लिवर को बीमारियों से कैसे बचाएं? आयुष मंत्रालय के बताए आसान उपाय, डाइट में शामिल करें ये फल-पत्ते

Last Updated:April 18, 2026, 03:01 IST Healthy Foods For Liver: आज के समय में लिवर से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में आयुष मंत्रालय आयुर्वेदिक खानपान और सही जीवनशैली अपनाने की सलाह देता है. डाइट में यहां बताए गए फलों और पत्तों को शामिल करके आप अपने लिवर को काफी हद तक बीमारियों से बचाकर रख सकते हैं. ख़बरें फटाफट लिवर हमारे शरीर का बहुत जरूरी अंग है. यह खून को साफ करने, पाचन को बेहतर बनाने और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. लेकिन आजकल की तेज और गलत जीवनशैली, बाहर का तला-भुना खाना और अनियमित दिनचर्या लिवर को नुकसान पहुंचा रही है. लिवर की सेहत के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस मनाया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ खास फल और पत्ते लिवर को स्वस्थ रखने में बहुत मददगार होते हैं. आंवला से लेकर पपीता तक कई चीजें लिवर के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं. आयुष मंत्रालय के बताए आसान उपायआयुष मंत्रालय के अनुसार, आयुर्वेदिक खानपान और सही जीवनशैली अपनाकर लिवर को मजबूत बनाया जा सकता है. विश्व लिवर दिवस पर भी लोगों को प्राकृतिक और संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी जा रही है. फलों और पत्तों को रोजाना की डाइट में शामिल करना चाहिए. इन्हें आप ताजा खा सकते हैं, जूस बनाकर पी सकते हैं या सलाद में शामिल कर सकते हैं. लिवर के लिए हेल्दी फल आंवला– आंवला लिवर के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो लिवर को साफ करने में मदद करते हैं. आंवला या इसका जूस नियमित लेने से लिवर स्वस्थ रहता है. पपीता– पपीता पाचन को मजबूत करता है और शरीर से विषैले तत्व निकालने में मदद करता है. यह लिवर की सूजन को कम करने में भी सहायक है. अनार– अनार में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट लिवर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और खून को साफ रखने में मदद करते हैं. अंगूर– अंगूर लिवर को डिटॉक्स करने और सूजन कम करने में उपयोगी होते हैं. संतरा और नींबू– ये फल विटामिन C से भरपूर होते हैं. सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से लिवर की सफाई में मदद मिलती है. ये पत्ते भी फायदेमंदकुछ पत्ते भी लिवर के लिए बहुत लाभकारी हैं. ऐसा ही एक पत्ता है माकोय के पत्ते. ये लिवर की सूजन और समस्याओं में राहत देते हैं. आयुर्वेद में इन्हें प्राकृतिक लिवर टॉनिक माना जाता है. वहीं मोरिंगा के पत्ते पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और शरीर को डिटॉक्स करने के साथ लिवर को मजबूत बनाते हैं. इन बातों का रखें ध्यानतला-भुना खाना, जंक फूड और शराब से दूरी रखना जरूरी है. नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी लिवर के लिए बहुत जरूरी हैं. इस तरह सही खानपान और प्राकृतिक चीजों का सेवन करके लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 18, 2026, 03:01 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
तमिलनाडु में ट्रैवलर सड़क से उतरी; 8 की मौत:केरलम के 13 पर्यटक सवार थे; हेयरपिन मोड़ पर हादसा; 5 की हालत गंभीर

तमिलनाडु के वलपरई में शुक्रवार को सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा तब हुआ, जब टेम्पो ट्रैवलर अनियंत्रित होकर हेयरपिन मोड़ से फिसलकर खाई में गिर गया। पुलिस के मुताबिक, गाड़ी केरलम के पेरिंथलमन्ना से आए 13 पर्यटकों को लेकर वलपरई से लौट रहा था। 13वें हेयरपिन मोड़ पर संतुलन बिगड़ा और वाहन फिसलकर 9वें हेयरपिन मोड़ तक गिर गया हादसे में 1 पुरुष और 7 महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को रेस्क्यू कर एंबुलेंस से पोलाची के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। क्या होता है हेयरपिन मोड़ जब किसी ऊंचे पहाड़ पर चढ़ना होता है, तो सीधी सड़क बनाना मुमकिन नहीं होता । इसलिए, ऊंचाई पर धीरे-धीरे चढ़ने के लिए सड़क को सांप की तरह घुमावदार बनाया जाता है। जहां सड़क एकदम से मुड़कर वापस उसी दिशा के समानांतर हो जाती है, उसे ही हेयरपिन मोड़ कहते हैं। भारत में कोल्ली हिल्स (तमिलनाडु), सिल्क रूट (सिक्किम), मनाली-लेह हाईवे (हिमाचल प्रदेश) और नैनीताल (उत्तराखंड) में में प्रमुख और चर्चित हेयरपिन मोड़ हैं। प्रधानमंत्री ने दुख जताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया जताते हुए X पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना से वे बेहद दुखी हैं और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। वहीं, केरलम के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी हादसे पर शोक जताया है। उन्होंने अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं और मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। ————————————— ये खबर भी पढ़ें… प्रयागराज में सड़क हादसे में युवक की मौत:दो अन्य गंभीर घायल, डंफर चालक फरार बहादुरपुर क्षेत्र के सहसों बायपास के पास शुक्रवार को एक सड़क हादसे में एक युवक की मौके पर मौत हो गई। इस घटना में दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पूरी खबर पढ़ें…
Gwalior Fort Influencer Controversy | Russian Woman Vulgar Video

ग्वालियर किले घूमने आई रसियन गर्ल के साथ लोकल इन्फ्लुएंसर की आपत्तिजनक हरकत सामने आई है, जिससे शहर की छवि पर सवाल उठे हैं। हिंदी से अनजान विदेशी महिला के साथ मजाक के नाम पर अश्लील टिप्पणी करते हुए वीडियो बनाया गया और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया . इस घटना से ग्वालियर एक बार फिर विदेशी पर्यटकों के साथ व्यवहार को लेकर चर्चा में है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसी घटनाओं के कारण पर्यटक आगरा के बाद सीधे झांसी या ओरछा का रुख कर लेते हैं और ग्वालियर में ठहरने से बचते हैं। इससे पहले भी यहां विदेशी पर्यटकों के साथ ठगी और लूटपाट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मामले में बताया गया कि रूस से आए पर्यटकों का एक दल आगरा से ग्वालियर घूमने पहुंचा था। दोपहर के समय जब वे किले पर घूम रहे थे, तभी एक स्थानीय इन्फ्लुएंसर उनसे बातचीत करने लगा। उसने एक विदेशी महिला को रील बनाने के लिए तैयार किया और इस दौरान अश्लील टिप्पणी करते हुए वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जो अब विवाद का कारण बन गया है। ग्वालियर किला घूमने रोज हजारों लोग आते हैं। ‘रूसी’ शब्द का इस्तेमाल कर की अश्लील टिप्पणी, भाषा से अनजान महिला ने कहा “यस” शहर के एक इन्फ्लुएंसर ने ग्वालियर किले पर एक रील बनाई, जिसमें उसने अपने साथ एक विदेशी महिला को खड़ा किया। महिला हिंदी नहीं समझती थी, जिसका फायदा उठाते हुए इन्फ्लुएंसर ने अश्लील टिप्पणी कर वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। यह रील ‘राधे गुर्जर’ नाम की आईडी से पोस्ट की गई है। वीडियो में इन्फ्लुएंसर जो कह रहा था, उससे अनजान विदेशी महिला ने अंगूठा दिखाते हुए दो बार “यस-यस” कहा। उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि वीडियो में उसके साथ आपत्तिजनक बात कही जा रही है। यह इन्फ्लुएंसर पहले भी विवादों में रह चुका है। पहले भी ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर हुआ था वायरल सोशल मीडिया पर इस इन्फ्लुएंसर की हरकत को लोग बेहद शर्मनाक बता रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं से न सिर्फ ग्वालियर, बल्कि देश की छवि भी प्रभावित होती है और विदेशी पर्यटकों के सामने गलत संदेश जाता है। यह वीडियो पुलिस तक भी पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि यही इन्फ्लुएंसर पहले नई लग्जरी कार लेने के बाद ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर भी वायरल हुआ था। उस दौरान इसके साथियों द्वारा हाइवे पर हवाई फायरिंग करने का मामला भी सामने आया था। लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए कुछ लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
ग्वालियर में तेज रफ्तार ट्रक टैंकर से टकराया:चालक केबिन में फंसा, लोहे की बॉडी काटकर निकाला गया; हाईवे पर लग गया था जाम

ग्वालियर में तेज रफ्तार से आ रहे एक टैंकर चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिए, जिससे पीछे चल रहा ट्रक उससे टकरा गया। हादसे के बाद टैंकर चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया, जबकि ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसका चालक केबिन में फंस गया। घटना पुरानी छावनी के सुसैरा कोठी हाइवे पर शुक्रवार शाम की है। सूचना मिलते ही हाईवे पेट्रोलिंग टीम और पुरानी छावनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। ट्रक चालक केबिन में फंसा हुआ था और उसके पैर बुरी तरह कुचल गए थे। उसे बचाने के लिए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद ट्रक की बॉडी काटकर चालक को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया। सीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार के अनुसार, आंध्र प्रदेश से केला लेकर जम्मू जा रहा ट्रक (क्रमांक JK22 D-5030) सुसैरा कोठी हाईवे पर पहुंचा था। तभी आगे चल रहे टैंकर ने अचानक ब्रेक लगा दिए, जिससे ट्रक पीछे से टकरा गया। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रक का केबिन टैंकर में घुस गया और चालक गंभीर रूप से घायल होकर अंदर फंस गया। हादसे के बाद टैंकर चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने कटर मशीन की मदद से ट्रक की बॉडी काटकर चालक को बाहर निकाला। इस दौरान हाइवे पर जाम लग गया, जिसे पुलिस ने संभालकर यातायात बहाल कराया। डॉक्टरों के अनुसार, चालक के पैर कुचल गए हैं, कई हड्डियां टूट गई हैं और काफी खून बह गया था। समय पर अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बच सकी।
अपहरण-दुष्कर्म के आरोपी को 20-20 साल की सजा:इंदौर में दो साल पुराने केस में फैसला; अन्य धाराओं में भी 4 साल का कारावास

इंदौर में दो साल पहले नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म प्रकरण के केस में कोर्ट ने आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी देवी सिंह (19 वर्ष), निवासी जिला धार को दोषी पाते हुए विभिन्न धाराओं में सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया। कोर्ट ने आरोपी को धारा 5(एल)/6 पॉक्सो एक्ट और धारा 376(3) भादवि के तहत 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास, धारा 366 भादवि में 3 वर्ष तथा धारा 506 भाग-2 भादवि में 1 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 3000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। शासन की ओर से पैरवी महेन्द्र सिंह मुजाल्दे (विशेष लोक अभियोजक) द्वारा की गई। ऐसे हुआ था मामला दर्ज पीड़िता के पिता ने 6 मार्च 2024 को थाना बडगोंदा में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी नाबालिग पुत्री शाम 7.30 बजे पड़ोसी के घर टीवी देखने गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। आसपास और रिश्तेदारों में तलाश के बाद भी कोई जानकारी नहीं मिलने पर अपहरण की आशंका जताई गई। गुमशुदगी के आधार पर पुलिस ने धारा 363 भादवि के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पीड़िता को आरोपी से छुड़ाकर पूछताछ की। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसे डरा-धमकाकर शादी का झांसा दिया और बस से गुजरात के मोरवी ले गया, जहां उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। जांच के बाद बढ़ाई गईं धाराएं पीड़िता का मेडिकल कराया गया और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। गवाहों के बयान दर्ज कर विवेचना के दौरान आरोपी के विरुद्ध धारा 363, 366, 376(2)(एन), 506 भादवि एवं धारा 5(एल)/6 पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ी गईं। कोर्ट में चालान पेश किया। दो साल तक सुनवाई चली। 16 अप्रैल को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 20-20 वर्ष के कारावास से दंडित किया।
Bhopal Metro Blue Line Traffic Signals Removed; Work Underway

भोपाल मेट्रो की ब्लू लाइन के निर्माण कार्य के चलते रत्नागिरी तिराहा से भदभदा चौराहा तक के 13 प्रमुख ट्रैफिक सिग्नल और सीसीटीवी कैमरे हटाए जाएंगे। मेट्रो के सिविल और इलेक्ट्रिकल काम में किसी तरह की बाधा न आए, इसलिए यह कदम उठाया गया है। . इस प्रोजेक्ट की अवधि तीन साल निर्धारित है, यानी इतने समय तक इन व्यस्त चौराहों पर बिना सिग्नल के ट्रैफिक चलाना होगा। हर घंटे गुजरते हैं 2000 से ज्यादा वाहन पहले से ही इन इलाकों में ट्रैफिक का दबाव काफी ज्यादा है। विशेषज्ञों के अनुसार कई जगहों पर प्रति घंटे 2000 से अधिक वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सीमित ट्रैफिक पुलिस बल के भरोसे व्यवस्था संभालना काफी कठिन होगा। जिन चौराहों पर अभी सिग्नल हैं, वहां भी पुलिस के लिए ट्रैफिक कंट्रोल करना आसान नहीं रहा है। हाल ही में ट्रैफिक विभाग की ओर से स्मार्ट सिटी कंपनी को पत्र लिखकर सिग्नल और कैमरों को हटाने तथा उन्हें अन्य जरूरतमंद स्थानों पर लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। इनमें से 9 सिग्नलों को नए चिन्हित स्थानों पर शिफ्ट करने की योजना है, ताकि मेंटेनेंस (एएमसी) पर होने वाला अनावश्यक खर्च बचाया जा सके। ब्लू लाइन कॉरिडोर की तैयारी करीब 13 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 550 स्थानों पर सॉयल टेस्टिंग पूरी की जा चुकी है। जियोटेक्निकल जांच के आधार पर मेट्रो के पिलर और नींव तय की जा रही है। यह परियोजना करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हो रही है। ट्रैफिक पर असर तय रंगमहल, रोशनपुरा, पिपलानी, रत्नागिरी और प्रभात चौराहा जैसे स्थानों पर पहले से ही भारी ट्रैफिक रहता है। ऐसे में अगले तीन साल तक बिना सिग्नल ट्रैफिक संचालन करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। इन स्थानों से हटेंगे सिग्नल भदभदा चौराहा, डिपो चौराहा, जवाहर चौक, रंगमहल, रोशनपुरा, कुशाभाऊ ठाकरे हॉल, पुलिस कंट्रोल रूम तिराहा, पुराना एसपी ऑफिस, प्रभात चौराहा, आईटीआई, जेके रोड, पिपलानी तिराहा और रत्नागिरी तिराहा। इन स्थानों पर लगाए जा सकते हैं सिग्नल माता मंदिर, पीएंडटी चौराहा, मैनिट, रोहित नगर, पीसीसी तिराहा, बजरिया तिराहा, संगम तिराहा, रातीबड़ थाना चौराहा और जेके हॉस्पिटल तिराहा। पहले भी हटे थे सिग्नल ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने के दौरान भी कई सिग्नल और कैमरे हटाकर गोदाम में रख दिए गए थे, लेकिन उपयोग न होने के बावजूद एजेंसी को एएमसी का भुगतान करना पड़ा था।
ओजोन थैरेपी से आर्थराइटिस का बिना सर्जरी इलाज संभव:स्ट्रोक और हार्ट अटैक में भी सहायक, दर्द से राहत बिना बड़ी सर्जरी

आज भी कई ऑर्थोपेडिक बीमारियां ऐसी हैं, जिनमें जॉइंट रिप्लेसमेंट को अंतिम इलाज माना जाता है। यह प्रक्रिया मरीजों के लिए लंबी और पीड़ादायक होती है। हालांकि अब अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों के जरिए कुछ मामलों में इन बीमारियों को रिवर्स करना संभव बताया जा रहा है। ऐसी ही एक उभरती तकनीक है ओजोन थैरेपी, जिस पर तीन दिवसीय 5वीं इंटरनेशनल ऑर्थोपेडिक कॉन्फ्रेंस में विस्तार से चर्चा की गई। स्काईलाइन रिजॉर्ट एंड कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार से शुरू हुए इस सम्मेलन में मुंबई से आए डॉ. प्रसन्न शाह ने बताया कि ओजोन में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं। यह संक्रमण को रोकने, ऊतकों में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाने और तेजी से हीलिंग में सहायक है। उन्होंने कहा कि आर्थराइटिस, मांसपेशियों के दर्द और डायबिटिक फुट अल्सर जैसे जटिल घावों में ओजोन थेरेपी सपोर्टिव उपचार के रूप में उपयोगी साबित हो रही है। इससे कई मामलों में पैर काटने की नौबत टाली जा सकती है। डॉ. शाह के अनुसार, हिप जॉइंट के एवीएन (Avascular Necrosis) और घुटनों के ऑर्थराइटिस में बिना जॉइंट रिप्लेसमेंट के इलाज की संभावना बनती है। उनका दावा है कि समय रहते उपचार देने पर स्ट्रोक या हार्ट अटैक के मामलों में भी सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं। ‘लर्न टुडे, इम्प्लीमेंट टुमारो’ थीम पर आयोजन कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अरविंद वर्मा जांगिड़ ने बताया कि आयोजन की थीम “लर्न टुडे, इम्प्लीमेंट टुमारो” रखी गई है, जिसका उद्देश्य नई तकनीकों को सीधे प्रैक्टिस में लागू करना है। तीन दिनों तक चलने वाली इस कॉन्फ्रेंस में प्रतिदिन 3 से 4 शैक्षणिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। लेक्चर के साथ लाइव वर्कशॉप और बोन मॉडल्स पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि प्रतिभागी नई तकनीकों को व्यवहारिक रूप से समझ सकें। ऑर्गेनाइजिंग प्रेसिडेंट डॉ. एल. प्रकाश के मुताबिक कॉन्फ्रेंस में करीब 350 डेलीगेट्स और 42 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हुए हैं। इटली और नेपाल सहित कई देशों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। बिना ओपन सर्जरी फ्रैक्चर का इलाज इटली से आए डॉ. मारियो मिरोज ने ऐसी तकनीक पर सत्र लिया, जिसके जरिए गंभीर फ्रैक्चर का इलाज बिना ओपन सर्जरी के संभव है। वहीं नेपाल से डॉ. दीपेंद्र गुरुंग ने मिनिमल इनवेसिव तकनीकों के माध्यम से जटिल फ्रैक्चर के उपचार पर प्रशिक्षण दिया। सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. डीके तनेजा ने ‘100 साल तक स्वस्थ कैसे जिया जाए’ विषय पर मार्गदर्शन दिया।
भोपाल में बनी देश की पहली सीमेंट-रहित राख से सड़क:21 दिन में मजबूत बनने वाली नई तकनीक का सफल प्रयोग

भोपाल में कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। CSIR- एडवांस मटेरियल एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टिट्यूट (एम्प्री)ने देश की पहली ऐसी सड़क विकसित की है, जिसमें सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह सड़क बिजली संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) और जियोपॉलिमर तकनीक की मदद से तैयार की गई है। पहले हो गई थी शुरुआत इस परियोजना की शुरुआत 2 फरवरी को एन कलईसेल्वी द्वारा की गई थी, जबकि इसका औपचारिक शुभारंभ विनोद कुमार की उपस्थिति में हुआ। इस नई तकनीक के कई पर्यावरणीय और तकनीकी फायदे हैं। पारंपरिक सीमेंट सड़कों की तुलना में इसमें कार्बन उत्सर्जन लगभग 83% तक कम होता है और निर्माण के दौरान 80% कम ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। सबसे खास बात यह है कि इस सड़क को बनाने के बाद पानी से क्योरिंग (तराई) की जरूरत नहीं होती। मजबूती की बात करें तो यह सड़क केवल 21 दिन में 35 से 40 एमपीए तक की ताकत हासिल कर लेती है, जो सामान्य सीमेंट से बनी सड़कों के बराबर मानी जाती है।


