ममता के नारे से बीजेपी को सरकार बनाने का मौका मिला? जानें पूरा कानूनी दांव-पेंच

पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बहुमत बहुमत मिलने के बाद पूरे राज्य में भगवामय नजर आ रही है। चुनावी नतीजे 24 घंटे पहले जारी हो चुके हैं, लेकिन गली-गली में अभी भी बीजेपी की जीत का जश्न मनाया जा रहा है. इस जीत में सम्मिलित पूरे दल में भाजपा के शामिल होने का आरोप लगाया जा रहा है। ममता ने मना कर दिया आंध्र प्रदेश की प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार (5 अप्रैल 2026) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम कोई नहीं बल्कि एक साजिश है। उन्होंने पद छोड़ने से इनकार करते हुए कहा, ‘मैं पद क्यों छोड़ूं? हम हारे नहीं हैं. क़ीमत लूटा गया है. आख़िरकार का प्रश्न कहां है? मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी।’ एबीएन ने मातृभाषा में बड़े पैमाने पर समर्थकों पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि लगभग 100 सीटों की ‘लूट’ हुई है और उनकी पार्टी के छात्रों के लिए मातृभाषा की गति को तोड़ दिया गया है। काउंटींग सेंटर पर शोरूम का आरोप ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें कल तीन केंद्र के अंदर स्ट्राइक मारी गई, बज़ा दिया गया और बादसालुकी की गई। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय बल के युवा शिक्षण संस्थानों के बाहर ‘गुंडों’ को व्यवहारकुशल करार दिया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग पर अपना हमला तेज करते हुए कहा, ‘इतिहास में एक काला अध्याय लिखा गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त खलनायक बन गए हैं।’ विधान विशेषज्ञ के अनुसार, चुनाव हारना के बाद किसी भी मुख्यमंत्री के पद से हटने की स्थिति की कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी। विशेषज्ञ का कहना है कि भारत में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जब विधानसभा चुनाव के बाद हारना के किसी मुख्यमंत्री ने पद छोड़ दिया हो। उन्होंने कहा कि यदि ममता बनर्जी अपने रुख पर अडिग रहती हैं, तो यह भारत की संसदीय लोकतंत्र के विकास में एक असामान्य क्षण साबित हो सकता है। पद नहीं छोड़ी ममता तो आगे क्या होगा? संविधान विशेषज्ञ और नोमान के पूर्व महासचिव पी डी टी आचार्य ने बताया कि नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण में ही ममता बनर्जी को पदस्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘एक राज्य में दो मुख्यमंत्री नहीं हो सकते. ममता बनर्जी वर्तमान विधानसभा के लिए बनी हुई हैं और विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार, सरकार विधायिका का प्रति उत्तर होता है। ‘संविदा समाप्त होने पर सरकार भी शामिल है।’ ममता बनर्जी के बयान के बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल से मौजूदा संवैधानिक या वैधानिक के बारे में पूछे जाने पर वरिष्ठ नेता और संवैधानिक कानूनी विशेषज्ञ राकेश दाडी ने कहा कि उन्हें राजनीतिक संवैधानिक और संवैधानिक संवैधानिकता के आधार पर खारिज कर देना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘नई विधानसभा का चुनाव हो चुका है और जल्द ही भाजपा के किसी नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए नामांकित किया जाएगा और राज्यपाल द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाएगा।’ अगर ‘बनर्जी को’ बर्खास्त नहीं किया जाता है तो गवर्नर उन्हें (बनर्जी को) बर्खास्त कर देंगे।’ ममता को छोड़ना होगा: उम्मीदवार वरिष्ठ वकील और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डेंटल डेव ने कहा, ‘राज्यपाल को उन्हें (ममता बनर्जी) को उठाना चाहिए।’ वरिष्ठ अजिताहित सिन्हा ने कहा कि बनर्जी को पद छोड़ना चाहिए, अन्यथा नए मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए और सदन में बहुमत साबित करने के बाद वह पद हटना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी को इस्तीफा देना होगा. संवैधानिक सिद्धांतों के अनुसार, गवर्नर को बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाएगा और सदनों में बहुमत साबित होगा… नए मुख्यमंत्री के निधन के बाद, यह माना जाएगा कि उन्हें पद से हटा दिया गया है।’ जब 2011 में वामपंथियों का 34 साल का शासन समाप्त हुआ तो मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने हार मान ली और तुरंत ही कैथोलिक शासक गोपालकृष्ण गांधी को अपना पद छोड़ दिया। उन्होंने बिना किसी देरी के पद त्याग दिया, जो एक सुव्यवस्थित लोकतांत्रिक परिवर्तन का प्रतीक था। उस वर्ष वाम-विरोधी लहर के बल पर सत्ता में नामांकित ममता बनर्जी ने खुद को एक भूखा कार्यकर्ता से नियुक्त के रूप में प्रस्तुत किया था। ममता-कांग्रेस में विपक्ष राजनीतिक सिद्धांत का कहना है कि ममता बनर्जी का कांग्रेस से गठबंधन थोड़ा विरोधाभासी है, क्योंकि उनकी पार्टी पहले कांग्रेस और उनके नेता, विशेष रूप से राहुल गांधी की आलोचना कर रही हैं और पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे कई राज्यों में दोनों के बीच मजबूत समानताएं भी हैं। ममता बनर्जी ने चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित इलाकों का दौरा करने और जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए 10 प्रभावशाली तथ्य निष्कर्षण समिति के गठन की भी घोषणा की। उन्होंने 2021 चुनाव के बाद हुई हिंसा के आरोपों को निराधार बताया. बीजेपी ने अपने सहयोगियों को धार्मिक आधार पर खारिज कर दिया और जनता पर आरोप लगाया। पार्टी के प्रवक्ता देबोजीत सरकार ने कहा, ‘उनकी विचारधारा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।’ वह सिर्फ खुद को हंसी का पात्र बना रही हैं। हमें लगता है कि वह कुछ और दिनों तक इस तरह की बेटुकी शॉप के लिए सर्वे कर रही हैं।’ चुनाव आयोग ने मैमिटी के लिए प्रतिबद्धता तय की उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग ने मतदान के चरण में मतदान के दौरान हिंसा, गोलीबारी या मौत की कोई घटना नहीं हुई। इस बीच, इलेक्ट्रोक कमीशन ने पेट्रोलियम कांग्रेस प्रमुखों द्वारा भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में ‘अनियमित सहयोगियों’ के सहयोगियों को ‘बेबुनियाद और वामपंथी’ पद से बर्खास्त कर दिया। इस सीट से चुनाव में अंतर रही ममता बनर्जी बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों से हार गईं और इसके बाद उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया। Input By : pl भाषा
जीरा VS सौंफ पानी: गर्मी में सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद क्या?

जीरा पानी और सौंफ पानी दोनों ही आयुर्वेद में बहुत उपयोगी माने जाते हैं और सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. खासकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में इन दोनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इन दोनों में से कौन ज्यादा बेहतर है. आइए इसे आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं. जीरा पानी क्या करता है?जीरा पानी शरीर के लिए एक प्राकृतिक डिटॉक्स ड्रिंक की तरह काम करता है. जीरा पेट के अंदर बनने वाले एसिड को संतुलित करने में मदद करता है. जब पेट में एसिड ज्यादा हो जाता है, तो एसिडिटी, जलन और भारीपन जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में जीरा पानी इन समस्याओं को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा, जीरा पानी पाचन शक्ति को सुधारता है और खाना जल्दी पचाने में मदद करता है. अगर किसी को अपच या गैस की समस्या होती है, तो जीरा पानी राहत दे सकता है. यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी तेज करता है, जिससे शरीर ज्यादा कैलोरी बर्न कर पाता है. इसी वजह से वजन कम करने वालों के लिए जीरा पानी काफी फायदेमंद माना जाता है. जीरा पानी शरीर से विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने में भी मदद करता है, जिससे शरीर हल्का और एनर्जेटिक महसूस करता है. सौंफ पानी के फायदेसौंफ पानी भी पाचन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन इसके फायदे थोड़े अलग हैं. सौंफ में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराती है. इससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है और अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाव होता है. सौंफ पानी पेट को ठंडक देने का काम करता है. गर्मी के मौसम में यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और जलन या गर्मी से होने वाली समस्याओं को कम करता है. इसके अलावा, यह इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी पेट की समस्याओं में भी राहत दे सकता है. सौंफ पानी दिल की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद करता है. इससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. जीरा पानी बनाम सौंफ पानीअगर तुलना करें, तो दोनों ही पानी सेहत के लिए अच्छे हैं, लेकिन इनके फायदे अलग-अलग हैं. जीरा पानी ज्यादा तर एसिडिटी, गैस, अपच और वजन घटाने जैसी समस्याओं के लिए बेहतर माना जाता है. यह जल्दी असर दिखाने वाला घरेलू उपाय है. वहीं दूसरी तरफ, सौंफ पानी पेट को ठंडा रखने, भूख को कंट्रोल करने और दिल की सेहत सुधारने में ज्यादा मददगार होता है. यह लंबे समय तक शरीर को संतुलित रखने में सहायक होता है. कौन सा ज्यादा बेहतर है?इसका सीधा जवाब यह है कि दोनों में से कोई एक “बेहतर” नहीं है, बल्कि यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. अगर आपको अक्सर एसिडिटी या गैस की समस्या रहती है, तो जीरा पानी आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. लेकिन अगर आपको भूख ज्यादा लगती है, पेट में गर्मी रहती है या आप दिल की सेहत का ध्यान रखना चाहते हैं, तो सौंफ पानी बेहतर विकल्प है. कैसे करें सेवन?जीरा पानी बनाने के लिए जीरे को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उबालकर या सीधे भी पीया जा सकता है. सौंफ पानी के लिए सौंफ को रातभर पानी में भिगोकर सुबह छानकर पिया जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
बच्चे को चोट लगे या खून निकले… घर के गमले में उगाएं ये पौधे, पत्ते लगाते ही मिलेगा तुरंत आराम!

Last Updated:May 05, 2026, 23:08 IST घर में छोटे बच्चे हों तो हल्की-फुल्की चोट लगना आम बात है. ऐसे में हर बार दवा ढूंढने के बजाय अगर घर में ही कुछ औषधीय पौधे हों, तो तुरंत राहत मिल सकती है. कई ऐसे पौधे हैं जिन्हें आप अपने गमले में आसानी से उगा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उनके पत्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट घर के गमले में उगाएं ये पौधा. घर में छोटे बच्चे हों तो खेलते-कूदते वक्त चोट लगना आम बात है. ऐसे समय पर तुरंत राहत के लिए अगर घर में ही कुछ औषधीय पौधे मौजूद हों, तो भागदौड़ कम हो सकती है. कई ऐसे पौधे हैं जिनके पत्ते हल्की खरोंच, सूजन या जलन में आराम देने में मदद कर सकते हैं. इसलिए घर के गमले में कुछ काम के मेडिसिनल प्लांट उगाना एक समझदारी भरा और उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है. एलोवेरा को सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों में गिना जाता है. इसके पत्तों के अंदर मौजूद जेल ठंडक देने वाला होता है, जो जलने, कटने या हल्की चोट में आराम पहुंचा सकता है. अगर बच्चे को हल्की खरोंच आ जाए, तो एलोवेरा जेल को साफ करके सीधे त्वचा पर लगाया जा सकता है. यह स्किन को मॉइश्चराइज करने के साथ ही निशान पड़ने की संभावना भी कम कर सकता है. तुलसी को एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर माना जाता है.तुलसी लगभग हर भारतीय घर में पाई जाती है. इसके पत्तों में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. हल्की चोट या कट लगने पर इसके पत्तों को पीसकर लगाया जाए, तो यह संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है और घाव जल्दी भरने में सहायक हो सकता है. पुदीना को ठंडक और सूजन में राहत के लिए माना जाता है. पुदीना सिर्फ खाने के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा के लिए भी फायदेमंद है. इसके पत्तों में ठंडक देने वाले गुण होते हैं, जो सूजन और जलन को कम करने में मदद कर सकते हैं. हल्की चोट या कीड़े के काटने पर इसका पेस्ट लगाने से आराम मिल सकता है. अजवाइन का पौधा भी दर्द में दे राहत देता है. इसके पत्ते भी कई घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल होते हैं. इनके पत्तों को हल्का गर्म करके लगाने से दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है. खासकर छोटे-मोटे दर्द या मांसपेशियों की अकड़न में यह मददगार हो सकता है. गिलोय भी इम्युनिटी के साथ हीलिंग में मदद करता है. गिलोय को आयुर्वेद में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के साथ-साथ रिकवरी प्रोसेस को सपोर्ट करता है. हालांकि इसे सीधे घाव पर लगाने से ज्यादा इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है, लेकिन घर में इसका पौधा होना कई तरह से उपयोगी हो सकता है और सबसे जरूरी बात कि घरेलू नुस्खे छोटे-मोटे घाव या हल्की चोट तक ही सीमित रखने चाहिए. अगर चोट गहरी हो, ज्यादा खून बह रहा हो या संक्रमण का खतरा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. साथ ही किसी भी पत्ते को लगाने से पहले उसे अच्छी तरह साफ करना बेहद जरूरी है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
बंगाल में दो मुख्य चुनाव पर जीत हुमायूँ कबीर! बीजेपी सरकार में बाबरी मस्जिद जाएगी या सिर्फ वोटर्स की हिस्सेदारी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक चेहरा सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया- हुमायूं कबीर. ममता बनर्जी की टीएमसी से निलंबित इस नेता ने अपनी नवगठित आम जनता पार्टी (एजेयूपी) के बैनर पर न केवल रेजिनगर बल्कि नोएडा सीट पर भी शानदार जीत दर्ज की। मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने के वादे ने उन्हें बीजेपी बंगाल में एक बड़े संकट की ओर भी धकेल दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हुमायूँ कबीर अपने वादे को पूरा कर लेगा, या फिर बाबरी मस्जिद अगले 5-10 संतों का एक स्थायी आकर्षण बनकर रहेगा? हुमायूँ कबीर की ऐतिहासिक जीत: बीजेपी और टीएमसी दोनों के लिए बड़ा झटका हुमायूं कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में दो चरणों में जीत दर्ज कर बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया। रेजीनगर सीट पर बिजनेस एसोसिएट बापन घोष को 58,876 से उन्होंने बड़े अंतर से हराया। कबीर को 1,23,536 वोट मिले, जबकि बीजेपी को सिर्फ 64,660 वोट मिले और टीएमसी 41,718 वोट के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गई। नौडा सीट पर भी कबीर ने बीजेपी के राणा मंडल को 27,943 से इंटरेस्ट से हराया। यह जीत बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि पूरे बंगाल में बीजेपी-टीएमसी के बाहर जो 6 लोग शामिल हुए, उनमें से सभी मुस्लिमों ने भाग लिया। इनमें अकेले हुमायूँ कबीर के नाम के दो दर्शन हैं। खुद कबीर ने यह जीत अल्पसंख्यकों के साथ होने पर अन्याय का जवाब देते हुए कहा कि उनकी पार्टी महज चार महीने पहले बनी थी, इसलिए यह बदनामी और भी खास है। बाबरी मस्जिद का सपना: नींव रखी जाती है, लेकिन राह आसान नहीं हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की सूची को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने 6 दिसंबर 2025 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं मस्जिद के दिन मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में मस्जिद की रिकॉर्डिंग रखी। यह जमीन लगभग 11 एकड़ की निजी जमीन पर है और पूरे प्रोजेक्ट की लागत 86 करोड़ रुपये है। कबीर ने मस्जिद को दो साल में पूरा करने का दावा किया है और बांग्लादेश और मध्य पूर्व से धन मंत्रालय की मदद के लिए भी ली जा रही है। लेकिन अब सबसे बड़ी बाधा यह है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन का भुगतान हो गया है और बीजेपी की सरकार आ गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने साफा कह दिया के दौरान चुनावी प्रचार करते हुए कहा, ‘यह भारत है और यहां कोई भी आदमी बाबरी मस्जिद नहीं बना सकता।’ अगर बीजेपी की सरकार बनी है तो हम बंगाल की धरती पर बाबरी मस्जिद नहीं बनेंगे, इसके लिए हमें कुछ भी करना पड़ेगा।’ कानूनी-प्रशासकीय अवरोधों का जाल हालांकि जमीन निजी है, लेकिन बीजेपी सरकार के पास निर्माण पर कई तरह से रोक है: पहला रास्ता: भूमि उपयोग एवं भवन निर्माण का स्वामित्व है। कोई भी बड़ा धार्मिक ढाँचा बनाने के लिए स्थानीय नगर चोर और राज्य सरकार की अनुमति अनिवार्य है, जिसे भाजपा सरकार आसानी से रोक सकती है। दूसरा रास्ता: शांति भंग और सांप्रदायिक तनाव का तर्क है। सरकार ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इस क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव का खतरा है। तीसरा रास्ता: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और पशुपालन विभाग के लिए फंडिंग की जांच। कबीर पर पहले से ही उनके रिश्तेदार की फैक्ट्री से जुड़े होने का आरोप है और 10 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। तो क्या अगले 5-10 सामुद्रिक बाजारों के निवेशक रहेंगे रहेंगे बाबरी मस्जिद? यह प्रश्न और भी दिलचस्प हो जाता है। पॉलिटिकल शास्त्रियों का साफ मानना है कि बाबरी मस्जिद का खंडहर बंगाल की राजनीति में एक स्थायी किस्सा रहेगा, जो हर चुनाव में गूंजता रहेगा। इसके कई ठोस कारण हैं: हुमायूं कबीर के लिए इस मस्जिद ने अपनी पूरी राजनीति की धज्जियां उड़ा दी हैं। अगर वह पीछे हटते हैं तो उनके बीच की पूछताछ खत्म हो जाएगी। उनकी राजनीतिक मजबूरी उन्हें इस मुद्दे पर मजबूरन कायम रखने के लिए मजबूर करती है। बीजेपी के लिए भी यह किसी भी आभूषण से कम नहीं है। मुर्शिदाबाद में 66% मुस्लिम आबादी है। बाबरी मस्जिद का विरोध, हिंदू झील वहां के ध्रुवीकरण का सबसे मजबूत हथियार बन गया है। 2021 में जहां बीजेपी को मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तरी डायनाजपुर की 43 सीटें मिलीं, वहीं 2026 में यह संख्या 19 हो गई। बीजेपी इस मुद्दे को आने वाले नगर निकाय और पंचायत चुनाव में भी शामिल करेगी। कबीर ने अब खुद को अखिल भारतीय स्तर पर मुस्लिम अस्मिता की राजनीति का चेहरा बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। असदुद्दीन ओवैसी के AIMIM से उनके गठबंधन (जो बाद में टूट गया) का कहना है कि वह सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहना चाहते। बाबरी मस्जिद न बनने की स्थिति में भी ये ‘मुसलमानों के साथ अन्याय’ और ‘बीजेपी के अनाचार’ की नैरेटिविटी को आगे बढ़ाने का मकसद बनेगा। 2028 के मुस्लिम चुनाव और 2031 के अगले विधानसभा चुनाव में बाबरी मस्जिद का मामला एक बार फिर से केंद्र में बंटा, मस्जिद बनी हो या नहीं। बीजेपी दल और वाम दल भी इसे बीजेपी पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि बीजेपी इसे अपने अविश्वास के लिए कांग्रेस को मजबूत करने का उद्योग बनाएगी। सोसाइटी, बीजेपी सरकार के नेतृत्व वाली बाबरी मस्जिद का निर्माण पूरा हो पाना मुश्किल लग रहा है। अगर कबीर कानूनी लड़ाई के जहाज़ हैं, तो यह मामला सागरों तक अदालतों में घिसटता रहेगा और 2030 तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आएगा। दूसरी ओर, भाजपा सरकार की हर कार्रवाई भाजपा को ‘मुस्लिम विरोधी’ साबित करने का मौका बनी रहेगी।
बिड़ला बने वोडाफोन-आइडिया के चेयरमैन:सरकार ने AGR बकाया 27% कम किया; अब ₹64,046 करोड़ देना होगा

वोडाफोन-आइडिया (Vi) के बोर्ड ने कुमार मंगलम बिड़ला को कंपनी का नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया है। कंपनी ने 5 मई को स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि वर्तमान चेयरमैन रविंद्र टक्कर ने पद छोड़ने की इच्छा जताई थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। रविंद्र टक्कर अब बोर्ड में केवल नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की भूमिका में रहेंगे। बिड़ला की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब कंपनी को सरकार से बड़ी वित्तीय राहत मिली है। हाल ही में टेलीकॉम विभाग (DoT) ने वोडाफोन-आइडिया के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाए में करीब 20,000 करोड़ रुपए की कटौती की है। इस खबर के बाद कंपनी के शेयर करीब 8% चढ़ चुके हैं। AGR बकाया: ₹87,695 करोड़ से घटकर ₹64,046 करोड़ हुआ सरकार ने वोडाफोन-आइडिया को बड़ी राहत देते हुए उसके AGR बकाए में 27% की कमी की है। पिछले साल दिसंबर तक यह बकाया 87,695 करोड़ रुपए था, जिसे अब घटाकर 64,046 करोड़ रुपए कर दिया गया है। टेलीकॉम विभाग की एक कमेटी ने बकाए की गणना का दोबारा आकलन किया, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। 5 साल तक कोई पैसा नहीं देना होगा, 2031 से शुरू होगी वसूली सरकार ने न सिर्फ बकाया कम किया है, बल्कि पेमेंट के लिए 5 साल की राहत (मोरेटोरियम) भी दी है। नया पेमेंट शेड्यूल इस प्रकार है: सुप्रीम कोर्ट और सरकार का रुख यह राहत 31 दिसंबर को कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए रिलीफ पैकेज और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मिली है। कोर्ट ने सरकार को ब्याज, पेनाल्टी और बकाए का दोबारा आकलन करने की अनुमति दी थी। बता दें कि वोडाफोन-आइडिया में भारत सरकार की 49% हिस्सेदारी है, जो इसे कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक बनाती है। AGR विवाद: 2019 से चल रही है कानूनी लड़ाई AGR विवाद 2019 में शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि टेलीकॉम कंपनियों को गैर-टेलीकॉम रेवेन्यू पर भी सरकार को लाइसेंस फीस देनी होगी। उस समय सरकारी गणना में Vi का बकाया 58,254 करोड़ रुपए था, जबकि कंपनी इसे 21,500 करोड़ रुपए बता रही थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2025 में कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई करते हुए सरकार को दोबारा गणना करने की छूट दी थी।
प्यास नहीं लगती फिर भी शरीर दे रहा है खतरे के संकेत! डिहाइड्रेशन के ये 5 लक्षण चुपचाप कर रहे हैं नुकसान

Last Updated:May 05, 2026, 22:45 IST डिहाइड्रेशन को नजरअंदाज करना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि आप दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें और सिर्फ प्यास लगने का इंतजार न करें. शरीर के इन छोटे-छोटे संकेतों को समझकर आप समय रहते खुद को डिहाइड्रेशन से बचा सकते हैं. आइए जानते हैं ये 5 लक्षण, जो आपको नुकसान पहुंचा रहे हैं… ख़बरें फटाफट डिहाइड्रेशन से शरीर में ड्रायनेस महसूस होता है. डिहाइड्रेशन गर्मियों में बेहद आम समस्या है, लेकिन इसे पहचानना हमेशा आसान नहीं होता. ज्यादातर लोग मानते हैं कि प्यास लगना ही इसका सबसे बड़ा संकेत है, जबकि सच्चाई यह है कि जब तक आपको प्यास लगती है, तब तक शरीर हल्के डिहाइड्रेशन की स्थिति में पहुंच चुका होता है. इसलिए सिर्फ प्यास पर निर्भर रहने के बजाय शरीर के अन्य संकेतों को समझना बेहद जरूरी है. डिहाइड्रेशन का पहला और सबसे कॉमन संकेत है शरीर में ड्रायनेस महसूस होना. अगर आपके होंठ बार-बार सूख रहे हैं, मुंह चिपचिपा लग रहा है या सांस से बदबू आ रही है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके शरीर में पानी की कमी हो रही है. कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह शुरुआती चेतावनी होती है कि शरीर को तुरंत हाइड्रेशन की जरूरत है. दूसरा अहम संकेत है स्किन की इलास्टिसिटी यानी त्वचा की नमी और लचीलापन कम होना. इसे पहचानने का एक आसान तरीका है. अगर आप हाथ की त्वचा को हल्का सा खींचकर छोड़ते हैं और वह तुरंत वापस अपनी जगह नहीं आती, तो यह डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है. इसके अलावा आंखों का धंसा हुआ दिखना भी शरीर में पानी की कमी की ओर इशारा करता है. तीसरा संकेत है पेशाब का रंग और मात्रा. सामान्य रूप से पेशाब का रंग हल्का पीला होना चाहिए, लेकिन अगर यह गहरा पीला या एंबर कलर का हो जाए और उसकी मात्रा भी कम हो जाए, तो यह साफ संकेत है कि शरीर में पानी की कमी हो रही है. यह एक ऐसा संकेत है जिसे आसानी से देखा जा सकता है, फिर भी लोग अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं. डिहाइड्रेशन का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि दिमाग पर भी पड़ता है. अगर आपको बार-बार सिरदर्द हो रहा है, खासकर मूवमेंट के दौरान दर्द बढ़ता है या इसके साथ मतली भी महसूस होती है, तो यह पानी की कमी का परिणाम हो सकता है. शरीर में पानी की कमी ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करती है, जिससे सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती है. इसके अलावा “ब्रेन फॉग” यानी दिमाग का सही तरीके से काम न करना भी डिहाइड्रेशन का एक बड़ा संकेत है. इसमें ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत, चीजें याद रखने में परेशानी, चिड़चिड़ापन, ज्यादा थकान और सुस्ती महसूस होना शामिल है. कई लोग इसे स्ट्रेस या नींद की कमी समझ लेते हैं, जबकि असल वजह शरीर में पानी की कमी हो सकती है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
पेठे का मुरब्बा रेसिपी: मसालेदार गर्मी में बाजार से नहीं, घर पर बचे पेठे का मुरब्बा, नहीं दोस्त लू और पेट भी रहेगा ठंडा; विधि नोट करें

पेठे का मुरब्बा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री: 1 छोटा टुकड़ा यानी सफेद कद्दू, 700-800 ग्राम चीनी, 1 छोटा टुकड़ा कद्दू, 1 छोटा टुकड़ा केवड़ा जल, 1 छोटा टुकड़ा केवड़ा जल, पानी चाहिए छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले पेठे को छीलें और उसके बीज निकालें। अब इसे छोटे-छोटे व्यायाम में काट लें। एक पॉश्चर में पानी लेकर फिटकरी ग्लासें और पेथे के मिश्रण को 3-4 घंटे के लिए इसमें शामिल किया जाता है। छवि: एआई इससे पेठा कुरकुरा बनेगा। अब पे थे को साफ पानी से अच्छे तरह धो लें और लम्बाई सा सामान लें। ध्यान दें कि अधिकतम नरभक्षी न हो। एक कढ़ाही में चीनी और पानी की चाशनी तैयार करें। छवि: एआई जब चाशनी लकड़ी गाढ़ी होने लगे, तब पेठे केट के टुकड़े डाल दें। माप पर पेठे को चाशनी में तब तक आदर्श, जब तक वह स्थिर यानी पारदर्शी न हो जाए। चाशनी बहुत अधिक सरल या अधिक गाढ़ी न हो। छवि: फ्रीपिक अब इसमें इलायची पाउडर और केवड़ा जल संरचना अच्छी तरह से बनी हुई है। मुरब्बे को कूल डेज़ और फिर साका, कृप्या कांच होने के ज़ार में विज्ञापन रख लें। यह शरीर को ठंडक देता है। छवि: एआई लू से बचने में मदद मिलती है। पाचन तंत्र में सुधार होता है। इसके अलावा कमजोरी और थकान भी दूर होती है। मुरब्बा हमेशा साफ और आकर्षक जार में रहते हैं। फ़िरोज़ में स्टोर करने के लिए सबसे अधिक समय। छवि: एआई गर्मी में अगर कुछ मीठे, ठंडे और मसाले वाले खाने का मन हो, तो पेठे का मुरब्बा जरूर बना सकते हैं। घर पर बनाएं यह मुरब्बा स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी मूलमंत्र है। छवि: एआई
फ्रिज का ठंडा पानी पीना फायदेमंद या नुकसानदायक? डाइटिशियन से जान लीजिए हकीकत

Last Updated:May 05, 2026, 22:38 IST Cold Water Good or Bad: गर्मी से राहत पाने के लिए अधिकतर लोग फ्रिज का ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं. फ्रिज का ठंडा पानी तुरंत राहत देता है, लेकिन ज्यादा ठंडा पानी पाचन और गले पर असर डाल सकता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो संतुलित मात्रा और हल्का ठंडा पानी पीने की सलाह देते हैं, ताकि सेहत पर बुरा असर न पड़े. गर्मियों में ठंडा पानी पीने से शरीर को ठंडक मिल सकती है. Fridge Water vs Normal Water: गर्मियों के मौसम में ठंडा पानी पीना सभी को पसंद होता है. तेज धूप, पसीना और बढ़ता तापमान शरीर को जल्दी थका देता है. ऐसे में फ्रिज का ठंडा पानी तुरंत राहत देता है. सादा पानी से गर्मी में प्यास भी नहीं बुझती है. कई लोग घर आते ही सीधे फ्रिज खोलकर ठंडा पानी पी लेते हैं, क्योंकि इससे शरीर को ठंडक महसूस होती है. अब सवाल यह है कि क्या यह आदत लंबे समय में शरीर के लिए सही है या नहीं? इस बारे में डाइटिशियन से काम की बात जान लेते हैं. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है. हमारा शरीर भोजन को पचाने के लिए एक निश्चित तापमान बनाए रखता है. जब हम अचानक बहुत ठंडा पानी पीते हैं, तो यह प्रक्रिया धीमी हो सकती है. खासकर अगर आप खाना खाने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीते हैं, तो यह पेट में मौजूद एंजाइम्स के काम को प्रभावित कर सकता है. इसके कारण गैस, अपच, भारीपन और पेट फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो लंबे समय में पाचन संबंधी दिक्कतों को बढ़ा सकती हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक ठंडा पानी गले और श्वसन तंत्र पर भी बुरा असर डाल सकता है. अत्यधिक ठंडा पानी गले की मांसपेशियों को सिकोड़ देता है, जिससे कुछ लोगों को खराश या असहजता महसूस हो सकती है. जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है या जिन्हें जल्दी सर्दी-खांसी हो जाती है, उनके लिए यह आदत और भी परेशानी बढ़ा सकती है. लगातार बहुत ठंडा पानी पीने से गले में संक्रमण होने की संभावना भी बढ़ सकती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ठंडा पानी पूरी तरह से नुकसानदायक है. गर्मियों में सीमित मात्रा में ठंडा पानी पीना शरीर के लिए राहतदायक हो सकता है. डाइटिशियन की मानें तो जब आप बाहर से धूप में आते हैं या ज्यादा पसीना बहता है, तो हल्का ठंडा पानी शरीर का तापमान संतुलित करने में मदद करता है. यह तुरंत ताजगी देता है और थकान कम करता है. सामान्य तापमान का पानी या हल्का ठंडा पानी सबसे बेहतर विकल्प है. अगर आप फ्रिज का पानी पीना चाहते हैं, तो उसे कुछ मिनट बाहर रखकर थोड़ा सामान्य होने दें, फिर पिएं. इससे शरीर को झटका नहीं लगता और पाचन तंत्र भी प्रभावित नहीं होता. इसके अलावा दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना ज्यादा जरूरी है, चाहे वह ठंडा हो या सामान्य. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
‘बैकस्टैबर्स’: डीएमके पोस्ट ने भौंहें चढ़ा दीं क्योंकि कांग्रेस सरकार बनाने के लिए टीवीके को समर्थन देने पर विचार कर रही है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 22:21 IST सोशल मीडिया पर डीएमके नेता की गूढ़ “बैकस्टैबर्स” पोस्ट ने कांग्रेस द्वारा टीवीके प्रमुख विजय के समर्थन पर विचार करने की खबरों के बीच अटकलों को जन्म दे दिया। राहुल गांधी ने सोमवार को विजय को फोन कर तमिलनाडु के नतीजों पर बधाई दी है. (छवि: पीटीआई) तमिलनाडु में अगली सरकार बनाने के लिए कांग्रेस द्वारा संभवतः टीवीके प्रमुख विजय को समर्थन देने की राजनीतिक अटकलों के बीच सोशल मीडिया पर एक द्रमुक नेता की गुप्त “बैकस्टैबर्स” पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है। डीएमके के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने एक्स पर सिर्फ दो शब्द पोस्ट किए – “द बैकस्टैबर्स” – इसके तुरंत बाद कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि टीवीके ने राज्य में सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगने के लिए उससे संपर्क किया था। पीठ में छुरा घोंपने वाले।- सरवनन अन्नादुरई (@saravofcl) 5 मई 2026 पोस्ट ने तब से ध्यान आकर्षित किया है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह कांग्रेस या अन्य राजनीतिक खिलाड़ियों पर निर्देशित था। कांग्रेस ने पहले कहा था कि उसके केंद्रीय नेतृत्व ने तमिलनाडु इकाई से “राज्य की भावनाओं” को ध्यान में रखते हुए टीवीके के अनुरोध पर अंतिम निर्णय लेने के लिए कहा था। इसने यह भी दोहराया कि तमिलनाडु में जनादेश एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के लिए था और वह सरकार गठन में भाजपा या उसके सहयोगियों की किसी भी भूमिका का विरोध करेगी। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडनकर सहित शीर्ष कांग्रेस नेताओं ने चुनाव के बाद के परिदृश्य पर चर्चा के लिए मंगलवार शाम दिल्ली में एक बैठक की। बैठक के बाद, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि टीवीके प्रमुख विजय ने औपचारिक रूप से पार्टी का समर्थन मांगा था और अपने राजनीतिक दृष्टिकोण में पूर्व मुख्यमंत्री के कामराज से प्रेरणा लेने की बात भी कही थी। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने अंतिम निर्णय राज्य इकाई पर छोड़ दिया है। टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतीं लेकिन बहुमत से पीछे रह गई। सरकार बनाने के लिए अब उसे कम से कम 10 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के पास पांच सीटें हैं, जबकि छोटी पार्टियों के पास सीमित संख्या है। डीएमके, जो चुनाव के दौरान कांग्रेस की सहयोगी थी, ने 59 सीटें जीतीं, जबकि एआईएडीएमके ने 47 सीटें हासिल कीं। भाजपा ने सिर्फ एक सीट जीती। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’: द्रमुक की पोस्ट से भौंहें तन गईं क्योंकि कांग्रेस सरकार बनाने के लिए टीवीके को समर्थन देने पर विचार कर रही है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु राजनीतिक विवाद(टी)डीएमके नेता पोस्ट(टी)पीठ में छुरा घोंपने वालों का ट्वीट(टी)कांग्रेस टीवीके समर्थन(टी)विजय टीवीके प्रमुख(टी)तमिलनाडु सरकार गठन(टी)सरवनन अन्नादुरई एक्स(टी)धर्मनिरपेक्ष सरकार जनादेश
कितने दिनों में खराब हो जाता है आटा, क्या इसकी भी कोई एक्सपायरी डेट, अधिकतर लोग नहीं जानते होंगे

Last Updated:May 05, 2026, 22:04 IST Wheat Flour Expiry Date: आटा ज्यादा दिनों तक रखा रहे, तो वह खराब हो जाता है. खासकर गर्मियों में आटा जल्दी खराब होता है. आटे को लंबे समय तक सही बनाए रखने के लिए प्रॉपर तरीके से स्टोर करना चाहिए. इसे एयरटाइट कंटेनर में रखना चाहिए और ताजा आटे का उपयोग करना चाहिए. आटा खराब होने लगे, तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. खुला हुआ आटा 15 से 30 दिनों तक सुरक्षित रहता है. Atta Expiry Date and Storage Tips: आटे का इस्तेमाल रोटियां बनाने के लिए लगभग रोज किया जाता है. रोटी हमारी थाली का जरूरी हिस्सा हैं और कई लोगों का पेट बिना रोटी के भरता ही नहीं है. आमतौर पर लोग रोटी बनाने के लिए गेहूं का आटा इस्तेमाल करते हैं. अक्सर लोग आटा पिसवाकर रख लेते हैं और उसे महीनों तक इस्तेमाल करते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि यह कितने दिनों में खराब हो सकता है? अक्सर लोग समझते हैं कि आटा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है, लेकिन इसकी भी एक शेल्फ लाइफ होती है. अगर इसे सही तरीके से स्टोर न किया जाए, तो खराब हो सकता है और नुकसानदायक भी बन सकता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो पैक्ड गेहूं का आटा 1 से 3 महीने तक ठीक रहता है. अगर आटा खुला हुआ है या घर में पिसवाया गया है, तो इसकी ताजगी लगभग 15 से 30 दिनों तक ही रहती है. खासकर गर्मियों में नमी और गर्मी के कारण आटा जल्दी खराब हो सकता है. इसलिए मौसम के हिसाब से इसकी स्टोरेज पर ध्यान देना जरूरी है. आटा खराब होने के कुछ संकेत भी होते हैं, जिन्हें पहचानना जरूरी है. अगर आटे से अजीब सी गंध आने लगे, उसमें छोटे-छोटे कीड़े दिखें या उसका रंग बदल जाए, तो समझ लें कि वह खराब हो चुका है. अगर आटा छूने पर चिपचिपा या ज्यादा नम लगे, तो भी यह खराब होने का संकेत हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार आटे को हमेशा एयरटाइट कंटेनर में रखना चाहिए और उसे ठंडी व सूखी जगह पर स्टोर करना चाहिए. अगर संभव हो, तो गर्मियों में आटे को फ्रिज में भी रखा जा सकता है. इससे उसमें नमी और कीड़े लगने की संभावना कम हो जाती है और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है. आटे की क्वालिटी बनाए रखने के लिए एक और जरूरी बात है कि उसे जरूरत के हिसाब से ही खरीदें या पिसवाएं. बहुत ज्यादा मात्रा में आटा रखने से खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. ताजा आटा न सिर्फ स्वाद में बेहतर होता है, बल्कि सेहत के लिए भी ज्यादा फायदेमंद होता है. खराब आटा सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है और कई परेशानियां पैदा कर सकता है. सभी के लिए यह समझना जरूरी है कि आटे की भी एक एक्सपायरी होती है, भले ही वह पैकेट पर साफ न लिखी हो. सही स्टोरेज और सावधानी से आप इसे लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं. इसलिए अगली बार आटा इस्तेमाल करने से पहले उसकी क्वालिटी जरूर जांच लें, ताकि आप और आपका परिवार सेफ रहे. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें









