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कास्टिंग स्कैम का शिकार हुई थीं श्रुति शर्मा:बोलीं- एक्ट्रेस बनने से पहले टीवी शो का झांसा देकर एक शख्स ने ₹15 हजार ठग लिए थे

कास्टिंग स्कैम का शिकार हुई थीं श्रुति शर्मा:बोलीं- एक्ट्रेस बनने से पहले टीवी शो का झांसा देकर एक शख्स ने ₹15 हजार ठग लिए थे

‘ऑफिस-ऑफिस’ के नए सीजन में मुसद्दी लाल की बेटी ‘अनोखी’ का किरदार निभा रहीं एक्ट्रेस श्रुति शर्मा ने अपने संघर्ष, करियर और निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्से साझा किए। प्रतापगढ़ से मुंबई तक का सफर तय करने वाली श्रुति ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि कैसे वह कास्टिंग फ्रॉड का शिकार हुईं, पांच बार रिजेक्ट होने के बाद पहला बड़ा मौका मिला और परिवार के भरोसे इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘हीरामंडी’, संजय लीला भंसाली, टीवी इंडस्ट्री के संघर्ष और अपने उसूलों पर भी बात की। सवाल: ‘ऑफिस-ऑफिस’ के नए सीजन का हिस्सा बनने की खबर मिलने पर कैसा लगा? जवाब: सच कहूं तो पहले मुझे यकीन नहीं हुआ। 25 साल बाद अगर कोई कहे कि ‘ऑफिस-ऑफिस’ का नया सीजन बन रहा है, तो मजाक लगता है। लेकिन दोबारा कॉल और मीटिंग के बाद एहसास हुआ कि यह सच में हो रहा है। शुरुआत में मैं काफी नर्वस थी। लग रहा था कि लोग नए शो की तुलना पुराने ‘ऑफिस-ऑफिस’ से करेंगे। यह बड़ा चैलेंज था। लेकिन निर्देशक राजन सर और पूरी कास्ट के साथ स्क्रिप्ट रीडिंग के बाद भरोसा मिला। हमें लगा कि हम अच्छा काम कर पाएंगे। सवाल: ‘ऑफिस-ऑफिस’ के सेट पर पहला दिन कैसा था? जवाब: पहले दिन सभी कलाकार उत्साहित थे। शूटिंग शुरू होने से पहले पूजा भी हुई थी, जिसमें उमेश सर और उनका परिवार शामिल हुआ था। सबसे अच्छी बात यह थी कि निर्माताओं ने शुरुआत से ही सकारात्मक माहौल बनाया था। सेट पुराने ‘ऑफिस-ऑफिस’ जैसा तैयार किया गया था। पहले दिन मैं काफी घबराई हुई थी। मेरा पहला सीन भी पहले एपिसोड का था। आज भी वह सीन देखती हूं, तो चेहरे पर नर्वसनेस दिखाई देती है। सवाल: क्या पुराने ‘ऑफिस-ऑफिस’ के कलाकार भी नए सीजन में हैं? जवाब: नहीं, पुराने कलाकारों में से कोई भी इस शो का हिस्सा नहीं है। यह हमारे लिए अच्छा रहा। अगर उनके साथ स्क्रीन शेयर करनी पड़ती, तो हम और ज्यादा नर्वस हो जाते। हालांकि, हमारे किरदार पुराने किरदारों से जुड़े हैं। जैसे मैं मुसद्दी लाल की बेटी अनोखी बनी हूं। कोई किसी का भतीजा है, कोई किसी का जीजा या साला। लेकिन कहानी और स्क्रिप्ट पूरी तरह नई है। हमने पुराने शो की नकल नहीं की। सवाल: ‘अनोखी’ का किरदार कैसा है? जवाब: मुसद्दी लाल सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर परेशान लौटते थे। लेकिन उनकी बेटी अनोखी बिल्कुल अलग है। उसकी मां ने बचपन से बताया है कि उसके पिता बहादुर और जीतने वाले इंसान थे। इसलिए अनोखी को लगता है कि वह भी हर लड़ाई जीत सकती है। वह मुश्किलों का सामना करती है, कई बार फंसती है, लेकिन हार नहीं मानती। हर एपिसोड के अंत में वह अपना काम निकलवा लेती है और सामने वाले को सबक भी सिखाती है। चाहे उसे साम, दाम, दंड या भेद, कोई भी तरीका अपनाना पड़े। सवाल: अनोखी की कमजोरियां क्या हैं? जवाब: अनोखी कोई आदर्शवादी किरदार नहीं है। वह मानवीय है और उसमें कमियां भी हैं। अगर उसे लगता है कि किसी काम के लिए शॉर्टकट अपनाना पड़ेगा, तो वह पीछे नहीं हटती। कई बार वह पैसे देकर काम करवाने की कोशिश करती है और बाद में ठगी का शिकार हो जाती है। कई एपिसोड में वह दूसरों को चकमा भी देती है। यही बात उसके किरदार को दिलचस्प बनाती है। सवाल: क्या आपके साथ भी कभी कोई स्कैम हुआ है? जवाब: जी हां, मेरे साथ भी धोखाधड़ी हुई है। मुंबई आने की तैयारी के दौरान मुझे एक फोन आया। सामने वाले ने खुद को कास्टिंग डायरेक्टर बताया और कहा कि मुझे एक टीवी शो के लिए चुना गया है। उसने रजिस्ट्रेशन के नाम पर 10 से 15 हजार रुपए मांगे। उस समय मैं स्कूल में पढ़ाती थी और मेहनत से पैसे जमा कर रही थी। मैंने पैसे भेज दिए, लेकिन बाद में उसका फोन बंद हो गया और वह गायब हो गया। उस समय मैं बहुत रोई थी। मेरी तनख्वाह सिर्फ तीन हजार रुपए थी और मैंने मुश्किल से वह रकम जुटाई थी। सवाल: क्या आपने उसी समय तय कर लिया था कि एक्टिंग करनी है? जवाब: जी हां। मेरे पिता शुरू में इसके खिलाफ थे। उनका मानना था कि लड़कियों के लिए यह इंडस्ट्री सुरक्षित नहीं है। उन्हें मनाने में काफी समय लगा। मैंने 2016 में एक नाटक लिखा था। भाई के साथ उसकी कास्टिंग, रिहर्सल और मंचन किया। लोगों को वह नाटक पसंद आया। इसके बाद परिवार को भरोसा हुआ कि मैं अभिनय के क्षेत्र में कुछ कर सकती हूं। इसके बाद मैंने मुंबई आने का फैसला कर लिया। सवाल: मुंबई आने का फैसला कैसे लिया? परिवार का क्या रिएक्शन था? जवाब: उस नाटक के बाद मुंबई आने का फैसला मैंने लगभग कर लिया था, लेकिन पापा को सीधे नहीं बताया था। मेरी ट्रेन अगले दिन थी और उस रात मम्मी व भाई ने उन्हें समझाया। शुरुआत में वे हैरान थे, लेकिन आखिरकार मान गए। पूरा परिवार मुझे छोड़ने स्टेशन आया था। वह पल भावुक था। सवाल: मुंबई आने के बाद शुरुआत कैसी रही? जवाब: मुंबई आने के बाद मैं अंधेरी ईस्ट के चकाला इलाके में तीन लड़कियों के साथ छोटे किराए के घर में रहती थी। यह मेरे लिए नया अनुभव था। 26 अक्टूबर 2017 को मैं मुंबई आई और 28 अक्टूबर को ही ‘इंडियाज नेक्स्ट सुपरस्टार’ के ऑडिशन का फोन आ गया। मैंने ऑडिशन दिया और शॉर्टलिस्ट हो गई। इसके बाद दो महीने तक वर्कशॉप चली। हालांकि, मुझे पांच बार रिजेक्ट किया गया। एक समय मैं निराश होकर लखनऊ लौट गई। लेकिन जिस दिन मैं वहां पहुंची, उसी दिन फोन आया कि मेरा चयन हो गया है और मुझे वापस मुंबई आना होगा। पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने मेरी टिकट करवाई और वहीं से करियर की शुरुआत हुई। सवाल: संघर्ष के दिनों में आपका प्लान क्या था? जवाब: मेरे पिताजी ने मुझे दो साल का समय दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर दो साल में कुछ नहीं हुआ, तो वापस आकर शादी करनी होगी। मैंने सोच रखा था कि अगर अभिनय से काम नहीं मिला, तो नौकरी कर लूंगी। मैं पहले से पढ़ाती थी, इसलिए भरोसा था कि किसी स्कूल या संस्थान में काम मिल जाएगा। मेरा मानना था कि अपने सपनों का खर्च खुद उठाना चाहिए। सवाल: आपकी पढ़ाई-लिखाई कैसी रही? जवाब: मैंने ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद क्रिएटिव राइटिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। साथ ही भरतनाट्यम की ट्रेनिंग ली। मैं हमेशा से कला और साहित्य की ओर झुकी रही हूं। मुझे साहित्य और मनोविज्ञान जैसे विषय पसंद थे। कभी सोचा था कि प्रोफेसर बनूंगी, लेकिन किस्मत मुझे अभिनय की दुनिया में ले आई। सवाल: पहला बड़ा मौका कैसे मिला? जवाब: मेरी पहली तेलुगु फिल्म ‘एजेंट साई श्रीनिवास आत्रेय’ थी। मैं हैदराबाद में उसकी शूटिंग कर रही थी। उसी दौरान टीवी शो ‘गठबंधन’ के लिए ऑडिशन का कॉल आया। शूटिंग की वजह से मैं तुरंत नहीं जा सकी। कई बार फोन आने के बाद जब मुंबई लौटी, तब ऑडिशन दिया और चयन हो गया। वहीं से टीवी इंडस्ट्री में मेरी शुरुआत हुई। सवाल: तेलुगु फिल्म कैसे मिली थी? जवाब: ‘इंडियाज नेक्स्ट सुपरस्टार’ के दौरान मैंने एक नागिन एक्ट किया था। फिल्म के निर्देशक ने वही प्रदर्शन देखा और उन्हें मेरा काम पसंद आया। इसके बाद मुझे फिल्म का प्रस्ताव मिला। शुरुआत में यकीन नहीं हुआ, क्योंकि मैं कभी साउथ इंडिया नहीं गई थी। लेकिन कहानी अच्छी लगी और मैंने फिल्म कर ली। फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन उस समय मैं टीवी शो ‘गठबंधन’ में व्यस्त थी, इसलिए प्रमोशन का हिस्सा नहीं बन सकी। सवाल: आपके करियर का सबसे खास किरदार कौन-सा रहा? जवाब: मेरे सभी किरदारों को दर्शकों ने प्यार दिया है। लेकिन पहला शो हमेशा खास होता है। ‘गठबंधन’ ने मुझे पहचान दिलाई और घर-घर तक पहुंचाया। इसके अलावा ‘नमक’ का किरदार भी मेरे दिल के करीब है। उस शो का विषय मजबूत था और दर्शकों ने उसे काफी पसंद किया। सवाल: टीवी इंडस्ट्री में लंबे काम के घंटों को लेकर आपका अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैंने 20 से 22 घंटे तक लगातार काम किया है। शुरुआत में हमें अपने अधिकारों की ज्यादा जानकारी नहीं थी। ‘गठबंधन’ के दौरान वरिष्ठ कलाकारों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट में काम के घंटे तय कराए जा सकते हैं। इसके बाद मैंने कॉन्ट्रैक्ट में यह शर्त जोड़नी शुरू कर दी कि रोजाना सीमित घंटे ही काम करूंगी। सवाल: ‘हीरामंडी’ में काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत शानदार। मैंने खुद को वहां नए कलाकार की तरह रखा। मुझे लगा कि मेरे पास सिर्फ टैलेंट है और मुझे सीखना है। सेट पर बड़े कलाकार थे, इसलिए हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता था। टीवी में सीखा अनुशासन और तेजी ‘हीरामंडी’ में बहुत काम आई। संजय लीला भंसाली सर प्रतिभाशाली निर्देशक हैं। उनका विजन बड़ा है और वे हर छोटे कलाकार पर बराबर ध्यान देते हैं। सेट पर किसी जूनियर आर्टिस्ट की पायल से लेकर हेयरस्टाइल तक उनकी नजर रहती थी। उनके साथ काम करने के लिए अहंकार छोड़कर उनके विजन पर भरोसा करना पड़ता है। सवाल: ‘हीरामंडी’ आपको कैसे मिली थी? जवाब: मैं टीवी शो ‘नमक इश्क का’ की शूटिंग कर रही थी, तभी ऑडिशन का कॉल आया। मैंने मेकअप रूम में ही ऑडिशन रिकॉर्ड किया। इसके बाद संजय लीला भंसाली से मुलाकात हुई। उनके सामने बैठना मेरे लिए किसी सपने जैसा था। मुझे लगा नहीं था कि मेरा चयन होगा, लेकिन किस्मत से यह मौका मिल गया। सवाल: ‘हीरामंडी’ से आपके करियर को कितना फायदा हुआ? जवाब: बहुत फायदा हुआ। यह शो 192 देशों में रिलीज हुआ और दुनिया भर से लोगों के संदेश आने लगे। एक कलाकार के तौर पर मुझे लगा कि मेरे काम को वैश्विक पहचान मिली है। इसी शो की वजह से आगे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स भी मिले। सवाल: फिल्मों के ऑफर आते हैं? जवाब: जी हां, ऑफर आते हैं। लेकिन मेरी कुछ शर्तें हैं। मैं वही काम करना पसंद करती हूं, जिसे परिवार के साथ बैठकर देख सकूं। कई बार अच्छी कहानियां सिर्फ एक-दो दृश्यों की वजह से छोड़नी पड़ती हैं। अफसोस होता है, लेकिन मेरा मानना है कि जो मेरे लिए बना है, वह मुझे जरूर मिलेगा। सवाल: आपने प्रोडक्शन में भी कदम रखा है? जवाब: जी हां। मुझे और मेरे भाई को लिखना पसंद है। हमने मिलकर कुछ कहानियां लिखीं और फिर अपना कंटेंट बनाने का फैसला किया। हमने कुछ वर्टिकल ड्रामा और अन्य प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया है। भविष्य में फिल्मों और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने की योजना है। सवाल: सफलता को आप कैसे परिभाषित करती हैं? जवाब: मेरे लिए सफलता सिर्फ प्रसिद्धि नहीं है। सबसे बड़ी सफलता यह है कि मैंने लोगों की सोच बदली है। मैं ऐसे माहौल से आती हूं, जहां लोग मानते थे कि अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए समझौते करने पड़ते हैं। अगर मुझे देखकर कोई युवा यह विश्वास करता है कि मेहनत और प्रतिभा के दम पर सफलता मिल सकती है, तो वही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। सवाल: युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी? जवाब: अगर किसी भी काम के लिए आत्मसम्मान या सिद्धांत छोड़ने पड़ रहे हैं, तो वह काम मत कीजिए। अभिनय में कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत करनी पड़ती है, ऑडिशन देने पड़ते हैं और धैर्य रखना पड़ता है। खासतौर पर लड़कियों से मैं कहना चाहूंगी कि अगर कोई आपसे समझौता करने की बात करे, तो वहां से तुरंत निकल जाएं। इंडस्ट्री में अच्छे लोग हैं और मेहनत करने वालों के लिए यहां अवसरों की कमी नहीं है।

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जवाब: अनोखी कोई आदर्शवादी किरदार नहीं है। वह मानवीय है और उसमें कमियां भी हैं। अगर उसे लगता है कि किसी काम के लिए शॉर्टकट अपनाना पड़ेगा, तो वह पीछे नहीं हटती। कई बार वह पैसे देकर काम करवाने की कोशिश करती है और बाद में ठगी का शिकार हो जाती है। कई एपिसोड में वह दूसरों को चकमा भी देती है। यही बात उसके किरदार को दिलचस्प बनाती है। सवाल: क्या आपके साथ भी कभी कोई स्कैम हुआ है? जवाब: जी हां, मेरे साथ भी धोखाधड़ी हुई है। मुंबई आने की तैयारी के दौरान मुझे एक फोन आया। सामने वाले ने खुद को कास्टिंग डायरेक्टर बताया और कहा कि मुझे एक टीवी शो के लिए चुना गया है। उसने रजिस्ट्रेशन के नाम पर 10 से 15 हजार रुपए मांगे। उस समय मैं स्कूल में पढ़ाती थी और मेहनत से पैसे जमा कर रही थी। मैंने पैसे भेज दिए, लेकिन बाद में उसका फोन बंद हो गया और वह गायब हो गया। उस समय मैं बहुत रोई थी। मेरी तनख्वाह सिर्फ तीन हजार रुपए थी और मैंने मुश्किल से वह रकम जुटाई थी। सवाल: क्या आपने उसी समय तय कर लिया था कि एक्टिंग करनी है? जवाब: जी हां। मेरे पिता शुरू में इसके खिलाफ थे। उनका मानना था कि लड़कियों के लिए यह इंडस्ट्री सुरक्षित नहीं है। उन्हें मनाने में काफी समय लगा। मैंने 2016 में एक नाटक लिखा था। भाई के साथ उसकी कास्टिंग, रिहर्सल और मंचन किया। लोगों को वह नाटक पसंद आया। इसके बाद परिवार को भरोसा हुआ कि मैं अभिनय के क्षेत्र में कुछ कर सकती हूं। इसके बाद मैंने मुंबई आने का फैसला कर लिया। सवाल: मुंबई आने का फैसला कैसे लिया? 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जवाब: मैंने ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद क्रिएटिव राइटिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। साथ ही भरतनाट्यम की ट्रेनिंग ली। मैं हमेशा से कला और साहित्य की ओर झुकी रही हूं। मुझे साहित्य और मनोविज्ञान जैसे विषय पसंद थे। कभी सोचा था कि प्रोफेसर बनूंगी, लेकिन किस्मत मुझे अभिनय की दुनिया में ले आई। सवाल: पहला बड़ा मौका कैसे मिला? जवाब: मेरी पहली तेलुगु फिल्म ‘एजेंट साई श्रीनिवास आत्रेय’ थी। मैं हैदराबाद में उसकी शूटिंग कर रही थी। उसी दौरान टीवी शो ‘गठबंधन’ के लिए ऑडिशन का कॉल आया। शूटिंग की वजह से मैं तुरंत नहीं जा सकी। कई बार फोन आने के बाद जब मुंबई लौटी, तब ऑडिशन दिया और चयन हो गया। वहीं से टीवी इंडस्ट्री में मेरी शुरुआत हुई। सवाल: तेलुगु फिल्म कैसे मिली थी? जवाब: ‘इंडियाज नेक्स्ट सुपरस्टार’ के दौरान मैंने एक नागिन एक्ट किया था। फिल्म के निर्देशक ने वही प्रदर्शन देखा और उन्हें मेरा काम पसंद आया। इसके बाद मुझे फिल्म का प्रस्ताव मिला। शुरुआत में यकीन नहीं हुआ, क्योंकि मैं कभी साउथ इंडिया नहीं गई थी। लेकिन कहानी अच्छी लगी और मैंने फिल्म कर ली। फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन उस समय मैं टीवी शो ‘गठबंधन’ में व्यस्त थी, इसलिए प्रमोशन का हिस्सा नहीं बन सकी। सवाल: आपके करियर का सबसे खास किरदार कौन-सा रहा? जवाब: मेरे सभी किरदारों को दर्शकों ने प्यार दिया है। लेकिन पहला शो हमेशा खास होता है। ‘गठबंधन’ ने मुझे पहचान दिलाई और घर-घर तक पहुंचाया। इसके अलावा ‘नमक’ का किरदार भी मेरे दिल के करीब है। उस शो का विषय मजबूत था और दर्शकों ने उसे काफी पसंद किया। सवाल: टीवी इंडस्ट्री में लंबे काम के घंटों को लेकर आपका अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैंने 20 से 22 घंटे तक लगातार काम किया है। शुरुआत में हमें अपने अधिकारों की ज्यादा जानकारी नहीं थी। ‘गठबंधन’ के दौरान वरिष्ठ कलाकारों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट में काम के घंटे तय कराए जा सकते हैं। इसके बाद मैंने कॉन्ट्रैक्ट में यह शर्त जोड़नी शुरू कर दी कि रोजाना सीमित घंटे ही काम करूंगी। सवाल: ‘हीरामंडी’ में काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत शानदार। मैंने खुद को वहां नए कलाकार की तरह रखा। मुझे लगा कि मेरे पास सिर्फ टैलेंट है और मुझे सीखना है। सेट पर बड़े कलाकार थे, इसलिए हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता था। टीवी में सीखा अनुशासन और तेजी ‘हीरामंडी’ में बहुत काम आई। संजय लीला भंसाली सर प्रतिभाशाली निर्देशक हैं। उनका विजन बड़ा है और वे हर छोटे कलाकार पर बराबर ध्यान देते हैं। सेट पर किसी जूनियर आर्टिस्ट की पायल से लेकर हेयरस्टाइल तक उनकी नजर रहती थी। उनके साथ काम करने के लिए अहंकार छोड़कर उनके विजन पर भरोसा करना पड़ता है। सवाल: ‘हीरामंडी’ आपको कैसे मिली थी? जवाब: मैं टीवी शो ‘नमक इश्क का’ की शूटिंग कर रही थी, तभी ऑडिशन का कॉल आया। मैंने मेकअप रूम में ही ऑडिशन रिकॉर्ड किया। इसके बाद संजय लीला भंसाली से मुलाकात हुई। उनके सामने बैठना मेरे लिए किसी सपने जैसा था। मुझे लगा नहीं था कि मेरा चयन होगा, लेकिन किस्मत से यह मौका मिल गया। सवाल: ‘हीरामंडी’ से आपके करियर को कितना फायदा हुआ? जवाब: बहुत फायदा हुआ। यह शो 192 देशों में रिलीज हुआ और दुनिया भर से लोगों के संदेश आने लगे। एक कलाकार के तौर पर मुझे लगा कि मेरे काम को वैश्विक पहचान मिली है। इसी शो की वजह से आगे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स भी मिले। सवाल: फिल्मों के ऑफर आते हैं? जवाब: जी हां, ऑफर आते हैं। लेकिन मेरी कुछ शर्तें हैं। मैं वही काम करना पसंद करती हूं, जिसे परिवार के साथ बैठकर देख सकूं। कई बार अच्छी कहानियां सिर्फ एक-दो दृश्यों की वजह से छोड़नी पड़ती हैं। अफसोस होता है, लेकिन मेरा मानना है कि जो मेरे लिए बना है, वह मुझे जरूर मिलेगा। सवाल: आपने प्रोडक्शन में भी कदम रखा है? जवाब: जी हां। मुझे और मेरे भाई को लिखना पसंद है। हमने मिलकर कुछ कहानियां लिखीं और फिर अपना कंटेंट बनाने का फैसला किया। हमने कुछ वर्टिकल ड्रामा और अन्य प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया है। भविष्य में फिल्मों और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने की योजना है। सवाल: सफलता को आप कैसे परिभाषित करती हैं? जवाब: मेरे लिए सफलता सिर्फ प्रसिद्धि नहीं है। सबसे बड़ी सफलता यह है कि मैंने लोगों की सोच बदली है। मैं ऐसे माहौल से आती हूं, जहां लोग मानते थे कि अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए समझौते करने पड़ते हैं। अगर मुझे देखकर कोई युवा यह विश्वास करता है कि मेहनत और प्रतिभा के दम पर सफलता मिल सकती है, तो वही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। सवाल: युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी? जवाब: अगर किसी भी काम के लिए आत्मसम्मान या सिद्धांत छोड़ने पड़ रहे हैं, तो वह काम मत कीजिए। अभिनय में कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत करनी पड़ती है, ऑडिशन देने पड़ते हैं और धैर्य रखना पड़ता है। खासतौर पर लड़कियों से मैं कहना चाहूंगी कि अगर कोई आपसे समझौता करने की बात करे, तो वहां से तुरंत निकल जाएं। इंडस्ट्री में अच्छे लोग हैं और मेहनत करने वालों के लिए यहां अवसरों की कमी नहीं है।

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