Saturday, 24 Oct 2026 | 04:14 PM

Trending :

EXCLUSIVE

China is also gaining an edge over America in the pharmaceutical industry.

China is also gaining an edge over America in the pharmaceutical industry.
  • Hindi News
  • Business
  • China Is Also Gaining An Edge Over America In The Pharmaceutical Industry.

द न्यूयॉर्क टाइम्स17 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

शिकागो में कैंसर विशेषज्ञों‎ की सालाना कॉन्फ्रेंस।‎- फाइल फोटो

नई दवाओं के विकास में चीन तेजी से उभरती ‎‎ताकत बनता दिख रहा है। दशकों तक कैंसर ‎‎विशेषज्ञों की सालाना कॉन्फ्रेंस में दवाइयों के ‎‎ट्रायल्स मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप के ‎‎अस्पताल चलाते थे, लेकिन पिछले सप्ताह‎ शिकागो में आयोजित अमेरिकन सोसायटी ऑफ ‎‎क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी (एएससीओ) की‎ वार्षिक बैठक ने संकेत दिया कि वैश्विक ‎‎बायोटेक्नोलॉजी परिदृश्य बदल रहा है।‎

कभी अपेक्षाकृत छोटी मानी जाने वाली चीन‎ की बायोटेक इंडस्ट्री कुछ ही वर्षों में नई दवाओं ‎के शोध, विकास और क्लीनिकल परीक्षण का‎ बड़ा केंद्र बन गई है। 1989 से एएससीओ ‎सम्मेलन में भाग ले रहे जॉन्स हॉपकिन्स‎ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. ओटिस ब्रॉली के ‎अनुसार, चीन की बायोटेक इंडस्ट्री अब ‎वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज ‎करा चुकी है। हालांकि इस प्रगति ने अमेरिकी‎ अधिकारियों, दवा कंपनियों और चिकित्सा ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎विशेषज्ञों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। उनकी ‎आशंका नई दवाओं के विकास पर नियंत्रण ‎और बायोटेक क्षेत्र में अमेरिका की लंबे समय से‎ बनी बढ़त के कमजोर पड़ने से भी जुड़ी है।‎

अमेरिकी बायोटेक स्टार्टअप्स का कहना है ‎कि उन्हें पेटेंट, रिसर्च पब्लिकेशन और‎ क्लीनिकल ट्रायल्स के क्षेत्र में चीनी कंपनियों से‎ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ‎इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या‎ चीन में विकसित दवाएं अमेरिकी मरीजों पर भी‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ उतनी ही प्रभावी साबित होंगी, जितनी चीनी ‎नागरिकों पर होती हैं। दरअसल, लंग कैंसर के‎ एशियाई मरीज लंबे समय तक जीवित रहते हैं‎ और अन्य नस्ल के लोगों की तुलना में उन्हें‎ इलाज से ज्यादा फायदा होता है। सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा चीनी कंपनी अकेसो ‎बायोफार्मा की कैंसर-रोधी दवा इवोनेसिमैब को‎ लेकर रही। कंपनी इस दवा का अमेरिकी मरीजों‎ पर भी परीक्षण कर रही है।‎

कई बड़ी दवा कंपनियों के चीन से सौदे‎

पिछले कुछ वर्षों से दुनिया की बड़ी फार्मास्युटिकल्स ‎कंपनियां चीन की दवाइयां और कच्चे माल का बड़े पैमाने‎ पर आयात कर रही हैं। इस साल अब तक ऐसे लगभग‎ आधे सौदे चीनी कंपनियों से हुए हैं। ये 2020 से बहुत‎ अधिक हैं। कॉन्फ्रेंस में इवोनेसिमैब सहित कैंसर की अन्य‎ दवाइयों के सौदे फाइजर, मर्क और ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब‎ जैसी बड़ी कंपनियों ने किए हैं।‎‎

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
बारिश की जगह अब गर्मी से रोके जा रहे खेल:ब्रिटेन की भीषण गर्मी विम्बलडन और महिला टी20 वर्ल्ड कप पर डाल रही असर

July 3, 2026/
12:20 pm

एक समय था जब इंग्लैंड के मैदानों पर मैच शुरू होने से पहले सबसे ज्यादा नजरें आसमान पर होती थीं।...

मैहर में गैस सिलेंडर के लिए चक्काजाम:एजेंसी देर से खुलने पर उपभोक्ता भड़के; एसडीएम ने संचालक को फटकार लगाई

April 10, 2026/
3:23 pm

मैहर जिले के अमरपाटन में शुक्रवार को मानसी गैस एजेंसी के सामने उपभोक्ताओं ने गैस सिलेंडर न मिलने पर चक्काजाम...

सतना में मेयर-कमिश्नर टकराव में फंसा नगर निगम बजट:13 दिन बाद रिमाइंडर पत्र, 31 मार्च डेडलाइन पर संशय, विकास कार्य प्रभावित होने के आसार

March 23, 2026/
11:19 pm

सतना नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट 31 मार्च तक परिषद में पेश हो कर पास हो...

ICC ने टीमों के लिए चार्टर्ड प्लेन बुक किए:इंग्लैंड शनिवार को, साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज रविवार को रवाना होगी ;ईरान-इजराइल युद्ध से फ्लाइट्स कैंसिल

March 7, 2026/
3:49 pm

इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज की टीमें अब चार्टर्ड फ्लाइट से भारत से रवाना होंगी। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने...

बंगाल की चर्चित भवानीपुर सीट पर महामुकाबला:'मिनी इंडिया' के मन में ममता दीदी, मुकाबले में सुवेंदु दादा; सुरक्षा पर नाराजगी लेकिन योजनाओं में TMC भारी

April 27, 2026/
5:26 pm

दक्षिण कोलकाता के पद्दपुकुर रोड पर 140 साल पुरानी ‘बलराम मलिक एंड राधारमण मलिक’ मिठाई दुकान में एक ट्रे में...

Nagpur Bharatdurga Mandir Inauguration | Dhirendra Shastri Statement RSS

April 25, 2026/
12:39 pm

पं. धीरेंद्र शास्त्री नागपुर में विश्व के पहले भारतदुर्गा मंदिर के शिलान्यास समारोह में पहुंचे थे। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर...

भारत में एलपीजी गैस की कमी के संकट के दौरान घर पर गंदे इंडक्शन को आसानी से कैसे साफ करें युक्तियाँ और सफाई के तरीके

March 13, 2026/
8:42 pm

साफा में अजैविक कैसे बनाएं? | छवि: एआई इंडक्शन का उपयोग कैसे करें: आजकल कई घरों में गैस के साथ-साथ...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

China is also gaining an edge over America in the pharmaceutical industry.

China is also gaining an edge over America in the pharmaceutical industry.
  • Hindi News
  • Business
  • China Is Also Gaining An Edge Over America In The Pharmaceutical Industry.

द न्यूयॉर्क टाइम्स17 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

शिकागो में कैंसर विशेषज्ञों‎ की सालाना कॉन्फ्रेंस।‎- फाइल फोटो

नई दवाओं के विकास में चीन तेजी से उभरती ‎‎ताकत बनता दिख रहा है। दशकों तक कैंसर ‎‎विशेषज्ञों की सालाना कॉन्फ्रेंस में दवाइयों के ‎‎ट्रायल्स मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप के ‎‎अस्पताल चलाते थे, लेकिन पिछले सप्ताह‎ शिकागो में आयोजित अमेरिकन सोसायटी ऑफ ‎‎क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी (एएससीओ) की‎ वार्षिक बैठक ने संकेत दिया कि वैश्विक ‎‎बायोटेक्नोलॉजी परिदृश्य बदल रहा है।‎

कभी अपेक्षाकृत छोटी मानी जाने वाली चीन‎ की बायोटेक इंडस्ट्री कुछ ही वर्षों में नई दवाओं ‎के शोध, विकास और क्लीनिकल परीक्षण का‎ बड़ा केंद्र बन गई है। 1989 से एएससीओ ‎सम्मेलन में भाग ले रहे जॉन्स हॉपकिन्स‎ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. ओटिस ब्रॉली के ‎अनुसार, चीन की बायोटेक इंडस्ट्री अब ‎वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज ‎करा चुकी है। हालांकि इस प्रगति ने अमेरिकी‎ अधिकारियों, दवा कंपनियों और चिकित्सा ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎विशेषज्ञों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। उनकी ‎आशंका नई दवाओं के विकास पर नियंत्रण ‎और बायोटेक क्षेत्र में अमेरिका की लंबे समय से‎ बनी बढ़त के कमजोर पड़ने से भी जुड़ी है।‎

अमेरिकी बायोटेक स्टार्टअप्स का कहना है ‎कि उन्हें पेटेंट, रिसर्च पब्लिकेशन और‎ क्लीनिकल ट्रायल्स के क्षेत्र में चीनी कंपनियों से‎ कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। ‎इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या‎ चीन में विकसित दवाएं अमेरिकी मरीजों पर भी‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ उतनी ही प्रभावी साबित होंगी, जितनी चीनी ‎नागरिकों पर होती हैं। दरअसल, लंग कैंसर के‎ एशियाई मरीज लंबे समय तक जीवित रहते हैं‎ और अन्य नस्ल के लोगों की तुलना में उन्हें‎ इलाज से ज्यादा फायदा होता है। सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा चीनी कंपनी अकेसो ‎बायोफार्मा की कैंसर-रोधी दवा इवोनेसिमैब को‎ लेकर रही। कंपनी इस दवा का अमेरिकी मरीजों‎ पर भी परीक्षण कर रही है।‎

कई बड़ी दवा कंपनियों के चीन से सौदे‎

पिछले कुछ वर्षों से दुनिया की बड़ी फार्मास्युटिकल्स ‎कंपनियां चीन की दवाइयां और कच्चे माल का बड़े पैमाने‎ पर आयात कर रही हैं। इस साल अब तक ऐसे लगभग‎ आधे सौदे चीनी कंपनियों से हुए हैं। ये 2020 से बहुत‎ अधिक हैं। कॉन्फ्रेंस में इवोनेसिमैब सहित कैंसर की अन्य‎ दवाइयों के सौदे फाइजर, मर्क और ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब‎ जैसी बड़ी कंपनियों ने किए हैं।‎‎

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.