Wednesday, 06 May 2026 | 11:28 AM

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उत्तराखंड आइस हॉकी टीम की नई जर्सी लॉन्च:CM और खेल मंत्री ने किया विमोचन; रेखा आर्या बोलीं- युवाओं के सपनों का मंच है हिमाद्री आइस रिंक

उत्तराखंड आइस हॉकी टीम की नई जर्सी लॉन्च:CM और खेल मंत्री ने किया विमोचन; रेखा आर्या बोलीं- युवाओं के सपनों का मंच है हिमाद्री आइस रिंक

महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज स्थित ‘हिमाद्री आइस रिंक’ के जीर्णोद्धार का एक साल पूरा होने पर मंगलवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और खेल मंत्री रेखा आर्या ने उत्तराखंड आइस हॉकी टीम की नई जर्सी लॉन्च की। एक समय पर उपेक्षा का शिकार रहा यह आइस रिंक अब प्रदेश के विंटर स्पोर्ट्स खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा मंच बनकर उभरा है। कार्यक्रम के दौरान खिलाड़ियों ने शानदार आइस हॉकी मैच खेलकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया। युवाओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है सरकार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को बेहतरीन खेल सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने खुशी जताते हुए कहा कि प्रदेश में आधुनिक खेल अवसंरचना के विकास का ही नतीजा है कि आज उत्तराखंड के युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक नई पहचान कायम कर रहे हैं। उपेक्षा का शिकार रहा ढांचा आज बना सशक्तिकरण का प्रतीक खेल मंत्री रेखा आर्या ने अपने संबोधन में आइस रिंक के इस एक साल के सफर को ‘आइस ब्रेकिंग मूवमेंट’ की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा, यह आइस रिंक अब केवल ईंट-पत्थर का एक ढांचा नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश के युवाओं के सपनों को साकार करने का एक मजबूत मंच बन चुका है। उन्होंने पिछली स्थितियों को याद करते हुए कहा कि जो आइस रिंक कभी पूरी तरह से उपेक्षा का शिकार था, वह आज प्रदेश की खेल शक्ति और सशक्तिकरण का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। इसका पूरा श्रेय खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, प्रशिक्षकों (कोच) के समर्पण और राज्य सरकार की खेल-हितैषी नीतियों को जाता है। हजारों बच्चों को मिली करियर की नई दिशा खेल मंत्री ने बताया कि पिछले महज एक वर्ष के भीतर ही हजारों बच्चों ने इस आइस रिंक में आकर आइस स्पोर्ट्स की बारीकियां सीखी हैं और अपने करियर की एक नई दिशा तय की है। आज प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना दमखम दिखा रहे हैं, जो पूरे उत्तराखंड के लिए बहुत गर्व की बात है। कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद इस भव्य आयोजन के दौरान रायपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक उमेश शर्मा काऊ, विशेष प्रमुख सचिव (खेल) अमित सिन्हा, खेल निदेशक आशीष चौहान, अपर निदेशक अजय अग्रवाल और महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज के प्राचार्य राजेश ममगाईं सहित खेल विभाग के कई अधिकारी और बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

Sattu Side Effects: किन लोगों को भूलकर भी नहीं खाना चाहिए सत्तू का सेवन? सेहत को हो सकता है नुकसान

तस्वीर का विवरण

पेट से जुड़ी समस्या: अगर आपको बार-बार गैस, एसिडिटी या पेट फूलने की समस्या रहती है, तो सत्तू का सेवन करें। सत्तू भारी होता है और अधिक मात्रा में लेने से पेट में गैस और मात्रा बढ़ सकती है। छवि: फ्रीपिक जीवविज्ञान के रोगी: जिन लोगों को किडनी से जुड़ी बीमारी है, उन्हें सत्तू डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेना चाहिए। इसमें प्रोटीन और कुछ चीजें होती हैं जो किडनी पर प्रेशर डाल सकती हैं। छवि: फ्रीपिक लो ब्लड सप्लाई वाले लोग: सत्तू शरीर को ठंडक देता है और रक्त की मात्रा को थोड़ा कम कर सकता है। अगर आपका बीपी पहले से कम है तो सत्तू का अधिक सेवन चक्कर या कमजोरी का कारण बन सकता है। छवि: फ्रीपिक एलर्जी की समस्या वाले लोग: कुछ लोगों को चने या उनसे बनी पाटली से एलर्जी होती है। अगर सत्तू खाने के बाद खुजली, खुजली या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत इसका सेवन बंद कर दें। छवि: एआई छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए सावधानी: छोटे बच्चों और बुजुर्गों का पाचन तंत्र ख़राब होता है। इनमें सत्तू कम मात्रा में और अवशेषी पदार्थ शामिल होते हैं, जिनमें पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। छवि: फ्रीपिक अधिक मात्रा में सेवन करने वाले लोग: सत्तू का भंडार है, लेकिन आवश्यकता से अधिक मात्रा में कुछ नुकसान भी हो सकता है। अधिक मात्रा में सत्तू खाने से डायहाइड्रेशन, कब्ज या पेट में भारीपन की समस्या हो सकती है। छवि: फ्रीपिक किन बातों का विवरण: हमेशा सत्तू को पानी में अच्छी तरह से चबाकर पिएं। खाली पेट बहुत अधिक मात्रा में न लें। दिन में 1-2 गिलास से ज्यादा का सेवन न करें। शरीर की जरूरत और मौसम के हिसाब से ही लें। छवि: एआई सत्तू एक रसायन और पोषक आहार है, लेकिन हर किसी के लिए सही नहीं होता है। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने से मिलते हैं सत्तू के फायदे। छवि: एआई अगर आपको कोई पुरानी बीमारी है या शरीर में कोई समस्या है तो सत्तू का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। छवि: फ्रीपिक अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)सत्तू के साइड इफेक्ट्स(टी)सत्तू ड्रिंक(टी)सत्तू खाने के फायदे(टी)सत्तू के नुक्सान(टी)सत्तू खाने के नुक्सान(टी)सत्तू के साइड इफेक्ट्स(टी)सत्तू हलवा(टी)सत्तू चटनी

Fish Side Effects Why should not pregnant women eat fish | गर्मभवती महिलाओं को क्यों नहीं खानी चाहिए मछली? इनके लोगों के लिए भी 1 भी टुकड़ा जहर समान

Fish Side Effects Why should not pregnant women eat fish | गर्मभवती महिलाओं को क्यों नहीं खानी चाहिए मछली? इनके लोगों के लिए भी 1 भी टुकड़ा जहर समान

Last Updated:May 05, 2026, 19:09 IST Fish Alert: स्वास्थ्य विशेषज्ञ अक्सर संतुलित आहार की सलाह देते हैं, लेकिन कुछ फूड्स हर किसी के लिए सही नहीं होते. मछली भी उनमें से एक है, जो कुछ लोगों के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है. हाई यूरिक एसिड, लिवर रोग और फूड एलर्जी से जूझ रहे लोगों के लिए मछली का सेवन नुकसानदायक हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है. जानिए किन लोगों को सावधान रहने की जरूरत है. Fish Alert: बहुत से लोग मछली खाना पसंद करते हैं और यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद मानी जाती है. मछली में लोग तंदूरी मछली, फ्राई मछली, सूप आदि पसंद करते हैं. मछली ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर होती है, जो इसे दिल, दिमाग और त्वचा के लिए अच्छा बनाती है. नदी या समुद्र किनारे बसे भारतीय शहरों में मछली थाली का अहम हिस्सा है. लेकिन कुछ लोगों के लिए मछली खाना जहर के समान माना जाता है. आइए जानते हैं किन लोगों को भूलकर भी मछली नहीं खानी चाहिए… कुछ स्थितियों में मछली खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के बजाय हानिकारक साबित हो सकती हैं. गर्भवती महिलाओं को मछली खाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. कुछ बड़ी मछलियों में पारे की मात्रा अधिक होती है. यह गर्भ में पल रहे भ्रूण के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है. इसीलिए शार्क, स्वोर्डफ़िश और किंग मैकेरल जैसी मछलियों का सेवन ना करना ही बेहतर है. सैल्मन और झींगा जैसी मछलियां, जिनमें पारे की मात्रा कम होती है, सीमित मात्रा में खाई जा सकती हैं. स्तनपान कराने वाली माताओं को भी सावधानी बरतनी चाहिए. पारा शिशु तक पहुंच सकता है और उसके तंत्रिका तंत्र के विकास को प्रभावित कर सकता है. छोटे बच्चों को भी अधिक मछली नहीं खानी चाहिए. विशेष रूप से 10-11 वर्ष से कम आयु के बच्चे पारे से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google इससे उनके मस्तिष्क के विकास और व्यवहार पर असर पड़ सकता है. इसीलिए कम पैरासाइट वाली मछली कम मात्रा में ही खिलाना सबसे अच्छा है. वहीं समुद्री भोजन से एलर्जी वाले लोगों को मछली बिल्कुल नहीं खानी चाहिए. ऐसे लोगों को त्वचा पर चकत्ते, सूजन और सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण हो सकते हैं. कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए. अधपकी या कच्ची मछली खाने से संक्रमण का खतरा होता है. इसीलिए मछली को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए. साथ ही, जो लोग खून पतला करने वाली दवाइयां लेते हैं, उन्हें मछली का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. ऐसा इसलिए है क्योंकि मछली में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड खून को पतला करते हैं, जिससे कुछ मामलों में ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. कुल मिलाकर, मछली सेहत के लिए अच्छी होती है, लेकिन कुछ स्थितियों में सावधानी बरतनी ज़रूरी है. अगर किसी को कोई स्वास्थ्य समस्या है तो मछली को अपने आहार में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे अच्छा है. सही मात्रा में सही मछली का सेवन करने पर ही स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

भोपाल-इंदौर मेट्रो में ₹7000 में प्री-वेडिंग शूट:फिल्म की शूटिंग, बर्थ-डे सेलिब्रेशन भी कर सकेंगे; 15 दिन पहले करानी होगी बुकिंग

भोपाल-इंदौर मेट्रो में ₹7000 में प्री-वेडिंग शूट:फिल्म की शूटिंग, बर्थ-डे सेलिब्रेशन भी कर सकेंगे; 15 दिन पहले करानी होगी बुकिंग

भोपाल और इंदौर मेट्रो में अब आप प्री-वेडिंग शूट, फिल्म की शूटिंग और बर्थडे सेलिब्रेशन भी करा सकेंगे। इसके लिए आपको 1 घंटे के 5 से 7 हजार रुपए तक खर्च करना पड़ेगा। 15 दिन पहले बुकिंग होगी। हालांकि, नियम और टाइमिंग दोनों का ही पालन करना पड़ेगा। सेलिब्रेशन में न तो शराब ले जा सकेंगे और न ही बीड़ी-सिगरेट। पटाखें ले जाने पर भी मनाही रहेगी। पहले स्टेशन पर चेकिंग होगी। भोपाल में मेट्रो का शुभारंभ पिछले साल 20 दिसंबर को हुआ था, जबकि 21 दिसंबर से आम लोगों के लिए मेट्रो दौड़ने लगी थी। वहीं, इंदौर में 31 मई 2025 से मेट्रो ट्रैक पर दौड़ने लगी थी। शुरुआत में ही अच्छी संख्या में लोग सफर करते रहे, लेकिन वर्तमान में मेट्रो के हाल बुरे हैं। भोपाल में स्थिति यह है कि एक दिन में 100 यात्री भी सफर नहीं करते, जबकि हर रोज का खर्च 8 लाख रुपए तक है। यही कारण है कि अब मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने मेट्रो में अब ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ की शुरुआत की है। यानी, बर्थ-डे हो या प्री-वेडिंग, फिल्म की शूटिंग और इवेंट्स, मेट्रो अब नया डेस्टिनेशन बनेगा। महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश में चल रही मेट्रो में भी ये सुविधा है। लोगों को मेट्रो के करीब लाने का प्रयास नए प्रयास पर मेट्रो एमडी एस. कृष्ण चैतन्य ने कहा कि ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ पहल भोपाल और इंदौर की जीवंत संस्कृति, तेजी से बढ़ते शहरी परिवेश और नागरिकों की बदलती जीवनशैली को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह पहल मेट्रो को आमजन के और करीब लाने का एक प्रयास है। जिससे लोग अपने विशेष अवसरों को मेट्रो जैसे सुरक्षित और आधुनिक वातावरण में मना सकें। इससे मेट्रो सेवाएं नागरिकों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनेंगी। अभी कर सकते हैं सेलिब्रेशन मेट्रो में इन नई सुविधा की शुरुआत मंगलवार से कर दी गई है। यानी, लोग आने वाले दिनों में सेलिब्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। भोपाल-इंदौर में यहां चल रही मेट्रो

उग्र भाजपा पर ममता बनर्जी ने लगाया आरोप, कहा- आजाद भारत में पहली बार…

उग्र भाजपा पर ममता बनर्जी ने लगाया आरोप, कहा- आजाद भारत में पहली बार...

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की हार के बाद मंगलवार (5 अप्रैल 2026) को पद छोड़ दिया। उन्होंने दावा किया कि यह चुनावी नतीजे जनता का वास्तविक परिणाम नहीं, बल्कि एक कथानक का नतीजा है। बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने चुनाव से इनकार कर दिया है. बीजेपी ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया विपक्ष के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, ‘सत्ता से गठबंधन, दोस्ती और पवित्रता का भी अपराधी अपमान कर रहे हैं।’ यह पूरी तरह से संवैधानिक व्यवस्था का चरमराना है।’ ममता बुनर्जी ने आरोप लगाया कि पार्टी ने बीजेपी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई चुनाव आयोग से थी, जिसने बीजेपी के लिए काम किया. ममता बनर्जी ने अस्वीकार्य रूप से त्यागपत्र दे दिया उन्होंने कहा, ‘मेरी बर्बादी का सवाल ही नहीं, क्योंकि हमारी हार जनता के असंतोष से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हुई है।’ मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी। वे संवैधानिक संवैधानिक के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।’ मठाधीश ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी में लगभग 100 सीटों पर ‘लूट’ हुई और उनकी पार्टी में बड़े पैमाने पर स्नातक की उपाधि प्राप्त की गई। चुनाव आयोग पर बरेली ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर जनता के लोकतांत्रिक अधिकार को धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित इलाकों का दौरा करने और जमीन की स्थिति का आकलन करने के लिए 10 बुनियादी ढांचे के निर्माण समिति के गठन की भी घोषणा की। उन्होंने 2021 चुनाव के बाद हुई हिंसा के आरोपों को निराधार बताया. बनर्जी ने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद ऑर्गेनिक आश्रमों के इंडिया एलायंस के कई नेताओं ने एकजुटता गठबंधन से संपर्क किया। ये भी पढ़ें : ‘मैं हारी नहीं तो क्यों छोड़ दूं’, बंगाल रिजल्ट के बाद एडिन ममता बनर्जी, EC को बताया बड़ा विलेन (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026(टी)ममता बनर्जी समाचार(टी)ममता बनर्जी सीएम(टी)सीएम ममता बनर्जी(टी)ममता बनर्जी सीएम इस्तीफा(टी)ममता बनर्जी(टी)ममता बनर्जी सीएम(टी)पश्चिम बंगाल(टी)बंगाल चुनाव परिणाम(टी)ममता बनर्जी सीट(टी)भवानीपुर

‘मैं अब एक स्वतंत्र पक्षी हूं’: बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी का भावनात्मक संबोधन | भारत समाचार

DC vs CSK IPL 2026 Live Cricket Score

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 18:05 IST टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि अब उनके पास कोई आधिकारिक पद नहीं है और अब वह विपक्ष के इंडिया ब्लॉक के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेंगी। पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। (एएनआई) हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी हार झेलने के बाद, निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को लोगों के लिए काम करना जारी रखने और विपक्ष को मजबूत करने की कसम खाई और दावा किया कि वह “अब एक स्वतंत्र पक्षी हैं।” एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि वह अब कोई आधिकारिक पद नहीं रखती हैं और अब विपक्ष के भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (INDIA) के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेंगी। उन्होंने कहा, “मेरा लक्ष्य बहुत स्पष्ट है। मैं भारतीय टीम को मजबूत करूंगी… मेरे पास अब कोई कुर्सी नहीं है, इसलिए मैं एक आम नागरिक हूं।” उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना जीवन सार्वजनिक सेवा के लिए समर्पित कर दिया है और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कोई वेतन या पेंशन नहीं ली है। भबनीपुर से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से हारने वाले टीएमसी नेता ने बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए और चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए चुनाव परिणाम का जोरदार विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया गया और इस प्रक्रिया को “अभूतपूर्व” बताया। बनर्जी ने कहा, ”मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, मैं हारी नहीं हूं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि नतीजे कुछ और दिखा सकते हैं, लेकिन उनकी पार्टी ने ”नैतिक रूप से” चुनाव जीत लिया है। उन्होंने आगे मतदाताओं का नाम हटाने, प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग और मतदान और गिनती के दौरान हस्तक्षेप का आरोप लगाया। बनर्जी ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं और मतगणना एजेंटों को धमकाया गया और उन पर हमला किया गया और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। टीएमसी प्रमुख ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी ने एक शक्तिशाली “मशीनरी” के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र में शीर्ष नेतृत्व का हस्तक्षेप था। झटके के बावजूद, बनर्जी ने कहा कि वह राजनीतिक रूप से सक्रिय रहेंगी और अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम उनकी यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा निर्णायक जीत हासिल करने, दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए 206 सीटें जीतने और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 साल के शासन का अंत करने के एक दिन बाद आई है। चुनाव आयोग के मंगलवार सुबह के आंकड़ों के अनुसार, अंतिम आंकड़ों में भगवा पार्टी 206 सीटें जीत रही है, जबकि टीएमसी 80 सीटों और एक निर्वाचन क्षेत्र में मामूली बढ़त के साथ पिछड़ गई है। 294 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा 148 है। परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा और वैचारिक संतुलन में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देता है। दशकों में पहली बार, पश्चिम बंगाल उसी पार्टी द्वारा शासित होने की ओर अग्रसर है जो केंद्र में सत्ता रखती है, इस विकास के दूरगामी प्रशासनिक और राजनीतिक परिणाम होने की संभावना है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘मैं अब एक स्वतंत्र पक्षी हूं’: बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी का भावनात्मक संबोधन अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम(टी)ममता बनर्जी की हार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)बीजेपी की जीत पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी हार 2026(टी)भारत गठबंधन विपक्ष(टी)चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप(टी)सुवेंदु अधिकारी भबानीपुर

Punjab Chandigarh top news; AAP Chadha Warning, 21 States Police | Boy Murder

Punjab Chandigarh top news; AAP Chadha Warning, 21 States Police | Boy Murder

. पंजाब में आज की सबसे बड़ी खबर राष्ट्रपति भवन से जुड़ी रही। पहले सांसद राघव चड्‌ढा राष्ट्रपति से मिले और कहा कि हमारे पास 21 राज्यों की पुलिस है। इसके बाद CM भगवंत मान मिले और कहा कि BJP के पंजाब में 2 MLA हैं और राज्यसभा सांसद 6 हो गए। उन्होंने राघव चड्‌ढा के बयान को धमकी बताया। दिनभर की 10 चुनिंदा बड़ी खबरों को VIDEO में देखने के लिए ऊपर क्लिक करें… इन 10 बड़ी खबरों को विस्तार से यहां पढ़ भी सकते हैं। तो आइए जानते हैं, पंजाब-चंडीगढ़ में दिनभर में क्या कुछ खास रहा… 1. CM मान राष्ट्रपति से बोले- संविधान का मजाक बनाया; चड्‌ढा बोले- हमारे पास 21 राज्यों की पुलिस 6 सांसदों के आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ BJP जॉइन करने के खिलाफ CM भगवंत मान ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। CM मान ने कहा कि मैंने राष्ट्रपति को बताया कि पूरी पार्टी दो तिहाई बहुमत से दूसरी पार्टी में मर्ज हो सकती है, सिर्फ एक हाउस के 6-7 लोग ऐसा कहें तो यह मनमानी नहीं चलेगी। पंजाब में भाजपा के MLA 2 हैं और राज्यसभा के 6 सांसद हो गए, यह संविधान का मजाक है। मैंने संविधान में संशोधन कर राइट टू रिकॉल की मांग की। वहीं केजरीवाल ने कहा कि फरवरी में बदला लिया जाएगा। पंजाब चुनाव के बाद मोदी सरकार गिरेगी। CM मान 90 MLA को 3 वॉल्वो बसों में लेकर दिल्ली पहुंचे थे। मान से पहले सांसद राघव चड्‌ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक राष्ट्रपति से मिले। उन्होंने पार्टी छोड़ने के बाद पंजाब की सरकारी मशीनरी का मिसयूज कर उन्हें टारगेट करने का आरोप लगाया। चड्‌ढा ने चेतावनी भी दी कि AAP डेंजरस गेम खेल रही, इसका अंत खतरनाक होगा। AAP के पास 1 राज्य की पुलिस है। लेकिन हमारे (BJP) पास 21 राज्यों की पुलिस है। (पढ़ें पूरी खबर) 2. हथौड़ा मारकर नाबालिग लड़के की हत्या संगरूर की पटियाला गेट कृष्णा बस्ती में युवकों के बीच हुई कहासुनी खूनी लड़ाई में बदल गई। इसमें 15 साल के एक लड़के को हथौड़े से पीट-पीटकर मार डाला। वहीं, मृतक का भाई गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में रेफर कर दिया गया। मृतक की पहचान अर्शदीप सिंह उर्फ अंकुश के रूप में हुई है। वह 10वीं में पढ़ता था। वहीं, घायल उसका चचेरा भाई अवनीत सिंह उर्फ आदित्य है। परिवार वालों ने बताया कि गली में किसी बात को लेकर 2 बच्चों में झगड़ा हुआ। इसके बाद 2 युवकों ने हथौड़े हमला कर दिया। DSP संजीव सिंगला ने बताया- सूचना मिली थी कि कुछ बच्चों का झगड़ा हो गया है। डीएसपी ने कहा- आरोपी मोहम्मद खान और उमर खान हैं, जो पटियाला गेट के रहने वाले हैं। (पढ़ें पूरी खबर) 3. एलांते मॉल के सामने मारपीट, महिला बोली- पुलिस खड़ी देखती रही चंडीगढ़ में एलांते मॉल के सामने मारपीट का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें एक सिख व्यक्ति के साथ कुछ लोग मारपीट करते दिख रहे हैं। इस दौरान उसकी पगड़ी भी खुल जाती है। यह पूरा घटनाक्रम कार में बैठे एक दंपती ने रिकॉर्ड किया। महिला ने कहा कि मौके से करीब 100 मीटर दूरी पर पीसीआर खड़ी थी, लेकिन पुलिसकर्मियों ने झगड़ा नहीं रोका। करीब 5 से 6 मिनट तक यह मारपीट चलती रही। उस व्यक्ति का सिर फट गया और खून बह रहा था। आसपास काफी लोग इकट्ठा हो गए, शोर-शराबा हो रहा था, लेकिन पीसीआर से कोई नीचे नहीं उतरा। जब मामला शांत हो गया, तब पुलिसकर्मी आराम से आए और पूछने लगे कि क्या हुआ? (पढ़ें पूरी खबर) 4. लुधियाना में 6 महीने बाद गर्लफ्रेंड पर FIR: सुसाइड से पहले युवक ने लिखा- तू कहती थी मर जा लुधियाना में प्रेम संबंधों के चलते युवक (21) ने फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। युवक ने आत्महत्या के लिए अपनी प्रेमिका को जिम्मेदार ठहराया। युवक की मां छह महीने तक इंसाफ के लिए पुलिस थानों के चक्कर काटती रही। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बेटा बचाओ एनजीओ के संपर्क में आने पर युवक की मां ने अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस कमिश्नर दफ्तर के बाहर धरना दिया। पुलिस ने उनकी बात सुनी और तुरंत थाना सदर पुलिस को FIR दर्ज करने के आदेश दिए। थाना सदर पुलिस ने अब युवक की मां की शिकायत पर प्रेमिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी हौ। युवक की मां का कहना है कि बेटे ने सुसाइड में अपनी प्रेमिका को मौत का जिम्मेदार बताया थाष इसलिए उन्होंने प्रेमिका और उसके पिता के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। (पढ़ें पूरी खबर) 5. यूट्यूबर के प्रैंक VIDEO पर बवाल, निहंग की धमकी- तुझे उल्टा टांगूंगा यूट्यूबर मिस्टर इंडिया हैकर (दिलराज सिंह रावत) को एक युवक के बाल काटते हुए सरदार-सरदार कहना महंगा पड़ गया। उनके वीडियो पर सिख कम्युनिटी के लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। वहीं, विक्की थॉमस नाम के एक निहंग ने तो गुस्से से भरा एक वीडियो जारी कर कह दिया- सिखों की इस तरह बेइज्जती करने वाला तू जहां भी है, तेरे को कपड़ों की तरह उल्टा टांग दूंगा। इसके बाद यूट्यूबर को माफी मांगनी पड़ी। उसने एक वीडियो जारी कर कहा कि वीडियो का मकसद किसी भी धर्म के लोगों को ठेस पहुंचाना नहीं था। इसके बाद उन्होंने वीडियो से विवादित हिस्सा भी डिलीट कर दिया है। (पढ़ें पूरी खबर) 6. सरपंच पेट्रोल लेकर टंकी पर चढ़ा, विधायक पर आरोप बरनाला के गांव कलालमाजरा में सरपंच जगजीवन सिंह अपने तीन पंचायत सदस्यों हरजिंदर सिंह, भरपूर सिंह और गुरचरण सिंह के साथ पानी की टंकी पर चढ़ गए हैं। उनके पास पेट्रोल भी था। सूचना मिलते ही महल कलां का सिविल और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंच गया है और उन्हें समझाने का प्रयास किया। सरपंच जगजीवन सिंह ने कहा कि महल कलां विधानसभा क्षेत्र के विधायक उनकी पंचायत के कार्यों में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। विधायक ने पहले गांव में प्रशासक नियुक्त किया था, जिसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई और उस पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, अब गांव में फिर से प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है। सरपंच ने कहा कि वे पूरे

क्या वाकई में हाइपरपिगमेंटेशन को ठीक करने के लिए काफी है लेज़र ट्रीटमेंट? जान लें पूरा खर्च और नुकसान

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Last Updated:May 05, 2026, 17:43 IST चेहरे पर जिद्दी दाग-धब्बे और असमान स्किन टोन से परेशान लोग अक्सर जल्दी रिजल्ट पाने के लिए लेज़र ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं. इसे हाइपरपिगमेंटेशन कम करने का एक मॉडर्न और असरदार तरीका माना जाता है, लेकिन क्या यह सच में स्थायी समाधान है? इससे पहले कि आप इस ट्रीटमेंट पर पैसा खर्च करें, इसके फायदे, संभावित नुकसान और असली असर को समझना बेहद जरूरी है. ख़बरें फटाफट हाइपरपिगमेंटेशन के लिए लेजर ट्रीटमेंट. हाइपरपिगमेंटेशन तब होता है जब त्वचा में मेलानिन का उत्पादन ज्यादा हो जाता है, जिससे स्किन पर काले धब्बे या पैच नजर आने लगते हैं. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे तेज धूप में ज्यादा समय बिताना, हार्मोनल बदलाव, पिंपल्स के निशान या बढ़ती उम्र. लेज़र ट्रीटमेंट को इन दाग-धब्बों को कम करने का एक आधुनिक और तेजी से असर दिखाने वाला तरीका माना जाता है. इसमें हाई-इंटेंसिटी लाइट बीम का इस्तेमाल किया जाता है, जो त्वचा की गहरी परतों में जाकर अतिरिक्त पिगमेंट को तोड़ने का काम करता है. धीरे-धीरे यह पिगमेंट हल्का पड़ने लगता है और स्किन का टोन पहले से ज्यादा साफ नजर आने लगता है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि लेज़र ट्रीटमेंट कोई जादुई समाधान नहीं है. इसका असर हर व्यक्ति की त्वचा और समस्या की गंभीरता पर निर्भर करता है. कई मामलों में एक ही सेशन से पूरा फायदा नहीं मिलता, बल्कि 4 से 6 सेशन या उससे ज्यादा की जरूरत पड़ सकती है. हर सेशन के बीच कुछ हफ्तों का अंतर रखना पड़ता है, ताकि त्वचा को रिकवर होने का समय मिल सके. लेज़र ट्रीटमेंट में कितना आता है खर्चअगर खर्च की बात करें, तो लेज़र ट्रीटमेंट सस्ता नहीं होता. एक सेशन का खर्च शहर और क्लिनिक के हिसाब से लगभग 3,000 से 10,000 रुपये या उससे ज्यादा हो सकता है. अगर कई सेशन कराने पड़ें, तो कुल खर्च काफी बढ़ सकता है. यही वजह है कि यह हर किसी के लिए किफायती विकल्प नहीं माना जाता. लेज़र ट्रीटमेंट के बाद का डरसाइड इफेक्ट्स की बात करें, तो लेज़र ट्रीटमेंट आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में हल्की रेडनेस, सूजन, जलन या स्किन का छिलना देखने को मिल सकता है. बहुत सेंसिटिव स्किन वाले लोगों में पिगमेंटेशन और बढ़ने का खतरा भी रहता है, खासकर अगर ट्रीटमेंट के बाद सही देखभाल न की जाए. इसलिए एक्सपर्ट की सलाह के बिना इसे कराना सही नहीं होता. लेज़र कराने के बाद रखें इस चीज का ख्यालइसके अलावा, लेज़र कराने के बाद स्किन केयर रूटीन का पालन करना बेहद जरूरी होता है. सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल, धूप से बचाव और मॉइश्चराइजिंग बहुत जरूरी है, वरना पिगमेंटेशन दोबारा भी हो सकता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

Pakistan Resumes Alcohol Exports After 50 Years

Pakistan Resumes Alcohol Exports After 50 Years

इस्लामाबाद4 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान ने करीब 50 साल बाद फिर से शराब का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है। देश की इकलौती लोकल कंपनी मरी ब्रूअरी ने अप्रैल 2026 में ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक ड्रिंक्स भेजी हैं। कंपनी के एक्सपोर्ट मैनेजर रमीज शाह के मुताबिक, अभी शुरुआत में विदेशों में नेटवर्क बनाया जा रहा है और आगे चलकर प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना है। पाकिस्तान में मुस्लिम आबादी के लिए करीब 50 साल पहले इस्लामिक नियमों का हवाला देकर शराब पर बैन लगाया गया था। हालांकि, गैर-मुस्लिमों के लिए कुछ छूट है। अब सरकार ने 2025 में शराब निर्यात की अनुमति दी, जिसके बाद उन देशों में सप्लाई शुरू की गई जो ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) का हिस्सा नहीं हैं। पाकिस्तान पर 138 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार की कमाई और खर्च के बीच बड़ा अंतर है। वित्त वर्ष 2026 में सरकार की वास्तविक आय करीब 11,072 अरब पाकिस्तानी रुपए (40 अरब डॉलर) है, जबकि खर्च 16,286 अरब रुपए (58 अरब डॉलर) तक पहुंच चुका है। इसमें से करीब 8,200 अरब रुपए (30 अरब डॉलर) सिर्फ कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे हैं। पाकिस्तान पर इस समय लगभग 38,640 अरब पाकिस्तानी रुपए (138 अरब डॉलर) का बाहरी कर्ज है। इसमें सरकारी कर्ज के अलावा निजी क्षेत्र, बैंकों और कंपनियों की देनदारियां भी शामिल हैं। इसमें से करीब 25,760 अरब पाकिस्तानी रुपए (92 अरब डॉलर) सरकारी कर्ज है। पहले नॉन-अल्कोहलिक प्रोडक्ट ही बेच रही थी मरी ब्रूअरी पिछले कई सालों से मरी ब्रूअरी सिर्फ नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक्स का एक्सपोर्ट कर रही थी। इसमें पैकेज्ड जूस, मिनरल वाटर और फ्रूट फ्लेवर वाली ड्रिंक्स शामिल हैं। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी की कमाई 100 मिलियन डॉलर (28 अरब PKR) रही। कंपनी के CEO इस्फानयार भंडारा ने एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए कोशिश की थी। 2021 में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में एक चीनी कंपनी को भी शराब बनाने की इजाजत दी थी, ताकि वहां काम कर रहे चीनी नागरिकों की जरूरतें पूरी हो सकें। बैन से पहले मरी ब्रूअरी भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में शराब का निर्यात करती थी। अब एक बार फिर कंपनी विदेशी बाजार में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। रावलपिंडी स्थित मरी ब्रूअरी की प्रोडक्शन लाइन पर बीयर के डिब्बों की जाँच करते हुए एक कर्मचारी भुट्टो ने शराब की बिक्री पर रोक लगाई थी अप्रैल 1977 में पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो ने देश में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी थी। उस वक्त भुट्टो सरकार के खिलाफ एक बड़ा और हिंसक विरोध आंदोलन चल रहा था। भुट्टो पर 1977 के चुनाव में धांधली करने के अलावा ‘पश्चिमी लाइफस्टाइल’ अपनाने जैसे आरोप लग रहे थे। जब भुट्टो ने इन विपक्षी नेताओं से बातचीत शुरू की, तो उनकी कुछ मांगें थीं। जैसे नाइट क्लब और बार बंद किए जाएं और शराब की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए। इसी दबाव में भुट्टो सरकार ने कराची में बनने वाले एक बड़े कैसीनो की योजना भी रद्द कर दी। इस कैसिनों को मई 1977 में शुरू होना था। यह कैसीनो एक कारोबारी तुफैल शेख बना रहे थे, जिनके पुराने सैन्य शासक अयूब खान और बाद में भुट्टो सरकार से अच्छे संबंध थे। शेख पहले से ही कराची के सद्दर इलाके में होटल और नाइट क्लब चलाते थे और उन्हें उम्मीद थी कि नए कैसीनो खाड़ी देशों और यूरोप से बहुत से टूरिस्ट पाकिस्तान आएंगे। जब भुट्टो ने शराब और नाइट क्लब पर रोक लगाने का फैसला किया, तो शेख परेशना हो गए। लेकिन भुट्टो ने उन्हें भरोसा दिया कि यह सिर्फ कुछ समय के लिए है और हालात ठीक होते ही इसे खत्म कर दिया जाएगा। जिया उल हक ने और सख्त कानून बनाए कागज पर भले ही बार और शराब की दुकानें बंद हो गई थीं, लेकिन होटलों और दुकानों के पीछे के रास्तों से शराब आसानी से मिल रही थी। लेकिन भुट्टो ज्यादा दिन सत्ता में नहीं रह पाए। जुलाई 1977 में एक सैन्य शासक जिया उल हक ने उनकी सरकार गिरा दी। जिया ने सत्ता में आने के बाद इस कानून को और सख्त कर दिया और इसे इस्लामी कानून से जोड़ दिया। इसमें साफ कहा गया कि मुसलमानों के लिए शराब बेचना और पीना गैरकानूनी है और इसके लिए कड़ी सजा होगी। हालांकि एक रास्ता छोड़ा गया- लाइसेंस वाली शराब की दुकानें। ये दुकानें सिर्फ गैर-मुस्लिम लोगों के नाम पर चल सकती थीं और उन्हें ही शराब बेचने की अनुमति थी। विदेशी लोग भी सरकार से परमिट लेकर वहां से शराब खरीद सकते थे। जुलाई 1977 में तख्तापलट कर जिया उल हक ने शराब के कानून को और सख्त कर दिया। मुशरर्फ ने कानून में ढील दी समय के साथ पाकिस्तान में ऐसी लाइसेंस वाली शराब की दुकानों की संख्या बढ़ती गई, खासकर सिंध और बलूचिस्तान में, जैसे कराची और क्वेटा में। जनरल परवेज मुशर्रफ के दौर (1999–2008) में ये और बढ़ीं। मुशर्रफ खुद को उदारवादी बताते थे। उन्होंने 1979 के कानून को हटाने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक मजबूरियों के कारण ऐसा नहीं कर पाए। हालांकि उनके समय में शराब से जुड़े कानून को लागू करने में ढील दे दी गई। इस वजह से मुसलमानों के लिए भी शराब हासिल करना आसान हो गया था। दावा- शराब बैन की वजह से कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए पाकिस्तान के धार्मिक संगठन आज भी कहते हैं कि सरकारें शराबबंदी को सही तरीके से लागू नहीं करतीं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कहते हैं कि इस पाबंदी ने अवैध शराब माफिया को जन्म दिया और जहरीली शराब से सैकड़ों लोगों की मौत हुई। उनका यह भी कहना है कि शराब पर रोक के कारण कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए, जो कहीं ज्यादा खतरनाक है। एक आंकड़ा इस बात को दिखाता है कि 1979 में पाकिस्तान में हेरोइन के सिर्फ दो मामले सामने आए थे, लेकिन 1985 तक पाकिस्तान दुनिया में हेरोइन के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल हो गया। धार्मिक लोग अक्सर कहते हैं कि शराब पीना इस्लाम के खिलाफ है और यह आदत अंग्रेजों के समय की देन है।

Pakistan Resumes Alcohol Exports After 50 Years

Pakistan Resumes Alcohol Exports After 50 Years

इस्लामाबाद22 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान ने करीब 50 साल बाद फिर से शराब का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है। देश की इकलौती लोकल कंपनी मरी ब्रूअरी ने अप्रैल 2026 में ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक ड्रिंक्स भेजी हैं। कंपनी के एक्सपोर्ट मैनेजर रमीज शाह के मुताबिक, अभी शुरुआत में विदेशों में नेटवर्क बनाया जा रहा है और आगे चलकर प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना है। पाकिस्तान में मुस्लिम आबादी के लिए करीब 50 साल पहले इस्लामिक नियमों का हवाला देकर शराब पर बैन लगाया गया था। हालांकि, गैर-मुस्लिमों के लिए कुछ छूट है। अब सरकार ने 2025 में शराब निर्यात की अनुमति दी, जिसके बाद उन देशों में सप्लाई शुरू की गई जो ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) का हिस्सा नहीं हैं। पाकिस्तान पर 138 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार की कमाई और खर्च के बीच बड़ा अंतर है। वित्त वर्ष 2026 में सरकार की वास्तविक आय करीब 11,072 अरब पाकिस्तानी रुपए (40 अरब डॉलर) है, जबकि खर्च 16,286 अरब रुपए (58 अरब डॉलर) तक पहुंच चुका है। इसमें से करीब 8,200 अरब रुपए (30 अरब डॉलर) सिर्फ कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे हैं। पाकिस्तान पर इस समय लगभग 38,640 अरब पाकिस्तानी रुपए (138 अरब डॉलर) का बाहरी कर्ज है। इसमें सरकारी कर्ज के अलावा निजी क्षेत्र, बैंकों और कंपनियों की देनदारियां भी शामिल हैं। इसमें से करीब 25,760 अरब पाकिस्तानी रुपए (92 अरब डॉलर) सरकारी कर्ज है। पहले नॉन-अल्कोहलिक प्रोडक्ट ही बेच रही थी मरी ब्रूअरी पिछले कई सालों से मरी ब्रूअरी सिर्फ नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक्स का एक्सपोर्ट कर रही थी। इसमें पैकेज्ड जूस, मिनरल वाटर और फ्रूट फ्लेवर वाली ड्रिंक्स शामिल हैं। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी की कमाई 100 मिलियन डॉलर (28 अरब PKR) रही। कंपनी के CEO इस्फानयार भंडारा ने एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए कोशिश की थी। 2021 में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में एक चीनी कंपनी को भी शराब बनाने की इजाजत दी थी, ताकि वहां काम कर रहे चीनी नागरिकों की जरूरतें पूरी हो सकें। बैन से पहले मरी ब्रूअरी भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में शराब का निर्यात करती थी। अब एक बार फिर कंपनी विदेशी बाजार में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। रावलपिंडी स्थित मरी ब्रूअरी की प्रोडक्शन लाइन पर बीयर के डिब्बों की जाँच करते हुए एक कर्मचारी भुट्टो ने शराब की बिक्री पर रोक लगाई थी अप्रैल 1977 में पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो ने देश में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी थी। उस वक्त भुट्टो सरकार के खिलाफ एक बड़ा और हिंसक विरोध आंदोलन चल रहा था। भुट्टो पर 1977 के चुनाव में धांधली करने के अलावा ‘पश्चिमी लाइफस्टाइल’ अपनाने जैसे आरोप लग रहे थे। जब भुट्टो ने इन विपक्षी नेताओं से बातचीत शुरू की, तो उनकी कुछ मांगें थीं। जैसे नाइट क्लब और बार बंद किए जाएं और शराब की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए। इसी दबाव में भुट्टो सरकार ने कराची में बनने वाले एक बड़े कैसीनो की योजना भी रद्द कर दी। इस कैसिनों को मई 1977 में शुरू होना था। यह कैसीनो एक कारोबारी तुफैल शेख बना रहे थे, जिनके पुराने सैन्य शासक अयूब खान और बाद में भुट्टो सरकार से अच्छे संबंध थे। शेख पहले से ही कराची के सद्दर इलाके में होटल और नाइट क्लब चलाते थे और उन्हें उम्मीद थी कि नए कैसीनो खाड़ी देशों और यूरोप से बहुत से टूरिस्ट पाकिस्तान आएंगे। जब भुट्टो ने शराब और नाइट क्लब पर रोक लगाने का फैसला किया, तो शेख परेशना हो गए। लेकिन भुट्टो ने उन्हें भरोसा दिया कि यह सिर्फ कुछ समय के लिए है और हालात ठीक होते ही इसे खत्म कर दिया जाएगा। जिया उल हक ने और सख्त कानून बनाए कागज पर भले ही बार और शराब की दुकानें बंद हो गई थीं, लेकिन होटलों और दुकानों के पीछे के रास्तों से शराब आसानी से मिल रही थी। लेकिन भुट्टो ज्यादा दिन सत्ता में नहीं रह पाए। जुलाई 1977 में एक सैन्य शासक जिया उल हक ने उनकी सरकार गिरा दी। जिया ने सत्ता में आने के बाद इस कानून को और सख्त कर दिया और इसे इस्लामी कानून से जोड़ दिया। इसमें साफ कहा गया कि मुसलमानों के लिए शराब बेचना और पीना गैरकानूनी है और इसके लिए कड़ी सजा होगी। हालांकि एक रास्ता छोड़ा गया- लाइसेंस वाली शराब की दुकानें। ये दुकानें सिर्फ गैर-मुस्लिम लोगों के नाम पर चल सकती थीं और उन्हें ही शराब बेचने की अनुमति थी। विदेशी लोग भी सरकार से परमिट लेकर वहां से शराब खरीद सकते थे। जुलाई 1977 में तख्तापलट कर जिया उल हक ने शराब के कानून को और सख्त कर दिया। मुशरर्फ ने कानून में ढील दी समय के साथ पाकिस्तान में ऐसी लाइसेंस वाली शराब की दुकानों की संख्या बढ़ती गई, खासकर सिंध और बलूचिस्तान में, जैसे कराची और क्वेटा में। जनरल परवेज मुशर्रफ के दौर (1999–2008) में ये और बढ़ीं। मुशर्रफ खुद को उदारवादी बताते थे। उन्होंने 1979 के कानून को हटाने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक मजबूरियों के कारण ऐसा नहीं कर पाए। हालांकि उनके समय में शराब से जुड़े कानून को लागू करने में ढील दे दी गई। इस वजह से मुसलमानों के लिए भी शराब हासिल करना आसान हो गया था। दावा- शराब बैन की वजह से कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए पाकिस्तान के धार्मिक संगठन आज भी कहते हैं कि सरकारें शराबबंदी को सही तरीके से लागू नहीं करतीं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कहते हैं कि इस पाबंदी ने अवैध शराब माफिया को जन्म दिया और जहरीली शराब से सैकड़ों लोगों की मौत हुई। उनका यह भी कहना है कि शराब पर रोक के कारण कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए, जो कहीं ज्यादा खतरनाक है। एक आंकड़ा इस बात को दिखाता है कि 1979 में पाकिस्तान में हेरोइन के सिर्फ दो मामले सामने आए थे, लेकिन 1985 तक पाकिस्तान दुनिया में हेरोइन के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल हो गया। धार्मिक लोग अक्सर कहते हैं कि शराब पीना इस्लाम के खिलाफ है और यह आदत अंग्रेजों के समय की देन है।