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कोलेस्ट्रॉल के मरीज क्या खाएं और क्या न खाएं? डाइटिशियन ने बताया परफेक्ट डाइट प्लान, गलती पड़ेगी महंगी

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Last Updated:April 21, 2026, 08:14 IST High Cholesterol Diet Plan: कोलेस्ट्रॉल की समस्या ज्यादा बढ़ जाए, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचने के लिए कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रखना बहुत जरूरी होता है. डाइटिशियन कामिनी सिन्हा के अनुसार अच्छा खानपान कोलेस्ट्रॉल को नेचुरल तरीके से कम कर सकता है और हार्ट डिजीज से बचा सकता है. कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को फाइबर और हेल्दी फैट से भरपूर फूड्स का सेवन करना चाहिए, जबकि तला-भुना और जंक फूड अवॉइड करना चाहिए. कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को जंक फूड्स से बिल्कुल दूरी बना लेनी चाहिए. Cholesterol Control Diet Plan: मॉडर्न लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खानपान लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है. आजकल तमाम लोग एक ही जगह बैठकर घंटों काम करते रहते हैं और फिजिकल एक्टिविटी बिल्कुल नहीं करते हैं. इसकी वजह से हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है. हाई कोलेस्ट्रॉल को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर में धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं. जब यह हद से ज्यादा बढ़ जाता है, तब लोगों को हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ जाता है. हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए सही खानपान बेहद जरूरी है. कुछ फूड्स कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ाते हैं, जबकि कुछ फूड्स कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाते हैं. अक्सर सवाल उठता है कि कोलेस्ट्रॉल के मरीज क्या खाएं और क्या न खाएं? चलिए इस सवाल का जवाब डाइटिशियन से जान लेते हैं. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की सीनियर डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से धमनियों में फैट जमा होने लगता है. जब यह फैट ज्यादा बढ़ जाता है, तब धमनियों में खून की सप्लाई में रुकावट पैदा कर देता है. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक की नौबत आ जाती है. कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल और हेल्दी खानपान बहुत जरूरी है. लोगों को हेल्दी फूड्स का सेवन करना चाहिए और अनहेल्दी चीजों से परहेज करना चाहिए. अगर खानपान सुधर जाए, तो कोलेस्ट्रॉल की समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है. कोलेस्ट्रॉल के मरीजों के लिए बेस्ट फूड्स डाइटिशियन के मुताबिक कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को फाइबर से भरपूर चीजें जैसे- ओट्स, दलिया, साबुत अनाज, फल और हरी सब्जियां खूब खानी चाहिए. दालें और बीन्स भी डाइट का अहम हिस्सा होनी चाहिए. ये चीजें कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करती हैं. इसके अलावा बादाम, अखरोट, अलसी के बीज और जैतून का तेल जैसे हेल्दी फैट्स भी फायदेमंद होते हैं. ये दिल को स्वस्थ रखते हैं और शरीर में बढ़ने वाले कोलेस्ट्रॉल पर लगाम लगाते हैं. खाना बनाने के लिए सरसों का तेल या ऑलिव ऑयल जैसे हेल्दी फैट का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर आप नॉनवेज खाते हैं, तो फैटी फिश जैसे- सैल्मन और सार्डिन मछली खाएं. कुल मिलाकर फाइबर-युक्त और कम फैट वाला खाना कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है और हार्ट को हेल्दी बनाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कोलेस्ट्रॉल पेशेंट्स इन चीजों से करें परहेज एक्सपर्ट ने बताया कि आजकल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह गलत खानपान है. कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को ज्यादा तला-भुना खाना, फास्ट फूड, बेकरी प्रोडक्ट्स, रेड मीट और ज्यादा शुगर वाली चीजें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए. इनसे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जो दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ा सकता है. खासकर ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट से जितना हो सके दूरी बनानी चाहिए. जंक फूड्स से पूरी तरह दूरी बनाएं. कोल्ड ड्रिंक्स या पैकेज्ड जूस से परहेज करें और संभव हो तो बाहर का खाना बिल्कुल बंद कर दें. अगर आपकी डाइट में सिर्फ हेल्दी फूड्स होंगे, तो कोलेस्ट्रॉल अपने आप कंट्रोल होने लगेगा. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 21, 2026, 08:14 IST

हिमाचल कांग्रेस में ‘काम करो या पद छोड़ो’ पॉलिसी:पदाधिकारियों के काम का मॉनिटरिंग होगी, 3 जोन में मूल्यांकन; रेड जोन वाले पद से हटेंगे

हिमाचल कांग्रेस में ‘काम करो या पद छोड़ो’ पॉलिसी:पदाधिकारियों के काम का मॉनिटरिंग होगी, 3 जोन में मूल्यांकन; रेड जोन वाले पद से हटेंगे

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत और जवाबदेह बनाने के लिए ‘परफॉर्मेंस बेस्ड फ्रेमवर्क’ लागू करने की तैयारी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निर्देशों पर इसके लिए एक ‘मोबाइल ऐप’ तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए ब्लॉक व जिला अध्यक्षों के साथ-साथ राज्य कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों के काम की मॉनिटरिंग की जाएगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने बताया कि पार्टी पदाधिकारियों की परफॉर्मेंस को तीन जोन- ग्रीन, येलो और रेड में बांटा जाएगा। ग्रीन जोन में बेहतरीन काम करने वाले ब्लॉक व जिला अध्यक्ष और राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारी रखे जाएंगे। योजना अनुसार, भविष्य में ऐसे नेताओं को संबंधित चुनाव क्षेत्र से लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा के टिकट दिए जाएंगे। ऐसे नेताओं को संगठन में बड़े पद भी मिलेंगे। काम में सुधार नहीं हुआ तो पदमुक्त यलो जोन में औसत प्रदर्शन करने वाले नेता रखे जाएंगे, जिनसे अपने काम में सुधार की अपेक्षा होगी, जबकि रेड जोन में अच्छा काम नहीं करने वाले जिला व ब्लॉक अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी रखे जाएंगे। ऐसे नेताओं को ‘परफॉर्म करो या पद छोड़ो’ की नीति पर काम करना होगा। रेड जोन वाले नेताओं को एक बार परफॉर्मेंस सुधारने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भी काम में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें पदमुक्त किया जाएगा। HPCC-AICC हर तीन महीने में करेगी मॉनिटरिंग इनके काम का मूल्यांकन हर 3 महीने बाद होगा। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (HPCC) और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) दोनों स्तरों पर जिला व ब्लॉक अध्यक्षों की मॉनिटरिंग होगी। मॉनिटरिंग के लिए मोबाइल ऐप बना रही पार्टी कांग्रेस पार्टी इसके लिए एक मोबाइल ऐप बना रही है। इस ऐप में तीन जोन होंगे। पार्टी पदाधिकारियों द्वारा की जाने वाली हर एक्टिविटी और फोटो इस ऐप पर अपलोड करनी होगी। जिला व ब्लॉक अध्यक्ष इस ऐप के जरिए बताएंगे कि उन्होंने कब-कब और क्या काम किया। इसी आधार पर उनके काम का मूल्यांकन होगा। स्टेट व AICC लेवल पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे राज्य और AICC स्तर पर इनके काम की मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे, जहां से पूरे काम की निगरानी होगी। जिला व ब्लॉक अध्यक्षों के साथ-साथ राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के काम की भी मॉनिटरिंग की जाएगी। इसका मकसद सिर्फ जवाबदेही तय करना ही नहीं, बल्कि अच्छा काम करने वालों को आगे बढ़ाना भी है।

मंगलवार को महाकाल के भस्म आरती दर्शन:ज्योतिर्लिंग का रजत चंद्र त्रिशूल त्रिपुण्ड  ड्रायफ्रूट से राजा स्वरूप शृंगार

मंगलवार को महाकाल के भस्म आरती दर्शन:ज्योतिर्लिंग का रजत चंद्र त्रिशूल त्रिपुण्ड  ड्रायफ्रूट से राजा स्वरूप शृंगार

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के 4 बजे विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट खोले गए। सबसे पहले भगवान महाकाल का हरी-ओम जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से विधि-विधान के साथ पूजन संपन्न हुआ। भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का भव्य राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। नंदी हॉल में नंदी जी का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल गूंजता रहा, जहां झांझ, मंजीरे और डमरू की ध्वनि के साथ भस्म आरती संपन्न हुई। महा निर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्म भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

ट्रम्प के ऐलान से पहले दांव लगाकर करोड़ों कमाए:इनसाइडर ट्रेडिंग का शक गहराया, निवेशकों का भरोसा हिला

ट्रम्प के ऐलान से पहले दांव लगाकर करोड़ों कमाए:इनसाइडर ट्रेडिंग का शक गहराया, निवेशकों का भरोसा हिला

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान एक दिलचस्प और विवादित ट्रेंड देखने को मिला है। कई ट्रेडर्स (शेयर बाजार में दांव लगाने वाले लोग) बड़े ऐलान से ठीक पहले करोड़ों डॉलर के दांव लगाते दिखे हैं। BBC ने अलग-अलग फाइनेंशियल मार्केट के ट्रेड डेटा का विश्लेषण किया और उसे ट्रम्प के बड़े बयानों और घोषणाओं के समय से मिलाया। इसमें एक पैटर्न सामने आया कि कई बार उनके बयान आने से कुछ घंटे या मिनट पहले ही ट्रेडिंग में अचानक तेज उछाल दिखा। कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि यह इनसाइडर ट्रेडिंग का मामला हो सकता है। यानी सूचनाएं पहले ही लीक हो रही थीं, जिससे आम निवेशकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं कुछ दूसरे एक्सपर्ट्स कहते हैं कि मामला इतना सीधा नहीं है। कुछ ट्रेडर्स अब ट्रम्प के फैसलों और बयानों को पहले से भांपने में माहिर हो गए हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने पिछले महीने आरोप लगाया था कि ट्रम्प के करीबी लोगों ने अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर क्रूड ऑयल मार्केट में करोड़ों डॉलर का खेल खेला है। इन 5 उदाहरणों से समझें कैसे कुछ चुनिंदा लोगों ने की कमाई… 28 फरवरी 2026: ईरान पर हमले के बाद 6 नए अकाउंट ब्लॉकचेन विश्लेषण साइट ‘बबलमैप्स’ ने खुलासा किया कि फरवरी में अचानक 6 नए अकाउंट बने। दांव: इन सभी अकाउंट्स ने 28 फरवरी तक ईरान पर अमेरिकी हमला होने के पक्ष में भारी पैसा लगाया। नतीजा: जैसे ही ट्रम्प ने हमले की पुष्टि की, इन अकाउंट्स ने कुल 9.9 करोड़ (12 लाख डॉलर) कमाए। पैटर्न: इनमें से 5 अकाउंट्स ने इसके बाद कभी कोई दांव नहीं लगाया। एक अन्य अकाउंट ने बाद में युद्धविराम की सही भविष्यवाणी करके 1.35 करोड़ रुपए और कमाए। 3 जनवरी 2026: मादुरो पर अनुमान पर अकाउंट बना, कमाई के बाद बंद ऑनलाइन प्रेडिक्शन मार्केट (जैसे पॉलीमार्केट और कलसी) भी संदेह के घेरे में आए। डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर इन मंचों से जुड़े हैं। दिसंबर 2025 में ‘बर्डनसम-मिक्स’ नाम का एक नया अकाउंट बना। 30 दिसंबर से 2 जनवरी के बीच, इस अकाउंट ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पद छोड़ने पर कुल 32,500 डॉलर लगाए। 3 जनवरी को मादुरो को पद से हटा दिया गया। उस अकाउंट ने 4.36 लाख डॉलर (करीब 4 करोड़ रुपए) जीते और तुरंत अपना यूजरनेम बदलकर अनएक्टिव हो गया। इसी वजह से लोगों को शक है कि शायद उसे पहले से अंदर की जानकारी थी। 23 मार्च 2026: 14 मिनट के खेल में 250 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट तेहरान के साथ समस्या हल करने की घोषणा की। पोस्ट के तुरंत बाद शेयर बाजार में उछाल आया और अमेरिकी तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। संदिग्ध गतिविधि: ट्रम्प के पोस्ट से 14 मिनट पहले तेल की कीमतें गिरने पर बड़े दांव लगाए गए थे। इसे ‘शॉर्ट सेलिंग’ कहते हैं, जिसमें ट्रेडर्स ऊंची कीमत पर तेल बेचने का सौदा कर लेते हैं और दाम गिरते ही उसे सस्ते में खरीदकर मुनाफा कमाते हैं। प्रति बैरल 15 डॉलर की गिरावट से उस संदिग्ध समय में किसी को अनुमानित 250 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुनाफा हुआ। टाइमलाइन: 9 मार्च 2026: तेल में 47 मिनट पहले दांव लगा मुनाफा कमाया ईरान युद्ध के 9वें दिन ट्रम्प ने इंटरव्यू में संघर्ष खत्म होने का दावा किया। खबर रात 7:16 बजे सोशल मीडिया पर आई, जिससे तेल की कीमतें 25% गिर गईं। लेकिन संदिग्ध ट्रेडिंग 47 मिनट पहले (6:29 बजे) ही शुरू हो गई थी। ‘शॉर्ट सेलिंग’ के जरिए 4,000 कॉन्ट्रैक्ट्स पर दांव लगाकर कुछ निवेशकों ने करीब 460 करोड़ का भारी मुनाफा कमाया, जो इनसाइडर ट्रेडिंग का संकेत है। टाइमलाइन: 2 अप्रैल 2025: टैरिफ पर 90 दिन की रोक, ट्रेडिंग में 30 गुना तक उछाल ट्रम्प ने वैश्विक आयात पर भारी टैरिफ लगाए, लेकिन एक हफ्ते बाद अचानक चीन को छोड़कर अन्य देशों को 90 दिनों की राहत दे दी। इस ऐलान से बाजार में सुनामी आई और एसएंडपी 500 इंडेक्स 9.5% उछला, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी बढ़त थी। संदिग्ध रूप से शाम 6:00 बजे ट्रेडिंग रफ्तार अचानक 10,000 कॉन्ट्रैक्ट प्रति मिनट पार कर गई। 16.5 करोड़ का दांव लगाकर कुछ ट्रेडर्स ने ‌‌165 करोड़ का मुनाफा कमाया। सांसदों ने इसकी जांच की मांग की। टाइमलाइन: अमेरिका में 93 साल से इनसाइडर ट्रेडिंग गैरकानूनी इनसाइडर ट्रेडिंग इसलिए गैरकानूनी मानी जाती है क्योंकि इसमें कुछ लोगों को ऐसी गोपनीय जानकारी मिल जाती है जो आम निवेशकों को नहीं पता होती। इसी जानकारी के आधार पर वे पहले ही पैसा लगा देते हैं और बाद में बड़ा मुनाफा कमा लेते हैं। इससे बाजार में बराबरी खत्म हो जाती है और आम लोगों का भरोसा टूटता है। अमेरिका में 1933 से इनसाइडर ट्रेडिंग गैरकानूनी है। 2012 में नियम और सख्त किए गए और सरकारी अधिकारी, सांसद और उनके स्टाफ भी इस कानून के दायरे में आ गए। यानी अगर किसी नेता या सरकारी व्यक्ति को अंदर की जानकारी मिलती है, तो वह उसका इस्तेमाल करके ट्रेड नहीं कर सकता। लेकिन असली समस्या यह है कि ऐसे मामलों में सजा दिलाना बहुत मुश्किल होता है। कानून के तहत यह साबित करना जरूरी होता है कि जानकारी सच में गोपनीय थी, उसे जानबूझकर लीक किया गया था, और जिसने ट्रेड किया उसे वही अंदर की जानकारी मिली थी। अगर यह पूरी कड़ी साबित नहीं होती, तो केस आगे नहीं बढ़ता। इएसएसईसी बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर पॉल ओडिन का कहना है कि कई बार ट्रेडिंग का पैटर्न देखकर साफ लगता है कि किसी को पहले से जानकारी थी, जैसे बड़े ऐलान से ठीक पहले अचानक भारी दांव लगना। लेकिन जब तक यह पता न चले कि जानकारी कहां से आई और किसने दी, तब तक कानूनी कार्रवाई करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

MP में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%:प्रशासन में भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे

MP में 31% महिला कलेक्टर, दक्षिणी राज्यों में 39%:प्रशासन में भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे

देश में महिलाओं को 33% आरक्षण का कानून लागू होने का इंतजार है। हालांकि, प्रशासनिक ढांचे में महिलाओं की भूमिका की बात करें तो यहां भी महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारियां देने में राज्य पीछे हैं। दक्षिण भारत के कई राज्यों में महिला कलेक्टरों की हिस्सेदारी 35 से 39% तक पहुंच चुकी है, जबकि हिंदी पट्टी में मध्यप्रदेश 31% के साथ सबसे आगे है। छोटा राज्य होने के बावजूद सिक्किम में भी यह आंकड़ा 33% तक है। वहीं हिंदी पट्टी में तस्वीर अपेक्षाकृत कमजोर है। मध्यप्रदेश 55 जिलों में 17 महिला कलेक्टरों (करीब 31%) के साथ इस क्षेत्र में सबसे आगे है। यह हिंदी पट्टी का इकलौता बड़ा राज्य है, जहां आंकड़ा 30% के पार है। ओडिशा (3%) और तेलंगाना (39%) के बीच करीब 10 गुना का अंतर है। महिला कलेक्टरों में यूपी-झारखंड पीछे तेलंगाना 39% तमिलनाडु 38% केरल 36% आंध्र प्रदेश 35% सिक्किम 33% कर्नाटक 32% मध्यप्रदेश 31% मेघालय 27% मिजोरम 27% प.बंगाल 26% बिहार 18% उत्तर प्रदेश 16% हरियाणा 18% गुजरात 18% झारखंड 16% ओडिशा 8% ——————————— ये खबर भी पढ़ें… संजय कुमार का कॉलम:महिला आरक्षण पर निर्मित शंकाओं का समाधान जरूरी यह तो स्पष्ट ही है कि महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर भले कुछ आशंकाएं, शर्तें और चिंताएं हों, लेकिन विपक्ष की ओर से सुनाई देने वाली तीखी आवाजें महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन विधेयक को लेकर हैं। पूरी खबर पढ़ें…

छोटा फल बड़ा कमाल! फल, पत्ते और छाल सब में है औषधीय गुण, फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

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Last Updated:April 21, 2026, 07:27 IST Lasoda Benefits: लसौड़ा एक पारंपरिक और औषधीय गुणों से भरपूर फल है, जिसका उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से होता आ रहा है. आयुर्वेदिक चिकित्सकों के अनुसार इसके फल, पत्ते और छाल सभी औषधि के रूप में काम आते हैं. यह खांसी, दमा, बुखार और त्वचा रोगों में लाभकारी माना जाता है. साथ ही जोड़ों के दर्द और सूजन में भी राहत देता है. अब आधुनिक समय में लोग इसे सेहत के लिए फायदेमंद मानकर अपने आहार में शामिल कर रहे हैं. ख़बरें फटाफट जालौर. गर्मियों के मौसम में जहां लोग ठंडक और सेहत की तलाश में रहते हैं, वहीं एक देसी फल इन दिनों खास चर्चा में है लसौड़ा, जिसे गुंदा या निसोरी के नाम से भी जाना जाता है. आकार में छोटा दिखने वाला यह फल सेहत के लिहाज से किसी खजाने से कम नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसका उपयोग वर्षों से होता आ रहा है, लेकिन अब इसके औषधीय गुण भी लोगों का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींच रहे हैं. जालोर और आस-पास के गांवों में लसौड़ा एक पारंपरिक आहार का हिस्सा रहा है. खासतौर पर इसका अचार काफी प्रसिद्ध है, जो लंबे समय तक खराब नहीं होता और स्वाद में भी बेहद लाजवाब होता है. इसके अलावा लोग इसे साग, चूरन और सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. पहले इसे सिर्फ स्वाद के लिए खाया जाता था, लेकिन अब इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है. फाइबर, कैल्शियम और आयरन से भरपूर है लसौड़ा पोषण की दृष्टि से देखा जाए तो लसौड़ा में फाइबर, कैल्शियम, आयरन और फॉस्फोरस जैसे कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं. ये तत्व न केवल शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं. यही कारण है कि आज के समय में इसे देसी सुपरफूड के रूप में पहचान मिल रही है. आयुर्वेद में लसौड़ा को एक महत्वपूर्ण औषधीय फल माना गया है. यह खांसी, दमा, बुखार और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में राहत पहुंचाने के लिए जाना जाता है. इसके नियमित सेवन से शरीर में ठंडक बनी रहती है, जिससे गर्मी के दुष्प्रभाव भी कम होते हैं. खास बात यह है कि यह जोड़ों के दर्द और सूजन जैसी समस्याओं में भी कारगर साबित होता है. लसौड़ा के सेवन से पाचन तंत्र होता है मजबूत आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. श्रीराम वैध ने लोकल 18 को बताया कि लसौड़ा एक बेहद उपयोगी औषधीय फल है. इसके सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है. उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को जोड़ों में दर्द या सूजन की समस्या है, तो लसौड़ा के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर उसका उपयोग किया जा सकता है. इस काढ़े में कपूर मिलाकर प्रभावित स्थान पर मालिश करने से दर्द में काफी राहत मिलती है. इसके अलावा छाल को पीसकर लेप के रूप में लगाने से भी सूजन कम होती है. लसौड़ा के पेड़ का हर हिस्सा है उपयोगी आयुर्वेदिक चिकित्सक के अनुसार, लसौड़ा के पेड़ का हर हिस्सा उपयोगी है. इसके पत्ते, बीज और छाल तक औषधि के रूप में काम आते हैं. स्किन एलर्जी, दाद-खाज और खुजली जैसी समस्याओं में भी यह काफी असरदार माना जाता है. लसौड़ा के पेड़ का हर हिस्सा उपयोगी है. इसके पत्ते, बीज और छाल तक औषधि के रूप में काम आते हैं.  स्किन एलर्जी, दाद-खाज और खुजली जैसी समस्याओं में भी यह काफी असरदार माना जाता है. About the Author deep ranjan दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Jalor,Rajasthan First Published : April 21, 2026, 07:27 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

Nora Fatehi Rocks Ludhiana Socialite Sons Cocktail Party

Nora Fatehi Rocks Ludhiana Socialite Sons Cocktail Party

नोरा फतेही में पार्टी में अपने डांस मूव्स से समां बांधा। लुधियाना के पॉश इलाके फिरोजपुर रोड स्थित महाराजा मेंशन में सोमवार की रात बॉलीवुड की डांसिंग क्वीन नोरा फतेही के नाम रही। मौका था शहर के एक नामी समाजसेवी के बेटे के कॉकटेल फंक्शन का, जहां नोरा फतेही ने अपनी कातिलाना अदाओं और डांस मूव्स से समां बांध दि . नोरा को अपने बीच पाकर मेहमानों का उत्साह सातवें आसमान पर था। लोग उनके साथ सेल्फी लेने के लिए बेकाबू हो रहे थे। उन्होंने न केवल नोरा के साथ डांस किया, बल्कि नोरा पर फिल्माए ‘ओ साकी साकी’ और ‘ओह मामा तेतेमा’ जैसे गाने गाए भी। इस दौरान नोरा ने इन गानों पर जमकर ठुमके लगाए। पार्टी में नोरा के डांस के PHOTOS… नोरा फतेही ने कॉकटेल पार्टी में डांस किया। नोरा ने अपने कई गानों पर ठुमके लगाकर लोगों का दिल जीता। नोरा का डांस देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। नोरा ने साकी साकी, ओह मामा तेतेमा जैसे गानों पर अपने डांस मूव्स दिखाए। 700 मेहमानों के बीच आकर्षण का केंद्र बनीं नोरा इस ग्रैंड सेलिब्रेशन में शहर की करीब 700 नामी हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत सिंगर सहर भाटिया की सुरीली आवाज के साथ हुई, जिन्होंने अपनी गायिकी से माहौल बनाया। हालांकि, जैसे ही नोरा फतेही ने स्टेज पर एंट्री ली, पूरा हॉल तालियों और शोर से गूंज उठा। नोरा ने अपने सिग्नेचर स्टेप्स और मनमोहक स्टेज प्रेजेंस से हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया। नोरा फतेही के साथ मेजबान और मेहमान सभी नाचे। सेल्फी की मची होड़, सुरक्षा घेरे में रहीं एक्ट्रेस नोरा की परफॉर्मेंस के दौरान वहां मौजूद मेहमान और बच्चे उनके साथ सेल्फी लेने के लिए बेताब दिखे। हर कोई इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करना चाहता था। हालांकि, सुरक्षा कारणों और टाइट शेड्यूल की वजह से नोरा ने केवल अपनी तय परफॉर्मेंस दी और उसके तुरंत बाद वे वहां से रवाना हो गईं। नोरा ने मेहमानों को अपने साथ गाने और नाचने के लिए कहा। नोरा की हर मूव को मेहमान मोबाइल के कैमरे में कैद करते दिखे। लाडू ने मेजबानी से जीता दिल शहर के सामाजिक हलकों में बेहद लोकप्रिय और प्यार से लाडू के नाम से जाने जाने वाले समाजसेवी ने इस शानदार जश्न का आयोजन किया था। अपने करीबी दोस्तों और परिवार के लिए रखी गई इस कॉकटेल पार्टी की चर्चा अब पूरे लुधियाना में हो रही है। आयोजन में खान-पान से लेकर सजावट तक, हर चीज में रॉयल टच नजर आया। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… सोनम बाजवा की पंजाबी सिंगर से मजाकिया नोकझोंक:चंडीगढ़ में IPL मैच के दौरान मिले; एक्ट्रेस बोलीं- मैं तुहाडे नाल गल्ल नहीं करनी न्यू चंडीगढ़ के महाराजा यादविंदर सिंह स्टेडियम में रविवार को पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपरजाइंट्स के बीच खेले गए IPL मुकाबले को देखने एक्ट्रेस सोनम बाजवा और पंजाबी सिंगर जी खान भी पहुंचे। इस दौरान दोनों की मुलाकात हुई, जिसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पढ़ें पूरी खबर…

Tim Cook Steps Down as Apple CEO in 2026; John Ternus to Lead

Tim Cook Steps Down as Apple CEO in 2026; John Ternus to Lead

कैलिफोर्निया2 मिनट पहले कॉपी लिंक टेक कंपनी एपल के CEO टिम कुक ने इस्तीफा दे दिया है। जॉन टर्नस कंपनी के नए CEO होंगे। वे 1 सितंबर 2026 से अपना पद संभालेंगे। कुक अब कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। बोर्ड ने सर्वसम्मति से इस योजना को मंजूरी दे दी है। टिम कुक: एपल को 4 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बनाया टिम कुक 1998 में एपल से जुड़े थे और 2011 में CEO बने थे। उनके नेतृत्व में एपल की मार्केट वैल्यू 350 बिलियन डॉलर (करीब 32 लाख करोड़ रुपए) से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 350 लाख करोड़ रुपए) हो गई है। कंपनी का सालाना रेवेन्यू भी 2011 के 108 बिलियन डॉलर (करीब 10 लाख करोड़ रुपए) से बढ़कर 2025 में 416 बिलियन डॉलर (39 लाख करोड़ रुपए) के पार पहुंच गया है। 5 बड़े प्रोडक्ट्स और सर्विसेज जिन्हें कुक के दौर में लॉन्च किया गया एपल वॉच एयरपॉड्स विज़न प्रो एयरटैग एपल म्यूजिक टिम कुक 1998 में एपल से जुड़े थे और 2011 में CEO बने थे। जॉन टर्नस: 25 साल का अनुभव और स्टीव जॉब्स के साथ काम जॉन टर्नस वर्तमान में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं। वे 2001 में एपल की प्रोडक्ट डिजाइन टीम में शामिल हुए थे। टर्नस ने अपने करियर का लगभग पूरा हिस्सा एपल में बिताया है और वे स्टीव जॉब्स के साथ भी काम कर चुके हैं। कुक ने उन्हें ‘एक इंजीनियर का दिमाग और एक इनोवेटर की आत्मा’ वाला विजनरी लीडर बताया है। उपलब्धियां: आईपैड, एयरपॉड्स और मैकबुक नियो में अहम भूमिका टर्नस ने आईफोन, मैक और एपल वॉच की कई पीढ़ियों के हार्डवेयर इंजीनियरिंग का नेतृत्व किया है। उनके कार्यकाल में आईपैड और एयरपॉड्स जैसी नई लाइनें शुरू हुईं। हाल ही में उन्होंने ‘मैकबुक नियो’ लैपटॉप और आईफोन 17 सीरीज (प्रो, मैक्स और थिन आईफोन एयर) को पेश करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एयरपॉड्स को ‘हियरिंग हेल्थ सिस्टम’ में बदलने पर भी काम किया है। जॉन टर्नस के सामने ये बड़ी चुनौतियां होंगी: गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के मुकाबले एपल का AI काफी पीछे है। टर्नस को इसे बेहतर बनाकर रेस में वापसी करनी होगी। अमेरिका और यूरोप में एपल के बिजनेस मॉडल पर सवाल उठ रहे हैं। उन पर एकाधिकार नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं। इसने कंपनी को बचाना होगा। ट्रम्प सरकार के चीन के साथ विवाद के बीच, मैन्युफैक्चरिंग को भारत और वियतनाम जैसे देशों में सही तरह से शिफ्ट करने जैसी चुनौतियों से निपटना होगा। आलोचकों का कहना है कि एपल में अब पहले जैसा नयापन नहीं रहा। टर्नस को साबित करना होगा कि कंपनी आज भी दुनिया की सबसे इनोवेटिव कंपनी है। जॉन टर्नस वर्तमान में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं। वे 2001 में एपल की प्रोडक्ट डिजाइन टीम में शामिल हुए थे। अगले 4 महीने तक साथ काम करेंगे कुक और टर्नस टिम कुक इस साल अक्टूबर के आखिर तक CEO के रूप में काम जारी रखेंगे ताकि टर्नस के साथ स्मूथ ट्रांजिशन सुनिश्चित हो सके। एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनने के बाद कुक ग्लोबल पॉलिसी मेकर्स के साथ जुड़ने और कंपनी के खास पहलुओं पर ध्यान देंगे। कुक ने कहा कि एपल के CEO के रूप में काम करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। बोर्ड में अन्य बदलाव: आर्थर लेविंसन बनेंगे लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर पिछले 15 वर्षों से एपल के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रहे आर्थर लेविंसन 1 सितंबर 2026 से लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की भूमिका में होंगे। इसी दिन जॉन टर्नस भी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हो जाएंगे। लेविंसन ने कहा कि टर्नस का गहरा तकनीकी ज्ञान और बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाने का फोकस एपल को शानदार भविष्य की ओर ले जाएगा। एनवायरनमेंट और प्राइवेसी पर फोकस कुक के नेतृत्व में एपल ने अपना कार्बन फुटप्रिंट 60% तक कम किया है। टर्नस ने भी सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान देते हुए रीसायकल एल्युमीनियम और 3D प्रिंटेड टाइटेनियम (एपल वॉच अल्ट्रा 3) का इस्तेमाल शुरू कराया। साथ ही, उन्होंने प्रोडक्ट्स की मजबूती (ड्यूरेबिलिटी) और रिपेयरेबिलिटी बढ़ाने वाली तकनीकों को बढ़ावा दिया है। एपल से जुड़े 3 जरूरी आंकड़े 200+ देश: एपल अब दुनिया के 200 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में काम कर रही है। 500+ स्टोर्स: दुनिया भर में एपल के 500 से ज्यादा रिटेल स्टोर्स हैं। 2.5 बिलियन डिवाइस: वर्तमान में दुनिया भर में 2.5 बिलियन से ज्यादा एपल डिवाइस एक्टिव हैं। नॉलेज पार्ट: क्या होता है एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर? एग्जीक्यूटिव चेयरमैन: यह बोर्ड का वह प्रमुख होता है जो कंपनी के रोजाना के कामकाज और स्ट्रैटेजी में सक्रिय रूप से शामिल रहता है, जबकि CEO ऑपरेशन्स संभालता है। लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर: इनका काम बोर्ड और मैनेजमेंट के बीच संतुलन बनाए रखना और स्वतंत्र निदेशकों का नेतृत्व करना होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Tim Cook Steps Down as Apple CEO in 2026; John Ternus to Lead

Tim Cook Steps Down as Apple CEO in 2026; John Ternus to Lead

कैलिफोर्निया53 मिनट पहले कॉपी लिंक टिम कुक की जगह अब जॉन टर्नस एपल के नए CEO होंगे। वे 1 सितंबर 2026 से कंपनी की कमान संभालेंगे। कुक अब कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। बोर्ड ने सर्वसम्मति से इस योजना को मंजूरी दे दी है। टिम कुक: एपल को 4 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बनाया टिम कुक 1998 में एपल से जुड़े थे और 2011 में CEO बने थे। उनके नेतृत्व में एपल की मार्केट वैल्यू 350 बिलियन डॉलर (करीब ₹32 लाख करोड़) से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹350 लाख करोड़) हो गई है। कंपनी का सालाना रेवेन्यू भी 108 बिलियन डॉलर (करीब ₹10 लाख करोड़) से बढ़कर 2025 में 416 बिलियन डॉलर (₹39 लाख करोड़) के पार पहुंच गया है। 5 बड़े प्रोडक्ट्स और सर्विसेज जिन्हें कुक के दौर में लॉन्च किया गया एपल वॉच एयरपॉड्स विज़न प्रो एयरटैग एपल म्यूजिक टिम कुक 1998 में एपल से जुड़े थे और 2011 में CEO बने थे। जॉन टर्नस: 25 साल का अनुभव और स्टीव जॉब्स के साथ काम जॉन टर्नस ने साल 2001 में इस टेक कंपनी को जॉइन किया था। वे तब प्रोडक्ट डिजाइन टीम का हिस्सा थे। वे कंपनी के फाउंडर स्टीव जॉब्स के साथ भी काम कर चुके हैं। एपल से पहले उन्होंने ‘वर्चुअल रिसर्च सिस्टम्स’ में एक मैकेनिकल इंजीनियर के तौर पर काम किया था। टर्नस 2013 में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के वाइस प्रेसिडेंट बने और फिर 2021 में उन्हें सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बना दिया गया। इन सालों के दौरान टर्नस ने आईपैड, एयरपॉड्स, आईफोन, एपल वॉच और हाल ही में लॉन्च हुए मैकबुक नियो जैसे बड़े डिवाइसेज पर काम किया। 51 साल के टर्नस लगभग उसी उम्र के हैं, जिस उम्र में टिम कुक ने एप्पल के सीईओ की कमान संभाली थी। टर्नस के पास यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है। टर्नस ने कहा, एपल के मिशन को आगे ले जाने का यह मौका मिलने पर मैं बहुत आभारी हूं। मैंने अपना लगभग पूरा करियर एप्पल में ही बिताया है, और मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे स्टीव जॉब्स के मार्गदर्शन में काम करने और टिम कुक को अपना मेंटर बनाने का मौका मिला।” टिम कुक ने कहा, “जॉन टर्नस के पास एक इंजीनियर का दिमाग, एक आविष्कारक की आत्मा और ईमानदारी के साथ नेतृत्व करने वाला दिल है। वे एक विजनरी लीडर हैं जिनका पिछले 25 सालों में एपल के लिए योगदान इतना बड़ा है कि उसे गिना नहीं जा सकता।” जॉन टर्नस के सामने ये बड़ी चुनौतियां होंगी: गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के मुकाबले एपल का AI काफी पीछे है। टर्नस को इसे बेहतर बनाकर रेस में वापसी करनी होगी। अमेरिका और यूरोप में एपल के बिजनेस मॉडल पर सवाल उठ रहे हैं। उन पर एकाधिकार नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं। इसने कंपनी को बचाना होगा। ट्रम्प सरकार के चीन के साथ विवाद के बीच, मैन्युफैक्चरिंग को भारत और वियतनाम जैसे देशों में सही तरह से शिफ्ट करने जैसी चुनौतियों से निपटना होगा। आलोचकों का कहना है कि एपल में अब पहले जैसा नयापन नहीं रहा। टर्नस को साबित करना होगा कि कंपनी आज भी दुनिया की सबसे इनोवेटिव कंपनी है। जॉन टर्नस वर्तमान में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं। वे 2001 में एपल की प्रोडक्ट डिजाइन टीम में शामिल हुए थे। अगले 4 महीने तक साथ काम करेंगे कुक और टर्नस टिम कुक इस साल अगस्त के आखिर तक CEO के रूप में काम जारी रखेंगे ताकि टर्नस के साथ स्मूथ ट्रांजिशन सुनिश्चित हो सके। एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनने के बाद कुक ग्लोबल पॉलिसी मेकर्स के साथ जुड़ने और कंपनी के खास पहलुओं पर ध्यान देंगे। कुक ने कहा कि एपल के CEO के रूप में काम करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य रहा है। बोर्ड में अन्य बदलाव: आर्थर लेविंसन बनेंगे लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर पिछले 15 वर्षों से एपल के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रहे आर्थर लेविंसन 1 सितंबर 2026 से लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की भूमिका में होंगे। इसी दिन जॉन टर्नस भी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हो जाएंगे। लेविंसन ने कहा कि टर्नस का गहरा तकनीकी ज्ञान और बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाने का फोकस एपल को शानदार भविष्य की ओर ले जाएगा। एनवायरनमेंट और प्राइवेसी पर फोकस कुक के नेतृत्व में एपल ने अपना कार्बन फुटप्रिंट 60% तक कम किया है। टर्नस ने भी सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान देते हुए रीसायकल एल्युमीनियम और 3D प्रिंटेड टाइटेनियम (एपल वॉच अल्ट्रा 3) का इस्तेमाल शुरू कराया। साथ ही, उन्होंने प्रोडक्ट्स की मजबूती (ड्यूरेबिलिटी) और रिपेयरेबिलिटी बढ़ाने वाली तकनीकों को बढ़ावा दिया है। एपल के 50 साल के सफर में अब तक 7 सीईओ रह चुके माइकल स्कॉट (1977–1981): एपल से पहले वे नेशनल सेमीकंडक्टर में मैन्युफैक्चरिंग डायरेक्टर थे। यह कैलिफोर्निया की एक कंपनी थी जो पावर मैनेजमेंट सर्किट बनाती थी। माइक मार्ककुला (1981–1983): ये एपल कंप्यूटर के पहले इन्वेस्टर और चेयरमैन थे। जॉन स्कली (1983–1993): एपल में आने से पहले वे पेप्सिको के प्रेसिडेंट थे। माइकल स्पिंडलर (1993–1996): सीईओ बनने से पहले वे एपल इंटरनेशनल के प्रेसिडेंट थे। गिल एमेलियो (1996–1997): एपल से पहले वे नेशनल सेमीकंडक्टर में सीईओ थे। स्टीव जॉब्स (1997–2011): इन्होंने 1976 में स्टीव वोज्नियाक और रोनाल्ड वेन के साथ मिलकर एपल कंप्यूटर की शुरुआत की थी। टिम कुक (2011–2026): इन्होंने 1998 में एपल जॉइन किया था। सीईओ बनने से पहले वे कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) थे। एपल से जुड़े 3 जरूरी आंकड़े एपल अब दुनिया के 200 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में काम कर रही है। दुनिया भर में एपल के 500 से ज्यादा रिटेल स्टोर्स हैं। वर्तमान में दुनिया भर में 2.5 बिलियन से ज्यादा एपल डिवाइस एक्टिव हैं। अप्रैल 2023 में मुंबई में भारत के पहले एपल रिटेल स्टोर के उद्घाटन के दौरान एपल फैन साजिद मोइनुद्दीन के पास ‘मैकिन्टोश SE’ कंप्यूटर देखकर कुक कुछ इस तरह रिएक्ट करते नजर आए। नॉलेज पार्ट: क्या होता है एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर? एग्जीक्यूटिव चेयरमैन: यह बोर्ड का वह प्रमुख होता है जो कंपनी के रोजाना के कामकाज और स्ट्रैटेजी में सक्रिय रूप से शामिल रहता है, जबकि CEO ऑपरेशन्स संभालता है। लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर: इनका काम बोर्ड और मैनेजमेंट के बीच संतुलन बनाए रखना और स्वतंत्र

TMC Election Firm I-PAC Under ED Scanner

TMC Election Firm I-PAC Under ED Scanner

15 मिनट पहलेलेखक: प्रदीप पांडेय कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से 3 दिन पहले नया ‘खेला’ शुरू हो गया है। यहां तृणमूल कांग्रेस और सीएम ममता बनर्जी का चुनावी कैंपेन संभाल रही फर्म ‘आई-पैक’ का कोलकाता के विधाननगर स्थित दफ्तर दो दिन से बंद है। सूत्रों के अनुसार इसके एचआर ने 1300 कर्मियों को काम पर न आने का लेटर भेजा है। दरअसल, तृणमूल की बूथ लेवल की गतिविधि से लेकर नेताओं की सभाएं, रैलियां, सब कुछ तय करने में आईपैक अहम भूमिका निभा रही है। बंगाल में पार्टी के मौजूदा करीब 33% विधायकों के टिकट काटने के फैसले के पीछे भी इसी का सर्वे आधार था। इसने बंगाल के 93 हजार पोलिंग बूथों के लिए एक लाख शैडो एजेंट्स तैयार किए थे। तृणमूल भले ही इसके बंद होने की खबरों को खारिज कर रही है, लेकिन मतदान से ठीक पहले संगठन और कार्यकर्ता असमंजस में आ गए हैं। हालांकि भास्कर के सवाल पर पार्टी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा- हम संसद में दूसरी बड़ी विपक्षी पार्टी हैं। 5 एजेंसियों के साथ काम कर रहे हैं। सभी ठीक हैं। पार्टी के एक अन्य नेता ने बताया कि टीएमसी संगठन 4 स्तर पर काम कर रहा है। ऐसे समझें… तृणमूल के लिए आईपैक इतनी जरूरी क्यों 2021 के चुनाव में ममता के लिए आईपैक ने रणनीति बनाई। उन्होंने फर्म को संगठन का काम दिया। प्रत्याशी चयन, बूथ लेवल मैनेजमेंट, भाषण, सोशल पोस्ट, पोस्टर, नारे सब कुछ आईपैक ही कर रही थी। इस चुनाव में टीएमसी डेटा पर फोकस कर रही है। 2021 विस और 2024 लोकसभा चुनाव के बूथ स्तरीय आंकड़ों का विश्लेषण आईपैक ने ही किया। हर सीट को 3 कैटेगरी में बांटा। मजबूत, कमजोर और लो वोट मार्जिन। 15 हजार तक मार्जिन की सीटें चुनीं। टीम एसआईआर को भी ट्रैक कर रही है। पार्टी का मानना है कि वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटने से गणित बिगड़ सकता है, इसलिए शैडो एजेंट्स लाए गए। ये एजेंट्स नाम कटने वाले वोटरों तक पहुंचे। उनसे फार्म भरवाए, री-एंट्री करवाई। बीएलओ को ट्रैक करना, वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पकड़ना, फील्ड से रियल टाइम इनपुट देना, ये काम शैडो एजेंट्स ही कर रहे थे। हर सीट पर अलग वॉर रूम है, जहां 20 सदस्यीय टीम काम करती है। छोटी बैठकें अरेंज करती है। टीएमसी की हाईकोर्ट में याचिका इस बीच, टीएमसी ने आशंका जताई है कि उसके 800 नेताओं, कार्यकर्ताओं को केंद्रीय सुरक्षा बल एहतियातन गिरफ्तार कर सकते हैं। इसे लेकर पार्टी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर तुरंत सुनवाई की मांग की है। पार्टी को यह भी आशंका है कि केंद्रीय बल राज्य के पुलिस थानों को कब्जे में ले सकते हैं। 23 अप्रैल को राज्य में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर वोटिंग होनी है। चुनाव प्रचार 21 को खत्म हो जाएगा। —————————————– ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु में ₹1,200 करोड़+ के कैश-गोल्ड और फ्रीबीज जब्त:PM मोदी पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप, चुनाव आयोग को 700 नागरिकों ने लेटर लिखा तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में 1,200 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी, सोना-चांदी, फ्रीबीज, शराब और ड्रग्स जब्त किए हैं। इसमें ₹169.85 करोड़ कैश, ₹650.87 करोड़ के सोना-चांदी शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔