‘मैं अब एक स्वतंत्र पक्षी हूं’: बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी का भावनात्मक संबोधन | भारत समाचार

आखरी अपडेट:05 मई, 2026, 18:05 IST टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि अब उनके पास कोई आधिकारिक पद नहीं है और अब वह विपक्ष के इंडिया ब्लॉक के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेंगी। पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। (एएनआई) हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी हार झेलने के बाद, निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को लोगों के लिए काम करना जारी रखने और विपक्ष को मजबूत करने की कसम खाई और दावा किया कि वह “अब एक स्वतंत्र पक्षी हैं।” एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि वह अब कोई आधिकारिक पद नहीं रखती हैं और अब विपक्ष के भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (INDIA) के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेंगी। उन्होंने कहा, “मेरा लक्ष्य बहुत स्पष्ट है। मैं भारतीय टीम को मजबूत करूंगी… मेरे पास अब कोई कुर्सी नहीं है, इसलिए मैं एक आम नागरिक हूं।” उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना जीवन सार्वजनिक सेवा के लिए समर्पित कर दिया है और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कोई वेतन या पेंशन नहीं ली है। भबनीपुर से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से हारने वाले टीएमसी नेता ने बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए और चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए चुनाव परिणाम का जोरदार विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया गया और इस प्रक्रिया को “अभूतपूर्व” बताया। बनर्जी ने कहा, ”मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, मैं हारी नहीं हूं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि नतीजे कुछ और दिखा सकते हैं, लेकिन उनकी पार्टी ने ”नैतिक रूप से” चुनाव जीत लिया है। उन्होंने आगे मतदाताओं का नाम हटाने, प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग और मतदान और गिनती के दौरान हस्तक्षेप का आरोप लगाया। बनर्जी ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं और मतगणना एजेंटों को धमकाया गया और उन पर हमला किया गया और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। टीएमसी प्रमुख ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी ने एक शक्तिशाली “मशीनरी” के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र में शीर्ष नेतृत्व का हस्तक्षेप था। झटके के बावजूद, बनर्जी ने कहा कि वह राजनीतिक रूप से सक्रिय रहेंगी और अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम उनकी यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा निर्णायक जीत हासिल करने, दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए 206 सीटें जीतने और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 साल के शासन का अंत करने के एक दिन बाद आई है। चुनाव आयोग के मंगलवार सुबह के आंकड़ों के अनुसार, अंतिम आंकड़ों में भगवा पार्टी 206 सीटें जीत रही है, जबकि टीएमसी 80 सीटों और एक निर्वाचन क्षेत्र में मामूली बढ़त के साथ पिछड़ गई है। 294 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा 148 है। परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा और वैचारिक संतुलन में एक निर्णायक बदलाव का संकेत देता है। दशकों में पहली बार, पश्चिम बंगाल उसी पार्टी द्वारा शासित होने की ओर अग्रसर है जो केंद्र में सत्ता रखती है, इस विकास के दूरगामी प्रशासनिक और राजनीतिक परिणाम होने की संभावना है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘मैं अब एक स्वतंत्र पक्षी हूं’: बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी का भावनात्मक संबोधन अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम(टी)ममता बनर्जी की हार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)बीजेपी की जीत पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी हार 2026(टी)भारत गठबंधन विपक्ष(टी)चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप(टी)सुवेंदु अधिकारी भबानीपुर
Punjab Chandigarh top news; AAP Chadha Warning, 21 States Police | Boy Murder

. पंजाब में आज की सबसे बड़ी खबर राष्ट्रपति भवन से जुड़ी रही। पहले सांसद राघव चड्ढा राष्ट्रपति से मिले और कहा कि हमारे पास 21 राज्यों की पुलिस है। इसके बाद CM भगवंत मान मिले और कहा कि BJP के पंजाब में 2 MLA हैं और राज्यसभा सांसद 6 हो गए। उन्होंने राघव चड्ढा के बयान को धमकी बताया। दिनभर की 10 चुनिंदा बड़ी खबरों को VIDEO में देखने के लिए ऊपर क्लिक करें… इन 10 बड़ी खबरों को विस्तार से यहां पढ़ भी सकते हैं। तो आइए जानते हैं, पंजाब-चंडीगढ़ में दिनभर में क्या कुछ खास रहा… 1. CM मान राष्ट्रपति से बोले- संविधान का मजाक बनाया; चड्ढा बोले- हमारे पास 21 राज्यों की पुलिस 6 सांसदों के आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ BJP जॉइन करने के खिलाफ CM भगवंत मान ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। CM मान ने कहा कि मैंने राष्ट्रपति को बताया कि पूरी पार्टी दो तिहाई बहुमत से दूसरी पार्टी में मर्ज हो सकती है, सिर्फ एक हाउस के 6-7 लोग ऐसा कहें तो यह मनमानी नहीं चलेगी। पंजाब में भाजपा के MLA 2 हैं और राज्यसभा के 6 सांसद हो गए, यह संविधान का मजाक है। मैंने संविधान में संशोधन कर राइट टू रिकॉल की मांग की। वहीं केजरीवाल ने कहा कि फरवरी में बदला लिया जाएगा। पंजाब चुनाव के बाद मोदी सरकार गिरेगी। CM मान 90 MLA को 3 वॉल्वो बसों में लेकर दिल्ली पहुंचे थे। मान से पहले सांसद राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक राष्ट्रपति से मिले। उन्होंने पार्टी छोड़ने के बाद पंजाब की सरकारी मशीनरी का मिसयूज कर उन्हें टारगेट करने का आरोप लगाया। चड्ढा ने चेतावनी भी दी कि AAP डेंजरस गेम खेल रही, इसका अंत खतरनाक होगा। AAP के पास 1 राज्य की पुलिस है। लेकिन हमारे (BJP) पास 21 राज्यों की पुलिस है। (पढ़ें पूरी खबर) 2. हथौड़ा मारकर नाबालिग लड़के की हत्या संगरूर की पटियाला गेट कृष्णा बस्ती में युवकों के बीच हुई कहासुनी खूनी लड़ाई में बदल गई। इसमें 15 साल के एक लड़के को हथौड़े से पीट-पीटकर मार डाला। वहीं, मृतक का भाई गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में रेफर कर दिया गया। मृतक की पहचान अर्शदीप सिंह उर्फ अंकुश के रूप में हुई है। वह 10वीं में पढ़ता था। वहीं, घायल उसका चचेरा भाई अवनीत सिंह उर्फ आदित्य है। परिवार वालों ने बताया कि गली में किसी बात को लेकर 2 बच्चों में झगड़ा हुआ। इसके बाद 2 युवकों ने हथौड़े हमला कर दिया। DSP संजीव सिंगला ने बताया- सूचना मिली थी कि कुछ बच्चों का झगड़ा हो गया है। डीएसपी ने कहा- आरोपी मोहम्मद खान और उमर खान हैं, जो पटियाला गेट के रहने वाले हैं। (पढ़ें पूरी खबर) 3. एलांते मॉल के सामने मारपीट, महिला बोली- पुलिस खड़ी देखती रही चंडीगढ़ में एलांते मॉल के सामने मारपीट का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें एक सिख व्यक्ति के साथ कुछ लोग मारपीट करते दिख रहे हैं। इस दौरान उसकी पगड़ी भी खुल जाती है। यह पूरा घटनाक्रम कार में बैठे एक दंपती ने रिकॉर्ड किया। महिला ने कहा कि मौके से करीब 100 मीटर दूरी पर पीसीआर खड़ी थी, लेकिन पुलिसकर्मियों ने झगड़ा नहीं रोका। करीब 5 से 6 मिनट तक यह मारपीट चलती रही। उस व्यक्ति का सिर फट गया और खून बह रहा था। आसपास काफी लोग इकट्ठा हो गए, शोर-शराबा हो रहा था, लेकिन पीसीआर से कोई नीचे नहीं उतरा। जब मामला शांत हो गया, तब पुलिसकर्मी आराम से आए और पूछने लगे कि क्या हुआ? (पढ़ें पूरी खबर) 4. लुधियाना में 6 महीने बाद गर्लफ्रेंड पर FIR: सुसाइड से पहले युवक ने लिखा- तू कहती थी मर जा लुधियाना में प्रेम संबंधों के चलते युवक (21) ने फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। युवक ने आत्महत्या के लिए अपनी प्रेमिका को जिम्मेदार ठहराया। युवक की मां छह महीने तक इंसाफ के लिए पुलिस थानों के चक्कर काटती रही। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बेटा बचाओ एनजीओ के संपर्क में आने पर युवक की मां ने अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस कमिश्नर दफ्तर के बाहर धरना दिया। पुलिस ने उनकी बात सुनी और तुरंत थाना सदर पुलिस को FIR दर्ज करने के आदेश दिए। थाना सदर पुलिस ने अब युवक की मां की शिकायत पर प्रेमिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी हौ। युवक की मां का कहना है कि बेटे ने सुसाइड में अपनी प्रेमिका को मौत का जिम्मेदार बताया थाष इसलिए उन्होंने प्रेमिका और उसके पिता के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। (पढ़ें पूरी खबर) 5. यूट्यूबर के प्रैंक VIDEO पर बवाल, निहंग की धमकी- तुझे उल्टा टांगूंगा यूट्यूबर मिस्टर इंडिया हैकर (दिलराज सिंह रावत) को एक युवक के बाल काटते हुए सरदार-सरदार कहना महंगा पड़ गया। उनके वीडियो पर सिख कम्युनिटी के लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। वहीं, विक्की थॉमस नाम के एक निहंग ने तो गुस्से से भरा एक वीडियो जारी कर कह दिया- सिखों की इस तरह बेइज्जती करने वाला तू जहां भी है, तेरे को कपड़ों की तरह उल्टा टांग दूंगा। इसके बाद यूट्यूबर को माफी मांगनी पड़ी। उसने एक वीडियो जारी कर कहा कि वीडियो का मकसद किसी भी धर्म के लोगों को ठेस पहुंचाना नहीं था। इसके बाद उन्होंने वीडियो से विवादित हिस्सा भी डिलीट कर दिया है। (पढ़ें पूरी खबर) 6. सरपंच पेट्रोल लेकर टंकी पर चढ़ा, विधायक पर आरोप बरनाला के गांव कलालमाजरा में सरपंच जगजीवन सिंह अपने तीन पंचायत सदस्यों हरजिंदर सिंह, भरपूर सिंह और गुरचरण सिंह के साथ पानी की टंकी पर चढ़ गए हैं। उनके पास पेट्रोल भी था। सूचना मिलते ही महल कलां का सिविल और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंच गया है और उन्हें समझाने का प्रयास किया। सरपंच जगजीवन सिंह ने कहा कि महल कलां विधानसभा क्षेत्र के विधायक उनकी पंचायत के कार्यों में अवैध रूप से हस्तक्षेप कर रहे हैं। विधायक ने पहले गांव में प्रशासक नियुक्त किया था, जिसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई और उस पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, अब गांव में फिर से प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है। सरपंच ने कहा कि वे पूरे
क्या वाकई में हाइपरपिगमेंटेशन को ठीक करने के लिए काफी है लेज़र ट्रीटमेंट? जान लें पूरा खर्च और नुकसान

Last Updated:May 05, 2026, 17:43 IST चेहरे पर जिद्दी दाग-धब्बे और असमान स्किन टोन से परेशान लोग अक्सर जल्दी रिजल्ट पाने के लिए लेज़र ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं. इसे हाइपरपिगमेंटेशन कम करने का एक मॉडर्न और असरदार तरीका माना जाता है, लेकिन क्या यह सच में स्थायी समाधान है? इससे पहले कि आप इस ट्रीटमेंट पर पैसा खर्च करें, इसके फायदे, संभावित नुकसान और असली असर को समझना बेहद जरूरी है. ख़बरें फटाफट हाइपरपिगमेंटेशन के लिए लेजर ट्रीटमेंट. हाइपरपिगमेंटेशन तब होता है जब त्वचा में मेलानिन का उत्पादन ज्यादा हो जाता है, जिससे स्किन पर काले धब्बे या पैच नजर आने लगते हैं. इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे तेज धूप में ज्यादा समय बिताना, हार्मोनल बदलाव, पिंपल्स के निशान या बढ़ती उम्र. लेज़र ट्रीटमेंट को इन दाग-धब्बों को कम करने का एक आधुनिक और तेजी से असर दिखाने वाला तरीका माना जाता है. इसमें हाई-इंटेंसिटी लाइट बीम का इस्तेमाल किया जाता है, जो त्वचा की गहरी परतों में जाकर अतिरिक्त पिगमेंट को तोड़ने का काम करता है. धीरे-धीरे यह पिगमेंट हल्का पड़ने लगता है और स्किन का टोन पहले से ज्यादा साफ नजर आने लगता है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि लेज़र ट्रीटमेंट कोई जादुई समाधान नहीं है. इसका असर हर व्यक्ति की त्वचा और समस्या की गंभीरता पर निर्भर करता है. कई मामलों में एक ही सेशन से पूरा फायदा नहीं मिलता, बल्कि 4 से 6 सेशन या उससे ज्यादा की जरूरत पड़ सकती है. हर सेशन के बीच कुछ हफ्तों का अंतर रखना पड़ता है, ताकि त्वचा को रिकवर होने का समय मिल सके. लेज़र ट्रीटमेंट में कितना आता है खर्चअगर खर्च की बात करें, तो लेज़र ट्रीटमेंट सस्ता नहीं होता. एक सेशन का खर्च शहर और क्लिनिक के हिसाब से लगभग 3,000 से 10,000 रुपये या उससे ज्यादा हो सकता है. अगर कई सेशन कराने पड़ें, तो कुल खर्च काफी बढ़ सकता है. यही वजह है कि यह हर किसी के लिए किफायती विकल्प नहीं माना जाता. लेज़र ट्रीटमेंट के बाद का डरसाइड इफेक्ट्स की बात करें, तो लेज़र ट्रीटमेंट आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में हल्की रेडनेस, सूजन, जलन या स्किन का छिलना देखने को मिल सकता है. बहुत सेंसिटिव स्किन वाले लोगों में पिगमेंटेशन और बढ़ने का खतरा भी रहता है, खासकर अगर ट्रीटमेंट के बाद सही देखभाल न की जाए. इसलिए एक्सपर्ट की सलाह के बिना इसे कराना सही नहीं होता. लेज़र कराने के बाद रखें इस चीज का ख्यालइसके अलावा, लेज़र कराने के बाद स्किन केयर रूटीन का पालन करना बेहद जरूरी होता है. सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल, धूप से बचाव और मॉइश्चराइजिंग बहुत जरूरी है, वरना पिगमेंटेशन दोबारा भी हो सकता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
वीडी सतीशन एक्सक्लूसिव: केरल में कांग्रेस की जीत: धर्मनिरपेक्षता और नेतृत्व का एक नया युग इंतजार कर रहा है

एक ऐतिहासिक जीत में, यूडीएफ ने केरल में 100 से अधिक सीटें हासिल कीं, जो राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत है। सत्ता विरोधी लहर के साथ, कांग्रेस को अब भाजपा के बढ़ते प्रभाव और घटती सीपीएम के बीच अपना अगला मुख्यमंत्री चुनने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। n18oc_politicsn18oc_indiaNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube
बंगाल बैटल डिकोडेड: अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी के मिशन ‘भबनीपुर’ की व्याख्या | न्यूज18

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Pakistan Resumes Alcohol Exports After 50 Years

इस्लामाबाद4 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान ने करीब 50 साल बाद फिर से शराब का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है। देश की इकलौती लोकल कंपनी मरी ब्रूअरी ने अप्रैल 2026 में ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक ड्रिंक्स भेजी हैं। कंपनी के एक्सपोर्ट मैनेजर रमीज शाह के मुताबिक, अभी शुरुआत में विदेशों में नेटवर्क बनाया जा रहा है और आगे चलकर प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना है। पाकिस्तान में मुस्लिम आबादी के लिए करीब 50 साल पहले इस्लामिक नियमों का हवाला देकर शराब पर बैन लगाया गया था। हालांकि, गैर-मुस्लिमों के लिए कुछ छूट है। अब सरकार ने 2025 में शराब निर्यात की अनुमति दी, जिसके बाद उन देशों में सप्लाई शुरू की गई जो ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) का हिस्सा नहीं हैं। पाकिस्तान पर 138 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार की कमाई और खर्च के बीच बड़ा अंतर है। वित्त वर्ष 2026 में सरकार की वास्तविक आय करीब 11,072 अरब पाकिस्तानी रुपए (40 अरब डॉलर) है, जबकि खर्च 16,286 अरब रुपए (58 अरब डॉलर) तक पहुंच चुका है। इसमें से करीब 8,200 अरब रुपए (30 अरब डॉलर) सिर्फ कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे हैं। पाकिस्तान पर इस समय लगभग 38,640 अरब पाकिस्तानी रुपए (138 अरब डॉलर) का बाहरी कर्ज है। इसमें सरकारी कर्ज के अलावा निजी क्षेत्र, बैंकों और कंपनियों की देनदारियां भी शामिल हैं। इसमें से करीब 25,760 अरब पाकिस्तानी रुपए (92 अरब डॉलर) सरकारी कर्ज है। पहले नॉन-अल्कोहलिक प्रोडक्ट ही बेच रही थी मरी ब्रूअरी पिछले कई सालों से मरी ब्रूअरी सिर्फ नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक्स का एक्सपोर्ट कर रही थी। इसमें पैकेज्ड जूस, मिनरल वाटर और फ्रूट फ्लेवर वाली ड्रिंक्स शामिल हैं। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी की कमाई 100 मिलियन डॉलर (28 अरब PKR) रही। कंपनी के CEO इस्फानयार भंडारा ने एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए कोशिश की थी। 2021 में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में एक चीनी कंपनी को भी शराब बनाने की इजाजत दी थी, ताकि वहां काम कर रहे चीनी नागरिकों की जरूरतें पूरी हो सकें। बैन से पहले मरी ब्रूअरी भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में शराब का निर्यात करती थी। अब एक बार फिर कंपनी विदेशी बाजार में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। रावलपिंडी स्थित मरी ब्रूअरी की प्रोडक्शन लाइन पर बीयर के डिब्बों की जाँच करते हुए एक कर्मचारी भुट्टो ने शराब की बिक्री पर रोक लगाई थी अप्रैल 1977 में पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो ने देश में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी थी। उस वक्त भुट्टो सरकार के खिलाफ एक बड़ा और हिंसक विरोध आंदोलन चल रहा था। भुट्टो पर 1977 के चुनाव में धांधली करने के अलावा ‘पश्चिमी लाइफस्टाइल’ अपनाने जैसे आरोप लग रहे थे। जब भुट्टो ने इन विपक्षी नेताओं से बातचीत शुरू की, तो उनकी कुछ मांगें थीं। जैसे नाइट क्लब और बार बंद किए जाएं और शराब की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए। इसी दबाव में भुट्टो सरकार ने कराची में बनने वाले एक बड़े कैसीनो की योजना भी रद्द कर दी। इस कैसिनों को मई 1977 में शुरू होना था। यह कैसीनो एक कारोबारी तुफैल शेख बना रहे थे, जिनके पुराने सैन्य शासक अयूब खान और बाद में भुट्टो सरकार से अच्छे संबंध थे। शेख पहले से ही कराची के सद्दर इलाके में होटल और नाइट क्लब चलाते थे और उन्हें उम्मीद थी कि नए कैसीनो खाड़ी देशों और यूरोप से बहुत से टूरिस्ट पाकिस्तान आएंगे। जब भुट्टो ने शराब और नाइट क्लब पर रोक लगाने का फैसला किया, तो शेख परेशना हो गए। लेकिन भुट्टो ने उन्हें भरोसा दिया कि यह सिर्फ कुछ समय के लिए है और हालात ठीक होते ही इसे खत्म कर दिया जाएगा। जिया उल हक ने और सख्त कानून बनाए कागज पर भले ही बार और शराब की दुकानें बंद हो गई थीं, लेकिन होटलों और दुकानों के पीछे के रास्तों से शराब आसानी से मिल रही थी। लेकिन भुट्टो ज्यादा दिन सत्ता में नहीं रह पाए। जुलाई 1977 में एक सैन्य शासक जिया उल हक ने उनकी सरकार गिरा दी। जिया ने सत्ता में आने के बाद इस कानून को और सख्त कर दिया और इसे इस्लामी कानून से जोड़ दिया। इसमें साफ कहा गया कि मुसलमानों के लिए शराब बेचना और पीना गैरकानूनी है और इसके लिए कड़ी सजा होगी। हालांकि एक रास्ता छोड़ा गया- लाइसेंस वाली शराब की दुकानें। ये दुकानें सिर्फ गैर-मुस्लिम लोगों के नाम पर चल सकती थीं और उन्हें ही शराब बेचने की अनुमति थी। विदेशी लोग भी सरकार से परमिट लेकर वहां से शराब खरीद सकते थे। जुलाई 1977 में तख्तापलट कर जिया उल हक ने शराब के कानून को और सख्त कर दिया। मुशरर्फ ने कानून में ढील दी समय के साथ पाकिस्तान में ऐसी लाइसेंस वाली शराब की दुकानों की संख्या बढ़ती गई, खासकर सिंध और बलूचिस्तान में, जैसे कराची और क्वेटा में। जनरल परवेज मुशर्रफ के दौर (1999–2008) में ये और बढ़ीं। मुशर्रफ खुद को उदारवादी बताते थे। उन्होंने 1979 के कानून को हटाने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक मजबूरियों के कारण ऐसा नहीं कर पाए। हालांकि उनके समय में शराब से जुड़े कानून को लागू करने में ढील दे दी गई। इस वजह से मुसलमानों के लिए भी शराब हासिल करना आसान हो गया था। दावा- शराब बैन की वजह से कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए पाकिस्तान के धार्मिक संगठन आज भी कहते हैं कि सरकारें शराबबंदी को सही तरीके से लागू नहीं करतीं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कहते हैं कि इस पाबंदी ने अवैध शराब माफिया को जन्म दिया और जहरीली शराब से सैकड़ों लोगों की मौत हुई। उनका यह भी कहना है कि शराब पर रोक के कारण कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए, जो कहीं ज्यादा खतरनाक है। एक आंकड़ा इस बात को दिखाता है कि 1979 में पाकिस्तान में हेरोइन के सिर्फ दो मामले सामने आए थे, लेकिन 1985 तक पाकिस्तान दुनिया में हेरोइन के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल हो गया। धार्मिक लोग अक्सर कहते हैं कि शराब पीना इस्लाम के खिलाफ है और यह आदत अंग्रेजों के समय की देन है।
Pakistan Resumes Alcohol Exports After 50 Years

इस्लामाबाद22 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान ने करीब 50 साल बाद फिर से शराब का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है। देश की इकलौती लोकल कंपनी मरी ब्रूअरी ने अप्रैल 2026 में ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक ड्रिंक्स भेजी हैं। कंपनी के एक्सपोर्ट मैनेजर रमीज शाह के मुताबिक, अभी शुरुआत में विदेशों में नेटवर्क बनाया जा रहा है और आगे चलकर प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना है। पाकिस्तान में मुस्लिम आबादी के लिए करीब 50 साल पहले इस्लामिक नियमों का हवाला देकर शराब पर बैन लगाया गया था। हालांकि, गैर-मुस्लिमों के लिए कुछ छूट है। अब सरकार ने 2025 में शराब निर्यात की अनुमति दी, जिसके बाद उन देशों में सप्लाई शुरू की गई जो ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) का हिस्सा नहीं हैं। पाकिस्तान पर 138 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार की कमाई और खर्च के बीच बड़ा अंतर है। वित्त वर्ष 2026 में सरकार की वास्तविक आय करीब 11,072 अरब पाकिस्तानी रुपए (40 अरब डॉलर) है, जबकि खर्च 16,286 अरब रुपए (58 अरब डॉलर) तक पहुंच चुका है। इसमें से करीब 8,200 अरब रुपए (30 अरब डॉलर) सिर्फ कर्ज के ब्याज चुकाने में खर्च हो रहे हैं। पाकिस्तान पर इस समय लगभग 38,640 अरब पाकिस्तानी रुपए (138 अरब डॉलर) का बाहरी कर्ज है। इसमें सरकारी कर्ज के अलावा निजी क्षेत्र, बैंकों और कंपनियों की देनदारियां भी शामिल हैं। इसमें से करीब 25,760 अरब पाकिस्तानी रुपए (92 अरब डॉलर) सरकारी कर्ज है। पहले नॉन-अल्कोहलिक प्रोडक्ट ही बेच रही थी मरी ब्रूअरी पिछले कई सालों से मरी ब्रूअरी सिर्फ नॉन-अल्कोहलिक ड्रिंक्स का एक्सपोर्ट कर रही थी। इसमें पैकेज्ड जूस, मिनरल वाटर और फ्रूट फ्लेवर वाली ड्रिंक्स शामिल हैं। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी की कमाई 100 मिलियन डॉलर (28 अरब PKR) रही। कंपनी के CEO इस्फानयार भंडारा ने एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए कोशिश की थी। 2021 में पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में एक चीनी कंपनी को भी शराब बनाने की इजाजत दी थी, ताकि वहां काम कर रहे चीनी नागरिकों की जरूरतें पूरी हो सकें। बैन से पहले मरी ब्रूअरी भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में शराब का निर्यात करती थी। अब एक बार फिर कंपनी विदेशी बाजार में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। रावलपिंडी स्थित मरी ब्रूअरी की प्रोडक्शन लाइन पर बीयर के डिब्बों की जाँच करते हुए एक कर्मचारी भुट्टो ने शराब की बिक्री पर रोक लगाई थी अप्रैल 1977 में पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो ने देश में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी थी। उस वक्त भुट्टो सरकार के खिलाफ एक बड़ा और हिंसक विरोध आंदोलन चल रहा था। भुट्टो पर 1977 के चुनाव में धांधली करने के अलावा ‘पश्चिमी लाइफस्टाइल’ अपनाने जैसे आरोप लग रहे थे। जब भुट्टो ने इन विपक्षी नेताओं से बातचीत शुरू की, तो उनकी कुछ मांगें थीं। जैसे नाइट क्लब और बार बंद किए जाएं और शराब की बिक्री पूरी तरह रोकी जाए। इसी दबाव में भुट्टो सरकार ने कराची में बनने वाले एक बड़े कैसीनो की योजना भी रद्द कर दी। इस कैसिनों को मई 1977 में शुरू होना था। यह कैसीनो एक कारोबारी तुफैल शेख बना रहे थे, जिनके पुराने सैन्य शासक अयूब खान और बाद में भुट्टो सरकार से अच्छे संबंध थे। शेख पहले से ही कराची के सद्दर इलाके में होटल और नाइट क्लब चलाते थे और उन्हें उम्मीद थी कि नए कैसीनो खाड़ी देशों और यूरोप से बहुत से टूरिस्ट पाकिस्तान आएंगे। जब भुट्टो ने शराब और नाइट क्लब पर रोक लगाने का फैसला किया, तो शेख परेशना हो गए। लेकिन भुट्टो ने उन्हें भरोसा दिया कि यह सिर्फ कुछ समय के लिए है और हालात ठीक होते ही इसे खत्म कर दिया जाएगा। जिया उल हक ने और सख्त कानून बनाए कागज पर भले ही बार और शराब की दुकानें बंद हो गई थीं, लेकिन होटलों और दुकानों के पीछे के रास्तों से शराब आसानी से मिल रही थी। लेकिन भुट्टो ज्यादा दिन सत्ता में नहीं रह पाए। जुलाई 1977 में एक सैन्य शासक जिया उल हक ने उनकी सरकार गिरा दी। जिया ने सत्ता में आने के बाद इस कानून को और सख्त कर दिया और इसे इस्लामी कानून से जोड़ दिया। इसमें साफ कहा गया कि मुसलमानों के लिए शराब बेचना और पीना गैरकानूनी है और इसके लिए कड़ी सजा होगी। हालांकि एक रास्ता छोड़ा गया- लाइसेंस वाली शराब की दुकानें। ये दुकानें सिर्फ गैर-मुस्लिम लोगों के नाम पर चल सकती थीं और उन्हें ही शराब बेचने की अनुमति थी। विदेशी लोग भी सरकार से परमिट लेकर वहां से शराब खरीद सकते थे। जुलाई 1977 में तख्तापलट कर जिया उल हक ने शराब के कानून को और सख्त कर दिया। मुशरर्फ ने कानून में ढील दी समय के साथ पाकिस्तान में ऐसी लाइसेंस वाली शराब की दुकानों की संख्या बढ़ती गई, खासकर सिंध और बलूचिस्तान में, जैसे कराची और क्वेटा में। जनरल परवेज मुशर्रफ के दौर (1999–2008) में ये और बढ़ीं। मुशर्रफ खुद को उदारवादी बताते थे। उन्होंने 1979 के कानून को हटाने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक मजबूरियों के कारण ऐसा नहीं कर पाए। हालांकि उनके समय में शराब से जुड़े कानून को लागू करने में ढील दे दी गई। इस वजह से मुसलमानों के लिए भी शराब हासिल करना आसान हो गया था। दावा- शराब बैन की वजह से कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए पाकिस्तान के धार्मिक संगठन आज भी कहते हैं कि सरकारें शराबबंदी को सही तरीके से लागू नहीं करतीं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कहते हैं कि इस पाबंदी ने अवैध शराब माफिया को जन्म दिया और जहरीली शराब से सैकड़ों लोगों की मौत हुई। उनका यह भी कहना है कि शराब पर रोक के कारण कई लोग हेरोइन की तरफ चले गए, जो कहीं ज्यादा खतरनाक है। एक आंकड़ा इस बात को दिखाता है कि 1979 में पाकिस्तान में हेरोइन के सिर्फ दो मामले सामने आए थे, लेकिन 1985 तक पाकिस्तान दुनिया में हेरोइन के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में शामिल हो गया। धार्मिक लोग अक्सर कहते हैं कि शराब पीना इस्लाम के खिलाफ है और यह आदत अंग्रेजों के समय की देन है।
बंगाल के प्रमुख मुद्दे: ममता राज के 5 बड़े मुद्दे, बीजेपी की बड़ी समस्या! डबल इंजन सरकार ने यूपी के लिए तय किया बंगाल बनेगा

पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन ने सिर्फ सरकार ने बदलाव नहीं किया, बल्कि उन पांच बड़ी मस्जिदों को भी केंद्र में ला दिया है जो ममता बनर्जी के राजशाही में शामिल होने के बजाय और उलझे हुए थे। इस चुनाव में बीजेपी ने 207वीं बार नामांकन हासिल किया है. ये मुद्दे हैं, जो 15 सागरों से बंगाल में डूबते जा रहे थे। अब उम्मीद है कि सूरत-ए-हाल बदल जाएगा। आइए इन 5 बड़े सिद्धांतों को समझें, बीजेपी के सिद्धांत और ‘डबल इंजन सरकार’ के 5 बड़े सिद्धांत। 1. अवैध घुसपैठ और आकर्षण परिवर्तन ममता राज में स्थिति: बांग्लादेश और रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर टीएमसी पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगाए जा रहे हैं। बीजापुर जिले के सबसे बड़े प्रमाण हैं। बांग्लादेश से अवैध यात्राओं की वजह से मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे बांग्लादेश में मुस्लिम आबादी में भारी वृद्धि देखी गई। कुछ क्षेत्र में यह जनसंख्या घनत्व 55% से 60% तक पहुंच गया। बीजेपी का वादा: अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहरी सामान और सीमा सुरक्षा को चक-चौबंद करना। डबल इंजन का फ़ायदा: केंद्र और राज्य के उद्यमों के खिलाफ एक हो रही है सीमा पर प्रतिबंध, एनआरसी लागू करना घुसपैठियों और के कठोर कार्रवाई अब राजनीतिक अंतर्विरोधों के बिना तेजी से हो सकती है गिरफ्तारी। 2. कानून-व्यवस्था एवं महिला सुरक्षा ममता राज में स्थिति: आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड और मैसेजखाली जैसी छवि ने राज्य की राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा दी। चुनाव में महिलाओं ने असुरक्षा को बड़ा लाभ पहुंचाया। संदेशखाली आंदोलन का चेहरा बनीं रेखा पात्रा को हिंगलगंज सीट से और आरजी कर सितारा की मां रत्ना देबनाथ को पनिहत्थी सीट से बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया। चुनाव में रेखा पात्रा ने 5,421 सीट से जीत दर्ज की, जबकि रत्ना देबनाथ ने 28,836 सीट से जीत दर्ज की। बीजेपी का वादा: राज्य में ‘यूपी मॉडल’ लागू करना और टीएमसी वकीलों की गुंडागर्दी पर लगाम कसना। डबल इंजन का फ़ायदा: मध्य और राज्य पुलिस की अपराध पर सबसे अच्छी स्थिति। चुनाव में 2,40,000 से अधिक बड़े पैमाने पर सेंट बलों के भूकंप के बाद (कुछ हिंसा को खत्म करने के लिए) मतदान का प्रतीक है। 3. कारीगर और सिंडिकेट संस्कृति ममता राज में स्थिति: सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में 25,000 से अधिक नियुक्तियों को रद्द कर दिया। कट-मनी और सिंडिकेट राज व्यवस्था का हिस्सा बन गया था। आलोचकों का आरोप है कि ये सिंडीकेट इंस्टीट्यूटी दल के संरक्षण में फलते-फूलते हैं, जिससे आधार और अनुपात को बढ़ावा मिलता है। बीजेपी का वादा: सत्य में आये सभी सिंडिकेट को ख़त्म करना और टोकरे पर कड़ी कार्रवाई करना। डबल इंजन का फ़ायदा: ईडी और सीबीआई संयुक्त केंद्रीय सचिवालय को राज्य स्तर पर पूर्ण सहयोग बैठक से बड़े घोटालों की जांच तेज होगी और सिस्टम ढांचा तैयार होगा। 4. बेरोजगारी और पलायन उद्योग ममता राज में स्थिति: इस प्रकार, सांस्कृतिक हिंसा और अशांति के कारण गरीबों के लिए युवा बेरोजगारी और पलायन बड़ी बर्बादी बनी हुई है। पीएलएफएस (अक्टूबर-दिसंबर 2025) के अनुसार, बंगाल में बेरोजगारी दर 3.6% है, जो राष्ट्रीय औसत 4.8% से कम है। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्ट्स में यह दर उठापटक 10.6% तक पहुंचने की बात कही गई है। बीजेपी का वादा: बिजनेसमैन ने फिर से शुरू किया निवेश, निवेश लाना और युवा-महिलाओं के लिए 3,000 रुपये की प्रतिमाह की स्थापना। डबल इंजन का फ़ायदा: केंद्र का औद्योगिक उद्यम सीधे बंगाल पर लागू होता है। व्यापार जगत को एक स्थिर नीतिगत राक्षसी नियति, जिससे रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। 5. पात्रता का अधूरा लाभ ममता राज में स्थिति: केंद्र के आवास, आभूषण और किसान सम्मान जैसी पात्रता को राज्य स्तर पर अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया गया था, जिससे लोग नवाचार रह जाते थे। बीजेपी का वादा: केंद्र की सभी मान्यताएं 100% वैज्ञानिक प्रमाण पत्र। डबल इंजन का फ़ायदा: केंद्र और राज्य के बीच समन्वय से सीधे लोग जुड़ेंगे, जिससे विकास में तेजी आएगी। गौर करने वाली बात है कि बंगाल में बीजेपी को 2021 में 38% वोट मिले थे. यह 2026 में 45.64% हो गया, जबकि टीएमसी 48% से 40.80% पर पहुंच गया। यह वोट विकास की कार्यप्रणाली और स्थिरता का पक्ष है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीजेपी इन वादों को पूरा कैसे करें? इसका जवाब आने वाला समय ही रहेगा, लेकिन केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार बनने से नीतिगत परिवर्तन खत्म हो जाएगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। यही कारण है कि वैज्ञानिकों का मानना है कि ‘डबल इंजन सरकार’ बंगाल के इन पांच उद्योगों को पूरा करने की असली बुनियाद है।
चावल दही सूजी कटलेट रेसिपी: रात के बचे चावल को फाँके नहीं, दही-सूजी में तय कटलेट; स्वाद और स्वास्थ्य का प्रभाव संयोजन है

आवश्यक सामग्री: 1 कप पके हुए चावल, ½ कप सूजी, ½ कप ताजा दही, 1 गोल आलू, 1 छोटा प्याज, 1-2 हरी मिर्च, 2 बड़ा हरा धनियां, ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, ½ छोटा चम्मच जीरा, नमक का स्वाद, तेल छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले पुराने पके हुए चावल को एक बाउल में प्लास्टर सा मैश कर लें। अब इसमें सूजी और दही डेस्टिनेशन महानतम से मिक्स करें। इसके बाद आलू, प्याज, हरी मिर्च और हरा धनियां डालें। छवि: एआई अब सभी प्रयोगशाला मिश्रणों को अच्छी तरह मिला लें। इस मिक्स को 10-15 मिनट के लिए पकड़ कर रख लें, ताकि सूजी बढ़िया से फूल जाए। अब हाथों में थोड़ा सा तेल लगाकर रखें छोटे-छोटे कटलेट का आकार। छवि: एआई तवे पर लिटिल ऑयल मैनुअल कटलेट को दोनों तरफ से सोना और क्रिस्पी होने तक सेक लें। गरमा-गरम कटलेट को हरी चटनी या टमाटर मसाला के साथ गर्म बेचें। यह अनहोनी, टिफ़िन या शाम के बस्ट के लिए बिल्कुल सही प्रभाव है। छवि: एआई अगर मिश्रण में ज्यादा नमक लगे तो थोड़ा और सूजी मिला लें। अधिकतर क्रिस्पी बनाने के लिए आप व्हाइट क्रैम्ब्स दाल का उपयोग कर सकते हैं। अपनी पसंद का आधार जैसे गाजर, मीठी मिर्च भी जोड़ सकते हैं। छवि: फ्रीपिक अब पके हुए चावल को क्रिएशन की जगह ये आसान और स्वादिष्ट रेसिपी जरूर ट्राई कर सकते हैं. चावल दही सूजी कटलेट आपके उम्मीदवारों को बनाएगें खास, स्वादिष्ट और मजेदार। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)चावल दही सूजी कटलेट रेसिपी(टी)हेल्दी कटलेट रेसिपी(टी)बचे हुए चावल कटलेट(टी)कटलेट कैसे बनाएं(टी)सूजी कटलेट रेसिपी(टी)दही कटलेट रेसिपी(टी)ब्रेकफास्ट रेसिपी(टी)टिफिन रेसिपी
Range Rover SV Price Drop

Hindi News Tech auto Range Rover SV Price Drop | India UK Trade Deal Impact; Sports Model Cheaper नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक जगुआर लैंड रोवर (JLR) इंडिया ने ब्रिटेन से इंपोर्ट होने वाली अपनी सबसे प्रीमियम SUV रेंज रोवर SV की कीमत 75 लाख रुपए कम कर दी है, जिसके बाद अब इसकी एक्स-शोरूम कीमत 3.5 करोड़ रुपए हो गई है। पहले इसकी कीमत 4.25 करोड़ रुपए थी। यह कटौती भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लागू होने से पहले की गई है। कंपनी ने रेंज रोवर स्पोर्ट SV एडिशन टू की कीमत में भी 40 लाख रुपए की कटौती की है, जो अब 2.35 करोड़ रुपए में मिलेगी। नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। 27 जनवरी को PM मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा (बीच) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (बाएं) की मौजूदगी में भारत- EU FTA पर साइन हुए। इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटकर 30% रह जाएगी भारत और ब्रिटेन के बीच 24 जुलाई 2025 को व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत ब्रिटेन से पूरी तरह बनकर आने वाली (CBU) बड़ी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर पहले साल में 30% कर दिया जाएगा। 5वें साल तक यह ड्यूटी घटकर सिर्फ 10% रह जाएगी। यह नियम 3,000cc से ऊपर के पेट्रोल और 2,500cc से ऊपर के डीजल इंजन वाले मॉडल पर लागू होगा। कीमतों में बदलाव की 3 बड़ी बातें: लगातार दूसरी कटौती: GST 2.0 सुधारों के बाद सितंबर 2025 में भी कीमतों में 30.4 लाख रुपए तक की कमी की गई थी। यह एक साल के भीतर दूसरा बड़ा बदलाव है। पेंट स्कीम में अपडेट: रेंज रोवर SV में अब अल्ट्रा मैटेलिक पेंट (ग्लॉस और सैटिन फिनिश) स्टैंडर्ड तौर पर मिलेगा। नया वेरिएंट जल्द: सूत्रों के मुताबिक, कंपनी जल्द ही रेंज रोवर स्पोर्ट का एक नया स्टैंडर्ड SV वेरिएंट भी लाएगी, जिसकी कीमत करीब 2.05 करोड़ रुपए होगी। डिफेंडर और डिस्कवरी के दाम नहीं बदलेंगे कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारत में असेंबल (Locally Assembled) होने वाले मॉडल्स जैसे रेंज रोवर स्टैंडर्ड, स्पोर्ट, इवोक और वेलार की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। इसके अलावा ‘डिफेंडर’ और ‘डिस्कवरी’ की कीमतें भी वैसी ही रहेंगी, क्योंकि इनका निर्माण स्लोवाकिया में होता है और ये भारत-UK ट्रेड डील के दायरे में नहीं आते। हालांकि, कंपनी डिफेंडर की लोकल असेंबली पर विचार कर रही है। पावरफुल इंजन: 635hp की ताकत जेनरेट करती है कार रेंज रोवर के इन दोनों SV वेरिएंट्स में 4.4-लीटर का ट्विन-टर्बो V8 पेट्रोल इंजन दिया गया है। रेंज रोवर SV में यह इंजन 540hp की पावर देता है, जबकि रेंज रोवर स्पोर्ट SV में यह 635hp की पावर और 800Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इन ब्रांड्स को भी मिलेगा फायदा ब्रिटेन के साथ हुई इस डील का फायदा केवल JLR को ही नहीं, बल्कि बेंटले, रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन और मैकलारेन जैसे अन्य ब्रिटिश लग्जरी ब्रांड्स को भी मिलेगा। हालांकि, इसके लिए एक सालाना कोटा (पहले साल 20,000 गाड़ियां) तय किया गया है, जिसे सभी ब्रिटिश ब्रांड्स के बीच शेयर किया जाएगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…







