Saturday, 06 Jun 2026 | 08:28 AM

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विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव, बंगाल में पहले चरण के लिए मतदान, गढ़ बचाए नमी-स्टालिन?

विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव, बंगाल में पहले चरण के लिए मतदान, गढ़ बचाए नमी-स्टालिन?

विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को पहले चरण के तहत 152वें क्वार्टर में वोटिंग होनी है, जिसके लिए सभी पार्टियाँ पूरी तरह से ली हैं। इस चरण में करीब 3.6 करोड़ 16 वोट के करीब 44,000 वोट पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस बार के चुनाव में सिर्फ दो स्टेज में वोटिंग हो रही है, जबकि 2021 में आठ और 2016 में छह स्टेज में वोटिंग हुई थी। बंगाल में ममता को गढ़ असफ़लता की चुनौती? पहले चरण में स्टूडियो ऑल इंडिया पैथोलॉजी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच करीब 80 वें राउंड पर फाइनल मुकाबला माना जा रहा है, हालांकि बहुकोणीय मुकाबले पर कुछ जगह भी देखने को मिल सकती है। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं, जिसके तहत 2,400 से अधिक केंद्रीय आतंकवादियों के समर्थकों और हजारों लोगों की याचिकाओं की घोषणा की गई है। स्टैलिन की क्या होगी वापसी? वहीं तमिल में सभी 234 विधानसभाओं में एक ही चरण में मतदान होगा, जिसमें 5.73 करोड़ से अधिक 4,000 से अधिक आबादी के भाग्य का निर्णय होगा। यहां मुख्य मुकाबला द्रविड़ मुनेत्र पेपरम इएज़ स्कूलके और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी एआईए डियाके के बीच है। राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सत्ता शक्ति बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में एआईएडीएमके वापसी की कोशिश कर रही है। राज्यभर में आतंकवादियों और आतंकवादियों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों को ध्वस्त कर दिया गया है और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं। आरोप-प्रत्यारोप बंगाल चुनाव के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को सोनारपुर दक्षिण क्षेत्र में भाजपा के दावेदार रूपा के समर्थन में रोड शो किया और लोगों से सीएम ममता बनर्जी को सत्या से हटने की अपील की। शाह भगवान रंग से सजे वाहनों पर सवार होकर झंडे का निशान लगाते नजर आए, जबकि सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग आस्था रखते थे और “भारत माता की जय” के नारे लगा रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘किमां, माटी, मानुष’ के नारे के साथ सत्ता में आई ममता ने बनर्जी राज्य को “गुंडों के आदर्श” को छोड़ दिया है और अब उनका लक्ष्य आपके समर्थक अभिषेक बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाना है। शाह ने “सिंडिकेट राज” और औद्योगिक उत्पादन का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा की सत्ता में ही यह स्थिति खत्म हो जाएगी। वहीं, ऑलमोल कांग्रेस की ओर से समाजवादी पार्टी की ओर से डेमोक्रेट नेता अमित शाह पर पलटवार करते हुए ममता बनर्जी पर अपमान करने का आरोप लगाया गया है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रचार के दौरान जिस तरह शाह ने ”एक बहन” का किरदार निभाया था, वह महिला विरोधी भाजपा की सोच का हिस्सा है। अभिषेक बनर्जी ने यह भी कहा कि इन आदिवासियों का जवाब चार मई को चुनाव नतीजों के बाद आएगा। ये भी पढ़ें: बंगाल चुनाव से पहले अमित शाह के सीएम ममता को हटाओ का नारा, भड़के अभिषेक बनर्जी- ये है महिला का अपमान

जामुन की चटनी रेसिपी: गर्मियों में घर पर स्वादिष्ट जैमन की चटनी, फट ही मुंह से निकलेगा वाह! विधि नोट करें

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 कप जामिन (बीज मिर्च), 1-2 हरी मिर्च, पुदीना, धनिया पत्ते, स्वादानुसार काला नमक, 1 छोटा सा अन्य जीरा पाउडर, 1 नींबू का रस, 1 छोटा सा मसाला चीनी या गुड़ छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले जैमिन को अच्छी तरह से धो लें और उनके बीज निकाल लें। अब मसाले में जामिन, हरी मिर्च, पुदीना और धनिया मिलायें। छवि: एआई इसमें काला नमक, सामान्य नमक और इसके अलावा जीरा पाउडर भी शामिल है। थोड़ा सा पानी रोबोटिक इसे लॉजिक पीस लें। छवि: फ्रीपिक अब इसमें नींबू का रस और थोड़ा सा चीनी या गुड्डे महान से मिला लें। आपका स्वादिष्ट जैमिन की रेसिपी तैयार है। छवि: फ्रीपिक इस रेसिपी को आप परांठे, पकौड़े, समोसे या दाल-चावल के साथ ले सकते हैं. यह चिप्स खाने में खट्टी-मीठी और तीखा स्वाद होता है, जो हर किसी को पसंद आता है। छवि: एआई अगर आपको ज्यादा खट्टा स्वाद पसंद है, तो आप थोड़ी ज्यादा दाल ले सकते हैं। चिप्स को फर्म में 2-3 दिन तक इस्तेमाल किया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक समर में कुछ नए और टेस्टी टैटू बनाना चाहते हैं, तो जैमिन की ये शेयर जरूर करें। एक बार खाएंगे तो बार-बार बनाने का मन है। छवि: एआई

‘जो लोग गाय को खाते हैं, वे सूअर का क्या…’, सीएम योगी का ये बयान, बोले- आंशिक हलचल

'जो लोग गाय को खाते हैं, वे सूअर का क्या...', सीएम योगी का ये बयान, बोले- आंशिक हलचल

महिला आरक्षण: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (22 अप्रैल, 2026) को देश की आधी आबादी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा था कि दुनिया में कोई भी देश हो, बेकार वो गाय का माने या न माने, लेकिन दूध गाय का पिएगा। जो लोग गाय को खाते हैं, वे सूअर का दूध क्या खाते हैं? उन्होंने कहा कि दूध तो सारे गाय काए हैं, कोई बच्चा होगा तो मां का ही दूध पिएगा। ये प्रकृति से प्रदत्त दैवीय उपहार है। समुद्र तट से निकले वे रत्न हैं, जो हमें मातृशक्ति की छवियों के साथ जोड़ते हैं और भारत की ऋषि परंपरा ने उन्हें उसी के रूप में आगे बढ़ाया। इसलिए नारी गरिमा को, उसकी महत्ता को हर स्तर पर सम्मान देते हुए आगे बढ़ाने का काम किया गया। जो लोग गाय को खाते हैं, वे सूअर का दूध क्या खाते हैं? pic.twitter.com/WpaNf0I87R – योगी आदित्यनाथ (@mयोगीआदित्यनाथ) 22 अप्रैल 2026 डबल इंजन सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए सम्मानः सेमी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (22 अप्रैल, 2026) को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन आयोजित करने के लिए नारी शक्ति वंदन सम्मेलन का आयोजन किया। जहां उन्होंने कहा कि सुरक्षा गृहस्वामी से लेकर अंतरिक्ष की यात्रा तक, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन से लेकर नारी शक्ति तक आज हर क्षेत्र में प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ रही है और डबल इंजन की सरकार मध्य जनसंख्या की सुरक्षा व सम्मान के लिए पूरी तरह से विस्तार से काम करती रहेगी। नामांकन पर मुख्यमंत्री योगी का तीखा प्रहार कांग्रेस, समाजवादी पार्टी का इतिहास ही नारी विरोधी रही है… pic.twitter.com/v75tjU1wRv – योगी आदित्यनाथ (@mयोगीआदित्यनाथ) 22 अप्रैल 2026 उन्होंने कहा कि जब भारत ने 100 साल बाद अपना संसद भवन बनाया, तब उस संसद भवन में पहला कोई अधिनियम पारित हुआ तो वो था नारी शक्ति वंदन अधिनियम। इस कानून के तहत संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत ताजा मिले, लेकिन महिलाओं को समय पर इसका लाभ मिला उनके लिए जब प्रधानमंत्री जी ने पहल की, तब कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों के दल इसे भटका रहे थे। बिल को पास नहीं करना चाहते थे और इसके लिए कुछ नहीं होना चाहते थे, कुछ बैटरी को आधार बना रहे थे। कांग्रेस को पसंद नहीं कि महिलाओं को अधिकार मिले- योगी उन्होंने कहा कि कांग्रेस, सपा और अन्य आश्रमों का इतिहास ही नारी विरोधी है। इनमें कारनामे नारीविरोधी रह रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर मुहर लगाते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास कौन जानता है। नारी को उसका अधिकार मिले, विचारधाराओं-दलितों को उसका अधिकार मिले, बास्केटबॉल को उसका अधिकार मिले तो वे बाधा डालते हैं। सपी को महिला विरोधी के रूप में घोषित किया गया है- योगी एसपी को लेकर सीएम योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी को नारी विरोधी घोषित किया गया है. उनके लिए तो जगह-जगह नारा गूंजता था- ‘देखो सपेई, बिटिया घबराए।’ 2017 से पहले मध्य उत्तर प्रदेश और पश्चिम उत्तर प्रदेश का क्या हाल था? बड़े परिवार, हर परिवार ने या तो स्कूल बंद कर दिया, या फिर कहीं सुदूर उत्तर प्रदेश के बाहर अपने रिश्तेदारों के यहाँ बेटी को पढ़ाते थे। यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘महिला पहचान से सर तक…’,किस करवट बैठागा, कांग्रेस सभाओं में छाए रहे ये बड़ा मुद्दा

जबलपुर में अवैध पैकेज्ड पानी प्लांट का पंजीयन निलंबित:खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने एक्वा ब्लू वाटर सप्लाई पर की कार्रवाई

जबलपुर में अवैध पैकेज्ड पानी प्लांट का पंजीयन निलंबित:खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने एक्वा ब्लू वाटर सप्लाई पर की कार्रवाई

जबलपुर में खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने बिना अनुमति चल रहे पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर प्लांट पर सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर विजयनगर स्थित एक्वा ब्लू वाटर सप्लाई प्लांट का खाद्य पंजीयन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार दुबे के अनुसार, बुधवार को एसबीआई कॉलोनी, उखरी रोड स्थित प्लांट का निरीक्षण किया गया। जांच में पाया गया कि प्रतिष्ठान बिना आवश्यक अनुमति के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर का उत्पादन कर रहा था। प्लांट के पास केवल विक्रय से संबंधित पंजीयन था, जबकि उत्पादन के लिए अलग लाइसेंस अनिवार्य होता है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्लांट केंद्र सरकार के 17 सितंबर 2025 के आदेश के तहत पैकेटबंद पेयजल और मिनरल वाटर की अनिवार्य गुणवत्ता जांच प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहा था। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 31 के तहत कार्रवाई करते हुए अधिकारी ने प्लांट का पंजीयन निलंबित कर दिया। आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में प्लांट का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध अनुमति और निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित हो रहे खाद्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

Spiny Gourd: दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी ‘कंटोला’ के बारे में जानते हैं? इस महीने मिलती है, ब्लड शुगर को तुरंत कर सकती है कंट्रोल

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कंटोला ऐसी देसी और मौसमी सब्जी है, जिसे बहुत से लोग नाम से कम जानते हैं लेकिन स्वाद और गुणों की वजह से पसंद करते हैं. इसे अलग-अलग इलाकों में ककोड़ा, कंकोड़ा, काकरोल, मीठा करेला या अंग्रेजी में Spiny Gourd कहा जाता है. बाहर से छोटे कांटेदार फल जैसी दिखने वाली यह सब्जी पोषण से भरपूर मानी जाती है. ग्रामीण इलाकों में इसे बरसात के मौसम की ताकतवर सब्जी कहा जाता है, क्योंकि यह कम समय के लिए बाजार में आती है और शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व दे सकती है. कंटोला का सीजन आमतौर पर जून से सितंबर के बीच माना जाता है. मानसून शुरू होते ही यह सब्जी मंडियों और स्थानीय बाजारों में दिखने लगती है. कुछ राज्यों में जुलाई-अगस्त में इसकी सबसे ज्यादा डिमांड होती है. यह जंगली बेलों या खेती दोनों तरीके से उगाई जाती है. सीजन छोटा होने की वजह से लोग इसे खास सब्जी मानते हैं और मिलते ही खरीदना पसंद करते हैं. क्यों कहा जाता है ताकतवर सब्जीकंटोला में फाइबर, विटामिन C, विटामिन A, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं. ये पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने, त्वचा की देखभाल, पाचन सुधारने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकते हैं. इसमें कैलोरी कम होती है, इसलिए हेल्दी डाइट फॉलो करने वाले लोग भी इसे पसंद करते हैं. ब्लड शुगर में कैसे मददगार हो सकती हैकंटोला को पारंपरिक तौर पर डायबिटीज फ्रेंडली सब्जी माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर भोजन के बाद शुगर के तेजी से बढ़ने की गति को कम करने में मदद कर सकता है. कुछ शुरुआती शोधों में भी ऐसी सब्जियों को ग्लूकोज मैनेजमेंट के लिए उपयोगी बताया गया है. हालांकि यह समझना जरूरी है कि कंटोला कोई दवा नहीं है. अगर किसी को डायबिटीज है, तो डॉक्टर की सलाह के साथ संतुलित डाइट में इसे शामिल करना बेहतर है. पेट और वजन के लिए भी फायदेमंदफाइबर से भरपूर होने की वजह से कंटोला पेट देर तक भरा महसूस करा सकती है. इससे बार-बार भूख लगने की आदत कम हो सकती है. पाचन बेहतर रखने और कब्ज जैसी परेशानी में भी फाइबर युक्त सब्जियां मददगार मानी जाती हैं. कम कैलोरी होने से यह वेट मैनेजमेंट डाइट में भी फिट बैठती है. कैसे बनाएं स्वादिष्ट सब्जी?कंटोला को धोकर लंबाई में काटें और हल्का नमक लगाकर कुछ देर रखें. फिर प्याज, टमाटर, हल्दी, धनिया और मसालों के साथ भूनकर सब्जी तैयार करें. कई जगह इसे बेसन मसाला भरकर भी बनाया जाता है. हल्की कुरकुरी फ्राई कंटोला भी काफी पसंद की जाती है. हमेशा चमकदार हरे रंग की, ताजी और सख्त कंटोला लें. बहुत ज्यादा पीली, सूखी या नरम सब्जी लेने से बचें. छोटे आकार की कंटोला अक्सर ज्यादा नरम और स्वादिष्ट होती है. डाइट में क्यों करें शामिलमौसमी सब्जियां अक्सर ज्यादा ताजी और पोषक मानी जाती हैं. कंटोला भी उन्हीं में से एक है. अगर आप हर सीजन में नई और फायदेमंद सब्जियां खाना पसंद करते हैं, तो इसे अपनी थाली में जगह दे सकते हैं. कंटोला एक हेल्दी सब्जी जरूर है, लेकिन सही असर तभी मिलता है जब इसे संतुलित भोजन, एक्टिव लाइफस्टाइल और सही मेडिकल सलाह के साथ खाया जाए. बरसात के मौसम में मिलने वाली यह सब्जी स्वाद और सेहत दोनों का अच्छा मेल है.

दमोह में फर्जी दूल्हा समेत 3 आरोपी पकड़ाए:बारात न आने पर परिजन की शिकायत; रेलवे कर्मचारी बताकर-जाति छिपाकर रिश्ता तय किया था

दमोह में फर्जी दूल्हा समेत 3 आरोपी पकड़ाए:बारात न आने पर परिजन की शिकायत; रेलवे कर्मचारी बताकर-जाति छिपाकर रिश्ता तय किया था

दमोह के लोको इलाके में शादी के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक युवक ने खुद को रेलवे का सरकारी कर्मचारी बताकर लड़की वालों को धोखे में रखा, लेकिन ऐन मौके पर बारात न आने से उसकी पोल खुल गई। पुलिस ने फर्जी दूल्हे और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, आगर मालवा के रहने वाले मोहनलाल केवट की पहचान दमोह की एक युवती से शादी वाले ऐप के जरिए हुई थी। युवक ने खुद को रेलवे का कर्मचारी बताया और अपनी जाति भी छिपाकर रिश्ता तय कर लिया। 20 अप्रैल को लोको के रेलवे इंस्टीट्यूट हॉल में शादी होनी थी। कार्ड छप चुके थे, खाना तैयार था और मेहमान भी आ चुके थे। बारात का इंतजार और बढ़ता शक दूल्हा अपने दो-तीन दोस्तों के साथ 19 अप्रैल को ही दमोह पहुंच गया था, लेकिन 20 अप्रैल की रात तक जब बारात नहीं आई, तो लड़की वालों को शक हुआ। दूल्हा बार-बार बहाने बनाता रहा कि बारात रास्ते में है, बस आने ही वाली है। जब रात बीत गई और कोई नहीं आया, तब परिजनों ने सीधे कोतवाली थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई। फर्जी आईडी कार्ड और बदलती कहानियां पुलिस की जांच में पता चला कि युवक ने जो रेलवे का आईकार्ड दिखाया था, वह पूरी तरह फर्जी था। यही नहीं, पकड़े जाने पर युवक ने अपनी कहानी बदलते हुए दावा किया कि वह रेलवे में एक प्राइवेट एजेंसी के जरिए सुपरवाइजर है। उसने यह भी आरोप लगाया कि लड़की वालों के कहने पर ही वह बारात लेकर नहीं आया था, लेकिन पुलिस ने उसकी बातों को झूठ पाया। पुलिस की कार्रवाई कोतवाली टीआई मनीष कुमार ने बताया कि मामले में मोहनलाल केवट और उसके साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। जल्द ही उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस घटना के बाद से लड़की का परिवार सदमे में है।

MP Four Arrested Jaipur | Vasundhara Raje AI Fake Content Case

MP Four Arrested Jaipur | Vasundhara Raje AI Fake Content Case

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से फर्जी लेटर और AI से बनाए वीडियो को शेयर करने के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। डीसीपी साउथ राजश्री राज ने बताया- ज्योति नगर थाना पुलिस ने निखिल, बिलाल खान, इनाम अहमद को मध्यप्रदेश के भोपाल स . AI से बना फर्जी लेटर-वीडियो जांच में सामने आया कि पूर्व सीएम के नाम से संघ प्रमुख भागवत को संबोधित एक फर्जी लेटर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था। इस लेटर को AI तकनीक की मदद से वीडियो के रूप में भी प्रसारित किया गया। कार्रवाई पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के निर्देश पर की गई। पुलिस अब चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर पुलिस कस्टडी (PC) की मांग करेगी, ताकि उनसे पूछताछ कर पूरे मामले का खुलासा किया जा सके। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क और इस फर्जी कंटेंट के पीछे शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। MP कनेक्शन और सियासी बयानबाजी इससे पहले मामले की जांच में मध्यप्रदेश कनेक्शन सामने आने के बाद भोपाल पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े चार कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई पर हरिश चौधरी और सांसद विवेक टांक ने सवाल उठाए थे। हरीश चौधरी ने X पर पोस्ट करते हुए कहा था कि कांग्रेस आईटी सेल के कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में रखना निंदनीय है। यह कानून व लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इसे असहमति की आवाज दबाने और सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया। यह खबर भी पढ़ें… वसुंधरा के फर्जी लेटर मामले में 3 कांग्रेसी हिरासत में:भोपाल पुलिस ने पकड़ा, प्रभारी हरीश चौधरी बोले- रिहा नहीं किया तो कोर्ट जाएंगे पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का संघ प्रमुख मोहन भागवत के नाम से सोशल मीडिया पर आए फर्जी लेटर का मामला अब मध्यप्रदेश से जुड़ गया है। लेटर को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर MP कांग्रेस आईटी सेल के 3 कार्यकर्ताओं को भोपाल पुलिस ने हिरासत में लिया है। एमपी के पार्टी प्रभारी हरीश चौधरी और सांसद विवेक तन्खा ने हिरासत पर सवाल उठाए हैं। (पूरी खबर पढ़ें) राजे ने लिखा था- सांच को आंच की जरूरत नहीं पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर 18 अप्रैल को फर्जी लेटर सामने आया था। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित इस फर्जी लेटर में महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी की लाइन से हटकर बातें लिखी थीं। पूरी खबर पढ़िए…

श्योपुर भाजपा कार्यालय पर पोस्टर चिपकाए:लिखा- बीजेपी ने बीफ कंपनियों से चंदा लेकर अपनी तिजोरी भरी, तीन लोगों पर FIR

श्योपुर भाजपा कार्यालय पर पोस्टर चिपकाए:लिखा- बीजेपी ने बीफ कंपनियों से चंदा लेकर अपनी तिजोरी भरी, तीन लोगों पर FIR

श्योपुर के शिवपुरी रोड पर स्थित भाजपा कार्यालय में बुधवार सुबह जमकर हंगामा हुआ। तीन युवकों ने कार्यालय परिसर में घुसकर न केवल आपत्तिजनक पोस्टर चिपकाए, बल्कि नारेबाजी भी की। देर शाम भाजपा के जिला उपाध्यक्ष की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना सुबह करीब 11 बजे की है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष राघवेन्द्र सिंह जाट ने कोतवाली थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि परितोष उर्फ बंजी राठौड़, अमित सोनी और आशीष सेन बिना अनुमति भाजपा कार्यालय में घुस आए। इन लोगों ने वहां लगी शिलापट्टिका पर पार्टी के खिलाफ लिखा- गोभक्ति की नौटंकी करने वाली बीजेपी ने बीफ, कंपनियों से चंदा लेकर अपनी तिजोरी भरी है, ये गौ प्रेम है या चंदा प्रेम? इन बातों को लिखकर पोस्टर चिपकाए गए हैं। जब भाजपा पदाधिकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उनके साथ गाली-गलौज की और पोस्टर हटाने पर जान से मारने की धमकी देकर भाग निकले। “हिंदुओं को भड़काने की राजनीति” इस घटना पर पूर्व विधायक बृजराज सिंह चौहान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे कांग्रेस की ‘ओछी मानसिकता’ करार देते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई प्रमाण है, तो वे कानूनी रास्ता अपनाएं। उन्होंने आगे कहा कि “बीफ” जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चंदा लेने के झूठे आरोप लगाना और ऐसी राजनीति करना सीधे तौर पर हिंदुओं को भड़काने का काम है। पुलिस की कार्रवाई भाजपा कार्यकर्ताओं में इस घटना को लेकर काफी गुस्सा है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी सहायक उप निरीक्षक संजय यादव को सौंपी गई है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव: गुरुवार की मतपत्र लड़ाई भारत के राजनीतिक भविष्य को फिर से परिभाषित क्यों कर सकती है | चुनाव समाचार

Harmanpreet Kaur's India have been asked to bat (Picture credit: X @BCCIWomen)

आखरी अपडेट:22 अप्रैल, 2026, 22:13 IST तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों और पश्चिम बंगाल की 294 में से 152 सीटों के लिए मतदान होगा पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव के साथ, मेदिनीपुर और मदुरै, कोलकाता और कन्याकुमारी के मतदाता अपनी उंगलियों पर स्याही लगाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रतीकात्मक छवि 23 अप्रैल की सुबह बस कुछ ही घंटे दूर है, भारत अपने लोकतांत्रिक कैलेंडर के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक की तैयारी कर रहा है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में लाखों मतदाता क्षेत्रीय सीमाओं से परे एक उच्च दांव वाली लड़ाई में मतदान केंद्रों की ओर जाने के लिए तैयार हैं। जबकि दोनों राज्य भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से अलग हैं, वे गुरुवार को एक विलक्षण कथा द्वारा एकजुट हुए हैं: एक पुनरुत्थान वाले राष्ट्रीय जनादेश के खिलाफ संघीय ढांचे की एक निश्चित परीक्षा। तमिलनाडु की 234 सीटों के लिए मतदान और पश्चिम बंगाल में पहला चरण, जब 294 में से 152 सीटों पर मतदान होगा, 23 अप्रैल को होना है। बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। शांतिपूर्ण परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने रिकॉर्ड संख्या में केंद्रीय बलों को तैनात किया है, जिससे दोनों राज्यों में माहौल चरम पर पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल के लिए, यह “सोनार बांग्ला” पहचान की लड़ाई है, जबकि तमिलनाडु में, बहस द्रविड़ असाधारणता और भाषाई गौरव पर टिकी हुई है। पश्चिम बंगाल की लड़ाई को ‘अंतिम युद्ध का मैदान’ क्यों माना जाता है? पश्चिम बंगाल की लड़ाई एक साधारण चुनावी मुकाबले से कहीं अधिक है; यह भिन्न राजनीतिक विचारधाराओं का टकराव है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व में, राज्य ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के “मिशन बंगाल” का विरोध करते हुए खुद को विपक्ष के प्राथमिक किले के रूप में स्थापित किया है। गुरुवार के मतदान का दांव विशेष रूप से औद्योगिक और सीमावर्ती जिलों में अधिक है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के कार्यान्वयन के साथ-साथ चुनाव आयोग की एसआईआर मतदाता समीक्षा और स्थानीय शासन के मुद्दे अभियान पर हावी रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनाव को बंगाल के “स्वाभिमान” (आत्मसम्मान) के लिए संघर्ष के रूप में तैयार किया है, और राज्य के जटिल सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने के लिए “बाहरी” होने के लिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा है। इसके विपरीत, भाजपा ने भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज और राज्य के स्थिर औद्योगिक क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए डबल इंजन सरकार की आवश्यकता के मुद्दों को उजागर करते हुए “असोल पोरीबोर्टन” (वास्तविक परिवर्तन) पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। 23 अप्रैल को कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर मतदान होने के साथ, यहां के नतीजे संभवतः अगले दशक में राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के लिए दिशा तय करेंगे। तमिलनाडु में राजनीतिक परिदृश्य कैसे बदल गया है? तमिलनाडु के दक्षिणी गढ़ में, 23 अप्रैल का मतदान द्रविड़ दिग्गजों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) अपनी कल्याणकारी योजनाओं और विकास के “द्रविड़ियन मॉडल” पर भरोसा करते हुए अपने प्रभुत्व को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालाँकि, राजनीतिक परिदृश्य तेजी से भीड़भाड़ वाला हो गया है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) जयललिता के बाद के युग में अपनी विरासत को फिर से हासिल करने के लिए लड़ रही है, जबकि भाजपा ने अपने आक्रामक राज्य नेतृत्व के तहत राज्य की पारंपरिक द्विध्रुवीयता को चुनौती देते हुए, हृदय क्षेत्र में अभूतपूर्व पैठ बनाई है। तमिलनाडु के प्रमुख मुद्दे उत्तरी मैदानी इलाकों से अलग हैं। एनईईटी छूट, तमिल भाषा की सुरक्षा और केंद्रीय करों का समान वितरण मुख्य चर्चा के मुद्दे रहे हैं। इसके अलावा, युवा, तकनीक-प्रेमी नेताओं का उदय और “अभिनेता से नेता बने” विजय का प्रभाव मतदाताओं को बांधे रखता है। गुरुवार का मतदान यह तय करेगा कि क्या द्रमुक का दुर्जेय गठबंधन अपनी पकड़ बना पाएगा या “कमल” को आखिरकार पेरियार की भूमि में उपजाऊ मिट्टी मिल गई है। प्राथमिक साजो-सामान और सुरक्षा चुनौतियाँ क्या हैं? इन दो अस्थिर राज्यों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना ईसीआई के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य है। पश्चिम बंगाल में, प्राथमिक चिंता चुनाव के बाद की हिंसा और “बूथ जाम करने” की रणनीति की रोकथाम है, जिसने पिछले चक्रों को प्रभावित किया है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 1,000 से अधिक कंपनियों को दक्षिण 24 परगना और उत्तरी बंगाल जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों में भेजा गया है। “रेड ज़ोन” पर नज़र रखने के लिए ड्रोन और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले सीसीटीवी कैमरे तैनात किए जा रहे हैं, जहां झड़पों का खतरा सबसे अधिक है। तमिलनाडु में, फोकस थोड़ा अलग है, जहां ईसीआई ने “वोट के बदले नकद” संस्कृति पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। फ्लाइंग स्क्वॉड ने पिछले 48 घंटों में राज्य भर में रिकॉर्ड मात्रा में बेहिसाब नकदी और आभूषण जब्त किए हैं। कुछ आंतरिक जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के करीब होने के कारण हीटवेव ने भी आयोग को मतदान के घंटे बढ़ाने और सभी बूथों पर अनिवार्य छाया और पानी की सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रेरित किया है। इस मतदान का राष्ट्रीय आख्यान के लिए क्या अर्थ है? 23 अप्रैल के मतदान के नतीजे देश के राजनीतिक स्वास्थ्य के लिए बैरोमीटर के रूप में काम करेंगे। क्षेत्रीय पदाधिकारियों का मजबूत प्रदर्शन संघीय मोर्चे की ताकत और राष्ट्रीय पार्टी की गति को रोकने की उसकी क्षमता को मजबूत करेगा। हालाँकि, इन दो पारंपरिक “गैर-पारंपरिक” क्षेत्रों में भाजपा के वोट शेयर में उल्लेखनीय वृद्धि भारतीय राजनीति के मौलिक पुनर्गठन का संकेत देगी। जैसे ही मेदिनीपुर और मदुरै, कोलकाता और कन्याकुमारी के मतदाता अपनी उंगलियों पर स्याही लगाने की तैयारी कर रहे हैं, पूरी दुनिया की नजरें भारत पर हैं। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं है; यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की मौसम संबंधी और भू-राजनीतिक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद एक व्यापक, जटिल अभ्यास करने की क्षमता की पुष्टि है। गुरुवार शाम को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में छिपा नतीजा आने वाले वर्षों में भारतीय शासन के भविष्य को आकार देगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 22 अप्रैल, 2026, 22:13 IST समाचार चुनाव पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव: गुरुवार की मतपत्र लड़ाई भारत के

वेट लॉस और फैट लॉस में क्या अंतर है, कैसे पता करें कि आपको सबसे पहले किसपर फोकस करना है, तभी बदलेगी फिटनेस

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Last Updated:April 22, 2026, 22:06 IST Fat Loss Vs Weight Loss: फिटनेस शुरू करते समय लोग अक्सर वेट लॉस और फैट लॉस को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा फर्क है. डायटीशियन और पिलेट्स इंस्ट्रक्टर दर्शन जोशी के मुताबिक, सही लक्ष्य चुनने से ही बेहतर रिजल्ट मिलते हैं. वेट लॉस और फैट लॉस. आजकल फिटनेस की दुनिया में लोग अक्सर वेट लॉस और फैट लॉस को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है. वजन मशीन पर नंबर कम होना हमेशा बेहतर फिटनेस का संकेत नहीं होता. कई बार शरीर का वजन घटता है, लेकिन उसमें पानी या मसल्स भी शामिल होते हैं. ऐसे में असली बदलाव समझना जरूरी है. डायटीशियन और पिलाटे ट्रेनर दर्शन जोशी के अनुसार, अगर सही लक्ष्य चुना जाए, तभी फिटनेस में स्थायी और हेल्दी बदलाव देखने को मिलता है. दर्शन जोशी बताती हैं कि वेट लॉस का मतलब है शरीर का कुल वजन कम होना. इसमें फैट, पानी, मसल्स और शरीर के अन्य तत्व भी शामिल हो सकते हैं. उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति अचानक बहुत कम खाना शुरू कर दे, ज्यादा पसीना निकाले या क्रैश डाइट अपनाए, तो वजन मशीन पर नंबर तेजी से नीचे जा सकता है. लेकिन इसका मतलब जरूरी नहीं कि शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम हुई हो. View this post on Instagram