RBI के नए डिप्टी गवर्नर बने रोहित जैन:3 साल का कार्यकाल होगा, टी-रबी शंकर की जगह लेंगे

अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ द कैबिनेट यानी ACC ने रोहित जैन को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नया डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। उनकी यह नियुक्ति 3 साल के लिए होगी, जो 3 मई या उसके बाद से प्रभावी मानी जाएगी। जैन वर्तमान डिप्टी गवर्नर टी रबी शंकर की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है। रोहित जैन इससे पहले दिसंबर 2020 से आरबीआई में कार्यकारी निदेशक (ED) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कार्यकारी निदेशक के तौर पर जैन ने सुपरविजन विभाग (रिस्क, एनालिटिक्स और वल्नरेबिलिटी असेसमेंट) की जिम्मेदारी संभाली है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने डिप्टी गवर्नर पद के लिए चार कार्यकारी निदेशकों का इंटरव्यू लिया था, जिसमें से जैन के नाम पर मुहर लगी है। रिजर्व बैंक में 30 साल का लंबा अनुभव जैन के पास रिजर्व बैंक में करीब तीन दशकों का लंबा अनुभव है। उन्होंने अपने करियर के दौरान सुपरविजन, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट और बैंकिंग समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। कॉमर्स और एमबीए की डिग्री, बैंकिंग रिस्क में भी एक्सपर्ट शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो जैन ने कॉमर्स में मास्टर डिग्री (M.Com) और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री (MBA) हासिल की है। इसके साथ ही उन्होंने बैंकिंग रिस्क और रेगुलेशन में इंटरनेशनल सर्टिफिकेट (ICRR) और सर्टिफाइड एसोसिएट ऑफ द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (CAIIB) जैसी प्रोफेशनल डिग्रियां भी ली हैं। वे एक सर्टिफाइड बैंक ट्रेनर भी हैं। आरबीआई में डिप्टी गवर्नर्स का समीकरण आरबीआई में कुल चार डिप्टी गवर्नर होते हैं। इनमें से दो अधिकारियों की नियुक्ति बैंक के अंदरूनी रैंक से पदोन्नति (प्रमोशन) के जरिए की जाती है। रोहित जैन के साथ एस सी मुर्मू दूसरे ऐसे डिप्टी गवर्नर हैं, जिन्हें अक्टूबर 2025 में आरबीआई के भीतर से ही प्रमोट किया गया था। अन्य दो डिप्टी गवर्नर बाहरी क्षेत्रों से चुने जाते हैं। वर्तमान में अर्थशास्त्री पूनम गुप्ता और कमर्शियल बैंकर स्वामीनाथन जे. (एसबीआई के पूर्व एमडी) इस पद पर तैनात हैं। इन विभागों की मिल सकती है जिम्मेदारी रोहित जैन को टी रबी शंकर के कुछ महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार मिलने की संभावना है। इनमें फाइनेंशियल मार्केट रेगुलेशन, फॉरेन एक्सचेंज और पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम जैसे विभाग शामिल हैं। आरबीआई जल्द ही आधिकारिक तौर पर जैन के पोर्टफोलियो की घोषणा करेगा। ये खबर भी पढ़ें… आपके बच्चे को लखपति बनाएगा PPF अकाउंट: अपने बच्चे के नाम खुलवाएं ये अकाउंट, जानें इसको लेकर क्या हैं नियम अगर आप बच्चे के नाम पर निवेश शुरू करने का प्लान बना रहे हैं तो पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) स्कीम में निवेश कर सकते हैं। इस स्कीम में अभी 7.1% सालाना ब्याज दिया जा रहा है। आप अपने बच्चे के नाम पर PPF अकाउंट खोलकर उसके लिए आसानी से लाखों का फंड तैयार कर सकते हैं। लेकिन इसके कुछ नियम हैं। हम आपको उन नियमों के बारे में बता रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
बंगाल चुनाव आयोग को लेकर बड़ा फैसला, 165 डेविल्स काउंटी और 77 पुलिस ऑब्जर्वर की नियुक्ति

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद और वोटों की गिनती से पहले स्टॉन्ग रूम और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में पार्टिकल्स को लेकर हंगामा मच गया है। इस बीच चुनाव आयोग ने शनिवार (2 मई, 2026) को बड़ा कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल में 165 अतिरिक्त तीन पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। इस संबंध में चुनाव आयोग ने शनिवार (2 मई, 2026) को आधिकारिक रूप से एक बयान जारी किया है, जिसमें आयोग ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनाव, 2026 के लिए माध्यमिक शिक्षा के लिए आस-पास की सुरक्षा और मजबूत करने और कानून व्यवस्था की देखरेख पर ध्यान देने के लिए 165 अतिरिक्त भाषा पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। वोटो की गणना के लिए सोसाइटी और रेज़्यूमे आयोग की नियुक्ति की गई चुनाव आयोग ने कहा है कि इन सभी अतिरिक्त ग्रेडों वाले पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 165 जिलों में मतदान पर्यवेक्षकों की सहायता की जाए। आयोग ने कहा कि यह संविधान के अनुसार नियुक्तियां 324 और पीपल का प्रतिनिधित्व, 1951 की धारा 20बी के तहत चुनाव आयोग द्वारा शक्तियों के आधार पर निर्धारित अधिनियम हैं। इस कारखाने के दौरान सभी ऑब्जर्ब्स आयोग के अधीनस्थों और आयोगों के नियंत्रण और नेतृत्व में कार्य होंगे। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने विधानसभा के लिए चल रहे आम चुनाव के लिए मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा मजबूत करने और कानून एवं व्यवस्था की व्यवस्था की निगरानी के लिए गिनती पर्यवेक्षकों और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की सहायता के लिए 165 अतिरिक्त गणना पर्यवेक्षकों को तैनात किया है… pic.twitter.com/lJASM0XxGJ – एएनआई (@ANI) 2 मई 2026 चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षकों के लिए निम्नलिखित सख्त निर्देश दिए चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पश्चिम बंगाल के जिन 165 क्षेत्रों में एक से अधिक काउंटी हॉल हैं, वहां पर काउंटी पर्यवेक्षकों की मदद के लिए अतिरिक्त न्यायिक पर्यवेक्षकों की सिफारिशें की गई हैं। इसके अलावा, पुलिस पर्यवेक्षकों को मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि तीन केंद्रों पर किसी तरह की कोई घटना न हो और मतगणना प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्देश-निर्देशों के तहत दी जा सके। मतगणना से पहले चुनाव आयोग का सख्त रुख चुनाव आयोग ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मतगणना केंद्रों पर स्टाफ पुलिस ऑब्जर्वर को किसी भी स्थिति में आतंकवादियों की गिनती के दिन और उसके दौरान गिनती हॉल में नहीं जाना पड़ेगा। पुलिस पर्यवेक्षक वोट गणना प्रक्रिया के दौरान प्राथमिक पर्यवेक्षकों और अन्य संस्थाओं के सदस्यों के साथ मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा, रिनर्टिंग अधिकारी ईसीआईएनईटी के एक निश्चित दस्तावेज़ के तहत लेखांकन कर्मचारी, सेल और उनके सहयोगियों को एक क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र (डेटाबेस कार्ड) जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से वो गिनती केंद्रों में प्रवेश कर सकेंगे। आयोग ने यह भी कहा कि गणना अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी के अलावा किसी भी व्यक्ति को गणना हॉल के अंदर मोबाइल फोन लेकर जाने की अनुमति नहीं होगी। यह भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को झटका दिया, सेंट्रल कर्मचारियों के रिकॉर्ड्स केस में प्रवेश से मना किया गया
पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त एक समय बॉलीवुड में आना चाहती थीं। इसकी वजह एक्टिंग का सपना नहीं, बल्कि पिता के करीब रहना था। त्रिशाला ने इन्साइड थॉट्स आउट लाउड पॉडकास्ट में कहा कि बचपन में उन्हें लगता था कि फिल्मों में आने से वह पिता के साथ ज्यादा समय बिता पाएंगी। त्रिशाला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं। ऋचा का 1996 में ब्रेन ट्यूमर से निधन हुआ था। इसके बाद त्रिशाला अमेरिका में नाना-नानी के साथ पली-बढ़ीं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बॉलीवुड में आने की इच्छा जताई, तब संजय दत्त ने पूछा था कि क्या एक्टिंग सच में उनका पैशन है। त्रिशाला के मुताबिक, उन्होंने पिता से कहा था कि वह सिर्फ उनके करीब रहना चाहती हैं। इस पर संजय दत्त ने समझाया कि सिर्फ स्टार किड होने से कोई ए-लिस्ट एक्ट्रेस नहीं बनता। उन्होंने बेटी को वही करने की सलाह दी, जिसमें उसकी असली रुचि हो। त्रिशाला ने कहा कि उनके पिता जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजरे हैं। उन्होंने हमेशा उन्हें सही दिशा दिखाने की कोशिश की। बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय त्रिशाला ने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र चुना। वह अब थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य पर कम खुलकर बात होती है। वह लोगों को बताना चाहती थीं कि संघर्ष सामान्य है। त्रिशाला ने दीपिका पादुकोण की भी तारीफ की, जिन्होंने डिप्रेशन पर खुलकर बात की थी। त्रिशाला ने बताया कि उन्होंने माता-पिता के साथ सामान्य पारिवारिक जिंदगी नहीं जी। वह बचपन से अमेरिका में रहीं और भारत कम आ पाती थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी वह संजय दत्त के साथ होती हैं, उन्हें सामान्य पिता-बेटी जैसा रिश्ता महसूस होता है।
पापा के करीब रहने बॉलीवुड में आना चाहती थीं त्रिशाला:संजय दत्त की सलाह के बाद एक्टिंग छोड़ी, अब मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बन चुकी हैं

संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त एक समय बॉलीवुड में आना चाहती थीं। इसकी वजह एक्टिंग का सपना नहीं, बल्कि पिता के करीब रहना था। त्रिशाला ने इन्साइड थॉट्स आउट लाउड पॉडकास्ट में कहा कि बचपन में उन्हें लगता था कि फिल्मों में आने से वह पिता के साथ ज्यादा समय बिता पाएंगी। त्रिशाला, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी ऋचा शर्मा की बेटी हैं। ऋचा का 1996 में ब्रेन ट्यूमर से निधन हुआ था। इसके बाद त्रिशाला अमेरिका में नाना-नानी के साथ पली-बढ़ीं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बॉलीवुड में आने की इच्छा जताई, तब संजय दत्त ने पूछा था कि क्या एक्टिंग सच में उनका पैशन है। त्रिशाला के मुताबिक, उन्होंने पिता से कहा था कि वह सिर्फ उनके करीब रहना चाहती हैं। इस पर संजय दत्त ने समझाया कि सिर्फ स्टार किड होने से कोई ए-लिस्ट एक्ट्रेस नहीं बनता। उन्होंने बेटी को वही करने की सलाह दी, जिसमें उसकी असली रुचि हो। त्रिशाला ने कहा कि उनके पिता जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजरे हैं। उन्होंने हमेशा उन्हें सही दिशा दिखाने की कोशिश की। बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय त्रिशाला ने मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र चुना। वह अब थेरेपिस्ट हैं। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में मानसिक स्वास्थ्य पर कम खुलकर बात होती है। वह लोगों को बताना चाहती थीं कि संघर्ष सामान्य है। त्रिशाला ने दीपिका पादुकोण की भी तारीफ की, जिन्होंने डिप्रेशन पर खुलकर बात की थी। त्रिशाला ने बताया कि उन्होंने माता-पिता के साथ सामान्य पारिवारिक जिंदगी नहीं जी। वह बचपन से अमेरिका में रहीं और भारत कम आ पाती थीं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब भी वह संजय दत्त के साथ होती हैं, उन्हें सामान्य पिता-बेटी जैसा रिश्ता महसूस होता है।
राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ने किया यूएई का कायाकल्प:शाही पहचान छिपाई, वेटर की नौकरी की; जानें कैसे बने नाहयान गल्फ के गेमचेंजर

संयुक्त राष्ट्र अमीरात (यूएई) ने तेल उत्पादक संगठन ओपेक से दूरी बनाकर संकेत दिया है कि उसका भविष्य तेल पर ही निर्भर नहीं है। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की रणनीति ग्रीन हाइड्रोजन, एआई और स्पेस मिशन पर है। उन्होंने 2015 में कहा था कि आखिरी तेल के बैरल पर यूएई शोक नहीं, उत्सव मनाएगा। पहले सैन्य कमांडर फिर क्राउन प्रिंस से राष्ट्रपति बनने तक उनके फैसलों ने न केवल यूएई का कायाकल्प किया है, खाड़ी देशों में बदलाव को भी हवा दी है। शेख मोहम्मद की परवरिश ने उनके फैसलों की नींव रखी। जब 14 वर्ष के थे, तब पिता शेख जायद ने उन्हें राजसी पहचान छिपाकर मोरक्को पढ़ने भेजा था। ताकि वे कठोर जीवन देख सकें। सैंडहर्स्ट की ट्रेनिंग और ‘वेटर’ के रूप में काम मोरक्को में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘हसन’ रखा था, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। वे अपना खाना खुद बनाते और कपड़े खुद धोते थे। वहां एक कैफे में वेटर के तौर पर भी काम किया, ताकि वह आम लोगों के संघर्ष और जीवन को करीब से समझ सकें। शेख मोहम्मद ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट से ट्रेनिंग ली और पासआउट होकर बाद में यूएई सेना में शामिल हुए। सेना के आधुनिकीकरण और प्रोफेशनल ट्रेनिंग को उन्होंने खुद मॉनिटर किया। शेख मोहम्मद ने खुद को कट्टरपंथी सोच से अलग रखा। छात्र जीवन में जब एक मौलवी ने उन्हें कट्टरपंथ की ओर मोड़ने की कोशिश की, तो वे जल्द समझ गए कि यह विचारधारा खतरनाक है। यमन युद्ध में नाहयान ने मिसाल पेश की। भतीजे को फ्रंट लाइन पर भेजा, जो आज युद्ध के कारण व्हीलचेयर पर हैं। 2004 में क्राउन प्रिंस बनने पर नाहयान ने कानूनों की दशा बदली। संसद में 50% महिला आरक्षण, 100% विदेशी स्वामित्व व गोल्डन वीसा जैसे फैसलों ने यूएई को निवेश हब बनाया। हालांकि, 2004-22 तक उनके भाई शेख खलीफा बिन जायद राष्ट्रपति थे, पर असली ताकत व कूटनीति क्राउन प्रिंस रहते नाहयान के पास थी। यही यूएई को गल्फ का गेमचेंजर बना रहा है। एआई से 50% सरकारी फैसले लेने वाला पहला देश बनेगा 2022 में राष्ट्रपति बनने के बाद शेख मोहम्मद ने पर्सनल लॉ में बदलाव कर तलाक, कस्टडी और विरासत में महिलाओं को अधिकार दिए। श्रम कानून बदलकर ‘निश्चित अवधि’ के अनुबंध अनिवार्य किए गए, जिससे बाहरी मजदूरों को लाभ हुआ। ‘एजेंटिक एआई’ मॉडल के तहत लक्ष्य है कि 2028 तक 50% सरकारी काम एआई संभाले, जो विश्लेषण के साथ फैसले भी ले सके। ऐसा करने वाला यूएई दुनिया का पहला देश होगा। सादगी की बात करें तो कई बार मेहमानों को वे खुद ही कॉफी सर्व करते हैं।
सिक्योरिटी के सीटी बजाने से नाराज हुए थे शाहरुख खान:वानखेड़े विवाद पर पूर्व एसीपी बोले- मुझे बताया गया कि शाहरुख राड़ा कर रहा है

साल 2012 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में हुए विवाद पर तत्कालीन एसीपी इकबाल शेख ने हाल ही में बताया कि शाहरुख खान और एमसीए अधिकारियों के बीच गलतफहमी से बहस हुई, जिसे बढ़ने से रोकने के लिए उन्होंने एक्टर को मौके से बाहर ले जाने को कहा था। यह मामला 2012 के आईपीएल मैच के बाद सामने आया था, जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुंबई इंडियंस को हराया था। मैच के बाद मैदान पर शाहरुख खान और सिक्योरिटी स्टाफ के बीच बहस के सीन सामने आए थे। इकबाल शेख ने शुभोजीत घोष के पॉडकास्ट में बताया, ‘जब मैं मेन गेट पर था, तो मुझे हमारे कलीग ने बताया कि शाहरुख यहां राड़ा (झगड़ा/हंगामा) कर रहा है।’ शेख ने बताया कि उस समय मैच खत्म हो चुका था। उन्होंने कहा, ‘मेरे साथ में ऑपरेटर था। उस टाइम मैच खत्म हो गया था, तकरीबन सब लोग जा चुके थे। फ्लडलाइट्स में से तीन-चार में से तीन लाइटें भी बंद हो गई थीं। सब लोग जा रहे थे। वहां पर शाहरुख खान और उसके फ्रेंड्स के साथ जो बच्चे लोग कुछ खेल रहे थे, वो एक साइड में खेल रहे थे।’ उन्होंने कहा, ‘वहां के सिक्योरिटी वाले ने उसके लिए ऑब्जेक्शन उठाया। सिक्योरिटी ने सीटी बजाई, तो शाहरुख खान को अच्छा नहीं लगा। उसमें कुछ बातचीत हुई, फिर सिक्योरिटी की तरफ से और एमसीए के कुछ लोगों ने बोला, तो आपस में हीटेड आर्गुमेंट्स हो गए।’ शाहरुख को तुरंत बाहर चलने को कहा इकबाल शेख ने बताया कि स्थिति बिगड़ने से पहले वह मौके पर पहुंचे और उन्होंने सीधे शाहरुख खान से कहा कि वह बाहर चलें। उन्होंने बताया कि एक्टर ने उनकी बात मानी और मामला वहीं शांत हो गया। घटना के बाद मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने एक्टर पर स्टेडियम में प्रवेश को लेकर नियम तोड़ने और स्टाफ से बदसलूकी का आरोप लगाया था। मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज की गई थी। हालांकि, पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार शाहरुख खान ने बदसलूकी के आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि वह अपनी बेटी सुहाना खान और अन्य बच्चों की सिक्योरिटी को लेकर चिंतित थे।
बेटे के गम में मां की मौत, सदमा कैसे ले लेता है जान, इमोशनल शॉक पीड़ित को कैसे संभालें?

Mental Trauma Effects: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. जब मां-बेटे में हुई कहासुनी के बाद बेटे ने जहर खाकर जान दे दी तो मां इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने भी फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली. इलाके में इमोशनल शॉक या भावनात्मक सदमे के कारण हुई इन मौतों ने हलचल पैदा कर दी है. लोग बार-बार यही बात कह रहे हैं कि किसी की मौत का सदमा क्या इतना खतरनाक होता है कि खुदकुशी की कर लेते हैं. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. कल्याणी नागर की मानें तो अचानक का गहरा दुख, तीव्र तनाव, चिंता या ट्रॉमा कई बार व्यक्ति को एक्सट्रीम कदम उठाने पर मजबूर कर देता है. जबकि कई बार इसका साइड इफैक्ट अपने आप ही शरीर पर दिखाई दे जाता है. सदमा भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूपों में नुकसान पहुंचा सकता है. सदमा ब्रेन और हार्ट पर सीधा असर डाल सकता है. तीव्र भावनात्मक सदमा ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम या हार्ट अटैक जैसी स्थिति पैदा कर सकता है. अत्यधिक भावनात्मक सदमा व्यक्ति को गहरे अवसाद, हताशा और लाचारी की स्थिति में ले जा सकता है, जहां उसे आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नजर नहीं आता. बेटे की मौत के बाद संभव है कि इस मां को भी ऐसा ही लगा हो. हार्ट पर भी असर डालता है सदमा अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार तीव्र सदमा शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल और एड्रेनालाइन) की अचानक वृद्धि कर देता है. इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती हैं. भावनात्मक सदमा अचानक हार्ट अटैक के लक्षण पैदा कर सकता है, जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना. कुछ मामलों में यह हार्ट फेल्योर या अरिदमिया (Arrhythmia) का कारण बन जाता है, खासकर पहले से हृदय रोग वाले लोगों में. कैसे पहचानें खतरे के संकेत?ऐसे में डॉक्टर और एसोसिएशन अक्सर सलाह देते हैं कि जब भी कोई बेहद दुख की घटना हो जाए तो उससे जुड़े व्यक्ति का खास ध्यान रखना जरूरी है, हल्की सी लापरवाही भी जानलेवा हो जाती है. सदमा एक्यूट और क्रॉनिक दोनों ही स्थितियों में खराब है. सदमे में व्यक्ति चुप रह सकता है, रो सकता है या अचानक बेहोश हो सकता है. उसके सीने में दबाव, बांहों या जबड़े में दर्द, पसीना आना, उल्टी जैसा महसूस हो सकता है. आईसीएमआर की एक रिपोर्ट कहती है कि तीव्र मानसिक तनाव हार्ट अटैक को ट्रिगर कर देता है. सदमे को कैसे संभालें? अगर आपके पास सदमे का पीड़ित है तो उसे शांत जगह पर बिठाएं, गहरी सांस लेने को कहें. अगर उसके सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं. ECG और ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं. अगर वह फिर ठीक से व्यवहार न करे तो उसे मानसिक सहायता दें, सदमे की काउंसलिंग कराएं. परिवार उसके आसपास रहे, उससे लगातार बात करें, उसे अकेले न छोड़ें. . अगर किसी को पहले से दिल की बीमारी है तो उसे झटके से कोई दुखभरी सूचना न दें और उसे लगातार व्यायाम करने व दवा लेने के लिए प्रेरित करें. क्या सदमे से मिल सकती है मुक्ति भावनात्मक सदमा स्ट्रैस कार्डियोमायोपैथी पैदा कर सकता है, जो ज्यादातर मामलों में रिवर्सिबल होता है, लेकिन समय पर इलाज जरूरी है. AIIMS और PGI चंडीगढ़ जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ कहते हैं कि तीव्र दुख में हृदय की निगरानी रखें. योग करें, व्यायाम करें, लोगों से मिलें. स्वस्थ जीवनशैली और मजबूत सामाजिक समर्थन सदमे के प्रभाव को कम कर सकता है.
बागल में रिपोलिंग के दौरान साइंटिस्ट स्टाफ, भड़के शुभेंदु अधिकारी बोले- लोकतंत्र का भविष्य क्या है…

पश्चिम बंगाल विधानसभा क्षेत्र में नामांकन के नेता और भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को पिघला और दासपुर क्षेत्र में विधानसभा के दिन सामुहिक कार्यकर्ताओं को दृढ़ संकल्पित करने के लिए चिंता का विषय बना दिया। उन्होंने नामांकन में नामांकन का आरोप लगाया और चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग की। साहित्यिक संस्था के लिए संवैधानिक संस्था पर उठे सवाल एक पोस्ट में अधिकारी ने लिखा, “क्या लोकतंत्र के भविष्य के अनुरूप कर्मचारियों के हाथों में शामिल किया जा रहा है? यह एक गंभीर चिंता का विषय है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सीधा हमला है। 227-पिंघला एसी और 230-दासपुर एसी के लिए जारी शब्दावली सिद्धांतों को देखने के लिए मैं स्तब्ध हूं, जहां लोकतंत्र के लिए बड़ी संख्या में ठोस और कमजोर कर्मचारियों को जारी किया गया है।” उन्होंने जिबिका के सेवकों, सहायकों और सांकेतिक मतदान अधिकारियों की गिनती के लिए बाजीगरी के प्रश्न पूछे हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि मठ, वीवीपीएटी और डाक मतपत्रों को अचयनित किया जाता है जैसे कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी, जिबिका सेवकों और सहायकों को कैसे चिह्नित किया जा सकता है? ये पद स्वाभाविक रूप से राजनीतिक दबाव के प्रति संवेदनशील होते हैं। विवरण से पता चलता है कि महत्वपूर्ण अभिलेखों के लिए सूचीबद्ध कर्मचारियों पर भरोसा किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टीएमसी का पहला विरोध, ममता बनर्जी के सबसे बड़े नेता बोले-साला स्टालिन के लिए… ‘मतगणना में सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा’उन्होंने आगे कहा कि पिंघला ऐस (227), बिपालेंदु बेरा (जेएसी), शंकर हिल (जेएसी) और नबा कुमार एपिक (बीएलएस) जैसे बेसिक स्टाफ़निक टीम शामिल हैं। यहां तक कि ‘रिज़र्व टैगिंग’ में भी बबला जैसे स्टाफ लगे हुए हैं। अन्य होटलों और यहां तक कि यहां की नोट्स/वीवीएटी की सीलिंग में भी सहायकों, वीईएलई और सहायकों पर नियुक्त डीईओ की भरमार है। सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से ये सुनिश्चित करने को कहा है कि 4 मई को होने वाली माध्यमिक में नियमित सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया जाए. मुख्य चुनाव आयुक्त से हस्तक्षेप की मांगउन्होंने लिखा, “मुख्य चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव अधिकारी पश्चिम बंगाल में हस्तक्षेप करना चाहते हैं, ताकि इन दस्तावेजों में संशोधन किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रारंभिक प्रक्रिया में केवल वैध, नियमित कर्मचारी सरकारी अधिकारी शामिल हों, ताकि सहायक बने रहें।” उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग को लोकतंत्र के संविधान पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए. हम जनता के साथ मिलकर उन लोगों को नौकरी पर नहीं रखना चाहते, जो कि समुदाय विशेष के दल के आधार पर हैं। ये भी पढ़ें बंगाल चुनाव की मतगणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बीजेपी का पहला बयान, कहा- टीएमसी जब भी कोर्ट गई, उसे…
सामंथा ने लॉन्च किया टॉक्सिन फ्री परफ्यूम:रणबीर से रश्मिका तक; परफ्यूम बिजनेस में उतरे सेलेब्स, फैंस से बन रहा नया कनेक्शन

फिल्म स्टार्स लंबे समय से परफ्यूम ब्रांड्स का प्रचार करते रहे हैं, लेकिन अब वे खुद इस बिजनेस में उतर रहे हैं और अपने-अपने तरीके से फैंस से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रणबीर कपूर ने पिछले साल ‘ARKS’ नाम से परफ्यूम लॉन्च किया। इसमें रणबीर ने ऑनलाइन स्ट्रेटजी अपनाई। कंपनी ने स्विगी इंस्टामार्ट से पार्टनरशिप की और इसे क्विक कॉमर्स पर उपलब्ध कराया। वहीं सामंथा रुथ प्रभु का ‘सीक्रेट एलकेमिस्ट’ खुद को भारत का पहला अरोमाथेरेपी-बेस्ड परफ्यूम ब्रांड बताता है, जिसमें टॉक्सिन-फ्री और वेलनेस-फोकस्ड खुशबुओं पर जोर है। रश्मिका मंदाना ने भी ‘डियर डायरी’ नाम से परफ्यूम ब्रांड शुरू की है। उनकी कंपनी ने 2026 के अंत तक 100 स्टोर्स तक विस्तार करने की योजना बनाई है। इधर, हॉलीवुड में भी रिहाना, सेलेना गोमेज जैसे सेलेब्रिटी इस बिजनेस में हैं। जानते हैं इनके बारे में। ये स्टार्स बना रहे अपने पर्सनलाइज्ड परफ्यूम सामंथा रुथ प्रभुका ‘सीक्रेट एलकेमिस्ट’ सामंथा ने मार्च 2026 में ब्रांड सीक्रेट एलकेमिस्ट के जरिए अरोमाथेरेपी-आधारित नए परफ्यूम्स की रेंज लॉन्च की है। ये उनके क्यूरेटेड परफ्यूम है व टॉक्सिन-फ्री हैं। औसतन 100ml परफ्यूम 999 रु. से शुरू है। रश्मिका मंदाना का डियर डायरी रश्मिका ने जुलाई 2025 में परफ्यूम ब्रांड ‘डियर डायरी’ लॉन्च किया। इसकी खुशबुएं उनकी निजी यादों और कूर्ग में बिताए बचपन से प्रेरित हैं। रश्मिका अपने परफ्यूम से फैंस से कनेक्ट बना रही हैं। औसतन 100ml परफ्यूम 2599 रु. का है। सेलेना गोमेज का रेयर ब्यूटी सेलेना ने रेयर ब्यूटी में फ्रेगरेंस लॉन्च किया है। इसमें कैरामेल, पिस्ता व सैंडलवुड जैसे नोट्स शामिल हैं। यह वीगन फ्रेंडली है। इसे यूं डिजाइन किया गया है कि इसकी खुशबू 12 घंटे तक विकसित होती रहे। औसतन 50ml परफ्यूम 4500 रु. का है। बियोंसे का बियोंसे परफ्यूम्स बियोंसे परफ्यूम्स के तहत दो नए परफ्यूम Cé Noir और Cé Lumière लॉन्च किए हैं। इनमें स्किन मस्क नोट इस्तेमाल किया गया है, जिससे खुशबू त्वचा पर धीरे-धीरे पर्सनल एहसास दे। कीमत 15 हजार रु. से शुरू है। रणबीर कपूर ARKS परफ्यूम रणबीर ने ARKS परफ्यूम लॉन्च किया है। इसकी 65% बिक्री ऑनलाइन हो रही है। हर महीने ₹1 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू भी आ रहा है। यह ‘जेंडर-इन्क्लूसिव’ परफ्यूम है। इसकी एक 50ml बोतल की कीमत ₹2,999 रु. है।
नूर जहां, लक्ष्मणभोग से लेकर इमाम पसंद का नाम सुना है? ये हैं देश के रेयर आम,स्वाद, आकार, रंग में जबरदस्त

होमफोटोलाइफ़फूड नूर जहां, लक्ष्मणभोग से लेकर इमाम पसंद का नाम सुना है? ये हैं देश के रेयर आम Last Updated:May 02, 2026, 14:24 IST Rare mango varieties from india: फलों के राजा आम खाने का सीजन आ गया है. कुछ ही दिनों में आपको तरह-तरह के स्वाद, आकार, रंग वेरायटी वाले आम मार्केट में दिख जाएंगे. हर किसी का आम पसंदीदा फल होता है. भारत में सैकड़ों किस्म के आम उगाए जाते हैं. इनमें से तो कुछ आम की किस्में अब दुर्लभ हो गई हैं. ये रेयर किस्म के आम अब तो मिलते भी नहीं हैं. चलिए कुछ ऐसे ही आमों की खासियत के बारे में जानते हैं. कोहितुर Kohitur: कभी मुगल दरबारों में सराहे जाने वाला यह दुर्लभ आम अब लगभग विलुप्त हो चुका है. इसकी भरपूर सुगंध और अत्यधिक दुर्लभता इसे एक बहुमूल्य विलासिता का सामान बनाती है, जो उच्च वर्ग के खरीदारों और निर्यात संग्राहकों के लिए एकदम उपयुक्त है. इमाम पसंद Imam Pasand: इमाम पसंद आम दक्षिण भारत में मिलता है. वहां इसे हिमायत भी कहते हैं. इसकी मिठास रेशमी होती है, लोग इस आम को खूब खाना पसंद करते हैं. हालांकि, कम पैदावार के कारण यह एक विशिष्ट किस्म का आम बनकर रह गया है. किसान भी अब इसे एक प्रीमियम मैंगो के रूप में देखते हैं. मनकुराद Mankurad: पर्यटकों को लुभाने वाली अपनी मनमोहक उष्णकटिबंधीय सुगंध के लिए प्रसिद्ध है ये आम. इस आम को जीआई-टैग प्राप्त हो चुका है. इसका सेवन आप जरूर करें, अगर आपको ये कहीं भी मिल जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google लक्ष्मणभोग Lakshmanbhog: पश्चिम बंगाल का यह आम ऐसे समय में आता है, जब अधिकांश किस्में मुरझाने लगती हैं. इसका सही समय, आकार और भरपूर स्वाद किसानों को गर्मी के मौसम में आपूर्ति में भारी कमी के दौरान बेहतर कीमतें प्राप्त करने में मदद करता है. नूर जहां Noor Jahan: मध्य प्रदेश में नूर जहां आम मिलता है. इस आम का आकार काफी विशाल होता है, इसलिए ये अधिक मशहूर है. इसकी दुर्लभता और आकर्षक रूप-रंग इसे वायरल कर देता है, जिसके चलते लोग फार्म का दौरा करने और सीधे बिक्री करने के लिए प्रेरित होते हैं. फ़ज़ली Fazli : फजली आम बंगाल और बिहार में काफी लोकप्रिय है. यह पल्पिंग और प्रसंस्करण के लिए आदर्श है. इस आम की इंडस्ट्रियल मांग भी खूब होती है. इसे बेचने से कोई नफा-नुकसान नहीं होता है, बल्कि पूरे साल आय आने की स्थिरता की गारंटी बनी रहती है. गुलाब खास Gulab Khas: अपनी विशिष्ट गुलाब जैसी सुगंध के कारण मशहूर है. यह आम उपहार देने के लिए आदर्श है. इसकी अनूठी सुगंध शहरी खरीदारों और प्रीमियम फ्रूट सब्सक्रिप्शन बॉक्स ग्राहकों को आकर्षित करती है, जो इसके लिए अधिक कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।









