ग्वालियर में फैक्ट्री कर्मचारी से 2 लाख की ठगी:APK फाइल टच करते ही मोबाइल अपडेट हुआ, साइबर ठग ने किया फ्रॉड

ग्वालियर में एक फैक्ट्री कर्मचारी साइबर ठगी का शिकार हो गया। मोबाइल अपडेट होते ही उसके बैंक खाते से करीब दो लाख रुपए निकाल लिए गए। घटना 6 मार्च को महाराजपुरा थाना क्षेत्र के जनकपुरी आदित्यपुरम में हुई थी। पीड़ित ओमनारायण वर्मा मालनपुर स्थित एक कंपनी में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल पर एक APK फाइल आई थी। जैसे ही उन्होंने उस फाइल को टच किया, उनका मोबाइल अचानक अपडेट होना शुरू हो गया। कुछ समय बाद मोबाइल रीस्टार्ट हुआ और तुरंत बाद उनके फोन पर खाते से पैसे कटने के मैसेज आने लगे। घटना की जानकारी मिलते ही ओमनारायण तुरंत बैंक पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि उनके खाते से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए रकम ट्रांसफर की गई है। इसके बाद उन्होंने तुरंत अपना खाता ब्लॉक कराया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। खाते से 2 लाख निकाले शिकायत के आधार पर मामला जीरो पर दर्ज कर महाराजपुरा थाने भेजा गया। पुलिस ने शनिवार को विधिवत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महाराजपुरा थाना प्रभारी यशवंत गोयल ने बताया कि साइबर ठगों ने एक कर्मचारी के खाते से 2 लाख रुपए की रकम निकाल ली है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
3 Thanedar Line Attach, 2 ASI Suspended Over CM Helpline Lapses

एसपी आदित्य मिश्रा ने आदेश जारी किए। बालाघाट में सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों की समीक्षा के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस में हंसने और पान चबाने पर दो सहायक उप-निरीक्षकों (एएसआई) को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल निलंबन के आदेश जारी किए। . इस कार्रवाई में तीन थाना प्रभारियों और एक आरक्षक शैलेश सहित कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर लाइन अटैच किया गया है। निलंबित किए गए थाना प्रभारियों में कोतवाली थाना प्रभारी कामेश धुमकेती, ग्रामीण थाना प्रभारी अमित अग्रवाल और रामपायली थाना प्रभारी दिलीप मौर्य शामिल हैं। हालांकि, इन थाना प्रभारियों के निलंबन की कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है, लेकिन सीएम हेल्पलाइन के लंबित प्रकरणों और थाना क्षेत्र में गंभीर अपराधों पर कार्रवाई में देरी को इसका कारण बताया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा को अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति और सख्त अधिकारी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने इस कार्रवाई को एक प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है। ये थे हंसने और पान खाने पुलिसकर्मी जानकारी के अनुसार, वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान एएसआई राजकुमार राहंगडाले हंसते हुए दिखाई दिए थे। वहीं, कटंगी थाना के कार्यवाहक एएसआई पेंढारीलाल अहाके पान खाते हुए नजर आए। जब उनसे सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों के बारे में पूछा गया, तो उनके पास कोई जानकारी नहीं थी। एसपी आदित्य मिश्रा ने इसे गंभीरता से लेते हुए अनुशासनहीनता और लापरवाही माना। इसके बाद दोनों एएसआई को तत्काल निलंबित कर लाइन अटैच कर दिया गया।
Sleep Tips: रातोंरात ठीक हो जाएगी स्लीप साइकिल, बैडरूम में लगाएं ये 8 प्लांट, कमरे की खूबसूरती के साथ बढ़ेगी दिमाग की शांत

Last Updated:April 18, 2026, 21:19 IST आज के समय में ज्यादातर लोग नींद न आने की समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं इस प्रॉब्लम को आप बैडरूम में कुछ प्लांट्स को लगाकर नेचुरली क्योर कर सकते हैं. यहां हम आपको ऐसे 8 पौधों के बारे में बता रहे हैं, जो स्लीप को प्रमोट करने के साथ दिमाग को शांत करने का काम करता है. लैवेंडर: लैवेंडर अपनी शांत खुशबू के लिए जाना जाता है, जो चिंता कम करने और अच्छी नींद में मदद करता है. इसे अपने बिस्तर के पास रखने से कमरे में सुकून भरा माहौल बनता है. इसकी हल्की खुशबू मन को शांत करती है, जिससे यह लंबे और तनावपूर्ण दिन के बाद आराम करने के लिए एकदम सही है. स्नेक प्लांट: स्नेक प्लांट बेडरूम के लिए बिल्कुल सही है क्योंकि यह रात में ऑक्सीजन छोड़ता है, जिससे सोते समय हवा की गुणवत्ता बेहतर होती है. इसे बहुत कम देखभाल की जरूरत होती है और यह कम रोशनी में भी आसानी से बढ़ता है. इसके सीधे खड़े पत्ते कमरे को मॉडर्न लुक देते हैं, जिससे यह न सिर्फ उपयोगी है बल्कि देखने में भी आकर्षक लगता है. पीस लिली: पीस लिली घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ-साथ कमरे की नमी को बनाए रखने में मदद करती है, जिससे सोते समय सांस लेना आसान हो जाता है. इसके हरे-भरे पत्ते और सफेद फूल घर में सुकून भरा माहौल बनाते हैं. इसे संभालना भी आसान है और यह शांत वातावरण बनाने में मदद करती है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google एलोवेरा: एलोवेरा एक उपयोगी बेडरूम पौधा है, जो रात में ऑक्सीजन छोड़ता है और इसे संभालना भी आसान है. इसकी मोटी, रसीली पत्तियों में पानी जमा रहता है, जिससे इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती. इसके अलावा, इसकी जेल का इस्तेमाल हल्की स्किन केयर जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है. First Published : April 18, 2026, 21:19 IST
मेटा का 8,000 कर्मचारियों की छंटनी का प्लान:20 मई से वर्कफोर्स घटाने की प्रोसेस शुरू होगी; ग्लोबल लेवल पर 10% स्टाफ कम होगा

फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा इस साल मई में करीब 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का प्लान बना रही है। यह छंटनी 2022 के आखिरी और 2023 की शुरुआत में हुई रिस्ट्रक्चरिंग के बाद कंपनी का सबसे बड़ा कदम होगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े पैमाने पर होने वाली यह वर्कफोर्स कटौती 20 मई के आसपास शुरू हो सकती है। शुरुआती फेज में मेटा अपनी कुल ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 10% हिस्सा कम करने की तैयारी में है। इसके अलावा कंपनी साल की दूसरी छमाही में भी कुछ और कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। हालांकि, छंटनी की सटीक तारीख और कर्मचारियों की संख्या में अभी भी बदलाव की संभावना है। AI निवेश और एफिशिएंसी को बताया जा रहा वजह मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि AI की बढ़ती क्षमताओं के कारण अब भविष्य में मैनेजमेंट लेयर्स कम होंगी और AI-असिस्टेड वर्कर्स के जरिए काम में ज्यादा एफिशिएंसी आएगी। पहले ऐसी रिपोर्ट्स भी आई थीं कि मेटा अपने कुल वर्कफोर्स का 20% या उससे ज्यादा हिस्सा कम कर सकती है। अमेजन और डिज्नी ने भी कम किया स्टाफ टेक और मीडिया सेक्टर में छंटनी का यह दौर केवल मेटा तक सीमित नहीं है। हाल के महीनों में अमेजन ने भी अपने लगभग 30,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों (करीब 10% व्हाइट-कॉलर स्टाफ) को बाहर का रास्ता दिखाया है। वहीं डिज्नी के सीईओ जोश डी’अमारो ने भी टीवी बिजनेस, ईएसपीएन और टेक्नोलॉजी विभाग से करीब 1,000 कर्मचारियों को हटाने की घोषणा की है। साल 2024 में अब तक 73,000 से ज्यादा लोग बेरोजगार टेक कंपनियों में नौकरियों की कटौती पर नजर रखने वाली वेबसाइट Layoffs.fyi के अनुसार, इस साल अब तक 73,000 से ज्यादा कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। पिछले साल यानी 2024 में यह आंकड़ा 1.53 लाख के पार था। मेटा ने पिछले साल AI पर भारी खर्च के बावजूद 200 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू और 60 बिलियन डॉलर का प्रॉफिट कमाया था। मेटा का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से समा भी छंटनी करेगी फेसबुक के लिए कंटेंट मॉडरेशन का काम करने वाली कंपनी ‘समा’ ने भी अपने 1,100 से ज्यादा कर्मचारियों को ले-ऑफ नोटिस जारी किया है। यह फैसला मेटा द्वारा समा के साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के बाद लिया गया है। समा ने कहा है कि वे प्रभावित कर्मचारियों का सपोर्ट कर रहे हैं। क्या होता है ‘ले-ऑफ’ और ‘व्हाइट-कॉलर’ जॉब? ले-ऑफ (Layoff): जब कोई कंपनी अपनी खराब आर्थिक स्थिति, रिस्ट्रक्चरिंग या काम कम होने के कारण कर्मचारियों को नौकरी से निकालती है, तो इसे ले-ऑफ कहा जाता है। यह कर्मचारी के खराब प्रदर्शन की वजह से नहीं होता। व्हाइट-कॉलर जॉब: यह आमतौर पर उन पेशों के लिए इस्तेमाल होता है जिनमें कर्मचारी ऑफिस या डेस्क पर बैठकर प्रशासनिक, प्रोफेशनल या मैनेजिरियल काम करते हैं। इसके विपरीत ‘ब्लू-कॉलर’ वर्कर्स शारीरिक श्रम या मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े होते हैं। ये खबर भी पढ़ें… केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता 2% बढ़ाकर 60% किया: 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। सरकार ने DA-DR 58% से बढ़कर 60% किया है। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू होगी। इस फैसले से सरकार का सालाना 6,791 करोड़ रुपए का खर्च बढ़ेगा। इससे पहले अक्टूबर में महंगाई भत्ते को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था। पिछला रिविजन 1 जुलाई 2025 से प्रभावी माना गया था, जिसका भुगतान एरियर के साथ किया गया था। पूरी खबर पढ़ें…
मेटा का 8,000 कर्मचारियों की छंटनी का प्लान:20 मई से वर्कफोर्स घटाने की प्रोसेस शुरू होगी; ग्लोबल लेवल पर 10% स्टाफ कम होगा

फेसबुक और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा इस साल मई में करीब 8,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का प्लान बना रही है। यह छंटनी 2022 के आखिरी और 2023 की शुरुआत में हुई रिस्ट्रक्चरिंग के बाद कंपनी का सबसे बड़ा कदम होगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े पैमाने पर होने वाली यह वर्कफोर्स कटौती 20 मई के आसपास शुरू हो सकती है। शुरुआती फेज में मेटा अपनी कुल ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 10% हिस्सा कम करने की तैयारी में है। इसके अलावा कंपनी साल की दूसरी छमाही में भी कुछ और कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। हालांकि, छंटनी की सटीक तारीख और कर्मचारियों की संख्या में अभी भी बदलाव की संभावना है। AI निवेश और एफिशिएंसी को बताया जा रहा वजह मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। कंपनी के अधिकारियों का मानना है कि AI की बढ़ती क्षमताओं के कारण अब भविष्य में मैनेजमेंट लेयर्स कम होंगी और AI-असिस्टेड वर्कर्स के जरिए काम में ज्यादा एफिशिएंसी आएगी। पहले ऐसी रिपोर्ट्स भी आई थीं कि मेटा अपने कुल वर्कफोर्स का 20% या उससे ज्यादा हिस्सा कम कर सकती है। अमेजन और डिज्नी ने भी कम किया स्टाफ टेक और मीडिया सेक्टर में छंटनी का यह दौर केवल मेटा तक सीमित नहीं है। हाल के महीनों में अमेजन ने भी अपने लगभग 30,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों (करीब 10% व्हाइट-कॉलर स्टाफ) को बाहर का रास्ता दिखाया है। वहीं डिज्नी के सीईओ जोश डी’अमारो ने भी टीवी बिजनेस, ईएसपीएन और टेक्नोलॉजी विभाग से करीब 1,000 कर्मचारियों को हटाने की घोषणा की है। साल 2024 में अब तक 73,000 से ज्यादा लोग बेरोजगार टेक कंपनियों में नौकरियों की कटौती पर नजर रखने वाली वेबसाइट Layoffs.fyi के अनुसार, इस साल अब तक 73,000 से ज्यादा कर्मचारी अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। पिछले साल यानी 2024 में यह आंकड़ा 1.53 लाख के पार था। मेटा ने पिछले साल AI पर भारी खर्च के बावजूद 200 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू और 60 बिलियन डॉलर का प्रॉफिट कमाया था। मेटा का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने से समा भी छंटनी करेगी फेसबुक के लिए कंटेंट मॉडरेशन का काम करने वाली कंपनी ‘समा’ ने भी अपने 1,100 से ज्यादा कर्मचारियों को ले-ऑफ नोटिस जारी किया है। यह फैसला मेटा द्वारा समा के साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के बाद लिया गया है। समा ने कहा है कि वे प्रभावित कर्मचारियों का सपोर्ट कर रहे हैं। क्या होता है ‘ले-ऑफ’ और ‘व्हाइट-कॉलर’ जॉब? ले-ऑफ (Layoff): जब कोई कंपनी अपनी खराब आर्थिक स्थिति, रिस्ट्रक्चरिंग या काम कम होने के कारण कर्मचारियों को नौकरी से निकालती है, तो इसे ले-ऑफ कहा जाता है। यह कर्मचारी के खराब प्रदर्शन की वजह से नहीं होता। व्हाइट-कॉलर जॉब: यह आमतौर पर उन पेशों के लिए इस्तेमाल होता है जिनमें कर्मचारी ऑफिस या डेस्क पर बैठकर प्रशासनिक, प्रोफेशनल या मैनेजिरियल काम करते हैं। इसके विपरीत ‘ब्लू-कॉलर’ वर्कर्स शारीरिक श्रम या मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े होते हैं। ये खबर भी पढ़ें… केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ता 2% बढ़ाकर 60% किया: 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। सरकार ने DA-DR 58% से बढ़कर 60% किया है। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू होगी। इस फैसले से सरकार का सालाना 6,791 करोड़ रुपए का खर्च बढ़ेगा। इससे पहले अक्टूबर में महंगाई भत्ते को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था। पिछला रिविजन 1 जुलाई 2025 से प्रभावी माना गया था, जिसका भुगतान एरियर के साथ किया गया था। पूरी खबर पढ़ें…
हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति की सुगबुगाहट:इंदौर के तीन वकीलों के नाम चर्चा में, दो महिला अधिवक्ताओं को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जजों के खाली पदों को भरने के लिए कवायद तेज हो गई है। लंबे समय के इंतजार के बाद अब कॉलेजियम की बैठक को लेकर हलचल शुरू हुई है, जिसमें इंदौर से तीन प्रमुख वकीलों के नाम शॉर्टलिस्ट किए जाने की खबर है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन नामों में दो महिला अधिवक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, जो न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, इंदौर से तीन नामों पर चर्चा हो रही है। इन नामों को लेकर इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अपनी खुफिया रिपोर्ट भी तैयार कर ली है। इन वकीलों का अनुभव और ट्रैक रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है। हाई कोर्ट में वर्तमान स्थिति को देखें तो तीनों खंडपीठों को मिलाकर अभी केवल एक ही महिला जज कार्यरत हैं। ऐसे में इंदौर के साथ-साथ जबलपुर और ग्वालियर से भी महिला वकीलों के नाम कॉलेजियम के समक्ष भेजे गए हैं ताकि संतुलन को बेहतर किया जा सके। यदि हाई कोर्ट कॉलेजियम इन नामों पर अपनी अंतिम मुहर लगा देता है, तो इन्हें मंजूरी के लिए सुप्रीम कोर्ट भेजा जाएगा और वहां से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र सरकार द्वारा नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। कम होती जा रही जजों की संख्या जुलाई 2025 के बाद से हाई कोर्ट को नए जज नहीं मिले हैं और करीब सवा साल से कॉलेजियम की कोई औपचारिक बैठक भी नहीं हुई है। वर्तमान में जजों की सेवानिवृत्ति के कारण पदों की संख्या कम होती जा रही है। अगले तीन महीनों में इंदौर खंडपीठ के ही दो जज रिटायर होने वाले हैं, जबकि जबलपुर और ग्वालियर में भी रिक्तियां बढ़ने वाली हैं। कुछ मौजूदा जजों को अन्य राज्यों में मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया जा सकता है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए न्यायिक कार्यों की सुगमता के लिए नई नियुक्तियों की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।
वजन घटाने वाला पेय: जीरा या मेथी का पानी छोड़ें, गर्मियों में वेट लॉस के लिए सबसे अच्छा है ये पेय, शरीर भी ठंडा

18 अप्रैल 2026 को 20:42 IST पर अपडेट किया गया वजन कम करने वाला पेय: गर्मियां आडेल हैं जहां वजन घटाना थोड़ा आसान है। जहां आमतौर पर लोगों को खाली पेट जीरा या मेथी वॉटर पीने की सलाह दी जाती है, वहीं आज हम आपको एक कूलिंग वेट लॉस ड्रिंक के बारे में बताते हैं। अनुसरण करना : गर्मियों में हमें ज्यादा से ज्यादा ऐसे स्वाद का सेवन करना चाहिए जो हमारे शरीर में पानी की कमी न होने दे। अच्छी सेहत के लिए इस मौसम में शरीर को ठंडक देने वाली चीज का ही सेवन करना सबसे अच्छा रहता है। छवि: फ्रीपिक इसी कड़ी में, हम ऐसे कूलिंग वेट लॉस ड्रिंक के बारे में बताएंगे जो आपका वजन तो घटाएगा ही, साथ ही डाइट से भी आपको बचाकर रखेगा। हम बात कर रहे हैं सत्तू पीने की। छवि: फ्रीपिक भुने चने का आटा होता है सत्तू जो प्रोटीन और हाई-फाइबर का बेहतरीन नुस्खा। इस भूख को कंट्रोल में रखने के साथ-साथ लंबे समय तक आपका पेट भरा रहता है। ये शरीर को ठंडक और तुरंत ऊर्जा भी देता है। छवि: फ्रीपिक प्रोटीन काहाउस पावर सत्तू के मसाले की पैकिंग है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले पेट को साफ करना और कब्ज से जोड़ना है। यह एक लो-कैलोरी ड्रिंक है जो आपके मेटाबॉलिज्म को कम करने में मदद करता है। छवि: मेटा एआई वेट लॉस के लिए 1 माइक्रो सत्तू को पानी में रेशे, नींबू, जीरा, पुदीना और काला नमक का स्वाद लें, इसमें ड्रिंक बना लें। इसे अपने खाली पेट या सुबह के खाने में इस्तेमाल करें। ये बेली फाख्ता में शहतूत है। छवि: फ्रीपिक इस बात का ध्यान रखें कि सत्तू पीने से भी चीनी खाने से आपका वजन घटने की बजाय बढ़ सकता है। इसे सुबह खाली पेट ही पिएं। अगर तो आप इसमें चाट मसाला भी मिला सकते हैं। छवि: मेटा एआई द्वारा प्रकाशित : साक्षी बंसल प्रकाशित 18 अप्रैल 2026 को 20:42 IST पर
खेत विवाद में पूर्व CRPF जवान की हत्या:बैतूल में दो आरोपी गिरफ्तार; पुलिस ने हथियार बरामद किए

बैतूल जिले के गंज थाना क्षेत्र में पूर्व सीआरपीएफ जवान बाबूराव सातनकर की हत्या के मामले में पुलिस ने शनिवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह वारदात 17 अप्रैल को बरसाली क्षेत्र में खेत की मेड को लेकर हुए विवाद के दौरान हुई थी, जिसमें बाबूराव को डंडों और नोजल पाइप से पीटा गया था। गंभीर रूप से घायल बाबूराव की इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, फरियादी विशाल सातनकर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी ओमप्रकाश यादव, नवीन यादव और पिल्लू उर्फ फूलचंद करोचे ने उनके पिता बाबूराव पर हमला किया था। इस मामले में गंज थाना में हत्या का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई। दो आरोपी सोनाघाटी क्षेत्र से गिरफ्तार पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र कुमार जैन के निर्देश पर टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों की तलाश शुरू की। मुखबिर की सूचना के आधार पर ओमप्रकाश यादव और पिल्लू उर्फ फूलचंद करोचे को सोनाघाटी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया है। एक अन्य आरोपी नवीन यादव की तलाश जारी है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बाबूराव के साथ उनका खेत की मेड को लेकर पुराना विवाद था। इसी रंजिश के चलते शुक्रवार को फिर विवाद हुआ और उन्होंने डंडों व पाइप से हमला कर बाबूराव की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त डंडे भी बरामद कर लिए हैं। जमीन को लेकर विवाद चल रहा था गौरतलब है कि दोनों पक्षों के बीच वर्षों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। वर्ष 2014 में भी इसी विवाद में गोलीकांड हुआ था, जिसमें बाबूराव को सजा हुई थी। बताया जा रहा है कि उसी पुरानी रंजिश के चलते इस बार भी यह घटना हुई।
Rahul Roy Mumbai Street Heavy Suitcase Viral Video

15 मिनट पहले कॉपी लिंक 90 के दशक के सुपरस्टार राहुल रॉय फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह फिल्म नहीं बल्कि वायरल वीडियो है। हाल ही में उन्हें मुंबई के वर्सोवा इलाके में सड़क पर भारी सूटकेस उठाकर चलते देखा गया। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस इमोशनल हो गए और पुराने दिनों को याद करने लगे। वीडियो में राहुल रॉय साधारण कपड़ों में नजर आ रहे हैं और खराब सड़क के बीच खुद भारी सूटकेस उठाकर चलते दिखते हैं। इस दौरान कुछ लोग उनका वीडियो बनाते दिखते हैं। जैसे ही राहुल की नजर कैमरे पर पड़ती है, वह हल्की मुस्कान के साथ आगे बढ़ते रहते हैं। बदला लुक देखकर लोग पहचान नहीं पाए राहुल रॉय का बदला लुक देखकर कई लोग उन्हें पहचान नहीं पाए। लंबे समय बाद पब्लिक में दिखे एक्टर का सादा अंदाज फैंस के लिए हैरान करने वाला रहा। वहीं कुछ लोग उनकी हालत देखकर दुखी नजर आए। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि यह वही स्टार हैं जिन्होंने कभी पूरे देश को दीवाना बनाया था। वहीं कुछ ने सवाल उठाया कि वीडियो बनाने वालों में से किसी ने उनकी मदद क्यों नहीं की। वीडियो बनाने वालों पर फूटा गुस्सा फैंस का गुस्सा उन लोगों पर दिखा जो सिर्फ वीडियो बनाते रहे लेकिन मदद के लिए आगे नहीं आए। एक यूजर ने लिखा, “यहां सिर्फ चढ़ते सूरज को सलाम किया जाता है।” वहीं दूसरे ने कहा, “कम से कम किसी को उनका बैग उठाने में मदद करनी चाहिए थी।” कभी नेशनल क्रेज थे राहुल रॉय 1990 में आई फिल्म ‘आशिकी’ ने राहुल रॉय को रातोंरात स्टार बना दिया था। उस दौर में उनका ऐसा क्रेज था कि उन्होंने 11 दिनों में 47 फिल्में साइन कर ली थीं। उनकी फिल्म महीनों तक सिनेमाघरों में हाउसफुल चली और टिकट ब्लैक में बिकते थे। लेकिन समय के साथ उनका करियर ढलान पर आ गया और बड़े प्रोजेक्ट्स मिलना बंद हो गए। बाद में उन्हें बी और सी ग्रेड फिल्मों में काम करना पड़ा। बिग बॉस जीता, फिर भी नहीं बदली किस्मत राहुल रॉय ने 2007 में ‘बिग बॉस’ का पहला सीजन जीतकर फिर सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन इसका उनके करियर पर खास असर नहीं पड़ा। इसके बाद भी उन्हें इंडस्ट्री में संघर्ष करना पड़ा। बीमारी ने बदली जिंदगी, सलमान ने की मदद कुछ साल पहले राहुल रॉय को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिससे उनकी हालत खराब हो गई थी। उस मुश्किल समय में सलमान खान ने मदद की और इलाज का खर्च उठाया। इतना ही नहीं, उन्होंने राहुल को अपनी फिल्म में काम दिया था। फैंस के दिल में अब भी जिंदा है ‘आशिकी’ का हीरो आज भले ही राहुल रॉय फिल्मों में कम नजर आते हों, लेकिन फैंस के दिलों में उनकी जगह बरकरार है। यही वजह है कि उनका यह साधारण वीडियो भी लोगों को भावुक कर गया और 90 के दशक की यादें ताजा हो गईं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
‘महिला अधिकार बनाम परिसीमन’: विधेयक ढहने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच फिर से खिंची लड़ाई की रेखाएं | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:18 अप्रैल, 2026, 20:06 IST विपक्ष ने मौजूदा 543 सीटों के आधार पर महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग करते हुए प्रधान मंत्री को एक आधिकारिक पत्र लिखने का फैसला किया है। कथा युद्ध का अंतिम विजेता इस बात से तय होगा कि सप्ताह की घटनाओं को कौन बेहतर ढंग से परिभाषित कर सकता है। (फ़ाइल छवि/एक्स) संविधान (131वां संशोधन) विधेयक की हार ने राजनीतिक युद्ध के मैदान को लोकसभा के पटल से हटाकर उच्च स्तर के आख्यानों के युद्ध में बदल दिया है। विपक्ष आश्वस्त है कि भाजपा ने यह जानते हुए भी वोट देने के लिए दबाव डाला कि उसके पास आवश्यक संख्याबल नहीं है, मुख्य रूप से महिलाओं के प्रतिनिधित्व में एकमात्र बाधा के रूप में इंडिया ब्लॉक को दोषी ठहराने के लिए। इसका मुकाबला करने के लिए विपक्ष ने प्रधानमंत्री को एक आधिकारिक पत्र लिखने की रणनीति को अंतिम रूप दिया है, जिसमें मौजूदा 543 सीटों के आधार पर महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग की गई है। विवादास्पद परिसीमन अभ्यास से कोटा को अलग करके, वे भाजपा की आलोचना को कुंद करने और नीति के लिए अपना समर्थन साबित करने की उम्मीद करते हैं। तमिलनाडु में, जहां कड़ा चुनावी मुकाबला है, कांग्रेस और डीएमके परिसीमन मुद्दे को एक उपहार के रूप में देखते हैं। भाजपा द्वारा रणनीतिक गठबंधन बनाने और “विजय फैक्टर” के कारण पारंपरिक बहुमत को बाधित करने की धमकी के साथ, द्रमुक कथित तौर पर दबाव महसूस कर रही थी। हालाँकि, मौजूदा नतीजे उन्हें द्रविड़ गौरव कथा की ओर बढ़ने की अनुमति देते हैं, जिससे भाजपा एक “दक्षिण-विरोधी” ताकत बन जाती है जो अपने खर्च पर सफल राज्यों को विकसित करने का लक्ष्य बना रही है। यह मुख्य संदेश है जिसे राहुल गांधी और एमके स्टालिन जनता तक ले जाना चाहते हैं, शक्ति का एकीकृत प्रदर्शन पेश करने के लिए एक संयुक्त रोड शो की योजना पहले से ही चल रही है। क्षेत्रीय गणित से परे, सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष विपक्षी एकता का अचानक प्रदर्शन रहा है। राहुल गांधी द्वारा ममता बनर्जी पर बंगाल में “भ्रष्ट सिंडिकेट” की अध्यक्षता करने का आरोप लगाने के कुछ ही दिनों बाद, दोनों दल विधेयक को हराने के लिए अपनी गहरी कटुता को दूर करने में कामयाब रहे। मतदान के बाद अपनी पहली रैली में, गांधी ने स्पष्ट किया कि वे विधेयक को “भारत के विचार” और दक्षिण और पूर्वोत्तर के प्रतिनिधित्व पर हमले के रूप में देखते हैं। फिर भी, ब्लॉक की नींव नाजुक बनी हुई है। बंगाल के लिए आक्रामक लड़ाई कवच में कमी दिखाती रहती है। विधायी सौहार्द के एक दिन बाद ही, अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से अधीर रंजन चौधरी पर हमला किया और उन्हें भाजपा की “बी-टीम” करार दिया। जैसा कि प्रधान मंत्री मोदी आज रात 8.30 बजे राष्ट्र को संबोधित करने की तैयारी कर रहे हैं, उम्मीद है कि वह इस गठबंधन को कड़ी चुनौती देंगे। कथा युद्ध का अंतिम विजेता इस बात से तय होगा कि सप्ताह की घटनाओं को कौन बेहतर ढंग से परिभाषित कर सकता है: क्या यह क्षेत्रीय पहचान की ढाल थी या देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात? चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 18 अप्रैल, 2026, 20:06 IST समाचार राजनीति ‘महिला अधिकार बनाम परिसीमन’: विधेयक ढहने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच फिर से खिंची लड़ाई की रेखाएं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें









