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US-Israel Accused of Cloud Theft in Middle East; Drought Ends

US-Israel Accused of Cloud Theft in Middle East; Drought Ends

30 मिनट पहले

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ईरान युद्ध के बीच इराकी सांसद अब्दुल्ला अल-खैखानी ने अमेरिका और इजराइल पर मिडिल ईस्ट में बादल चुराने का आरोप लगाया है।

अब्दुल्ला अल-खैखानी ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका और इजराइल कई सालों से विमानों की मदद से मिडिल ईस्ट में बादलों को चुराते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण क्षेत्र में लंबे समय से सूखा पड़ रहा था।

सांसद ने दावा किया कि अब अमेरिका और इजराइल ईरान के साथ युद्ध में मसरूफ हैं, इसलिए बारिश फिर से लौट आई है।

बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर चर्चाएं और अफवाहें तेज हो गईं। मौसम विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसी कोई तकनीक मौजूद नहीं है, जिससे बादलों की चोरी की जा सके।

इराक मौसम विभाग के प्रवक्ता अम्र अल-जबीरी ने इस दावे को न वैज्ञानिक बताया और न ही तार्किक। उन्होंने कहा कि पिछले साल सितंबर में ही अनुमान लगा लिया गया था कि 2026 इराक के लिए बारिश वाला साल रहेगा। विशेषज्ञों ने मौसम से जुड़े झूठे दावों और साजिश की थ्योरी से बचने की अपील की है।

इराकी सासंद ने आरोप लगाया कि अमेरिकी विमान क्षेत्र में बादलों को तोड़ते है जिसके कारण यहां सूखा पड़ता है।

इराकी सासंद ने आरोप लगाया कि अमेरिकी विमान क्षेत्र में बादलों को तोड़ते है जिसके कारण यहां सूखा पड़ता है।

वायुमंडल में बदलाव कर सूखा पैदा करने का आरोप

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, खैखानी ने दावा किया कि “एटमॉस्फेरिक मॉडिफिकेशन वेपन” यानी ऐसे किसी हथियार का इस्तेमाल किया गया जिससे वायुमंडल में बदलाव कर जानबूझकर सूखा पैदा किया गया।

इसी बीच, तुर्किये में भारी बारिश को भी कुछ लोग इसी साजिश से जोड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा गया कि युद्ध के कारण अमेरिकी विमान तुर्किये के एयरस्पेस में नहीं जा पा रहे, इसलिए वहां लगातार बारिश हो रही है। यह पोस्ट एक मिलियन से ज्यादा बार देखा गया।

कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया कि ईरान में दशकों से चल रहा सूखा, अमेरिका के ठिकानों पर हमले के पांच दिन के भीतर खत्म हो गया।

एक्सपर्ट्स- मौसम को नियंत्रित करने वाली तकनीक मौजूद नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे दावे भरोसे की कमी और जलवायु की समझ की कमी से पैदा होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम की दिशा या तीव्रता को सीधे नियंत्रित करने वाली कोई तकनीक मौजूद नहीं है। इसके उलट, मिडिल ईस्ट में बढ़ते चरम मौसम के पीछे जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र यूनिवर्सिटी के कावेह मदानी के मुताबिक, क्लाउड सीडिंग को राजनीतिक हथियार की तरह पेश किया जा रहा है। क्लाउड सीडिंग में बादलों पर छोटे कैमिकल (जैसे सिल्वर आयोडाइड) कण डाले जाते हैं, ताकि बारिश हो सके।

हालांकि वैज्ञानिक कहते हैं कि इसका असर बहुत सीमित होता है। यह मौजूदा बादलों से अधिकतम 15% तक ही बारिश बढ़ा सकता है। कुछ लोग मानते हैं कि एक जगह क्लाउड सीडिंग करने से पड़ोसी इलाकों से बारिश छीन ली जाती है।

खलीफा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डायना फ्रांसिस के मुताबिक, इसे ऐसे समझिए कि यह बादलों को हल्का सा धक्का देता है, मौसम को कंट्रोल नहीं करता।

इस क्षेत्र में बारिश का पैटर्न अनियमित

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, हाल के दशकों में इस क्षेत्र का तापमान वैश्विक औसत से दोगुनी दर से बढ़ा है। इससे हीटवेव लंबी और ज्यादा तीव्र हो रही हैं और बारिश का पैटर्न भी अनियमित हो गया है।

कुल बारिश कम हो रही है, लेकिन जब होती है तो बहुत तेज होती है, जिससे फ्लैश फ्लड या सूखे का खतरा बढ़ता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे पानी को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती है, जिससे इस तरह की अफवाहें तेजी से फैलती हैं।

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ये खबर भी पढ़ें…

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दोनों पहले भी 2021 में साथ आए थे और उन्होंने अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों को जोड़कर 12 साल से चली आ रही नेतन्याहू की सत्ता गिरा दी थी। पूरी खबर पढ़ें…

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अब्दुल्ला अल-खैखानी ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका और इजराइल कई सालों से विमानों की मदद से मिडिल ईस्ट में बादलों को चुराते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण क्षेत्र में लंबे समय से सूखा पड़ रहा था।

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बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर चर्चाएं और अफवाहें तेज हो गईं। मौसम विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसी कोई तकनीक मौजूद नहीं है, जिससे बादलों की चोरी की जा सके।

इराक मौसम विभाग के प्रवक्ता अम्र अल-जबीरी ने इस दावे को न वैज्ञानिक बताया और न ही तार्किक। उन्होंने कहा कि पिछले साल सितंबर में ही अनुमान लगा लिया गया था कि 2026 इराक के लिए बारिश वाला साल रहेगा। विशेषज्ञों ने मौसम से जुड़े झूठे दावों और साजिश की थ्योरी से बचने की अपील की है।

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वायुमंडल में बदलाव कर सूखा पैदा करने का आरोप

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इसी बीच, तुर्किये में भारी बारिश को भी कुछ लोग इसी साजिश से जोड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा गया कि युद्ध के कारण अमेरिकी विमान तुर्किये के एयरस्पेस में नहीं जा पा रहे, इसलिए वहां लगातार बारिश हो रही है। यह पोस्ट एक मिलियन से ज्यादा बार देखा गया।

कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया कि ईरान में दशकों से चल रहा सूखा, अमेरिका के ठिकानों पर हमले के पांच दिन के भीतर खत्म हो गया।

एक्सपर्ट्स- मौसम को नियंत्रित करने वाली तकनीक मौजूद नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे दावे भरोसे की कमी और जलवायु की समझ की कमी से पैदा होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम की दिशा या तीव्रता को सीधे नियंत्रित करने वाली कोई तकनीक मौजूद नहीं है। इसके उलट, मिडिल ईस्ट में बढ़ते चरम मौसम के पीछे जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र यूनिवर्सिटी के कावेह मदानी के मुताबिक, क्लाउड सीडिंग को राजनीतिक हथियार की तरह पेश किया जा रहा है। क्लाउड सीडिंग में बादलों पर छोटे कैमिकल (जैसे सिल्वर आयोडाइड) कण डाले जाते हैं, ताकि बारिश हो सके।

हालांकि वैज्ञानिक कहते हैं कि इसका असर बहुत सीमित होता है। यह मौजूदा बादलों से अधिकतम 15% तक ही बारिश बढ़ा सकता है। कुछ लोग मानते हैं कि एक जगह क्लाउड सीडिंग करने से पड़ोसी इलाकों से बारिश छीन ली जाती है।

खलीफा यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डायना फ्रांसिस के मुताबिक, इसे ऐसे समझिए कि यह बादलों को हल्का सा धक्का देता है, मौसम को कंट्रोल नहीं करता।

इस क्षेत्र में बारिश का पैटर्न अनियमित

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, हाल के दशकों में इस क्षेत्र का तापमान वैश्विक औसत से दोगुनी दर से बढ़ा है। इससे हीटवेव लंबी और ज्यादा तीव्र हो रही हैं और बारिश का पैटर्न भी अनियमित हो गया है।

कुल बारिश कम हो रही है, लेकिन जब होती है तो बहुत तेज होती है, जिससे फ्लैश फ्लड या सूखे का खतरा बढ़ता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे पानी को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती है, जिससे इस तरह की अफवाहें तेजी से फैलती हैं।

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दोनों पहले भी 2021 में साथ आए थे और उन्होंने अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों को जोड़कर 12 साल से चली आ रही नेतन्याहू की सत्ता गिरा दी थी। पूरी खबर पढ़ें…

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