दिल्ली-NCR में CNG आज ₹1 महंगी:दो दिन में दाम ₹3 बढ़े, दिल्ली में ₹80.09 और नोएडा-गाजियाबाद में ₹88.70 किलो हुई

दिल्ली-NCR में आज यानी 17 मई से CNG के दाम 1 रुपए बढ़ गए हैं। दिल्ली में अब CNG 80.09 रुपए किलो में मिलेगी। वहीं नोएडा-गाजियाबाद में इसके दाम 88.70 रुपए हो गए हैं। 2 दिनों में कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को CNG के दाम 2 रुपए प्रति किलो बढ़ाए थे। पेट्रोल-डीजल ₹3-3 महंगे हुए 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़ी थीं। इससे दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं, कंपनियों ने प्रमुख शहरों में CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी कर दी। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए ₹79.09 खर्च करने पड़ रहे हैं। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रही है तो पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। क्या अभी और बढ़ेंगे दाम? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹3 की यह बढ़ोतरी काफी नहीं है। अपना घाटा पूरी तरह खत्म करने और ‘ब्रेक-ईवन’ यानी नो प्रॉफिट-नो लॉस की स्थिति में आने के लिए इन कंपनियों को अभी पेट्रोल के दाम ₹28 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹32 प्रति लीटर तक बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल पेट्रोल पर 29.5% और डीजल पर 36.5% की कमी बनी हुई है। अगर ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई इसी तरह प्रभावित रही, तो आने वाले दिनों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है। ——————————————————-
दिल्ली-NCR में CNG आज ₹1 महंगी:दो दिन में दाम ₹3 बढ़े, दिल्ली में ₹80.09 और नोएडा-गाजियाबाद में ₹88.70 किलो हुई

दिल्ली-NCR में आज यानी 17 मई से CNG के दाम 1 रुपए बढ़ गए हैं। दिल्ली में अब CNG 80.09 रुपए किलो में मिलेगी। वहीं नोएडा-गाजियाबाद में इसके दाम 88.70 रुपए हो गए हैं। 2 दिनों में कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई को CNG के दाम 2 रुपए प्रति किलो बढ़ाए थे। पेट्रोल-डीजल ₹3-3 महंगे हुए 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3-3 रुपए प्रति लीटर बढ़ी थीं। इससे दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच गया। वहीं, कंपनियों ने प्रमुख शहरों में CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी कर दी। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए ₹79.09 खर्च करने पड़ रहे हैं। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रही है तो पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। क्या अभी और बढ़ेंगे दाम? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ₹3 की यह बढ़ोतरी काफी नहीं है। अपना घाटा पूरी तरह खत्म करने और ‘ब्रेक-ईवन’ यानी नो प्रॉफिट-नो लॉस की स्थिति में आने के लिए इन कंपनियों को अभी पेट्रोल के दाम ₹28 प्रति लीटर और डीजल के दाम ₹32 प्रति लीटर तक बढ़ाने की जरूरत है। फिलहाल पेट्रोल पर 29.5% और डीजल पर 36.5% की कमी बनी हुई है। अगर ईरान युद्ध के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई इसी तरह प्रभावित रही, तो आने वाले दिनों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है। ——————————————————-
धार भोजशाला में नई गाइडलाइन के बाद शुरू हुई पूजा-अर्चना:गोमूत्र से शुद्धिकरण कर गर्भगृह में मां वाग्देवी की महाआरती, श्रद्धालुओं में उत्साह

धार की ऐतिहासिक भोजशाला में एएसआई की नई गाइडलाइन लागू होने के बाद पूजा-अर्चना शुरू हो गई। आज (रविवार) सुबह बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु मां वाग्देवी के चित्र लेकर भोजशाला पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान गर्भगृह को रंगोली से आकर्षक रूप से सजाया गया। पूजा से पहले परिसर को गोमूत्र से शुद्ध किया गया। भोजशाला परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को भी गर्भगृह में स्थापित किया गया। सूर्योदय के साथ ही मंत्रोच्चार शुरू हो गया। श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला और उन्होंने नृत्य कर खुशी जाहिर की। इससे पहले शनिवार शाम केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और मांडू के संत महामंडलेश्वर निसर्ग दास जी महाराज भी पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। वहीं कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा ने भी भोजशाला पहुंचकर पूजा की। उन्होंने कहा कि मैं सभी लोगों को बधाई देती हूं। पहले शुक्रवार के दिन यहां तनाव का माहौल रहता था, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो गई है। अब कोई भी श्रद्धालु कभी भी आकर दर्शन कर सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भोजशाला को और बेहतर तरीके से विकसित किया जाएगा, ताकि देश-प्रदेश से लोग यहां आएं और मां वाग्देवी का आशीर्वाद प्राप्त करें। सूर्योदय के साथ ही हिंदू समाजजन भोजशाला पहुंचे भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित चौधरी आज (रविवार) सूर्योदय से ही हिंदू समाज और भोज उत्सव समिति के कार्यकर्ता भोजशाला पहुंच गए थे। सुबह से देवी अनुष्ठान और शुद्धिकरण का कार्य जारी है। दोपहर 11:45 बजे हिंदू समाज की ओर से महाआरती की जाएगी। उन्होंने कहा कि भोजशाला को नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी है। इधर, सरकार का कहना है कि भोजशाला को उसके पुराने वैभव के साथ संवारा जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इसे भव्य रूप देने की बात कही है। देखिए तस्वीरें…
Health Tips: गर्मी में पसीने की बदबू से हैं परेशान? अपनाएं ये घरेलू उपाय, दिनभर रहेंगे फ्रेश

Last Updated:May 17, 2026, 09:07 IST Remove Underarm Smell in Summer: पसीना आना शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिससे शरीर ठंडा रहता है, लेकिन अगर इससे दुर्गंध आने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. गर्मी के मौसम में पसीने की मात्रा और बदबू दोनों बढ़ जाती है, जिससे पूरे दिन थकान और चिड़चिड़ापन बना रहता है. ऐसे में जरूरी है कि कुछ ऐसे घरेलू उपायों को अपनाया जाए जो सस्ते, सुरक्षित और प्रभावी हों. (रिपोर्ट: सावन पाटिल/खंडवा) गर्मी के मौसम में तेज धूप, उमस और बढ़ते तापमान के चलते पसीना आना आम बात है, लेकिन इसके साथ आने वाली बदबू कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाती है. बाहर निकलते ही शरीर से आने वाली दुर्गंध न सिर्फ खुद को असहज बनाती है, बल्कि दूसरों के सामने शर्मिंदगी भी महसूस होती है. ऐसे में लोग परफ्यूम और डियोड्रेंट का सहारा लेते हैं, लेकिन इनका असर कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है. डॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार, अगर आप बिना केमिकल वाले उपाय अपनाना चाहते हैं तो कुछ आसान घरेलू तरीके आपकी इस समस्या को जड़ से खत्म कर सकते हैं और आपको पूरे दिन फ्रेश बनाए रख सकते हैं. सबसे आसान तरीका है नहाने के पानी में नींबू का इस्तेमाल करना. नींबू में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो शरीर पर मौजूद उन बैक्टीरिया को खत्म करते हैं जो बदबू पैदा करते हैं. नहाने से पहले पानी में नींबू की कुछ बूंदें मिलाकर नहाने से दिनभर ताजगी बनी रहती है. Add News18 as Preferred Source on Google इसके अलावा फिटकरी का पानी भी बेहद असरदार माना जाता है. फिटकरी को पानी में घोलकर नहाने से स्किन के पोर्स टाइट होते हैं और पसीना कम आता है. इसके नियमित उपयोग से शरीर की दुर्गंध धीरे-धीरे खत्म होने लगती है. नारियल तेल और कपूर का मिश्रण भी एक देसी डियोड्रेंट की तरह काम करता है. इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा को ताजगी देते हैं और बदबू को दूर रखते हैं. नहाने के बाद इसे अंडरआर्म्स में लगाने से ज्यादा फायदा मिलता है. डॉक्टर अनिल पटेल यह भी बताते हैं कि पसीने की बदबू सिर्फ बाहर की सफाई से नहीं, बल्कि शरीर के अंदर की स्थिति से भी जुड़ी होती है. इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है. साथ ही हल्का और ताजा भोजन करें और ज्यादा मसालेदार या जंक फूड से दूरी बनाए रखें, इससे शरीर में टॉक्सिन्स कम होंगे और बदबू भी कम आएगी. गर्मी में कपड़ों का चुनाव भी बहुत मायने रखता है. सिंथेटिक कपड़ों की बजाय कॉटन कपड़े पहनना बेहतर होता है, क्योंकि ये पसीने को जल्दी सोख लेते हैं और शरीर को ठंडा बनाए रखते हैं. इससे दुर्गंध की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है. हमारे खान-पान का असर शरीर की बदबू पर भी पड़ता है. ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाने से शरीर में बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जिससे पसीने की बदबू तेज हो जाती है. इसलिए खाने में हरी सब्जियां, फल और ज्यादा पानी वाले फूड्स शामिल करें. अगर आप इन आसान घरेलू उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं, तो बिना परफ्यूम के भी पूरे दिन फ्रेश और कॉन्फिडेंट महसूस कर सकते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
World Hypertension Day: कितना होना चाहिए नॉर्मल ब्लड प्रेशर? क्या 140/90 बीपी होने से आ सकता है हार्ट अटैक

World hypertension day 2026: आज विश्व उच्च रक्तचाप दिवस यानी वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे सेलिब्रेट किया जा रहा है. इसकी शुरुआत साल 2006 में World Hypertension League द्वारा की गई थी. हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, जो देश-दुनिया भर के लाखों लोगों में बेहद कॉमन समस्या बनती जा रही है. हाई बीपी होना हार्ट की सेहत के लिए खतरनाक है, क्योंकि अत्यधिक उच्च रक्तचाप स्ट्रोक, हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट, ब्रेन स्ट्रोक आदि का कारण बन सकता है. वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे हर साल 17 मई को मनाया जाता है एक खास थीम और विषय के तहत. इस बार की थीम रखी गई है ‘उच्च रक्तचाप को मिलकर नियंत्रित करें'(Controlling Hypertension Together). वर्ल्ड हाइपरटेंशन लोगों को रेगुलर ब्लड प्रेशर की जांच करने, हेल्दी हार्ट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है. एक बात हमेशा ध्यान रखें कि जब तक आपका दिल धड़क रहा है, तब तक आपकी सांसें चल रही हैं, आप जीवित हैं. ऐसे में आप अपने ब्लड प्रेशर को सही रखकर ही अपने दिल की भी हिफाजत कर सकते हैं. ऐसे में ये भी जानना जरूरी है कि एक नॉर्मल व्यक्ति का ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए? कितना रक्तचाप सेहत के लिए खराब हो सकता है? ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए क्या करना चाहिए, कैसे करें रक्तचाप की जांच? उच्च रक्तचाप से बचाव के उपाय क्या हैं? हाई ब्लड प्रेशर गंभीर स्वास्थ्य संकट कैसे है? रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में प्रत्येक वर्ष लगभग 11 लाख लोगों की मौत हाई ब्लड प्रेशर से संबंधित समस्याओं के कारण हो जाती है. ऐसे में उच्च रक्तचाप सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. क्यों कहते हैं हाई बीपी को‘साइलेंट किलर’? एक्सपर्ट्स हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं, क्योंकि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार,यदि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 mmHg या उससे अधिक रहता है, तो यह उच्च रक्तचाप कहलाता है. डब्ल्यूएचओ की 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में लगभग 1.4 बिलियन लोग हाई बीपी से प्रभावित हैं. इनमें से लगभग 44 प्रतिशत लोगों को यह तक पता नहीं होता कि वे इस बीमारी से जूझ रहे हैं. कई मामलों में बीमारी का पता तब चलता है, जब हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति सामने आ जाती है. ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को दो संख्याओं में मापा जाता है- सिस्टोलिक (ऊपरी संख्या) : इसमें हार्ट ब्लड पंप करता है.डायस्टोलिक (निचली संख्या) : इसमें दिल आराम की स्थिति में होता है. सामान्य ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए?120/80 mmHg को नॉर्मल ब्लड प्रेशर कहा जाता है.कब माना जाता है हाई ब्लड प्रेशर? थोड़ा बढ़ा हुआ BPजब 130/80 से 139/89 mmHg हो तो इसे थोड़ा बढ़ा हुआ बीपी माना जाता है. ऐसे में जीवनशैली सुधारने की जरूरत होती है. उच्च रक्तचाप (Hypertension) 140/90 mmHg या इससे अधिक को उच्च रक्तचाप कहते हैं. इसे समय रहते कंट्रोल ना किया जाए तो आपको हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी रोग का खतरा बढ़ सकता है. बहुत ज्यादा खतरनाक बीपी180/120 mmHg या इससे भी अधिक होना एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. लो ब्लड प्रेशर कितना होता है?कम रक्तचाप (Low BP) 90/60 mmHg या इससे भी कम. इसमें आपको कमजोरी, चक्कर, धुंधला दिखना या बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है. खराब जीवनशैली बढ़ा रहा हाई बीपी का खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, आजकल लोगों के खानपान में नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है. कभी भी प्रतिदिन 5 ग्राम यानी लगभग एक चम्मच से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए,लेकिन लोग फास्ट फूड, पैकेटबंद स्नैक्स पर इतने अधिक निर्भर होते जा रहे हैं कि ये शरीर में सोडियम बढ़ाकर बीपी को तेजी से बढ़ा देते हैं. साथ ही लगातार घंटों एक ही जगह पर बैठकर काम करते रहना. एक्सरसाइज न करना, स्ट्रेस, एंजायटी, डिप्रेशन, फिजिकल एक्टिविटी कम आदि बातें हाई बीपी के बड़े कारण बन रहे हैं. तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ते हैं, जो ब्लड प्रेशर को तेजी से प्रभावित करते हैं. प्रदूषण के कारण भी बढ़ रहा ब्लड प्रेशर हालिया शोधों में यह बात सामने आई है कि हवा में मौजूद पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कण रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर देते हैं. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और हार्ट डिजीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के उपाय विशेषज्ञों के अनुसार, सही खानपान, रेगुलर एक्सरसाइज, समय पर दवा लेने से हाई बीपी को काफी हद तक कंट्रोल में रख सकते हैं. इस बार हाई ब्लड प्रेशर डे की थीम ‘एक साथ मिलकर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें’ रखी गई है. इसका मतलब ये है कि आज परिवार और समाज को मिलकर इस बीमारी से लड़ने की जरूरत है. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखना है तो आप नमक कम खाएं, हर दिन व्यायाम करें, स्ट्रेस दूर करें, धूम्रपान और शराब के सेवन से परहेज करें, नियमित BP जांच कराएं, डॉक्टर की सलाह अनुसार दवा लें.
फ्रिज में भूलकर भी न रखें ये 5 सब्जियां, वरना स्वाद और पोषण दोनों हो जाएंगे खराब, जानें वजह

Last Updated:May 17, 2026, 08:58 IST Never keep these foods in Fridge: वैसे तो हम लोग खाना बनने के बाद बचा हुआ प्याज, लहसुन और अदरक अक्सर फ्रिज में रख देते हैं, लेकिन यह हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है. फ्रिज की नमी और ठंडक इन चीजों को नरम बना देती है, जिससे बैक्टीरिया और फफूंदी जल्दी लग जाती है. प्याज और लहसुन फ्रिज में रखने से उनका स्वाद बदल जाता है और हानिकारक कंपाउंड्स बन सकते हैं. इससे पाचन संबंधी समस्या, एसिडिटी और यहां तक कि फूड पॉइजनिंग का खतरा भी बढ़ जाता है. हमें इन चीजों को सूखी और हवादार जगह पर जालीदार टोकरी में रखनी चाहिए. किचन में खाना बनाते समय कई चीजें बच जाती हैं, जिन्हें हम फ्रेश रखने के लिए फ्रिज में रख देते हैं, लेकिन कुछ खाद्य पदार्थ फ्रिज में रखने से जल्दी खराब हो जाते हैं या अपना स्वाद खो देते हैं, प्याज, लहसुन, खीरा, आलू और टमाटर को फ्रिज में रखने से नमी के कारण फफूंदी लग जाती है और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. मसाले भी नमी सोखकर अपना स्वाद और सुगंध खो देते हैं, दही, रोटी और पकाए हुए भोजन को फ्रिज में रखना ठीक है, लेकिन इन कच्ची सब्जियों और मसालों को ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर रखना बेहतर है. सही तरीके से स्टोरेज करने से चीजें लंबे समय तक ताज़ा रहती हैं और स्वास्थ्य को भी नुकसान नहीं पहुंचता है. खीरे को बहुत ज्यादा ठंड में रखने से उसकी सतह पर पानी जमा होने लगता है. इस नमी के कारण खीरा जल्दी सड़ने और गलने लगता है. फ्रिज की ठंडक खीरे की प्राकृतिक ताजगी को खत्म कर देती है और उसकी बनावट भी बिगड़ जाती है. अगर खीरे को फ्रिज में रखना ही है तो ज्यादा दिनों तक न रखें. बेहतर है कि 2-3 दिन से अधिक न रखें और इस्तेमाल से पहले कमरे के तापमान पर थोड़ी देर रख लें. ताजा खीरा स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, इसलिए सही तरीके से स्टोर करें. आलू को फ्रिज में रखना एक आम गलती है. ठंडे तापमान में आलू का स्टार्च तेजी से शुगर में बदलने लगता है. इससे आलू का स्वाद थोड़ा मीठा हो जाता है और पकाने पर उसका रंग भी काला या भूरा पड़ सकता है. फ्रिज की नमी आलू को अंकुरित भी कर सकती है. आलू को हमेशा सूखी, ठंडी और अंधेरी जगह पर जालीदार टोकरी या बोरे में रखें, जहां हवा अच्छी तरह पहुंच सके. इस तरह आलू लंबे समय तक ताजा और स्वादिष्ट बना रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google प्याज को फ्रिज में रखने से उसमें नमी तेजी से बढ़ जाती है. ठंडी और नम हवा के कारण प्याज जल्दी नरम, चिपचिपा और सड़ने लगता है. कई बार इसमें फफूंदी भी लग जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। फ्रिज की नमी प्याज की प्राकृतिक लाइफ को कम कर देती है और स्वाद भी बिगाड़ देती है। सलाह: प्याज को हमेशा खुली, सूखी और हवादार जगह पर जालीदार टोकरी या थैले में रखें। जहां हवा अच्छी तरह पहुंच सके। इस तरह प्याज लंबे समय तक ताजा और स्वादिष्ट बना रहता है. लहसुन को रेफ्रिजरेटर में रखने से उसमें जल्दी अंकुर निकलने लगते हैं. फ्रिज की ज्यादा ठंड और नमी लहसुन की क्वालिटी को तेजी से खराब कर देती है. इससे उसके दाने नरम, चिपचिपे और बेकार हो जाते हैं. स्वाद और सुगंध भी कम हो जाती है. लहसुन एक सूखी मसाला है, जो नमी बर्दाश्त नहीं कर पाता. फ्रिज में रखने से फफूंदी लगने का भी खतरा बढ़ जाता है. इसके लिए लहसुन को हमेशा कमरे के सामान्य तापमान पर सूखी, हवादार और अंधेरी जगह पर जालीदार टोकरी या खुली थाली में रखें. इस तरह यह महीनों तक ताजा, स्वादिष्ट और गुणकारी बना रहता है. टमाटर को फ्रिज में रखने से उसका टेक्सचर बदल जाता है. ठंडा तापमान टमाटर की प्राकृतिक नरमी को प्रभावित करता है, जिससे वह जल्दी मुलायम, गूदेदार और बेस्वाद हो जाता है. स्वाद और सुगंध भी काफी कम हो जाती है. फ्रिज की ठंडक टमाटर में मौजूद एंजाइम्स को निष्क्रिय कर देती है, जिससे पकने की प्रक्रिया रुक जाती है और टमाटर जल्दी खराब होने लगते हैं. इसके लिए पके हुए टमाटर को हमेशा कमरे के सामान्य तापमान पर छायादार और हवादार जगह पर रखें. अगर ज्यादा मात्रा में हैं तो उन्हें अलग-अलग रखकर स्टोर करें. इससे टमाटर लंबे समय तक ताजा, रसदार और स्वादिष्ट बने रहते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
विमेंस टी-20 वर्ल्डकप के लिए पाकिस्तान टीम घोषित:फातिमा सना को कप्तान बनाया, 14 जून को भारत से पहला मैच

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने अगले महीने होने वाले विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के लिए 15 सदस्यीय टीम घोषित की है। टीम आयरलैंड में होने वाली ट्राई सीरीज में भी हिस्सा लेगी। ऑलराउंडर फातिमा सना को लगातार दूसरे एडिशन के लिए इस टीम का कप्तान बनाया गया है। टीम में निरंतरता के साथ कई नए चेहरों को भी जगह मिली है। पाकिस्तान 14 जून को बर्मिंघम में भारत के खिलाफ मैच से अभियान शुरू करेगा। इससे पहले टीम 28 मई से 4 जून तक डबलिन में वेस्टइंडीज और आयरलैंड के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज खेलेगी। इरम जावेद पर भरोसा कायम जिम्बाब्वे को 3-0 से हराया, फातिमा की 15 बॉल में फिफ्टी हाल ही में पाकिस्तान ने होम ग्राउंड पर जिम्बाब्वे को 3-0 से हराया था। इस दौरान कप्तान फातिमा सना ने महिला टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट का सबसे तेज अर्धशतक 15 गेंदों में लगाया था। टीम इसी फॉर्म को वर्ल्ड कप में जारी रखना चाहेगी। पाकिस्तान का स्क्वॉड फातिमा सना (कप्तान), आलिया रियाज, आयशा जफर, डायना बेग, ऐमन फातिमा, गुल फिरोजा, इरम जावेद, मुनीबा अली (विकेटकीपर), नशरा संधू, नतालिया परवेज, रामीन शमीम, सादिया इकबाल, सायरा जबीन, तस्मिया रुबाब और तुबा हसन टीम में शामिल हैं। रिजर्व खिलाड़ी: अंबर कायनात, मोमिना रियासत, सदफ शम्स, सिदरा अमीन, सैयदा अरूब शाह और उम्मे हानी।
Russian Yogini Annapurnas Agni Tapasya in 42°C

हवा में उड़ती गरम राख, गोबर के कंडों (उपलों) से सुलगती 9 धूणी (अग्निकुंड) और उनके ठीक बीचों-बीच, तपते हुए अंगारों के घेरे में शांत मुद्रा में बैठी एक विदेशी महिला। . यह कोई आम नजारा नहीं, रूस से आईं योगिनी अन्नपूर्णा नाथ की ‘अग्नि तपस्या’ है। उन्होंने राजस्थान आकर नाथ संप्रदाय की दीक्षा ली थी। 3 मई को शुरू हुई यह तपस्या 25 मई तक चलने वाली है। रोज सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक अन्नपूर्णा नाथ तपस्या करती हैं। दैनिक भास्कर की टीम इस योगिनी से मिलने पुष्कर (अजमेर) पहुंची। उनसे जाना कि आखिर इस कठोर अग्नि तपस्या को कैसे कर पा रही हैं, इसका मकसद क्या है? ‘पिन-ड्रॉप साइलेंस’ और कंटीले तारों का घेरा अजमेर से पुष्कर मार्ग पर 12 किलोमीटर आगे बढ़ने पर संत बाबा सीताराम दास का समाधि स्थल आता है। जैसे ही हम मुख्य द्वार से अंदर जाने लगते हैं, एक सेवादार हाथ जोड़कर टोकता है- आगे जाना है तो जुबान पर ताला लगा लीजिए। जरा सी आवाज और पैर की आहट भी उनका (अन्नपूर्णा नाथ) ध्यान भटका सकती है। उनकी तपस्या भंग हो सकती है। आगे बढ़ने पर हमारी नजरें उस जगह टिक जाती हैं जहां सुरक्षा के लिए चारों तरफ कंटीले तारों की फेंसिंग (तारबंदी) की गई है। भीतर का दृश्य स्तब्ध कर देने वाला था। चारों तरफ से आग की लपटें उठ रही थीं। वहां का तापमान इस वक्त सामान्य से कहीं ज्यादा, करीब 48 डिग्री सेल्सियस महसूस हो रहा था। पूरे शरीर पर भस्म (राख) लपेटे योगिनी अन्नपूर्णा और उनके गुरु योगी दीपक नाथ इस दहकते घेरे के बीच साधना में लीन थे। अजमेर से पुष्कर मार्ग पर 12 किलोमीटर आगे संत बाबा सीताराम दास का समाधि स्थल है। यहां दीपक नाथ और अन्नपूर्णा नाथ साधना में लीन रहते हैं। धूणी की परिक्रमा आस-पास के कुछ श्रद्धालु वहां धूणी की परिक्रमा कर बिना शोर किए लौट रहे थे। वहां सेवा में जुटे एक सेवक रोहित से बात हुई। उनसे पूछा कि तपस्या कितने घंटे चलती है। उन्होंने बताया- 3 घंटे। हमारा अगला सवाल था- इन्हें कैसे पता चलता है कि अब समाप्त करने का समय आ गया है। इस पर सेवक ने कहा कि उन्हें खुद से ही पता चल जाता है। हमने तपस्या पूरी होने का इंतजार किया। साधना पूर्ण करने के बाद धूणी से उठते समय प्रणाम करती हुई योगिनी अन्नपूर्णा नाथ। ठीक 2 बजते ही योगियों की आंखें खुलीं घड़ी में जैसे ही दोपहर के ठीक 2 बजे, चमत्कारिक रूप से दोनों योगियों की आंखें खुलीं। उन्होंने जलती धूणी को प्रणाम किया, योगिनी अन्नपूर्णा ने अपने गुरु के चरण छुए और शरीर से भस्म साफ करने चली गईं। काफी देर इंतजार के बाद योगिनी हमसे बातचीत करने के लिए तैयार होती हैं। पढ़िए योगिनी अन्नपूर्णा नाथ से हुई बातचीत के प्रमुख अंश… सवाल : आप रूस से हैं और हमें पता चला कि आपका नाम अन्नपूर्णा है, ये नाम किसने दिया? जवाब : मेरा नाम अन्नपूर्णा नहीं, जबकि योगिनी अन्नपूर्णा नाथ है। मुझे ये नाम मेरे गुरु ने दिया था। मेरे गुरु मुझे सोमनाथ में मिले थे। सवाल : इससे पहले आपका क्या नाम था? जवाब : मैं नहीं जानती मेरा पहले क्या नाम था। बस यही एक नाम है और ये नाम भगवान के नाम पर है। सवाल : इतनी भीषण गर्मी में कैसे एक जगह बैठकर तप कर पा रही हैं? जवाब : ये जानने के लिए तो आपको भी ऐसी साधना में आना होगा। मैं नहीं जानती कि तापमान कितना ज्यादा है और कितनी धूप है। इसके लिए आपको गहराई में जाना पड़ेगा कि ये सब कैसे संभव है। फिलहाल मेरे पास इसका जवाब नहीं है। सवाल : हमने देखा जब आप साधना में लीन थीं, तब कुछ लोग आपकी धूणी की परिक्रमा करने भी आ रहे थे? जवाब : हां… जब मैं ध्यान में बैठती हूं तो आसपास के लोग परिक्रमा करने आते हैं। मैंने कुछ महिलाओं की पायल की आवाज सुनी, जिससे मुझे ये आभास हुआ। तपस्या पूरी करने के बाद योगिनी अन्नपूर्णा नाथ और उनके गुरु दीपक नाथ ने दैनिक भास्कर से बात की। सवाल : आप यहां पर कैसे रहती हैं और तप के लिए दिनचर्या क्या रहती है? जवाब : ये बताना सही नहीं होगा। हमारी दिनचर्या हर दिन एक जैसी नहीं रहती है। किसी से शेयर नहीं कर सकते। यह गुप्त है। हम तपस्या करते हैं। ये मन और नगर की शांति के लिए होता है तो परिणाम सबके सामने रहता है। सवाल : इस जगह (समाधि स्थल) के बारे में आप क्या जानती हैं? जवाब : इस जगह पर हिंदू-मुस्लिम दोनों कम्युनिटी के लोग आते हैं। साधुओं की ये तपोभूमि है। एक हजार साल से भी ज्यादा पुरानी यह जगह है। सवाल : आप भारत पहली बार कब आई थीं? क्या आपको यहां पर आध्यात्म ने आकर्षित किया? जवाब : मैं पहली बार भारत जनवरी 2005 में बतौर टूरिस्ट आई थी। पुष्कर आई तो यहां नाथ बाबाओं से मिली। भारत में मुझे यहां की मिट्टी ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया। जब यहां पर आकर फ्लाइट से उतरते हैं और सांस लेते हैं तो मिट्टी की खुश्बू के आगे सब कुछ खत्म हो जाता है। तपस्या के दौरान योगिनी अन्नपूर्णा नाथ। अन्नपूर्णा नाथ ने बताया कि उन्हें नाथ की उपाधि गुरु दीपक नाथ से मिली है। सवाल : नाथ संप्रदाय के बारे में क्या जानती हैं और इसके बारे में कैसे पता चला? जवाब : मैं नाथ संप्रदाय के बारे में कुछ नहीं जानती थी, क्योंकि ये आम दुनिया के लिए सीक्रेट है। यहां आकर नाथ साधुओं से मिली तो संप्रदाय के बारे में पता चला। इसके बाद मैं पुष्कर आने लगी। साल 2016 में अपने गुरु दीपक नाथ से दीक्षा ली। इसके बाद मुझे अन्नपूर्णा नाम और नाथ की उपाधि मिली। सवाल : भारतीय कल्चर से इतनी गहराई से कैसे कनेक्ट हुईं? जवाब : मैं भारत में 52 शक्तिपीठ की यात्रा भी कर रही हूं। अब तक 35 शक्तिपीठ पर जा चुकी हूं। मेरे गुरुजी दीपक साधना और भक्ति को लेकर काफी स्ट्रिक्ट हैं। यही वजह है मैं जल्द ही यहां की कल्चर से कनेक्ट हो गई। सवाल : आपकी नजर में आध्यात्म क्या है?
गुड़ शरबत: 45 डिग्री की भीषण गर्मी का तोड़, रोजाना ठंडक से गुड़ का शरबत; बिल्कुल ताज़ा बिल्कुल कूल-कूल

17 मई 2026 को 08:04 IST पर अपडेट किया गया 45 डिग्री की इस झुलसी हुई गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा रखना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में बाजार में केमिकल युक्त कोल्ड ड्रिंक पीने की जगह, पुराना पारंपरिक ‘गुड़ का शरबत’ एक बेहतरीन और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। यह सिर्फ आपको तुरंत ताजगी देता है, बल्कि लू और डायग्निशन से भी सीखता है। अनुसरण करना : शरीर का तापमान प्राकृतिक रूप से विकसित होता है। एसिडिटी और पेट की जलन को मिनटों में शांत करता है। पानी की कमी) को रोक में सबसे प्रभावशाली है। छवि: मेटा एआई गुड़ में मौजूद ब्लड आयरन की कमी को दूर करने में मदद मिलती है। गर्मी में होने वाली थकान और निर्बलता को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। छवि: मेटा एआई मैग्नेशियम और असेट्स जैसे एलिमेंट्स को रिलैक्स होते हैं। नींद भी अच्छी आती है। छवि: मेटा एआई गुड़ का शरबत 100% प्राकृतिक है। यह लिवर को डिटॉक्स करने और शरीर की गंदगी साफ करने में भी सहायक है। छवि: मेटा एआई देसी, गुड़ ताज़ा नींबू, पुदीना दोस्त, काला नमक और जीरा। छवि: मेटा एआई गुड़ को पानी में भिगोकर अच्छी तरह का नासा लें। नींबू का रस, काला नमक और इसके अलावा जीरा का रस। ठंडा पानी और पुदीने की सब्जी। बर्फ का टुकड़ा ठंडा-ठंडा सर्व करें। छवि: मेटा एआई बाहर जाने से पहले एक ग्लास पॉट, यह लू से शुरू होता है। इस शरबत में कोई कृत्रिम रंग या प्रिजर्वेटिव नहीं होता है। छवि: मेटा एआई यह बच्चों और बुजुर्गों, सभी के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक पेय है। छवि: मेटा एआई द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 17 मई 2026 को 08:04 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)गुड़ शरबत कैसे बनाएं(टी)गुड़ शरबत रेसिपी(टी)गर्मी की गर्मी को कैसे मात दें(टी)पेट को ठंडक देने के लिए ग्रीष्मकालीन पेय(टी)गर्मी के लिए प्राकृतिक ऊर्जा पेय(टी)हीट स्ट्रोक के लिए घरेलू उपचार(टी)गुड़ का पानी पीने के फायदे(टी)भारतीय पारंपरिक ग्रीष्मकालीन पेय(टी)कोल्ड ड्रिंक का स्वस्थ विकल्प(टी)शरीर को हाइड्रेटेड कैसे रखें
‘हर्ब्स की रानी’ के पत्ते ही नहीं मंजरी, बीज भी हैं औषधीय गुणों का खजाना, गर्मियों में शरीर को दे ठंडक, इम्यूनिटी भी बढ़ाए

Health benefits of Tulsi in summer: हिंदू घरों में तुलसी का पौधा जरूर होता है. खासकर, जो लोग अधिक धार्मिक होते हैं, पूजा-पाठ हर दिन करते हैं, उनके घर के आंगन, बालकनी में एक तुलसी का पौधा जरूर लगा होता है. सनातन परंपरा में घर के आंगन में लगी तुलसी को बेहद पवित्र माना जाता है. हालांकि, सिर्फ पूजा-पाठ तक ही इसके फायदे सीमित नहीं है, बल्कि तुलसी सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है. इतना ही नहीं, इसकी पत्तियों से लेकर मंजरी (फूलों के गुच्छे) और बीज तीनों ही स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं. खासकर गर्मियों में इनका सेवन शरीर को ठंडक देने के साथ कई मौसमी परेशानियों से भी बचाने में मदद करता है. आयुर्वेद में तुलसी का महत्व भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, तुलसी एक शक्तिशाली प्राकृतिक औषधि है. आयुर्वेद में इसे ‘हर्ब्स की रानी’ कहा जाता है. तुलसी की पत्तियों के साथ-साथ इसकी मंजरी और बीजों में भी कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में सहायक होते हैं. तुलसी के बीज देते हैं शरीर को ठंडक गर्मियों के मौसम में तुलसी के बीज बेहद लाभदायक माने जाते हैं. इन्हें पानी में भिगोकर सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है. साथ ही गर्मी के कारण होने वाली थकान, शरीर में जलन और बार-बार लगने वाली प्यास से राहत मिलती है. इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर तुलसी की पत्तियों और मंजरी में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीफंगल और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं. नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और सर्दी-खांसी, बुखार, गले की खराश व वायरल संक्रमण जैसी समस्याओं से बचाव में मदद मिलती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. सांस और पाचन संबंधी समस्याओं में राहत अस्थमा और एलर्जी से परेशान लोगों के लिए भी तुलसी फायदेमंद मानी जाती है. इसके अलावा यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाकर गैस, अपच, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होती है. मानसिक तनाव कम करने में सहायक तुलसी केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है. इसकी प्राकृतिक खुशबू तनाव कम करने, मन को शांत रखने और बेहतर नींद लाने में मदद करती है. त्वचा और मुंह की समस्याओं में लाभदायक तुलसी खून को साफ करने में मदद करती है, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है. इसके सेवन से मुंह के छाले और मुंहासों की समस्या में भी राहत मिल सकती है. ऐसे करें तुलसी का सेवनसुबह खाली पेट 4-5 तुलसी की मंजरियां चबाएं.तुलसी की पत्तियों और मंजरी की चाय बनाकर पिएं.तुलसी के बीज रातभर पानी में भिगोकर सुबह शहद के साथ लें.अदरक, काली मिर्च और लौंग के साथ तुलसी का काढ़ा बनाकर सेवन करें. विशेषज्ञ क्या कहते हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि तुलसी जैसी आसानी से उपलब्ध प्राकृतिक औषधि का नियमित उपयोग कई छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं में दवाइयों पर निर्भरता कम कर सकता है. हालांकि, किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है.








