तृषा को विजय के प्रतिद्वंद्वी से 12 करोड़ का ऑफर:दावा- उदयनिधि स्टालिन ने फिल्म में लीड रोल के लिए एक्ट्रेस को अप्रोच किया

तमिल एक्ट्रेस तृषा कृष्णन थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार चर्चा में हैं। पहले वे विजय के साथ अपने रिश्ते को लेकर सुर्खियों में रहीं। वहीं अब एक मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उन्हें विजय के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उदयनिधि स्टालिन ने 12 करोड़ रुपए का ऑफर दिया है। एनडीटीवी के मुताबिक, डीएमके के प्रमुख नेता और एक्टर उदयनिधि स्टालिन ने अपनी अगली बड़ी फिल्म के लिए तृषा को अप्रोच किया है। इस फिल्म में उन्हें लीड रोल देने की तैयारी है। उदयनिधि और विजय की पार्टियों के बीच तमिलनाडु की राजनीति में सीधा मुकाबला है। पोन्नियिन सेल्वन के बाद बढ़ी पावर तृषा कृष्णन साउथ सिनेमा की सबसे डिमांडिंग एक्ट्रेसेज में से एक हैं। ‘पोन्नियिन सेल्वन’, ‘घिल्ली’ और ‘वरशम’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हाल के दिनों में उनकी पॉपुलैरिटी और फीस दोनों में बड़ा उछाल आया है। रिपोर्ट्स की मानें तो वे अब प्रति फिल्म 10 से 12 करोड़ रुपए चार्ज कर रही हैं। उदयनिधि के प्रोजेक्ट को उनकी इसी बढ़ती स्टार पावर से जोड़कर देखा जा रहा है। विजय के शपथ ग्रहण समारोह में हुई थीं भावुक कुछ समय पहले थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके शपथ ग्रहण समारोह में तृषा भी पहुंची थीं। वहां विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देख उनकी भावुक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे। पर्दे पर भी विजय और तृषा की जोड़ी हमेशा हिट रही है। विजय ने तृषा के लिए बदले नियम तमिलनाडू के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद थलापति विजय ने तृषा के लिए फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े नियम में बदलाव किया है। विजय ने तृषा कृष्णन की फिल्म करप्पू के लिए सुबह 9 बजे की स्क्रीनिंग रखने की स्पेशल परमिशन दी है, जबकि अब तक साउथ में इस पर प्रतिबंध था।
तृषा को विजय के प्रतिद्वंद्वी से 12 करोड़ का ऑफर:दावा- उदयनिधि स्टालिन ने फिल्म में लीड रोल के लिए एक्ट्रेस को अप्रोच किया

तमिल एक्ट्रेस तृषा कृष्णन थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार चर्चा में हैं। पहले वे विजय के साथ अपने रिश्ते को लेकर सुर्खियों में रहीं। वहीं अब एक मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उन्हें विजय के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी उदयनिधि स्टालिन ने 12 करोड़ रुपए का ऑफर दिया है। एनडीटीवी के मुताबिक, डीएमके के प्रमुख नेता और एक्टर उदयनिधि स्टालिन ने अपनी अगली बड़ी फिल्म के लिए तृषा को अप्रोच किया है। इस फिल्म में उन्हें लीड रोल देने की तैयारी है। उदयनिधि और विजय की पार्टियों के बीच तमिलनाडु की राजनीति में सीधा मुकाबला है। पोन्नियिन सेल्वन के बाद बढ़ी पावर तृषा कृष्णन साउथ सिनेमा की सबसे डिमांडिंग एक्ट्रेसेज में से एक हैं। ‘पोन्नियिन सेल्वन’, ‘घिल्ली’ और ‘वरशम’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हाल के दिनों में उनकी पॉपुलैरिटी और फीस दोनों में बड़ा उछाल आया है। रिपोर्ट्स की मानें तो वे अब प्रति फिल्म 10 से 12 करोड़ रुपए चार्ज कर रही हैं। उदयनिधि के प्रोजेक्ट को उनकी इसी बढ़ती स्टार पावर से जोड़कर देखा जा रहा है। विजय के शपथ ग्रहण समारोह में हुई थीं भावुक कुछ समय पहले थलापति विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके शपथ ग्रहण समारोह में तृषा भी पहुंची थीं। वहां विजय को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देख उनकी भावुक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे। पर्दे पर भी विजय और तृषा की जोड़ी हमेशा हिट रही है। विजय ने तृषा के लिए बदले नियम तमिलनाडू के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद थलापति विजय ने तृषा के लिए फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े नियम में बदलाव किया है। विजय ने तृषा कृष्णन की फिल्म करप्पू के लिए सुबह 9 बजे की स्क्रीनिंग रखने की स्पेशल परमिशन दी है, जबकि अब तक साउथ में इस पर प्रतिबंध था।
SC Questions Centre on Election Commissioner Appointments

Hindi News National SC Questions Centre On Election Commissioner Appointments | Opposition Leader Role नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया। कोर्ट ने कहा- अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा- CBI डायरेक्टर की सिलेक्शन कमेटी में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में कोई स्वतंत्र सदस्य नहीं रखा गया है। कोर्ट ने आगे कहा- कमेटी में तीन लोग हैं और हर फैसला 2:1 के बहुमत के हिसाब से ही होगा तो फिर विपक्ष के नेता को शामिल ही क्यों करते हैं? वह सिर्फ दिखावटी हो जाते हैं। क्या कैबिनेट का कोई मंत्री प्रधानमंत्री के खिलाफ जाएगा? कोर्ट ने यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई चयन प्रक्रिया में केंद्र को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं, जिससे आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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Hindi News National SC Questions Centre On Election Commissioner Appointments | Opposition Leader Role नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग में नियुक्तियों को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया। कोर्ट ने कहा- अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि CBI डायरेक्टर की सिलेक्शन कमेटी में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में कोई स्वतंत्र सदस्य नहीं रखा गया है। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कमेटी में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल हैं। इनमें बहुमत के आधार पर एक नाम का चयन होता है। अभी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी हैं। दो दिन पहले 12 मई को राहुल ने CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति दी थी। राहुल ने PM आवास पर सिलेक्शन कमेटी की बैठक के बाद कहा- सरकार ने चयन प्रक्रिया को केवल एक औपचारिकता बना दिया है। किसी पहले से तय व्यक्ति का चयन होता है। विपक्ष का नेता रबर स्टांप नहीं होता। कोर्ट ने कहा- नेता विपक्ष दिखावटी हो जाते हैं कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से पूछा, “अगर प्रधानमंत्री एक नाम चुनते हैं और विपक्ष का नेता दूसरा नाम चुनता है, और दोनों में मतभेद होता है, तो क्या तीसरा सदस्य विपक्ष के नेता के पक्ष में जाएगा?” इस पर अटॉर्नी जनरल ने माना कि शायद ऐसा नहीं होगा। इस पर कोर्ट ने कहा- तो फिर सब कुछ कार्यपालिका ही कंट्रोल कर रही है। ऐसे में विपक्ष के नेता को शामिल ही क्यों करते हैं? वे सिर्फ दिखावटी हो जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती कोर्ट ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस कानून के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली समिति करेगी। याचिकाओं में कहा गया है कि यह कानून स्वतंत्र चुनाव आयोग की संवैधानिक आवश्यकता का उल्लंघन करता है, क्योंकि इसमें चयन प्रक्रिया से CJI को बाहर रखा गया है। यह चुनौती सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले ‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ’ के बाद सामने आई है। उस फैसले में कहा गया था कि जब तक संसद कानून नहीं बनाती, तब तक चुनाव आयोग में नियुक्तियां प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI वाली समिति के जरिए की जाएंगी। 12 मई : राहुल बोले- विपक्ष का नेता रबर स्टैंप नहीं राहुल गांधी ने 12 मई को पीएम आवास पर हुई मीटिंग में नए CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति जताई थी। राहुल ने आरोप लगाया कि चयन के लिए जिन 69 उम्मीदवारों की लिस्ट दी है। उन्हें उनकी डिटेल उपलब्ध नहीं कराई। राहुल ने कहा- CBI डायरेक्टर का सिलेक्शन प्रोसेस सिर्फ एक फॉर्मेलिटी बना दिया गया। वे इस पक्षपातपूर्ण काम में शामिल होकर अपनी संवैधानिक ड्यूटी से पीछे नहीं हट सकते। लेकिन कड़े शब्दों में अपनी असहमति जताता हूं। प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई इस बैठक में CJI सूर्यकांत भी शामिल हुए थे। बैठक करीब एक घंटे चली। मीटिंग से निकलने के बाद राहुल ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया। जिसमें अपनी असहमति का कारण बताया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
पथरी की समस्या से हैं परेशान? इस पौधे के पत्तों का करें सेवन, ऑपरेशन कराने की नहीं आएगी नौबत

पाली. कहते हैं कि पुराने समय में जब बीमारियां होती थीं, तब हमारे बुजुर्गों के पास ऐसे कई जादुई आयुर्वेदिक नुस्खे होते थे, जिनसे वे बिना दवाइयों के ही कई रोगों को दूर कर देते थे. माना जाता है कि आयुर्वेद में हर मर्ज का इलाज छिपा है, बस जरूरत सही पहचान की होती है. आज हम आपको एक ऐसे ही करिश्माई पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका नाम ही उसकी खासियत बयां करता है ‘पत्थरचट्टा’. नाम से ही साफ है, पत्थर को चट कर जाने वाला. अगर आप या आपका कोई अपना पथरी की समस्या से परेशान है, तो यह छोटा सा पौधा बड़े काम का साबित हो सकता है. पाली की नर्सरियों में इन दिनों इस पौधे की मांग अचानक बढ़ गई है. आखिर क्या है इस पौधे का राज और कैसे यह शरीर की पथरी को गला देता है? पत्थरचट्टा एक औषधीय पौधा है, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद में कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है. इसकी पत्तियां खासतौर पर फायदेमंद मानी जाती हैं. यह पौधा पेट की समस्याओं, किडनी स्टोन, खांसी, सूजन और कई अन्य बीमारियों में उपयोगी माना जाता है. आजकल लोग प्राकृतिक उपचार की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं, जिससे इस पौधे की मांग तेजी से बढ़ रही है. यही कारण है कि किसान इसे उगाकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. क्यों कहते हैं इसे ‘पत्थरचट्टा’? आयुर्वेद में इस पौधे का नाम इसके सबसे बड़े गुण के कारण पड़ा है. इसको ‘पत्थर को चटकाने वाला’ कहा जाता है. इसमें शरीर के भीतर मौजूद स्टोन (पथरी) को धीरे-धीरे घोलकर (Dissolve) बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है. इसके साथ ही पत्थरचट्टा केवल एक पौधा नहीं, बल्कि बायोएक्टिव कंपाउंड्स की एक प्रयोगशाला है. एल्कलॉइड्स, फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स, लिपिड और स्टेरॉयड. आयरन, कॉपर, जिंक, पोटेशियम, कैल्शियम और सोडियम.इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर भी पाया जाता है. पथरी हो तो ऑपरेशन की नहीं पड़ती जरूरत वर्षों से नर्सरी का संचालन करने वाले विशेषज्ञ दिनेश प्रजापत ने कहा कि पत्थर चट्टा का पौधा स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा माना जाता है. कई तरह के रोगों में यह राहत प्रदान करता है. खासकर जिनको पथरी होती है उन लोगों को अगर इसके पत्तों को पानी के साथ मिलाकर दिया जाए तो उनकी पथरी भी ठीक हो जाती है ओर किसी प्रकार के ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती है. जानिए पत्थरचट्टा के चमत्कारी फायदे किडनी और यूरीनरी हेल्थ: पत्थरचट्टा किडनी स्टोन को खत्म करने के साथ-साथ यूरीनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) को दूर करने में बेहद असरदार है. यह पेशाब की जलन और रुक-रुक कर आने वाली समस्या में राहत देता है. जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत: एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर पत्थरचट्टा हड्डियों के टिशूज को हेल्दी रखता है. यह जोड़ों की सूजन को कम कर दर्द में स्थायी राहत दिलाता है. कैंसर और अल्सर की रोकथाम: वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, यह कैंसर पैदा करने वाली सेल्स के प्रभाव को कम कर सकता है. साथ ही, यह पेट में अल्सर बनने की प्रक्रिया को रोकता है. शुगर और इम्यूनिटी: यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत करने में सहायक है. इसमें एंटी-फंगल और एंटी-माइक्रोबियल गुण भी होते हैं. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
लहसुन मशरूम सब्जी रेसिपी: घर में लहसुन-मशरूम की सब्जी, स्वाद ऐसे बड़े-बड़े शेफ भी हो जाएंगे फेल; यहां पढ़ें आसान तरीका

सब्जी बनाने की सामग्री: 250 ग्राम मशरुम, 10-12 लहसुन की कलियाँ, 1 बड़ा प्याज माइक्रोवेव कटा हुआ, 2 टमाटर छोटा लहसुन कटा, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट, 1/2 छोटा लहसुन हल्दी पाउडर, छवि: फ्रीपिक 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच मसाला तेल या मक्खन, 1 बड़ा चम्मच हरा धनिया पाउडर। इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आये। छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले मशरुम को अच्छे से धोकर साफ कर लें। इसके बाद मध्यम आकार में कट लें। लहसुन की कलियों को प्रभाव कूट लें ताकि उनका स्वाद अच्छे से निकल सके। छवि: फ्रीपिक अब एक कड़ाही में तेल या मक्खन गर्म। इसमें लिखा हुआ है लहसुन और सरसों का तेल। फिर प्याज डाला और उसे गोल्डन ब्राउन होने तक का मौका दिया। इसके बाद अदरक-लहसुन पेस्ट, हरी मिर्च और टमाटर डालें। छवि: एआई टमाटर प्राकृतिक हो जाएं तो हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर नमक और कैटलॉग को अच्छी तरह से भून लें। अब क्यूट हुए मशरूम कड़ही में डाले और मसाले के साथ बढ़िया से पकड़े। छवि: एआई मशरुम पानी छोड़ेंगे, उदाहरणार्थ मध्यम आँच पर 7-8 मिनट तक। जब सब्जी अच्छी तरह पक जाए और मसाला मसाला दिखने लगे, तब ऊपर से गरम मसाला डालें। गैस बंद करें और हरे धनिये से गार्निश करें। छवि: एआई अगर आप ज्यादा क्रीमी स्वाद चाहते हैं तो अंत में 1 मसाला ताज़ा क्रीम दाल ले सकते हैं। मक्खन बनाने में इसका स्वाद और देखने में भी लाजवाब होता है। तीखा पसंद हो तो काली मिर्च भी डाल सकते हैं. छवि: फ्रीपिक मशरुम में प्रोटीन, आहार और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं लहसुन के शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसे में यह सब्जी स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है। छवि: फ्रीपिक
Health Tips: तेज धूप और गर्म हवाएं बनीं मुसीबत! लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स

Last Updated:May 14, 2026, 18:34 IST Summer Health Tips: उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में गर्मी और हीटवेव का असर लगातार बढ़ता जा रहा है. तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को लू और डिहाइड्रेशन जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार के अनुसार इस मौसम में थोड़ी सी सावधानी अपनाकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है. ऋषिकेश: उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में इन दिनों गर्मी और हीटवेव का असर लगातार बढ़ता जा रहा है. सुबह से ही तेज धूप निकल रही है और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं. तापमान बढ़ने के साथ ही हीटवेव का असर भी साफ दिखने लगा है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की गर्मी में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे लू लगने और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी सेहत पर भारी पड़ सकती है.डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. UV किरणों से भी बढ़ सकता है खतरालोकल 18 से बातचीत में आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार ने बताया कि गर्मी और हीटवेव के दौरान सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट यानी UV किरणों का असर भी बढ़ जाता है. ये किरणें त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसलिए सिर्फ काला चश्मा पहनना पर्याप्त नहीं है. बाहर निकलते समय सिर और चेहरे को कपड़े, टोपी या छाते से ढकना जरूरी है. उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप सबसे ज्यादा तेज और खतरनाक होती है. इस समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचना चाहिए. शरीर को ठंडा रखने के लिए क्या करें? एक्सपर्ट के अनुसार इस मौसम में सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना. इस दौरान दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए, चाहे प्यास लगे या नहीं. घर से बाहर निकलने से पहले सत्तू (जौ और बेसन) पीना फायदेमंद रहता है जो शरीर को ठंडक देने के साथ ऊर्जा भी देता है. इसके अलावा बेल का जूस, नींबू पानी और इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी को पूरा करते हैं. इतना ही नहीं तपती गर्मी में गोंद कतीरा भी बहुत फायदेमंद माना जाता है. इसे रातभर पानी में भिगोकर सुबह शरबत या दूध में मिलाकर पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट भी ठीक रहता है. यह भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में भीषण गर्मी से हो न जाएं ये समस्याएं, गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें खास ध्यान गर्मियों में खान-पान में रखें सावधानीइस मौसम में हल्का और ताजा भोजन करना चाहिए. खीरा, ककड़ी, तरबूज और प्याज जैसी चीजें शरीर को ठंडा रखने में मदद करती हैं. इसके अलावा ज्यादा तला-भुना और भारी भोजन से बचना चाहिए. भोजन हल्का रखें और शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखें. खाली पेट धूप में निकलना भी नुकसानदायक हो सकता है, इससे चक्कर और कमजोरी की समस्या हो सकती है. लू के शुरुआती संकेतों को न करें नजरअंदाजवहीं, अगर किसी को सिरदर्द, तेज प्यास, चक्कर, उल्टी, कमजोरी या ज्यादा थकान महसूस हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. ये लू लगने के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत छांव या ठंडी जगह पर आराम करें, पानी पिएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें. बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि गर्मी का असर उन पर जल्दी और ज्यादा होता है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand
वायरल बीमारियां अब जल्दी ठीक क्यों नहीं होती हैं? कोविड के बाद दुनिया में ऐसा क्या बदल गया

Last Updated:May 14, 2026, 18:18 IST Viral Infections Recovery Time: कोविड महामारी से पहले वायरल बुखार 2-3 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन अब छोटी-छोटी परेशानियां ठीक होने में 8 से 10 दिन का वक्त ले रही हैं. डॉक्टर्स की मानें तो कोविड की वजह से करोड़ों लोगों की इम्यूनिटी लंबे समय तक प्रभावित हुई है. इसकी वजह से वायरल इंफेक्शंस से लड़कर उबरने में शरीर को लंबा समय लग रहा है. इसके अलावा भी कई फैक्टर्स रिकवरी टाइम को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. कोविड महामारी के बाद वायरल इंफेक्शन को ठीक होने में ज्यादा समय लग रहा है. Viral Diseases and Immunity: जनवरी 2020 में भारत में कोविड का पहला मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद धीरे-धीरे देश भर में कोरोना संक्रमण फैलने लगा था. इसे कंट्रोल करने के लिए लॉकडाउन भी लगाया गया था, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. करीब 6 साल बाद भी कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अब यह स्थानीय बीमारी बन गई है. कोविड से पहले जब भी लोगों को बुखार आता था, तब एक पैरासिटामोल लेने पर ही अधिकतर लोग ठीक हो जाते थे. कोविड के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं. अब छोटी-मोटी परेशानियां होने पर भी लोगों को सही ट्रीटमेंट के बावजूद रिकवर होने में कई सप्ताह लग जाते हैं. पहले सामान्य वायरल बुखार, सर्दी या फ्लू जैसी बीमारियां कुछ दिनों में ठीक हो जाया करती थीं, लेकिन अब कई लोग शिकायत करते हैं कि वायरल संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है. खांसी हफ्तों तक नहीं जाती, कमजोरी बनी रहती है और शरीर पूरी तरह रिकवर होने में ज्यादा समय लेने लगा है. कोविड-19 महामारी के बाद लोगों के मन में यह सवाल और बढ़ गया है कि आखिर अब वायरल बीमारियां जल्दी ठीक क्यों नहीं होतीं? क्या वायरस पहले से ज्यादा खतरनाक हो गए हैं या फिर दुनिया में कुछ ऐसा बदल गया है, जो शरीर की रिकवरी को प्रभावित कर रहा है. इस बारे में डॉक्टर की राय जान लेते हैं. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कोविड के बाद दुनिया में कई चीजें बदली हैं. सबसे बड़ा बदलाव लोगों की इम्यूनिटी और शरीर के इंफेक्शन से लड़ने के तरीके में देखा गया है. कोरोना वायरस ने सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि शरीर के इम्यून सिस्टम पर भी गहरा असर डाला है. कई रिसर्च में यह सामने आया कि कोविड संक्रमण के बाद कुछ लोगों का इम्यून रिस्पॉन्स लंबे समय तक प्रभावित रह सकता है. यही वजह है कि बाद में होने वाले वायरल संक्रमण से शरीर को उबरने में ज्यादा समय लग रहा है. पहले जो वायरल इंफेक्शन 3-4 दिन में अपने आप ठीक हो जाते थे, उन्हें ठीक होने में अब 10 से 15 दिन का वक्त लग रहा है. डॉक्टर ने बताया कि अब लोग छोटी बीमारी में भी तुरंत एंटीबायोटिक या कई दवाएं लेने लगे हैं, जबकि वायरल संक्रमण पर एंटीबायोटिक असर नहीं करती हैं. जरूरत से ज्यादा दवाओं का इस्तेमाल शरीर के प्राकृतिक रिकवरी सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा कुछ नए वायरस और उनके वेरिएंट पहले की तुलना में ज्यादा संक्रामक हो सकते हैं, जिससे संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है. हालांकि हर लंबे समय तक रहने वाला वायरल संक्रमण गंभीर हो, ऐसा जरूरी नहीं है. अगर बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत या कमजोरी लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. सही खानपान, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव कम करने से इम्यूनिटी को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है. एक्सपर्ट की मानें तो कोविड के बाद लोगों का खानपान और लाइफस्टाइल भी काफी बिगड़ गई है. अब ज्यादातर लोगों की फिजिकल एक्टिविटी काफी कम हो गई है, जंक फूड का सेवन बढ़ गया है और सोने-जागने की टाइमिंग में भी बदलाव आ गया है. इसके अलावा बढ़ता हुआ तनाव भी इम्यून सिस्टम को कमजोर कर रहा है. कोविड के बाद बढ़ता स्क्रीन टाइम भी सेहत के लिए एक चैलेंज बन गया है. इन सभी फैक्टर्स की वजह से भी वायरल संक्रमण को ठीक होने में लंबा वक्त लग रहा है. अगर शरीर को पर्याप्त आराम, सही पोषण और नींद नहीं मिलती, तो वायरल संक्रमण से रिकवरी धीमी हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
पुराने जमाने के ये 7 फूड अब बन गया अमीरों के घरों की शान, हर किसी में सुपरफूड वाला गुण

7 Old Foods Become Superfoods: क्या आपको पता है कि आपके दादा-परदादा क्या खाते हैं. अगर नहीं पता है तो अपने पिताजी से एक बार जरूर पूछिए. तब के जमाने में बाहर की इतनी चीजें नहीं मिलती थी. पिज्जा, बर्गर, चॉकलेट, बिस्कुट, आइस्क्रीम, केक, पेस्ट्रीज आदि नहीं होते थे. वे लोग घर का शुद्ध खाना खाते थे. साबुत अनाज से बनी हुई चीज, फल, हरी सब्जी, सीड्स आदि का भरपूर सेवन करते हैं. यही लंच होता था, यही डिनर और यही नाश्ता. पर समय के साथ खान-पान में प्रोसेस्ड चीजें मिलने लगी. यानी मशीन से तैयार चीजों से मिलावट वाली चीजें. आज फास्ट फूड, जंक फूड की भरमार है जो हमारी सेहत के लिए दुश्मन से कम नहीं है. पर अच्छी बात यह है कि पिछले कुछ सालों में हमारे दादा-परदादा के यही फूड दोबारा से ट्रेंड में आ गए हैं और अब तो यह अमीरों के घरों की शान होने लगी है. आइए इन फूड के बारे में जानते हैं. वो 7 पुराने फूड जो बन गया सुपरफूड मोटा अनाज : मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कुटकी जैसे श्री अन्न आते थे. पहले के जमाने के लोग इसे अपने भोजन का जरूरी हिस्सा मानते थे. लेकिन समय के साथ मोटे अनाजों को चलन खत्म होने लगा. पहले अमीर लोग इसे थाली से हटाया. बाद में यह सिर्फ गरीबों का भोजन हो गया लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में गरीब भी इन अनाजों को खाने से कतराने लगे लेकिन अब ये फूड दोबारा से चलन में आ गए हैं. रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन फूड को सुपरफूड माना है. ये फूड कई बीमारियों से लड़ने में मददगार है. इसलिए अब ये फूड अमीरों के घरों की शान बनने लगे है. इनसे शुगर कम होती है और हार्ट और लिवर डिजीज का खतरा कम हो जाता है. इन फूड को रोस्टेट करके 500 से 2000 प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है. गुड़ : कुछ साल पहले तक गुड़ हमारे खान-पान से एकदम से हट ही गया था. लेकिन बहुत समय तक भारतीय घरों में चीनी की जगह गुड़ ही मिठास का मुख्य स्रोत हुआ करता था. इसे गर्म दूध में मिलाया जाता था, मिठाइयों में घोला जाता था, खाने के बाद खाया जाता था और सर्दियों के व्यंजनों में गर्माहट और ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया जाता था. आज के समय में गुड़ को फिर से एक नेचुरल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. गुड़ का स्वाद गहरा और देसी होता है. इसमें एक पारंपरिक अपनापन महसूस होता है. यही कारण है कि गुड़ फिर से ट्रेंड में आ गया है. घर की बनी चटनियां: पुराने समय में चटनियां महज भोजन के साथ परोसी जाने वाली कोई अतिरिक्त चीज नहीं थीं, बल्कि खाने का एक अनिवार्य हिस्सा मानी जाती थीं. नारियल, मूंगफली, पुदीना, टमाटर और लहसुन की चटनियां भोजन में ताजगी और तीखापन लाती थीं. ये चटनियां सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेमिसाल हैं. आधुनिक समय में लोग फिर से यह समझ रहे हैं कि स्वाद और स्वास्थ्य एक साथ रह सकते हैं, जो साधारण खाने को भी पूरा और संतोषजनक बना देता है. फर्मेंटेड फूड्स: आज दुनिया भर में माइक्रोबायोम और गट हेल्थ की चर्चा होती है लेकिन भारतीय रसोई में इडली, डोसा, ढोकला, कांजी और अचार जैसे फर्मेंटेड (खमीर वाले) खाद्य पदार्थ सदियों से बन रहे हैं. ये चीजें किसी फैशनेबल वेलनेस प्रोडक्ट की तरह नहीं बल्कि मौसम और परंपरा के अनुसार व्यावहारिक रूप से बनाई जाती थीं. आज विज्ञान इन्हें पाचन सुधारने और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए सराह रहा है, लेकिन भारत के लिए यह पुराना और आजमाया हुआ ज्ञान है. शुद्ध घी: इस धरती पर शुद्ध घी सबसे शुद्ध खाद्य पदार्थ है. घी की छवि में पिछले कुछ दशकों में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं. एक समय इसे संदेह की नजर से देखा जाने लगा था लेकिन अब यह एक बार फिर सम्मान के साथ रसोई में लौट आया है. दादा-दादी की पीढ़ी के लिए घी कोई विलासिता नहीं, बल्कि ताकत, पोषण और अपनेपन का प्रतीक था. लोग अब इसे संतुलित मात्रा में अपना रहे हैं क्योंकि यह न केवल शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी सुकून देता है. मखाना: मखाना लंबे समय तक भारतीय घरों में एक सादे स्नैक या व्रत के भोजन के रूप में इस्तेमाल होता रहा. इसे घी में भूनकर खाना एक पुरानी परंपरा है. आज वही मखाना आकर्षक पैकेजिंग में एक ‘डिज़ाइनर स्नैक’ बन चुका है, जिसे हाई-प्रोटीन और लो-फैट डाइट के लिए आदर्श माना जाता है. यह हल्का और बहुउपयोगी है, इसलिए इतने वर्षों बाद भी यह लोगों की पसंदीदा पसंद बना हुआ है. आज अमीरों के घरों में मखाना किसी शान से कम नहीं है. दही: दही भारतीय थाली का एक स्थायी हिस्सा रहा है जो दोपहर के भोजन, छाछ या चावल के साथ खाया जाता था. आज इसे प्रोबायोटिक कहकर दोबारा पेश किया जा रहा है, लेकिन पुराने लोग इसे हमेशा से इसकी ठंडक और पाचन शक्ति के कारण अपनाते आए हैं. पेट खराब होने पर या तपती गर्मी में राहत देने के लिए दही एक शांत और भरोसेमंद उपाय है, जिसे किसी नए रूप की नहीं बल्कि बस फिर से याद करने की जरूरत है.
सबरीमला में महिलाओं की एंट्री मामला, SC का फैसला सुरक्षित:16 दिन सुनवाई चली; कोर्ट ने केंद्र, धार्मिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं की एंट्री और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की सुनवाई गुरुवार को पूरी कर ली है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में 9 जजों वाली बेंच ने 16 दिन तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 25 और 26 के दायरे, संवैधानिक नैतिकता और धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा जैसे कई अहम संवैधानिक सवालों पर फैसला देगी। इनमें सबसे अहम मासिक धर्म के उम्र वाली 10 से 50 साल की महिलाओं की सबरीमाला मंदिर में एंट्री का विवाद है। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों वाली बेंच ने महिलाओं के सबरीमला मंदिर में एंट्री पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेजा गया। केंद्र सरकार महिलाओं की एंट्री के विरोध में है। सबरीमाला मामले के साथ मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद और दरगाहों में प्रवेश और पारसी महिलाओं के अगियारी में प्रवेश से जुड़े मुद्दे भी बड़ी बेंच को भेजे गए थे। मामले की सुनवाई कर रही 9 जजों की बेंच में CJI जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्य बागची भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि सबरीमला मंदिर में मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध धार्मिक आस्था और संप्रदायिक स्वायत्तता का विषय है। केंद्र के मुताबिक, यह मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है।









