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₹2 Lakh Crore Sold Amidst Global Market Uncertainty

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मुंबई28 मिनट पहले

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मई महीने में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की निकासी जारी है। वैश्विक आर्थिक चिंताओं के कारण इस साल अब तक विदेशी निवेशक बाजार से ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा निकाल चुके हैं।

एनएसडीएल (NSDL) के डेटा के अनुसार, अकेले मई महीने में विदेशी निवेशकों ने अब तक ₹14,231 करोड़ की बिकवाली की है।

2025 के मुकाबले इस साल ज्यादा दबाव

साल 2026 में अब तक की कुल निकासी पिछले पूरे साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। साल 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से कुल ₹1.66 लाख करोड़ निकाले थे।

इस साल अब तक यह आंकड़ा ₹2 लाख करोड़ के पार जा चुका है, जो बाजार पर निरंतर बने बिकवाली के दबाव को दर्शाता है।

सिर्फ फरवरी में आई थी खरीदारी, मार्च में हुई रिकॉर्ड बिकवाली

इस साल विदेशी निवेशकों का रुख ज्यादातर निगेटिव ही रहा है। जनवरी में ₹35,962 करोड़ के शेयर बेचे गए थे। हालांकि, फरवरी एक अपवाद रहा जब निवेशकों ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मंथली निवेश था। लेकिन यह बढ़त ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई।

मार्च में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर दिखा और रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ बाजार से बाहर निकल गए। इसके बाद अप्रैल में भी ₹60,847 करोड़ की निकासी दर्ज की गई है।

महंगाई और ब्याज दरें बनी बड़ी वजह

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च, हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई, ब्याज दरों में बदलाव की आशंका और जियोपॉलिटिकल रिस्क इस बिकवाली के मुख्य कारण हैं।

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से निवेशक अब जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद छोड़ रहे हैं और विकसित बाजारों के डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर रुख कर रहे हैं।

रुपए की कमजोरी से भी बढ़ा असर

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में आने वाली अस्थिरता और कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। इससे डॉलर के संदर्भ में उनका रिटर्न प्रभावित होता है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि रुपए की गिरावट और भारत की अर्निंग ग्रोथ को लेकर चिंताओं ने इस साल आउटफ्लो बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

पावर-कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अभी भी रुचि

लगातार हो रही बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं हुए हैं। वे पावर, कंस्ट्रक्शन और कैपिटल गुड्स जैसे चुनिंदा सेक्टर्स में अभी भी निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा मजबूत कमाई और अच्छी ग्रोथ वाले मिड-कैप और कुछ स्मॉल-कैप शेयरों में भी वे खरीदारी कर रहे हैं।

हालांकि, वैश्विक स्तर पर अब निवेशकों का रुझान दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों की ओर बढ़ रहा है, जहां AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के कारण बेहतर कमाई की उम्मीद है।

क्या होता है FPI और डॉलर रिटर्न?

  • FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश): जब विदेशी नागरिक या कंपनियां किसी दूसरे देश के शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं, तो उसे FPI कहा जाता है। ये निवेशक मुनाफा होते ही जल्दी पैसा निकाल भी सकते हैं।
  • डॉलर रिटर्न: विदेशी निवेशक भारत में रुपए में निवेश करते हैं। अगर रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरती है, तो उन्हें अपना पैसा वापस डॉलर में बदलने पर कम मुनाफा होता है, जिसे डॉलर रिटर्न का नुकसान कहते हैं।

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कल 11 मई से शुरू होने वाले हफ्ते में शेयर बाजार में काफी हलचल रहने वाली है। कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे फैक्टर बाजार की दिशा तय करेंगे। चलिए समझते हैं अगले हफ्ते बाजार में क्या हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें….

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मई महीने में भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की निकासी जारी है। वैश्विक आर्थिक चिंताओं के कारण इस साल अब तक विदेशी निवेशक बाजार से ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा निकाल चुके हैं।

एनएसडीएल (NSDL) के डेटा के अनुसार, अकेले मई महीने में विदेशी निवेशकों ने अब तक ₹14,231 करोड़ की बिकवाली की है।

2025 के मुकाबले इस साल ज्यादा दबाव

साल 2026 में अब तक की कुल निकासी पिछले पूरे साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। साल 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से कुल ₹1.66 लाख करोड़ निकाले थे।

इस साल अब तक यह आंकड़ा ₹2 लाख करोड़ के पार जा चुका है, जो बाजार पर निरंतर बने बिकवाली के दबाव को दर्शाता है।

सिर्फ फरवरी में आई थी खरीदारी, मार्च में हुई रिकॉर्ड बिकवाली

इस साल विदेशी निवेशकों का रुख ज्यादातर निगेटिव ही रहा है। जनवरी में ₹35,962 करोड़ के शेयर बेचे गए थे। हालांकि, फरवरी एक अपवाद रहा जब निवेशकों ने ₹22,615 करोड़ का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मंथली निवेश था। लेकिन यह बढ़त ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई।

मार्च में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर दिखा और रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ बाजार से बाहर निकल गए। इसके बाद अप्रैल में भी ₹60,847 करोड़ की निकासी दर्ज की गई है।

महंगाई और ब्याज दरें बनी बड़ी वजह

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च, हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई, ब्याज दरों में बदलाव की आशंका और जियोपॉलिटिकल रिस्क इस बिकवाली के मुख्य कारण हैं।

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से निवेशक अब जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद छोड़ रहे हैं और विकसित बाजारों के डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर रुख कर रहे हैं।

रुपए की कमजोरी से भी बढ़ा असर

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में आने वाली अस्थिरता और कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। इससे डॉलर के संदर्भ में उनका रिटर्न प्रभावित होता है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि रुपए की गिरावट और भारत की अर्निंग ग्रोथ को लेकर चिंताओं ने इस साल आउटफ्लो बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

पावर-कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अभी भी रुचि

लगातार हो रही बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं हुए हैं। वे पावर, कंस्ट्रक्शन और कैपिटल गुड्स जैसे चुनिंदा सेक्टर्स में अभी भी निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा मजबूत कमाई और अच्छी ग्रोथ वाले मिड-कैप और कुछ स्मॉल-कैप शेयरों में भी वे खरीदारी कर रहे हैं।

हालांकि, वैश्विक स्तर पर अब निवेशकों का रुझान दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों की ओर बढ़ रहा है, जहां AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के कारण बेहतर कमाई की उम्मीद है।

क्या होता है FPI और डॉलर रिटर्न?

  • FPI (विदेशी पोर्टफोलियो निवेश): जब विदेशी नागरिक या कंपनियां किसी दूसरे देश के शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं, तो उसे FPI कहा जाता है। ये निवेशक मुनाफा होते ही जल्दी पैसा निकाल भी सकते हैं।
  • डॉलर रिटर्न: विदेशी निवेशक भारत में रुपए में निवेश करते हैं। अगर रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरती है, तो उन्हें अपना पैसा वापस डॉलर में बदलने पर कम मुनाफा होता है, जिसे डॉलर रिटर्न का नुकसान कहते हैं।

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कल 11 मई से शुरू होने वाले हफ्ते में शेयर बाजार में काफी हलचल रहने वाली है। कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे फैक्टर बाजार की दिशा तय करेंगे। चलिए समझते हैं अगले हफ्ते बाजार में क्या हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें….

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