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पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया ​था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि​ पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।

बेबी थलापथी! विजय की बचपन की दुर्लभ तस्वीरें जो प्रशंसकों ने पहले कभी नहीं देखीं

बेबी थलापथी! विजय की बचपन की दुर्लभ तस्वीरें जो प्रशंसकों ने पहले कभी नहीं देखीं

उनका जन्म 22 जून 1974 को जोसेफ विजय चन्द्रशेखर के रूप में हुआ – वे एक ईसाई फिल्म निर्माता पिता और एक हिंदू गायिका माँ के पुत्र थे। पहले दिन से ही, उनकी पहचान दो दुनियाओं में फैली हुई थी, और उन्होंने कभी भी उनमें से किसी एक को नहीं चुना। उस अंतरधार्मिक परिवार ने उन्हें गहराई से आकार दिया। उनकी मां साईं बाबा की कट्टर अनुयायी हैं और विजय उनकी देखभाल करते हैं। और फिर राधन पंडित हैं – उनके आधिकारिक ज्योतिषी, जिनके परामर्श पर विजय ने मंदिर में अनुष्ठान किए और विशेष प्रार्थनाएं कीं। बाइबल और भजन के बीच पैदा हुए व्यक्ति के लिए सितारे भी हमेशा मायने रखते थे। उन्होंने महज 10 साल की उम्र में अपने पिता की फिल्म वेट्री (1984) से स्क्रीन पर डेब्यू किया था। उनकी पहली कक्षा एक फिल्म सेट थी। बहुत से सुपरस्टार ऐसा नहीं कह सकते। सभी खातों के अनुसार, एक शर्मीला, सतर्क बच्चा – दिखावटी नहीं। उनकी मां शोबा का कहना है कि अपनी छोटी बहन विद्या को खोने के बाद उनका व्यक्तित्व पूरी तरह से बदल गया। बातूनी, शरारती लड़का चुप हो गया। वह शांति उसे कभी नहीं छोड़ती थी। कॉलेज में, उन पर माइकल जैक्सन का जुनून सवार था – हर प्रसिद्ध एमजे डांस मूव्स सीखना और प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन करना। जिस फुटवर्क को देखकर तमिलनाडु एक दिन भ्रमित हो जाएगा, वह वस्तुतः चंद्रमा की सैर पर बनाया गया था। उन्होंने लोयोला कॉलेज में विजुअल कम्युनिकेशंस में दाखिला लिया, लेकिन पूर्णकालिक अभिनय के लिए जल्दी ही पढ़ाई छोड़ दी। उनके परिवार को चिंता थी. उनका दृढ़ विश्वास था. इतिहास ने उनका साथ दिया. ‘नालैया थीरपू’ (1992) में उनकी पहली मुख्य भूमिका फ्लॉप रही – उनके लुक और प्रदर्शन दोनों के लिए तीखी आलोचना हुई। फिल्म सेट पर बड़े हुए लड़के को अपना पहला वास्तविक सबक मिला: कैमरे को परवाह नहीं है कि आप किसके बेटे हैं। फिर गपशप वाला अंश आया। उनकी दूसरी फिल्म की शूटिंग के दौरान, एक महिला प्रशंसक उनकी पहली फिल्म की प्रशंसा करने के लिए सेट पर उनके पास पहुंची। वह प्रशंसक ब्रिटेन स्थित उद्योगपति की बेटी संगीता सोर्नलिंगम थी। विजय ने उसे अपने माता-पिता के साथ भोजन के लिए घर आमंत्रित किया। उसकी माँ को कुछ आभास हुआ। वह सही थी. कुछ अपुष्ट स्रोतों का दावा है कि परिवार में उनके बचपन का उपनाम “बाबा” था, और उन्होंने अपनी किशोरावस्था में चुपचाप कीबोर्ड के लिए एक प्रतिभा की खोज की थी – कभी-कभी निजी पारिवारिक समारोहों में इसे दिखाते थे। आकर्षक, अगर सच है. उनके कॉलेज के दोस्त संजीव वेंकट, श्रीमन और श्रीनाथ उनके साथ रहे – ये तीनों उनकी कई फिल्मों में दिखाई दिए। विरुगमबक्कम का शर्मीला बच्चा अपने लोगों से जुड़ा रहा। तमिल सिनेमा की क्रूर दुनिया में, इसने सब कुछ कह दिया। (टैग्सटूट्रांसलेट)चेन्नई(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)विजय थलापति

रितेश की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की कमाई 50 करोड़ पार:टॉप-5 मराठी फिल्मों में शामिल; महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग

रितेश की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की कमाई 50 करोड़ पार:टॉप-5 मराठी फिल्मों में शामिल; महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग

रितेश देशमुख के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित इस फिल्म को मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज किया गया था। हालांकि रिलीज के पांचवें दिन (मंगलवार) को फिल्म की कमाई में थोड़ी गिरावट देखी गई। सैक्निल्क की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को फिल्म ने मराठी वर्जन में करीब 3.35 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। यह सोमवार के मुकाबले करीब 20.4% कम है। फिल्म के अब तक के कुल नेट कलेक्शन की बात करें, तो यह 44 करोड़ रुपए हो गया है। इसमें मराठी वर्जन का योगदान सबसे ज्यादा 30.5 करोड़ रुपए है। वर्ड-ऑफ-माउथ का मिल रहा फायदा फिल्म का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन अब 52.68 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। हिंदी वर्जन की शुरुआत मराठी के मुकाबले थोड़ी धीमी रही थी, लेकिन रिव्यू और वर्ड-ऑफ-माउथ की वजह से हिंदी बेल्ट में भी फिल्म की कमाई बढ़ रही है। इस कलेक्शन के साथ ही ‘राजा शिवाजी’ अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप-5 मराठी फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग फिल्म की सफलता के बीच शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने इसे महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग उठाई है। दानवे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कहा है कि यह फिल्म शिवाजी महाराज के महान कार्यों को युवाओं और जनता तक पहुंचाती है। उन्होंने मांग की कि फिल्म को टैक्स-फ्री किया जाए ताकि टिकट सस्ते हों और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे सिनेमाघरों में जाकर देख सकें। फिल्म में है बड़ी स्टारकास्ट 1 मई को रिलीज हुई इस फिल्म में रितेश देशमुख ने न सिर्फ मुख्य भूमिका निभाई है, बल्कि इसका निर्देशन भी खुद किया है। फिल्म में संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन, भाग्यश्री और जेनेलिया देशमुख जैसे बड़े सितारे अहम किरदारों में नजर आए हैं। इनके अलावा महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर, फरदीन खान, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते ने भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

रितेश की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की कमाई 50 करोड़ पार:टॉप-5 मराठी फिल्मों में शामिल; महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग

रितेश की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की कमाई 50 करोड़ पार:टॉप-5 मराठी फिल्मों में शामिल; महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग

रितेश देशमुख के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित इस फिल्म को मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज किया गया था। हालांकि रिलीज के पांचवें दिन (मंगलवार) को फिल्म की कमाई में थोड़ी गिरावट देखी गई। सैक्निल्क की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को फिल्म ने मराठी वर्जन में करीब 3.35 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। यह सोमवार के मुकाबले करीब 20.4% कम है। फिल्म के अब तक के कुल नेट कलेक्शन की बात करें, तो यह 44 करोड़ रुपए हो गया है। इसमें मराठी वर्जन का योगदान सबसे ज्यादा 30.5 करोड़ रुपए है। वर्ड-ऑफ-माउथ का मिल रहा फायदा फिल्म का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन अब 52.68 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। हिंदी वर्जन की शुरुआत मराठी के मुकाबले थोड़ी धीमी रही थी, लेकिन रिव्यू और वर्ड-ऑफ-माउथ की वजह से हिंदी बेल्ट में भी फिल्म की कमाई बढ़ रही है। इस कलेक्शन के साथ ही ‘राजा शिवाजी’ अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप-5 मराठी फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग फिल्म की सफलता के बीच शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने इसे महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग उठाई है। दानवे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कहा है कि यह फिल्म शिवाजी महाराज के महान कार्यों को युवाओं और जनता तक पहुंचाती है। उन्होंने मांग की कि फिल्म को टैक्स-फ्री किया जाए ताकि टिकट सस्ते हों और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे सिनेमाघरों में जाकर देख सकें। फिल्म में है बड़ी स्टारकास्ट 1 मई को रिलीज हुई इस फिल्म में रितेश देशमुख ने न सिर्फ मुख्य भूमिका निभाई है, बल्कि इसका निर्देशन भी खुद किया है। फिल्म में संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन, भाग्यश्री और जेनेलिया देशमुख जैसे बड़े सितारे अहम किरदारों में नजर आए हैं। इनके अलावा महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर, फरदीन खान, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते ने भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

ताजा या फ्रिज वाला, कौन सा नारियल पानी है हेल्थ के लिए पॉवरफुल? एक्सपर्ट से समझें

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Last Updated:May 06, 2026, 11:02 IST Best coconut water : मई की तीखी गर्मी के तेवर दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं. गर्मी बढ़ते ही सड़क किनारे नारियल पानी पीने वालों की भीड़ नजर आने लगती है. कई लोग एक बार में पूरा नारियल पानी नहीं पी पाते, तो बचा हुआ पानी फ्रिज में रख देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नारियल पानी ज्यादा देर तक रखने पर खराब भी हो सकता है? कई बार लोग इसे अगले दिन तक पी लेते हैं. प्रयागराज के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. संजीव ने इसके फायदे नुकसान बताया है. डॉ संजीव ने बताया कि ताजा नारियल पानी बेहद जल्दी खराब होने वाला ड्रिंक माना जाता है. अगर नारियल खोलने के बाद उसे कमरे के तापमान पर छोड़ दिया जाए, तो गर्म मौसम में सिर्फ 2 से 4 घंटे के अंदर उसमें फर्मेंटेशन शुरू हो सकता है. यानी उसका स्वाद बदलने लगता है और उसमें हल्की खटास आने लगती है. यही वजह है कि ताजा नारियल पानी निकालने के तुरंत बाद पीने की सलाह दी जाती है. अगर आपने पैक्ड नारियल पानी खोला है, तो उसे तुरंत फ्रिज में रखना जरूरी माना जाता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक खुले हुए नारियल पानी को 1 से 3 दिन के अंदर खत्म कर देना चाहिए. कुछ प्रोसेस्ड पैक्ड ड्रिंक्स 5 दिन तक चल सकते हैं, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होने लगती है. वहीं ताजा नारियल पानी ज्यादा देर तक सुरक्षित नहीं रहता क्योंकि उसमें प्रिजर्वेटिव नहीं होते. नारियल पानी खराब हुआ है या नहीं, इसकी पहचान करना भी आसान है. अगर उसमें खट्टी या अजीब बदबू आने लगे, स्वाद बदल जाए, हल्की गैस महसूस हो या पानी धुंधला दिखने लगे, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google कुछ मामलों में रंग हल्का गुलाबी या भूरा भी हो सकता है, जो ऑक्सीडेशन की वजह से होता है. हालांकि बदबू और खट्टापन सबसे बड़ा संकेत माना जाता है. सोशल मीडिया और रेडिट पर भी लोग पैक्ड नारियल पानी को लेकर अपने अनुभव शेयर कर रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि बोतल खुलने के बाद अगर उसे बाहर छोड़ दिया जाए तो उसमें अजीब स्मेल आने लगती है. कुछ लोगों ने इसे “फर्मेंटेड टेस्ट” जैसा बताया. वहीं कई लोग सलाह देते हैं कि नारियल पानी हमेशा ताजा ही पीना बेहतर रहता है. अगर आप भी गर्मियों में नारियल पानी पीना पसंद करते हैं, तो कोशिश करें कि इसे खोलने के तुरंत बाद ही खत्म कर दें. फ्रिज में रखने पर भी ज्यादा दिनों तक स्टोर करने से बचें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही पेट खराब कर सकती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

बिहार के जंगलों में मिलता है ये सूपरफूड फल, त्वचा-बालों के लिए है रामबाण, सिर्फ 2 माह ही है मिलता

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Last Updated:May 06, 2026, 10:55 IST Badahar Khane Ke Fayde: बिहार के वनों में पाया जाने वाला बड़हर (बरहर) प्रकृति का एक बहुउपयोगी और पोषण से भरपूर फल है. यह विटामिन A, विटामिन C और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है. इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, त्वचा स्वस्थ और चमकदार रहती है तथा बाल मजबूत बनते हैं. इसके औषधीय गुण इम्यूनिटी बढ़ाने, सूजन कम करने और शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं. इसके अलावा बड़हर का उपयोग सब्जी, अचार, चटनी और सूखे फल के रूप में भी किया जाता है. इस मौसमी फल को अपने आहार में शामिल करके आप प्राकृतिक तरीके से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं. बड़हर एक अत्यंत पौष्टिक वन्य फल है, जो विटामिन A, C और फाइबर से भरपूर होता है. इसका सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज दूर करता है और आंतों को स्वस्थ रखता है. यह त्वचा को निखारने, मुंहासों से राहत देने और बालों को मजबूत बनाने में सहायक है. एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और संक्रमण से बचाव करते हैं. इसके अलावा बड़हर सूजन कम करने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी उपयोगी है. गर्मियों में इसका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है. ( एआई फोटो ) बिहार का प्रसिद्ध जंगली फल बड़हर मुख्य रूप से गर्मियों के मौसम में उपलब्ध होता है. यह आमतौर पर मार्च से जून तक मिलता है. सबसे अच्छा समय अप्रैल से मई का महीना है, जब फल पूरी तरह पक जाता है और स्वाद में मीठा-खट्टा होता है. यह फल गर्मी में शरीर को ठंडक प्रदान करता है और पोषण से भरपूर होता है. जून के बाद इसकी उपलब्धता कम हो जाती है. इसलिए स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए इसे पके हुए रूप में मई-जून में ही खाएं. ( एआई फोटो ) बिहार में बड़हर मुख्य रूप से जंगलों और ग्रामीण इलाकों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. यह विशेषकर पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, रोहतास, गया, नवादा, जमुई और सीतामढ़ी के जंगलों में बहुतायत में मिलता है. यह फल मार्च से जून तक उपलब्ध रहता है. सबसे अच्छा समय मई-जून का है. वहीं, गर्मी और लू के मौसम में बड़हर खाना बहुत फायदेमंद है क्योंकि यह शरीर को ठंडक देता है, प्यास बुझाता है, पाचन सुधारता है और गर्मी से होने वाली थकान व कमजोरी को दूर करता है. ( एआई फोटो ) Add News18 as Preferred Source on Google बता दें कि बड़हर खाने से त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है. इसमें विटामिन A, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो मुंहासे, दाग-धब्बे कम करने और त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करते हैं. जहां नियमित सेवन से त्वचा स्वस्थ, नरम और जवां दिखती है. वहीं, बिहार के स्थानीय बाजारों में बड़हर की कीमत मौसम के अनुसार बदलती रहती है. पके बड़हर की कीमत आमतौर पर ₹40 से ₹80 प्रति किलो तक रहती है. इसके अलावा अच्छी क्वालिटी और कम उपलब्धता के समय यह ₹100 प्रति किलो तक भी पहुंच जाता है. ( एआई फोटो ) वैसे तो बड़हर बिहार का प्रसिद्ध जंगली फल है, जो गर्मियों में जंगलों और ग्रामीण इलाकों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, लेकिन पके बड़हर को लोग बड़े चाव से खाते हैं. इसका मीठा-खट्टा स्वाद गर्मी में विशेष रूप से पसंद किया जाता है. बिहार की महिलाएं बड़हर का स्वादिष्ट अचार भी बनाती हैं, जो साल भर खाया जा सकता है. वहीं, पौष्टिकता से भरपूर यह फल न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. ( एआई फोटो ) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

तमिलनाडु में एआईएडीएमके के होगे दो टुकड़े, विजय ने दागे डंक! 30 टुकड़े टूटेंगे?

तमिलनाडु में एआईएडीएमके के होगे दो टुकड़े, विजय ने दागे डंक! 30 टुकड़े टूटेंगे?

तमिल की राजनीति में इस बार बड़ा रिवर्सफेयर देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने विक्ट्री की पार्टी टीवीके 108 गेट अचीव कर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। टीवीके को समर्थन देने के लिए राजनीतिक दल विशेष गुणा-गणित सेट करने में टिके हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कशगम’ (एआईएडीएमके) में बगावत के सुर दिख रहे हैं। टीवी के सपोर्ट को लेकर पार्टी दो आकर्षक नजर आ रही है। एआईएडीएमके की आज (6 मई) को होने वाली विधायक दल की बैठक भी बताई गई है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के 47 विधायक में से ज्यादातर टीवीके को समर्थन देने की मांग कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता अप्पादी को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने जल्द ही निर्णय नहीं लिया तो 30 से अधिक विधायक पार्टी विजय को समर्थन दे देंगे। इस बगावत के नेतृत्व वाले सीवी षणमुगम कर रहे हैं, ऐसी खबर मिल रही है कि कुछ देर में उनके घर पर एआईए पत्रकार के विधायक पहुंच सकते हैं। बिश्नामे की बैठक टी.एल.आई एआईएके पत्रिका के नवनिर्वाचित बैच की रविवार (6 मई) को चेन्नई में बैठक हुई थी, लेकिन ऐन पत्रिका पर यह बात कही गई। पार्टी का एक बड़ा विजय की पार्टी टीवीके कम से कम एक साल के लिए खुलकर समर्थन के पक्ष में है। यह स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि टीवीके राज्य क्षेत्र में सबसे बड़ी पार्टी उभरकर सामने आ रही है, लेकिन वह बहुमत के आंकड़ों से पीछे है। टीवीके के लिए 234 क्वार्टर वाली विधानसभा में 118 दरवाजे जरूरी हैं, जबकि टीवीके के लिए 108 दरवाजे जरूरी हैं। टीवीके ने अकेले चुनावी लड़ाई लड़ी थी, इसलिए अब टीचर्स और एआईए मैगजीन्स के दोनों खेमों की डॉक्यूमेंट्री से बातचीत तेजी से हुई है। समर्थकों के अनुसार, शिक्षकों के गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस, जिसने पांच-पांचवीं साझेदारी की है, विजय को समर्थन देने के लिए अधिक से अधिक वोट मांगे जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी की जीत पर उन्हें फोन कर बधाई देने के साथ ही सहयोग के संकेत भी दिए जा रहे हैं। तमिलनाडु चुनाव परिणाम 2026: ‘हम पर भरोसा कम…’, टीवीके की ऐतिहासिक जीत पर इमोशनल हुई जीत, ये क्या बोल गए?” href=’https://www.abplive.com/news/india/tamil-nadu-election-result-2026-vijay-emotional-message-more-mocked-us-than-supported-us-tvk-won-108-seats-3125740′ target=”_self”>तमिलनाडु चुनाव परिणाम 2026: ‘हम पर भरोसा कम…’, टीवीके की ऐतिहासिक जीत पर इमोशनल हुई जीत, ये क्या बोल गए? एआईएके अलायंस के सहयोगी ने चार चर्चों की घोषणा की है, वह भी तैयारी के लिए समर्थन दे रहे हैं। जल्द ही राष्ट्रपति अंबुमणि रामदास और उनकी विजय यात्रा पर भी चर्चा हो रही है. विजय पहले ही गठबंधन सरकार के लिए अपनी सहमति जता चुके हैं, जिससे छोटे आश्रमों को आश्रम में जगह-जगह मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यदि एआईएडीएमके बाहर से समर्थित है, तो विजय आसानी से बहुमत हासिल कर सकती है और सरकार पर मजबूत पकड़ कायम रख सकती है। तमिलनाडु में राहुल गांधी की ‘हाथ’ विजय के साथ, कांग्रेस पार्टी TVK का समर्थन” href=’https://www.abplive.com/news/india/tamil-nadu-election-result-2026-congress-supports-vijay-party-tvk-for-formation-of-government-3125734′ target=”_self”>तमिलनाडु में राहुल गांधी की ‘हाथ’ विजय के साथ, कांग्रेस पार्टी TVK का समर्थन

कैसे सुवेन्दु अधिकारी के अंतिम दौर के वोट उछाल ने ममता बनर्जी के भवानीपुर शासन को समाप्त कर दिया | देखो | भारत समाचार

Tamil Nadu Government Formation: TVK’s Vijay likely to take oath as Tamil Nadu’s chief minister on May 7.

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 10:35 IST सुवेंदु अधिकारी ने भबनीपुर में ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया। जबकि एक समय ममता बनर्जी के लिए अपने ही गढ़ में हार असंभव लग रही थी, भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के लिए समर्थन में भारी उछाल आया, जिनका लक्ष्य अपने ऐतिहासिक नंदीग्राम प्रदर्शन को दोहराना था। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) भवानीपुर चुनाव परिणाम: वोटों की गिनती अक्सर F1 रेस के हाई-स्टेक ड्रामा को प्रतिबिंबित करती है, जहां पोल ​​पोजीशन पर एक ड्राइवर केवल तीसरे स्थान पर फिसल सकता है ताकि वह फिर से आगे की ओर लड़ सके। परिणाम वाले दिन, उम्मीदवार आखिरी वोट गिने जाने तक अपनी सांसें रोके रखते हैं, यह जानते हुए भी कि पासा एक पल में पलट सकता है। भबनीपुर की लड़ाई 4 मई को दिल दहला देने वाली पटकथा के बाद हुई जब पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए वोटों की गिनती चल रही थी। जबकि एक समय ममता बनर्जी के लिए अपने ही गढ़ में हार असंभव लग रही थी, भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के लिए समर्थन में भारी उछाल आया, जिनका लक्ष्य अपने ऐतिहासिक नंदीग्राम प्रदर्शन को दोहराना था। यह भी पढ़ें | नंदीग्राम से भबानीपुर: कैसे सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को दो बार हराया शुरुआती दौर में उतार-चढ़ाव भरा मुकाबला देखने को मिला। ममता बनर्जी ने राउंड 1 में शुरुआती बढ़त ले ली, लेकिन राउंड 2 में गति तेजी से बदल गई क्योंकि उनके शिष्य सुवेंदु अधिकारी भारी बढ़त के साथ आगे बढ़ गए। हालाँकि, राउंड 3 तक प्रतियोगिता में एक और मोड़ आ गया, जब मुख्यमंत्री ने शीर्ष स्थान पुनः प्राप्त करने के लिए संघर्ष किया। राउंड 7 के अंत तक, उनकी बढ़त 15,000 से अधिक वोटों तक बढ़ गई थी। हालाँकि, अंतिम चरण ने साबित कर दिया कि कोई भी लीड सुरक्षित नहीं है। राउंड 10 के बाद, अधिकारी ने व्यवस्थित रूप से अंतर को कम करते हुए एक स्थिर और निरंतर प्रयास शुरू किया। राउंड 15 के बाद, भाजपा नेताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई, जिससे अंतिम आंकड़ों में भी बढ़त बरकरार रही। 20 कठिन दौर और डाक मतपत्रों की गिनती के बाद, “नंदीग्राम चमत्कार” दोहराया गया: सुवेंदु अधिकारी विजयी हुए, उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतिम अंतर से हराया। यह भी पढ़ें | राउंड 1 से 20: कैसे ममता बनर्जी नेतृत्व से लेकर अपना भवानीपुर किला खोने तक पहुंच गईं पश्चिम बंगाल फैसला पश्चिम बंगाल में भाजपा का उदय अभूतपूर्व है। 2011 में लगभग चार प्रतिशत के मामूली वोट शेयर से, भाजपा 2019 में लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई और फिर 2021 के विधानसभा चुनावों में 77 सीटें हासिल कीं, जिससे वामपंथियों और कांग्रेस को टीएमसी के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में विस्थापित कर दिया गया। फिर भी, उस विस्तार को शक्ति में परिवर्तित करना अब तक मायावी बना हुआ था। लेकिन इस चुनाव में, भाजपा का वोट शेयर बढ़कर लगभग 45 प्रतिशत हो गया और यह आंकड़ा 200 के आंकड़े को पार कर गया। 1972 के बाद यह पहली बार है, पश्चिम बंगाल में एक ऐसी पार्टी का शासन होता दिख रहा है जो केंद्र में भी सत्ता में है – गहरे प्रशासनिक और राजनीतिक निहितार्थों के साथ एक बदलाव। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया कैसे सुवेन्दु अधिकारी के अंतिम दौर के वोट उछाल ने ममता बनर्जी के भवानीपुर शासन को समाप्त कर दिया | घड़ी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)भबानीपुर चुनाव परिणाम(टी)ममता बनर्जी की हार(टी)सुवेंदु अधिकारी की जीत(टी)नंदीग्राम से भवानीपुर(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2024(टी)पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बढ़त(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा सीटें

Bangladesh BNP Welcomes BJP Win in West Bengal; Teesta Deal Hopes Rise

Bangladesh BNP Welcomes BJP Win in West Bengal; Teesta Deal Hopes Rise

ढाका2 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी BNP ने पश्चिम बंगाल में BJP की जीत पर खुशी जताई है। न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए BNP के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने BJP को जीत की बधाई दी और कहा कि इससे भारत-बांग्लादेश संबंध मजबूत हो सकते हैं। उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर तीस्ता जल बंटवारे समझौते में देरी करने का आरोप लगाया और कहा कि वह इसमें सबसे बड़ी रुकावट थी। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता बांग्लादेश सरकार और मोदी सरकार दोनों ही चाहते थे। हेलाल ने उम्मीद जताई कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी सरकार भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को बेहतर बनाएगी और तीस्ता समझौते को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि भारत के राज्यों में बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी सीमा पश्चिम बंगाल की ही लगती है। इसलिए वहां की राजनीति का असर सीधे दोनों के संबंधों पर पड़ता है। वहां सत्ता बदलना दोनों देशों के लिए अच्छा है। इससे दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों पर भी सुधार हो सकता है। तीस्ता नदी का 50% पानी चाहता है बांग्लादेश तीस्ता नदी हिमालय के पाहुनरी ग्लेशियर से निकलती है। यह सिक्किम से पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश जाती है और बाद में ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। यह नदी कुल 414 किलोमीटर का रास्ता तय करती है। इस नदी से बांग्लादेश की 2 करोड़ और भारत की 1 करोड़ की आबादी का जीवन-यापन जुड़ा है। इस लंबी यात्रा के दौरान तीस्ता नदी की 83% यात्रा भारत में और 17% यात्रा बांग्लादेश में होती है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कई सालों से विवाद है। बांग्लादेश तीस्ता का 50 फीसदी पानी पर अधिकार चाहता है। जबकि भारत खुद 55 फीसदी पानी चाहता है। जानकारों के मुताबिक अगर तीस्ता नदी जल समझौता होता है तो पश्चिम बंगाल नदी के पानी का मनमुताबिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। यही वजह है कि ममता बनर्जी इसे टालती रही। लंबे समय से अटका है जल बंटवारा समझौता 1815 में नेपाल के राजा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच तीस्ता नदी के पानी को लेकर समझौता हुआ था। तब राजा ने नदी के बड़े हिस्से पर नियंत्रण अंग्रेजों को सौंप दिया। बांग्लादेश के आजाद होने के 12 साल बाद 1983 में दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौता हुआ। इससमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात थी, जबकि 25% हिस्से पर बाद में फैसला होना था। लेकिन यह समझौता भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। बाद में बांग्लादेश ने कहना शुरू किया कि उसे जितना पानी मिल रहा है, वो उसकी जरूरत के हिसाब से कम है। सूखे में उसका इतने पानी से गुजारा नहीं हो पाता है। साल 2008 में शेख हसीना के पीएम बनने के बाद से बांग्लादेश की मांग तेज होने लगी। 2011 में जब कांग्रेस की सरकार थी तब भारत, तीस्ता नदी जल समझौता पर दस्तखत करने को तैयार हो गया था। इसमें बांग्लादेश को 37.5% और भारत को 42.5% पानी देने की बात थी। बाकी 20% किसी देश को देने के लिए तय नहीं था। इसे ‘अनएलोकेटेड’ या रिजर्व पानी माना गया था। ये हिस्सा नदी के प्राकृतिक बहाव, पर्यावरण और जरूरत के हिसाब से छोड़ा जाता है, ताकि नदी सूख न जाए और इकोसिस्टम बना रहे। हालांकि तब ममता बनर्जी की नाराजगी की वजह से मनमोहन सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे। साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी PM बने। एक साल बाद वो बंगाल की CM ममता बनर्जी के साथ बांग्लादेश गए। इस दौरान दोनों नेताओं ने बांग्लादेश को तीस्ता के बंटवारे पर एक सहमति का यकीन दिलाया था। लेकिन 11 साल बीतने के बावजूद अब तक तीस्ता नदी जल समझौते का समाधान नहीं निकल पाया है। ममता सरकार इस समझौते का विरोध क्यों करती रही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार तीस्ता और फरक्का जल बंटवारे के समझौतों का विरोध करती रही हैं। उनके मुताबिक इसका सीधा असर राज्य के लोगों की आजीविका पर पड़ेगा। उनका तर्क है कि पहले ही तीस्ता नदी में पानी का प्रवाह कम हो चुका है, ऐसे में अगर बांग्लादेश के साथ अतिरिक्त पानी साझा किया गया तो उत्तर बंगाल में सिंचाई और पीने के पानी का संकट गहरा सकता है। साथ ही फरक्का बैराज से पानी मोड़ना कोलकाता पोर्ट की नौवहन क्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। ममता सरकार का यह भी कहना रहा है कि इस तरह के संवेदनशील फैसलों में राज्य सरकार को भरोसे में लिए बिना कोई समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि सबसे ज्यादा असर स्थानीय लोगों पर ही पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी, बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ये तस्वीर 2016 की है। तीनों शांति निकेतन में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। भारत-बांग्लादेश में सिर्फ 2 नदियों पर समझौते हुए भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 54 साझा नदियां हैं। लेकिन अब तक सिर्फ दो बड़ी नदियों पर ही औपचारिक समझौते हो पाए हैं। पहला गंगा नदी पर 1996 में हुआ समझौता और दूसरा कुशियारा नदी पर हाल का समझौता। गंगा जल संधि 1996 30 साल के लिए किया गया था, जिसकी अवधि 2026 में पूरी हो रही है। यानी अब इस पर दोबारा बातचीत की जरूरत पड़ेगी। तीस्ता नदी पर अब तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो पाया है और यह सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। वहीं फेनी नदी के मामले में पूरी तरह बड़ा समझौता नहीं हुआ, लेकिन 2019 में सीमित स्तर पर पानी देने को लेकर सहमति बनी थी। जब भारत किसी नदी पर समझौता नहीं कर पाता, तो बांग्लादेश में यह धारणा बनती है कि भारत अपनी घरेलू राजनीति, खासकर राज्यों के दबाव की वजह से फैसले टाल रहा है। दूसरी तरफ भारत के लिए यह संतुलन का मामला है, क्योंकि उसे एक तरफ पड़ोसी देश के साथ रिश्ते संभालने होते हैं और दूसरी तरफ अपने राज्यों, जैसे पश्चिम बंगाल की जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है। ——————————– यह खबर भी पढ़ें… कर्ज से परेशान पाकिस्तान ने शराब एक्सपोर्ट शुरू किया:गैर मुस्लिम देशों को सप्लाई, 50 साल पहले इस्लाम का हवाला देकर बैन किया था कर्ज

अन्नाद्रमुक में दरार? विजय का समर्थन करने वाले दो-तिहाई से अधिक विधायकों ने सीवी षणमुगम के चेन्नई कार्यालय में मुलाकात की | राजनीति समाचार

Tamil Nadu Government Formation: TVK’s Vijay likely to take oath as Tamil Nadu’s chief minister on May 7.

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 10:15 IST करीब 35 विधायक चेन्नई में एआईएडीएमके नेता के दफ्तर पहुंचे. एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी और टीवीके प्रमुख विजय (पीटीआई फाइल फोटो) अन्नाद्रमुक के दो-तिहाई से अधिक विधायक थलापति विजय को समर्थन देने के लिए चेन्नई में राज्यसभा नेता सीवी शनमुगम के कार्यालय में एकत्र हुए, जो पार्टी में दरार का संकेत है। करीब 35 विधायक चेन्नई में एआईएडीएमके नेता के दफ्तर पहुंचे. षणमुगम ने तमिलनाडु चुनाव में मैलम सीट से जीत हासिल की है. कथित तौर पर, इन विधायकों ने एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी से टीवीके के साथ गठबंधन के बारे में सोचने का अनुरोध किया है, जो बहुमत के निशान से 10 सीटों से कम है। यह भी पढ़ें | विजय के पास बहुमत से 10 विधायक कम, कांग्रेस के पास सिर्फ 5: टीवीके कैसे बनाएगी सरकार? तमिलनाडु में एक नाटकीय राजनीतिक बदलाव देखा गया क्योंकि द्रविड़ राजनीति में निहित दोनों पार्टियों में से कोई भी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर नहीं सकी। टीवीके ने अपने पहले चुनाव में 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें हासिल कीं, एआईएडीएमके को 47 सीटें मिलीं। टीवीके, जिसे पहले से ही पांच कांग्रेस विधायकों का समर्थन प्राप्त था, अब अधिक संख्या हासिल करने के लिए सीपीआई और कुछ अन्य दलों तक पहुंच गया है। इससे पहले, एआईएडीएमके नेता के पांडियाराजन ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार को “अस्थायी झटका” करार दिया था, यह घोषणा करते हुए कि उनकी पार्टी के पास महत्वपूर्ण वापसी करने के लिए आवश्यक लचीलापन है। अन्नाद्रमुक नेता ने जोर देकर कहा कि मतदाताओं ने “द्रविड़ मॉडल” को खारिज नहीं किया है, क्योंकि द्रमुक और अन्नाद्रमुक के पास सामूहिक रूप से राज्य में 120 से अधिक सीटें हैं। हालांकि, पंडियाराजन ने कहा कि डीएमके के खिलाफ स्पष्ट सत्ता विरोधी लहर का फायदा टीवीके को मिला है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना समाचार राजनीति अन्नाद्रमुक में दरार? विजय का समर्थन करने वाले दो-तिहाई से अधिक विधायकों ने सीवी षणमुगम के चेन्नई कार्यालय में मुलाकात की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें