Sunday, 20 Sep 2026 | 03:33 AM

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ममता बनर्जी की हार पर देवोलीना का तंज:चुनाव नतीजों पर बोलीं- बुरा सपना खत्म हुआ; प्रदेश में अब नो रुम्बा तुम्बा, सिर्फ ढिंका चिका

ममता बनर्जी की हार पर देवोलीना का तंज:चुनाव नतीजों पर बोलीं- बुरा सपना खत्म हुआ; प्रदेश में अब नो रुम्बा तुम्बा, सिर्फ ढिंका चिका

‘साथ निभाना साथिया’ में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसा है। देवोलीना ने सोशल मीडिया पर खुशी जताई कि बंगाल में अब बदलाव आ गया है। बंगाल की रहने वाली एक्ट्रेस ने ममता बनर्जी की हार पर खुशी जताते हुए उन्हें प्रदेश के लिए एक ‘बुरा सपना’ बताया है। देवोलीना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर साफ कहा कि वह किसी राजनेता से अगर सबसे ज्यादा नफरत करती हैं, तो वो ममता बनर्जी ही हैं। ममता को बताया सबसे नापसंद नेता देवोलीना ने ट्विटर (X) पर लिखा कि बंगाल ने पिछले कई सालों में सबसे बुरा दौर देखा है। उन्होंने लिखा, “अगर मैंने कभी किसी राजनेता से नफरत की है, तो वो यही हैं। आरजी (राहुल गांधी) और उनके गैंग से भी ज्यादा।” एक्ट्रेस का मानना है कि बंगाल में बदलाव की सख्त जरूरत थी और अब जाकर जनता को राहत मिली है। उन्होंने ममता और उनकी टीम को सीधे ‘टाटा’ कह दिया। राहुल गांधी और उनके सेंस ऑफ ह्यूमर पर टिप्पणी अपने पोस्ट में देवोलीना ने राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “असल में मुझे लगता है कि आरजी एक अच्छे इंसान हैं और उनका सेंस ऑफ ह्यूमर भी कमाल का है, जो केंद्र सरकार के लिए हमेशा फायदेमंद साबित होता है।” हालांकि, ममता बनर्जी के मामले में उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब वह बंगाल की राजनीति में कभी नहीं दिखेंगी। ‘नो रुम्बा तुम्बा, अब सिर्फ ढिंका चिका’ देवोलीना ने अपने ट्वीट के आखिर में बंगाली भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि अब बंगाल में कोई ‘रुम्बा तुम्बा ज़ुम्बा’ नहीं चलेगा। उन्होंने लिखा, “पलटानो दरकर चिलो सो पालते गेइछे (बदलाव की जरूरत थी और वो हो गया)। अब बंगाल में सिर्फ ढिंका चिका, ढिंका चिका होगा।” शादी के बाद एक्टिंग से ब्रेक पर हैं देवोलीना फिलहाल देवोलीना छोटे पर्दे से दूर हैं और अपने परिवार के साथ समय बिता रही हैं। उन्होंने दिसंबर 2022 में शनावाज शेख से शादी की थी और दिसंबर 2024 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम जॉय रखा है। देवोलीना ‘साथ निभाना साथिया’ के अलावा ‘बिग बॉस’ जैसे बड़े शोज का हिस्सा रह चुकी हैं।

ममता बनर्जी की हार पर देवोलीना का तंज:चुनाव नतीजों पर बोलीं- बुरा सपना खत्म हुआ; प्रदेश में अब नो रुम्बा तुम्बा, सिर्फ ढिंका चिका

ममता बनर्जी की हार पर देवोलीना का तंज:चुनाव नतीजों पर बोलीं- बुरा सपना खत्म हुआ; प्रदेश में अब नो रुम्बा तुम्बा, सिर्फ ढिंका चिका

‘साथ निभाना साथिया’ में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसा है। देवोलीना ने सोशल मीडिया पर खुशी जताई कि बंगाल में अब बदलाव आ गया है। बंगाल की रहने वाली एक्ट्रेस ने ममता बनर्जी की हार पर खुशी जताते हुए उन्हें प्रदेश के लिए एक ‘बुरा सपना’ बताया है। देवोलीना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर साफ कहा कि वह किसी राजनेता से अगर सबसे ज्यादा नफरत करती हैं, तो वो ममता बनर्जी ही हैं। ममता को बताया सबसे नापसंद नेता देवोलीना ने ट्विटर (X) पर लिखा कि बंगाल ने पिछले कई सालों में सबसे बुरा दौर देखा है। उन्होंने लिखा, “अगर मैंने कभी किसी राजनेता से नफरत की है, तो वो यही हैं। आरजी (राहुल गांधी) और उनके गैंग से भी ज्यादा।” एक्ट्रेस का मानना है कि बंगाल में बदलाव की सख्त जरूरत थी और अब जाकर जनता को राहत मिली है। उन्होंने ममता और उनकी टीम को सीधे ‘टाटा’ कह दिया। राहुल गांधी और उनके सेंस ऑफ ह्यूमर पर टिप्पणी अपने पोस्ट में देवोलीना ने राहुल गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “असल में मुझे लगता है कि आरजी एक अच्छे इंसान हैं और उनका सेंस ऑफ ह्यूमर भी कमाल का है, जो केंद्र सरकार के लिए हमेशा फायदेमंद साबित होता है।” हालांकि, ममता बनर्जी के मामले में उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब वह बंगाल की राजनीति में कभी नहीं दिखेंगी। ‘नो रुम्बा तुम्बा, अब सिर्फ ढिंका चिका’ देवोलीना ने अपने ट्वीट के आखिर में बंगाली भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि अब बंगाल में कोई ‘रुम्बा तुम्बा ज़ुम्बा’ नहीं चलेगा। उन्होंने लिखा, “पलटानो दरकर चिलो सो पालते गेइछे (बदलाव की जरूरत थी और वो हो गया)। अब बंगाल में सिर्फ ढिंका चिका, ढिंका चिका होगा।” शादी के बाद एक्टिंग से ब्रेक पर हैं देवोलीना फिलहाल देवोलीना छोटे पर्दे से दूर हैं और अपने परिवार के साथ समय बिता रही हैं। उन्होंने दिसंबर 2022 में शनावाज शेख से शादी की थी और दिसंबर 2024 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम जॉय रखा है। देवोलीना ‘साथ निभाना साथिया’ के अलावा ‘बिग बॉस’ जैसे बड़े शोज का हिस्सा रह चुकी हैं।

भारतीय पत्रकार आनंद और सुपर्णा को पुलित्जर प्राइज:इलस्ट्रेशन और दमदार कमेंट्री से बताई थी डिजिटल अरेस्ट-साइबर फ्रॉड की भयावहता

भारतीय पत्रकार आनंद और सुपर्णा को पुलित्जर प्राइज:इलस्ट्रेशन और दमदार कमेंट्री से बताई थी डिजिटल अरेस्ट-साइबर फ्रॉड की भयावहता

दो भारतीय पत्रकारों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है। आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने साइबर अपराध को उजागर करने वाली अहम खोजी रिपोर्टिंग के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता है। उन्हें यह सम्मान नताली ओबिको पियर्सन के साथ इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री श्रेणी में दिया गया। ‘पत्रकारिता के नोबेल’ के तौर पर चर्चित यह पुरस्कार उन्हें ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई विशेष रिपोर्ट ‘ट्रैप्ड’ के लिए मिला। जानिए इस इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट और दोनों की उपलब्धियों के बारे में… इस पत्रकार जोड़ी द्वारा बनाई गई रिपोर्ट ‘ट्रैप्ड’ लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन के साथ हुई सच्ची घटना के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ के भयानक तंत्र को उजागर करती है। आनंद के प्रभावशाली चित्रण और सुपर्णा की गहन पत्रकारिता का यह अनूठा मेल दिखाता है कि कैसे साइबर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से बंधक बना लेते हैं। यह स्टोरी सिर्फ व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि निगरानी तंत्र के दुरुपयोग और वैश्विक स्तर पर बढ़ते संगठित डिजिटल घोटालों की एक गंभीर चेतावनी भी है। आइजनर पुरस्कार भी जीत चुके हैं आनंद मुंबई में रहने वाले आनंद इलस्ट्रेटर और विजुअल आर्टिस्ट हैं। उन्होंने 2021 में इमेज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित ग्राफिक उपन्यास ‘ब्लू इन ग्रीन’ के लिए कलरिस्ट जॉन पीयरसन के साथ ‘बेस्ट पेंटर/मल्टीमीडिया आर्टिस्ट’ का आइजनर पुरस्कार भी जीता था। सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से स्नातक आनंद ने डार्क हॉर्स कॉमिक्स की ‘ग्रैफिटीज वॉल’, वॉल्ट की ‘रेडियो एपोकैलिप्स’ और डीसी कॉमिक्स की ‘रेजरेक्शन मैन’ जैसी कृतियों का चित्रण किया है। उन्होंने बूम! स्टूडियोज, 2000 एडी, टाइनी अनियन व इमेज कॉमिक्स जैसे प्रकाशकों के लिए कवर आर्ट बनाया है। उन्होंने हुंडई, भारतीय नौसेना, इमेजिन-एफएक्स मैगजीन व हैवी मेटल मैगजीन जैसे क्लाइंट्स के साथ भी काम किया है। केयर सेंटर में लापरवाही का खुलासा कर चुकी हैं सुपर्णा सुपर्णा फ्रीलांस खोजी पत्रकार और संपादक हैं। इन्हें अपराध, संघर्ष, आपदाओं व भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग का तीन दशकों का अनुभव है। 2023 में अल जजीरा के लिए दिल्ली के एक केयर फैसिलिटी में लगी भीषण आग पर उनकी जांच ने बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में लापरवाही और सच्चाई को दबाने के कथित प्रयासों का पर्दाफाश किया था। भारतीय मूल के अनिरुद्ध भी विजेता हनोई में रहने वाले भारतवंशी पत्रकार अनिरुद्ध घोषाल ने इंटरनेशनल रिपोर्टिंग श्रेणी में पुलित्जर जीता। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) से जुड़े अनिरुद्ध की रिपोर्ट अमेरिकी बॉर्डर पैट्रोल द्वारा सिलिकॉन वैली व चीन में विकसित निगरानी उपकरणों पर थी। वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर क्राइम व मानव तस्करी नेक्सस का पर्दाफाश करने वाले बैंकॉक के भारतवंशी पत्रकार देवज्योत फाइनलिस्ट रहे।

भारतीय पत्रकार आनंद और सुपर्णा को पुलित्जर प्राइज:इलस्ट्रेशन और दमदार कमेंट्री से बताई थी डिजिटल अरेस्ट-साइबर फ्रॉड की भयावहता

भारतीय पत्रकार आनंद और सुपर्णा को पुलित्जर प्राइज:इलस्ट्रेशन और दमदार कमेंट्री से बताई थी डिजिटल अरेस्ट-साइबर फ्रॉड की भयावहता

दो भारतीय पत्रकारों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की है। आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने साइबर अपराध को उजागर करने वाली अहम खोजी रिपोर्टिंग के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार जीता है। उन्हें यह सम्मान नताली ओबिको पियर्सन के साथ इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री श्रेणी में दिया गया। ‘पत्रकारिता के नोबेल’ के तौर पर चर्चित यह पुरस्कार उन्हें ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई विशेष रिपोर्ट ‘ट्रैप्ड’ के लिए मिला। जानिए इस इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट और दोनों की उपलब्धियों के बारे में… इस पत्रकार जोड़ी द्वारा बनाई गई रिपोर्ट ‘ट्रैप्ड’ लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट रुचिरा टंडन के साथ हुई सच्ची घटना के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ के भयानक तंत्र को उजागर करती है। आनंद के प्रभावशाली चित्रण और सुपर्णा की गहन पत्रकारिता का यह अनूठा मेल दिखाता है कि कैसे साइबर अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से बंधक बना लेते हैं। यह स्टोरी सिर्फ व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि निगरानी तंत्र के दुरुपयोग और वैश्विक स्तर पर बढ़ते संगठित डिजिटल घोटालों की एक गंभीर चेतावनी भी है। आइजनर पुरस्कार भी जीत चुके हैं आनंद मुंबई में रहने वाले आनंद इलस्ट्रेटर और विजुअल आर्टिस्ट हैं। उन्होंने 2021 में इमेज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित ग्राफिक उपन्यास ‘ब्लू इन ग्रीन’ के लिए कलरिस्ट जॉन पीयरसन के साथ ‘बेस्ट पेंटर/मल्टीमीडिया आर्टिस्ट’ का आइजनर पुरस्कार भी जीता था। सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से स्नातक आनंद ने डार्क हॉर्स कॉमिक्स की ‘ग्रैफिटीज वॉल’, वॉल्ट की ‘रेडियो एपोकैलिप्स’ और डीसी कॉमिक्स की ‘रेजरेक्शन मैन’ जैसी कृतियों का चित्रण किया है। उन्होंने बूम! स्टूडियोज, 2000 एडी, टाइनी अनियन व इमेज कॉमिक्स जैसे प्रकाशकों के लिए कवर आर्ट बनाया है। उन्होंने हुंडई, भारतीय नौसेना, इमेजिन-एफएक्स मैगजीन व हैवी मेटल मैगजीन जैसे क्लाइंट्स के साथ भी काम किया है। केयर सेंटर में लापरवाही का खुलासा कर चुकी हैं सुपर्णा सुपर्णा फ्रीलांस खोजी पत्रकार और संपादक हैं। इन्हें अपराध, संघर्ष, आपदाओं व भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग का तीन दशकों का अनुभव है। 2023 में अल जजीरा के लिए दिल्ली के एक केयर फैसिलिटी में लगी भीषण आग पर उनकी जांच ने बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में लापरवाही और सच्चाई को दबाने के कथित प्रयासों का पर्दाफाश किया था। भारतीय मूल के अनिरुद्ध भी विजेता हनोई में रहने वाले भारतवंशी पत्रकार अनिरुद्ध घोषाल ने इंटरनेशनल रिपोर्टिंग श्रेणी में पुलित्जर जीता। एसोसिएटेड प्रेस (एपी) से जुड़े अनिरुद्ध की रिपोर्ट अमेरिकी बॉर्डर पैट्रोल द्वारा सिलिकॉन वैली व चीन में विकसित निगरानी उपकरणों पर थी। वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर क्राइम व मानव तस्करी नेक्सस का पर्दाफाश करने वाले बैंकॉक के भारतवंशी पत्रकार देवज्योत फाइनलिस्ट रहे।

नाखून और बाल काटने पर क्यों नहीं होता है दर्द? शायद ही जानते होंगे जवाब, यह है असली वजह

नाखून और बाल काटने पर क्यों नहीं होता है दर्द? शायद ही जानते होंगे जवाब, यह है असली वजह

Last Updated:May 06, 2026, 12:16 IST Why Cutting Nails and hair no pain: क्या कभी आपने सोचा है कि शरीर के एक कतरे में भी कहीं छोटी सी सूई चुभ जाती है या जल जाती है तो हम छटपटाने लगते हैं लेकिन शरीर के ही अंग नाखून और बाल को जब हम काटते हैं तो हमें रत्ती भर दर्द नहीं होता. बेशक इसके वैज्ञानिक कारण है लेकिन यह एक तरह से कुदरत का करिश्मा है. दरअसल हमारे शरीर के ये दो हिस्से मरे हुए होते हैं, लेकिन पूरी तरह से नहीं! आइए जानते हैं इसके पीछे का वह रहस्य जो आज भी बहुत से लोगों के लिए पहेली बना हुआ है. विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले इंसानी शरीर कुदरत का अद्भुत करिश्मा है. जब हल्की सी सुई चुभने भर से हम दर्द से कराह उठते हैं, वहीं कैंची से बाल काटने या नेल कटर से नाखून काटने पर हमें रत्ती भर भी अहसास नहीं होता. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है? लोग अक्सर इसे एक सामान्य बात मानकर टाल देते हैं, लेकिन इसके पीछे विज्ञान का एक बहुत बड़ा कारण है. हमारी त्वचा और मांसपेशियों में करोड़ों नर्व सेल्स होते हैं. कहीं भी चोट लगती है तो ये नसें तुरंत दिमाग को सिग्नल भेजती हैं जिससे हमें दर्द महसूस होता है. इसलिए हमें दर्द साफ-साफ महसूस होता है. लेकिन बाल और नाखून के मामले में बात अलग होती है. इनका बाहरी हिस्सा ‘केराटिन’ नाम के मजबूत प्रोटीन से बना होता है, जो मृत कोशिकाएं होती हैं. मतलब इन हिस्सों में नसें या खून की नलियां नहीं होतीं. इसलिए बाल या नाखून काटने पर नहीं दर्द होता है और न खून निकलता है. यह हमारे शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा है. अगर ऐसा न होता तो हर बार बाल या नाखून काटना बहुत मुश्किल हो जाता. Add News18 as Preferred Source on Google लेकिन बाल पूरी तरह से मृत नहीं होते. हम जो हिस्सा देखते हैं वो ही मृत होता है. बाल की जड़ें (फॉलिकल्स) त्वचा के अंदर होती हैं और वो जीवित कोशिकाओं और नसों से जुड़ी रहती हैं. इसलिए बाल काटने पर दर्द नहीं होता, लेकिन अगर बाल को जोर से खींचा जाए तो तुरंत दर्द महसूस होता है.   साधारण शब्दों में समझें तो हमारे बाल और नाखून मृत कोशिकाओं से बने होते हैं. चूंकि ये कोशिकाएं जीवित नहीं होतीं, इसलिए इनमें तंत्रिकाएं नहीं होतीं जो मस्तिष्क तक दर्द का संकेत भेज सकें. इसलिए जब हम बाल काटते हैं तो हमें दर्द का अहसास बिल्कुल नहीं होता. दूसरी ओर नाखून और बाल में केराटिन प्रोटीन होता है जो निर्जीव होता है. यह प्रोटीन काफी सख्त होता है और इसमें ब्लड सर्कुलेशन नहीं होता. नाखून असल में हमारी उंगलियों के नाजुक सिरों की सुरक्षा के लिए होते हैं. ये मृत हिस्से हमारे शरीर के ऐसे एक्सटेंशन हैं जो बिना किसी दर्द के बढ़ते और कटते रहते हैं. (डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य अनुमान पर आधारित है. News18  ने इसकी पुष्टि नहीं की है. कृपया इन्हें अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

विनेश फोगाट को डोपिंग एजेंसी का नोटिस:बेंगलुरु में टेस्ट के लिए नहीं मिलीं, 7 मई तक देना होगा जवाब

विनेश फोगाट को डोपिंग एजेंसी का नोटिस:बेंगलुरु में टेस्ट के लिए नहीं मिलीं, 7 मई तक देना होगा जवाब

10 से 12 मई के बीच गोंडा में होने वाले सीनियर ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट से पहले विनेश फोगाट को इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (ITA) ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस डोपिंग टेस्ट के लिए तय समय और स्थान पर मौजूद नहीं रहने के कारण दिया गया है। पिछले 12 महीनों में यह उनकी पहली ऐसी गलती है। हालांकि, इस चेतावनी का उनके आगामी टूर्नामेंट में भाग लेने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन नियमों के अनुसार, अगर भविष्य में ऐसी दो और चूक होती हैं, तो उन पर दो साल का प्रतिबंध लगाया जा सकता है। 18 दिसंबर को टेस्ट के लिए पहुंची टीम, बेंगलुरु में नहीं मिलीं विनेश फोगाट इंटरनेशनल टेस्टिंग एंजेसी के नोटिस के मुताबिक, मामला 18 दिसंबर 2025 का है। डोपिंग कंट्रोल ऑफिसर (DCO) विनेश फोगाट के बताए बेंगलुरु पते पर पहुंचे थे, लेकिन वे 60 मिनट के तय टाइम स्लॉट में वहां मौजूद नहीं थीं। नियम के अनुसार, ‘रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल’ में शामिल खिलाड़ियों को रोज एक घंटा ऐसा बताना होता है, जब वे बिना नोटिस टेस्ट के लिए उपलब्ध रहें। उस समय विनेश वहां नहीं मिलीं, जिसे नियम का उल्लंघन माना गया 20 महीने बाद अखाड़े में वापसी विनेश फोगाट करीब 20 महीने बाद एक बार फिर कुश्ती के अखाड़े में वापसी करने जा रही हैं। उन्होंने पेरिस ओलिंपिक के बाद कुश्ती से संन्यास लेने का ऐलान किया था, लेकिन कुछ महीनों बाद वापसी की घोषणा कर दी। एशियन गेम्स ट्रायल के लिए आखिरी मौका जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच होने वाले एशियन गेम्स के ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए यह विनेश के पास आखिरी मौका है। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के नियमों के मुताबिक एशियन गेम्स ट्रायल में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना जरूरी है। चूंकि नेशनल चैंपियनशिप पहले ही हो चुकी है, इसलिए अब विनेश को नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप में पदक जीतकर ट्रायल के लिए क्वालिफाई करना होगा विनेश की सफाई: ‘विधानसभा सत्र और बच्चे की वजह से अपडेट नहीं कर पाई लोकेशन’ विनेश को 5 जनवरी 2026 को इस बारे में सूचित किया गया था, जिसका जवाब उन्होंने 19 जनवरी को दिया। विनेश ने बताया कि वे उस दिन हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में हिस्सा लेने के लिए बेंगलुरु से चंडीगढ़ गई थीं। उन्होंने अपनी नई पारिवारिक जिम्मेदारियों और हाल ही में हुए बच्चे के जन्म का भी हवाला दिया। विनेश ने कहा कि व्यस्तता के कारण वे अपनी लोकेशन अपडेट नहीं कर पाईं। एजेंसी ने दलील ठुकराई: ‘SMS और ऐप से जानकारी देना खिलाड़ी की जिम्मेदारी’ ITA ने विनेश की दलील को नाकाफी माना है। एजेंसी ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उनकी व्यस्तता हम समझते हैं, लेकिन डोपिंग नियमों का पालन करना पूरी तरह खिलाड़ी की जिम्मेदारी है। नोटिस में कहा गया कि विनेश के पास SMS, ईमेल या मोबाइल ऐप के जरिए लोकेशन अपडेट करने के कई रास्ते थे, जिनका उन्होंने उपयोग नहीं किया। एजेंसी ने विनेश को इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 7 दिन का समय दिया है। क्या है नियम? वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) के नियमों के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी 12 महीने के भीतर 3 बार अपनी लोकेशन बताने में फेल होता है या टेस्ट के लिए मौजूद नहीं रहता, तो इसे ‘एंटी डोपिंग रूल वायलेशन’ माना जाता है। इसमें खिलाड़ी पर 2 साल तक का प्रतिबंध लग सकता है। विनेश के केस में यह अभी पहली गलती है, इसलिए उन्हें केवल चेतावनी दी गई है।

15,000 Jobs Cut Globally; India Hit Hardest

15,000 Jobs Cut Globally; India Hit Hardest

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक IT सेक्टर की बड़ी कंपनी कॉग्निजेंट अपने वर्कफोर्स में बड़ी कटौती करने जा रही है, जिससे दुनिया भर में 15,000 से ज्यादा कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस छंटनी में भारत में सबसे ज्यादा कर्मचारियों की नौकरियां जाएंगी, जो ओरेकल और अमेजन के बाद इस साल की सबसे बड़ी टेक छंटनी मानी जा रही है। कॉग्निजेंट के कुल 3.57 लाख से ज्यादा कर्मचारियों में से 2.50 लाख कर्मचारी भारत में काम करते हैं। हालांकि, कंपनी ने छंटनी की सटीक संख्या का अभी ऐलान नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, 12,000 से 15,000 के बीच नौकरियां जा सकती हैं। भारत कंपनी का सबसे बड़ा वर्कफोर्स हब है, इसलिए यहां असर भी सबसे ज्यादा होने की संभावना है। सेवरेंस पर 320 मिलियन डॉलर खर्च करेगी कंपनी कंपनी ने छंटनी का अनुमान ‘प्रोजेक्ट लीप’ के तहत तय किए गए बजट के आधार पर लगाया है। 29 अप्रैल को तिमाही नतीजों की घोषणा के दौरान कॉग्निजेंट ने बताया कि वह सेवरेंस कॉस्ट (कर्मचारियों को हटाते समय दिया जाने वाला मुआवजा) पर 230 मिलियन डॉलर से 320 मिलियन डॉलर खर्च करने की उम्मीद कर रही है। इसमें कर्मचारियों को दिया जाने वाला कंपनसेशन और अन्य बेनेफिट्स शामिल हैं। भारत में कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी ₹15 लाख भारत में कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी लगभग 15 लाख रुपए है। यदि छंटनी में निकाले गए कर्मचारियों को 6 महीने की सैलरी के बराबर सेवरेंस पे दिया जाता है, तो हर एक कर्मचारी को लगभग 7.5 लाख रुपए मिलेंगे। इस हिसाब से कंपनी द्वारा तय बजट अकेले भारत में ही लगभग 12,000 से 13,000 कर्मचारियों की छंटनी को कवर कर सकता है। क्लाइंट्स की बदलती पसंद और नया मॉडल इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्लाइंट अब पुराने ‘स्टाफिंग पिरामिड’ मॉडल से दूर जा रहे हैं, जो एंट्री-लेवल के कर्मचारियों पर निर्भर रहता था। अब क्लाइंट्स नए फ्रेशर्स के बड़े बैच को ट्रेनिंग देने का खर्च उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि कंपनियां अब अपने स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही हैं। सीईओ रवि कुमार एस का विजन कॉग्निजेंट के CEO रवि कुमार एस ने दुनिया भर में किए जा रहे इन बदलावों की पुष्टि की है। उन्होंने अर्निंग्स कॉल के दौरान कहा कि कंपनी अब एक ‘व्यापक और छोटे पिरामिड’ की ओर बढ़ रही है। इसमें डिजिटल लेबर और ह्यूमन लेबर यानी इंसानी श्रम और तकनीक का एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा। भारत में कॉग्निजेंट के प्रमुख ऑफिस बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में हैं। सेवरेंस पैकेज क्या होता है? जब कोई कंपनी कर्मचारी को उसकी मर्जी के बिना नौकरी से निकालती है, तो उसे आर्थिक सहायता के रूप में दी जाने वाली राशि को सेवरेंस पे कहते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

‘कोई विभाजन नहीं है’: अन्नाद्रमुक ने टीवीके गठबंधन पर आंतरिक दरार की अफवाहों को खारिज किया, कहा गेंद विजय के पाले में है | भारत समाचार

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आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 11:50 IST अन्नाद्रमुक के प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा कि पार्टी के भीतर “एकजुट सहमति” थी और इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व टीवीके के साथ गठबंधन पर अंतिम फैसला करेगा। एआईएडीएमके प्रवक्ता कोवई सत्यन तमिलनाडु सरकार का गठन: तमिलनाडु में तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) को समर्थन देने पर आंतरिक विभाजन की अटकलों के बीच, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने बुधवार को विभाजन की अफवाहों को खारिज कर दिया, और कहा कि पार्टी एकजुट है और टीवीके को समर्थन देने पर कोई भी निर्णय अभिनेता से नेता बने विजय पर निर्भर करता है। लाइव अपडेट का पालन करें पत्रकारों से बात करते हुए, अन्नाद्रमुक के प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा कि पार्टी के भीतर एक “एकजुट सहमति” थी और इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व चुनाव के बाद किसी भी संभावित गठबंधन पर अंतिम फैसला करेगा। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से सत्यन ने कहा, “एआईएडीएमके में कोई विभाजन नहीं है। हर कोई आम सहमति में है। गेंद श्री विजय के पाले में है। बहुमत का फैसला आलाकमान द्वारा लिया जाएगा। अगर उन्हें सपने को हकीकत में बदलना है, तो यह श्री विजय की तरफ से आना होगा।” #घड़ी | चेन्नई, तमिलनाडु: यह पूछे जाने पर कि क्या एआईएडीएमके टीवीके को समर्थन देगी, एआईएडीएमके के प्रवक्ता कोवई सत्यन कहते हैं, “गेंद श्री विजय के पाले में है। बहुमत का निर्णय आलाकमान द्वारा लिया जाएगा। अगर उन्हें सपने को हकीकत में बदलना है, तो यह श्री से आना होगा… pic.twitter.com/G1ezhI7Ge0– एएनआई (@ANI) 6 मई 2026 उन्होंने कहा, “गेंद श्री विजय के पाले में है और उन्हें सोच-समझकर निर्णय लेना होगा कि क्या वह 5 साल का कार्यकाल पूरा करना चाहते हैं या कई और पार्टियों को विश्वास में लेने की कोशिश करना चाहते हैं। राज्यपाल ने टीवीके खेमे में विधायकों की संख्या पर स्पष्टता मांगी है। विकास हो रहा है।” उनकी टिप्पणी एआईएडीएमके के दो-तिहाई से अधिक विधायकों के सीवी षणमुगम के चेन्नई कार्यालय में एकत्र होने के बाद आई, जिसमें पार्टी नेतृत्व से टीवीके को समर्थन देने पर विचार करने का आग्रह किया गया, जो वर्तमान में तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत से कम है। और पढ़ें: एआईएडीएमके में दरार? विजय का समर्थन करने वाले दो-तिहाई से अधिक विधायकों ने सीवी षणमुगम के चेन्नई कार्यालय में मुलाकात की कथित तौर पर लगभग 35 विधायकों ने बैठक में भाग लिया और कहा जाता है कि उन्होंने अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी से टीवीके के साथ गठबंधन का पता लगाने का अनुरोध किया है। हालाँकि, सत्यन ने कहा कि कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और दोहराया कि पार्टी आलाकमान कार्रवाई का फैसला करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि टीवीके ने समर्थन के लिए औपचारिक रूप से किसी पार्टी से संपर्क नहीं किया है। उन्होंने कहा, “अगर वे स्थिरता चाहते हैं, तो उन्हें फैसला लेना चाहिए। कुछ गति है। हम इंतजार करेंगे और देखेंगे।” इस बीच, टीवीके ने कहा है कि उसने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से संबद्ध किसी भी पार्टी के साथ चर्चा नहीं की है। तमिलनाडु चुनाव तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक झटका देखने को मिला है, जहां पारंपरिक द्रविड़ पार्टियों में से कोई भी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने नहीं आई है। अपने पहले चुनाव में, तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतीं, जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने 47 सीटें हासिल कीं। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को बड़ा झटका लगा, उसने केवल 59 सीटें जीतीं, शेष सीटें कांग्रेस और वामपंथी समूहों सहित छोटी पार्टियों के पास गईं। टीवीके ने पहले ही पांच कांग्रेस विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया है और अब अतिरिक्त समर्थन हासिल करने और अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) जैसी पार्टियों के साथ-साथ अन्य पार्टियों तक पहुंच रही है। विजय के 7 मई को चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की संभावना है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘कोई विभाजन नहीं है’: अन्नाद्रमुक ने टीवीके गठबंधन पर आंतरिक दरार की अफवाहों को खारिज किया, कहा गेंद विजय के पाले में है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु सरकार का गठन(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके गठबंधन(टी)एआईएडीएमके समर्थन(टी)विजय तमिलनाडु सीएम(टी)त्रिशंकु विधानसभा तमिलनाडु(टी)तमिलनाडु राजनीतिक संकट(टी)द्रविड़ पार्टियां तमिलनाडु

इंटिमेसी बढ़ाने के लिए खाया ‘मैड हनी’, 25 साल के युवक को आया कार्डियक अरेस्ट, 40 मिनट चला CPR

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Last Updated:May 06, 2026, 11:36 IST Mad Honey Becomes Fatal For 25 Year Old: नेचुरल चीजें भी किस कदर घातक हो सकती हैं, इसका ताजा उदाहरण पटना में देखने को मिला जहां एक 25 साल के युवक की खास तरह का शहद लेने से ऐसी हालत हो गई कि वो वेंटिलेटर तक पहुंच गया. उसने इंटिमेसी टाइम बढ़ाने के लिए नेपाल से मैड हनी खरीदा था. इसका सेवन करने से उसे दिल का दौरा पड़ गया. ख़बरें फटाफट पटना. आम तौर पर शहद को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन पटना के एक युवक के लिए यह खतरनाक साबित हो गया. हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे दिल का दौरा पड़ गया. करीब 40 मिनट तक लगातार सीपीआर देने के बाद डॉक्टरों को उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. हालांकि, समय रहते डॉक्टरों की समझदारी और इलाज से उसकी जान बचा ली गई. हैरानी की बात यह है कि युवक की उम्र सिर्फ 25 साल थी और उसका कोई भी मेडिकल इतिहास नहीं था. वह पूरी तरह से स्वस्थ था. दिल का दौरा पड़ने की वजह समझने के लिए डॉक्टरों को काफी जांच-पड़ताल करनी पड़ी. कई किताबों और रिसर्च पेपर का अध्ययन करने के बाद जाकर असली कारण सामने आ सका. मैड हनी का सेवन और 40 मिनट सीपीआरपटना स्थित मेदांता इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर एंड एनेस्थीसियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. किशोर झुनझुनवाला ने लोकल 18 को बताया कि युवक की तबीयत बिगड़ने से पहले वह अपनी पत्नी के साथ नेपाल घूमने गया था. वहीं से वह मैड हनी लेकर पटना लौटा. इसके असर को परखने के लिए उसने रात में इसकी डोज ली. इसके बाद उसकी दिल की धड़कन धीरे-धीरे कम होने लगी और स्थिति बिगड़ते-बिगड़ते कार्डियक अरेस्ट तक पहुंच गई. परिजन उसे तुरंत मेदांता अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इमरजेंसी में हम लोगों ने करीब 40 मिनट तक सीपीआर दिया. हालत नाजुक होने के कारण उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. लगभग दस दिनों तक चले इलाज और लगातार निगरानी के बाद युवक की स्थिति में सुधार हुआ. अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. क्या है मैड हनीमैड हनी के बारे में बताते हुए डॉ. किशोर झुनझुनवाला कहते हैं कि यह एक दुर्लभ किस्म का शहद है जो नेपाल और यूरोप के कुछ हिस्सों में आसानी से मिलता है. यह हिमालयी रोडोडेंड्रॉन (बुरांश) के फूलों से खास मधुमक्खियों के द्वारा निकाला जाता है. इसमें ग्रेयानोटॉक्सिन्स पाए जाते हैं, जो दिल और नसों पर असर डालते हैं. इसका रंग गहरा और लालिमा लिए होता है. इसे कम मात्रा में कथित औषधीय और यौन स्वास्थ्य लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है. दावा किया जाता है कि इससे सेक्स टाइम बढ़ता है. इसके सेवन से हैलुसिनेशन जैसा महसूस होता है. मात्रा अधिक होने पर लो ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन धीमी होना, बेहोशी और कार्डियक अरेस्ट तक हो सकता है. कभी-कभी कुछ नेचुरल प्रोडक्ट का कम डोज भी सेहत पर गलत असर डाल सकता है. इस केस में यही हुआ. भ्रामक प्रचार और दावों से बचेंजब मरीज आईसीयू में भर्ती हुआ, तब डॉक्टरों ने उसकी हालत के पीछे की वजह जानने की हर संभव कोशिश की, लेकिन परिजन शुरू में सब कुछ सामान्य ही बता रहे थे. बाद में जब रात के खाने और अन्य चीजों के बारे में विस्तार से पूछताछ की गई, तब हनी के सेवन की बात सामने आई. चूंकि इसे नेचुरल प्रोडक्ट माना जा रहा था, इसलिए घरवालों ने शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन जब डॉ. किशोर झुनझुनवाला ने कुछ लिटरेचर और अन्य स्रोतों से इस हनी के बारे में जानकारी जुटाई तो मालूम चला कि यह मैड हनी है और युवक की ऐसी हालत का असली कारण यही है. उन्होंने युवाओं को सचेत करते हुए कहा कि नेचुरल के नाम पर किए जाने वाले भ्रामक दावों से सावधान रहना जरूरी है. हर प्राकृतिक चीज फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं है. इसलिए किसी भी ऐसे प्रोडक्ट का सेवन सोच-समझकर और सावधानी के साथ ही करना चाहिए. About the Author Raina Shukla बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया ​था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि​ पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।