‘क्या आप ग्लैडिएटर को जानते हैं? वह योद्धा कभी हारने के बारे में नहीं सोचता, वह हमेशा जीतने के लिए मैदान में उतरता है। मैं भारतीय पहलवानों को ठीक ऐसा ही चैम्पियन बनाना चाहता हूं।’ यह कहना है भारतीय पुरुष फ्रीस्टाइल कुश्ती टीम के नए कोच शाको बेंटिनिडिस का। जॉर्जिया के रहने वाले शाको वही कोच हैं, जिन्होंने अपने मार्गदर्शन में बजरंग पूनिया को टोक्यो ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जिताया था। अब भारतीय कुश्ती महासंघ ने उन्हें पूरी राष्ट्रीय टीम को निखारने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। शाको के साथ जापान, रूस और अमेरिका के विशेषज्ञ भी भारतीय कुश्ती के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा बनने जा रहे हैं। शाको भारतीय पहलवानों के कभी न खत्म होने वाले स्टैमिना (दमखम) के बहुत बड़े फैन हैं, लेकिन उन्हें एक बात खटकती है-‘विनिंग मेंटालिटी’ यानी जीतने की जिद का न होना। शाको का मानना है कि भारतीय पहलवान विदेशों में ट्रेनिंग करने के बजाय देश में ही एक-दूसरे के साथ ज्यादा अभ्यास करते हैं। वे कहते हैं, ‘जब हमारा कोई पहलवान किसी रूसी या अमेरिकी से भिड़ता है, तो उसके दिमाग में चलता है कि ‘अरे, यह तो बहुत बड़े देश का पहलवान है।’ मैं उनका यह डर और हीन भावना खत्म करना चाहता हूं। आपके पास 200 प्रतिशत ताकत हो सकती है, लेकिन अगर चैम्पियन वाली मानसिकता नहीं है, तो उसका कोई फायदा नहीं। मेरी प्राथमिकता भारतीय पहलवानों को विदेशी कैंप्स में भेजना है, ताकि वे रूस और अमेरिका के पहलवानों के साथ प्रैक्टिस करें और समझें कि वे किसी दूसरे ग्रह से नहीं आए हैं।’ शाको भारत के पारंपरिक ट्रेनिंग के तरीके में भी बड़ा बदलाव लाना चाहते हैं। सोनीपत के साई सेंटर का अपना पुराना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने अनुशासनहीनता पर भी नाराजगी जताई। कोचिंग के तरीके पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत में ज्यादातर पहलवान सिर्फ उठक-बैठक और जिम… उठक-बैठक और जिम में ही लगे रहते हैं। कुश्ती में सिर्फ ताकत नहीं, तकनीक चाहिए होती है। अगर आप कोई दांव नहीं सीख पा रहे हैं, तो उसे 10-20 बार नहीं, बल्कि मैट पर 200 बार प्रैक्टिस करें।’ बजरंग पूनिया ने भी जिम छोड़ मैट पर अपनी तकनीक और स्पीड सुधारी थी। 65 किग्रा में सुजीत को मान रहे ओलिंपिक का दावेदार शाको 65 किग्रा भार वर्ग के नए स्टार और हाल ही में एशियाई चैम्पियन बने युवा पहलवान सुजीत कलकल से काफी प्रभावित हैं। सुजीत की तारीफ करते हुए शाको कहते हैं, ‘वह एक अद्भुत पहलवान है। उसे बस थोड़ी सी रणनीतिक सलाह की जरूरत है। अगर वह अपनी ताकत में सिर्फ 10 प्रतिशत का भी इजाफा कर ले, तो वह लॉस एंजिलिस ओलिंपिक में दुनिया के किसी भी पहलवान के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा।’
















































