शुगरफ्री ड्राई फ्रूट आइसक्रीम रेसिपी: बिना चीनी के घर पर ग्लूकोज़ फ्री आटा आइसक्रीम, चखते ही नाश्ता! बनाना भी है आसान

सामग्री: 2 कप फुल क्रीम दूध, 1 कप ताजा क्रीम, 8-10 बादाम, 8-10 काजू, 6-7 पिस्ता, 4-5 मूंगफली, 8-10 खजूर, 1 छोटा चम्मच इलायची पाउडर, 1 छोटा चम्मच केसर के टुकड़े, 1 छोटा चम्मच वेनिला एसेंस छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले बादाम, काजू, पिस्ता और चॉकलेट को इकोनॉमी काट लें। खजूर को थोड़ी देर गुनगुने दूध में मांगे ताकि वह नर हो जाए। छवि: फ्रीपिक बड़े हुए खजूर को प्लास्टर में प्लास्टर करके तैयार कर लें। येही पेस्टल में कारीगर का काम। एक पैन में दूध के ढांचे पर मध्यम आँचल। छवि: फ्रीपिक जब दूध लिटिल नवजात लागे, टैब में खजूर का होने वाला पेस्ट और अच्छी तरह से शामिल होता है। मिक्सचर को पूरी तरह से ठंडा किया जा रहा है। इसके बाद इसे एयरटाइट में 7-8 घंटे के लिए रेफ्रिजरेटर में रख दें। छवि: एआई जब जमेगी तो इसे बाहर और ऊपर से सीधे डॉक्युमेंट्स डॉक्युमेंट्री सर्व करें। आप चीनी जगह पर इसका इस्तेमाल भी कर सकते हैं। छवि: एआई लो फ़िट दूध और क्रीम का उपयोग करके इसे और चित्र बनाया जा सकता है। बच्चों के लिए इसमें थोड़ा सा चॉकलेट पाउडर भी मिला सकते हैं। छवि: फ्रीपिक यह शुगर फ्री कोचिंग कोचिंग स्वाद और स्वास्थ्य मित्रता का बेहतरीन संयोजन है। इसमें मौजूद डॉक्युमेंट्स बॉडी को स्ट्रैटेजी फ़ुट, प्रोटीन और एनर्जी देते हैं। छवि: फ्रीपिक साथ ही, खजूर के टुकड़े का टुकड़ा इसे पिरामिड डेजर्ट बनाता है। अगर आप भी यह हीट कुछ स्केल और टेस्टी रॉकेट बनाना चाहते हैं, तो घर पर यह आसान शुगर फ्री डॉक्टरी सुपरमार्केट जरूर खरीदें। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)घर पर आइसक्रीम कैसे बनाएं(टी)ड्राई फ्रूट आइसक्रीम(टी)शुगर फ्री आइसक्रीम रेसिपी(टी)ड्राई फ्रूट आइसक्रीम रेसिपी(टी)ग्रीष्मकालीन रेसिपी(टी)कूलिंग रेसिपी(टी)ड्राई डॉलाइक आइसक्रीम
गर्मियों में खाना जल्दी क्यों खराब हो जाता है? क्या होती है इसकी वजह, डॉक्टर से समझ लीजिए

Last Updated:May 07, 2026, 16:01 IST Summer Heat and Food Spoilage: गर्मियों में ज्यादा तापमान और नमी के कारण बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. इससे खाना जल्दी खराब हो जाता है. इसी वजह से गर्मियों में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं. सही स्टोरेज, साफ-सफाई और ताजा खाना खाकर गर्मियों में फूड पॉइजनिंग से बचा जा सकता है. गर्मी में ज्यादा तापमान और नमी के कारण खाना जल्दी खराब हो जाता है. Food Safety Tips in Summer Season: गर्मियों के मौसम में खाना जल्दी खराब हो जाता है. खाने को कई घंटों तक फ्रेश बनाए रखने के लिए इसे फ्रिज में रखना जरूरी होता है. गर्मियों में यह एक कॉमन समस्या है. कई बार सुबह बना भोजन शाम तक खराब होने लगता है या उसमें खट्टापन और बदबू आने लगती है. डॉक्टर्स के अनुसार इसके पीछे सबसे बड़ी वजह गर्म तापमान और नमी होती है, जो बैक्टीरिया और फंगस को तेजी से बढ़ने का मौका देती है. यही कारण है कि गर्मियों में फूड पॉइजनिंग के मामले भी बढ़ जाते हैं. गर्मियों में पेट की समस्याओं से लोगों को हमेशा ताजा भोजन करना चाहिए. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया गर्मियों में तापमान बढ़ जाता है और इसकी वजह से बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं. इस वजह से पका हुआ खाना जल्दी संक्रमित हो सकता है और कुछ घंटों में खराब होने लगता है. खासकर दूध, दही, चावल, दाल, मांस और कटे हुए फल जैसी चीजें ज्यादा जल्दी खराब होती हैं. खाना खराब होने की एक और वजह हवा में मौजूद नमी है. नमी बढ़ने से सूक्ष्मजीवों को बढ़ने के लिए बेहतर वातावरण मिलता है. अगर खाना खुला छोड़ दिया जाए या सही तरीके से स्टोर न किया जाए, तो बैक्टीरिया उसमें तेजी से पनपने लगते हैं. यही वजह है कि गर्मियों में खाना ढककर रखने और फ्रिज में स्टोर करने की सलाह दी जाती है. एक्सपर्ट के मुताबिक खराब खाना खाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, बुखार और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है. इसलिए खाने की ताजगी को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए. गर्मियों में खाने को सुरक्षित रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए. खाना बनने के दो घंटे के भीतर उसे फ्रिज में रख देना चाहिए. बार-बार गर्म और ठंडा करने से भी खाना जल्दी खराब हो सकता है. इसके अलावा साफ बर्तनों का इस्तेमाल और हाथों की सफाई भी बेहद जरूरी है. डॉक्टर की मानें तो गर्मियों में जरूरत से ज्यादा खाना बनाकर लंबे समय तक न रखें. ताजा बना खाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. अगर खाने से अजीब गंध आए, रंग बदल जाए या स्वाद अलग लगे, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. गर्मियों में खाना जल्दी खराब होना गंभीर समस्या है. सही तापमान, साफ-सफाई और उचित स्टोरेज अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है. थोड़ी सी सावधानी आपको और आपके परिवार को फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर समस्याओं से सुरक्षित रख सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
घमौरी का इलाज I skin care tips in summers

Last Updated:May 07, 2026, 16:00 IST गर्मी और उमस के बढ़ते असर से त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. जिला एमएमजी अस्पताल में घमौरी के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है, जिसमें छोटे बच्चों से लेकर बड़े लोग तक शामिल हैं. डॉक्टरों के अनुसार, अधिक पसीना आने और पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाने से त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने उभर आते हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण और पस का रूप ले सकते हैं. गाजियाबाद. गर्मियों की बढ़ती तपिश और उमस अब लोगों की त्वचा पर भी असर दिखाने लगी है, जिला एमएमजी अस्पताल में इन दिनों घमौरी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. छोटे बच्चों से लेकर बड़े तक इस समस्या से परेशान होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि तेज गर्मी और ज्यादा पसीना आने के कारण त्वचा की पसीने वाली ग्रंथियां बंद हो जाती हैं, जिससे पसीना बाहर नहीं निकल पाता और त्वचा के अंदर ही फंस जाता है. यही स्थिति आगे चलकर घमौरी का रूप ले लेती है. शुरुआत में छोटे-छोटे दाने दिखाई देते हैं, लेकिन लापरवाही करने पर इनमें लालपन, जलन और पस तक पड़ सकती है.जिला एमएमजी अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या द्विवेदी ने बताया कि मई की शुरुआत के साथ ही तापमान लगातार बढ़ रहा है. गर्मी के कारण शरीर से अधिक पसीना निकलता है. कई बार पसीने वाली ग्रंथियां बंद हो जाती हैं जिससे पसीना त्वचा के अंदर जमा हो जाता है और छोटे-छोटे लाल दाने बनने लगते हैं. इन दानों में पानी जैसा पदार्थ भी भरा दिखाई देता है, उन्होंने बताया कि घमौरी तीन चरणों में बढ़ती है. शुरुआत में हल्के दाने निकलते हैं फिर उनमें लालपन आता है और समय पर इलाज न मिलने पर उनमें संक्रमण होकर पस भी पड़ सकता है. अधिक पसीना आने पर शरीर को रखें साफ डॉक्टरों के अनुसार घमौरी से बचने के लिए शरीर को ठंडा और सूखा रखना बेहद जरूरी है. कोशिश करनी चाहिए कि ज्यादा देर तक धूप और गर्मी में न रहें, घर से बाहर निकलने पर ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि हवा शरीर तक पहुंच सके. टाइट कपड़े, लेगिंग और ज्यादा फिटिंग वाले कपड़े गर्मियों में परेशानी बढ़ा सकते हैं. अधिक पसीना आने पर समय-समय पर शरीर को साफ करना चाहिए और दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से नहाना फायदेमंद रहता है. डॉ. दिव्या द्विवेदी ने बताया कि छोटे बच्चों में भी घमौरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में माता-पिता को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, कई लोग बच्चों के शरीर पर ज्यादा मात्रा में पाउडर लगा देते हैं लेकिन यह नुकसानदायक हो सकता है. पाउडर पसीने वाली ग्रंथियों को और बंद कर देता है जिससे समस्या बढ़ जाती है. इसकी जगह ठंडे या गीले सूती कपड़े से शरीर को साफ करना बेहतर होता है. डॉक्टरों ने लोगों को गर्मियों में ज्यादा पानी पीने, तरल पदार्थ लेने और मौसमी फलों का सेवन करने की सलाह दी है. साथ ही यदि घमौरी में ज्यादा लालपन, जलन या पस दिखाई दे तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Ghaziabad,Uttar Pradesh
बड़ी म्यूजिक कंपनियां क्षेत्रीय गानों पर दांव लगा रहीं:5,900 करोड़ का हुआ घरेलू म्यूजिक बाजार, स्ट्रीमिंग की घटती कमाई से बदली रणनीति

म्यूजिक इंडस्ट्री में अब बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिसका सीधा फायदा क्षेत्रीय कलाकारों और संगीत प्रेमियों को होगा। टाइम्स म्यूजिक, वार्नर म्यूजिक और सारेगामा जैसी बड़ी कंपनियां अब स्थानीय गानों के कैटलॉग खरीदने पर भारी निवेश कर रही हैं। दरअसल, हिंदी फिल्म म्यूजिक की बढ़ती लागत और स्ट्रीमिंग से घटती कमाई ने कंपनियों को छोटे लेकिन मजबूत क्षेत्रीय बाजारों की ओर मोड़ा है। इस कन्सॉलिडेशनं से क्षेत्रीय संगीत कंपनियों की पहुंच ग्लोबल प्लेटफॉर्म और बेहतर तकनीक तक होगी। इससे न केवल गानों की क्वालिटी सुधरेगी, बल्कि डिजिटल वितरण प्रणाली भी पारदर्शी बनेगी। फिक्की-ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारतीय म्यूजिक सेगमेंट का रेवेन्यू 10% बढ़कर 5,900 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अब म्यूजिक कंपनियां नए कंटेंट पर पैसा लगाने के बजाय स्थापित क्षेत्रीय कैटलॉग के जरिए अपना रिस्क कम कर रही हैं। बड़ी कंपनियों के आने से क्षेत्रीय स्तर पर रॉयल्टी और अधिकारों का प्रबंधन काफी सरल और व्यवस्थित हो जाएगा। अब तक जिन गानों का सही डिजिटल हिसाब नहीं मिल पाता था, वे भी मुख्यधारा की स्ट्रीमिंग का हिस्सा बनेंगे। इससे छोटे और मध्यम स्तर के म्यूजिक लेबल्स को वैश्विक बुनियादी ढांचे और पूंजी तक पहुंच मिलेगी। साझा मार्केटिंग और डेटा-संचालित रणनीतियों से गानों को सही दर्शकों तक पहुंचाना आसान होगा। म्यूजिक लेबल वर्तमान समय में अपनी कमाई के पुराने तरीकों को बदलने के लिए मजबूर हैं। पिछले एक साल में ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने प्रति स्ट्रीम भुगतान की दरों को करीब आधा कर दिया है। इसकी मुख्य वजह यूट्यूब पर दर्शकों का रुझान संगीत से हटकर स्टैंड-अप कॉमेडी और पॉडकास्ट की ओर बढ़ना है। इसके बावजूद फिल्म निर्माता अपने म्यूजिक राइट्स महंगे बेच रहे हैं, जिससे कंपनियों के लिए रिकवरी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। साल 2025 का ट्रेंड बताता है कि कंपनियां अब केवल गानों के ट्रांजेक्शन के बजाय आईपी (बौद्धिक संपदा) पर नियंत्रण चाहती हैं। वे ऐसे निवेश पर ध्यान दे रही हैं जहां कंटेंट का फ्लो तय हो और वैश्विक स्तर पर कमाई की जा सके। छोटी लेकिन प्रासंगिक क्षेत्रीय कंपनियों का अधिग्रहण जोखिम कम करने का सबसे बेहतर तरीका बन गया है। इससे क्षेत्रीय संगीत की दुनिया में प्रोफेशनल वर्क कल्चर का विस्तार होगा। अगले 3 साल में 50% बढ़ेगी क्षेत्रीय गानों की पहुंच, कलाकारों की मांग बढ़ेगी बड़े कंपनियों के उतरने से कलाकारों के भुगतान में अस्थायी रूप से उछाल आ सकता है। अगले दो-तीन वर्षों में क्षेत्रीय भाषाओं के गानों की पहुंच 50% तक बढ़ने की उम्मीद है। जब ग्लोबल मंच पर भोजपुरी, पंजाबी या मराठी गाने बजेंगे, तो इससे न केवल सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर छिपे हुए हुनर को भी अपनी पहचान बनाने के लिए बड़े शहरों का मोहताज नहीं होना पड़ेगा।
शुभेंदु अधिकारी के पी.ए. को मारने के पीछे क्या कारण था? बीजेपी नेताओं का बड़ा खुलासा

पश्चिम बंगाल समाचार अपडेट: पश्चिम बंगाल में रविवार को हुई तबाही ने देश की राजनीति में काला अध्याय जोड़ दिया है। भाजपा के नेता और मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ के अज्ञात लोगों ने गोली मार दी। यह वैश्वीकरण और सत्ता परिवर्तन के दो दिन बाद हुई है। अब इस पर सामने बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी का बयान आया है. शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि शुभेंदु का करीबी होने की वजह से यह हुआ है. क्योंकि शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराया था। हत्या के पीछे यही कारण हो सकता है. चन्द्रनाथ की बॉडी से चार मूर्तियाँ निकलीं। उनका कई रहस्योद्घाटन किया गया है। हत्या करने वाला खूनी है. अपराधी है. जैसे यूपी में सड़कें बदली हैं, बिहार में भी बदली हैं। इसी तरह यहां भी दरवाजों को बदला जाएगा। पूरी तरह से कैसे हुई है घटना देर रात की है. जब बंगाल सेसेक्सुअल खबर वाली. यहां शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा है। घटना नाथ 24 परगना जिले के मध्यमग्राम के डोहरिया मोड़ पर हुई। उस समय चंद्रनाथ रथ अपनी गाड़ी में मौजूद थे। अपने घर के पास ही थे. हमलावर बाइक पर सवार होकर आये थे। उन्होंने पहले अपनी गाड़ी रोकवाई और फिर एक के बाद एक तीन राउंड गोलियाँ चलाईं। गोली सीधे उनके सीने में मारी गयी। इससे उनकी मशीन पर ही मृत्यु हो गई। घटना के वक्त गाड़ी में एक शख्स और थे, जो इस दौरान घायल हो गए। इस मामले में पुलिस जांच में पूछताछ हुई है। जांच का फोकस एक सिल्वर कलर की गाड़ी है। इसी से चन्द्रनाथ रथ की गाड़ी निकली थी। यह रात 10 बजे 20 मिनट पर चंद्रनाथ की गाड़ी उनके घर की गली की तरफ मुड़ी हुई थी। घर से 100 मीटर लंबी इस सिल्वर कलर की गाड़ी (WB 74 AK 2270) पर सवार ने चंद्रनाथ रथ की गाड़ी सामने रखी थी। इससे चंद्रनाथ रथ की गाड़ी रुक गई। माउके का फ़ायदाद ऑर्केस्ट्रा ने आक्रमण कर दिया। ये भी पढ़ें: बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद शुभेंदु अधिकारी के पीए की गोली मारकर हत्या, टीएमसी का पहला बयान, जानिए क्या कहा? (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी(टी)चंद्रनाथ रथ(टी)सुवेंदु अधिकारी मर्डर केस(टी)सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल में पीए मर्डर पर प्रतिक्रिया(टी)कोलकाता समाचार(टी)ट्रेंडिंग न्यू(टी)हिंदी समाचार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)बीजेपी और नरेंद्र मोदी रथ(टी)सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया(टी)कोलकाता समाचार(टी)ट्रेंडिंग न्यू(टी)हिंदी समाचार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव
ममता से मिलने बंगाल पहुंचे अखिलेश:बोले- दीदी आप लड़ीं हैं, हारी नहीं; BJP का तंज- पंचर साइकिल लिए भटक रहे दर-ब-दर

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को ममता बनर्जी से मिलने उनके कोलकाता स्थित घर पहुंचे। भतीजे अभिषेक बनर्जी ने अखिलेश को गले लगाया। ममता भी अखिलेश को रिसीव करने के लिए गेट पर आईं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख के लिए अखिलेश शॉल लेकर गए थे। वे जैसे शॉल ओढ़ाने के लिए आगे बढ़े, ममता ने कहा- इसकी क्या जरूरत थी? इस पर अखिलेश बोले, ‘दीदी, आप लड़ी हैं… आप हारी नहीं हैं।’ उन्होंने यह बात तीन बार दोहराई। इसके बाद ममता ने उन्हें अंदर आने के लिए कहा। अखिलेश ने कमरे के बाहर ही जूते उतारे और फिर अंदर चले गए। TMC ने X पोस्ट में लिखा, कुछ रिश्ते राजनीति और समय से कहीं ऊपर होते हैं। हर दौर के साथ वे और मजबूत होते जाते हैं। यूपी भाजपा ने इस मुलाकात पर तंज कसा है। X पर लिखा, ना-उमीदी बढ़ गई है इस क़दर पंचर साइकिल लिए भटक रहे दर ब दर…। सपा प्रमुख अखिलेश यादव बंगाल चुनाव के नतीजे आने के अगले दिन 5 मई को ही कोलकाता जाने वाले थे, लेकिन ममता बनर्जी ने उन्हें आने से मना कर दिया था। अखिलेश बंगाल चुनाव में प्रचार नहीं करने गए थे, लेकिन सोशल मीडिया से ममता के लिए माहौल बनाते रहे। इससे पहले कोलकाता एयरपोर्ट पर टीएमसी सांसद डेरेके ओ ब्रायन ने अखिलेश का स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में अखिलेश ने कहा, भाजपा की आंखों में दीदी खटकती हैं, क्योंकि वह आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं। भाजपा सामंती सोच की है, इनके संगी साथी लोग पुरुषवादी लोग हैं। यह लोग नारी को बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते हैं। 4 तस्वीरें देखिए… अखिलेश बंगाल चुनाव से दूर रहे, 4 महीने में दूसरी मुलाकात इससे पहले ममता-अखिलेश की मुलाकात 27 जनवरी को हुई थी। INDIA गठबंधन के दो बड़े नेताओं की इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा और TMC के बीच राजनीतिक तालमेल को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ममता-अखिलेश की मुलाकात से जुड़ी पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग पढ़िए…
फ्लाइट में ई-सिगरेट पीते दिखे युजवेंद्र चहल:वीडियो सोशल मीडिया में पोस्ट हुआ, रियान पराग पर जुर्माना लगा था

पंजाब किंग्स के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल फ्लाइट में ई-सिगरेट पीते दिखे हैं। इस पर विवाद हो गया है। दरअसल, पंजाब किंग्स ने टीम के सफर का वीडियो पोस्ट किया। इसमें युजवेंद्र चहल ई-सिगरेट पीते दिख रहे हैं। विवाद होने के बाद पंजाब ने यह वीडियो डिलीट कर दिया है। चहल से पहले 28 अप्रैल को न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग भी ड्रेसिंग रूम में वेप का इस्तेमाल करते पाए गए थे। इसके बाद BCCI ने उन पर मैच फीस का 25% जुर्माना लगाया गया था। पूरा वीडियो देखिए… फ्लाइट सुरक्षा और कड़े नियमों का उल्लंघन फ्लाइट में धूम्रपान या ई-सिगरेट का उपयोग करना सख्त वर्जित है। विमान के संवेदनशील वातावरण में ऐसी लापरवाही आग लगने का कारण बन सकती है, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्हें ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डालने या कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। भारत में 2019 से ई-सिगरेट पूरी तरह बैन है भारत सरकार ने ‘ई-सिगरेट निषेध अधिनियम (PECA) 2019’ के तहत वेप्स और ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, आयात और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया है। उल्लंघन पर जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में एलीट एथलीट का सार्वजनिक मंच पर इसका इस्तेमाल कानून और खेल की मर्यादा का उल्लंघन माना गया। ———————————————————— IPL से जुड़ी यह खबर देखिए IPL- ईशान ने लगातार 3 छक्कों से फिफ्टी पूरी की; यानसन ने 4 ओवर में 61 दिए सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL में बुधवार को पंजाब को 33 रन से हराया। हैदराबाद ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 235 रन बनाए। जवाब में पंजाब की टीम 7 विकेट पर 202 रन ही बना सकी। पढ़ें पूरी खबर
फ्लाइट में ई-सिगरेट पीते दिखे युजवेंद्र चहल:वीडियो सामने आया, रियान पराग पर जुर्माना लगा था

पंजाब किंग्स के अनुभवी लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल एक नए विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि हैदराबाद की यात्रा के दौरान वे फ्लाइट के अंदर ई-सिगरेट (वेप) का इस्तेमाल कर रहे थे। वीडियो में चहल को इसे छिपाने की कोशिश करते देखा गया है। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ रिपोर्ट्स में लिखा गया है कि पंजाब किंग्स ने टीम के सफर का वीडियो पोस्ट किया। सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पंजाब ने यह वीडियो डिलीट कर दिया है। IPL के मौजूदा सीजन में यह ई-सिगरेट से जुड़ा दूसरा विवाद है। चहल से पहले 28 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग पंजाब के खिलाफ मैच के दौरान मुल्लांपुर स्टेडियम के ड्रेसिंग रूम में वेपिंग करते पाए गए थे। पूरा वीडियो देखिए… BCCI ने रियान पराग पर 25% जुर्माना लगाया था ड्रेसिंग रूप में ई-सिगरेट पीने का वीडियो सामने आने के बाद BCCI ने रियान पराग पर मैच फीस का 25% का जुर्माना लगाया गया था। उन्हें IPL के कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। मैच रेफरी ने उन पर कड़ा एक्शन लेते हुए जुर्माना और पेनल्टी पॉइंट लगाया है। नो फ्लाई लिस्ट में डाल सकते हैं चहल फ्लाइट में धूम्रपान या ई-सिगरेट का उपयोग करना सख्त वर्जित है। ऐसी लापरवाही फ्लाइट में आग लगने का कारण बन सकती है, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्हें ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डालने या कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। IPL से पहले कहा था- मैंने शराब छोड़ दी IPL 2026 से पहले चहल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने पिछले 6 महीनों से पूरी तरह शराब छोड़ दी है ताकि वे युवाओं के लिए एक उदाहरण बन सकें और अपना 150% योगदान दे सकें। इस वीडियो के सामने आने के बाद उनके इन दावों पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी चहल का कार चलाते समय सिगरेट पीने का एक वीडियो वायरल हो चुका है। भारत में 2019 से ई-सिगरेट पूरी तरह बैन है भारत सरकार ने ‘ई-सिगरेट निषेध अधिनियम (PECA) 2019’ के तहत वेप्स और ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, आयात और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया है। उल्लंघन पर जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में एलीट एथलीट का सार्वजनिक मंच पर इसका इस्तेमाल कानून और खेल की मर्यादा का उल्लंघन माना गया। ———————————————————— IPL से जुड़ी यह खबर देखिए IPL- ईशान ने लगातार 3 छक्कों से फिफ्टी पूरी की; यानसन ने 4 ओवर में 61 दिए सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL में बुधवार को पंजाब को 33 रन से हराया। हैदराबाद ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 235 रन बनाए। जवाब में पंजाब की टीम 7 विकेट पर 202 रन ही बना सकी। पढ़ें पूरी खबर
“मोदी का नाम लेकर सीएम मांगिए!” केरल में कांग्रेस के प्रमुख भूचाल, श्रीशेषन की नियुक्ति से नामांकन

केरल में प्रचंड सरकार के गठन के बाद कांग्रेस के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं वी डी शेशन अब अपने एक बयान को लेकर धरने पर बैठे हैं और यह बयान सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ से आया है। एक मीडिया हाउस को दिए गए स्पष्टीकरण में कहा गया है कि “प्रशासनिक अनुभव की कोई संभावना नहीं है। वी एस अच्युतानंद के पास क्या अनुभव था? जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने, तब उनके पास क्या अनुभव था? वह एक पार्टी ऑर्गनाइजेशन के समर्थक थे, वरिष्ठ सांसद भी नहीं थे।” यानि कि सिद्धार्थन ने अपने पक्ष में तर्क देते हुए मोदी के उदाहरण का सहारा लिया। लेकिन यही दांव अब उनके लिए साइंटिस्ट वैक्टिव दिख रहे हैं। “मोदी का उदाहरण बड़ा रेड टैग”-सोशल मीडिया पर विरोध शृष्णिण की इस टिप्पणी को लेकर पार्टी के अंदर और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई दावों का मानना है कि स्टालिनवादी राजनीतिक तानाशाही में मोदी की प्रशंसा करना और उन्हें अपनी दावेदारी के लिए इस्तेमाल करना “बड़ा रेड टैग” करना है। केरल कांग्रेस के नेता वीडी सतीसन मोदी की तारीफ कर रहे हैं और उनके उदाहरण का इस्तेमाल कर केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं. यह मेरे लिए एक बड़ा ख़तरा है, खासकर उस समय के लिए जब हम जी रहे हैं। https://t.co/DlXqw82p1M – रोशन राय (@RoशनKrRaii) 6 मई 2026 यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस आलाकमान केरल में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर मंथन कर रही है. यानी, एक कथन ने ऑब्जेक्टिव गुणांकों को और जटिल बना दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस के नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए तो कुछ और भी वीडियो वॉयरल हो रही है। कांग्रेस नेता वीडी सतीसन का एक वीडियो भाषण है। यहां पर वो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की क्षमता की सराहना कर रहे हैं? यह व्यक्तिगत राय क्या है या पार्टी की सोच क्या है? और जब दूसरी तरफ राहुल गांधी… pic.twitter.com/pXVvYtXrpc – प्रो.अंलाहली (نور) (@ProfNoorul) 6 मई 2026 “सीएम नहीं तो मंत्री भी नहीं”- श्रीशन का कड़ा रुख इस पूरी घटना के बीच श्रीशचन के रुख को लेकर भी खबरें सामने आई हैं. ब्रांड की माने तो बताया जा रहा है कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, तो वे आकार का हिस्सा नहीं बनेंगे और सिर्फ अध्यक्ष बने रहेंगे। श्रीशन और उनके समर्थक सख्त रुख अख्तियार किये हुए हैं और सीएलपी की बैठक के बाद नकली समय के अनुरूप बात भी नहीं की। #घड़ी | तिरुवनंतपुरम, केरलम | कांग्रेस के निर्वाचित विधायक वीडी सतीसन केपीसीसी कार्यालय से निकले। केरलम के लिए पार्टी पर्यवेक्षकों के साथ सीएलपी की बैठक चल रही है और प्रत्येक विधायक से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की जा रही है pic.twitter.com/5JCW0CqpVV – एएनआई (@ANI) 7 मई 2026 यह संकेत साफ करता है कि श्रीशेषन अब अपनी उम्मीदवारी को लेकर पूरी तरह से आक्रामक रुख अपना रहे हैं-जो पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकते हैं। इस बीच “राहुल गांधी, वीडियो श्रीशेषन को मुख्यमंत्री बनाओ” संदेश सोशल मीडिया पर 1 लाख से अधिक कमेंट्स के साथ, वीडियो श्रीशेषन के समर्थन में समर्थक सोशल मीडिया रैली कर रहे हैं। 102 की जीत, लेकिन श्रेष्ठतम 140 केरला खण्ड में यू.एस. फ़्लिक ने 102 रेज़्यूमे में प्रवेश किया, जबकि एल 35 फ़्रांसीसी खण्डों में प्रवेश किया। यह कांग्रेस की जीत के लिए वापसी का बड़ा मौका लेकर आया है। परावूर सीट से भारी अंतर से मरने वाले अभिषेकन को इस जीत का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। उनके दावे का तर्क है कि 2021 की हार के बाद श्रीशेषन ने ही संगठन को खड़ा किया और पार्टी को सत्ता तक कायम रखा, समाजवादी मुख्यमंत्री पद पर उनका दावा सबसे मजबूत है। सीएलपी बैठक और अलकमान की भूमिका केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (KPCC) की नवीनीकृत CLP बैठक में सभी पार्टियों से व्यक्तिगत राय ली गई। इस प्रक्रिया के तहत पार्टी पर्यवेक्षक मुकुल वासनिक और अजय माकन ने नेताओं से मुलाकात की। ओमन चंदी के बेटे और विधायक चंदी ओमन ने सार्वजनिक रूप से किसी के नाम का समर्थन करते हुए बचते हुए कहा, “मैं पार्टी नेतृत्व को अपनी बात बताना चाहता हूं। मैं सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहना चाहता। नेतृत्व पर सही समय पर निर्णय लेना चाहता हूं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “कांग्रेस का एक तय एसओपी है। हम जनता द्वारा चुने गए नेता हैं। हमने अपनी राय दी है और पार्टी एक ही आधार पर सही निर्णय लेगी।” अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि कांग्रेस के आलाकमान इस पूरे विवाद को कैसे संभालेंगे. एक तरफा अभिषेक का मजबूत दावा और दूसरी तरफ का दबाव, दूसरी तरफ उपजा विवाद- दोनों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। यह सिर्फ नेतृत्व चयन का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी के पक्षधर संदेश और राजनीतिक लाइन से भी टकराव हुआ है। यदि श्रीशेषन को नियुक्त किया जाता है, तो असंतोष का खतरा है। अगर उन्हें चुना जाता है, तो उनके बयान पर उठाए गए सवालों का जवाब देना होगा। यह भी पढ़ें: ‘विजय तभी ले जाएगी शपथ जब…’, तमिल के गवर्नर ने टीवीके प्रमुख के सामने रखी ये शर्त (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल सीएम रेस 2026(टी)वीडी सतीसन विवाद(टी)कांग्रेस नेतृत्व संकट(टी)केरल राजनीति समाचार(टी)केरल सीएम रेस कांग्रेस(टी)वीडी सतीसन बयान मोदी विवाद(टी)केरल चुनाव 2026 यूडीएफ जीत(टी)कांग्रेस नेतृत्व निर्णय केरल(टी)केसी वेणुगोपाल रमेश चेन्निथला सीएम रेस(टी)केपीसीसी सीएलपी बैठक समाचार(टी)केरल राजनीतिक घटनाक्रम(टी)राहुल गांधी सीएम निर्णय केरल(टी)कांग्रेस आंतरिक संघर्ष भारत(टी)केरल सरकार गठन समाचार(टी)केरल सीएम(टी)वीडी शृंखला विवाद(टी)कांग्रेस नेतृत्व संकट(टी)केरल राजनीति समाचार(टी)वीडी शशिसन का बयान मोदी विवाद(टी)केरल चुनाव 2026 यूडीएफ की जीत(टी)केरल में कांग्रेस नेतृत्व का फैसला(टी)केसी वेणुगोपाल चेन्निथला सीएम की दौड़(टी)केपीसीसी सीएलपी बैठक समाचार(टी)केरल के राजनीतिक घटनाक्रम(टी)राहुल गांधी का केरल सीएम पर निर्णय
रिपोर्ट- 90% जापानियों ने चीनी कारों का बहिष्कार किया:फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका ईवी से दूर भाग रहे; इंडोनेशिया, भारत जैसे देश अपनाने में आगे

दुनिया के 31 देशों में औसतन 43% लोग कहते हैं कि बिना कार के जीना उनके लिए असंभव है। 22 देशों में लोग कार को पसंदीदा ट्रांसपोर्ट मानते हैं। 65% अमेरिकी बिना कार लिए नहीं रह सकते हैं। लेकिन भारत के लोगों की पहली पसंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट है। देश के 62% लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट को चुनना चाहते हैं। इप्सॉस की ग्लोबल मोबिलिटी रिपोर्ट 2026 में यह खुलासा हुआ है। लेकिन ईवी के सबसे बड़े पैरोकार रहे फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों का इससे मोहभंग हो रहा है। जापान में यह आंकड़ा -28% तक गिर चुका है। इसके विपरीत इंडोनेशिया (60%), मेक्सिको (60%) और चिली (57%) सबसे आगे हैं। यह सर्वे 31 देशों में किया गया। 23,722 लोगों ने हिस्सा लिया। सेल्फ-ड्राइविंग कार – भारत डरता नहीं – भारत में ईवी अपील 40% है, जो ग्लोबल औसत 47% से थोड़ा कम है। लेकिन यह यूरोप और नॉर्थ अमेरिका से बेहतर स्थिति में है। – 36% लोग सेल्फ-ड्राइविंग कार को असुरक्षित मानते हैं। सबसे आगे फ्रांस (-37%), नीदरलैंड्स (-35%), अमेरिका (-25%) है। – भारत में करीब 47% लोग इस तकनीक में सुरक्षित महसूस करते हैं, जबकि ग्लोबल औसत 36% है। भारतीय बाजार में हर कंपनी के लिए बड़े मौके भारत में 16% किसी टेक कंपनी से कार खरीदना पसंद करेंगे, 22% की पसंद पारंपरिक ऑटोमेकर हैं। – 62% को कोई प्राथमिकता नहीं है। यानी बाजार किसी के लिए बंद नहीं है। टाटा, महिंद्रा से लेकर गूगल, शाओमी जैसी टेक कंपनियों के लिए दरवाजे खुले हैं। एशिया में चीन विरोध बढ़ रहा, भारत के लिए बड़े मौके – जापान में 90% लोग चीनी कार नहीं लेंगे। दक्षिण कोरिया में भी चीन-विरोधी भावना प्रबल है। – कनाडा में 48% लोग अमेरिकी कार नहीं खरीदेंगे। यानी इस माहौल में भारत के लिए बड़े मौके भी हैं। – चीन के खिलाफ यह अविश्वास भारतीय ब्रांड्स के लिए एशियाई बाजारों में रास्ता खोल सकता है। – 42% लोग किसी न किसी खास देश की कार खरीदने से बच रहे हैं। इस लिस्ट में चीनी सबसे ऊपर है। उसका बॉयकॉट रेट (41%) और अमेरिकी कारों के लिए यह आंकड़ा करीब 24% है।








