Sunday, 21 Jun 2026 | 05:11 PM

Trending :

EXCLUSIVE

PM Shram Yogi Mandhan: Rs 55 Mein 3000 Pension

PM Shram Yogi Mandhan: Rs 55 Mein 3000 Pension

नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार देश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिक को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना’ चलाई जा रही है। इस स्कीम में 60 साल के बाद हर महीने 3000 रुपए पेंशन मिलती है। इसके जरिए बुढ़ापे में मासिक आय का सोर्स बन सकता है। हम आपको इस योजना के बारे में बता रहें हैं… हर महीने 3 हजार रुपए की पेंशन का फायदा इस स्कीम में मजदूरों को हर महीने 3000 रुपए की पेंशन का फायदा मिलता है। इसमें रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, कंस्ट्रक्शन क्षेत्र और ऐसे ही असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर शामिल होते हैं। अगर आप भी असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं और अब तक कोई पेंशन प्लान नहीं लिया है तो प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना का प्लान ले सकते हैं। इस योजना के तहत किसे मिलेगी पेंशन? ये योजना असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए है। इनमें घर में काम करने वाले, रेहड़ी लगाने वाले दुकानदार, ड्राइवर, प्लम्बर, दर्जी, मिड-डे मील वर्कर, रिक्शा चालक, निर्माण कार्य करने वाले मजदूर, कूड़ा बीनने वाले, बीड़ी बनाने वाले, हथकरघा, कृषि कामगार, मोची, धोबी, चमड़ा कामगार को शामिल किया गया है। पूरी लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें क्या हैं नियम: योजना के लिए असंगठित क्षेत्र के मजदूर की इनकम 15,000 रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। सेविंग्स बैंक अकाउंट या फिर जन-धन अकाउंट की पासपोर्ट और आधार नंबर होना चाहिए। उम्र 18 साल से कम और 40 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। पहले से केंद्र सरकार की किसी अन्य पेंशन स्कीम का फायदा नहीं उठाया रहा हो। क्या हैं शर्तें? अपने हिस्से का योगदान (किश्त) करने में चूक होने पर पात्र सदस्य को ब्याज के साथ बकाए का भुगतान करके कंट्रीब्यूशन को फिर शुरू कर सकेंगे। यह ब्याज सरकार तय करेगी। योजना से जुड़ने की तारीख से 10 साल के अंदर स्कीम से निकलना चाहें तो तो केवल आपके हिस्से का योगदान सेविंग बैंक की ब्याज दर पर उसे लौटाया जाएगा। अगर पेंशनभोगी स्कीम से 10 साल बाद लेकिन 60 साल की उम्र से पहले निकलता है तो उसे पेंशन स्कीम में कमाए गए ब्याज के साथ उसके हिस्से का योगदान लौटाया जाएगा। किसी कारण से सदस्य की मौत हो जाने पर जीवनसाथी के पास स्कीम को चलाने का विकल्प होगा। इसके लिए उसे नियमित योगदान करना होगा। इसके अलावा अगर इस योजना के तहत पेंशन पाने वाली की 60 साल के बाद मौत हो जाती हैं तो उसके नॉमिनी को 50% पेंशन मिलेगी। किस उम्र के व्यक्ति को हर महीने देना होगा कितना कॉन्ट्रिब्यूशन? आवेदक की उम्र मंथली कॉन्ट्रिब्यूशन 18 साल 55 रुपए 19 साल 58 रुपए 20 साल 61 रुपए 21 साल 64 रुपए 22 साल 68 रुपए 23 साल 72 रुपए 24 साल 76 रुपए 25 साल 80 रुपए 26 साल 85 रुपए 27 साल 90 रुपए 28 साल 95 रुपए 29 साल 100 रुपए 30 साल 105 रुपए 31 साल 110 रुपए 32 साल 120 रुपए 33 साल 130 रुपए 34 साल 140 रुपए 35 साल 150 रुपए 36 साल 160 रुपए 37 साल 170 रुपए 38 साल 180 रुपए 39 साल 190 रुपए 40 साल 200 रुपए इस योजना में शामिल होने के लिए कौन पात्र नहीं हैं? इस योजना के तहत कोई भी कर्मचारी जो किसी भी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना जैसे NPS, ESIC और EPFO के अंतर्गत आता हो, उसे इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। इसके अलावा इनकम टैक्स के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर्स को भी इस योजना में शामिल नहीं किया गया है। कैसे ले सकते हैं योजना का लाभ? प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पेंशन योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) सेंटर पर जाना होगा। इसके बाद वहां आधार कार्ड और बचत खाता या जनधन खाता जो भी उसकी जानकारी देनी होगी। खाता खोलते समय ही आप नॉमिनी भी दर्ज करा सकते हैं। एक बार आपकी डिटेल कंप्यूटर में दर्ज होने के बाद मंथली कांट्रीब्यूशन की जानकारी खुद मिल जाएगी। इसके बाद आपको अपना शुरुआती योगदान कैश के रूप में देना होगा। इसके बाद आपका खाता खुल जाएगा और श्रम योगी कार्ड मिल जाएगा। आप इस योजना की जानकारी 1800 267 6888 टोल फ्री नंबर पर ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

PM Shram Yogi Mandhan: Rs 55 Mein 3000 Pension

PM Shram Yogi Mandhan: Rs 55 Mein 3000 Pension

नई दिल्ली22 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार देश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिक को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए ‘प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना’ चलाई जा रही है। इस स्कीम में 60 साल के बाद हर महीने 3000 रुपए पेंशन मिलती है। इसके जरिए बुढ़ापे में मासिक आय का सोर्स बन सकता है। हम आपको इस योजना के बारे में बता रहें हैं… हर महीने 3 हजार रुपए की पेंशन का फायदा इस स्कीम में मजदूरों को हर महीने 3000 रुपए की पेंशन का फायदा मिलता है। इसमें रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, कंस्ट्रक्शन क्षेत्र और ऐसे ही असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर शामिल होते हैं। अगर आप भी असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं और अब तक कोई पेंशन प्लान नहीं लिया है तो प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना का प्लान ले सकते हैं। इस योजना के तहत किसे मिलेगी पेंशन? ये योजना असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए है। इनमें घर में काम करने वाले, रेहड़ी लगाने वाले दुकानदार, ड्राइवर, प्लम्बर, दर्जी, मिड-डे मील वर्कर, रिक्शा चालक, निर्माण कार्य करने वाले मजदूर, कूड़ा बीनने वाले, बीड़ी बनाने वाले, हथकरघा, कृषि कामगार, मोची, धोबी, चमड़ा कामगार को शामिल किया गया है। पूरी लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें क्या हैं नियम: योजना के लिए असंगठित क्षेत्र के मजदूर की इनकम 15,000 रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। सेविंग्स बैंक अकाउंट या फिर जन-धन अकाउंट की पासपोर्ट और आधार नंबर होना चाहिए। उम्र 18 साल से कम और 40 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। पहले से केंद्र सरकार की किसी अन्य पेंशन स्कीम का फायदा नहीं उठाया रहा हो। क्या हैं शर्तें? अपने हिस्से का योगदान (किश्त) करने में चूक होने पर पात्र सदस्य को ब्याज के साथ बकाए का भुगतान करके कंट्रीब्यूशन को फिर शुरू कर सकेंगे। यह ब्याज सरकार तय करेगी। योजना से जुड़ने की तारीख से 10 साल के अंदर स्कीम से निकलना चाहें तो तो केवल आपके हिस्से का योगदान सेविंग बैंक की ब्याज दर पर उसे लौटाया जाएगा। अगर पेंशनभोगी स्कीम से 10 साल बाद लेकिन 60 साल की उम्र से पहले निकलता है तो उसे पेंशन स्कीम में कमाए गए ब्याज के साथ उसके हिस्से का योगदान लौटाया जाएगा। किसी कारण से सदस्य की मौत हो जाने पर जीवनसाथी के पास स्कीम को चलाने का विकल्प होगा। इसके लिए उसे नियमित योगदान करना होगा। इसके अलावा अगर इस योजना के तहत पेंशन पाने वाली की 60 साल के बाद मौत हो जाती हैं तो उसके नॉमिनी को 50% पेंशन मिलेगी। किस उम्र के व्यक्ति को हर महीने देना होगा कितना कॉन्ट्रिब्यूशन? आवेदक की उम्र मंथली कॉन्ट्रिब्यूशन 18 साल 55 रुपए 19 साल 58 रुपए 20 साल 61 रुपए 21 साल 64 रुपए 22 साल 68 रुपए 23 साल 72 रुपए 24 साल 76 रुपए 25 साल 80 रुपए 26 साल 85 रुपए 27 साल 90 रुपए 28 साल 95 रुपए 29 साल 100 रुपए 30 साल 105 रुपए 31 साल 110 रुपए 32 साल 120 रुपए 33 साल 130 रुपए 34 साल 140 रुपए 35 साल 150 रुपए 36 साल 160 रुपए 37 साल 170 रुपए 38 साल 180 रुपए 39 साल 190 रुपए 40 साल 200 रुपए इस योजना में शामिल होने के लिए कौन पात्र नहीं हैं? इस योजना के तहत कोई भी कर्मचारी जो किसी भी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना जैसे NPS, ESIC और EPFO के अंतर्गत आता हो, उसे इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। इसके अलावा इनकम टैक्स के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर्स को भी इस योजना में शामिल नहीं किया गया है। कैसे ले सकते हैं योजना का लाभ? प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पेंशन योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) सेंटर पर जाना होगा। इसके बाद वहां आधार कार्ड और बचत खाता या जनधन खाता जो भी उसकी जानकारी देनी होगी। खाता खोलते समय ही आप नॉमिनी भी दर्ज करा सकते हैं। एक बार आपकी डिटेल कंप्यूटर में दर्ज होने के बाद मंथली कांट्रीब्यूशन की जानकारी खुद मिल जाएगी। इसके बाद आपको अपना शुरुआती योगदान कैश के रूप में देना होगा। इसके बाद आपका खाता खुल जाएगा और श्रम योगी कार्ड मिल जाएगा। आप इस योजना की जानकारी 1800 267 6888 टोल फ्री नंबर पर ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

SC on Religious Practices: Hundreds of Cases, Societal Impact

SC on Religious Practices: Hundreds of Cases, Societal Impact

Hindi News National SC On Religious Practices: Hundreds Of Cases, Societal Impact | Sabarimala नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर लोग धार्मिक प्रथाओं और धर्म के मामलों को संवैधानिक अदालत में चुनौती देने लगेंगे, तो इससे धर्म और सभ्यता पर असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे सैकड़ों याचिकाएं आएंगी और हर रिवाज पर सवाल उठने लगेंगे। यह टिप्पणी नौ जजों की संविधान पीठ ने की, जो अलग-अलग धर्मों में धार्मिक आजादी के दायरे और महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। इसमें केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़ा मामला और दाऊदी बोहरा समुदाय का केस भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 40 साल पुरानी जनहित याचिका (PIL) की वैधता पर सवाल उठाए थे। 7 सवाल, जिन पर बहस हो रही… जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर हर व्यक्ति धार्मिक प्रथाओं पर सवाल उठाएगा, तो भारतीय समाज पर असर पड़ेगा, क्योंकि यहां धर्म समाज से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा, हर अधिकार पर सवाल उठेंगे-मंदिर खुलने या बंद होने तक के मामले कोर्ट में आएंगे। जस्टिस एम एम सुन्द्रेश ने कहा कि अगर ऐसे विवादों को लगातार अनुमति दी गई, तो हर व्यक्ति हर चीज पर सवाल उठाएगा। उन्होंने कहा कि इससे धर्म टूट सकते हैं और संवैधानिक अदालतों पर भी असर पड़ेगा। मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा यह मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा है। समुदाय के केंद्रीय बोर्ड ने 1986 में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें 1962 के फैसले को चुनौती दी गई थी। उस फैसले में बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 रद्द कर दिया गया था। इस कानून के तहत किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना गैरकानूनी था। 1962 के फैसले में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना, समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन का हिस्सा है। इसलिए 1949 का कानून संविधान के अनुच्छेद 26(बी) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है। धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं सुधारवादी दाऊदी बोहरा समूह की ओर से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कोर्ट में दलील दी कि अगर कोई प्रथा सामाजिक या निजी कारणों से जुड़ी है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रथा अगर मौलिक अधिकारों पर नकारात्मक असर डालती है, तो उसे सीमित किया जा सकता है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं-क्या यह समुदाय के भीतर होना चाहिए या राज्य या कोर्ट को दखल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और सभ्यता से है, और धर्म इसमें एक स्थायी तत्व है। इसे तोड़ना सही नहीं होगा। सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी 21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं 22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं 23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं 28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते 29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे 5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें 6 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते ——————————————————————- ये खबर भी पढ़ें: सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते:बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

SC on Religious Practices: Hundreds of Cases, Societal Impact

SC on Religious Practices: Hundreds of Cases, Societal Impact

Hindi News National SC On Religious Practices: Hundreds Of Cases, Societal Impact | Sabarimala नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर लोग धार्मिक प्रथाओं और धर्म के मामलों को संवैधानिक अदालत में चुनौती देने लगेंगे, तो इससे धर्म और सभ्यता पर असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे सैकड़ों याचिकाएं आएंगी और हर रिवाज पर सवाल उठने लगेंगे। यह टिप्पणी नौ जजों की संविधान पीठ ने की, जो अलग-अलग धर्मों में धार्मिक आजादी के दायरे और महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। इसमें केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़ा मामला और दाऊदी बोहरा समुदाय का केस भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 40 साल पुरानी जनहित याचिका (PIL) की वैधता पर सवाल उठाए थे। 7 सवाल, जिन पर बहस हो रही… जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अगर हर व्यक्ति धार्मिक प्रथाओं पर सवाल उठाएगा, तो भारतीय समाज पर असर पड़ेगा, क्योंकि यहां धर्म समाज से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा, हर अधिकार पर सवाल उठेंगे-मंदिर खुलने या बंद होने तक के मामले कोर्ट में आएंगे। जस्टिस एम एम सुन्द्रेश ने कहा कि अगर ऐसे विवादों को लगातार अनुमति दी गई, तो हर व्यक्ति हर चीज पर सवाल उठाएगा। उन्होंने कहा कि इससे धर्म टूट सकते हैं और संवैधानिक अदालतों पर भी असर पड़ेगा। मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा यह मामला दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा है। समुदाय के केंद्रीय बोर्ड ने 1986 में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें 1962 के फैसले को चुनौती दी गई थी। उस फैसले में बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 रद्द कर दिया गया था। इस कानून के तहत किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना गैरकानूनी था। 1962 के फैसले में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर किसी सदस्य को समुदाय से बाहर करना, समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन का हिस्सा है। इसलिए 1949 का कानून संविधान के अनुच्छेद 26(बी) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है। धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं सुधारवादी दाऊदी बोहरा समूह की ओर से वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने कोर्ट में दलील दी कि अगर कोई प्रथा सामाजिक या निजी कारणों से जुड़ी है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रथा अगर मौलिक अधिकारों पर नकारात्मक असर डालती है, तो उसे सीमित किया जा सकता है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि धार्मिक प्रथाओं पर सवाल कहां और कैसे उठाए जाएं-क्या यह समुदाय के भीतर होना चाहिए या राज्य या कोर्ट को दखल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और सभ्यता से है, और धर्म इसमें एक स्थायी तत्व है। इसे तोड़ना सही नहीं होगा। सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी 21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं 22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं 23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं 28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते 29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे 5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें 6 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते ——————————————————————- ये खबर भी पढ़ें: सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते:बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Health Tips: आम के साथ दूध, दही या पानी, क्या नहीं मिलाना चाहिए? जानें क्या कहता है आयुर्वेद

authorimg

Last Updated:May 07, 2026, 14:54 IST आयुर्वेद के अनुसार आम के साथ दूध, दही या तुरंत ठंडा पानी मिलाना पाचन के लिए सही नहीं माना जाता. इससे गैस, एसिडिटी और पाचन कमजोरी की समस्या हो सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है. आइए विस्तार से जानते हैं. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही आम का सीजन भी आ जाता है. इस दौरान लोग आम को अलग-अलग रूपों में खाना पसंद करते हैं, खासकर मैंगो शेक, आम की लस्सी और ठंडे ड्रिंक के रूप में इसका खूब सेवन किया जाता है. लेकिन सवाल यह है कि क्या आम के साथ दूध, दही या पानी मिलाना सही होता है या नहीं. आयुर्वेद इस बारे में क्या कहता है, आइए विस्तार से जानते हैं. Jiva Ayurveda के अनुसार, आयुर्वेद में खाने-पीने के संयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बताया गया है, जिसे विरुद्ध आहार कहा जाता है. इसके अनुसार कुछ ऐसे फूड कॉम्बिनेशन होते हैं जो अलग-अलग तो फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन साथ में लेने पर शरीर के दोष यानी वात, पित्त और कफ को असंतुलित कर सकते हैं. इससे पाचन कमजोर हो सकता है और शरीर में विषैले तत्व यानी आम बनने की संभावना बढ़ जाती है. यही कारण है कि कुछ कॉम्बिनेशन को आयुर्वेद में हानिकारक माना गया है. आम और दूध का कॉम्बिनेशनमैंगो मिल्कशेक, भारत में काफी लोकप्रिय है. लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह संयोजन हर स्थिति में सही नहीं माना जाता. खासकर जब आम कच्चा या अधपका हो तो इसका स्वाद खट्टा और गर्म प्रकृति का होता है, जबकि दूध ठंडी और मीठी प्रकृति का होता है. दोनों के गुण एक-दूसरे से मेल नहीं खाते, जिससे पाचन अग्नि यानी अग्नि कमजोर हो सकती है. इससे शरीर में गैस, भारीपन, एसिडिटी और लंबे समय में टॉक्सिन्स बनने की समस्या हो सकती है. हालांकि पूरी तरह पके और मीठे आम के साथ यह संयोजन अपेक्षाकृत कम हानिकारक माना जाता है, लेकिन फिर भी सावधानी रखने की सलाह दी जाती है. आम और दहीइसी तरह आम के साथ दही का सेवन भी आयुर्वेद में सही नहीं माना गया है. दही की तासीर अलग होती है और आम की अलग. दोनों मिलकर शरीर में दोषों का असंतुलन पैदा कर सकते हैं. इससे पाचन संबंधी समस्याएं, त्वचा पर रिएक्शन, एलर्जी और कुछ मामलों में सांस से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं. खासकर जिन लोगों को पहले से ही एसिडिटी या पेट फूलने की समस्या रहती है, उन्हें ऐसे कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए. आम के बाद तुरंत ठंडा पानी पीनाआम के बाद तुरंत ठंडा पानी पीना भी एक आम आदत है, जिसे आयुर्वेद में सही नहीं माना जाता. ठंडा पानी पाचन रसों को कमजोर कर देता है, जिससे आम जैसे भारी और रसीले फल का पाचन ठीक से नहीं हो पाता. इससे किण्वन जैसी प्रक्रिया शुरू हो सकती है और पेट में भारीपन या गैस की समस्या हो सकती है. इसलिए सलाह दी जाती है कि आम खाने के बाद कम से कम 30 से 45 मिनट का अंतर रखें और ठंडे पानी की बजाय सामान्य या गुनगुने पानी का सेवन करें. सबसे जरूरी बातआयुर्वेद किसी को भी मैंगो शेक छोड़ने के लिए मजबूर नहीं कर रहा है, बल्कि एक सवाल पूछ रहा है कि क्या इसे खाने के बाद आपका पाचन आरामदायक रहता है. अगर आपके किसी फेवरेट समर फूड कॉम्बिनेशन को लेने के बाद पेट फूलना, भारीपन या एसिडिटी महसूस हो रहा है, तो ऐसा संकेत हो सकता है कि यह फूड कॉम्बिनेशन आपके लिए सही नहीं है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi

Health Tips: क्या गर्मी में हद से ज्यादा पसीना आना बुरा है? यह बीमारी का है संकेत या सेहत की निशानी, जानिए डिटेल

perfGogleBtn

Last Updated:May 07, 2026, 14:37 IST Excess Sweating good or Bad: गर्मी के मौसम में पसीना आना आम बात है. भीषण गर्मी में जैसे ही लोग बाहर निकलते हैं या ज्यादा मेहनत करते हैं उन्हें बहुत तेज पसीना आता है. कुछ लोगों को हद से ज्यादा पसीना निकलता है. ऐसे में सोशल मीडिया पर यह फैलाया जा रहा है कि ज्यादा पसीना आना नुकसानदेह है. पर असली सवाल यह है कि क्या सच में ज्यादा पसीना आना बुरा है या यह हेल्दीपन का संकेत है. यदि आप भी कंफ्यूज हैं तो इस खबर को जरूर पढ़ें. जैसे ही गर्मी बढ़ती है या हम वर्कआउट करते हैं, पसीना हमारे कपड़ों को भिगो देता है.इससे हमें इरीटेशन होने लगता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर पसीना न आए तो क्या होगा? पसीना आना असल में हमारे शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम है. यह न केवल हमारे शरीर के अंदर के तापमान को नियंत्रित करता है बल्कि अंदर जमी गंदगी को भी बाहर फेंकता है. इसलिए यह बात दिमाग से निकाल लीजिए कि ज्यादा पसीना आना नुकसानदेह है. किसी भी तरह से ज्यादा पसीना आना नुकसानदेह नहीं है. डॉक्टरों के अनुसार पसीना आपकी त्वचा को साफ करने से लेकर आपके मानसिक तनाव को कम करने तक में मदद करता है. एक्सपर्ट के मुताबिक धूप में पसीना आना बिल्कुल सामान्य है. बहुत लोग सोचते हैं कि पसीना आना सेहत के लिए खराब है. लेकिन पसीना हमारे शरीर को अंदर से और गर्मी से बचाता है, ये बात बहुत लोगों को पता नहीं होती. पसीना हमारे शरीर को ठंडा रखने का कमाल का तरीका है और ये हमें सुरक्षित रखने के लिए लगातार काम करता है. यह प्रक्रिया सिर्फ पानी निकालने की नहीं है, बल्कि शरीर को बचाने के लिए जरूरी एक जैविक प्रतिक्रिया है. तो चलिए जानते हैं पसीना आने से क्या-क्या फायदे होते हैं. असल में पसीना आना शरीर की एक प्राकृतिक ठंडा करने की प्रक्रिया है, जिसे वैज्ञानिक तौर पर थर्मोरेगुलेशन कहा जाता है. हमारे शरीर का अंदरूनी तापमान आमतौर पर करीब 98.6°F (37°C) होना चाहिए.

फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

बॉबी देओल की अपकमिंग फिल्म बंदर का टीजर जारी हो चुका है। 1 मिनट 29 सेकंड के टीजर में बॉबी देओल समर नाम के पहचान खो रहे एक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी एक केस से हमेशा के लिए बदल जाती है। कैसा है फिल्म का टीजर टीजर की शुरुआत 70 के दशक के डिस्को अवतार से रिमैजिन रेट्रो स्टाइल सॉन्ग ‘कम ऑन बेबी, दिल किसको देगी’ से होती है। इसके बाद बॉबी देओल के किरदार का परिचय होता है। बॉबी ने समर नाम के एक ऐसे एक्टर का किरदार निभाया है, जो किसी जमाने में स्टार था और अब पहचान बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बदलते दौर में अब समर शादियों में परफॉर्म करता है, जिसके बाद एक-एक कर फिल्म के दूसरें किरदारों का परिचय होता है। सबा आजाद ने फिल्म में बॉबी देओल की डेट का रोल निभाया है। सपना पब्बी उनकी एक्स के रोल में है। टीजर में ट्विस्ट तब आता है जब एक रोज अचानक समर की गिरफ्तारी होती है। टीजर में कुछ जेल सीन और कोर्ट के सीन भी शामिल किए गए हैं। फिल्म की कहानी समर के इर्द-गिर्द है, जो संगीन आरोप लगने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की मशक्कत करता है। यहां से जो सामने आता है, वो उस कहानी की झलक है जो शुरुआत में दिखने वाली चीजों से कहीं ज्यादा बड़ी और उलझी हुई है। इस फिल्म को देव डी, ब्लैक फ्राइडे, अगली और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया है। ये बॉबी और अनुराग की पहली फिल्म है। फिल्म में बॉबी देओल, सपना पब्बी, सबा आजाद के अलावा सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी और रिद्धी सेन जैसे एक्टर्स भी हैं। असल घटना पर आधारित है फिल्म बंदर फिल्म बंदर भारत में हुई एक असल घटना पर आधारित है। फिल्म का लेखन सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर किया है, जो पाताल लोक, कोहरा और उड़ता पंजाब जैसी बेहतरीन कहानियों के पीछे की मशहूर जोड़ी है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और निखिल द्विवेदी की ‘सैफरन मैजिकवर्क्स’ के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म जी स्टूडियोज के सपोर्ट के साथ 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

बॉबी देओल की अपकमिंग फिल्म बंदर का टीजर जारी हो चुका है। 1 मिनट 29 सेकंड के टीजर में बॉबी देओल समर नाम के पहचान खो रहे एक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी एक केस से हमेशा के लिए बदल जाती है। कैसा है फिल्म का टीजर टीजर की शुरुआत 70 के दशक के डिस्को अवतार से रिमैजिन रेट्रो स्टाइल सॉन्ग ‘कम ऑन बेबी, दिल किसको देगी’ से होती है। इसके बाद बॉबी देओल के किरदार का परिचय होता है। बॉबी ने समर नाम के एक ऐसे एक्टर का किरदार निभाया है, जो किसी जमाने में स्टार था और अब पहचान बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बदलते दौर में अब समर शादियों में परफॉर्म करता है, जिसके बाद एक-एक कर फिल्म के दूसरें किरदारों का परिचय होता है। सबा आजाद ने फिल्म में बॉबी देओल की डेट का रोल निभाया है। सपना पब्बी उनकी एक्स के रोल में है। टीजर में ट्विस्ट तब आता है जब एक रोज अचानक समर की गिरफ्तारी होती है। टीजर में कुछ जेल सीन और कोर्ट के सीन भी शामिल किए गए हैं। फिल्म की कहानी समर के इर्द-गिर्द है, जो संगीन आरोप लगने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की मशक्कत करता है। यहां से जो सामने आता है, वो उस कहानी की झलक है जो शुरुआत में दिखने वाली चीजों से कहीं ज्यादा बड़ी और उलझी हुई है। इस फिल्म को देव डी, ब्लैक फ्राइडे, अगली और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया है। ये बॉबी और अनुराग की पहली फिल्म है। फिल्म में बॉबी देओल, सपना पब्बी, सबा आजाद के अलावा सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी और रिद्धी सेन जैसे एक्टर्स भी हैं। असल घटना पर आधारित है फिल्म बंदर फिल्म बंदर भारत में हुई एक असल घटना पर आधारित है। फिल्म का लेखन सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर किया है, जो पाताल लोक, कोहरा और उड़ता पंजाब जैसी बेहतरीन कहानियों के पीछे की मशहूर जोड़ी है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और निखिल द्विवेदी की ‘सैफरन मैजिकवर्क्स’ के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म जी स्टूडियोज के सपोर्ट के साथ 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

लव-कुश, ईबीसी और नीतीश कुमार की छाप: कैसे नया बिहार मंत्रिमंडल जातिगत अंकगणित पर काम कर रहा है | भारत समाचार

CBSE 12th results 2026 soon on results.cbse.nic.in, DigiLocker. (File/Representative Image)

आखरी अपडेट:07 मई, 2026, 14:06 IST नई एनडीए कैबिनेट चुनाव के बाद भी जारी रहने वाले सोशल-इंजीनियरिंग फॉर्मूले का पर्याप्त संकेत देती है, जहां विभिन्न ईबीसी-ओबीसी-दलित-फॉरवर्ड जाति संयोजन एक साथ आ रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक समारोह में कैबिनेट का विस्तार किया जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा प्रमुख नितिन नबीन सहित अन्य लोग शामिल हुए। (एक्स) गुरुवार को निशांत कुमार ने आखिरकार अपनी अनिच्छा छोड़ दी और बिहार कैबिनेट में शामिल हो गए. गुरुवार को नीतीश कुमार के बेटे सम्राट चौधरी कैबिनेट में शपथ ली, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लग गया. नए प्रवेशी के अलावा, सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल पर उस जाति संयोजन पर भी करीब से नजर रखी जा रही है जिसे नए मुख्यमंत्री आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। लव-कुश मॉडल कैबिनेट विस्तार में लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) आधार का मजबूत होना स्पष्ट है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुर्मी थे, जबकि चौधरी कोइरी-कुशवाहा हैं। मुख्यमंत्री के अलावा एनडीए सहयोगियों में कैबिनेट में चार कुर्मी-कोइरी मंत्री हैं- निशांत कुमार, श्रवण कुमार, जेडी (यू) से भगवान सिंह खुशवाहा और आरएलएम से दीपक प्रकाश। हालाँकि, चौधरी सरकार ने भी नीतीश कुमार की तरह ही ईबीसी प्रतिनिधित्व पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है। केदार गुप्ता (कानू), रामा निषाद (मल्लाह), दिलीप जयसवाल और शीला मंडल (धानुक) जैसे नामों के साथ, कैबिनेट का लक्ष्य “मूक मतदाताओं” की आकांक्षाओं को पूरा करना है जो बिहार की आबादी का लगभग 36 प्रतिशत हैं। दलित-फॉरवर्ड संतुलन अधिनियम एनडीए 2.0 में जातिगत गतिशीलता को ठीक करते समय महादलित और पासवान वोट बैंक दोनों को ध्यान में रखा गया है। कैबिनेट में अशोक चौधरी, रत्नेश सदा और संतोष मांझी (HAM) जैसे प्रमुख चेहरों का लक्ष्य दलितों के व्यापक स्पेक्ट्रम का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। लखेंद्र पासवान और संजय पासवान (एलजेपी-आर) जैसे नेताओं को लाकर पासवान फैक्टर का भी हिसाब लगाया गया है। लेकिन भाजपा के पारंपरिक वोट आधार-अगड़ी जातियों-को भी ध्यान में रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई “प्रतिक्रिया” न हो जैसा कि यूजीसी अधिसूचना के बाद देखा गया था। विजय कुमार सिन्हा और नीतीश मिश्रा भूमियार और ब्राह्मणों के पारंपरिक भाजपा कोर का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि संजय टाइगर और श्रेयसी सिंह का समावेश राजपूत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है। अल्पसंख्यक चेहरा जेडीयू कोटे से जमा खान को शामिल करने का मकसद नीतीश कुमार के धर्मनिरपेक्ष चेहरे को जिंदा रखना है. जेडीयू ने कहा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का मतलब यह नहीं होगा कि बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका खत्म हो जाएगी। भाजपा के मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में एक दुर्लभ मुस्लिम चेहरे को सुनिश्चित करना उस संदेश को रेखांकित करना है। कुल मिलाकर, नई एनडीए कैबिनेट चुनाव के बाद जारी रहने वाले सामाजिक-इंजीनियरिंग फॉर्मूले का पर्याप्त संकेत देती है, जहां विभिन्न ईबीसी-ओबीसी-दलित-अगड़ी जाति के संयोजन का एक साथ आना राजद के मुस्लिम-यादव (एमवाई) संयोजन के लिए सीधी चुनौती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया लव-कुश, ईबीसी और नीतीश कुमार की छाप: कैसे नया बिहार मंत्रिमंडल जातिगत अंकगणित पर काम कर रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार कैबिनेट जाति की राजनीति(टी)बिहार एनडीए सरकार(टी)सम्राट चौधरी कैबिनेट(टी)निशांत कुमार शपथ(टी)लव-कुश मॉडल(टी)ईबीसी प्रतिनिधित्व बिहार(टी)दलित वोट बैंक(टी)पासवान समुदाय की राजनीति

Players are improving their performance with the ‘Batman Effect’

Players are improving their performance with the 'Batman Effect'

Hindi News Sports Players Are Improving Their Performance With The ‘Batman Effect’ रस्टिन डॉड. द न्यूयॉर्क टाइम्स15 मिनट पहले कॉपी लिंक विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका हमारे दिमाग को नई दिशा देता है। जब हम खुद को किसी मजबूत, आत्मविश्वासी व्यक्ति की तरह देखते हैं, तो हमारा व्यवहार भी वैसा ही होने लगता है। आज की तेज और प्रतिस्पर्धी दुनिया में सफलता सिर्फ प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। इसी मानसिक मजबूती के लिए खेल की दुनिया में एक दिलचस्प तरीका सामने आया है- ‘ऑल्टर ईगो’, यानी खुद को कुछ समय के लिए किसी और के रूप में देखना और उसी तरह व्यवहार करना। यह तरीका न सिर्फ खिलाड़ियों, बल्कि आम लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। एनबीए के स्टार खिलाड़ी शाई गिलगेयस-अलेक्जेंडर की कहानी इसका बेहतरीन उदाहरण है। जब वे 13 साल के थे, तब उनकी सबसे बड़ी समस्या थी उनकी कम हाइट। करीब 5 फुट 6 इंच के इस खिलाड़ी को उनके कोच ने एक अनोखी सलाह दी कि खुद को स्टार एलन आइवरसन की तरह सोचो और खेलो। शुरुआत में यह सिर्फ एक खेल जैसा लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी ताकत बन गया। उन्होंने डरना छोड़ दिया और आत्मविश्वास के साथ खेलना शुरू किया। यह सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि विज्ञान भी इसे सही ठहराता है। मनोवैज्ञानिकों ने एक प्रयोग में बच्चों को अलग-अलग तरीकों से काम करने को कहा। कुछ बच्चों ने खुद के बारे में सोचा, कुछ ने अपने नाम से खुद को देखा, और कुछ बच्चों को बैटमैन या डोरा बनने का मौका दिया गया। नतीजा चौंकाने वाला था, जो बच्चे किरदार में थे, उन्होंने सबसे ज्यादा मेहनत की। इस प्रयोग को ‘बैटमैन इफेक्ट’ कहा गया। दरअसल, जब हम खुद से दूरी बनाकर किसी और की तरह सोचते हैं, तो डर और झिझक कम हो जाती है। यही कारण है कि कई बड़े खिलाड़ी इस टेक्निक का इस्तेमाल करते हैं। महान बास्केटबॉल खिलाड़ी कोबे ब्रायंट ने अपने लिए ‘ब्लैक मांबा’ नाम का किरदार बनाया था। इस किरदार में वे खुद को ज्यादा फोकस्ड और आक्रामक महसूस करते थे। इसी तरह पूर्व बास्केटबॉल खिलाड़ी स्टीव केर ने भी खुद को किसी और खिलाड़ी की तरह सोचकर खेला, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका हमारे दिमाग को नई दिशा देता है। जब हम खुद को किसी मजबूत, आत्मविश्वासी व्यक्ति की तरह देखते हैं, तो हमारा व्यवहार भी वैसा ही होने लगता है। धीरे-धीरे यह आदत असली जिंदगी में भी असर दिखाने लगती है। परीक्षा और इंटरव्यू में भी काम आता है यह तरीका यह तरीका सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं है। अगर कोई छात्र परीक्षा से डरता है, तो वह खुद को एक आत्मविश्वासी छात्र के रूप में देख सकता है। अगर कोई व्यक्ति इंटरव्यू में घबराता है, तो वह खुद को एक सफल प्रोफेशनल की तरह सोच सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔