलाया गया था। धोनी ने की थी साकिब की तारीफ साकिब चेन्नई सुपर किंग्स के नेट बॉलर भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्हें महेंद्र सिंह धोनी से मिलने का मौका मिला। साकिब ने अपनी बॉलिंग को लेकर धोनी से राय ली। इस पर धोनी ने कहा, ‘अच्छा हो रहा है, तुम में अच्छा टैलेंट है। तुम ऐसे ही करते रहो। बस मेहनत करते रहो, सिलेक्शन तुम्हारे हाथ में नहीं है।’ साकिब धोनी को अपना आइडल भी मानते हैं। IPL डेब्यू मैच में पहला विकेट यशस्वी जयसवाल का लिया साकिब ने डेब्यू मैच में पहला विकेट यशस्वी जयसवाल का लिया। उन्होंने दूसरे ओवर की चौथी बॉल पर यशस्वी जयसवाल को आउट किया। 15वें ओवर की आखिरी बॉल पर उन्होंने दूसरा विकेट लिया था। साकिब ने डोनोवन फरेरा को क्लीन बोल्ड किया था और जडेजा-फरेरा की शतकीय साझेदारी तोड़ी थी। इसी के साथ उन्होंने 17वें ओवर में बैक टू बैक दो विकेट लिए थे। उन्होंने 8वां विकेट जोफ्रा आर्चर और 9वां विकेट रवि बिश्नोई का लिया था। साकिब ने रिकॉर्ड बुक में दर्ज कराया अपना नाम हुसैन ने अपनी तेज गति के साथ-साथ स्लोवर वन से प्रभावित किया। साकिब अब IPL डेब्यू में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले (संयुक्त रूप से) भारतीय गेंदबाज बने। उन्होंने अश्वनी कुमार के रिकॉर्ड की बराबरी की। MI के अश्विनी ने 2025 में KKR के खिलाफ डेब्यू करते हुए 24 रन देकर 4 विकेट चटकाए थे। साकिब ने मैच में अपनी शानदार गेंदबाजी का श्रेय टीम के गेंदबाजी कोच वरुण एरोन को दिया है। मैंने खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखा पोस्ट मैच प्रजेंटेशन में बात करते हुए साकिब ने कहा, “हर खिलाड़ी उम्मीद करता है कि उसका डेब्यू ऐसा रहे। मुझे सच में बहुत अच्छा लग रहा है। मैं बहुत खुश हूं। हमारे गेंदबाजी कोच ने एक दिन पहले बताया था कि मैं मैच खेल रहा हूं। उसके बाद से मेरा पूरा ध्यान मैच में अच्छा प्रदर्शन करने पर था। मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए मैंने खुद को मानसिक तौर पर तैयार रखा।”
World updates| Trump Wanted Gulf of Mexico Named After Him | Controversy

Hindi News International World Updates| Trump Wanted Gulf Of Mexico Named After Him | Controversy| Iran, China, Russia, Usa, Putin, Trump, 3 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने एक समय गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम ‘गल्फ ऑफ ट्रम्प’ रखने पर भी विचार किया था, लेकिन बाद में यह फैसला छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह शायद काम नहीं करता और विवाद बढ़ सकता था। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि यह फैसला उनकी बड़ी योजना का हिस्सा था। इसके तहत उन्होंने इस खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ रखने का आदेश दिया था। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में, 20 जनवरी 2025 को, एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करके यह बदलाव लागू किया। इस आदेश के तहत अमेरिका के अंदर सभी सरकारी एजेंसियों को नया नाम अपनाने के निर्देश दिए गए। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने भी अपने रिकॉर्ड में यह बदलाव दर्ज किया। हालांकि, इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। खासकर मेक्सिको ने इसका विरोध किया। वहां की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि गल्फ ऑफ मैक्सिको नाम सदियों से इस्तेमाल हो रहा है और पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
World updates| Trump Wanted Gulf of Mexico Named After Him | Controversy

Hindi News International World Updates| Trump Wanted Gulf Of Mexico Named After Him | Controversy| Iran, China, Russia, Usa, Putin, Trump, 26 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने एक समय गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम ‘गल्फ ऑफ ट्रम्प’ रखने पर भी विचार किया था, लेकिन बाद में यह फैसला छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह शायद काम नहीं करता और विवाद बढ़ सकता था। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि यह फैसला उनकी बड़ी योजना का हिस्सा था। इसके तहत उन्होंने इस खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ रखने का आदेश दिया था। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में, 20 जनवरी 2025 को, एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करके यह बदलाव लागू किया। इस आदेश के तहत अमेरिका के अंदर सभी सरकारी एजेंसियों को नया नाम अपनाने के निर्देश दिए गए। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने भी अपने रिकॉर्ड में यह बदलाव दर्ज किया। हालांकि, इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। खासकर मेक्सिको ने इसका विरोध किया। वहां की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि गल्फ ऑफ मैक्सिको नाम सदियों से इस्तेमाल हो रहा है और पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में नशेड़ी का तांडव:वार्डों में लोटता रहा युवक, प्रबंधन संभालने में हुआ परेशान

रीवा के संजय गांधी अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया जब एक नशे की हालत में युवक ने अस्पताल परिसर में जमकर उत्पात मचाया। युवक बेसुध हालत में अलग-अलग वार्डों में लोटता रहा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में दहशत का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक लंबे समय तक अस्पताल परिसर में पड़ा रहा, लेकिन सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने देखते रहे। इस दौरान अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए। हालांकि, बाद में अस्पताल के अन्य कर्मचारियों के मौके पर पहुंचने के बाद युवक को वहां से हटाया गया। घटना को लेकर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और जिम्मेदारों की निष्क्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद तत्काल स्टाफ को भेजकर युवक को हटाया गया। उन्होंने बताया कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए गार्डों की जिम्मेदारी तय की जा रही है। साथ ही पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी। मरीजों की सुरक्षा अस्पताल प्रबंधन की प्राथमिकता है।
Iran War Impact: Household Expenses Rise

Hindi News Business Iran War Impact: Household Expenses Rise | Kitchen Appliances Cost Up 15% मुंबई11 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान समेत पूरे पश्चिम एशिया में तनाव से जो हालात पैदा हुए हैं, उसके चलते आम भारतीयों का घरेलू खर्च बढ़ रहा है। रसोई से लेकर कपड़े और घरेलू उपकरणों तक, हर चीज या तो महंगी हो गई है या उनके दाम बढ़ने की आशंका गहरा रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने एक साथ कई मोर्चों पर दबाव बनाया है। ईवाई इंडिया का विश्लेषण कहता है कि यह असर अगले दो साल तक बना रह सकता है। खाने के तेल के दाम 7% से ज्यादा बढ़ गए हैं। भारत जरूरत का 57% खाद्य तेल आयात करता है। इनमें पाम ऑयल, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल शामिल है। इस बीच पैकेजिंग, ढुलाई और कच्चे माल की लागत बढ़ने से साबुन, पेस्ट, बिस्किट जैसे FMCG प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां या तो दाम बढ़ाएंगी या पैकेट छोटे करेंगी। इसे ‘श्रिंकफ्लेशन’ कहा जाता है। पेंट, टेक्सटाइल और पर्सनल केयर कंपनियां भी लागत बढ़ने का हवाला देकर कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। FMCG: साबुन, शैंपू, बिस्किट जैसे प्रोडक्ट्स की सप्लाई भी बाधित हो रही पश्चिम एशिया संकट पर ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत विफल होने से कच्चे तेल की आपूर्ति घटी है। इसके चलते सोमवार को क्रूड के दाम 8% से ज्यादा बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गए। इससे सर्फैक्टेंट और पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव की किल्लत हो गई। नतीजतन शैंपू, साबुन जैसे उत्पादों की आपूर्ति बाधित हुई है। ऐसे में कंपनियां दाम बढ़ाने से बचने के लिए इनके पैकेट छोटे कर रही हैं। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: लागत 10-15% तक बढ़ गई घरेलू उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग लागत 10-15% तक बढ़ चुकी है। इसका 70% हिस्सा कंपनियां पहले ही ग्राहकों पर डाल चुकी हैं। वॉशिंग मशीन, फ्रिज, पंखे और एलईडी सब के दाम बढ़े हैं। अब भीषण गर्मी की आशंका से वोल्टास और ब्लू स्टार जैसी एसी कंपनियों के शेयर चढ़ने लगे हैं क्योंकि इनकी बिक्री तेजी से बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। कपड़ा-पेंट: इस साल दाम 5% तक बढ़ सकते हैं क्रूड के दाम बढ़ने से प्लास्टिक की उत्पादन लागत करीब 50% बढ़ गई है। टेक्सटाइल सेक्टर में पॉलिएस्टर, नायलॉन और कलर-केमिकल्स 20-25% महंगे हो गए हैं। भारत के कपड़ा उत्पादन में 60% हिस्सा सिंथेटिक फाइबर का है। ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके चलते 1 अप्रैल से शुरू वित्त वर्ष 2026-27 में कपड़े और पेंट के दाम 2-5% तक बढ़ने की संभावना हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
एंजियोप्लास्टी क्या होती है और कब पड़ती है इसकी जरूरत, अपोलो की कार्डियोलॉजिस्ट वनीता अरोरा से समझिए

Last Updated:April 14, 2026, 11:06 IST Heart Blockage Treatment: एंजियोप्लास्टी एक मॉडर्न मेडिकल प्रोसीजर है, जिसका उपयोग दिल की धमनियों में ब्लॉकेज को खोलने के लिए किया जाता है. अपोलो हॉस्पिटल की कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर वनीता अरोरा के मुताबिक एंजियोप्लास्टी हार्ट अटैक जैसी इमरजेंसी कंडीशंस में जान बचाने में मदद करती है. सही समय पर इलाज से दिल की बीमारियों से बचाव संभव है. डॉक्टर वनीता अरोरा के अनुसार हार्ट अटैक की कंडीशन में एंजियोप्लास्टी जान बचा सकती है. All About Angioplasty: वर्तमान समय में लोगों की लाइफस्टाइल और खानपान बिगड़ गया है. इसका असर हार्ट हेल्थ पर भी बुरी तरह पड़ रहा है. आजकल दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और इनमें सबसे कॉमन समस्या हार्ट की धमनियों में ब्लॉकेज होना है. जब दिल तक खून पहुंचाने वाली नसों में रुकावट आ जाती है, तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर आमतौर पर जिस प्रोसीजर की सलाह देते हैं, उसे एंजियोप्लास्टी कहा जाता है. यह एक आधुनिक और असरदार ट्रीटमेंट टेक्निक है, जिससे बिना बड़ी सर्जरी के हार्ट की ब्लॉकेज को खोला जा सकता है. नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल की सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वनीता अरोरा ने News18 को बताया कि एंजियोप्लास्टी एक मेडिकल प्रोसीजर है, जिसमें दिल की सिकुड़ी हुई या बंद हो चुकी धमनियों को खोलने के लिए एक पतली ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे कैथेटर कहा जाता है. इस ट्यूब के सिरे पर एक छोटा सा गुब्बारा लगा होता है, जिसे ब्लॉकेज वाली जगह पर ले जाकर फुलाया जाता है. इससे धमनियां चौड़ी हो जाती हैं और ब्लड फ्लो सामान्य हो जाता है. कई मामलों में डॉक्टर स्टेंट भी डालते हैं, जिससे धमनियां फिर से संकरी न हों. यह स्टेंट एक बेहद छोटा जालीदार पाइप जैसा होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. अब सवाल यह है कि एंजियोप्लास्टी की जरूरत कब पड़ती है? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि जब मरीज को सीने में दर्द, सांस फूलना, थकान या हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई देते हैं और जांच में धमनियों में ब्लॉकेज पाया जाता है, तब यह प्रक्रिया जरूरी हो जाती है. खासकर हार्ट अटैक के दौरान सही समय पर एंजियोप्लास्टी करने से जान बचाई जा सकती है. इस प्रोसीजर में बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं होती, जिससे मरीज जल्दी ठीक हो जाता है और अस्पताल में कम समय रहना पड़ता है. यह दर्द को कम करता है और दिल की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है. एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ट की धमनियों में ब्लॉकेज बहुत ज्यादा हो जाए, तो कुछ मामलों में बायपास सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है. मरीज की कंडीशन को देखकर एंजियोप्लास्टी का फैसला लिया जाता है. एंजियोप्लास्टी के बाद मरीज को अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करना बेहद जरूरी होता है. बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, स्मोकिंग से दूरी और तनाव कम करने की सलाह देते हैं. साथ ही नियमित जांच और दवाइयों का सेवन भी जरूरी होता है, ताकि दोबारा ब्लॉकेज बनने का खतरा कम हो सके. दिल की धमनियों में ब्लॉकेज से बचने के लिए लाइफस्टाइल सुधारें, खानपान अच्छा रखें और समय-समय पर हार्ट की जांच कराएं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 14, 2026, 11:06 IST
6 साल अलग-अलग शहरों में बंधक बनाकर दुष्कर्म:दतिया में शादी का झांसा देकर भगा ले गया था; हॉस्टल में भाई बनकर दाखिला दिलाया

दतिया के बस स्टैंड से 3 फरवरी 2020 को 28 वर्षीय युवती का बोलेरो से जबरन अपहरण कर शादी का झांसा देते हुए अलग-अलग शहरों (झांसी, इलाहाबाद, ग्वालियर) में बंधक बनाकर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। 6 साल बाद पीड़िता 11 अप्रैल को अपने घर लौटी और परिजनों को आपबीती बताई। पुलिस ने सोमवार रात पीड़िता की शिकायत पर आरोपी पड़ोसी जितेन्द्र अहिरवार के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म, बंधक बनाकर रखने, मारपीट और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पढ़ाई के लिए बस स्टैंड पहुंची थी, बोलेरो में जबरन बैठाया जानकारी के अनुसार, परासरी गांव निवासी 28 वर्षीय युवती ने बताया कि पड़ोस में रहने वाला युवक जितेन्द्र अहिरवार वर्ष 2017 से उससे बातचीत करता था। 3 फरवरी 2020 को जब वह पढ़ाई के सिलसिले में दतिया बस स्टैंड पहुंची, तभी आरोपी उसे जबरन एक बोलेरो में बैठाकर झांसी ले गया। वहां एक होटल में रखकर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। इलाहाबाद और झांसी में कमरे में रखा बंधक पीड़िता ने बताया कि इसके बाद आरोपी उसे इलाहाबाद ले गया, जहां करीब 5 महीने तक एक कमरे में बंधक बनाकर रखा। इस दौरान वह बाहर नहीं जाने देता था और विरोध करने पर मारपीट करता था। बाद में उसने झांसी में भी कई महीनों तक किराए के कमरे में बंधक बनाकर रखा और लगातार दुष्कर्म करता रहा। आरोपी ने उसे मोबाइल भी नहीं दिया और बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी देता था। ग्वालियर के हॉस्टल में भाई बनकर कराया दाखिल कुछ समय बाद आरोपी उसे ग्वालियर के एक हॉस्टल में छोड़ गया, जहां उसने खुद को युवती का भाई बताकर दाखिल कराया। यहां भी वह समय-समय पर आकर धमकाता और दुष्कर्म करता रहा। पीड़िता के मुताबिक, बार-बार कहने के बावजूद आरोपी ने उससे शादी नहीं की। हाल ही में जब युवती को पता चला कि परिवार ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई है, तो वह 11 अप्रैल को घर लौटी और परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद परिवार के साथ थाने पहुंचकर सोमवार रात को शिकायत दर्ज कराई गई।









