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रुबीना दिलाइक ने पहले ठुकराया था ‘खतरों के खिलाड़ी 15’:परिवार से दूर नहीं जाना चाहती थीं, जानिए फिर कैसे बदला फैसला

रुबीना दिलाइक ने पहले ठुकराया था ‘खतरों के खिलाड़ी 15’:परिवार से दूर नहीं जाना चाहती थीं, जानिए फिर कैसे बदला फैसला

टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलाइक एक बार फिर टीवी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ में वापसी करने जा रही हैं। रुबीना इससे पहले शो के 12वें सीजन में भाग ले चुकी हैं। अब वह एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ के सीजन 15 में नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रुबीना ने बताया कि मां बनने के बाद उनकी जिंदगी और सोच दोनों बदल चुकी हैं। बातचीत में रुबीना ने इंडस्ट्री में अपने शुरुआती संघर्ष, लोगों की जजमेंट, स्ट्रॉन्ग महिलाओं को लेकर बनी सोच और अपने डर पर भी बात की। सवाल: आप हमेशा एक स्ट्रॉन्ग, बोल्ड और टफ पर्सनैलिटी के तौर पर देखी जाती हैं। क्या इस इमेज का प्रेशर भी रहता है? जवाब: अगर मैं यह सोचने लगूं कि लोग मुझसे क्या उम्मीद कर रहे हैं, तो वह प्रेशर मेरे गेम को खराब कर सकता है। मुझे लगता है कि आपको बस अपनी जगह समझनी चाहिए और उसी सम्मान के साथ खेलना चाहिए। अगर मैं एक्सपेक्टेशन का बोझ लेकर स्टंट करूंगी, तो वह मुझे और ज्यादा परेशान करेगा। इसलिए जितना हो सके, उस प्रेशर को खुद से दूर रखना जरूरी है। सवाल: क्या कॉम्पिटिटिव होना इस शो के लिए जरूरी है? जवाब: बिल्कुल। हर इंसान के अंदर एक कॉम्पिटिटिव स्पिरिट होती है। कोई खुद से मुकाबला करता है, कोई दूसरों से। जब आप ऐसे शो में जाते हैं, तो आप अपनी बेस्ट फिजिकल और मेंटल कैपेसिटी दिखाना चाहते हैं। अगर आपके अंदर कॉम्पिटिटिवनेस नहीं है, तो शायद आप कहीं न कहीं फ्लैट पड़ जाएंगे। सवाल: कुछ लोगों का परसेप्शन है कि मां बनने के बाद महिलाएं कमजोर हो जाती हैं, आप इसे कैसे देखती हैं? जवाब: मुझे लगता है कि मदरहुड कमजोरी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी ताकत है। लोग कहते हैं कि अब शायद आपके अंदर पहले जैसी स्टैमिना या ताकत नहीं होगी, लेकिन वही बातें मुझे खुद को साबित करने का और मोटिवेशन देती हैं। ताकत सिर्फ फिजिकल नहीं होती, मानसिक मजबूती और रेजिलिएंस भी बहुत मायने रखता है और एक मां के अंदर यह ताकत और ज्यादा बढ़ जाती है। सवाल: डर को आप कैसे देखती हैं? जवाब: डर ही तय करता है कि आप कितने मजबूत हैं। जिंदगी में हर इंसान किसी न किसी डर से लड़ रहा होता है। सवाल यह नहीं है कि डर है या नहीं, सवाल यह है कि आप डर को खुद पर हावी होने देते हैं या खुद उस डर पर जीत हासिल करते हैं। सवाल: इंडस्ट्री में शुरुआती दौर में सबसे बड़ा डर क्या था? जवाब: मैं गांव और बहुत कंजर्वेटिव माहौल से आती हूं। उस समय इस इंडस्ट्री को बहुत अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था। जब मैं पहली बार मुंबई आई, तो मेरे अंदर बहुत डर था। पढ़ाई, करियर, नए शहर में खुद को स्थापित करना… हर चीज डराती थी, लेकिन शायद हर डर को पार करने की कोशिश ने मुझे मजबूत बनाया। सवाल: पहली बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ करने के दौरान आपका सबसे बड़ा डर क्या था? जवाब: जब आप जिंदगी में पहली बार 80 फीट ऊंचाई से कूदते हैं या समुद्र में स्टंट करते हैं, तब समझ आता है कि डर क्या होता है। पानी तो पानी ही होता है, चाहे गिलास में हो या समुद्र में, लेकिन उसकी विशालता आपका डर तय करती है। उस पूरे सीजन में मैं लगातार अपने डर से जूझ रही थी। सवाल: क्या इस बार का अनुभव पहले से अलग होगा? जवाब: बिल्कुल। मां बनने के बाद बहुत कुछ बदल गया है। पिछले चार सालों में मैंने खुद को उस तरह से टेस्ट नहीं किया है। इसलिए मुझे खुद नहीं पता कि इस बार मैं अपने डर को उसी तरह फेस कर पाऊंगी या नहीं। लेकिन यह जर्नी मेरे लिए बहुत अलग होने वाली है। सवाल: स्ट्रॉन्ग और ओपिनियन रखने वाली महिलाओं को अक्सर जज किया जाता है। क्या आपने भी यह महसूस किया है? जवाब: हां, लेकिन यह मेरी जिंदगी जीने का तरीका है। अगर मैं खुद को सिर्फ लोगों को खुश करने के लिए बदल दूं, तो फिर मैं अपनी असली जिंदगी नहीं जी रही हूं। भगवान ने हर इंसान को अलग बनाया है। अगर मैं अपनी यूनिकनेस छोड़कर लोगों की उम्मीदों में फिट होने लगूं, तो मैं ऑथेंटिक नहीं रहूंगी। हां, ऐसा करने से कई लोग आपसे नाराज भी होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप खुद को बदल दें। सवाल: जब आपको दोबारा ‘खतरों के खिलाड़ी’ का ऑफर मिला, तब आपका पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: मैंने शुरुआत में मना कर दिया था, क्योंकि यह बहुत लंबा इंटरनेशनल शेड्यूल है और अब मेरी बेटियां हैं। उन्हें छोड़कर इतनी दूर जाना आसान नहीं था। लगभग तीन महीने तक मैं यही सोचती रही कि करूं या नहीं, लेकिन फिर अभिनव ने कहा कि ‘रुबीना, यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा। हम सब संभाल लेंगे।’ तब मुझे लगा कि मेरे पास बहुत मजबूत सपोर्ट सिस्टम है और मैं यह कर सकती हूं। सवाल: अब जीत और हार को किस नजरिए से देखती हैं? जवाब: अब मेरे लिए जीत-हार का मतलब बदल चुका है। अब मैं यह सोचती हूं कि हमारी चॉइसेस हमारी बेटियों को क्या सिखाएंगी। हम उनके पहले टीचर हैं। इसलिए हम उन्हें यह नहीं सिखाना चाहते कि सिर्फ जीतना जरूरी है। हम उन्हें यह सिखाना चाहते हैं कि कोशिश करना और हिम्मत दिखाना ज्यादा जरूरी है। सवाल: इस बार के कंटेस्टेंट्स को लेकर क्या सोचती हैं? जवाब: हर कोई अपने साथ एक अलग एनर्जी लेकर आया है। अविका गोर बहुत स्ट्रॉन्ग हैं। जैस्मिन भसीन के साथ मैंने बिग बॉस में काफी वक्त बिताया है और वह बहुत अच्छी इंसान हैं। करण वाही और ऋत्विक धनजानी यह शो तीसरी बार कर रहे हैं, इसलिए उनके पास अलग अनुभव है। वहीं रुहानिका धवन और शगुन शर्मा जैसे यंग कंटेस्टेंट्स का नजरिया अलग होगा। मुझे लोगों को ऑब्जर्व करना और उनकी बॉडी लैंग्वेज समझना बहुत पसंद है। इसलिए यह सफर मेरे लिए काफी दिलचस्प रहेगा।

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टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलाइक एक बार फिर टीवी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ में वापसी करने जा रही हैं। रुबीना इससे पहले शो के 12वें सीजन में भाग ले चुकी हैं। अब वह एक बार फिर ‘खतरों के खिलाड़ी’ के सीजन 15 में नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रुबीना ने बताया कि मां बनने के बाद उनकी जिंदगी और सोच दोनों बदल चुकी हैं। बातचीत में रुबीना ने इंडस्ट्री में अपने शुरुआती संघर्ष, लोगों की जजमेंट, स्ट्रॉन्ग महिलाओं को लेकर बनी सोच और अपने डर पर भी बात की। सवाल: आप हमेशा एक स्ट्रॉन्ग, बोल्ड और टफ पर्सनैलिटी के तौर पर देखी जाती हैं। क्या इस इमेज का प्रेशर भी रहता है? जवाब: अगर मैं यह सोचने लगूं कि लोग मुझसे क्या उम्मीद कर रहे हैं, तो वह प्रेशर मेरे गेम को खराब कर सकता है। मुझे लगता है कि आपको बस अपनी जगह समझनी चाहिए और उसी सम्मान के साथ खेलना चाहिए। अगर मैं एक्सपेक्टेशन का बोझ लेकर स्टंट करूंगी, तो वह मुझे और ज्यादा परेशान करेगा। इसलिए जितना हो सके, उस प्रेशर को खुद से दूर रखना जरूरी है। सवाल: क्या कॉम्पिटिटिव होना इस शो के लिए जरूरी है? जवाब: बिल्कुल। हर इंसान के अंदर एक कॉम्पिटिटिव स्पिरिट होती है। कोई खुद से मुकाबला करता है, कोई दूसरों से। जब आप ऐसे शो में जाते हैं, तो आप अपनी बेस्ट फिजिकल और मेंटल कैपेसिटी दिखाना चाहते हैं। अगर आपके अंदर कॉम्पिटिटिवनेस नहीं है, तो शायद आप कहीं न कहीं फ्लैट पड़ जाएंगे। सवाल: कुछ लोगों का परसेप्शन है कि मां बनने के बाद महिलाएं कमजोर हो जाती हैं, आप इसे कैसे देखती हैं? जवाब: मुझे लगता है कि मदरहुड कमजोरी नहीं, बल्कि बहुत बड़ी ताकत है। लोग कहते हैं कि अब शायद आपके अंदर पहले जैसी स्टैमिना या ताकत नहीं होगी, लेकिन वही बातें मुझे खुद को साबित करने का और मोटिवेशन देती हैं। ताकत सिर्फ फिजिकल नहीं होती, मानसिक मजबूती और रेजिलिएंस भी बहुत मायने रखता है और एक मां के अंदर यह ताकत और ज्यादा बढ़ जाती है। सवाल: डर को आप कैसे देखती हैं? जवाब: डर ही तय करता है कि आप कितने मजबूत हैं। जिंदगी में हर इंसान किसी न किसी डर से लड़ रहा होता है। सवाल यह नहीं है कि डर है या नहीं, सवाल यह है कि आप डर को खुद पर हावी होने देते हैं या खुद उस डर पर जीत हासिल करते हैं। सवाल: इंडस्ट्री में शुरुआती दौर में सबसे बड़ा डर क्या था? जवाब: मैं गांव और बहुत कंजर्वेटिव माहौल से आती हूं। उस समय इस इंडस्ट्री को बहुत अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था। जब मैं पहली बार मुंबई आई, तो मेरे अंदर बहुत डर था। पढ़ाई, करियर, नए शहर में खुद को स्थापित करना… हर चीज डराती थी, लेकिन शायद हर डर को पार करने की कोशिश ने मुझे मजबूत बनाया। सवाल: पहली बार ‘खतरों के खिलाड़ी’ करने के दौरान आपका सबसे बड़ा डर क्या था? जवाब: जब आप जिंदगी में पहली बार 80 फीट ऊंचाई से कूदते हैं या समुद्र में स्टंट करते हैं, तब समझ आता है कि डर क्या होता है। पानी तो पानी ही होता है, चाहे गिलास में हो या समुद्र में, लेकिन उसकी विशालता आपका डर तय करती है। उस पूरे सीजन में मैं लगातार अपने डर से जूझ रही थी। सवाल: क्या इस बार का अनुभव पहले से अलग होगा? जवाब: बिल्कुल। मां बनने के बाद बहुत कुछ बदल गया है। पिछले चार सालों में मैंने खुद को उस तरह से टेस्ट नहीं किया है। इसलिए मुझे खुद नहीं पता कि इस बार मैं अपने डर को उसी तरह फेस कर पाऊंगी या नहीं। लेकिन यह जर्नी मेरे लिए बहुत अलग होने वाली है। सवाल: स्ट्रॉन्ग और ओपिनियन रखने वाली महिलाओं को अक्सर जज किया जाता है। क्या आपने भी यह महसूस किया है? जवाब: हां, लेकिन यह मेरी जिंदगी जीने का तरीका है। अगर मैं खुद को सिर्फ लोगों को खुश करने के लिए बदल दूं, तो फिर मैं अपनी असली जिंदगी नहीं जी रही हूं। भगवान ने हर इंसान को अलग बनाया है। अगर मैं अपनी यूनिकनेस छोड़कर लोगों की उम्मीदों में फिट होने लगूं, तो मैं ऑथेंटिक नहीं रहूंगी। हां, ऐसा करने से कई लोग आपसे नाराज भी होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप खुद को बदल दें। सवाल: जब आपको दोबारा ‘खतरों के खिलाड़ी’ का ऑफर मिला, तब आपका पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: मैंने शुरुआत में मना कर दिया था, क्योंकि यह बहुत लंबा इंटरनेशनल शेड्यूल है और अब मेरी बेटियां हैं। उन्हें छोड़कर इतनी दूर जाना आसान नहीं था। लगभग तीन महीने तक मैं यही सोचती रही कि करूं या नहीं, लेकिन फिर अभिनव ने कहा कि ‘रुबीना, यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा। हम सब संभाल लेंगे।’ तब मुझे लगा कि मेरे पास बहुत मजबूत सपोर्ट सिस्टम है और मैं यह कर सकती हूं। सवाल: अब जीत और हार को किस नजरिए से देखती हैं? जवाब: अब मेरे लिए जीत-हार का मतलब बदल चुका है। अब मैं यह सोचती हूं कि हमारी चॉइसेस हमारी बेटियों को क्या सिखाएंगी। हम उनके पहले टीचर हैं। इसलिए हम उन्हें यह नहीं सिखाना चाहते कि सिर्फ जीतना जरूरी है। हम उन्हें यह सिखाना चाहते हैं कि कोशिश करना और हिम्मत दिखाना ज्यादा जरूरी है। सवाल: इस बार के कंटेस्टेंट्स को लेकर क्या सोचती हैं? जवाब: हर कोई अपने साथ एक अलग एनर्जी लेकर आया है। अविका गोर बहुत स्ट्रॉन्ग हैं। जैस्मिन भसीन के साथ मैंने बिग बॉस में काफी वक्त बिताया है और वह बहुत अच्छी इंसान हैं। करण वाही और ऋत्विक धनजानी यह शो तीसरी बार कर रहे हैं, इसलिए उनके पास अलग अनुभव है। वहीं रुहानिका धवन और शगुन शर्मा जैसे यंग कंटेस्टेंट्स का नजरिया अलग होगा। मुझे लोगों को ऑब्जर्व करना और उनकी बॉडी लैंग्वेज समझना बहुत पसंद है। इसलिए यह सफर मेरे लिए काफी दिलचस्प रहेगा।

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