सीएम डॉ. यादव ने कान्हा में छोड़े 4 जंगली भैंसे:बालाघाट में 150 साल बाद हुई पुनर्बसाहट, जल्द लाए जाएंगे गैंडे भी

बालाघाट के कान्हा क्षेत्र स्थित सुपखार रेंज में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को चार जंगली भैंसों को बाड़े में छोड़ा। यह कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव 9:15 बजे सुपखार पहुंचे थे। दरअसल, मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से गढ़ी के टोपला पहुंचे थे। वहां से उनका काफिला सड़क मार्ग से बेड़ा स्थल पहुंचा, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से इस पुनर्स्थापन योजना का शुभारंभ किया। असम के काजीरंगा से लाई गईं थीं 4 भैसें ये जंगली भैंसे असम के काजीरंगा से लगभग 2 हजार किलोमीटर का सफर तय करके कान्हा के सुपखार रेंज लाए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश को बाघ राज्य के बाद ‘व्हाइट बफेलो स्टेट’ के रूप में भी पहचान मिले। भविष्य में कान्हा में गैंडे भी लाए जाने की योजना है। जैव विविधता से समृद्ध कान्हा में इन भैंसों के आगमन का वन्यजीव प्रेमियों ने स्वागत किया है। 150 साल बाद हुई पुनर्बसाहट जानकारी के अनुसार, 1960 और 1970 के दशक में जिले में जंगली भैंसे पाए जाते थे, लेकिन समय के साथ वे विलुप्त हो गए। सरकार की यह पुनर्स्थापन मुहिम जिले के पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह कार्य वन विभाग की ‘कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना’ के तहत किया गया है। तस्वीरों में देखिए पुनर्स्थापन योजना का शुभारंभ… सीएम बोले-नए मेहमानों से इकोसिस्टम को मिलेगी मदद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि 150 साल बाद मध्य प्रदेश की धरती पर कान्हा अभयारण्य में जंगली भैंसों की पुनर्बसाहट की जा रही है। यह पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक अद्भुत अवसर है। उन्होंने कहा कि इन नए मेहमानों के आगमन से इकोसिस्टम को मदद मिलेगी, क्योंकि इसमें एक महत्वपूर्ण कड़ी गायब थी। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विलुप्तप्राय जानवरों को लाकर प्रदेश में बसाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे न केवल प्रदेश का सौंदर्य बढ़ेगा, बल्कि पर्यटन क्षेत्रों की आकर्षण क्षमता और पर्यटन भी बढ़ेगा। लाए गए चार जंगली भैंसों में तीन मादा और एक नर किशोर शावक शामिल हैं।
भारतीय पहलवानों को ‘ग्लैडिएटर’ बनाएंगे नए कोच शाको:कहा – सिर्फ उठक-बैठक और जिम से काम नहीं चलेगा, हार का डर मिटाना होगा

‘क्या आप ग्लैडिएटर को जानते हैं? वह योद्धा कभी हारने के बारे में नहीं सोचता, वह हमेशा जीतने के लिए मैदान में उतरता है। मैं भारतीय पहलवानों को ठीक ऐसा ही चैम्पियन बनाना चाहता हूं।’ यह कहना है भारतीय पुरुष फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के नए कोच शाको बेंटिनिडिस का। जॉर्जिया के रहने वाले शाको वही कोच हैं, जिन्होंने अपने मार्गदर्शन में बजरंग पूनिया को टोक्यो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जिताया था। अब भारतीय कुश्ती महासंघ ने उन्हें पूरी राष्ट्रीय टीम को निखारने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। शाको के साथ जापान, रूस और अमेरिका के विशेषज्ञ भी भारतीय कुश्ती के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा बनने जा रहे हैं। शाको भारतीय पहलवानों के कभी न खत्म होने वाले स्टैमिना (दमखम) के बहुत बड़े फैन हैं, लेकिन उन्हें एक बात खटकती है-‘विनिंग मेंटालिटी’ यानी जीतने की जिद का न होना। शाको का मानना है कि भारतीय पहलवान विदेशों में ट्रेनिंग करने के बजाय देश में ही एक-दूसरे के साथ ज्यादा अभ्यास करते हैं। वे कहते हैं, ‘जब हमारा कोई पहलवान किसी रूसी या अमेरिकी से भिड़ता है, तो उसके दिमाग में चलता है कि ‘अरे, यह तो बहुत बड़े देश का पहलवान है।’ मैं उनका यह डर और हीन भावना खत्म करना चाहता हूं। आपके पास 200 प्रतिशत ताकत हो सकती है, लेकिन अगर चैम्पियन वाली मानसिकता नहीं है, तो उसका कोई फायदा नहीं। मेरी प्राथमिकता भारतीय पहलवानों को विदेशी कैंप्स में भेजना है, ताकि वे रूस और अमेरिका के पहलवानों के साथ प्रैक्टिस करें और समझें कि वे किसी दूसरे ग्रह से नहीं आए हैं।’ शाको भारत के पारंपरिक ट्रेनिंग के तरीके में भी बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं। सोनीपत के साई सेंटर का अपना पुराना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने अनुशासनहीनता पर भी नाराजगी जताई। कोचिंग के तरीके पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत में ज्यादातर पहलवान सिर्फ उठक-बैठक और जिम… उठक-बैठक और जिम में ही लगे रहते हैं। कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, तकनीक चाहिए होती है। अगर आप कोई दांव नहीं सीख पा रहे हैं, तो उसे 10-20 बार नहीं, बल्कि मैट पर 200 बार प्रैक्टिस करें।’ बजरंग पूनिया ने भी जिम छोड़ मैट पर अपनी तकनीक और स्पीड सुधारी थी। 65 किग्रा में सुजीत को मान रहे ओलिंपिक का दावेदार शाको 65 किग्रा भार वर्ग के नए स्टार और हाल ही में एशियाई चैम्पियन बने युवा पहलवान सुजीत कलकल से काफी प्रभावित हैं। सुजीत की तारीफ करते हुए शाको कहते हैं, ‘वह एक अद्भुत पहलवान है। उसे बस थोड़ी सी रणनीतिक सलाह की जरूरत है। अगर वह अपनी ताकत में सिर्फ 10 प्रतिशत का भी इजाफा कर ले, तो वह लॉस एंजिलिस ओलिंपिक में दुनिया के किसी भी पहलवान के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा।’
एक्टर भरत कपूर का 80 साल की उम्र में निधन:आखिरी रास्ता और खुदा गवाह जैसी फिल्मों में दिखे थे

वेटरन एक्टर भरत कपूर का सोमवार को निधन हो गया। वह 80 साल के थे। उन्होंने मुंबई में अपने घर पर अंतिम सांस ली। उन्होंने अपने लगभग चार दशकों के करियर में अमिताभ बच्चन स्टारर आखिरी रास्ता और खुदा गवाह समेत 200 से अधिक फिल्मों में काम किया था। उन्होंने नूरी, आखिरी रास्ता, बाजार, इनकार, राम बलराम और बरसात जैसी फिल्मों में नेगेटिव रोल निभाए थे। एक्टर अवतार गिल ने न्यूज एजेंसी ANI से भरत कपूर के निधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि भरत कपूर पिछले दो-तीन दिनों से बीमार थे। वह घर पर ही थे और सोमवार दोपहर करीब 3 बजे उनका निधन हुआ। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार भरत कपूर का निधन मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण हुआ। अवतार गिल ने कहा कि उन्हें शाम करीब 4 से 4:30 बजे भरत कपूर के बेटे का फोन आया था। उन्होंने यह भी बताया कि भरत कपूर ने काफी समय पहले काम करना बंद कर दिया था। कल शाम को परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। नूरी जैसी कई फिल्मों में काम किया भरत कपूर ने 1972 में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। करीब चार दशक लंबे करियर में उन्होंने फिल्मों में मजबूत सपोर्टिंग रोल और विलेन के किरदार निभाकर पहचान बनाई। उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में काम किया, जिनमें नूरी (1979), राम बलराम (1980), लव स्टोरी (1981), बाजार (1982), गुलामी (1985), आखिरी रास्ता (1986), सत्यमेव जयते (1987), स्वर्ग (1990), खुदा गवाह (1992) और रंग (1993) शामिल हैं। बाद में उन्होंने बरसात (1995), साजन चले ससुराल (1996) और मीनाक्षी: अ टेल ऑफ थ्री सिटीज (2004) जैसी फिल्मों में भी काम किया। फिल्मों के अलावा भरत कपूर ने टेलीविजन में भी काम किया। वह कैम्पस, परंपरा, राहत, सांस, अमानत, तारा, चुनौती और कहानी चंद्रकांता की जैसे शो में नजर आए।
शहडोल में एक साल के मासूम का अपहरण,:फूफा निकला आरोपी, बोला- मायके गई पत्नी वापस नहीं आ रही थी

शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र में एक साल के मासूम बच्चे के अपहरण का मामला सामने आया है। बच्चे का अपहरण उसके फूफा ने ही किया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटों में बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। यह घटना मैर गांव की है। सोमवार रात करीब 9 बजे, बच्चे की मां संगीता देवी ब्यौहारी थाने पहुंचीं और बताया कि उनका एक साल का बेटा महेंद्र (पिता पुरन) लापता हो गया है। उन्होंने पुलिस को बताया कि बच्चे का फूफा उमेश सिंह उसे खिलाने के बहाने गोद में लेकर गया था, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। थाना प्रभारी ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद तीन विशेष टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने रातभर संभावित ठिकानों पर छापेमारी की और करीब पांच स्थानों पर दबिश दी, लेकिन आरोपी हर जगह से फरार मिला। सुबह मिला सुराग सुबह होते-होते साइबर सेल और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को अहम सुराग मिला। पता चला कि आरोपी उमेश सिंह अपने घर से लगभग 10 किलोमीटर दूर भमरहा के जंगल में एक झोपड़ी में छिपा हुआ है। पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मासूम महेंद्र को उसके पास से सकुशल बरामद कर लिया गया। पत्नी वापस नहीं आ रही थी पुलिस पूछताछ में आरोपी उमेश सिंह ने अपहरण का चौंकाने वाला कारण बताया। उसने कहा कि उसकी पत्नी कुछ दिन पहले अपने मायके मैर गांव आ गई थी और वापस जाने से इनकार कर रही थी। साथ ही, उसने आरोपी को अपने बच्चों से मिलने भी नहीं दिया। इसी बात से नाराज होकर उसने अपने साले के बेटे का अपहरण कर लिया था। बच्चे को सीने लगा रो पड़ी मां मासूम को सकुशल वापस पाकर मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह बच्चे को सीने से लगाकर रो पड़ी। थाना प्रभारी जिया उल हक ने बताया कि पुलिस ने पूरी रात बिना रुके कार्रवाई की और गांव वालों की मदद से आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिली। फिलहाल आरोपी के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इस कारवाही में थाना प्रभारी के साथ राजेंद्र द्विवेदी नरेंद्र उपाध्याय सुखेन्द्र और चित्रांशी शुक्ला सहित अन्य पुलिस कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
E20 के बाद E85 फ्लेक्स-फ्यूल की तैयारी में भारत:माइलेज 30% तक कम हो सकता है; कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच कच्चे तेल के सप्लाई संकट को देखते हुए भारत सरकार अब E85 फ्लेक्स-फ्यूल की ओर कदम बढ़ा रही है। सरकार जल्द ही E85 फ्यूल की मंजूरी के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर सकती है, जिसके लिए मार्केट में आम सहमति बन चुकी है। खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करना लक्ष्य भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से 50% से ज्यादा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है जो हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरकर पहुंचता है। ईरान-अमेरिका तनाव की वजह से ये रूट बंद है, जिससे कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर के पार पहुंच गए हैं। कच्चे तेल का महंगा होना न केवल देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ है, बल्कि आत्मनिर्भरता के लिए भी चुनौती है। इसी वजह से सरकार अब इथेनॉल वाले ईंधन पर फोकस कर रही है। अभी 20% एथेनॉल वाले पेट्रोल की बिक्री हो रही E85 फ्यूल में 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है। अभी देशभर में E20 फ्यूल की बिक्री अनिवार्य है। इथेनॉल को गन्ने के रस, मक्का और सड़े हुए अनाज जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। ये फ्यूल पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करता है। ऑटो इंडस्ट्री तैयार, नोटिफिकेशन का इंतजार ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को लेकर अपनी तैयारी पहले ही दिखा दी है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी के मुताबिक, फ्लेक्स-फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक देश के तौर पर हम आयात पर निर्भर नहीं रहेंगे। सरकार अब E85 को रेगुलेटेड फ्यूल के रूप में अनिवार्य करने की जगह फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है। इन 4 मोर्चों पर चुनौतियों से निपटना होगा SP ग्लोबल के डायरेक्टर पुनीत गुप्ता का कहना है कि E85 को अपनाने के लिए बड़े इकोसिस्टम की जरूरत होगी। इसमें 4 मुख्य चुनौतियां हैं: माइलेज और कीमत बन सकती है रुकावट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तकनीक से ज्यादा बड़ी चुनौती फ्यूल की कीमत और माइलेज है। इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी कम होने के कारण फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का माइलेज 20 से 30% तक गिर सकता है। इस कमी की भरपाई के लिए फ्यूल की कीमत कम रखनी होगी । टोयोटा, मारुति इथेनॉल वाले वाहन पेश कर चुके टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां पहले ही हाई इथेनॉल ब्लेंड से चलने वाले वाहन पेश कर चुकी हैं। टीवीएस मोटर के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने भी संकेत दिए हैं कि कंपनी अपाचे सहित अपने कई सेगमेंट में इथेनॉल से चलने वाले वाहन लाने की योजना बना रही है। टैक्स बेनेफिट्स पर जोर देने की जरूरत विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को सब्सिडी देने के बजाय पॉलिसी इनेबलर के रूप में काम करना चाहिए। इसमें FFV (फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल) पर कम टैक्स, पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल के दामों में बड़ा अंतर और इथेनॉल को कार्बन-न्यूट्रल मानकर क्रेडिट देना शामिल है। नॉलेज पार्ट: क्या होता है फ्लेक्स-फ्यूल इंजन? यह एक ऐसा इंजन है जो एक से ज्यादा तरह के ईंधन (जैसे शुद्ध पेट्रोल या पेट्रोल-इथेनॉल का कोई भी मिश्रण) पर चल सकता है। इसमें सेंसर लगे होते हैं जो ईंधन के मिश्रण को पहचानकर इंजन की सेटिंग्स को अपने आप एडजस्ट कर लेते हैं।
भारत-न्यूजीलैंड में FTA से सेब बागवान चिंतित:राठौर बोले-इम्पोर्ट ड्यूटी 25% की; हिमाचल, कश्मीर-उत्तराखंड के किसानों पर पड़ेगी मार

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच बीते कल दिल्ली में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि इस एग्रीमेंट के बाद न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 फीसदी से घटाकर 25 प्रतिशत रह जाएगी। राठौर ने कहा- बेशक पहले साल में यह कोटा 32,500 मीट्रिक टन (लगभग 20 kg के 16,25,000 बॉक्स) से शुरू होता है, लेकिन छठे साल तक यह बढ़कर 45,000 मीट्रिक टन (लगभग 22,50,000 बॉक्स) हो जाएगा। यह सेब अप्रैल से अगस्त दौरान भारत के बाजार में आएगा। इसकी मार पहले निचले क्षेत्रों के सेब बागवानों को पड़ेगी। सीजन की शुरुआत से पहले ही विदेशी सेब के आने से बाजार गिर जाएगा और इसका असर पूरे सीजन पर रहेगा। राठौर ने कहा- न्यूज़ीलैंड की सेब इंडस्ट्री में प्रोडक्टिविटी बहुत ज्यादा है, मॉडर्न बागों में प्रति हेक्टेयर 50-70 टन (लगभग 2,500 से 3,500 बॉक्स प्रति हेक्टेयर) पैदावार होती है, जबकि हिमाचल प्रदेश में एवरेज प्रोडक्टिविटी मात्र 7-8 टन प्रति हेक्टेयर (लगभग 350 से 400 बॉक्स प्रति हेक्टेयर) है। इस वजह से हिमाचल में इनपुट कॉस्ट न्यूजीलैंड समेत दूसरे देशों से भी कहीं ज्यादा है। ऐसे में विदेशी सेब के भारतीय बाजार में आने से राज्य के बागवानों को उचित दाम नहीं मिलेगे। 2.5 लाख परिवार सेब पर डिपेंडेंट: राठौर कुलदीप राठौर ने कहा- भारत का सेब सेक्टर, जो हिमालयी बेल्ट में फैला हुआ है, बड़ी ग्रामीण इकॉनमी को सपोर्ट करता है। जम्मू और कश्मीर लगभग 76-77% प्रोडक्शन के साथ सबसे आगे है, उसके बाद हिमाचल प्रदेश लगभग 21-22% के साथ दूसरे नंबर पर है। अकेले हिमाचल में 1 लाख 15 हजार हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन पर सेब की खेती होती है और लगभग 2.5 लाख परिवार इस पर डिपेंडेंट हैं। केंद्र की किसान विरोधी नीतियों से किसान परेशान सेब राज्य की हॉर्टिकल्चर इनकम का लगभग 80% हिस्सा देते हैं। मगर केंद्र की किसान विरोधी नीतियों ने सेब उत्पादकों को चिंताएं बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 150 फीसदी करने का भरोसा हिमाचल के बागवानों को दिया था। पीएम ने अब तक इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का वादा पूरा तो नहीं किया, लेकिन इसे कम जरूर किया है। CA स्टोर में रखे सेब पर भी मार पड़ेगी राठौर ने कहा कि न्यूजीलैंड के सेब की ज्यादा मार CA (वातानुकुलित) स्टोरेज से निकलने वाले सेब पर पड़ने वाली है। उन्होंने बताया कि यह एग्रीमेंट स्वदेसी सेब की इंडस्ट्री को तबाह करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इम्पोर्ट कोटा और कीमतों की कड़ी निगरानी करने, कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग और ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने, किसानों को मॉडर्न टेक्नोलॉजी मुहैया कराने और आगे कोई भी बदलाव करने से पहले किसानों से सलाह लेने की मांग की है।
पन्ना टाइगर रिजर्व: बाघ की मौत पर कार्रवाई:बीटगार्ड निलंबित, रेंजर-वनपाल को आरोप पत्र; एसटीएफ कर रही जांच

मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ के कंकाल मिलने के मामले में प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। मैदानी अमले की घोर लापरवाही मानते हुए एक बीटगार्ड को निलंबित कर दिया गया है, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को आरोप पत्र जारी किए गए हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर बीके पटेल ने बताया कि गंगऊ अभ्यारण्य के बीट कटरिया में बाघ का कंकाल मिलने के बाद प्राथमिक जांच के आधार पर बीटगार्ड रामसफल बैगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इसके अतिरिक्त, निगरानी में चूक को लेकर कार्यवाहक वनपाल कमल किशोर मोची और रेंजर (परिक्षेत्राधिकारी) सागर शुक्ला को आरोप पत्र जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है। यह घटना बीते मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को सामने आई थी, जब मझगवां-हिनौता मुख्य मार्ग के पास वन कक्ष क्रमांक-278 में एक नर बाघ का पूरी तरह सड़ा हुआ शव मिला था, जो कंकाल में बदल चुका था। चौंकाने वाली बात यह है कि यह शव मुख्य मार्ग से मात्र 150 फीट की दूरी पर था। अनुमान है कि बाघ की मौत लगभग 15 दिन पहले हो चुकी थी। इतने दिनों तक शव का जंगल में पड़े रहना और गश्ती दल को इसकी जानकारी न मिलना, पीटीआर की ‘एम-स्ट्राइप्स’ निगरानी प्रणाली और मैदानी अमले की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है या इसके पीछे शिकारियों का हाथ है, इसकी गहन जांच जारी है। जबलपुर से आई विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं। डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि बाघ के अवशेषों के नमूने फॉरेंसिक लैब भेजे जा चुके हैं। पोस्टमार्टम और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चलेगा, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब एंट्री लेवल जॉब्स सफलता की गारंटी नहीं:नौकरी के भरोसे नहीं सीधे बिजनेस से करिअर लॉन्च कर रहे युवा

अमेरिका की हवाई यूनिवर्सिटी से 2024 में ग्रेजुएट हुई एशले टेरेल ने सोचा था कि मार्केटिंग में अच्छी नौकरी मिलेगी। डिग्री, इंटर्नशिप और अनुभव के बावजूद महीनों कोशिश के बाद उन्हें सिर्फ एक ऑफर स्टोर में काम करने का मिला। वह हर दिन नौकरी ढूंढती रहीं, यहां तक कि व्यस्त समय में भी आवेदन करती थीं। लेकिन उन्हें पसंदीदा नौकरी नहीं मिली। यह सिर्फ उनकी कहानी नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि एंट्री-लेवल नौकरियां तेजी से घट रही हैं। ऐसे में युवा विकल्प के तौर पर अब एआई टूल्स का उपयोग करके कंटेंट क्रिएशन, ऐप डेवलपमेंट और कंसल्टेंसी के जरिए अपना रास्ता खुद बना रहे हैं। अमेजन में काम करने वाली 25 वर्षीय मैडिसन, खाली समय में एआई की मदद से सोशल मीडिया एप बना रही हैं। उन्होंने बताया कि बिना एआई यह काम महीनों और बड़ी टीम के बिना संभव नहीं था, लेकिन अब एक महीने में प्रोटोटाइप तैयार हो गया। इसी तरह सदर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पढ़े सुहित अग्रवाल को बड़ी कंपनियों से जवाब नहीं मिला, तो स्टार्टअप्स में काम शुरू किया और एआई टूल्स की मदद से बड़ी जिम्मेदारियां निभाईं। अब इनके लिए तकनीक सिर्फ चुनौती नहीं, बल्कि खुद कुछ नया करने का साधन भी बन रही है। 22 वर्षीय सेलेस्टे अमाडॉन ने इन्वेस्टमेंट बैंकिंग जेपी मॉर्गन की इंटर्नशिप छोड़ खुद का डेटिंग एप ‘नोन’ शुरू किया। शुरू में परिवार ने विरोध किया, लेकिन बाद में जब उन्हें निवेश मिला, तो वही समर्थक बन गया। एलिजाह खासाबो, जो पहले कपड़े फोल्ड करते थे, आज अपनी टीम संभाल रहे हैं। हालांकि इसमें स्थिर आमदनी बड़ी चुनौती है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर जोसेफ फुलर के मुताबिक खुद का काम शुरू करना आसान नहीं है। ज्यादातर स्टार्टअप स्थिर आमदनी के अभाव में फेल होते हैं, फिर भी युवा इसमें करियर पर नियंत्रण देख रहे हैं। फुलर कहते हैं, एआई ने पारंपरिक नौकरियां घटाने के साथ नए काम के औजार भी दिए हैं। युवाओं के लिए बड़ा बदलाव यह है कि जॉब सुरक्षा कम हुई है, अपने दम पर कुछ बनाने का भरोसा भी बढ़ा है। नई पीढ़ी के लिए जॉब्स का पहला पड़ाव ही मुश्किल- एक्सपर्ट फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 22-27 साल के युवाओं में बेरोजगारी कोविड के बाद ऊंचे स्तर पर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे एंट्री-लेवल जॉब्स प्रभावित हो रही हैं, क्योंकि इनमें दोहराव वाले काम अब एआई कर रहा है। अर्थशास्त्री डैनियल झाओ कहते हैं ‘पहली सीढ़ी पर पैर रखना ही मुश्किल हो गया है।’ कई युवाओं को डिग्री के बाद भी रिटेल व पार्ट-टाइम काम करना पड़ रहा है।
Diljit Dosanjh Jimmy Fallon Show Video; Bhangra Dance

7 मिनट पहले कॉपी लिंक सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ एक बार फिर जिमी फैलन के शो में मंगलवार को नजर आए। शो में दिलजीत ने जिमी को भांगड़ा भी सिखाया। साथ ही इस इंटरनेशनल शो में दिलजीत ने पंजाबी गाने पर परफॉर्म किया। दिलजीत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शो के स्टूडियो से एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उनकी टीम स्टूडियो का दरवाजा खोलते हुए पूछती है, ‘क्या लगता था, नहीं लौटेंगे?’ इसके बाद कैमरा दिलजीत की ओर घूमता है और वह कहते हैं, ‘कहा था ना कि एक बार पंजाबी आ जाएं तो जल्दी नहीं जाते। जिमी फैलन आ गए ओये।’ वीडियो में आगे दिलजीत और जिमी फैलन साथ में भांगड़ा करते दिखाई देते हैं। दिलजीत और जिमी फैलन साथ में भांगड़ा करते हुए। दिलजीत ने शो में अपने नए पंजाबी गाने ‘मोरनी’ पर परफॉर्म भी किया। शो के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल ने भी कुछ क्लिप शेयर किए हैं, जिनमें दोनों की मस्ती और डांस की झलक देखने को मिलती है। दिलजीत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में यह भी बताया कि जिमी ने उन्हें एक धन्यवाद पत्र लिखकर शो में दोबारा आने के लिए आभार जताया। शो के आधिकारिक हैंडल पर शेयर किए गए दिलजीत 2024 में भी शो में नजर आए थे इससे पहले दिलजीत 28 अप्रैल 2024 को जिमी फैलन के शो द टुनाइट शो में नजर आए थे। वर्क फ्रंट की बात करें तो दिलजीत हाल ही में फिल्म बॉर्डर 2 में दिखे थे। वह अब जल्द डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में दिखेंगे। 1947 के पार्टीशन के बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, शरवरी वाघ और वेदांग रैना भी हैं। फिल्म 12 जून को थिएटर में रिलीज होगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Diljit Dosanjh Jimmy Fallon Show Video; Bhangra Dance

8 मिनट पहले कॉपी लिंक सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ एक बार फिर जिमी फैलन के शो में मंगलवार को नजर आए। शो में दिलजीत ने जिमी को भांगड़ा भी सिखाया। साथ ही इस इंटरनेशनल शो में दिलजीत ने पंजाबी गाने पर परफॉर्म किया। दिलजीत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शो के स्टूडियो से एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उनकी टीम स्टूडियो का दरवाजा खोलते हुए पूछती है, ‘क्या लगता था, नहीं लौटेंगे?’ इसके बाद कैमरा दिलजीत की ओर घूमता है और वह कहते हैं, ‘कहा था ना कि एक बार पंजाबी आ जाएं तो जल्दी नहीं जाते। जिमी फैलन आ गए ओये।’ वीडियो में आगे दिलजीत और जिमी फैलन साथ में भांगड़ा करते दिखाई देते हैं। दिलजीत और जिमी फैलन साथ में भांगड़ा करते हुए। दिलजीत ने शो में अपने नए पंजाबी गाने ‘मोरनी’ पर परफॉर्म भी किया। शो के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल ने भी कुछ क्लिप शेयर किए हैं, जिनमें दोनों की मस्ती और डांस की झलक देखने को मिलती है। दिलजीत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में यह भी बताया कि जिमी ने उन्हें एक धन्यवाद पत्र लिखकर शो में दोबारा आने के लिए आभार जताया। शो के आधिकारिक हैंडल पर शेयर किए गए दिलजीत 2024 में भी शो में नजर आए थे इससे पहले दिलजीत 28 अप्रैल 2024 को जिमी फैलन के शो द टुनाइट शो में नजर आए थे। वर्क फ्रंट की बात करें तो दिलजीत हाल ही में फिल्म बॉर्डर 2 में दिखे थे। वह अब जल्द डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में दिखेंगे। 1947 के पार्टीशन के बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, शरवरी वाघ और वेदांग रैना भी हैं। फिल्म 12 जून को थिएटर में रिलीज होगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









