Hospital Costs Out-of-Pocket | Health Insurance India 2026

नई दिल्ली36 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रतीकात्मक फोटो। देश में हाल के वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज तेजी से बढ़ा है। सरकार का दावा है कि यह बीमा सुरक्षा देश की करीब आधी आबादी तक पहुंच चुकी है। लेकिन इलाज का बोझ आम परिवारों की जेब पर अब भी भारी पड़ रहा है। एनएसएस हेल्थ सर्वे 2025 के मुताबिक, देश में एक अस्पताल में भर्ती होने पर अब भी औसतन 34,064 रुपए जेब से खर्च करने पड़ते हैं। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक हाल के वर्षों में बीमारी रिपोर्ट करने वाले दोगुने हो गए हैं। 2017-18 में 15 दिनों के भीतर 7.5% लोग बीमार पड़ते थे। 2025 में यह संख्या 13.1% हो गई। यह बढ़ोतरी सिर्फ ज्यादा बीमारियों का नहीं, बल्कि बढ़ती जागरूकता, बढ़ती पहुंच और डायबिटीज-हाइपरटेंशन जैसी गैर-संक्रामक बीमारियां बढ़ने का भी संकेत है। प्रतीकात्मक फोटो। निजी अस्पतालों में औसत खर्च 8 गुना तक ज्यादा सरकारी अस्पतालों में जेब से औसत खर्च ₹~6,631 है। आधे मामलों में ₹~1,100 या उससे भी कम है। निजी अस्पतालों में यही औसत ₹~50,508 है। करीब आठ गुना का अंतर है। प्रसव के मामले में भी सरकारी अस्पताल में औसत खर्च ~₹2,299, जबकि सभी अस्पतालों में ~14,775 है। निजी अस्पतालों में प्रति इलाज औसत खर्च ₹50,508 अस्पताल औसत मीडियन सरकारी ₹6,631 ₹1,100 चैरिटी, ट्रस्ट, NGO ₹39,530 ₹10,000 प्राइवेट ₹50,508 ₹24,000 सभी ₹34,064 ₹11,285 नोट: मीडियन मतलब आधे मामलों में औसत खर्च, स्रोत: एनएसएस हेल्थ सर्वे 2025 47% से ग्रामीण, 44% शहरी को हेल्थ कवर स्वास्थ्य बीमा के मोर्चे पर काफी कामयाबी मिली है। ग्रामीण कवरेज 2017-18 के 14.1% से बढ़कर 2025 में 47.4% और शहरी कवरेज 19.1% से बढ़कर 44.3% पहुंच गया। ग्रामीण इलाकों में 45.5% और शहरी क्षेत्रों में 31.8% लोग सरकारी बीमा से कवर हैं। इसके बावजूद बीमा होने का मतलब पूरी आर्थिक सुरक्षा नहीं है, क्योंकि दवाएं, जांच और फॉलो-अप खर्च अक्सर जेब से ही भरने पड़ते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
TCS Nashik Sexual Harassment Accused Nida Khan Missing

नासिक24 मिनट पहले कॉपी लिंक मुंबई के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में यौन उत्पीड़न मामले में कंपनी की प्रोसेस एसोसिएट आरोपी निदा खान अब तक फरार है। पुलिस ने दावा किया है कि वह जबरन धर्मांतरण में शामिल थी। सेशंस कोर्ट से गिरफ्तारी पर अंतरिम सुरक्षा नहीं मिलने के बाद पुलिस ने कहा है कि निदा खान की तलाश जारी है। उसने दो महीने की प्रेग्नेंसी का हवाला देकर अग्रिम जमानत के लिए नासिक सेशंस कोर्ट में अर्जी दी थी, लेकिन कोर्ट ने सोमवार को उसे 27 अप्रैल तक राहत देने से इनकार कर दिया था। अब अदालत 27 अप्रैल को अग्रिम जमानत याचिका और अंतरिम राहत याचिका दोनों पर सुनवाई करेगी। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि कंपनी की ज्यादातर पीड़िताएं मिडिल क्लास परिवारों से हैं। उनकी उम्र 21 से 30 साल के बीच है। वे एसोसिएट लेवल पर काम करती थीं और 20 हजार रुपए महीना सैलरी पाती थीं। पीड़ित इंजीनियर बोली- गुड़ी पड़वा के दौरान छेड़छाड़ हुई पीड़ित महिला इंजीनियर ने 5 आरोपियों पर जून 2025 से मार्च 2026 के बीच लगातार यौन उत्पीड़न, पीछा करने (स्टॉकिंग) और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि एक आरोपी ने हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी की। महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसका टीम लीडर ट्रेनिंग के बहाने उसे गलत तरीके से छूता था। वहीं, एक अन्य आरोपी ने ऑफिस की पेंट्री में गुड़ी पड़वा के दौरान उसके साथ छेड़छाड़ की। पीड़ित ने यह भी कहा कि उसकी शादीशुदा जिंदगी को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। पीड़ित का दावा- आरोपी सोशल मीडिया पर भी परेशान करते थे पीड़ित के मुताबिक, उत्पीड़न सिर्फ ऑफिस तक सीमित नहीं था, बल्कि आरोपी सोशल मीडिया पर भी उसका पीछा कर रहे थे और परेशान कर रहे थे। उसने कई बार आरोपियों को ब्लॉक करने की कोशिश की, लेकिन स्टॉकिंग नहीं रुकी, जिसके बाद उसे कानूनी मदद लेनी पड़ी। TCS ने इस मामले पर कहा है कि कंपनी लंबे समय से किसी भी तरह के उत्पीड़न और दबाव के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाती है। नासिक ऑफिस में यौन उत्पीड़न के आरोपों में शामिल कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। कंपनी ने यह भी कहा कि शुरुआती जांच में उसे अपने एथिक्स या POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) चैनलों पर किसी महिला कर्मचारी की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली थी। साथ ही, कंपनी ने आंतरिक जांच के लिए एक ओवरसाइट पैनल बनाने और बाहरी एजेंसियों को शामिल करने की घोषणा की है। —————– ये खबर भी पढ़ें… नासिक TCS में यौन शोषण-धर्मांतरण केस के पीछे संगठित नेटवर्क:आर्थिक रूप से कमजोर नई कर्मचारियों को टारगेट करते थे महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS कंपनी ऑफिस में धर्म परिवर्तन, यौन शोषण केस की पुलिस जांच में सामने आया है कि एक संगठित नेटवर्क नए कर्मचारियों को निशाना बनाता था। इस केस में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
भोपाल की गैस एजेंसी में गड़बड़ी, FIR की तैयारी:खाद्य विभाग ने एडीएम को सौंपी रिपोर्ट; एक एजेंसी रिटायर्ड अफसर की

भोपाल के जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद स्थित बीएस एचपी गैस एजेंसियों की जांच पूरी हो गई है। इसके बाद खाद्य विभाग ने जांच रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंपी है। दो में से एक एजेंसी खाद्य विभाग के ही रिटायर्ड अफसर और उनके रिश्तेदारों की बताई जा रही है। बता दें कि एजेंसियों में गैस सिलेंडर की सप्लाई की शिकायत मिली थी। इसके बाद फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने टीम से जांच करवाई थी। जांच में सामने आया कि करीब 36 हजार वर्गफीट क्षेत्र में दोनों एजेंसियों के साझा गोदाम बने हैं। स्टॉक जांच में सबसे बड़ी गड़बड़ी फीनिक्स एजेंसी में मिली। यहां 350 घरेलू, 350 कमर्शियल, और 2 हजार 5 किलोग्राम वाले छोटू सिलेंडर गायब थे। बीएस एजेंसी के गोदाम में भी 254 भरे सिलेंडर गायब मिले। यहां कमर्शियल सिलेंडरों के स्टॉक में भी गड़बड़ी सामने आई। जांच में एजेंसियां रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी बीपी शर्मा और उनके रिश्तेदारों की होना सामने आया है। सिलेंडर बुक हुए, लेकिन ग्राहकों तक पहुंचे ही नहीं जांच में सामने आया कि गैस एजेंसियों के संचालकों ने बड़ी संख्या में सिलेंडरों का हेरफेर किया है। जिन्होंने ऑनलाइन गैस सिलेंडर बुक कराए थे, एजेंसियों की ओर से उन उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं पहुंचाए। जब उपभोक्ता एजेंसियों पर पहुंचे तो पता चला कि उनको सिलेंडर की डिलीवरी हो गई है, जबकि उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंचे ही नहीं थे। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि सिलेंडर अधिक पैसे लेकर किसी और को दिए गए। एजेंसियों के गोदाउन में स्टॉक के अनुसार भी सिलेंडर नहीं पाए गए। इतना नहीं शहर इन एजेंसियों की अलावा अन्य एजेंसियों व अवैध परिवहन, अवैध रिफिलिंग करने वालों की भी जांच रिपोर्ट एडीएम को दी गई है। 10 से 12 मामलों की जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। ऐसे में इन एजेंसियों के संचालकों व अवैध गैस सिलेंडरों का परिवहन व रिफिलिंग करने वालों पर जुर्माना व एफआईआर तक कार्रवाई हो सकती है। एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने के लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुमोदन पर एडीएम संबंधित गैस कंपनियों को एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव जल्द भेजा सकता है। 238 रुपए का फर्जी सुरक्षा चार्ज, 10 लाख की वसूली उजागर जेके रोड स्थित मीनाल रेसिडेंसी की मेसर्स फिनिक्स एचपीसीएल गैस एजेंसी में 10 तरह की गड़बड़ियां मिली हैं। जानिए क्या हैं वो 10 प्रकार की गड़बड़ियां, इनके जरिए कैसे उपभोक्ताओं के साथ की गई ठगी— 1- जेके रोड मिनाल स्थित मेसर्स फिनिक्स एचपी गैस एजेंसी में 15 अप्रैल 2026 को 250 से ज्यादा उपभोक्ताओं के ओटीपी के आधार पर ऑनलाइन बिल जनरेट किए गए। लेकिन उपभोक्ताओं को ऑफलाइन बिल 16 अप्रैल का काटकर दिया गया। लोगों को होम डिलीवरी की जगह एजेंसी के पीछे खड़े ट्रकों से सिलेंडर दिए गए। 2- मौके पर पाया गया कि एजेंसी द्वारा 16 अप्रैल 2026 को उपभोक्ताओं से प्रति सिलेंडर 918 रुपए लिए गए, जिसमें होम डिलीवरी शुल्क भी शामिल था। जबकि मौके पर सिलेंडर देने पर 34 रुपए घटाकर नया बिल दिया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं किया गया। इससे अनुमान है कि हर महीने 10 से 12 हजार सिलेंडरों में से 6 हजार सिलेंडरों पर ‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर करीब 2 लाख रुपए अवैध वसूली की गई। 3- एजेंसी के पीछे खाली मैदान में सिलेंडर वितरण के दौरान सुरक्षा निरीक्षण (मेंटेटरी इंस्पेक्शन) के नाम पर 238 रुपए लेकर कैश मेमो दिया गया। जबकि यह निरीक्षण उपभोक्ता के घर जाकर किया जाना चाहिए था। एजेंसी ने बिना निरीक्षण के ही राशि ली और बिल जारी करने को इस भुगतान से जोड़ दिया। करीब 25 हजार कनेक्शन में से 5 हजार उपभोक्ताओं से लगभग 10 लाख रुपए वसूले गए। 4- बुकिंग के बाद भी उपभोक्ताओं को घर पर सिलेंडर नहीं पहुंचाया गया, लेकिन मोबाइल पर ‘डिलीवर्ड’ का मैसेज भेज दिया गया। जांच में सामने आया कि ऐसे सिलेंडर डिलीवरी कर्मियों द्वारा अन्य जगहों पर बेच दिए गए। एजेंसी ने सफाई दी कि उपभोक्ता घर पर नहीं मिले, जो सही नहीं पाया गया। 5- 1 अप्रैल से जांच तक करीब 2 हजार ऑनलाइन बुकिंग लंबित मिलीं। उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं दिया गया और उन्हें वेटिंग में रखा गया। 6- 9 अप्रैल को जारी इनवॉइस का लोड 10 अप्रैल को मिला, लेकिन 15 अप्रैल तक नया लोड नहीं आया। एचपीसीएल के विक्रय अधिकारी के अनुसार एजेंसी ने ओटीपी सिस्टम का पालन नहीं किया और बिना ओटीपी के बिक्री दर्ज कर सिलेंडर अन्य जगह बेच दिए। इसी कारण कंपनी ने सप्लाई रोक दी थी। 7- अप्रैल 2026 में डिपो पीलूखेड़ी (जिला राजगढ़) से 11 ट्रकों की जानकारी दी गई। दूरी के हिसाब से 2–2.5 घंटे लगने चाहिए थे, लेकिन ट्रक 24 घंटे बाद पहुंचे। 11 में से 10 बार ऐसा हुआ, जिससे बीच में ट्रक कहां रुके—यह संदिग्ध है। 8- एजेंसी ने 9 डिलीवरी वाहन बताए, लेकिन मौके पर केवल 5 ही सक्रिय मिले। 9- स्टॉक में गड़बड़ी मिली—करीब 2 हजार छोटे सिलेंडर गायब पाए गए, जबकि 40 घरेलू सिलेंडर अतिरिक्त मिले। 10- 17 अप्रैल को नीलबड़ हरिनगर स्थित गोदाम की आकस्मिक जांच में स्टॉक और कैश एंड कैरी रेट का प्रदर्शन नहीं मिला। गोदाम करीब 36 हजार वर्गफुट क्षेत्र में है, जहां दो गोदाम संचालित हैं। दूसरा गोदाम बीएस सर्विसेस गैस एजेंसी (कोटरा सुल्तानाबाद) का है, जो एचपीसीएल की ही सिस्टर कंपनी है। दोनों गोदाम आवासीय क्षेत्र से सटे पाए गए। बीएस सर्विसेस के संचालक सुयश शर्मा पाए गए, जिनकी भी जांच की गई।
MP के पीथमपुर की कंपनी में भीषण आग:केमिकल ड्रमों में लगातार हो रहे धमाके; आसपास की फैक्ट्रियां खाली कराईं

मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थिति पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-3 स्थित ‘हजारगो वेस्ट’ कंपनी में मंगलवार रात करीब 9:45 बजे लगी भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल हो गई कि इसकी लपटें पास की अन्य इकाइयों तक पहुंच गईं, जिसके बाद एहतियातन आसपास की फैक्ट्रियों को खाली कराया गया। इलाके में काले धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा है और केमिकल ड्रमों में लगातार धमाके हो रहे हैं, जिससे दहशत का माहौल है। घटना के करीब 2 घंटे बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। इंदौर समेत आसपास से बुलाई दमकलें इंदौर समेत आसपास के शहरों से दमकल की गाड़ियां लगातार मौके पर पहुंच रही हैं और अब तक 14 फायर फाइटर आग बुझाने में जुटे हैं। पानी की सप्लाई के लिए नगर पालिका और निजी टैंकर लगाए गए हैं, वहीं आग पर काबू पाने के लिए रेत भी मंगवाई गई है। आग से एक जेसीबी और हाइड्रा वाहन जलकर खाक हो गए हैं। घटना की तस्वीरें देखिए मौके पर पहुंचे प्रशासन-पुलिस के अफसर मौके पर एडिशनल एसपी पारुल बेलापुरकर, एसडीएम राहुल गुप्ता, कार्यपालन मजिस्ट्रेट राहुल गायकवाड़, तहसीलदार शिवानी श्रीवास्तव समेत प्रशासनिक और पुलिस अमला मौजूद है। धार कलेक्टर भी घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं। कचरे का निस्तारण करती है कंपनी बताया जा रहा है कि यह कंपनी फैक्ट्रियों के कचरे के निस्तारण का काम करती है, जिससे आग में केमिकल रिएक्शन और बढ़ने का खतरा बना हुआ है। नगर पुलिस अधीक्षक रवि सोनेर के अनुसार, फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, जबकि आग लगने के कारणों की जांच की जाएगी।
ग्वालियर में ई-रिक्शा से सवा दो लाख के गहने चोरी:दिल्ली का व्यवसायी पत्नी के साथ आदित्यपुरम जा रहा था, दो संदेही महिलाओं ने की वारदात

ग्वालियर में ई-रिक्शा में गहने चोरी की एक और वारदात सामने आई है। इस बार दिल्ली के सराफा व्यवसायी निशाना बने। वह पत्नी और बच्चों के साथ गोला का मंदिर से ससुराल आदित्यपुरम जा रहे थे। रास्ते में दो महिलाएं ई-रिक्शा में सवार हुईं और डीडी नगर गेट के पास उतर गईं। कुछ देर बाद व्यापारी की पत्नी ने बैग देखा तो चेन खुली मिली। जांच करने पर गहनों का पाउच गायब था। घटना दो दिन पहले की है। पुलिस ने अब मामला दर्ज कर संदिग्ध महिलाओं की तलाश शुरू कर दी है। मुरैना निवासी 32 वर्षीय भारत सिंह राठौर, पिता रमेश सिंह राठौर, दिल्ली में ज्वेलरी का कारोबार करते हैं। वह बहन के ससुर के निधन पर मुरैना आए थे और कार्यक्रम के बाद पत्नी के साथ आदित्यपुरम स्थित ससुराल जा रहे थे। गोला का मंदिर पर बस से उतरने के बाद उन्होंने ई-रिक्शा (MP 07 ZJ 0250) लिया। कुछ दूरी पर दो महिलाएं भी उसमें बैठ गईं। डीडी नगर गेट के पास उतरने के बाद किराया देकर वे आगे बढ़े। तभी बैग की चेन खुली दिखी। बैग चेक करने पर गहने गायब मिले। उन्होंने तुरंत डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें थाने ले गई। दो दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर पीड़ित के अनुसार, दो दिन तक थाने के चक्कर लगाने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस कप्तान से शिकायत की, तब जाकर मामला दर्ज किया गया। यह सामान हुआ चोरी पीड़ित ने बताया कि बैग से एक मंगलसूत्र, तीन सोने की अंगूठियां, कान के सुई-धागा और 18,500 रुपए चोरी हुए हैं। शक है कि वारदात उन्हीं महिलाओं ने की, जो रास्ते में ई-रिक्शा में सवार हुई थीं।




