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बंगाल चुनाव आयोग को लेकर बड़ा फैसला, 165 डेविल्स काउंटी और 77 पुलिस ऑब्जर्वर की नियुक्ति

बंगाल चुनाव आयोग को लेकर बड़ा फैसला, 165 डेविल्स काउंटी और 77 पुलिस ऑब्जर्वर की नियुक्ति

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद और वोटों की गिनती से पहले स्टॉन्ग रूम और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में पार्टिकल्स को लेकर हंगामा मच गया है। इस बीच चुनाव आयोग ने शनिवार (2 मई, 2026) को बड़ा कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल में 165 अतिरिक्त तीन पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है।

इस संबंध में चुनाव आयोग ने शनिवार (2 मई, 2026) को आधिकारिक रूप से एक बयान जारी किया है, जिसमें आयोग ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनाव, 2026 के लिए माध्यमिक शिक्षा के लिए आस-पास की सुरक्षा और मजबूत करने और कानून व्यवस्था की देखरेख पर ध्यान देने के लिए 165 अतिरिक्त भाषा पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है।

वोटो की गणना के लिए सोसाइटी और रेज़्यूमे आयोग की नियुक्ति की गई

चुनाव आयोग ने कहा है कि इन सभी अतिरिक्त ग्रेडों वाले पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 165 जिलों में मतदान पर्यवेक्षकों की सहायता की जाए। आयोग ने कहा कि यह संविधान के अनुसार नियुक्तियां 324 और पीपल का प्रतिनिधित्व, 1951 की धारा 20बी के तहत चुनाव आयोग द्वारा शक्तियों के आधार पर निर्धारित अधिनियम हैं। इस कारखाने के दौरान सभी ऑब्जर्ब्स आयोग के अधीनस्थों और आयोगों के नियंत्रण और नेतृत्व में कार्य होंगे।

चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षकों के लिए निम्नलिखित सख्त निर्देश दिए

चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पश्चिम बंगाल के जिन 165 क्षेत्रों में एक से अधिक काउंटी हॉल हैं, वहां पर काउंटी पर्यवेक्षकों की मदद के लिए अतिरिक्त न्यायिक पर्यवेक्षकों की सिफारिशें की गई हैं। इसके अलावा, पुलिस पर्यवेक्षकों को मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि तीन केंद्रों पर किसी तरह की कोई घटना न हो और मतगणना प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्देश-निर्देशों के तहत दी जा सके।

मतगणना से पहले चुनाव आयोग का सख्त रुख

चुनाव आयोग ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मतगणना केंद्रों पर स्टाफ पुलिस ऑब्जर्वर को किसी भी स्थिति में आतंकवादियों की गिनती के दिन और उसके दौरान गिनती हॉल में नहीं जाना पड़ेगा। पुलिस पर्यवेक्षक वोट गणना प्रक्रिया के दौरान प्राथमिक पर्यवेक्षकों और अन्य संस्थाओं के सदस्यों के साथ मिलकर काम करेंगे।

इसके अलावा, रिनर्टिंग अधिकारी ईसीआईएनईटी के एक निश्चित दस्तावेज़ के तहत लेखांकन कर्मचारी, सेल और उनके सहयोगियों को एक क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र (डेटाबेस कार्ड) जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से वो गिनती केंद्रों में प्रवेश कर सकेंगे। आयोग ने यह भी कहा कि गणना अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी के अलावा किसी भी व्यक्ति को गणना हॉल के अंदर मोबाइल फोन लेकर जाने की अनुमति नहीं होगी।

यह भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी को झटका दिया, सेंट्रल कर्मचारियों के रिकॉर्ड्स केस में प्रवेश से मना किया गया

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इस संबंध में चुनाव आयोग ने शनिवार (2 मई, 2026) को आधिकारिक रूप से एक बयान जारी किया है, जिसमें आयोग ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनाव, 2026 के लिए माध्यमिक शिक्षा के लिए आस-पास की सुरक्षा और मजबूत करने और कानून व्यवस्था की देखरेख पर ध्यान देने के लिए 165 अतिरिक्त भाषा पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है।

वोटो की गणना के लिए सोसाइटी और रेज़्यूमे आयोग की नियुक्ति की गई

चुनाव आयोग ने कहा है कि इन सभी अतिरिक्त ग्रेडों वाले पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 165 जिलों में मतदान पर्यवेक्षकों की सहायता की जाए। आयोग ने कहा कि यह संविधान के अनुसार नियुक्तियां 324 और पीपल का प्रतिनिधित्व, 1951 की धारा 20बी के तहत चुनाव आयोग द्वारा शक्तियों के आधार पर निर्धारित अधिनियम हैं। इस कारखाने के दौरान सभी ऑब्जर्ब्स आयोग के अधीनस्थों और आयोगों के नियंत्रण और नेतृत्व में कार्य होंगे।

चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षकों के लिए निम्नलिखित सख्त निर्देश दिए

चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि पश्चिम बंगाल के जिन 165 क्षेत्रों में एक से अधिक काउंटी हॉल हैं, वहां पर काउंटी पर्यवेक्षकों की मदद के लिए अतिरिक्त न्यायिक पर्यवेक्षकों की सिफारिशें की गई हैं। इसके अलावा, पुलिस पर्यवेक्षकों को मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि तीन केंद्रों पर किसी तरह की कोई घटना न हो और मतगणना प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्देश-निर्देशों के तहत दी जा सके।

मतगणना से पहले चुनाव आयोग का सख्त रुख

चुनाव आयोग ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि मतगणना केंद्रों पर स्टाफ पुलिस ऑब्जर्वर को किसी भी स्थिति में आतंकवादियों की गिनती के दिन और उसके दौरान गिनती हॉल में नहीं जाना पड़ेगा। पुलिस पर्यवेक्षक वोट गणना प्रक्रिया के दौरान प्राथमिक पर्यवेक्षकों और अन्य संस्थाओं के सदस्यों के साथ मिलकर काम करेंगे।

इसके अलावा, रिनर्टिंग अधिकारी ईसीआईएनईटी के एक निश्चित दस्तावेज़ के तहत लेखांकन कर्मचारी, सेल और उनके सहयोगियों को एक क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र (डेटाबेस कार्ड) जारी किया जाएगा, जिसके माध्यम से वो गिनती केंद्रों में प्रवेश कर सकेंगे। आयोग ने यह भी कहा कि गणना अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी के अलावा किसी भी व्यक्ति को गणना हॉल के अंदर मोबाइल फोन लेकर जाने की अनुमति नहीं होगी।

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