Monday, 29 Jun 2026 | 04:56 PM

Trending :

EXCLUSIVE

विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

लंदन के ऑल इंग्लैंड क्लब की हरी घास पर सफेद कपड़ों में टेनिस खेलना हमेशा से परंपरा, नजाकत और एक खास शैली का प्रतीक रहा है। एक दौर था जब विम्बलडन वही खिलाड़ी जीतता था, जिसे विशुद्ध रूप से ‘ग्रास-स्पेशलिस्ट’ माना जाता था। पीट सम्प्रास, बोरिस बेकर, स्टीफन एडबर्ग, रोजर फेडरर जैसे दिग्गजों का राज उनकी घातक ‘सर्व-एंड-वॉली’ (सर्विस करके तुरंत नेट पर आना) टेक्निक पर टिका था। लेकिन नए दौर के खिलाड़ियों ने घास पर खेलने के इस पारंपरिक तरीके को इतिहास बना दिया है। अब खिलाड़ी घास की पिचों को भी ‘हार्ड-कोर्ट’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने अपने उपकरणों, फुटवर्क और खेल शैली में ऐसा बदलाव किया है कि टेनिस का पूरा व्याकरण ही बदल गया है। सोमवार से शुरू हो रहे साल के तीसरे टेनिस ग्रैंड स्लैम विम्बलडन से पहले जानिए कैसे आधुनिक खिलाड़ियों ने खेल की दशा और दिशा बदली है… 1. नए उपकरणों से मिली पावर और स्पिन पहले खिलाड़ी भारी रैकेट और प्राकृतिक (नेचुरल गट) स्ट्रिंग्स का उपयोग करते थे। इस कारण कोर्ट के पीछे से भारी स्पिन के साथ गेंद को हिट करना बहुत मुश्किल होता था। अब खिलाड़ी हल्के कार्बन-फाइबर रैकेट और पॉलिएस्टर स्ट्रिंग्स का इस्तेमाल करते हैं। यह नया कॉम्बिनेशन आधुनिक खिलाड़ियों को हाई स्पीड और भारी ‘टॉपस्पिन’ के साथ गेंद को हिट करने की अनुमति देता है। 2. नेट गेम की जगह बेसलाइन गेम का दबदबा पहले खिलाड़ी ‘सर्व-एंड-वॉली’ रणनीति अपनाते थे। वे तेज सर्विस करते और हवा में ही गेंद को हिट करने के लिए तुरंत नेट की ओर दौड़ पड़ते थे। अब आधुनिक रैकेट्स से ताकतवर शॉट्स आसान हो गए हैं, इसलिए नेट की तरफ भागना बेहद जोखिम भरा हो गया है। खिलाड़ी अब बेसलाइन पर ही जमे रहते हैं और तब तक ताकतवर शॉट्स का आदान-प्रदान करते हैं, जब तक कोई गलती न कर दे। 3. टेनिस कोर्ट की सतहें हो गईं धीमी पहले ग्रास और पारंपरिक हार्ड कोर्ट बहुत चिकने और तेज हुआ करते थे। इन पर गेंद बहुत नीची और तेज उछलती थी। अब इन ताकतवर बेसलाइन शॉट्स से निपटने के लिए टूर्नामेंट्स ने अपनी सतहों को धीमा कर दिया है। ऑल इंग्लैंड क्लब ने कोर्ट को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए घास के मिश्रण को बदल दिया। इससे गेंद ऊंची उछलने लगी और उसकी गति धीमी हो गई, जिससे लंबी रैलियां खेलना संभव हो सका। 4. खिला​ड़ियों के फुटवर्क में बड़ा बदलाव पहले घास के कोर्ट पर, खिलाड़ी किसी भी अप्रत्याशित बाउंस से निपटने के लिए छोटे और तेज कदम रखते थे। आधुनिक एथलीट हार्ड कोर्ट पर स्लाइड करना (फिसलना) सीखते हैं। घास की सतह पर भी जूते की विशेष ग्रिप की मदद से हार्ड कोर्ट जैसी आक्रामक स्लाइडिंग करते हैं। वे ‘ओपन स्टांस’ का उपयोग करते हैं और दमदार शॉट मारने के लिए संतुलन बनाए रखते हुए सुरक्षित रूप से रुकने के लिए पैरों को स्लाइड करते हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
नर्मदापुरम संभाग के कमिश्नर और दो कलेक्टर बदले:श्रीकांत होंगे कमिश्नर, सोमेश मिश्रा कलेक्टर, सोनिया मीणा भोपाल में संभालेगी वित्त विभाग

April 10, 2026/
7:46 am

मप्र सरकार ने नर्मदापुरम संभाग में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कमिश्नर समेत नर्मदापुरम और बैतूल जिलों के कलेक्टर के तबादले...

'पहले त्रिशा के घर से बाहर आओ': विजय स्पार्क विवाद पर तमिलनाडु भाजपा प्रमुख की टिप्पणी | राजनीति समाचार

February 15, 2026/
2:18 pm

आखरी अपडेट:15 फरवरी, 2026, 14:18 IST तमिलनाडु भाजपा प्रमुख नैनार नागेंद्रन ने टीवीके प्रमुख विजय और अभिनेत्री तृषा से संबंधित...

जाह्नवी कपूर ने क्या विवादित शॉट्स पर जताई थी आपत्ति:एक्ट्रेस की कथित पर्सनल चैट लीक; दावा- पेड्डी में राम चरण ने डायरेक्टर को डांटा था

June 6, 2026/
7:46 pm

फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की एक कथित पर्सनल चैट सोशल मीडिया पर...

फेक वीडियो फैलाने वालों पर भड़के राहुल रॉय:कहा- सड़कों पर रहने वाला लावारिस नहीं, मेरे पास घर-गाड़ी है, पैसे मांगने वालों पर भरोसा न करें

May 4, 2026/
10:33 am

वायरल वीडियो से सुर्खियों में आए राहुल रॉय को लगातार ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। एक्टर वीडियो पर...

राजनीति

विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

लंदन के ऑल इंग्लैंड क्लब की हरी घास पर सफेद कपड़ों में टेनिस खेलना हमेशा से परंपरा, नजाकत और एक खास शैली का प्रतीक रहा है। एक दौर था जब विम्बलडन वही खिलाड़ी जीतता था, जिसे विशुद्ध रूप से ‘ग्रास-स्पेशलिस्ट’ माना जाता था। पीट सम्प्रास, बोरिस बेकर, स्टीफन एडबर्ग, रोजर फेडरर जैसे दिग्गजों का राज उनकी घातक ‘सर्व-एंड-वॉली’ (सर्विस करके तुरंत नेट पर आना) टेक्निक पर टिका था। लेकिन नए दौर के खिलाड़ियों ने घास पर खेलने के इस पारंपरिक तरीके को इतिहास बना दिया है। अब खिलाड़ी घास की पिचों को भी ‘हार्ड-कोर्ट’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने अपने उपकरणों, फुटवर्क और खेल शैली में ऐसा बदलाव किया है कि टेनिस का पूरा व्याकरण ही बदल गया है। सोमवार से शुरू हो रहे साल के तीसरे टेनिस ग्रैंड स्लैम विम्बलडन से पहले जानिए कैसे आधुनिक खिलाड़ियों ने खेल की दशा और दिशा बदली है… 1. नए उपकरणों से मिली पावर और स्पिन पहले खिलाड़ी भारी रैकेट और प्राकृतिक (नेचुरल गट) स्ट्रिंग्स का उपयोग करते थे। इस कारण कोर्ट के पीछे से भारी स्पिन के साथ गेंद को हिट करना बहुत मुश्किल होता था। अब खिलाड़ी हल्के कार्बन-फाइबर रैकेट और पॉलिएस्टर स्ट्रिंग्स का इस्तेमाल करते हैं। यह नया कॉम्बिनेशन आधुनिक खिलाड़ियों को हाई स्पीड और भारी ‘टॉपस्पिन’ के साथ गेंद को हिट करने की अनुमति देता है। 2. नेट गेम की जगह बेसलाइन गेम का दबदबा पहले खिलाड़ी ‘सर्व-एंड-वॉली’ रणनीति अपनाते थे। वे तेज सर्विस करते और हवा में ही गेंद को हिट करने के लिए तुरंत नेट की ओर दौड़ पड़ते थे। अब आधुनिक रैकेट्स से ताकतवर शॉट्स आसान हो गए हैं, इसलिए नेट की तरफ भागना बेहद जोखिम भरा हो गया है। खिलाड़ी अब बेसलाइन पर ही जमे रहते हैं और तब तक ताकतवर शॉट्स का आदान-प्रदान करते हैं, जब तक कोई गलती न कर दे। 3. टेनिस कोर्ट की सतहें हो गईं धीमी पहले ग्रास और पारंपरिक हार्ड कोर्ट बहुत चिकने और तेज हुआ करते थे। इन पर गेंद बहुत नीची और तेज उछलती थी। अब इन ताकतवर बेसलाइन शॉट्स से निपटने के लिए टूर्नामेंट्स ने अपनी सतहों को धीमा कर दिया है। ऑल इंग्लैंड क्लब ने कोर्ट को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए घास के मिश्रण को बदल दिया। इससे गेंद ऊंची उछलने लगी और उसकी गति धीमी हो गई, जिससे लंबी रैलियां खेलना संभव हो सका। 4. खिला​ड़ियों के फुटवर्क में बड़ा बदलाव पहले घास के कोर्ट पर, खिलाड़ी किसी भी अप्रत्याशित बाउंस से निपटने के लिए छोटे और तेज कदम रखते थे। आधुनिक एथलीट हार्ड कोर्ट पर स्लाइड करना (फिसलना) सीखते हैं। घास की सतह पर भी जूते की विशेष ग्रिप की मदद से हार्ड कोर्ट जैसी आक्रामक स्लाइडिंग करते हैं। वे ‘ओपन स्टांस’ का उपयोग करते हैं और दमदार शॉट मारने के लिए संतुलन बनाए रखते हुए सुरक्षित रूप से रुकने के लिए पैरों को स्लाइड करते हैं।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.