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13 मिनट पहले कॉपी लिंक मालदीव में इटली के 5 गोताखोरों की मौत के बाद चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान एक सैन्य गोताखोर की भी मौत हो गई। मालदीव सरकार के मुताबिक, सेना के स्टाफ सार्जेंट मोहम्मद महूदी डीकंप्रेशन सिकनेस का शिकार हो गए थे। सरकार के मुताबिक, मोहम्मद महूदी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। डीकंप्रेशन सिकनेस तब होती है, जब कोई गोताखोर गहरे पानी के दबाव से अचानक ऊपर आता है और उसके शरीर में नाइट्रोजन गैस का असर बढ़ जाता है। हादसा वावू एटोल इलाके में हुआ, जहां 5 इतालवी नागरिक करीब 50 मीटर गहराई में अंडरवॉटर गुफाओं की खोज करने गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मालदीव में सामान्य स्कूबा डाइविंग की सीमा 30 मीटर मानी जाती है। अब तक सिर्फ एक इतालवी गोताखोर का शव बरामद किया गया है। अधिकारियों को आशंका है कि बाकी चार लोग पानी के अंदर गुफा में फंस गए, जिससे उनकी मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
रतलाम के पास राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग:एसी कोच बी-1 से उठीं लपटें, दो डिब्बे चपेट में, बाल-बाल बचे यात्री; रेल मार्ग बंद

रतलाम जिले के आलोट से गुजर रही त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस (12431) में रविवार सुबह आग लग गई। हादसा सुबह करीब 5:30 बजे लूणी रीछा-विक्रमगढ़ स्टेशन के बीच हुआ। ट्रेन दिल्ली की ओर जा रही थी। आग एसी कोच बी-1 में लगी, जिसकी चपेट में ट्रेन के दो कोच आ गए। घटना के बाद ट्रेन में लगे रेलवे के हूटर बजने लगे, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, समय रहते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक जनहानि की सूचना नहीं है। हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया। घटना स्थल राजस्थान के कोटा रेल मंडल क्षेत्र में आता है, लेकिन रतलाम रेल मंडल मुख्यालय नजदीक होने के कारण रतलाम मंडल के डीआरएम अश्वनी कुमार भी मौके के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं, राहत और बचाव कार्य के लिए दुर्घटना राहत ट्रेन और टॉवर वैगन भी सुबह घटना स्थल के लिए भेजी गई है। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच और राहत कार्य में जुटे हैं। खबर अपडेट की जा रही है….
जयपुर-भोपाल समेत 19 शहरों में हीट एक्शन प्लान अधूरा:20 शहरों में सिर्फ अहमदाबाद में प्लान लागू; 2025 में 40 हजार केस, 110 मौतें

शहरों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए बनाया गया हीट एक्शन प्लान ज्यादातर शहरों में प्याऊ लगाने, एडवाइजरी जारी करने और अस्पतालों में अस्थायी इंतजाम तक सीमित है। केंद्र सरकार ने 2016 में पहले चरण में दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल, जयपुर और चेन्नई समेत 20 शहरों के लिए यह प्लान बनाया था, ताकि लू के असर को कम किया जा सके और गर्मी के दौरान कामकाज प्रभावित न हो। लेकिन ज्यादातर शहरों में इसके दीर्घकालिक उपाय जमीन पर नहीं दिखते। अहमदाबाद को छोड़कर ज्यादातर शहरों में कूल रूफ, ग्रीन कवर बढ़ाने और गर्मी के लिहाज से संवेदनशील इलाकों की पहचान जैसे कदमों पर गंभीर काम नहीं हुआ। इसका असर स्वास्थ्य आंकड़ों में दिख रहा है। 2024 में हीट स्ट्रोक के 25 हजार मामले और 56 मौतें दर्ज हुई थीं। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 40 हजार केस और 110 मौतों तक पहुंच गया। 2026 में महाराष्ट्र अकेले अब तक 236 केस और 6 मौतें दर्ज कर चुका है। ‘लू’ घोषित करने के नियम बदलने की तैयारी बढ़ती गर्मी और अल नीनो के असर को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग लू घोषित करने के मानकों में बदलाव की तैयारी में है। अभी लू घोषित करने के नियम सिर्फ तापमान पर आधारित हैं, जो केरल जैसे तटीय राज्यों के लिए पूरी तरह सटीक नहीं माने जाते। नए मानकों में उमस और हीट स्ट्रेस को भी शामिल किया जा सकता है। इससे उन इलाकों में भी सटीक चेतावनी दी जा सकेगी, जहां तापमान अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद गर्मी का असर ज्यादा होता है। अहमदाबाद ने ऐसे तैयार किया मॉडल 9 चीजें करनी थीं, कई शहरों में अधूरी रहीं किन शहर ने क्या किया और क्या नहीं किया 1. दिल्ली क्या किया: इस साल 11,000 ‘कूलिंग पॉइंट्स’ (पेयजल, शेड) का लक्ष्य। मेट्रो स्टेशनों और बस स्टॉप पर छबीलें लगाईं। क्या नहीं किया: कूलिंग सेंटर्स की संख्या दावों से काफी कम रही। कूल रूफ नहीं बनाईं। 2. भोपाल क्या किया: स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में ‘लू वार्ड’ बनाने के निर्देश दिए। न शेड बनाए, न कूल रूफ, न हीव वेव अलर्ट सिस्टम लागू किया और न पौधरोपण में तेजी। क्या नहीं किया: कोई विस्तृत बजट या ठोस हीट एक्शन प्लान लागू नहीं हुआ। 1990 में ग्रीन कवर 66% था, जो अब 6% रह गया है। 3. इंदौर: क्या किया: 12 अस्पतालों में लू केंद्र बनाए गए। ट्रैफिक सिग्नल पर दोपहर में रेड लाइट का समय कम किया गया। क्या नहीं किया: संवेदनशील जगह कूलिंग शेड नहीं लगाए गए। 1990 में ग्रीन कवर 33% था, जो 2026 में घटकर 10% रह गया। 4. जयपुर क्या किया: अस्पतालों में विशेष वार्ड और ओआरएस कॉर्नर बनाए गए। निर्माण कार्य के घंटों में बदलाव की सलाह दी गई। क्या नहीं किया: श्रमिकों के लिए पर्याप्त शेल्टर व सार्वजनिक कूलिंग स्टेशन नहीं बने।
जयपुर-भोपाल समेत 19 शहरों में हीट एक्शन प्लान अधूरा:20 शहरों में सिर्फ अहमदाबाद में लागू; 2025 में 40 हजार केस, 110 मौतें

शहरों को गर्मी से बचाने के लिए बनाया गया हीट एक्शन प्लान ज्यादातर शहरों में प्याऊ लगाने, एडवाइजरी जारी करने और अस्पतालों में अस्थायी इंतजाम तक सीमित है। 2016 में सरकार ने पहले चरण में दिल्ली, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल, जयपुर और चेन्नई समेत 20 शहरों के लिए यह योजना शुरू की थी। मकसद था लू के असर को कम करना और गर्मी के दौरान सामान्य कामकाज बनाए रखना, लेकिन ज्यादातर शहरों में स्थायी उपाय लागू नहीं हुए। अहमदाबाद को छोड़कर ज्यादातर शहरों में कूल रूफ, ग्रीन कवर बढ़ाने और गर्मी के लिहाज से संवेदनशील इलाकों की पहचान जैसे कदमों पर काम नहीं हुआ। 2024 में हीट स्ट्रोक के 25 हजार मामले और 56 मौतें दर्ज हुई थीं। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 40 हजार केस और 110 मौतों तक पहुंच गया। 2026 में महाराष्ट्र अकेले अब तक 236 केस और 6 मौतें दर्ज कर चुका है। ‘लू’ घोषित करने के नियम बदलने की तैयारी बढ़ती गर्मी और अल नीनो के असर को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग लू घोषित करने के मानकों में बदलाव की तैयारी में है। अभी लू घोषित करने के नियम सिर्फ तापमान पर आधारित हैं, जो केरल जैसे तटीय राज्यों के लिए पूरी तरह सटीक नहीं माने जाते। नए मानकों में उमस और हीट स्ट्रेस को भी शामिल किया जा सकता है। इससे उन इलाकों में भी सटीक चेतावनी दी जा सकेगी, जहां तापमान अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद गर्मी का असर ज्यादा होता है। अहमदाबाद ने ऐसे तैयार किया मॉडल 9 चीजें करनी थीं, कई शहरों में अधूरी रहीं किन शहर ने क्या किया और क्या नहीं किया 1. दिल्ली क्या किया: इस साल 11,000 ‘कूलिंग पॉइंट्स’ (पेयजल, शेड) का लक्ष्य। मेट्रो स्टेशनों और बस स्टॉप पर छबीलें लगाईं। क्या नहीं किया: कूलिंग सेंटर्स की संख्या दावों से काफी कम रही। कूल रूफ नहीं बनाईं। 2. भोपाल क्या किया: स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में ‘लू वार्ड’ बनाने के निर्देश दिए। न शेड बनाए, न कूल रूफ, न हीव वेव अलर्ट सिस्टम लागू किया और न पौधरोपण में तेजी। क्या नहीं किया: कोई विस्तृत बजट या ठोस हीट एक्शन प्लान लागू नहीं हुआ। 1990 में ग्रीन कवर 66% था, जो अब 6% रह गया है। 3. इंदौर: क्या किया: 12 अस्पतालों में लू केंद्र बनाए गए। ट्रैफिक सिग्नल पर दोपहर में रेड लाइट का समय कम किया गया। क्या नहीं किया: संवेदनशील जगह कूलिंग शेड नहीं लगाए गए। 1990 में ग्रीन कवर 33% था, जो 2026 में घटकर 10% रह गया। 4. जयपुर क्या किया: अस्पतालों में विशेष वार्ड और ओआरएस कॉर्नर बनाए गए। निर्माण कार्य के घंटों में बदलाव की सलाह दी गई। क्या नहीं किया: श्रमिकों के लिए पर्याप्त शेल्टर व सार्वजनिक कूलिंग स्टेशन नहीं बने। कूल रूफ से 2-5 डिग्री, पौधरोपण से 3 डिग्री तक घट सकता है पारा एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर शहर हीट एक्शन प्लान को सिर्फ इमरजेंसी इंतजाम की तरह लागू कर रहे हैं। यानी गर्मी बढ़ने पर एडवाइजरी, अस्पतालों में अस्थायी तैयारी और पानी की व्यवस्था तक सीमित हैं। लंबे समय में तापमान कम करने वाले उपायों पर काम नहीं हो रहा। जनाग्रह की जना अर्बन स्पेस टीम की एसोसिएट मैनेजर सुर्ज्यतपा रे के मुताबिक, कूल रूफ से घरों का तापमान 2 से 5 डिग्री तक कम किया जा सकता है। बड़े स्तर पर पौधरोपण से 10-15 साल में शहर का तापमान करीब 3 डिग्री तक घट सकता है, जबकि शहरों के बाहरी हिस्सों में ग्रीन बेल्ट विकसित करने से तापमान करीब 2 डिग्री तक कम हो सकता है। उनके मुताबिक, सबसे बड़ी समस्या जवाबदेही की कमी है। राष्ट्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी होते हैं, लेकिन नगर निकायों को न पर्याप्त बजट मिलता है, न समर्पित स्टाफ। इसी वजह से कई शहरों में हीट एक्शन प्लान कागजों तक सीमित रह जाता है। ———— ये खबर भी पढ़ें… भारत में सूखा-भीषण गर्मी पड़ने की आशंका:सुपर अल नीनो मई-जुलाई से सर्दियों तक जारी रहने के आसार; इससे मानसून कमजोर पड़ सकता है भारत में इस साल सामान्य से कम बारिश के अनुमान के बीच सुपर अल-नीनो भी एक्टिव हो सकता है। अमेरिकी मौसम एजेंसी ‘नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (नोआ) के अनुसार यह मई-जुलाई के दौरान ही दस्तक दे सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
आयुर्वेद में क्यों खास मानी जाती है भांग? जानिए इसका उपयोग और सावधानियां

Last Updated:May 17, 2026, 07:23 IST भांग को केवल नशे के रूप में नहीं, बल्कि आयुर्वेद में कुछ औषधीय उपयोगों के लिए भी जाना जाता है. गोंडा की वैद्य सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि भांग का उपयोग दर्द, नींद और पाचन से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है, लेकिन इसका गलत या अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. गोंडा: भांग एक ऐसा पौधा है, जिसका उपयोग लंबे समय से पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद में अलग-अलग तरीकों से किया जाता रहा है. बहुत से लोग इसे सिर्फ नशे से जोड़कर देखते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसके कुछ औषधीय उपयोग भी बताए गए हैं. हालांकि, इसका इस्तेमाल हमेशा सावधानी और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए, क्योंकि गलत उपयोग स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि आयुर्वेद में भांग का उपयोग कुछ विशेष परिस्थितियों में किया जाता है. पुराने समय से इसका इस्तेमाल दर्द कम करने और शरीर को आराम देने के लिए किया जाता रहा है. कुछ लोग मानते हैं कि यह शरीर की कुछ परेशानियों में राहत पहुंचाने में मदद कर सकती है. हालांकि, इसका असर व्यक्ति की स्थिति और सेवन की मात्रा पर निर्भर करता है. सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि कुछ लोग जोड़ों के दर्द और शरीर में होने वाली अकड़न की परेशानी में भी इसका उपयोग करते हैं. आयुर्वेद में इसे दर्द से जुड़ी कुछ समस्याओं में सहायक माना गया है. इसके अलावा कई लोग इसे नींद से जुड़ी परेशानियों में भी उपयोग करते हैं. माना जाता है कि यह शरीर को शांत करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसका उपयोग बिना सलाह के नहीं करना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google वैद्य सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि भांग के बीजों का उपयोग कई जगह पोषण के लिए भी किया जाता है. इसके बीजों में कुछ पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग खाद्य पदार्थों में किया जाता है. कई लोग इन्हें स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इसका सेवन बिना जानकारी के किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि भांग के फायदे जितने बताए जाते हैं, उससे ज्यादा जरूरी इसकी सावधानियां हैं. अगर इसका अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन किया जाए तो यह नुकसान पहुंचा सकता है. इसके ज्यादा उपयोग से चक्कर आना, मानसिक परेशानी, सुस्ती और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में इसका शरीर और दिमाग पर नकारात्मक असर भी पड़ सकता है. सुषमा चतुर्वेदी ने बताया कि भांग का उपयोग पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी बताया जाता है. कुछ लोग मानते हैं कि यह भूख बढ़ाने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने में मदद कर सकती है. हालांकि, इसके बारे में अलग-अलग राय भी मौजूद हैं. इसलिए किसी भी प्रकार के उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. भांग एक ऐसा पौधा है, जिसे पारंपरिक चिकित्सा में विशेष महत्व दिया गया है. इसके कुछ संभावित फायदे बताए जाते हैं, लेकिन इसका उपयोग समझदारी और सावधानी के साथ करना ही बेहतर माना जाता है. स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी चीज में सही जानकारी और विशेषज्ञ की राय सबसे जरूरी होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी औषधीय पौधे को चमत्कारी इलाज मानना सही नहीं है. हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और हर चीज का असर भी अलग हो सकता है. इसलिए बिना सही जानकारी और डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के भांग का सेवन नहीं करना चाहिए. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
राजस्थान में चलती ट्रेन में आग, स्टेशन पर बजे हूटर:त्रिवेंद्रम से दिल्ली जा रही थी, एक कोच से 68 पैसेंजर्स को उतारा गया

कोटा में त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस (12431) के कोच बी 1 में आग लग गई। हादसा रविवार सुबह करीब 5.15 बजे कोटा मंडल के लूणीविच्चा-विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन के बीच हुआ। कोटा स्टेशन पर हूटर बजते ही प्रशासन अलर्ट हुआ। कोटा से राहत व बचाव टीम मौके के लिए रवाना हुई। अधिकारी भी मौके के लिए निकले। जानकारी के अनुसार कोच में आग लगने की सूचना गार्ड ने दी थी। इसके बाद ट्रेन को रुकवाया गया और पैसेंजर्स को बाहर निकाला गया वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि ट्रेन के B1 कोच में आग लगी थी। कोच में 68 यात्री सवार थे। फिलहाल कोई जनहानि की सूचना नहीं है। टीम में मौके पर पहुंची है। खबर अपडेट की जा रही है…
ईरान होर्मुज के लिए जल्द नया ट्रैफिक सिस्टम लाएगा:कहा- खास सर्विस के लिए टैक्स लगेगा; UAE और ओमान पर हमले की धमकी

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के चेयरमैन इब्राहिम अजीजी ने कहा है कि उनका देश जल्द ही होर्मुज में जहाजों की आवाजाही के लिए नया सिस्टम शुरू करेगा। उन्होंने शनिवार को कहा कि यह व्यवस्था ईरान की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इब्राहिम अजीजी के मुताबिक, इस नए सिस्टम में सिर्फ वही कारोबारी जहाज और देश फायदा उठा सकेंगे जो ईरान के साथ सहयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था के तहत दी जाने वाली खास सेवाओं के लिए टैक्स लिया जाएगा। वहीं ईरानी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने कुवैत और UAE को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अब तक संयम बरता है, लेकिन यह हमेशा नहीं चलेगा। मोखबर ने कहा कि इन देशों ने अपने इलाके को ईरान के दुश्मनों के इस्तेमाल के लिए खुला छोड़ दिया है। ईरान ने लंबे समय तक उन्हें दोस्त और भाई माना, लेकिन अब उन्होंने अपनी आजादी तक बेच दी है और अपने देश की जमीन दुश्मनों को इस्तेमाल करने दी है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स 1. इजराइल-लेबनान सीजफायर 45 दिन बढ़ा: अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच 45 दिन संघर्षविराम बढ़ाया गया। 29 मई को सैन्य प्रतिनिधियों की बैठक भी होगी। 2. ट्रम्प बोले- ईरान 20 साल परमाणु कार्यक्रम रोके तो मंजूर: ट्रम्प ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पहली बार स्थायी रोक की बजाय 20 साल के सस्पेंशन की बात कही। साथ ही कहा कि ईरान को लेकर उनका धैर्य खत्म हो रहा है। 3. चीन ने होर्मुज पर अमेरिकी प्रस्ताव का विरोध किया: चीन ने होर्मुज पर UN में अमेरिका-बहरीन समर्थित प्रस्ताव को गलत समय और गलत कंटेंट वाला बताया। 4. तेहरान में US-इजराइल हमलों से 1260 मौतें: ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका के इजराइल के हमलों में 1260 मौतें और 51 हजार घर, 10 हजार से ज्यादा गाड़ियां और सैकड़ों बाइक भी क्षतिग्रस्त हुईं। 5. दक्षिण लेबनान में इजराइली हमले जारी: सीजफायर बढ़ने के बावजूद इजराइल ने कई इलाकों में एयरस्ट्राइक और गोलाबारी की। लगातार हमलों के कारण लोग पलायन कर रहे हैं। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
गर्मियों में भी फिट रखेगा कड़कनाथ, लेकिन ऐसी गलती की तो बिगड़ सकती है तबीयत

Last Updated:May 17, 2026, 06:29 IST Satna News: कड़कनाथ में 25 फीसदी से ज्यादा प्रोटीन और भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. गर्मियों में होने वाली थकान, कमजोरी और सुस्ती को दूर करने में भी यह मददगार होता है. सतना. गर्मी के मौसम में लोग खाने-पीने को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं, खासकर नॉनवेज पसंद करने वाले यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस मौसम में कौन सा चिकन शरीर के लिए सही रहेगा. तेज गर्मी में भारी और ज्यादा फैट वाला भोजन शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में सतना और आसपास के इलाकों में ऐसे दिनों कड़कनाथ चिकन की चर्चा तेज हो जाती है. कम फैट, ज्यादा प्रोटीन और हीमोग्लोबिन के साथ-साथ आसान पाचन क्षमता के कारण इसे हेल्दी माना जाता है. वहीं पशु चिकित्सकों का कहना है कि अगर चिकन का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए, तो यह गर्मी में भी शरीर को ताकत और पोषण दे सकता है. लोकल 18 को जानकारी देते हुए प्रभारी पशु चिकित्सालय के डॉ बृहस्पति भारती ने बताया कि कड़कनाथ चिकन अन्य सामान्य मुर्गियों की तुलना में काफी हेल्दी माना जाता है. आम चिकन में जहां 13 से 25 प्रतिशत तक फैट पाया जाता है, वहीं कड़कनाथ में सिर्फ 0.73 से 1.05 प्रतिशत तक ही वसा होती है. यही वजह है कि यह गर्मियों में आसानी से पच जाता है और पेट पर भारी नहीं पड़ता. उन्होंने बताया कि कड़कनाथ में 25 प्रतिशत से ज्यादा प्रोटीन और भरपूर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. गर्मियों में होने वाली कमजोरी, थकान और सुस्ती को दूर करने में भी यह मददगार माना जाता है. कम कोलेस्ट्रॉल होने के कारण इसे दिल के मरीजों और वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए भी बेहतर विकल्प माना जाता है. कड़कनाथ को पकाते समय हरी धनिया और पुदीने जैसी ठंडी तासीर वाली चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके साथ छाछ, नींबू पानी या खीरे का सलाद लेने से शरीर का तापमान संतुलित बना रहता है और पाचन भी बेहतर होता है. सतना के आदिवासी इलाकों में बढ़ रहा पालनकड़कनाथ मूल रूप से पश्चिमी मध्य प्रदेश के झाबुआ क्षेत्र की प्रसिद्ध काली नस्ल है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार की योजनाओं के तहत सतना जिले के आदिवासी क्षेत्रों में भी इसका बड़े पैमाने पर पालन शुरू कराया गया है. यह नस्ल तेज गर्मी और कड़ाके की ठंड दोनों मौसमों में आसानी से खुद को ढाल लेती है, इसलिए ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इसका पालन आसान माना जाता है. स्थानीय बाजारों और पोल्ट्री फार्म्स पर कड़कनाथ चिकन की कीमत करीब 500 से 800 रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है. इसके बावजूद हेल्थ कॉन्शियस लोग इसकी मांग लगातार बढ़ा रहे हैं. स्वाद, सेहत और बजट में अलग-अलग विकल्पगर्मी के मौसम में बाजार में सबसे ज्यादा बिक्री ब्रॉयलर चिकन की होती है क्योंकि इस समय इसके दाम काफी कम हो जाते हैं. वहीं मध्य प्रदेश में कड़कनाथ के अलावा असील, वनराजा, गिरिराजा और सोनाली जैसी नस्लें भी लोकप्रिय हैं. स्वाद के शौकीनों के लिए असील चिकन को सबसे लजीज माना जाता है जबकि सेहत के लिहाज से कड़कनाथ सबसे आगे है. वहीं कम बजट और सॉफ्ट मीट पसंद करने वालों के लिए नर्मदा निधि, सोनाली और वनराजा बेहतर विकल्प माने जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ चिकन का सेवन गर्मियों में भी फायदेमंद साबित हो सकता है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Satna,Madhya Pradesh
कांगो में इबोला वायरस से 80 मौतें, 246 संदिग्ध केस:WHO ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की; युगांडा-सूडान में अलर्ट, केन्या ने भी निगरानी बढ़ाई

कांगो के पूर्वी इटुरी प्रांत में इबोला से अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। 246 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। हालांकि, WHO का कहना है कि यह महामारी की कैटेगरी में नहीं आता है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर कंबा के मुताबिक, पहला मामला एक नर्स का माना जा रहा है, जिसकी 24 अप्रैल को मौत हुई थी। जांच में अब तक इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के 8 मामलों की पुष्टि हुई है। बीमारी फिलहाल इतुरी प्रांत के बुनीया, रवामपारा और मोंगवालू इलाकों तक पहुंच चुकी है। कांगो में 1976 में पहली बार इबोला सामने आया था। यह देश में इसका 17वां मामला है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बार इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन मिला है, जबकि कांगो में पहले ज्यादातर मामले जायरे स्ट्रेन के रहे हैं। इससे चिंता बढ़ी है, क्योंकि इबोला के मौजूदा कई इलाज और टीके जायरे स्ट्रेन को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। स्थानीय लोगों में डर, कहा- रोज हो रही मौतें इतुरी प्रांत की राजधानी बुनीया में लोगों ने डर का माहौल बताया है। स्थानीय निवासी जीन मार्क असिम्वे ने कहा कि पिछले एक हफ्ते से लगातार मौतें हो रही हैं। कई बार एक ही दिन में 2-3 या उससे ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में लोगों को समझ ही नहीं आया कि बीमारी क्या है। हालांकि बुनीया में बाजार और सार्वजनिक जगहों पर सामान्य गतिविधियां जारी हैं। पड़ोसी देशों में भी खतरा बढ़ा युगांडा में कांगो से जुड़ा इबोला का एक मामला सामने आया है। संक्रमित मरीज की 14 मई को कंपाला के एक अस्पताल में मौत हो गई। बाद में शव कांगो वापस भेज दिया गया। युगांडा ने फिलहाल किसी दूसरे स्थानीय मामले की पुष्टि नहीं की है। अफ्रीका की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने युगांडा और दक्षिण सूडान में बीमारी फैलने का खतरा जताया है। केन्या ने भी क्षेत्रीय आवाजाही को देखते हुए एहतियात बढ़ा दी है। सरकार ने इबोला की तैयारी के लिए अलग टीम बनाई है और सभी एंट्री पॉइंट्स पर निगरानी कड़ी कर दी है। इबोला वायरस है क्या? पूरी दुनिया में इबोला वायरस डिसीज (EVD) से पीड़ित मरीजों में 25% से 90% की मौत होती है। यह बीमारी इबोला नाम के वायरस की वजह से फैलती है। यह 1976 में पहली बार 2 स्थानों पर एक साथ फैला था। ये हैं- नजारा (सूडान) और यामबुकु (कांगो)। इसका नाम इबोला नदी (कांगो) के ऊपर रखा गया है।
Bihar Police & Railway Jobs: 29,932 Vacancies This Week

Hindi News Career Bihar Police & Railway Jobs: 29,932 Vacancies This Week 12 मिनट पहले कॉपी लिंक इस हफ्ते निकली हैं रेलवे और पुलिस समेत कई विभागों में 29 हजार से भी ज्यादा पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए: पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें . दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… आज की सरकारी नौकरी: रेलवे में अप्रेंटिस के 1191 पदों पर निकली भर्ती; स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 100 वैकेंसी, IRCTC में 92 ओपनिंग्स जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर आज की सरकारी नौकरी: एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट का नोटिफिकेशन जारी; यूपी में गन्ना पर्यवेक्षक की 1182 भर्ती, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स में 205 वैकेंसी जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर आज की सरकारी नौकरी: CTET 2026 के लिए आवेदन शुरू; बिहार में हवलदार इंस्ट्रक्टर की 122 वैकेंसी, NMDC में अप्रेंटिस की 180 ओपनिंग्स जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर









