Monday, 15 Jun 2026 | 11:11 AM

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मैहर में दादी करा रही थी बाल विवाह:कलेक्टर के निर्देश पर टीम ने मौके पर पहुंचकर शादी रोकी; कानून के बारे में बताया

मैहर में दादी करा रही थी बाल विवाह:कलेक्टर के निर्देश पर टीम ने मौके पर पहुंचकर शादी रोकी; कानून के बारे में बताया

मैहर जिले के ग्राम रामगढ़ में प्रशासन ने बुधवार रात करीब 8 बजे एक नाबालिग का बाल विवाह रुकवाया। कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी को बाल विवाह की सूचना मिलते ही उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद अमरपाटन एसडीएम डॉ. आरती सिंह के मार्गदर्शन में महिला और बाल विकास विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और विवाह रुकवाया। यहां करीब 13 साल की लड़की का विवाह कराया जा रहा था। बच्ची की दादी ही करा रही थी शादी बालिका के माता-पिता का निधन हो चुका है और वह अपनी दादी के साथ रह रही है। दादी ही उसका बाल विवाह करा रही थी। थाना प्रभारी ताला महेंद्र मिश्रा और नायब तहसीलदार अनिल सिंह को सूचना मिलते ही वे रात करीब 8 बजे ग्राम रामगढ़ पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बालिका की दादी और अन्य परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत होने वाली कानूनी कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। समझाइश के बाद परिजनों ने विवाह तुरंत रोकने पर सहमति जताई और यह आश्वासन दिया कि बच्ची का विवाह 18 साल की आयु पूरी होने से पहले नहीं किया जाएगा। प्रशासन की ओर से मौके पर पंचनामा तैयार कर आवश्यक कार्रवाई की गई। साथ ही परिजनों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके कानूनी पहलुओं के बारे में भी जागरूक किया गया।

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने बुधवार को न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। यह शाही जोड़ा 9/11 मेमोरियल पहुंचा था जहां उन्होंने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। खास बात यह है कि इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले ममदानी ने कहा था कि अगर उन्हें किंग चार्ल्स से अलग से बात करने का मौका मिला, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की बात उठाएंगे। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि इस छोटी बातचीत के दौरान ममदानी ने यह मुद्दा उठाया या नहीं। उनके ऑफिस से भी इस पर तुरंत कोई जवाब नहीं मिला। कोहिनूर वही हीरा है जो ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है और टावर ऑफ लंदन में रखा गया है। यह 177 साल से ब्रिटेन के पास है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है। 1849 से ब्रिटेन के पास कोहिनूर हीरा कोहिनूर हीरा 1849 से ब्रिटेन के पास है। द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सिख साम्राज्य के हारने के बाद अंग्रेजों ने पूरे पंजाब पर कब्जा कर लिया। उस समय सिख साम्राज्य के शासक दलीप सिंह थे, जिनकी उम्र सिर्फ 10 साल थी। युद्ध हारने के बाद अंग्रेजों ने उनसे लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करवाए। इस संधि की शर्तें बहुत सख्त थीं। इसके तहत पंजाब को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया गया और साथ ही कोहिनूर हीरा भी अंग्रेजों को सौंपना पड़ा। इसके बाद यह हीरा ब्रिटेन पहुंचा और क्वीन विक्टोरिया को दे दिया गया। विवादों से भरा है कोहिनूर का इतिहास कोहिनूर हीरे का इतिहास विवादों से भरा रहा है। कहा जाता है कि साल 1526 में हुमायूं ने आगरा किला पर हमला किया था। इसे जीतने पर बड़े पैमाने में खजाने के साथ-साथ विश्‍व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी मिला था। बाबरनामा के मुताबिक, कोहिनूर हीरा इतना कीमती था कि इससे पूरी दुनिया को ढाई दिन का भोजन करवाया जा सकता था। 1739 में ईरानी शासक नादिर शाह ने आक्रमण किया। उसने आगरा और दिल्ली में लूटपाट की। वह कोहि‍नूर और मयूर सिंहासन को भी साथ ले गया। नादिर शाह की हत्या के बाद 1747 में यह हीरा अफगानिस्तान के अहमद शाह के पास पहुंचा। इसके बाद कोहिनूर हीरा शाह शुजा के हाथों से होते हुए महाराजा रणजीत सिंह तक पहुंचा। औरंगजेब के शासन के दौरान उसने यह हीरा शाहजहां की देख-रेख में रखा था। शाहजहां आगरा किले में कैद होकर इसी हीरे से ताजमहल को देखते थे। साल 1849 में जब अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्जा किया तो इस हीरे को ब्रिटेन की तब की महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया। बाद में इसे और कई हीरों के साथ ब्रिटेन के शाही ताज में लगा दिया गया। महारानी एलिजाबेथ की मौत के बाद से कई बार कोहिनूर को वापस भारत लाने की मांग उठ चुकी है। भारत कई बार कोहिनूर वापस मांग चुका है कोहिनूर जड़े ताज को सबसे पहले ब्रिटेन की क्वीन मदर ने पहना था। इसके बाद ये ताज क्वीन एलिजाबेथ को मिला था। इस ताज में कोहिनूर के अलावा अफ्रीका का बेशकीमती हीरा ग्रेट स्टार ऑफ अफ्रीका सहित कई कीमती पत्थर जड़े हैं। इसकी कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर आंकी गई है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है।

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने बुधवार को न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। यह शाही जोड़ा 9/11 मेमोरियल पहुंचा था जहां उन्होंने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। खास बात यह है कि इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले ममदानी ने कहा था कि अगर उन्हें किंग चार्ल्स से अलग से बात करने का मौका मिला, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की बात उठाएंगे। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि इस छोटी बातचीत के दौरान ममदानी ने यह मुद्दा उठाया या नहीं। उनके ऑफिस से भी इस पर तुरंत कोई जवाब नहीं मिला। कोहिनूर वही हीरा है जो ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है और टावर ऑफ लंदन में रखा गया है। यह 177 साल से ब्रिटेन के पास है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है। 1849 से ब्रिटेन के पास कोहिनूर हीरा कोहिनूर हीरा 1849 से ब्रिटेन के पास है। द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सिख साम्राज्य के हारने के बाद अंग्रेजों ने पूरे पंजाब पर कब्जा कर लिया। उस समय सिख साम्राज्य के शासक दलीप सिंह थे, जिनकी उम्र सिर्फ 10 साल थी। युद्ध हारने के बाद अंग्रेजों ने उनसे लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करवाए। इस संधि की शर्तें बहुत सख्त थीं। इसके तहत पंजाब को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया गया और साथ ही कोहिनूर हीरा भी अंग्रेजों को सौंपना पड़ा। इसके बाद यह हीरा ब्रिटेन पहुंचा और क्वीन विक्टोरिया को दे दिया गया। विवादों से भरा है कोहिनूर का इतिहास कोहिनूर हीरे का इतिहास विवादों से भरा रहा है। कहा जाता है कि साल 1526 में हुमायूं ने आगरा किला पर हमला किया था। इसे जीतने पर बड़े पैमाने में खजाने के साथ-साथ विश्‍व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी मिला था। बाबरनामा के मुताबिक, कोहिनूर हीरा इतना कीमती था कि इससे पूरी दुनिया को ढाई दिन का भोजन करवाया जा सकता था। 1739 में ईरानी शासक नादिर शाह ने आक्रमण किया। उसने आगरा और दिल्ली में लूटपाट की। वह कोहि‍नूर और मयूर सिंहासन को भी साथ ले गया। नादिर शाह की हत्या के बाद 1747 में यह हीरा अफगानिस्तान के अहमद शाह के पास पहुंचा। इसके बाद कोहिनूर हीरा शाह शुजा के हाथों से होते हुए महाराजा रणजीत सिंह तक पहुंचा। औरंगजेब के शासन के दौरान उसने यह हीरा शाहजहां की देख-रेख में रखा था। शाहजहां आगरा किले में कैद होकर इसी हीरे से ताजमहल को देखते थे। साल 1849 में जब अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्जा किया तो इस हीरे को ब्रिटेन की तब की महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया। बाद में इसे और कई हीरों के साथ ब्रिटेन के शाही ताज में लगा दिया गया। महारानी एलिजाबेथ की मौत के बाद से कई बार कोहिनूर को वापस भारत लाने की मांग उठ चुकी है। भारत कई बार कोहिनूर वापस मांग चुका है कोहिनूर जड़े ताज को सबसे पहले ब्रिटेन की क्वीन मदर ने पहना था। इसके बाद ये ताज क्वीन एलिजाबेथ को मिला था। इस ताज में कोहिनूर के अलावा अफ्रीका का बेशकीमती हीरा ग्रेट स्टार ऑफ अफ्रीका सहित कई कीमती पत्थर जड़े हैं। इसकी कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर आंकी गई है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है।

लगभग 90% मतदान के साथ, कोलकाता में अब तक का सर्वाधिक मतदान हुआ; अन्य महानगर कहाँ खड़े हैं | भारत समाचार

ICSE, ISC Results 2026 Live Updates: CISCE Class 10th, 12th Results today at cisce.org

आखरी अपडेट:30 अप्रैल, 2026, 08:18 IST कुल मिलाकर, कोलकाता में औसतन 88.4% मतदान हुआ, जो 2021 के विधानसभा चुनावों की तुलना में 28 प्रतिशत अंक से अधिक की तेज वृद्धि है। कोलकाता में, सभी क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक थी। (फोटो: पीटीआई) पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में प्रभावशाली 92.67% मतदान दर्ज किया गया, जो मजबूत सार्वजनिक भागीदारी को दर्शाता है। निर्वाचन क्षेत्रों में, कैनिंग पुरबा – जहां पिछले चुनावों में हिंसा देखी गई थी – में राज्य में सबसे अधिक 97.7% मतदान हुआ। कोलकाता में, सभी क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक थी। कोलकाता उत्तर में 89.3% मतदान दर्ज किया गया, जबकि कोलकाता दक्षिण – जिसमें हाई-प्रोफाइल भबनीपुर सीट शामिल है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारतीय जनता पार्टी के सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं – में 87.84% मतदान दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, कोलकाता में औसतन 88.4% मतदान हुआ, जो 2021 के विधानसभा चुनावों की तुलना में 28 प्रतिशत अंक से अधिक की तेज वृद्धि है। 92.9% के साथ, पश्चिम बंगाल में मतदान राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है, जो 2011 के चुनाव में निर्धारित 84.3% के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया है। जहां अन्य मेट्रो खड़ी हैं 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में, चेन्नई 83.74% के मजबूत मतदान के साथ सामने आया, जो नागरिक भागीदारी के एक महत्वपूर्ण स्तर को दर्शाता है। यह मुंबई के साथ बिल्कुल विपरीत है, जहां नवीनतम नागरिक चुनावों में भागीदारी कम-50% सीमा में रही, जो अपेक्षाकृत कम मतदाता भागीदारी के लगातार पैटर्न को दर्शाती है। बेंगलुरु ने भी इसी तरह का रुझान दिखाया है, जहां 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान मतदान आम तौर पर 50% से 55% के बीच रहा। राजनीतिक रूप से सक्रिय रहते हुए भी दिल्ली ने 2025 के विधानसभा चुनाव में लगभग 60% मतदान दर्ज किया। हालाँकि यह मुंबई और बेंगलुरु से अधिक है, फिर भी यह चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में देखी गई अधिक मजबूत भागीदारी से काफी पीछे है। मतदान प्रतिशत इतना अधिक क्यों था? पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान में दो प्रमुख कारकों का योगदान रहा। पहला है विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), जिसने लगभग 90 लाख मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा दिया। छोटे, अधिक सटीक हर के साथ, प्रतिशत स्वाभाविक रूप से बढ़ गया। दूसरा, मतदाता की अत्यावश्यकता थी, क्योंकि उन मतदाताओं में “क्रोध” की भावना थी जिनके नाम सूची में रह गए थे। बूथों पर भीड़ दिखाई दे रही थी, खासकर उन प्रवासी श्रमिकों के बीच जो राज्य में लौट आए थे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य के संशोधनों में उनके नाम नहीं काटे जाएं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 30 अप्रैल, 2026, 08:08 IST न्यूज़ इंडिया लगभग 90% मतदान के साथ, कोलकाता में अब तक का सर्वाधिक मतदान हुआ; जहां अन्य मेट्रो खड़ी हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल मतदाता मतदान(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)दूसरे चरण का मतदान(टी)कैनिंग पुरबा मतदान(टी)कोलकाता मतदाता मतदान(टी)ममता बनर्जी भबानीपुर(टी)सुवेंदु अधिकारी बीजेपी

बार-बार प्यास और थकान? जौ का पानी दे सकता है राहत, एनर्जी, ठंडक और पाचन के लिए परफेक्ट ड्रिंक

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Summer Hydration Drink: गर्मी जब अपने पूरे तेवर में होती है, तब सिर्फ ठंडा पी लेना काफी नहीं होता-शरीर को ऐसा पेय चाहिए जो अंदर से ठंडक दे और लंबे समय तक हाइड्रेशन बनाए रखे. ऐसे में जौ का पानी एक पुराना लेकिन बेहद काम का ऑप्शन बनकर सामने आता है. यह न तो भारी लगता है, न ही इसमें ज्यादा झंझट है. गांवों से लेकर शहरों तक, लोग इसे अलग-अलग तरीकों से पीते रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि भी हेल्थ एक्सपर्ट्स इसे एक स्मार्ट समर ड्रिंक मान रहे हैं, अगर आप बार-बार पानी पीकर भी थकान या सुस्ती महसूस करते हैं, तो जौ का पानी आपकी रूटीन में एक छोटा लेकिन असरदार बदलाव ला सकता है. जौ का पानी क्यों है खास?जौ के दानों से बना यह हल्का पेय देखने में सादा लगता है, लेकिन इसके अंदर छिपे फायदे इसे खास बनाते हैं. इसमें मौजूद फाइबर, खासकर बीटा-ग्लूकन, शरीर को धीरे-धीरे हाइड्रेट करता है. यानी आप सिर्फ प्यास नहीं बुझाते, बल्कि शरीर को लंबे समय तक संतुलित रखते हैं. शरीर को ठंडा रखने में मददगर्मी में शरीर जल्दी गर्म हो जाता है. जौ का पानी प्राकृतिक तरीके से बॉडी टेम्परेचर को कंट्रोल करने में मदद करता है. यही वजह है कि पुराने समय में भी इसे लू से बचाव के लिए पिया जाता था. पाचन के लिए हल्का और आरामदायकगर्मी में अक्सर भूख कम लगती है और पेट भारी-भारी सा लगता है. ऐसे में जौ का पानी पाचन को सहज बनाता है. यह पेट पर बोझ नहीं डालता, बल्कि हल्का महसूस कराता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एनर्जी लेवल रहता है स्थिरअगर आप दोपहर में थकान या सुस्ती महसूस करते हैं, तो इसका एक कारण ब्लड शुगर का अचानक गिरना भी हो सकता है. जौ का पानी इस उतार-चढ़ाव को थोड़ा संतुलित रखने में मदद करता है. दिनभर में कैसे शामिल करें जौ का पानी?1. मिड-मॉर्निंग रिफ्रेश ड्रिंकसुबह 11 बजे के आसपास जब शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है, तब एक गिलास ठंडा जौ का पानी बहुत काम आता है. इसमें थोड़ा नींबू और चुटकीभर नमक मिलाने से यह एक नेचुरल इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक बन जाता है. 2. लंच के बाद हल्का सपोर्टदोपहर का खाना खाने के बाद अगर भारीपन लगता है, तो थोड़ा-सा जौ का पानी पुदीने के साथ पी सकते हैं. यह पाचन को स्मूद बनाता है और पेट को आराम देता है. 3. दोपहर की थकान का हलजब 3-4 बजे के बीच मीठा या कोल्ड ड्रिंक पीने का मन करता है, तब जौ का पानी बेहतर विकल्प हो सकता है. इसमें भुना जीरा और काला नमक डालकर पीने से स्वाद भी बढ़ जाता है और शरीर को फायदा भी मिलता है. 4. शाम का हल्का कूलरशाम को जब थोड़ी ठंडक चाहिए होती है, तब जौ का पानी हल्का ठंडा करके पीना सही रहता है. बहुत ज्यादा ठंडा करने की जरूरत नहीं-नॉर्मल ठंडा ही ज्यादा फायदेमंद होता है. 5. बाहर जाने से पहलेअगर आपको धूप में निकलना है, तो पहले से एक गिलास जौ का पानी पी लें. यह शरीर को अंदर से तैयार करता है और जल्दी डिहाइड्रेशन नहीं होने देता. घर पर ऐसे बनाएं जौ का पानीजौ का पानी बनाना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ा समय चाहिए. -सबसे पहले 2 चम्मच जौ के दानों को अच्छे से धो लें ताकि धूल-मिट्टी निकल जाए. फिर एक पैन में 3 कप पानी डालकर उसमें जौ डालें और उबालें. जब पानी हल्का सफेद और थोड़ा गाढ़ा दिखने लगे, तब गैस धीमी करके 20-25 मिनट तक पकाएं. -अब गैस बंद करके इसे ठंडा होने दें और छानकर अलग कर लें. आप चाहें तो इसमें नींबू का रस, थोड़ा नमक या हल्का-सा गुड़ मिलाकर स्वाद के अनुसार तैयार कर सकते हैं. छोटी-छोटी आदत, बड़ा असरजौ का पानी कोई जादुई पेय नहीं है, लेकिन इसे रोजमर्रा की आदत में शामिल करने से फर्क जरूर महसूस होता है. खासकर जब लोग हेल्दी और नेचुरल ऑप्शन की तरफ लौट रहे हैं, तब यह ड्रिंक एक सिंपल लेकिन असरदार चॉइस बन गया है. अगर आप भी गर्मी में बार-बार थकान, प्यास या सुस्ती से परेशान रहते हैं, तो जौ का पानी आपकी रूटीन में एक स्मार्ट एडिशन हो सकता है-बिना ज्यादा खर्च और बिना किसी साइड इफेक्ट के. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

DRDO & Indian Navy Test Advanced Air-Launch System

DRDO & Indian Navy Test Advanced Air-Launch System

Hindi News National DRDO & Indian Navy Test Advanced Air Launch System | Helicopter Missile Launch नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक डीआरडीओ और भारतीय नौसेना ने बंगाल की खाड़ी में हेलीकॉप्टर से शॉर्ट रेंज नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-SR) का सफल परीक्षण किया। इस दौरान एक हेलीकॉप्टर से कुछ ही सेकेंड के अंतर में दो मिसाइलें दागी गईं। दोनों ने जहाज के निचले हिस्से पर सटीक निशाना लगाया। इससे कम समय में लगातार हमला करने की क्षमता दिखाई गई, जो दुश्मन के रडार सिस्टम को चकमा दे सकती है। ओडिशा के चांदीपुर की टेस्ट रेंज में लगे रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और टेलीमेट्री के जरिए मिसाइल की पूरी उड़ान और निशाने को ट्रैक किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर DRDO, नौसेना, वायु सेना और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा- कि इस मिसाइल के बनने से सेना की ताकत काफी बढ़ेगी। लॉन्च की दो तस्वीरें… रक्षा मंत्रालय ने परिक्षण का वीडियो शेयर किया है, जिसमें पहले एक मिसाइल लॉन्च की गई। पहले मिसाइल के कुछ ही सेकेंड बाद दूसरा मिसाइल भी लॉन्च किया गया। जहाज को ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला वार मिसाइल ने जहाज के उस हिस्से को निशाना बनाया, जहां हमला होने पर ज्यादा नुकसान होता है और जहाज जल्दी बेकार हो सकता है। मिसाइल में शुरुआत के लिए बूस्टर और आगे उड़ान बनाए रखने के लिए अलग सिस्टम लगा है। साथ ही टारगेट पहचानने, रास्ता तय करने और ऊंचाई बनाए रखने के लिए कई तकनीकें जोड़ी गई हैं। मिसाइल में ऐसा सिस्टम है, जिससे उड़ते वक्त भी उसे नई जानकारी दी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर दिशा बदली जा सकती है। कई लैब्स और इंडस्ट्री ने मिलकर बनाया इस मिसाइल को DRDO की अलग-अलग लैब्स और भारतीय उद्योगों ने मिलकर तैयार किया है और अब इसका उत्पादन भी देश में ही किया जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

DRDO & Indian Navy Test Advanced Air-Launch System

DRDO & Indian Navy Test Advanced Air-Launch System

Hindi News National DRDO & Indian Navy Test Advanced Air Launch System | Helicopter Missile Launch नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक भारतीय नौसेना ने बुधवार को पहला सैल्वो लॉन्च किया। DRDO और नौसेना ने बुधवार को बंगाल की खाड़ी में हेलीकॉप्टर से शॉर्ट रेंज नेवल एंटी-शिप मिसाइल को सफल लॉन्च किया। इस दौरान एक हेलीकॉप्टर से कुछ ही सेकेंड के अंतर पर दो मिसाइलें दागी गईं। दोनों ने जहाज के निचले हिस्से पर सटीक निशाना लगाया। इसके ​जरिए भारत ने साल्वो लॉन्च क्षमता का प्रदर्शन किया। यानी एक लॉन्चर से कम समय में ज्यादा मिसाइलें दागना। यह तकनीक दुश्मन के रडार सिस्टम को चकमा दे सकती है। ओडिशा के चांदीपुर की टेस्ट रेंज में लगे रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और टेलीमेट्री के जरिए मिसाइल की पूरी उड़ान और निशाने को ट्रैक किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता पर DRDO, नौसेना, वायु सेना और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस मिसाइल के बनने से सेना की ताकत काफी बढ़ेगी। लॉन्च की दो तस्वीरें… रक्षा मंत्रालय ने परिक्षण का वीडियो शेयर किया है, जिसमें पहले एक मिसाइल लॉन्च की गई। पहले मिसाइल के कुछ ही सेकेंड बाद दूसरा मिसाइल भी लॉन्च किया गया। जहाज को ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला वार मिसाइल ने जहाज के उस हिस्से को निशाना बनाया, जहां हमला होने पर ज्यादा नुकसान होता है। मिसाइल में शुरुआत के लिए बूस्टर और आगे उड़ान बनाए रखने के लिए अलग सिस्टम लगा है। साथ ही टारगेट पहचानने, रास्ता तय करने और ऊंचाई बनाए रखने के लिए कई तकनीकें जोड़ी गई हैं। मिसाइल में ऐसा सिस्टम है, जिससे उड़ते वक्त भी उसे नई जानकारी दी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर दिशा बदली जा सकती है। इस मिसाइल को DRDO की अलग-अलग लैब्स और भारतीय उद्योगों ने मिलकर तैयार किया है। अब इसका उत्पादन भी देश में ही किया जा रहा है। युद्धपोत प्रोजेक्ट के लिए भी टेस्ट पूरे इससे पहले शनिवार को DRDO और नौसेना ने एक नए युद्धपोत प्रोजेक्ट के लिए हाइड्रोडायनामिक परफॉर्मेंस और मॉडल टेस्टिंग पूरी की। यह काम नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लैबोरेटरी (NSTL) और नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने मिलकर किया। टेस्ट में जहाज की रफ्तार, पानी में उसका व्यवहार, इंजन से मिलने वाली ताकत और मोड़ने की क्षमता जैसे अहम पहलुओं को परखा गया। नतीजे अंतरराष्ट्रीय स्तर के बराबर पाए गए। DRDO के अध्यक्ष समीर वी कामत ने इस प्रोजेक्ट के नतीजे नौसेना के अधिकारी संजय साधु को सौंपे। इस दौरान DRDO और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। नए आर्मर्ड प्लेटफॉर्म भी दिखाए गए DRDO की व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (VRDE) ने एडवांस आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (व्हील्ड और ट्रैक्ड) तैयार किए हैं। महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में DRDO ने नए आर्मर्ड प्लेटफॉर्म पेश किए। ये ट्रैक और पहियों के दोनों तरह के हैं। इन्हें सेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इन प्लेटफॉर्म में 30 मिमी का क्रूलेस टर्रेट लगाया गया है। इसमें ताकतवर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दिया गया है, जिससे इसकी स्पीड और क्षमता बढ़ती है। साथ ही इसमें चारों तरफ सुरक्षा कवच दिया गया है। ये प्लेटफॉर्म जमीन के साथ पानी में भी चल सकते हैं। इनमें हाइड्रो जेट तकनीक दी गई है, जिससे पानी में चलना आसान होता है। ये एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल दागने में भी सक्षम हैं। इन प्लेटफॉर्म में अभी करीब 65% स्वदेशी सामान का इस्तेमाल हुआ है, जिसे आगे बढ़ाकर 90% तक ले जाने की योजना है। ———— ये खबर भी पढ़ें… आकाश नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल डिफेंस सिस्टम का सफल टेस्ट:80km तक के टारगेट को तबाह कर सकता है, एकसाथ 10+ हमले रोकने में सक्षम भारतीय सेना ने आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम के एडवांस्ड वर्जन आकाश नेक्स्ट जेनरेशन (आकाश-NG) का ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में सफल ट्रायल किया। इसे देश की स्वदेशी एयर डिफेंस ताकत को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

एग्जिट पोल 2026 रिजल्ट: बंगाल से लेकर असम-केरल और तमिल तक, किसकी सरकार, जानें किसकी सरकार

एग्जिट पोल 2026 रिजल्ट: बंगाल से लेकर असम-केरल और तमिल तक, किसकी सरकार, जानें किसकी सरकार

चुनाव के बाद जारी कई एलेक्टिट पोल में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बढ़त मिलने और असम में अपनी जीत की हैट्रिक को लेकर संभावना जताई गई है, जबकि एक सर्वेक्षण में तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी टीवी के रिवर्स बिगफर करने का अनुमान लगाया गया है। प्रमुख वैज्ञानिक सर्वेक्षण एजेंसी ‘एक्सिस माई इंडिया’ का अनुमान है कि तमिलगा वेट्री कशगम (टीवीके) अपने पहले ही चुनाव में 98 से 120 नामांकन के साथ सरकार बनाने के करीब पहुंच सकती है। अगर असलियत में यही रहता है तो यह विक्ट्री की राजनीति राजनीति में आस्ट्रेलियन कलाकारी होगी। यह पार्टी फरवरी, 2024 में अस्तित्व में है। पश्चिम बंगाल में रविवार को दूसरे एवं अंतिम चरण में रैंकिंग हुई। इससे पहले 23 अप्रैल को राज्य की 152 पर बमबारी हुई थी। प्रदेश में कुल 294 पर्यटक हैं। केरल, असम और पुदुचेरी में 23 अप्रैल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को रैंकिंग में वृद्धि हुई थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर शनिवार शाम तक कई चुनावी सर्वेक्षणों में भाजपा को बहुमत या बहुमत मिलने की संभावना जताई गई। हालाँकि कुछ सर्वेक्षणों ने वैज्ञानिक कांग्रेस की सरकार के स्टे का अध्ययन किया है। ‘पीपल्स पल्स’ के सर्वे में बताया गया है कि 177 से 187वीं मंजिल हासिल करके ओपीडी कांग्रेस अपनी सत्ता हासिल कर सकती है। बीजेपी को 95 से 110 पर मुलाकात का अनुमान है. कांग्रेस की एक से तीन सीटों की बैठक की संभावना तय हो गई है. ‘जनमत पोल’ के एक्जालिट पोल के, ओपीडी कांग्रेस को 195 से 205 आधार मिल सकते हैं तो भाजपा को 80 से 90 के आधार पर ही संतोष करना पड़ सकता है। ‘पोल डायरी’ के सर्वे का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी 142 से 171 के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है. इस सर्वे के अनुसार, प्रोटोटाइप कांग्रेस को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। ‘मैट्रिज’ सर्वेसर्वा में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और आंध्र प्रदेश में 125 से 140 सीटें मिल सकती है और वह सत्ता से बाहर हो सकती है। ‘पी-मार्क’ सर्वेसर्वा में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी को 150 से 175 मंजिल मिल सकते हैं तो 118-138 को मंजूरी मिलने का अनुमान है. असम को लेकर सभी सर्वेक्षणों में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत की संभावना जताई गई है। ‘एक्सिस माई इंडिया’ के सर्वेक्षण के अनुसार, राजग को 88 से 100 सीटें मिल सकती हैं और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 24 से 36 सीटें मिल सकती हैं। ‘मैट्रिज’ के एकोलिकेट पोल में कहा गया है कि असम में बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन 85 से 95 सीटों पर प्रचंड बहुमत के साथ मिल सकता है, जबकि कांग्रेस गठबंधन 25 से 32 सीटों पर बढ़त बना सकता है। ‘जनमत पोल्स’ के मुताबिक, असम में बीजेपी गठबंधन को 87 से 98 सीटें मिल सकती हैं और कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन 29 से 30 सीटों पर बढ़त बना सकता है। ‘जेवीसी’ के एकोलिकेट पोल में कहा गया है कि असम में बीजेपी के अवतरण वाले गठबंधन को 88 से 101 प्रचंड बहुमत मिल सकता है, जबकि नित गठबंधन को सिर्फ 23 से 33 प्रतिशत मिलने का अनुमान है। असम विधानसभा में कुल 126 यात्री हैं। केरल को लेकर लगभग सभी डेमोक्रेट विचारधारा ने सत्य से वाम डेमोक्रेटिक मोर्चा (एल इज़रायल) की जीत की संभावना जताई है। ये भी पढ़ें: तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026: तेलंगाना एलेक्टिट पोल में आया नया खुलासा! स्टालिन नहीं इसे सीएम बनाना चाहती है जनता, जानें नाम ‘एक्सिस माई इंडिया’ के एकोलिकिट पोल में कहा गया है कि यूएफसी को 78 से 90 एरेस्टमेंट मिल सकते हैं, वहीं एल एबीसी को 49 से 62 एरेस्टमेंट मिलने का अनुमान है। ‘पीपुल्स पल्स’ ने केरल में यू.पी.एफ. को 75 से 85 वें बहुमत के साथ पूर्ण बहुमत बैठक की संभावना जताई है। उनका अनुमान है कि रॉकेट के नेतृत्व वाले एल फ़्लेक्ट को 55 से 65 मंजिलें ही मिलेंगी और वह सत्ता से बाहर हो जाएंगे। ‘वोट वाइब’ के सर्वे में कहा गया है कि यूएफओ को 70 से 80 प्रवेश मिल सकते हैं, जबकि एल को 58 से 68 प्रवेश मिल सकते हैं। ‘पीपुल्स साइट’ सर्वेक्षण के अनुसार, यूएफसी को 66 से 76 प्रतिशत अंक प्राप्त हो सकते हैं और एल लक्ष्य को 58 से 68 प्रतिशत अंक प्राप्त होने का अनुमान है। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 10 से 14 की बैठक का स्वागत किया है। केरल में विधान सभा के 140 अतिथि हैं। तमिल में बहुमत सर्वेक्षणों ने द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत का आकलन किया है, हालांकि ‘एक्सिस माई इंडिया’ ने टीवीके के पहले ही चुनाव में बहुमत के करीब पहुंचने का अनुमान लगाया है। उनका दावा है कि विक्ट्री की पार्टी 234 असेंबली असेंबली में 108 से 120 यूनिट मिल सकती है। टीवी का गठन फरवरी, 2024 में हुआ था। ‘एक्सिस माई इंडिया’ के सर्वे में द्रमुक के नेतृत्व वाले अलायंस को 92 से 110 मंजिल मिलने और अन्नाद्रमुक की प्रगति वाले राजग को सिर्फ 22 से 32 मंजिल मिलने का अनुमान है। ‘पीपुल्स पल्स’ ने द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को 125 से 145 के बीच का अनुमान लगाया है। उनका अनुमान है कि राजग को 65 से 80 और अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कशगम (टीवीके) को 18 से 24 तक यात्रा मिलेगी। ‘मैट्रिज’ के सर्वेक्षण में कहा गया है कि द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन 122 से 132 के साथ सत्ता शक्ति रख सकते हैं और अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राजग को 87 से 100 की बैठक का अनुमान है। टीवीके को 10 से 12 अंक मिल सकते हैं। पुड्डुचेरी को लेकर ज्यादातर सर्वेक्षणकर्ताओं का अनुमान है कि ऑल इंडिया पीएएनएक कांग्रेस (शॉपिंग पाइल्ससी) के अगुआ वाले राजग गठबंधन को बहुमत मिल सकता है। ‘एक्सिस मॉय इंडिया’ के एक्लोटिट पोल के अनुसार, पुडुचेरी में राजग को 16 से 20 तक विजिट मिल सकती है, वहीं कांग्रेस और द्रमुक के अलायंस को छह से आठ एंट्री मीटिंग का अनुमान है। टीवी के दो से चार इंच मिलने की

छतरपुर में चाट दुकानदार को अगवा करने की कोशिश, VIDEO:बस स्टैंड पर दबंगों ने मारपीट कर गाड़ी में बैठाने का किया प्रयास

छतरपुर में चाट दुकानदार को अगवा करने की कोशिश, VIDEO:बस स्टैंड पर दबंगों ने मारपीट कर गाड़ी में बैठाने का किया प्रयास

छतरपुर : जिले के भगवां थाना क्षेत्र के रामटौरिया बस स्टैंड पर दिनदहाड़े एक चाट दुकानदार के अपहरण की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दबंगों ने सरेआम दुकानदार के साथ मारपीट की और उसे जबरन गाड़ी में डालकर ले जाने का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों की सतर्कता से वारदात नाकाम हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। पुरानी रंजिश में हमला, बीच बाजार मचा हड़कंप जानकारी के अनुसार पीड़ित जग्गी पटेल रामटौरिया बस स्टैंड पर चाट का ठेला लगाता है। बुधवार को वह रोज की तरह दुकान चला रहा था, तभी पुरानी रंजिश के चलते गौरीशंकर यादव हलावनी अपने एक साथी के साथ वहां पहुंचा। दोनों ने अचानक दुकानदार पर हमला बोल दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मारपीट कर जबरन गाड़ी में डालने की कोशिश प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपियों ने पहले जग्गी के साथ जमकर मारपीट की और फिर उसे घसीटते हुए अपनी गाड़ी की ओर ले जाने लगे। वे उसे जबरदस्ती वाहन में डालकर अगवा करना चाहते थे। इस दौरान दुकानदार की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और बीच-बचाव किया। भीड़ की हिम्मत से नाकाम हुई वारदात स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर आरोपियों को घेरने की कोशिश की, जिससे घबराकर दोनों मौके से फरार हो गए। लोगों की तत्परता से दुकानदार की जान बच गई। घटना के बाद इलाके में काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा। वीडियो वायरल, पुलिस जांच में जुटी घटना का वीडियो किसी ने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। बस स्टैंड पर सुरक्षा पर उठे सवाल दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने बस स्टैंड की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।

पांता भात रेसिपी: मोदी के झालमुड़ी के बाद अब ममता दीदी के ‘पांता-भात’ का क्रेज़, गर्मी में स्वाद के साथ पेट को मिलेगा ठंडक, नोट करें रेसिपी

पंता भात रेसिपी

30 अप्रैल 2026 को 07:49 IST पर अपडेट किया गया पैंता भात रेसिपी: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झालमुड़ी का मशालेदार वीडियो वायरल हुआ था। इसके ठीक बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वोट दिया और अपने खास संदर्भ में ‘पंता भाट’ का जिक्र किया, जिसने देखते ही इंटरनेट पर मीम्स और रेसिपीज की बाढ़ ला दी। जो डिश कभी बंगाल के आम घर का सादा खाना था, वह अब एक स्टॉक ट्रेंड बन गया है। अनुसरण करना : ममता बनर्जी ने वोट के दिन लोगों से कहा कि जरूरत हो तो खाना बनाने की चिंता न करें, एक दिन पहले पांता-भात तैयार करके रख लें। लोग सुबह जल्दी मतदान करें और खाना बनाने में समय खराब न हो। छवि: सोशल मीडिया पांता-भाट बंगाल के बेहद पुराने और पारंपरिक व्यंजन हैं। रात के बचे हुए चावल को पानी में भिगोकर रातभर रखा जाता है और अगले दिन खाया जाता है। छवि: फेसबुक पाँता भात नमक, हरी मिर्च, प्याज, सरसों के तेल की कुछ बूंदें या तली हुई गन्ने के साथ खाया जाता है। आप मछली भुजिया या आलू भर्ता के साथ भी खा सकते हैं. छवि: सोशल मीडिया पुराने समय में जब फ़र्ज़ी नहीं हुआ करते थे, तब बचे हुए चावल को क्रांति के स्थान पर पानी में अकेलेकर सेफ रखा जाता था।इससे चावल ख़राब भी नहीं होता था और अगले दिन भी खाया जाता था। छवि: सोशल मीडिया किसान में सुबह जल्दी ही निकल जाते थे, ऐसे में पंता-भात उनके लिए झटपट तैयार होने वाला खाना था। पेट भरता था, शरीर को ठंडक मिलती थी और गर्मी में राहत भी मिलती थी। छवि: सोशल मीडिया पाँता भात पाचन, पेट की ठंडक और प्रतिरोधक क्षमता के लिए बेहतरीन सुपरफूड है। यह प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत है, जो कि एंटीऑक्सीडेंट को स्वस्थ बनाता है, कब्ज को दूर करता है। छवि: सोशल मीडिया द्वारा प्रकाशित : आर्या पांडे प्रकाशित 30 अप्रैल 2026, 07:49 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)पंटा भात(टी)पंटा भात रेसिपी(टी)किण्वित चावल का व्यंजन(टी)पारंपरिक बंगाली भोजन(टी)ममता बनर्जी की अपील(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बचे हुए चावल का व्यंजन(टी)ग्रीष्मकालीन ठंडा भोजन(टी)पंटा भात