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Players are improving their performance with the ‘Batman Effect’

Players are improving their performance with the 'Batman Effect'
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रस्टिन डॉड. द न्यूयॉर्क टाइम्स15 मिनट पहले

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका हमारे दिमाग को नई दिशा देता है। जब हम खुद को किसी मजबूत, आत्मविश्वासी व्यक्ति की तरह देखते हैं, तो हमारा व्यवहार भी वैसा ही होने लगता है।

आज की तेज और प्रतिस्पर्धी दुनिया में सफलता सिर्फ प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। इसी मानसिक मजबूती के लिए खेल की दुनिया में एक दिलचस्प तरीका सामने आया है- ‘ऑल्टर ईगो’, यानी खुद को कुछ समय के लिए किसी और के रूप में देखना और उसी तरह व्यवहार करना। यह तरीका न सिर्फ खिलाड़ियों, बल्कि आम लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है।

एनबीए के स्टार खिलाड़ी शाई गिलगेयस-अलेक्जेंडर की कहानी इसका बेहतरीन उदाहरण है। जब वे 13 साल के थे, तब उनकी सबसे बड़ी समस्या थी उनकी कम हाइट। करीब 5 फुट 6 इंच के इस खिलाड़ी को उनके कोच ने एक अनोखी सलाह दी कि खुद को स्टार एलन आइवरसन की तरह सोचो और खेलो। शुरुआत में यह सिर्फ एक खेल जैसा लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी ताकत बन गया। उन्होंने डरना छोड़ दिया और आत्मविश्वास के साथ खेलना शुरू किया।

यह सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि विज्ञान भी इसे सही ठहराता है। मनोवैज्ञानिकों ने एक प्रयोग में बच्चों को अलग-अलग तरीकों से काम करने को कहा। कुछ बच्चों ने खुद के बारे में सोचा, कुछ ने अपने नाम से खुद को देखा, और कुछ बच्चों को बैटमैन या डोरा बनने का मौका दिया गया। नतीजा चौंकाने वाला था, जो बच्चे किरदार में थे, उन्होंने सबसे ज्यादा मेहनत की। इस प्रयोग को ‘बैटमैन इफेक्ट’ कहा गया।

दरअसल, जब हम खुद से दूरी बनाकर किसी और की तरह सोचते हैं, तो डर और झिझक कम हो जाती है। यही कारण है कि कई बड़े खिलाड़ी इस टेक्निक का इस्तेमाल करते हैं। महान बास्केटबॉल खिलाड़ी कोबे ब्रायंट ने अपने लिए ‘ब्लैक मांबा’ नाम का किरदार बनाया था। इस किरदार में वे खुद को ज्यादा फोकस्ड और आक्रामक महसूस करते थे। इसी तरह पूर्व बास्केटबॉल खिलाड़ी स्टीव केर ने भी खुद को किसी और खिलाड़ी की तरह सोचकर खेला, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका हमारे दिमाग को नई दिशा देता है। जब हम खुद को किसी मजबूत, आत्मविश्वासी व्यक्ति की तरह देखते हैं, तो हमारा व्यवहार भी वैसा ही होने लगता है। धीरे-धीरे यह आदत असली जिंदगी में भी असर दिखाने लगती है।

परीक्षा और इंटरव्यू में भी काम आता है यह तरीका

यह तरीका सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं है। अगर कोई छात्र परीक्षा से डरता है, तो वह खुद को एक आत्मविश्वासी छात्र के रूप में देख सकता है। अगर कोई व्यक्ति इंटरव्यू में घबराता है, तो वह खुद को एक सफल प्रोफेशनल की तरह सोच सकता है।

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रस्टिन डॉड. द न्यूयॉर्क टाइम्स15 मिनट पहले

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका हमारे दिमाग को नई दिशा देता है। जब हम खुद को किसी मजबूत, आत्मविश्वासी व्यक्ति की तरह देखते हैं, तो हमारा व्यवहार भी वैसा ही होने लगता है।

आज की तेज और प्रतिस्पर्धी दुनिया में सफलता सिर्फ प्रतिभा से नहीं मिलती, बल्कि मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। इसी मानसिक मजबूती के लिए खेल की दुनिया में एक दिलचस्प तरीका सामने आया है- ‘ऑल्टर ईगो’, यानी खुद को कुछ समय के लिए किसी और के रूप में देखना और उसी तरह व्यवहार करना। यह तरीका न सिर्फ खिलाड़ियों, बल्कि आम लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है।

एनबीए के स्टार खिलाड़ी शाई गिलगेयस-अलेक्जेंडर की कहानी इसका बेहतरीन उदाहरण है। जब वे 13 साल के थे, तब उनकी सबसे बड़ी समस्या थी उनकी कम हाइट। करीब 5 फुट 6 इंच के इस खिलाड़ी को उनके कोच ने एक अनोखी सलाह दी कि खुद को स्टार एलन आइवरसन की तरह सोचो और खेलो। शुरुआत में यह सिर्फ एक खेल जैसा लगा, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी ताकत बन गया। उन्होंने डरना छोड़ दिया और आत्मविश्वास के साथ खेलना शुरू किया।

यह सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि विज्ञान भी इसे सही ठहराता है। मनोवैज्ञानिकों ने एक प्रयोग में बच्चों को अलग-अलग तरीकों से काम करने को कहा। कुछ बच्चों ने खुद के बारे में सोचा, कुछ ने अपने नाम से खुद को देखा, और कुछ बच्चों को बैटमैन या डोरा बनने का मौका दिया गया। नतीजा चौंकाने वाला था, जो बच्चे किरदार में थे, उन्होंने सबसे ज्यादा मेहनत की। इस प्रयोग को ‘बैटमैन इफेक्ट’ कहा गया।

दरअसल, जब हम खुद से दूरी बनाकर किसी और की तरह सोचते हैं, तो डर और झिझक कम हो जाती है। यही कारण है कि कई बड़े खिलाड़ी इस टेक्निक का इस्तेमाल करते हैं। महान बास्केटबॉल खिलाड़ी कोबे ब्रायंट ने अपने लिए ‘ब्लैक मांबा’ नाम का किरदार बनाया था। इस किरदार में वे खुद को ज्यादा फोकस्ड और आक्रामक महसूस करते थे। इसी तरह पूर्व बास्केटबॉल खिलाड़ी स्टीव केर ने भी खुद को किसी और खिलाड़ी की तरह सोचकर खेला, जिससे आत्मविश्वास बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका हमारे दिमाग को नई दिशा देता है। जब हम खुद को किसी मजबूत, आत्मविश्वासी व्यक्ति की तरह देखते हैं, तो हमारा व्यवहार भी वैसा ही होने लगता है। धीरे-धीरे यह आदत असली जिंदगी में भी असर दिखाने लगती है।

परीक्षा और इंटरव्यू में भी काम आता है यह तरीका

यह तरीका सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं है। अगर कोई छात्र परीक्षा से डरता है, तो वह खुद को एक आत्मविश्वासी छात्र के रूप में देख सकता है। अगर कोई व्यक्ति इंटरव्यू में घबराता है, तो वह खुद को एक सफल प्रोफेशनल की तरह सोच सकता है।

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