Saturday, 18 Apr 2026 | 06:27 PM

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शादी पर बोले विजय वर्मा – ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी:मटका किंग की स्टारकास्ट बोली- भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकते, यही हमें जिंदा रखती है

शादी पर बोले विजय वर्मा - ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी:मटका किंग की स्टारकास्ट बोली- भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकते, यही हमें जिंदा रखती है

मटका किंग अपनी दमदार कहानी और 60-70 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इस सीरीज में जुए की दुनिया के जरिए पहचान, इज्जत और सत्ता के खेल को दिखाने की कोशिश की गई है। इसी बीच दैनिक भास्कर ने फिल्म के डायरेक्टर नागराज मंजुले और स्टारकास्ट विजय वर्मा, कृतिका कामरा और साईं तम्हंकर से खास बातचीत की। इस दौरान सभी ने न सिर्फ अपने किरदारों के बारे में खुलकर बात की, बल्कि सीरीज की कहानी, उसके दौर और उसके सामाजिक पहलुओं पर भी दिलचस्प बातें साझा कीं। यह सीरीज सिर्फ एक खेल की नहीं, बल्कि उस दौर और उससे जुड़े लोगों की कहानी को सामने लाने का प्रयास है। नागराज मंजुले- आप हमेशा समाज को रॉ और अनफिल्टर्ड तरीके से दिखाते हैं। मटका किंग में आपने क्या एक्सप्लोर किया है? यह कहानी सिर्फ जुए के खेल की नहीं है, बल्कि उस दुनिया की है जो इसके इर्द-गिर्द बनती है। हम जानते हैं कि मटका खेला जाता था, लेकिन जो लोग इसे खेलते थे, उनकी जिंदगी कैसी थी, यह कम लोग जानते हैं। यह खेल कैसे इतना बड़ा और आकर्षक बना हमने उसी समाज, उस दौर और उन लोगों की कहानी बताने की कोशिश की है। 60-70 के दशक को पर्दे पर जीवंत बनाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा और इतनी दमदार स्टारकास्ट के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा? नागराज मंजुले- यह ज्यादा मुश्किल से पहले सोचने का काम होता है। जब आप उस दौर को लिख लेते हैं, तो पूरी टीम उसे साकार करने में जुट जाती है। हमारे पास कॉस्ट्यूम, प्रोडक्शन डिजाइन, म्यूजिक और डीओपी जैसे विभागों में बेहद टैलेंटेड लोग थे, जिन्होंने मिलकर उस समय को जीवंत बनाने की कोशिश की। वहीं स्टारकास्ट के साथ काम करने का अनुभव शानदार रहा, पहली बार इतने बड़े और नामी कलाकारों के साथ काम किया। हर किरदार मजबूत है, ऐसा लगता है जैसे हर खिलाड़ी अपने आप में मैच जिताने वाला है। स्क्रिप्ट में ऐसा क्या खास था और आपके किरदार में ऐसी कौन-सी बात थी, जिसकी वजह से आपने तुरंत इस प्रोजेक्ट के लिए हां कह दी और आप उससे कितना रिलेट कर पाए? विजय वर्मा- सबसे बड़ी वजह थी नागराज मंजुले के साथ काम करने का मौका। मैं उनके काम का हमेशा से फैन रहा हूं, और उनके साथ काम करना अपने आप में खास अनुभव है। स्क्रिप्ट में जो किरदार था, उसमें एक शांत लेकिन गहरी इंटेंसिटी है वह अपने काम को पूरी ईमानदारी से करता है, लेकिन जिस दुनिया का वह हिस्सा है, उसे समाज खुलकर स्वीकार नहीं करता, यही उसका सबसे बड़ा संघर्ष है। जहां तक रिलेट करने की बात है, यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही कभी मैं किरदार के बहुत करीब महसूस करता था, तो कभी उससे दूर। कई बार ऐसा भी हुआ कि हम दोनों कहीं बीच में आकर मिले, और वहीं से उस किरदार को समझने का रास्ता बना। ट्रेलर में आपके किरदार के रिश्तों में एक जटिलता और कई परतें नजर आती हैं, इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगी? कृतिका कामरा- इस कहानी में सभी किरदार और उनके रिश्ते जटिल हैं। मेरा किरदार गुलरुख दुबाश एक अलग दुनिया से आता है, लेकिन उसे इस खेल और विजय के किरदार की दुनिया आकर्षित करती है। उसकी अपनी कमियां और इच्छाएं हैं, जो उसे इस सफर का हिस्सा बनाती हैं। आपके किरदार में कितनी लेयर्स देखने को मिलेंगी? साईं तम्हंकर- बहुत सारी लेयर्स हैं। मेरा किरदार ‘बरखा’ ऐसा है जो अपनी भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकती। अगर वह कुछ महसूस करती है, तो उसे व्यक्त करना जरूरी है। यह उसकी सबसे बड़ी खासियत है। आजकल ओटीटी और सिनेमा में महिला किरदारों को ज्यादा गहराई मिल रही है। इस पर आपकी राय? साईं तम्हंकर- यह बहुत अच्छा बदलाव है। अब महिला किरदार सिर्फ सजावट नहीं हैं, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा हैं। हालांकि अभी भी सुधार की गुंजाइश है। ट्रेलर में एक लाइन है ‘जिंदगी उम्मीद पर टिकी है’। आपकी जिंदगी में उम्मीद का क्या मतलब है? नागराज मंजुले- बस चलते रहना चाहिए। उम्मीद यही है कि आगे अच्छा होगा। विजय वर्मा- मुश्किल वक्त में सिर्फ उम्मीद ही साथ देती है। समय हमेशा बदलता है, और यही भरोसा हमें आगे बढ़ाता है। कृतिका कामरा- उम्मीद ही वह भावना है जो हमें जिंदा रखती है। अगर उम्मीद नहीं, तो कुछ भी नहीं। साईं तम्हंकर- उम्मीद जीवन की ड्राइविंग फोर्स है। इसके बिना जीना मुश्किल है। आखिरी सवाल दर्शक जानना चाहते हैं कि विजय वर्मा कब तक सिंगल रहने वाले हैं? विजय वर्मा- दुनिया उम्मीद पर टिकी है… फिलहाल उम्मीद ही पेट्रोल है!

शादी पर बोले विजय वर्मा – ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी:मटका किंग की स्टारकास्ट बोली- भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकते, यही हमें जिंदा रखती है

शादी पर बोले विजय वर्मा - ‘उम्मीद पर दुनिया टिकी:मटका किंग की स्टारकास्ट बोली- भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकते, यही हमें जिंदा रखती है

मटका किंग अपनी दमदार कहानी और 60-70 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इस सीरीज में जुए की दुनिया के जरिए पहचान, इज्जत और सत्ता के खेल को दिखाने की कोशिश की गई है। इसी बीच दैनिक भास्कर ने फिल्म के डायरेक्टर नागराज मंजुले और स्टारकास्ट विजय वर्मा, कृतिका कामरा और साईं तम्हंकर से खास बातचीत की। इस दौरान सभी ने न सिर्फ अपने किरदारों के बारे में खुलकर बात की, बल्कि सीरीज की कहानी, उसके दौर और उसके सामाजिक पहलुओं पर भी दिलचस्प बातें साझा कीं। यह सीरीज सिर्फ एक खेल की नहीं, बल्कि उस दौर और उससे जुड़े लोगों की कहानी को सामने लाने का प्रयास है। नागराज मंजुले- आप हमेशा समाज को रॉ और अनफिल्टर्ड तरीके से दिखाते हैं। मटका किंग में आपने क्या एक्सप्लोर किया है? यह कहानी सिर्फ जुए के खेल की नहीं है, बल्कि उस दुनिया की है जो इसके इर्द-गिर्द बनती है। हम जानते हैं कि मटका खेला जाता था, लेकिन जो लोग इसे खेलते थे, उनकी जिंदगी कैसी थी, यह कम लोग जानते हैं। यह खेल कैसे इतना बड़ा और आकर्षक बना हमने उसी समाज, उस दौर और उन लोगों की कहानी बताने की कोशिश की है। 60-70 के दशक को पर्दे पर जीवंत बनाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा और इतनी दमदार स्टारकास्ट के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा? नागराज मंजुले- यह ज्यादा मुश्किल से पहले सोचने का काम होता है। जब आप उस दौर को लिख लेते हैं, तो पूरी टीम उसे साकार करने में जुट जाती है। हमारे पास कॉस्ट्यूम, प्रोडक्शन डिजाइन, म्यूजिक और डीओपी जैसे विभागों में बेहद टैलेंटेड लोग थे, जिन्होंने मिलकर उस समय को जीवंत बनाने की कोशिश की। वहीं स्टारकास्ट के साथ काम करने का अनुभव शानदार रहा, पहली बार इतने बड़े और नामी कलाकारों के साथ काम किया। हर किरदार मजबूत है, ऐसा लगता है जैसे हर खिलाड़ी अपने आप में मैच जिताने वाला है। स्क्रिप्ट में ऐसा क्या खास था और आपके किरदार में ऐसी कौन-सी बात थी, जिसकी वजह से आपने तुरंत इस प्रोजेक्ट के लिए हां कह दी और आप उससे कितना रिलेट कर पाए? विजय वर्मा- सबसे बड़ी वजह थी नागराज मंजुले के साथ काम करने का मौका। मैं उनके काम का हमेशा से फैन रहा हूं, और उनके साथ काम करना अपने आप में खास अनुभव है। स्क्रिप्ट में जो किरदार था, उसमें एक शांत लेकिन गहरी इंटेंसिटी है वह अपने काम को पूरी ईमानदारी से करता है, लेकिन जिस दुनिया का वह हिस्सा है, उसे समाज खुलकर स्वीकार नहीं करता, यही उसका सबसे बड़ा संघर्ष है। जहां तक रिलेट करने की बात है, यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही कभी मैं किरदार के बहुत करीब महसूस करता था, तो कभी उससे दूर। कई बार ऐसा भी हुआ कि हम दोनों कहीं बीच में आकर मिले, और वहीं से उस किरदार को समझने का रास्ता बना। ट्रेलर में आपके किरदार के रिश्तों में एक जटिलता और कई परतें नजर आती हैं, इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगी? कृतिका कामरा- इस कहानी में सभी किरदार और उनके रिश्ते जटिल हैं। मेरा किरदार गुलरुख दुबाश एक अलग दुनिया से आता है, लेकिन उसे इस खेल और विजय के किरदार की दुनिया आकर्षित करती है। उसकी अपनी कमियां और इच्छाएं हैं, जो उसे इस सफर का हिस्सा बनाती हैं। आपके किरदार में कितनी लेयर्स देखने को मिलेंगी? साईं तम्हंकर- बहुत सारी लेयर्स हैं। मेरा किरदार ‘बरखा’ ऐसा है जो अपनी भावनाओं को दबाकर नहीं रख सकती। अगर वह कुछ महसूस करती है, तो उसे व्यक्त करना जरूरी है। यह उसकी सबसे बड़ी खासियत है। आजकल ओटीटी और सिनेमा में महिला किरदारों को ज्यादा गहराई मिल रही है। इस पर आपकी राय? साईं तम्हंकर- यह बहुत अच्छा बदलाव है। अब महिला किरदार सिर्फ सजावट नहीं हैं, बल्कि कहानी का अहम हिस्सा हैं। हालांकि अभी भी सुधार की गुंजाइश है। ट्रेलर में एक लाइन है ‘जिंदगी उम्मीद पर टिकी है’। आपकी जिंदगी में उम्मीद का क्या मतलब है? नागराज मंजुले- बस चलते रहना चाहिए। उम्मीद यही है कि आगे अच्छा होगा। विजय वर्मा- मुश्किल वक्त में सिर्फ उम्मीद ही साथ देती है। समय हमेशा बदलता है, और यही भरोसा हमें आगे बढ़ाता है। कृतिका कामरा- उम्मीद ही वह भावना है जो हमें जिंदा रखती है। अगर उम्मीद नहीं, तो कुछ भी नहीं। साईं तम्हंकर- उम्मीद जीवन की ड्राइविंग फोर्स है। इसके बिना जीना मुश्किल है। आखिरी सवाल दर्शक जानना चाहते हैं कि विजय वर्मा कब तक सिंगल रहने वाले हैं? विजय वर्मा- दुनिया उम्मीद पर टिकी है… फिलहाल उम्मीद ही पेट्रोल है!

ट्रम्प बोले- ईरान एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने को तैयार:अब सीजफायर डील दोनों देशों को मंजूर; इजराइल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर राजी

ट्रम्प बोले- ईरान एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने को तैयार:अब सीजफायर डील दोनों देशों को मंजूर; इजराइल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर राजी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान अपने एनरिच्ड (संवर्धित) यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है। अमेरिका का मानना है कि इसी का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है। उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से यह भी कहा कि दोनों देश शांति समझौते के काफी करीब हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत बहुत सफल चल रही है और समझौते की संभावना काफी ज्यादा है। ट्रम्प ने कहा कि अगर यह डील हो जाती है, तो तेल की सप्लाई शुरू हो जाएगी, होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा और हालात सामान्य हो जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समझौता इस्लामाबाद में होता है, तो वे पाकिस्तान की यात्रा भी कर सकते हैं। वहीं, इजराइल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर राजी हो गए हैं। यह युद्धविराम भारतीय समयानुसार गुरुवार देर रात 2:30 बजे से लागू हो गया है। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की, जिसके बाद यह सहमति बनी। परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब ईरान यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है, जिससे परमाणु ऊर्जा भी बनाई जा सकती है और परमाणु बम भी। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि उसे कितना एनरिच यानि कि शुद्ध किया गया है। प्राकृतिक यूरेनियम में काम का हिस्सा बहुत कम होता है, इसलिए उसे मशीनों (सेंट्रीफ्यूज) के जरिए धीरे-धीरे शुद्ध किया जाता है। इसी प्रक्रिया को ‘यूरेनियम एनरिचमेंट’ कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी IAEA की रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पास कुल मिलाकर करीब 5 से 6 टन के बीच एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। इसमें एक अहम हिस्सा 60% तक एनरिच्ड यूरेनियम का है, जो करीब 120 से 130 किलोग्राम के आसपास माना जाता है। यह स्तर हथियार बनाने के लिए जरूरी 90% एनरिचमेंट के काफी करीब होता है। इसलिए अमेरिका और इजराइल, ईरान पर परमाणु कार्यक्रम सीमित करने और एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने का दबाव बनाते रहे हैं। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… इजराइल-लेबनान सीजफायर डील: अमेरिका की पहल पर इजराइल और लेबनान शुक्रवार से 10 दिन के सीजफायर पर राजी हो गए हैं। इसका मकसद स्थायी सुरक्षा और शांति समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाना है। सीजफायर की शर्तें: अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इजराइल को आत्मरक्षा का अधिकार रहेगा, लेकिन वह लेबनान के खिलाफ जमीन, हवा या समुद्र से कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा। वहीं लेबनान सरकार पर दबाव है कि वह हिजबुल्लाह को इजराइल पर हमले करने से रोके, हालांकि हिजबुल्लाह पर उसका सीधा नियंत्रण नहीं है। ईरान-अमेरिका बातचीत: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर समझौता बहुत करीब है। उनके साथ पाकिस्तान में बातचीत जल्द ही फिर शुरू हो सकती है। अमेरिकी मिलिट्री एक्टिविटी: अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तैनात सैनिक फिर से हथियारों से लैस हो रहे हैं और अगर ईरान के साथ बातचीत फेल होती है, तो वे दोबारा लड़ाई के लिए तैयार हैं। ट्रम्प को राहत: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने वाला प्रस्ताव 213-214 वोट से खारिज कर दिया। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

मीटिंग पर मीटिंग, सड़कें फिर भी अधूरी:23 सड़कों के लिए 15 करोड़ मंजूर, वर्क ऑर्डर भी जारी, फिर भी शुरू नहीं हो सका काम

मीटिंग पर मीटिंग, सड़कें फिर भी अधूरी:23 सड़कों के लिए 15 करोड़ मंजूर, वर्क ऑर्डर भी जारी, फिर भी शुरू नहीं हो सका काम

जनप्रतिनिधियों और आईएएस अफसरों की मीटिंग पर मीटिंग। तब भी ग्वालियर की मुख्य और आंतरिक सड़कों को बनाने का शुरू नहीं हो पाया है। 15 करोड़ रुपए की लागत की 23 सड़कों को मंजूरी, वर्क आर्डर होने के बाद भी ठेकेदार काम शुरू नहीं कर रहे हैं। इस कारण गड्ढों के बीच से वाहनों के निकले की जंग जारी है। कहीं सीवर लाइन डालने की बात कर पीएचई अफसरों ने सड़क को रोका है, तो कहीं पर सकरा मार्ग और पहाड़ी के कारण रोलर-पेवर मशीन नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में डामर की सड़क के स्थान पर सीमेंट कांक्रीट की रोड बनाने के लिए मामला अटका हुआ है। निगम ने ऐसी 77 सड़कों की पहचान की है। उनमें से 23 सड़कें ऐसी सामने आई है। जहां पर ठेकेदार काम लेने के बाद भी सड़कें नहीं बना रहे हैं। ये स्थिति डेढ़ साल से बनी हुई है। इन्हीं में 15 सड़कें टेंडर खुलने के बाद सवा महीने तक मेयर इन काउंसिल (एमआईसी)के फैसले के इंतजार में लटकी रही है। हालांकि एमआईसी की स्वीकृति मिल गई है। फिर भी 15 दिन में ठेकेदारों से अनुबंध होगा। ओहदपुर में एमएएल निवास से रजिस्ट्रार आफिस मुख्य रोड को जोड़ने वाली आंतरिक रोड 285 मीटर की आरसीसी बनेगी। इस पर 34 लाख रुपए खर्च होना है। टेंडर खुल चुका है। इसके लिए बनी समिति के फैसले के बाद अनुबंध की तैयारी होगी। फिर ठेकेदार काम शुरू करते हैं या नहीं। ये तस्वीर अनुबंध के बाद मिले वर्क आर्डर के वक्त ठीक से पता चल सकेगी। जनता पर सीधी मार ग्वालियर के आमखाे की मुख्य रोड, इसकी हालात सबसे ज्यादा खराब है। इस रोड पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन निकलते हैं। आए दिन सड़क हादसे होते हैं। इसी रोड पर आयुर्वेद कालेज भी है। फोटो: भास्कर चेतकपुरी राेड: इस सड़क पर जगह-जगह गड्डे होने से गाड़ी का बैलेंस बिगडने से वाहन चालक होते हैं घायल माधव सत्संग सड़क: इस रोड स्कूल और कॉलोनी हैं। लोगों को मजबूरी में खराब रोड से गुजरना पड़ रहा है। MIC की स्वीकृति: अब अनुबंध फिर बनगी सड़कें गुप्तेश्वर कॉलोनी: 480 मीटर की रोड / लागत ₹55 लाख रुपए चंद्रनगर श्मशान रोड-सूरज गार्डन 575 मीटर रोड / लागत ₹43 लाख यादव कॉलोनी-शिवशक्ति नगर: 450 मीटर/ ₹23 लाख मोहर सिंह-किशन मकान रोड: 320 मीटर / ₹24 लाख प्रसाद नगर: 405 मीटर/ ₹26 लाख मां विहार कॉलोनी: 140 मीटर/ ₹11 लाख नूरगंज: 285 मीटर / ₹22 लाख महावीर कॉलोनी: 390 मीटर / ₹29 लाख डोंगरपुर: 230 मीटर / ₹24 लाख बजरंग कॉलोनी: 565 मीटर / ₹57 लाख राम कुई-भैंस मंडी: 850 मीटर / ₹93 लाख नागदेवता मंदिर-ढोलीबुआ पुल 375 मीटर/₹16.77 लाख तारागंज पुल-कमानी पुल: 1000 मीटर / ₹65.44 लाख रामद्वारा गेट-कमानी पुल: 890 मीटर/ ₹78 लाख एमएसए निवास-रजिस्ट्रार ऑफिस रोड: 285 मीटर / ₹34 लाख ऐसी 19 सड़कें, जिनका काम 80 फीसदी करने का दावा निगम ने जिन 77 सड़कों की सूची तैयार की है। उनमें 19 सड़कों पर काम चल रहा है। इनमें 10 से 80 प्रतिशत तक सड़कों को बनाने का दावा निगम का जनकार्य विभाग के अफसर कर रहे हैं। कार्य में देर के कारण अफसरों ने आला अफसरों को गिनाए हैं। इनमें प्रमुख चार कारण बताए हैं। एनओसी के लिए पीएचई विभाग को पत्र भेजा। जवाब नहीं मिला। {सीवर लाइन डालने का काम जब पूरा होगा उसके बाद ही सड़क बन सकेगी। {सड़क सकरी एवं पहाड़ी ढाल होने से रोलर और पेवर मशीन नहीं पहुंच पा रही है। इसलिए सीसी रोड बनेगी। {जहां नाली का काम चल रहा है वहां बाद में रोड बनेगी।

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Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar नई दिल्ली41 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में गुरुवार को नेशनल हाईवे-52 पर एक केमिकल टैंकर में धमाके के बाद भीषण आग लग गई। घटना अंकोला के कंचिनाबागिलु इलाके के पास हुई, जहां विस्फोट के तुरंत बाद टैंकर आग की लपटों में घिर गया। धमाके के चलते आग तेजी से फैल गई और घटनास्थल से घना धुआं उठने लगा, जिससे राहत और बचाव टीमों को मौके के पास पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों को आशंका है कि टैंकर का ड्राइवर लापता हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच के बाद ही घटना को लेकर बाकी जानकारी सामने आएगी। आज की अन्य बड़ी खबरें… गोवा के मंद्रेम में बीच किनारे भीषण आग, मौके पर पहुंची फायर टीम गोवा के मंद्रेम में गुरुवार को बीच किनारे एक प्रॉपर्टी के पास तीन कॉटेज में अचानक भीषण आग लग गई। जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी। पेरनेम फायर स्टेशन के इंचार्ज नामदेव पवार ने बताया कि दमकल की गाड़ियां मौके के लिए रवाना कर दी गईं और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और किसी के हताहत होने की भी जानकारी सामने नहीं आई है। दिल्ली LG तरनजीत सिंह संधू को ट्रंप की बधाई, बोले- भारत-अमेरिका रिश्तों को किया मजबूत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी है। ट्रंप ने संधू को एक अनुभवी राजनयिक बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि तरनजीत संधू ने अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने के लिए हमेशा गहरी प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने दिल्ली के विकास और वैश्विक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए संधू को शुभकामनाएं भी दीं। देश में नक्सल हिंसा खत्म: MHA का दावा- अब कोई जिला प्रभावित नहीं गृह मंत्रालय (MHA) ने राज्यों को जानकारी दी है कि भारत अब नक्सल हिंसा से प्रभावित नहीं रहा और देश का कोई भी जिला इस श्रेणी में नहीं आता है। 8 अप्रैल को नौ राज्यों को भेजे गए आधिकारिक पत्र के मुताबिक, देश में अब कोई भी जिला नक्सल हिंसा प्रभावित के रूप में वर्गीकृत नहीं है। इससे पहले 30 मार्च को संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा था कि भारत अब माओवादी प्रभाव से मुक्त हो चुका है। सरकार के इस दावे को देश में आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है पंजाब में पाकिस्तान समर्थित आतंकी मॉड्यूल, 4 हैंड ग्रेनेड और हथियार बरामद पंजाब पुलिस ने गुरुवार को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल को पकड़ा है। इस कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है और उसके कब्जे से चार हैंड ग्रेनेड समेत हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं। डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) गौरव यादव ने बताया कि काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने अमृतसर और मोहाली स्थित स्टेट स्पेशल ऑपरेशन यूनिट के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन चलाया। इस दौरान दो विदेशी पिस्तौल और कारतूस भी बरामद किए गए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

मप्र के किसान गेहूं बेचने के लिए मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। वे वे किसान हैं, जिनके खेतों का सेटेलाइट सर्वे होना है। यह ​जिम्मा राजस्व विभाग का है। पटवारी, आरआई को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे सर्वे पूरा कर लें, लेकिन सर्वे करने में लगातार देरी की जा रही है। यदि जरा सा भी डेटा मिसमैच ​हो रहा है तो वह पुनर्सत्यापन में चला जाता है। सर्वे पूरा नहीं होने के कारण किसान पंजीयन के लिए जाता है तो उसका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। मप्र के 55 जिलों में ऐसे करीब 3 लाख किसान हैं। किसानों ने बताया कि तहसील में जवाब दिया जाता है कि पुनरीक्षण होना है, इसलिए अटका है। सेटेलाइट सर्वे में वे किसान उलझे हुए हैं, जिनके पास दो एकड़ से अधिक जमीन है। इस मामले में खाद्य विभाग से जानकारी ली तो पता चला कि मप्र में कलेक्टरों की जांच में करीब 45 हजार खसरे ऐसे सामने आए हैं, जिनमें कोई निर्माण हो चुका है। मंदिर है, मकान हैं या अन्य कोई शेड है। वहीं ऐसे भी खसरे सामने आए हैं, जिनमें नदी, तालाब आ चुके हैं। ऐसे खसरों का पुर्नसत्यापन कराया जा रहा है। इसलिए सर्वे में देरी हो रही है। हालांकि पहले भी दो बार सर्वे हो चुका है। सर्वे से जुड़े पटवारियों ने बताया कि जग गिरदावरी जमा की गई थी, तब पहली सर्वे हुआ था और दूसरी बार फसल कटने पर। किसानों के सहयोग के लिए एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं भारतीय किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों से शिकायत आ रही है कि किसानों की समस्या हल करने के लिए एक भी अधिकारी तकनीकी सहयोग के लिए नियुक्त नहीं किया गया है। धूत ने बताया कि तीन लाख से अधिक किसान सेटेलाइट सर्वे, सर्वर में उलझकर रह गए हैं। उन्होंने बताया कि हमने इस संबंध में जब कृषि विभाग के अफसरों से बात की तो उन्होंने क​हा कि यह राजस्व का काम है। जब राजस्व से बात करो तो बोलते हैं डेटा कृषि विभाग को भेज दिया। धूत का आरोप है कि इस सरकारी लेतलाली से किसान औने–पौने दामों में अपनी उपज बाहर बाजार में बेचने के लिए मजबूर हो गया है। सर्वर डाउन की भी बड़ी समस्या सभी जिलों में सहकारी समितियों को 13 अप्रैल को जिला प्रबंधक की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि बिना स्लॉट बुक कोई तुलाई नहीं करें। लेकिन जब किसान पंजीयन के लिए सोसायटी जाते हैं तो बार–बार सर्वर डाउन की समस्या सामने आ जाती है। 45 हजार खसरों में गड़बड़ी संज्ञान में आया था कि कुछ खसरों में नदी, तालाब या अन्य कुछ आ रहा है। सभी कलेक्टरों को कहा है कि इसकी बारीकी से जांच करवाए। अब तक 45 हजार खसरों में गड़बड़ी सामने आई है। कर्मवीर शर्मा, आयुक्त, खाद्य आपू​र्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण

भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ की स्टार कास्ट में शामिल वामिका गब्बी और मिथिला पालकर ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने शूटिंग अनुभव साझा किए हैं। दोनों ने बताया कि सेट पर जहां एक तरफ प्रोफेशनल डिसिप्लिन था, वहीं दूसरी तरफ मस्ती और हल्के-फुल्के माहौल की कोई कमी नहीं थी। अक्षय कुमार के मजेदार प्रैंक्स और पूरी टीम की बॉन्डिंग ने शूट को यादगार बना दिया। साथ ही, दोनों अभिनेत्रियों ने अपनी जर्नी, शुरुआती संघर्ष और इंडस्ट्री में अपने अनुभवों पर भी खुलकर बात की है। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट का माहौल कैसा था? वामिका गब्बी- बिल्कुल, बाहर से देखने पर यही लगता है कि सब कुछ मस्ती-मजाक में हुआ होगा। लेकिन असल में सेट पर बहुत सीरियस काम भी चल रहा था। हां, मस्ती बहुत होती थी और वही माहौल हमें और सहज बना देता था। मेरे लिए तो ये एक फैमिली जैसा एक्सपीरियंस बन गया था। आपका किरदार कैसा है? क्या ये एक टिपिकल बहन है या उसमें कोई ट्विस्ट भी देखने को मिलेगा? मिथिला पलकर- मैं ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहूंगी, वो तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा। लेकिन हां, ये एक ऐसी बहन है जिसकी कोई भी जिद हो, उसका भाई उसे जरूर पूरा करता है उनके रिश्ते में वही खूबसूरती है। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करना जैसे अक्षय कुमार, परेश रावल और निर्देशक प्रियदर्शन कैसा अनुभव रहा? वामिका गब्बी- शुरुआत में थोड़ा इंटिमिडेशन था क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा स्क्रीन पर देखा है। लेकिन सेट पर उन्होंने माहौल इतना आसान और कम्फर्टेबल बना दिया कि कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं इतने बड़े लोगों के साथ काम कर रही हूं। हर कोई बहुत सपोर्टिव था। इतने टैलेंटेड लोगों के बीच रहना ही अपने आप में एक सीख है। उनकी एनर्जी, उनका काम करने का तरीका सब कुछ बहुत इंस्पायरिंग था। अपने किरदार की तैयारी के दौरान कोई चैलेंज आया? मिथिला पलकर- नहीं, क्योंकि प्रियदर्शन सर ने सब कुछ बहुत आसान बना दिया। उन्होंने मुझे हर चीज में गाइड किया, जैसे हैंड-होल्डिंग करते हुए। मेरा सिर्फ एक ही डर था इतने बड़े कलाकारों के सामने परफॉर्म करना, लेकिन उन्होंने वो भी आसान कर दिया। इतने बड़े स्टार कास्ट के साथ काम करने का अनुभव और आपकी पर्सनल जर्नी यूट्यूब से फिल्मों तक,आप इसे कैसे देखती हैं? मिथिला पलकर- सच कहूं तो विश्वास ही नहीं होता है। इतने लेजेंड्स के साथ काम करना एक सपना जैसा है। शुरुआत में थोड़ा डर था, लेकिन सभी ने बहुत प्यार से अपनाया। जहां तक मेरी जर्नी की बात है, मेरा हमेशा से एक ही गोल था एक अच्छा एक्टर बनना। इंटरनेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है और उसी की वजह से मुझे ये मौका भी मिला। मैं बस अच्छा काम करना चाहती हूं, चाहे वो किसी भी भाषा या प्लेटफॉर्म पर हो। सेट पर अक्षय कुमार के मशहूर प्रैंक्स का अनुभव कैसा रहा? क्या आप भी कभी उनका शिकार बनीं? वामिका गब्बी- एक सीन था जहां मुझे टेबल पर जंप करना था। मैं पूरी तैयारी के साथ शॉट दे रही थी, तभी अक्षय सर ने मुझे हल्का सा पुश कर दिया और मैं पूरी तरह चौंक गई! सब लोग हंसने लगे और मुझे तब समझ आया कि ये एक प्रैंक था। इसके अलावा हम सब सेट पर कार्ड्स, लूडो और अलग-अलग गेम्स खेलते थे। एक लेजर गेम भी खेलते थे, जिसमें ऊपर लगे बॉक्स पर निशाना लगाना होता था। उसमें तो मैं हारते-हारते करीब 12,000 रुपये की ‘कर्जदार’ हो गई थी! मिथिला पलकर- नहीं, मेरे साथ उन्होंने कोई प्रैंक नहीं किया। शायद वो एक प्रोटेक्टिव भाई की तरह थे। लेकिन हम सेट पर बहुत गेम्स खेलते थे जैसे लूडो। उसमें मैंने काफी पैसे हार दिए थे! लेकिन आखिरी दिन अक्षय सर के साथ खेलते-खेलते मैंने सब जीत लिए और मेरा ‘कर्ज’ उतर गया।

भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ की स्टार कास्ट में शामिल वामिका गब्बी और मिथिला पालकर ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने शूटिंग अनुभव साझा किए हैं। दोनों ने बताया कि सेट पर जहां एक तरफ प्रोफेशनल डिसिप्लिन था, वहीं दूसरी तरफ मस्ती और हल्के-फुल्के माहौल की कोई कमी नहीं थी। अक्षय कुमार के मजेदार प्रैंक्स और पूरी टीम की बॉन्डिंग ने शूट को यादगार बना दिया। साथ ही, दोनों अभिनेत्रियों ने अपनी जर्नी, शुरुआती संघर्ष और इंडस्ट्री में अपने अनुभवों पर भी खुलकर बात की है। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट का माहौल कैसा था? वामिका गब्बी- बिल्कुल, बाहर से देखने पर यही लगता है कि सब कुछ मस्ती-मजाक में हुआ होगा। लेकिन असल में सेट पर बहुत सीरियस काम भी चल रहा था। हां, मस्ती बहुत होती थी और वही माहौल हमें और सहज बना देता था। मेरे लिए तो ये एक फैमिली जैसा एक्सपीरियंस बन गया था। आपका किरदार कैसा है? क्या ये एक टिपिकल बहन है या उसमें कोई ट्विस्ट भी देखने को मिलेगा? मिथिला पलकर- मैं ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहूंगी, वो तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा। लेकिन हां, ये एक ऐसी बहन है जिसकी कोई भी जिद हो, उसका भाई उसे जरूर पूरा करता है उनके रिश्ते में वही खूबसूरती है। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करना जैसे अक्षय कुमार, परेश रावल और निर्देशक प्रियदर्शन कैसा अनुभव रहा? वामिका गब्बी- शुरुआत में थोड़ा इंटिमिडेशन था क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा स्क्रीन पर देखा है। लेकिन सेट पर उन्होंने माहौल इतना आसान और कम्फर्टेबल बना दिया कि कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं इतने बड़े लोगों के साथ काम कर रही हूं। हर कोई बहुत सपोर्टिव था। इतने टैलेंटेड लोगों के बीच रहना ही अपने आप में एक सीख है। उनकी एनर्जी, उनका काम करने का तरीका सब कुछ बहुत इंस्पायरिंग था। अपने किरदार की तैयारी के दौरान कोई चैलेंज आया? मिथिला पलकर- नहीं, क्योंकि प्रियदर्शन सर ने सब कुछ बहुत आसान बना दिया। उन्होंने मुझे हर चीज में गाइड किया, जैसे हैंड-होल्डिंग करते हुए। मेरा सिर्फ एक ही डर था इतने बड़े कलाकारों के सामने परफॉर्म करना, लेकिन उन्होंने वो भी आसान कर दिया। इतने बड़े स्टार कास्ट के साथ काम करने का अनुभव और आपकी पर्सनल जर्नी यूट्यूब से फिल्मों तक,आप इसे कैसे देखती हैं? मिथिला पलकर- सच कहूं तो विश्वास ही नहीं होता है। इतने लेजेंड्स के साथ काम करना एक सपना जैसा है। शुरुआत में थोड़ा डर था, लेकिन सभी ने बहुत प्यार से अपनाया। जहां तक मेरी जर्नी की बात है, मेरा हमेशा से एक ही गोल था एक अच्छा एक्टर बनना। इंटरनेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है और उसी की वजह से मुझे ये मौका भी मिला। मैं बस अच्छा काम करना चाहती हूं, चाहे वो किसी भी भाषा या प्लेटफॉर्म पर हो। सेट पर अक्षय कुमार के मशहूर प्रैंक्स का अनुभव कैसा रहा? क्या आप भी कभी उनका शिकार बनीं? वामिका गब्बी- एक सीन था जहां मुझे टेबल पर जंप करना था। मैं पूरी तैयारी के साथ शॉट दे रही थी, तभी अक्षय सर ने मुझे हल्का सा पुश कर दिया और मैं पूरी तरह चौंक गई! सब लोग हंसने लगे और मुझे तब समझ आया कि ये एक प्रैंक था। इसके अलावा हम सब सेट पर कार्ड्स, लूडो और अलग-अलग गेम्स खेलते थे। एक लेजर गेम भी खेलते थे, जिसमें ऊपर लगे बॉक्स पर निशाना लगाना होता था। उसमें तो मैं हारते-हारते करीब 12,000 रुपये की ‘कर्जदार’ हो गई थी! मिथिला पलकर- नहीं, मेरे साथ उन्होंने कोई प्रैंक नहीं किया। शायद वो एक प्रोटेक्टिव भाई की तरह थे। लेकिन हम सेट पर बहुत गेम्स खेलते थे जैसे लूडो। उसमें मैंने काफी पैसे हार दिए थे! लेकिन आखिरी दिन अक्षय सर के साथ खेलते-खेलते मैंने सब जीत लिए और मेरा ‘कर्ज’ उतर गया।

चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट, 9 आरोपी प्रोडक्शन वारंट पर लाए:क्राइम सीन रिक्रिएशन किया, ₹2 लाख में टास्क, सोशल मीडिया के जरिए हुई मुलाकात

चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट, 9 आरोपी प्रोडक्शन वारंट पर लाए:क्राइम सीन रिक्रिएशन किया, ₹2 लाख में टास्क, सोशल मीडिया के जरिए हुई मुलाकात

चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब बीजेपी मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट के मामले में चंडीगढ़ पुलिस 9 आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई, जिन्हें कोर्ट में पेश कर 2 दिन का पुलिस रिमांड लिया गया। इस दौरान क्राइम सीन रिक्रिएशन करवाया गया और पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी भी की गई। इस दौरान डीएसपी धीरज कुमार और थाना 39 प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार मौजूद रहे। वारदात को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी गुरतेज और अमनप्रीत बीजेपी ऑफिस के सामने सेक्टर-24 वाली साइड, जहां से उन्होंने बस स्टॉपेज से बस पकड़ी थी, वहां पूरे घटनाक्रम का फिर से क्राइम सीन रिक्रिएशन किया गया। पहले कैसे रेकी की, कहां-कहां गए, कितने दिन रेकी की इन सभी पहलुओं को लेकर आरोपियों से पूछताछ की गई। गौरतलब है कि बुधवार (1 अप्रैल) की शाम को ब्लास्ट किया गया था। इससे मौके पर खड़ी कई कारों के शीशे टूट गए और आसपास की दीवार पर छर्रों के निशान बन गए। घटना के 2 वीडियो वायरल हुए, जिसमें से एक में व्यक्ति ग्रेनेड बम फेंकता दिखा, जबकि दूसरे वीडियो में बाइक पर जाते दो लोग दिखे। वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी वायरल हुई थी, जिसमें इस हमले की जिम्मेदारी खालिस्तानी संगठन ने ली। चंडीगढ़ पुलिस से पहले SSOC ने पकड़े चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब बीजेपी मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट के बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए चंडीगढ़ पुलिस की सभी जांच एजेंसियां, पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) और AGTF समेत अन्य एजेंसियां छापेमारी कर रही थीं। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस से पहले मोहाली की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल यानी SSOC ने मुख्य दो आरोपियों को हरियाणा के रेवाड़ी से गिरफ्तार किया। इनमें रतनगढ़ मोरिंडा के रहने वाले अमनप्रीत सिंह और गुरतेज सिंह शामिल हैं। इन पर आरोप है कि अमनप्रीत सिंह ने बम फेंका था, जबकि गुरतेज सिंह ने इसका वीडियो बनाया था। उनके पास से एक पिस्टल भी बरामद हुई है। हालांकि इससे पहले SSOC पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी, जिनमें बलविंदर लाल उर्फ शम्मी, जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, रूबल चौहान और मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा शामिल हैं। इसके बाद पंजाब DGP गौरव यादव ने कहा था कि इनकी 6 महीने पहले मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। इसमें अटैक का 28 मार्च को गुरतेज को टास्क मिला था, जिसके लिए इन्हें 2 लाख रुपए देने की बात कही गई थी। इस पूरी साजिश के तार पुर्तगाल और जर्मनी में बैठे हैंडलर्स से जुड़े हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की पंजाब में अफरातफरी फैलाने की कोशिश थी। उसके बाद पुलिस ने दो और आरोपी नवदीप और हरजन सिंह को गिरफ्तार किया। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान से ग्रेनेड और हथियार मंगवाने में मदद की थी। डीजीपी ने ये बड़ी बातें कहीं थी… सोशल मीडिया पर दोनों की मुलाकात हुई: डीजीपी ने बताया कि आरोपियों को हरियाणा एसटीएफ की मदद से गिरफ्तार किया है। यह ऑपरेशन चंडीगढ़ पुलिस के साथ संयुक्त रूप से चलाया गया। दोनों आरोपियों को रेवाड़ी से काबू किया गया। करीब 6 महीने पहले इनकी मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। 28 मार्च को गुरतेज को टास्क मिला था: उन्होंने कहा कि 28 मार्च को गुरतेज को टास्क दिया गया था कि वह बलाचौर से ग्रेनेड और हथियार लेकर आए। इसके बाद वह रूबल और मंदीप शर्मा को साथ लेकर जसबीर जस्सी से मिला, जहां उन्हें दो ग्रेनेड, एक पिस्टल और 10 कारतूस दिए गए। बलजोत सिंह ने गुरतेज को रेकी करने और टारगेट की पहचान की जिम्मेदारी दी थी। वहीं, अमनप्रीत की भर्ती भी गुरतेज ने ही की थी। पूरे ऑपरेशन में विदेश में बैठे हैंडलर का अहम रोल: डीजीपी के मुताबिक, दोनों मुख्य आरोपी रैपिडो में काम करते थे। घटना वाले दिन जब अमनप्रीत ने ग्रेनेड फेंका, तो गुरतेज ने उसकी वीडियो बनाई थी। पूरे ऑपरेशन में विदेश में बैठे हैंडलर का अहम रोल था, जो इनसे वीडियो बनवाकर एक तरह का माहौल (परसेप्शन) तैयार करना चाहता था। उसने इन्हें ऑनलाइन ही निर्देश दिए और यह भी बताया कि ग्रेनेड को कैसे एक्टिव करना है। आरोपियों को 2 लाख रुपए देने की बात हुई: इस काम के लिए आरोपियों को 2 लाख रुपए देने की बात हुई थी, लेकिन यह रकम पूरी नहीं दी गई थी। पूरा ऑपरेशन तकनीकी माध्यमों और दूर बैठे हैंडलर के निर्देशों के आधार पर चलाया गया। पाकिस्तान-ISI से जुड़े मॉड्यूल का खुलासा DGP के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया कि यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा हुआ था। इस नेटवर्क को विदेश में बैठे हैंडलर्स चला रहे थे, जिनकी लोकेशन पुर्तगाल और जर्मनी में बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसमें अलग-अलग स्तर पर कई लोग जुड़े हुए थे और सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों के पास हैंड ग्रेनेड, हथियार और कारतूसों की खेप पहुंचाई गई थी। यह खेप कई लोगों के जरिए आगे बढ़ाई गई और आखिर में हमले को अंजाम देने वालों तक पहुंचाई गई। बताया जा रहा है कि पुर्तगाल में बैठे हैंडलर बलजोत सिंह उर्फ जोत के निर्देश पर पूरे हमले की साजिश रची गई और उसे अंजाम दिया गया। पाकिस्तानी ग्रेनेड के यूज होने का दावा इससे पहले इस मामले में सूत्रों से पता चला था कि हमले में GHD2P हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया था। यह ग्रेनेड पाकिस्तान में बनाया जाता है। विस्फोट के बाद यह करीब 5 से 10 मीटर के दायरे में बेहद घातक साबित हो सकता है। वहीं, इसके टुकड़े 20 से 25 मीटर तक फैल सकते हैं, जिससे आसपास मौजूद लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का खतरा रहता है। हमले के बाद 2 नए वीडियो भी सामने आए थे। हमले से कुछ मिनट पहले वीडियो में BJP ऑफिस के पास स्थित एक अन्य दफ्तर के बाहर 2 संदिग्ध खड़े दिखाई दिए। वहीं, दूसरे वीडियो में हमले के बाद दोनों संदिग्ध सड़क के दूसरी ओर भागते हुए कैद हुए हैं।

IPL में आज GT vs KKR:कोलकाता ने अब तक एक भी मैच नहीं जीता, गुजरात ने दिल्ली-लखनऊ को हराया

IPL में आज GT vs KKR:कोलकाता ने अब तक एक भी मैच नहीं जीता, गुजरात ने दिल्ली-लखनऊ को हराया

IPL 2026 का 25वां मुकाबला आज गुजरात टाइटंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेला जाएगा। मैच गुजरात के होम ग्राउंड अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से शुरू होगा। मुकाबले का टॉस शाम 7:00 बजे होगा। KKR ने इस सीजन 5 मुकाबले खेले हैं। उसे 4 मैच में हार मिली है और एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द रहा है। GT ने 4 मैच खेले हैं और उसे 2 मैच में जीत और इतने ही मैच में हार मिली है। टीम ने पिछले दो मैचों में दिल्ली और लखनऊ को हराया। KKR के खिलाफ GT का पलड़ा भारी IPL में दोनों टीमों के बीच 4 मुकाबले हुए हैं। इस दौरान GT ने 3 मैच अपने नाम किए हैं। KKR सिर्फ एक मैच जीतने में सफल रही है। IPL 2025 में दोनों टीमों के बीच एक मैच हुआ था। उसे GT ने 39 रन से जीता था। बटलर ने 2 अर्धशतक लगाए इस सीजन में गुजरात टाइटंस के लिए जोस बटलर शानदार फॉर्म में नजर आए हैं। उन्होंने 4 मैचों में 176 रन बनाए हैं, जिसमें 2 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं गेंदबाजी में प्रसिद्ध कृष्णा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने 4 मैचों में 10 विकेट लिए हैं। कोलकाता के खिलाड़ियों का खराब फॉर्म जारी कोलकाता अपने स्टार खिलाड़ियों के खराब फॉर्म के कारण इस सीजन अब तक एक भी मैच नहीं खेल सकी है। रिंकू सिंह, कैमरन ग्रीन और कप्तान अजिंक्य रहाणे जैसे खिलाड़ी IPL 2026 में कुछ खास कमाल नहीं कर पाए हैं। अंगकृष रघुवंशी कोलकाता के टॉप स्कोरर हैं। उन्होंने 5 मैचों में 182 रन बनाए हैं, जिसमें 2 अर्धशतक शामिल हैं। वहीं गेंदबाजी में वैभव अरोड़ा ने 5 मैचों में 6 विकेट लिए हैं। पहले मैच में 200+ स्कोर बना था नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच आमतौर पर बैटिंग-फ्रेंडली मानी जाती है, लेकिन यहां हर मैच में थोड़ा बदलाव भी देखने को मिलता है। इस मैदान की सतह पर अच्छी बाउंस और पेस मिलता है, जिससे बल्लेबाज आसानी से शॉट खेल पाते हैं। इस सीजन यहां एक मैच खेला गया है। 4 अप्रैल को खेले गए मैच में राजस्थान रॉयल्स ने 210 रन बनाए थे। जवाब में गुजरात 20 ओवर में 204 रन ही बना सकी थी। अहमदाबाद में बारिश की संभावना नहीं 17 अप्रैल को अहमदाबाद में मौसम काफी गर्म रहने वाला है। दिन का अधिकतम तापमान लगभग 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 25–26 डिग्री के आसपास रहेगा। पूरे दिन आसमान साफ और धूप तेज रहेगी, जिससे गर्मी और ज्यादा महसूस होगी। बारिश की कोई खास संभावना नहीं है। दोनों टीमों की पॉसिबल प्लेइंग-12 गुजरात टाइटंस: साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, ग्लेन फिलिप्स, राहुल तेवतिया, राशिद खान, कगिसो रबाडा, अशोक शर्मा, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा। इम्पैक्ट प्लेयर- शाहरुख खान। कोलकाता नाइट राइडर्स: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), अंगकृष रघुवंशी (विकेटकीपर), कैमरन ग्रीन, रिंकू सिंह, रमनदीप सिंह, रोवमन पॉवेल, सुनील नारायण, अनूकुल रॉय, वरुण चक्रवर्ती, कार्तिक त्यागी और वैभव अरोड़ा। इम्पैक्ट प्लेयर: फिन एलन।