Friday, 17 Apr 2026 | 06:43 PM

Trending :

पेट की बेलगाम चर्बी पर ICMR का महाप्लान, लाखों लोगों पर हो रही रिसर्च, मोटापा दूर करने का निकालेगा फॉर्मूला नरसिंहपुर में 11 पेटी देशी शराब के साथ कार जब्त:अवैध परिवहन करते एक आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ा राहुल गांधी ‘दोहरी नागरिकता विवाद’ में इलाहाबाद HC ने FIR का आदेश दिया: क्या कोई भारतीय सांसद विदेशी पासपोर्ट रख सकता है? | राजनीति समाचार दिखने में साधारण…. लेकिन असर चौंकाने वाला, क्या है बनमारा पौधे का सच? वैज्ञानिक भी कर रहे हैं रिसर्च रोहित शेट्टी के घर फायरिंग का आरोपी UP से गिरफ्तार:शुभम लोणकर गैंग से जुड़ा है प्रदीप; सोशल मीडिया के जरिए बना था अपराधी रोहित शेट्टी के घर फायरिंग का आरोपी UP से गिरफ्तार:शुभम लोणकर गैंग से जुड़ा है प्रदीप; सोशल मीडिया के जरिए बना था अपराधी
EXCLUSIVE

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

मप्र के किसान गेहूं बेचने के लिए मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। वे वे किसान हैं, जिनके खेतों का सेटेलाइट सर्वे होना है। यह ​जिम्मा राजस्व विभाग का है। पटवारी, आरआई को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे सर्वे पूरा कर लें, लेकिन सर्वे करने में लगातार देरी की जा रही है। यदि जरा सा भी डेटा मिसमैच ​हो रहा है तो वह पुनर्सत्यापन में चला जाता है। सर्वे पूरा नहीं होने के कारण किसान पंजीयन के लिए जाता है तो उसका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। मप्र के 55 जिलों में ऐसे करीब 3 लाख किसान हैं। किसानों ने बताया कि तहसील में जवाब दिया जाता है कि पुनरीक्षण होना है, इसलिए अटका है। सेटेलाइट सर्वे में वे किसान उलझे हुए हैं, जिनके पास दो एकड़ से अधिक जमीन है। इस मामले में खाद्य विभाग से जानकारी ली तो पता चला कि मप्र में कलेक्टरों की जांच में करीब 45 हजार खसरे ऐसे सामने आए हैं, जिनमें कोई निर्माण हो चुका है। मंदिर है, मकान हैं या अन्य कोई शेड है। वहीं ऐसे भी खसरे सामने आए हैं, जिनमें नदी, तालाब आ चुके हैं। ऐसे खसरों का पुर्नसत्यापन कराया जा रहा है। इसलिए सर्वे में देरी हो रही है। हालांकि पहले भी दो बार सर्वे हो चुका है। सर्वे से जुड़े पटवारियों ने बताया कि जग गिरदावरी जमा की गई थी, तब पहली सर्वे हुआ था और दूसरी बार फसल कटने पर। किसानों के सहयोग के लिए एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं भारतीय किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों से शिकायत आ रही है कि किसानों की समस्या हल करने के लिए एक भी अधिकारी तकनीकी सहयोग के लिए नियुक्त नहीं किया गया है। धूत ने बताया कि तीन लाख से अधिक किसान सेटेलाइट सर्वे, सर्वर में उलझकर रह गए हैं। उन्होंने बताया कि हमने इस संबंध में जब कृषि विभाग के अफसरों से बात की तो उन्होंने क​हा कि यह राजस्व का काम है। जब राजस्व से बात करो तो बोलते हैं डेटा कृषि विभाग को भेज दिया। धूत का आरोप है कि इस सरकारी लेतलाली से किसान औने–पौने दामों में अपनी उपज बाहर बाजार में बेचने के लिए मजबूर हो गया है। सर्वर डाउन की भी बड़ी समस्या सभी जिलों में सहकारी समितियों को 13 अप्रैल को जिला प्रबंधक की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि बिना स्लॉट बुक कोई तुलाई नहीं करें। लेकिन जब किसान पंजीयन के लिए सोसायटी जाते हैं तो बार–बार सर्वर डाउन की समस्या सामने आ जाती है। 45 हजार खसरों में गड़बड़ी संज्ञान में आया था कि कुछ खसरों में नदी, तालाब या अन्य कुछ आ रहा है। सभी कलेक्टरों को कहा है कि इसकी बारीकी से जांच करवाए। अब तक 45 हजार खसरों में गड़बड़ी सामने आई है। कर्मवीर शर्मा, आयुक्त, खाद्य आपू​र्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Nashik TCS Conversion Plea Reaches Supreme Court

April 16, 2026/
6:43 pm

नासिक54 मिनट पहले कॉपी लिंक महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS ऑफिस से जुड़ा धर्मांतरण और योन उत्पीड़ने का मामला गुरुवार...

अशोकनगर में नगर पालिका और पंचायत के बीच उलझा टोरिया:जनसुनवाई में 126 आवेदक पहुंचे, टोरिया के लोगों ने सीमा विवाद बताया

March 10, 2026/
5:19 pm

अशोकनगर के टोरिया क्षेत्र को नगरपालिका परिषद में शामिल करने की मांग को लेकर मंगलवार को क्षेत्र के महिला-पुरुष कलेक्ट्रेट...

बंगाल चुनाव 2026: 2011 में लगातार वृद्धि के बाद पहली बार मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई

April 8, 2026/
1:24 pm

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अंतिम अंतिम रिलीज सूची हो गई है। 2011...

पति को तलाशते हुए रोहतक पहुंची आंध्र प्रदेश की महिला:बोली- समुद्र किनारे की शादी, 40 लाख हड़पकर हरियाणा आया, होटलों में यौन शोषण किया

March 10, 2026/
9:02 am

हरियाणा के रोहतक में आंध्र प्रदेश की एक महिला ने तिलक नगर के एक युवक पर शादी का झांसा देकर...

'मुसलमानों का वोट लेकर ममता बनर्जी मंदिर...', ओवैसी के साथ रैली से पहले बोले हुमायूं कबीर

March 31, 2026/
8:15 pm

मुर्शिदाबाद के बहरामपुर से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। आम जनता पार्टी...

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

सर्वे में देरी:सैटेलाइट सर्वे में उलझा 3 लाख किसानों का पंजीयन, मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर

मप्र के किसान गेहूं बेचने के लिए मंडी के बजाय तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। वे वे किसान हैं, जिनके खेतों का सेटेलाइट सर्वे होना है। यह ​जिम्मा राजस्व विभाग का है। पटवारी, आरआई को निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे सर्वे पूरा कर लें, लेकिन सर्वे करने में लगातार देरी की जा रही है। यदि जरा सा भी डेटा मिसमैच ​हो रहा है तो वह पुनर्सत्यापन में चला जाता है। सर्वे पूरा नहीं होने के कारण किसान पंजीयन के लिए जाता है तो उसका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। मप्र के 55 जिलों में ऐसे करीब 3 लाख किसान हैं। किसानों ने बताया कि तहसील में जवाब दिया जाता है कि पुनरीक्षण होना है, इसलिए अटका है। सेटेलाइट सर्वे में वे किसान उलझे हुए हैं, जिनके पास दो एकड़ से अधिक जमीन है। इस मामले में खाद्य विभाग से जानकारी ली तो पता चला कि मप्र में कलेक्टरों की जांच में करीब 45 हजार खसरे ऐसे सामने आए हैं, जिनमें कोई निर्माण हो चुका है। मंदिर है, मकान हैं या अन्य कोई शेड है। वहीं ऐसे भी खसरे सामने आए हैं, जिनमें नदी, तालाब आ चुके हैं। ऐसे खसरों का पुर्नसत्यापन कराया जा रहा है। इसलिए सर्वे में देरी हो रही है। हालांकि पहले भी दो बार सर्वे हो चुका है। सर्वे से जुड़े पटवारियों ने बताया कि जग गिरदावरी जमा की गई थी, तब पहली सर्वे हुआ था और दूसरी बार फसल कटने पर। किसानों के सहयोग के लिए एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं भारतीय किसान संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख राहुल धूत ने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों से शिकायत आ रही है कि किसानों की समस्या हल करने के लिए एक भी अधिकारी तकनीकी सहयोग के लिए नियुक्त नहीं किया गया है। धूत ने बताया कि तीन लाख से अधिक किसान सेटेलाइट सर्वे, सर्वर में उलझकर रह गए हैं। उन्होंने बताया कि हमने इस संबंध में जब कृषि विभाग के अफसरों से बात की तो उन्होंने क​हा कि यह राजस्व का काम है। जब राजस्व से बात करो तो बोलते हैं डेटा कृषि विभाग को भेज दिया। धूत का आरोप है कि इस सरकारी लेतलाली से किसान औने–पौने दामों में अपनी उपज बाहर बाजार में बेचने के लिए मजबूर हो गया है। सर्वर डाउन की भी बड़ी समस्या सभी जिलों में सहकारी समितियों को 13 अप्रैल को जिला प्रबंधक की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि बिना स्लॉट बुक कोई तुलाई नहीं करें। लेकिन जब किसान पंजीयन के लिए सोसायटी जाते हैं तो बार–बार सर्वर डाउन की समस्या सामने आ जाती है। 45 हजार खसरों में गड़बड़ी संज्ञान में आया था कि कुछ खसरों में नदी, तालाब या अन्य कुछ आ रहा है। सभी कलेक्टरों को कहा है कि इसकी बारीकी से जांच करवाए। अब तक 45 हजार खसरों में गड़बड़ी सामने आई है। कर्मवीर शर्मा, आयुक्त, खाद्य आपू​र्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.