The beauty-personal care market will be worth Rs 3.8 lakh crore by 2030.

Hindi News Business The Beauty personal Care Market Will Be Worth Rs 3.8 Lakh Crore By 2030. नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक पोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार 35% सालाना की दर से बढ़कर 56,000 करोड़ रुपए पहुंच गया है। ब्यूटी प्रोडक्ट्स अब तेजी से भारतीय उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं। बॉडी वॉश और सनस्क्रीन भी क्विक डिलीवरी ऐप से आने लगी है। रेडसीर स्ट्रेटजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार 35% सालाना की दर से बढ़कर 56,000 करोड़ रुपए पहुंच गया है। लेकिन इस ग्रोथ की असली कहानी दो हिस्सों में बंटी है: एक तरफ आदत है, तो दूसरी तरफ इच्छा। ग्रूमिंग अब आदत बन चुका है और इस सेगमेंट की ग्रोथ सबसे ज्यादा 37% है। मेकअप और परफ्यूम की ग्रोथ 30% है। देश का कुल बीपीसी बाजार 2030 तक करीब 3.8 लाख करोड़ का होगा। यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा और भारत की सबसे तेज बढ़ती रिटेल कैटेगरी है। तेजी से बढ़ती कैटेगरीज (वित्त वर्ष 2025-26) – बॉडी केयर 65-70% – बॉडी वॉश 60-65% – सनस्क्रीन 55-60% – नेल मेकअप 50% – परफ्यूम 30-35% – डिओडोरेंट 20% सिर्फ चेहरा नहीं, अब पूरे शरीर की देखभाल का ट्रेंड बॉडी वॉश 60-65% सालाना की दर से बढ़ रहा है, जबकि साबुन की ग्रोथ 40-45% है। खुशबू, स्किन केयर, सेल्फ-केयर। बॉडी केयर (लोशन, क्रीम) 65-70% की तेज ग्रोथ पर है। अब भारतीय सिर्फ चेहरे की नहीं, पूरे शरीर की देखभाल करने लगे हैं। – सनस्क्रीन की कहानी और भी दिलचस्प है। एक समय गर्मियों में छत पर जाते वक्त लगाई जाती थी। अब यह रोज सुबह के रूटीन का हिस्सा है। 55-60% ग्रोथ इसी बदलाव का सबूत है। बदल रहा है ग्रूमिंग सेंस, नेल आर्ट का क्रेज बढ़ रहा है ऑनलाइन ब्यूटी और पर्सनल केयर बाजार में परफ्यूम का हिस्सा अब बढ़कर 6 फीसदी पहुंच गया, जबकि डिओडोरेंट 3% से नीचे खिसक गया। यह महज आंकड़ों का फेरबदल नहीं है। यह दिखाता है कि भारतीय उपभोक्ता के लिए खुशबू अब पसीना रोकने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का हिस्सा बन चुकी है। {नेल मेकअप भी 50% की रफ्तार से बढ़ रहा है। घर पर नेल आर्ट करना अब हजारों युवाओं की पहचान और शौक दोनों है। 10 मिनट में ब्यूटी प्रोडक्ट, एक साल में दोगुना बढ़ा ट्रेंड क्विक कॉमर्स का ब्यूटी बाजार में हिस्सा वित्त वर्ष 2025 के 9% से बढ़कर 2026 में 18% हो गया। यानी एक साल में दोगुना। बॉडी केयर और बॉडी वॉश में क्विक कॉमर्स का हिस्सा 20-25% है। – जेन जी और जेन एल्फा 2030 तक बीपीसी खर्च का 50% हिस्सा देंगे। 150 से ज़्यादा नए ऑनलाइन-बिल्ट ब्रांड्स 2030 तक ₹100 करोड़+ रेवेन्यू पार करेंगे, कुल कैटेगरी का 25%+ हिस्सा इनके पास होगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
विधायक रविंद्र भाटी ने खुद पर पेट्रोल छिड़का:पुलिस पकड़कर ले गई; 500 गाड़ियों के साथ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करने पहुंचे थे

बाड़मेर में विरोध प्रदर्शन के दौरान शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया। समर्थकों ने कपड़े से तुरंत पेट्रोल को पोंछ दिया। इसी दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मी विधायक भाटी और उनके समर्थकों को धक्के मारते हुए ले गए। भाटी एक बैग में अपने साथ पेट्रोल भरी बोतल लेकर आए थे। उन्होंने बैग से बोतल निकाली और खुद पर छिड़क ली। पुलिस उन्हें पकड़कर कलेक्ट्रेट के अंदर ले गई है। यहां कलेक्टर चिन्मयी गोपाल और एसपी चुनाराम जाट उनसे बात कर रहे हैं। 4 पॉइंट्स में समझ लीजिए पूरा मामला 1. दरअसल, मजदूरों की मांगों को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी 500 गाड़ियों के काफिले के साथ मंगलवार दोपहर गिरल गांव से कलेक्ट्रेट की तरफ कूच किया। कलेक्ट्रेट से 1 किमी पहले पुलिस ने बसें लगा कर भाटी का काफिला रोक लिया। 2. काफिला रोकने के बाद विधायक भाटी पैदल ही अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। समर्थकों को पुलिस ने पकड़ा तो विधायक भाटी ने खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। 3. भाटी ने सोमवार को घोषणा की थी कि अगर मजदूरों की मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे मंगलवार को मजदूर आंदोलन करेंगे। 4. इससे एक दिन पहले हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरल माइंस से लिग्नाइट परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) शुरू करने और वाहनों को सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे। साथ ही एसपी और शिव थानाधिकारी से बाधा उत्पन्न करने वालों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे। पहले पढ़िए मांगें देखें भाटी के कूच की तस्वीरें… क्यों हो रहा विरोध राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की गिरल में लिग्नाइट माइंस की ओर से थुंबली समेत आसपास के इलाकों में जमीन अधिग्रहण कर कोयला खनन किया जा रहा है। आरोप है कि कंपनी ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन अब युवाओं को नौकरी से निकाला जा रहा है। इसी से प्रभावित किसान और गांव के युवा 9 अप्रैल से गिरल गांव में धरने पर बैठे हैं। बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय श्रमिकों, ड्राइवरों और ग्रामीणों का आंदोलन पिछले 39 दिन से जारी है। उनकी मांग है कि 8 घंटे की ड्यूटी लागू की जाए और नौकरी के लिए स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए। राजस्थान सरकार का PSU है RSMML RSMML राजस्थान सरकार का एक सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है, जो रॉक फॉस्फेट, लिग्नाइट, जिप्सम और लाइमस्टोन का खनन करती है। गिरल लिग्नाइट माइंस, बाड़मेर जिले के थुम्बली और गिरल गांव में स्थित है। इसे राजस्थान की पहली आधुनिक ओपनकास्ट (खुली) लिग्नाइट खदान भी माना जाता है। 1994 में RSMML द्वारा इस खदान की शुरुआत की गई थी। यह मुख्य रूप से लिग्नाइट का उत्पादन करती है, जो गिरल लिग्नाइट पावर प्लांट को ईंधन की सप्लाई करती है।
प्याज की गंध: प्याज ही मुंह से निकलता है भयंकर विनाशकारी? इन 5 रसोई उपकरणों से चुकियों में गंध होगी दूर

प्याज की गंध दूर करें: रसोई में खाने से प्याज पूरे स्वाद को बढ़ा देता है, साथ ही गर्मियों में ये शरीर को अंदर से ठंडक भी देता है। लेकिन प्याज या कटर के बाद बार-बार हाथों और मुंह में तेजी से विघटन दिखाई देता है। क्योंकि इसमें मौजूद सकल कंपनी ग्राउंड्स माउथ से लंग्स प्याज़ तक के उद्यम लंबे समय तक गंध पैदा करते रहते हैं। पेज का तेज धमाका आने के कई बार ग्रुप में शर्मिंदगी मेहसूस होता है। इस समस्या से निपटने के लिए कुछ आसान और आसान उपाय हैं, जिन्हें आप अपना सकते हैं। प्याज खाने के कुछ देर बाद एक सेब खा लें। सेब में मौजूद एंजाइम्स ओबॅन्ज के स्टूडियो कंपाउंड्स को तोड़ने में मदद करते हैं। इससे संसारों की दुर्गंध काफी हद तक कम हो जाती है। टेम्प्लेट में स्क्रैप हटाने की क्षमता शानदार है। हाथों पर छोटे सा नींबू का रस राँचें या पानी से मुंह कर लें। इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड बैक्टीरिया को नष्ट कर दिया जाता है और गंध को तुरंत ख़त्म कर दिया जाता है। ग्रीन टी में पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये प्याज की गंध पैदा होने वाले तत्वों को नष्ट कर देती है। खाने के बाद एक कप गर्म ग्रीन टी पीने से मुंह में पानी रहता है और चर्चे का असर कम होता है। एक अनोखा लेकिन साधन ये भी है कि क्लासिक स्टील पर हैंड राँच लें। स्टील के चाकू प्याज़ के फ़ोर्स से जुड़कर गंध को खाल से अलग कर देते हैं। इसके अलावा हाथों पर नमक रांगेकर धोने से भी बदबू कम हो जाती है। मुंह की दुर्गंध के लिए एप्पल साइडर सिरका या सोडा वाले पानी से खरीदें। इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से लेकर मुंबई तक की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। जिसमें बैंच माउंट और स्टेबल कंट्रोल नहीं रहता है। ये सभी उपाय, आसान और घर में मीटिंग वाली सामग्री से ही जा सकते हैं। अगली बार प्याज या कटर के बाद इन एनीस्ट को पॉलिश और टैरोटाजा महसूस करें। (टैग्सटूट्रांसलेट)प्याज की गंध दूर करना(टी)प्याज की गंध दूर करना(टी)प्याज के बाद सांसों की दुर्गंध(टी)प्याज की गंध दूर करने के प्राकृतिक तरीके(टी)प्याज से सांस के उपाय
मुंह के छाले कब ले लेता है कैंसर का रूप, कैसे समझें कि ये नॉर्मल नहीं, ENT के बड़े डॉक्टर ने बताया क्लू

Last Updated:May 19, 2026, 14:27 IST Persistence mouth ulcer: हमारे मुंह में छाले अक्सर होते रहते हैं. ये छाले बिना दर्द वाले होते हैं और अपने आप गायब भी हो जाते हैं. लेकिन जब ये छाले बार-बार आने लगे और साथ में आवाज में भी बदलाव होने लगे तो यह किसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं. इसलिए ऐसे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि ये कैंसर के भी संकेत हो सकते हैं. लेकिन सवाल है कि कैसे समझें कि कौन सा छाला कैंसर का संकेत है. इसके लिए हमने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में ENT डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. रवि मेहर से बात की. मुंह में छोटे-छोटे छाले बवंडर बन सकता है. हालांकि आमतौर पर इससे कोई परेशानी नहीं होती है. जब आप ज्यादा थक जाते हैं, कमजोरी होने लगती है, सीजनल इंफेक्शन होता है, पॉल्यूशन बढ़ता है, ब्रश करने में कुछ गलतियां होने लगती है तो मुंह में छाले आ जाते हैं और ये अपने आप ठीक भी हो जाते हैं. लेकिन जब ये छाले-छाले बार-बार आने लगे तो यह कैंसर भी हो सकता है. छाले के साथ अगर आवाज में परिवर्तन हो जाए तो यह ज्यादा घातक कॉम्बिनेशन है क्योंकि इससे कैंसर की आशंका ज्यादा प्रबल हो जाती है. ऐसे में हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि हम कब समझें कि मामला गंभीर हो गया है और अब डॉक्टर के पास जाना चाहिए. इसके लिए हमने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज नई दिल्ली में ENT डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. रवि मेहर से बात की. कब ये छाले कैंसर का रूप बन जाते हैं डॉ. रवि मेहर ने बताया कि मुंह में छाले आमतौर पर नॉर्मल होते हैं. कई कारणों से यह अपने आप आते हैं और अपने आप चले जाते हैं. कुछ मामलों में कुछ दवाइयां खाकर भी इसे ठीक किया जा सकता है. लेकिन कुछ छाले बेहद गंभीर किस्म के हो सकते हैं. अगर मुंह में छाल बड़े हैं और इसमें दर्द भी हो रहा है तो इसे गंभीरता से लेनी चाहिए. अगर ये छाले दवाई खाने के बाद ठीक नहीं हो रहा है तो यह और भी गंभीर है. वास्तव में जब मुंह में छाले बड़े आकार के हो और वे सख्त होने लगे, उनमें से खून निकलने लगे और कभी-कभार दर्द भी हो तो ऐसे संकेत कैंसर के हो सकते हैं. हालांकि इन सबके बावजूद यह जरूरी नहीं कि ये कैंसर ही हो लेकिन अगर ये सारे लक्षण दवा खाने के बाद भी ठीक न हो और दो सप्ताह से ज्यादा हो गए हों तो कैंसर की आशंका ज्यादा है.अगर छाले का आकार धीरे-धीरे बढ़ता ही जाए कम न हो तो ये ज्यादा खतरनाक है. छाले के कैंसर में बदलने का सबसे बड़ा संकेत ये होता है कि यह सिर्फ एक छाला होता है जो धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है. अगर सिर्फ एक छाला है तो ऐसे मामलों में बिना देर किए कैंसर के डॉक्टर के पास जाना चाहिए. कब छाले बिना नुकसान वाले होते हैं डॉ. रवि मेहर कहते हैं कि आमतौर पर छाले नॉर्मल ही होते हैं. ये आकार में छोटे-छोटे होते हैं, आकार बढ़ता नहीं है. ये अपने आप ठीक हो जाता है. अगर नहीं भी ठीक होता तो दो-तीन बाद लोग मल्टीविटामिन की गोलियां खा लेते हैं. इससे ठीक हो जाता है. ऐसे छाले मुंह में कई होते हैं. जब मल्टीपल छाले हो तो डरने की कोई बात नहीं. ये छाले क्यों निकलते हैं मुंह में छाले निकलने के कई कारण होते हैं. हालांकि हर छाला कैंसर नहीं होता. आमतौर पर मुंह में छाले खराब लाइफस्टाइल की गलतियों से निकलते हैं. जब शरीर में विटामिन B12, फोलिक एसिड (B9), आयरन और जिंक की कमी होने लगे तो मुंह में छाले निकलने लगते है. इसलिए मल्टीविटामिन खाते ही ठीक होने लगते हैं. पेट की समस्याओं के कारण भी छाले निकलने लगते हैं. जब पाचन तंत्र में खराबी, कब्ज या एसिडिटी होती है तो पेट की गर्मी बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर मुंह की म्यूकोसा परत पर पड़ता है और छाले निकल आते हैं.कई बार ब्रश करते समय अचानक चोट लगना, गलती से गाल कट जाना या तीखे दांतों की रगड़ से भी छाले हो जाते हैं. शरीर में हार्मोनल बदलाव के कारण भी मुंह में छाले निकल सकते हैं. महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण भी बार-बार छाले होने की समस्या देखी जाती है. मानसिक तनाव, कमजोर इम्यूनिटी, कुछ फूड इंटॉलरेंस आदि के कारण भी छाले निकल सकते हैं. लेकिन ये छाले दवा खाते ही ठीक होने लगते हैं या अपने आप ठीक होने लगते हैं. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
जान्हवी कपूर ने किया बॉडीगार्ड को इशारा:तुरंत सेल्फी ले रहे फैन पर लिया गया एक्शन, गोविंदा के गार्ड्स की भी पैपराजी से हुई झड़प

सोमवार को अपकमिंग फिल्म पेड्डी का ट्रेलर लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया था। मुंबई के बीकेसी में हुए इस इवेंट में जान्हवी कपूर और रामचरण समेत फिल्म की स्टारकास्ट पहुंची थी। इस दौरान एक फैन का नजदीक आकर सेल्फी लेना जान्हवी कपूर को पसंद नहीं आया और उन्होंने बॉडीगार्ड को इशारा कर तुरंत उसे अलग करवा दिया। पेड्डी ट्रेलर लॉन्च इवेंट से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें जान्हवी कपूर मंच पर हैं। तभी एक फैन उनके काफी करीब आया और सेल्फी लेने लगा। उसके आते ही जान्हवी कपूर ने पास खड़े बॉडीगार्ड को एक नजर देख इशारा किया, जिसके ठीक बाद गार्ड ने उस शख्स का हाथ पकड़कर धक्का देकर मंच से नीचे उतार दिया। वीडियो सामने आने के बाद कई लोग जान्हवी की आलोचना कर रहे हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है, मुझे समझ नहीं आता कि इन लोगों को इतना अटेंशन क्यों देते हैं। ये लोग भूल जाते हैं कि ये लोग पब्लिक की वजह से ही हैं और हमारे बिना कुछ नहीं हैं। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है, इसलिए इनकी मूवी नहीं चलती है। जिनकी वजह से इंडस्ट्री हैं, उनकी ही रिस्पेक्ट नहीं करते। नेपोकिड्स हैं, तो मूवी मिल रही है और दिखाना करना अच्छा होने का। बाकी असल में इनके पास कुछ नहीं है। गोविंदा के गार्ड की पैपराजी से हुई बहस हाल ही में गोविंदा एक इवेंट का हिस्सा बने, जहां उनके बॉडीगार्ड्स और पैपराजी के बीच बहस हो गई। दरअसल, इवेंट खत्म होने के बाद जैसे ही गोविंदा बाहर की तरफ निकले, तभी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान पैपराजी भी उन्हें क्लिक कर रहे थे। तभी गोविंदा के बाउंसर ने उनके निकलने का रास्ता बनाते हुए लोगों को पीछे की तरफ धक्का दिया। धक्का लगते ही वहां मौजूद पैपराजी भड़क गए और बहस शुरू कर दी। हंगामा होने के बाद गोविंदा ने खुद बीच-बचाव कर मामले को संभाला। बता दें कि फिल्म पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये एक पैन इंडिया फिल्म है। बुच्ची बाबू के निर्देशन में बनी इस फिल्म को एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है। ये जान्हवी कपूर की दूसरी तेलुगु फिल्म है। उन्होंने 2024 में फिल्म देवरा से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था। दो बार पोस्टपोन हुई जान्हवी कपूर- रामचरण की पेड्डी फिल्म पेड्डी शुरुआत में 27 मार्च को रामचरण के बर्थडे पर रिलीज की जाने वाली थी, हालांकि बाद में इसे पोस्टपोन कर दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को धुरंधर 2 और टॉक्सिक से क्लैश से बचाने के लिए पोस्टपोन किया गया था, हालांकि मेकर्स ने पोस्टपोन का कारण फिल्म के कुछ हिस्से कंप्लीट न होना बताया। पहले 30 अप्रैल 2026 के बाद इसे 25 जून के लिए शेड्यूल किया गया, जिसके बाद प्री-पोन कर इसे 4 जून को रिलीज किया जा रहा है।
जान्हवी कपूर ने किया बॉडीगार्ड को इशारा:तुरंत सेल्फी ले रहे फैन पर लिया गया एक्शन, गोविंदा के गार्ड्स की भी पैपराजी से हुई झड़प

सोमवार को अपकमिंग फिल्म पेड्डी का ट्रेलर लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया था। मुंबई के बीकेसी में हुए इस इवेंट में जान्हवी कपूर और रामचरण समेत फिल्म की स्टारकास्ट पहुंची थी। इस दौरान एक फैन का नजदीक आकर सेल्फी लेना जान्हवी कपूर को पसंद नहीं आया और उन्होंने बॉडीगार्ड को इशारा कर तुरंत उसे अलग करवा दिया। पेड्डी ट्रेलर लॉन्च इवेंट से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें जान्हवी कपूर मंच पर हैं। तभी एक फैन उनके काफी करीब आया और सेल्फी लेने लगा। उसके आते ही जान्हवी कपूर ने पास खड़े बॉडीगार्ड को एक नजर देख इशारा किया, जिसके ठीक बाद गार्ड ने उस शख्स का हाथ पकड़कर धक्का देकर मंच से नीचे उतार दिया। वीडियो सामने आने के बाद कई लोग जान्हवी की आलोचना कर रहे हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है, मुझे समझ नहीं आता कि इन लोगों को इतना अटेंशन क्यों देते हैं। ये लोग भूल जाते हैं कि ये लोग पब्लिक की वजह से ही हैं और हमारे बिना कुछ नहीं हैं। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा है, इसलिए इनकी मूवी नहीं चलती है। जिनकी वजह से इंडस्ट्री हैं, उनकी ही रिस्पेक्ट नहीं करते। नेपोकिड्स हैं, तो मूवी मिल रही है और दिखाना करना अच्छा होने का। बाकी असल में इनके पास कुछ नहीं है। गोविंदा के गार्ड की पैपराजी से हुई बहस हाल ही में गोविंदा एक इवेंट का हिस्सा बने, जहां उनके बॉडीगार्ड्स और पैपराजी के बीच बहस हो गई। दरअसल, इवेंट खत्म होने के बाद जैसे ही गोविंदा बाहर की तरफ निकले, तभी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान पैपराजी भी उन्हें क्लिक कर रहे थे। तभी गोविंदा के बाउंसर ने उनके निकलने का रास्ता बनाते हुए लोगों को पीछे की तरफ धक्का दिया। धक्का लगते ही वहां मौजूद पैपराजी भड़क गए और बहस शुरू कर दी। हंगामा होने के बाद गोविंदा ने खुद बीच-बचाव कर मामले को संभाला। बता दें कि फिल्म पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये एक पैन इंडिया फिल्म है। बुच्ची बाबू के निर्देशन में बनी इस फिल्म को एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है। ये जान्हवी कपूर की दूसरी तेलुगु फिल्म है। उन्होंने 2024 में फिल्म देवरा से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था। दो बार पोस्टपोन हुई जान्हवी कपूर- रामचरण की पेड्डी फिल्म पेड्डी शुरुआत में 27 मार्च को रामचरण के बर्थडे पर रिलीज की जाने वाली थी, हालांकि बाद में इसे पोस्टपोन कर दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म को धुरंधर 2 और टॉक्सिक से क्लैश से बचाने के लिए पोस्टपोन किया गया था, हालांकि मेकर्स ने पोस्टपोन का कारण फिल्म के कुछ हिस्से कंप्लीट न होना बताया। पहले 30 अप्रैल 2026 के बाद इसे 25 जून के लिए शेड्यूल किया गया, जिसके बाद प्री-पोन कर इसे 4 जून को रिलीज किया जा रहा है।
आसमान से बरस रही आग, इन 5 बीमारियों के मरीज रहें अलर्ट, जरा सी लापरवाही पहुंचा देगी अस्पताल

Last Updated:May 19, 2026, 14:13 IST Extreme Heat and Health: इस वक्त भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है. दिल्ली-NCR में पारा 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है और लू से लोगों का बुरा हाल है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह मौसम हार्ट, डायबिटीज, अस्थमा, हाई BP और किडनी मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. सभी लोगों को गर्मी, हीटवेव और डिहाइड्रेशन से बचना चाहिए. सही देखभाल और सतर्कता से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव किया जा सकता है. हार्ट और डायबिटीज के मरीजों को लू से बचना चाहिए. Heatwave Health Risks: देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और हीटवेव का कहर लगातार बढ़ रहा है. पिछले कुछ दिनों में आसमान से आग बरस रही है और गर्म हवाओं ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. डॉक्टर्स के अनुसार गर्मी सिर्फ थकान या डिहाइड्रेशन ही नहीं बढ़ाती, बल्कि कुछ बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. खासतौर पर दिल, सांस, शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को गर्मियों में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है. जरा सी लापरवाही से हालत बिगड़ सकती है और अस्पताल की नौबत आ सकती है. यूपी के लखनऊ में मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया भीषण गर्मी और लू की चपेट में आना सभी लोगों के लिए खतरनाक होता है. खासतौर से हार्ट डिजीज, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, अस्थमा और किडनी डिजीज से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम बेहद खतरनाक है. भीषण गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. तेज गर्मी की वजह से हार्ट रेट बढ़ सकता है और शरीर में पानी की कमी होने लगती है. जो लोग पहले से हार्ट डिजीज, हार्ट फेलियर या ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं, उनमें हीट स्ट्रेस की वजह से सीने में दर्द, सांस फूलना और कमजोरी जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. गंभीर मामलों में हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है. डॉक्टर ने बताया कि गर्मी में अस्थमा और सांस के मरीजों को भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. गर्म हवा सांस की नलियों को प्रभावित कर सकती है. इसके अलावा धूल, प्रदूषण और गर्म हवाएं अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ा सकती हैं. इस मौसम में अस्थमा और COPD के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी और सीने में जकड़न की समस्या ज्यादा हो सकती है. ऐसे लोगों को धूप और गर्म हवा से बचना चाहिए और जरूरी दवाइयां हमेशा साथ रखनी चाहिए. इसके अलावा डायबिटीज पेशेंट्स को डिहाइड्रेशन जल्दी हो सकता है. शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है और कमजोरी, चक्कर या थकान महसूस हो सकती है. कुछ मामलों में ज्यादा गर्मी इंसुलिन और दूसरी दवाओं के असर को भी प्रभावित कर सकती है. इसलिए डायबिटीज मरीजों को समय-समय पर पानी पीते रहना चाहिए और ब्लड शुगर मॉनिटर करते रहना चाहिए. एक्सपर्ट के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को भी गर्मी में ज्यादा खतरा होता है. गर्मी में शरीर का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. कई लोगों को चक्कर आना, कमजोरी या बेचैनी महसूस हो सकती है. जो लोग हाई BP की दवा लेते हैं, उन्हें गर्मियों में खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि कुछ दवाइयों की वजह से शरीर में पानी की कमी और बढ़ सकती है. तेज गर्मी में शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है, जिससे पानी की कमी हो सकती है. अगर शरीर को पर्याप्त पानी न मिले, तो किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. किडनी डिजीज से जूझ रहे लोगों में डिहाइड्रेशन की वजह से हालत गंभीर हो सकती है. ऐसे मरीजों को पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
Rupee Hits All-Time Low of 96.47 vs Dollar; Inflation Risk Looms

मुंबई9 मिनट पहले कॉपी लिंक रुपया आज 19 मई को डॉलर के मुकाबले 18 पैसे गिरकर पहली बार 96.47 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इससे पहले सोमवार को रुपया 96.29 के स्तर पर बंद हुआ था। पिछले कुछ दिनों से रुपए में लगातार गिरावट जारी है। साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और जियोपॉलिटिकल तनाव कम नहीं हुआ, तो रुपया जल्द ही 100 के स्तर को भी छू सकता है। डॉलर महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा मिडिल ईस्ट संघर्ष को दशकों का सबसे गंभीर एनर्जी संकट माना जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। तेल की कीमतें: कच्चे तेल महंगे होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा है। जरूरी सामान महंगा: LPG, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित। महंगाई का डर: डॉलर महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे, जिससे रिटेल महंगाई बढ़ सकती है। विदेश में पढ़ाई-घूमना महंगा: विदेश जाने या पढ़ाई के लिए डॉलर खरीदने पर अब ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे: मोबाइल, लैपटॉप और आयातित पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि भुगतान डॉलर में होता है। करेंसी की कीमत कैसे तय होती है? डॉलर के मुकाबले किसी करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना या कमजोरी (करेंसी डेप्रिसिएशन) कहते हैं। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन होते हैं। इसके घटने-बढ़ने का असर करेंसी पर पड़ता है। अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर्याप्त होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा। डॉलर घटे तो रुपया कमजोर, बढ़े तो मजबूत होगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Learning from mistakes and moving forward

Hindi News Sports Success Mantras Of Champions: Learning From Mistakes And Moving Forward एलिस डेवलिन. द न्यूयॉर्क टाइम्स4 मिनट पहले कॉपी लिंक टेनिस स्टार इगा स्वातेक से लेकर ओलिंपियन तक, हर किसी के पास दबाव संभालने और फोकस बनाए रखने का अपना तरीका है।- प्रतीकात्मक फोटो मैदान पर दिखने वाली सफलता सिर्फ ताकत, फिटनेस और अभ्यास का नतीजा नहीं होती। बड़े खिलाड़ी अपने दिमाग को भी उसी तरह तैयार करते हैं, जैसे शरीर को। पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों, कोच और स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट्स के बीच एक बात बार-बार सामने आई है कि चैम्पियन खिलाड़ी अपने दिमाग को संभालना जानते हैं। टेनिस स्टार इगा स्वातेक से लेकर ओलिंपियन तक, हर किसी के पास दबाव संभालने और फोकस बनाए रखने का अपना तरीका है। ये छोटे-छोटे मानसिक अभ्यास उन्हें बड़े मुकाबलों में शांत और मजबूत बनाए रखते हैं। ऐसे ही पांच तरीके दुनियाभर के खिलाड़ी अपना रहे हैं। 1. पुराने पल में फंसे नहीं रहते खिलाड़ी परफॉर्मेंस कोच सिंद्रा कैमफॉफ इस तरीके को ‘लर्न, बर्न, रिटर्न’ कहती हैं। यानी पहले गलती समझो, फिर उसे दिमाग से निकालो और आगे बढ़ो। कुछ खिलाड़ी इसके लिए खास शब्द इस्तेमाल करते हैं। एनएफएल खिलाड़ी एडम थीलेन गलती के बाद ‘फ्लश इट’ बोलते थे, जैसे बुरी बात को बाहर निकाल दिया हो। इससे खिलाड़ी पुराने पल में फंसे नहीं रहते। 2. दिमाग को बाहरी चीजों पर लगाने की सलाह अमेरिकी ओलिंपिक टीम के स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट एलेक्स कोहेन कहते हैं कि ज्यादा सोचने से खिलाड़ी अपनी लय खो देते हैं। अगर खिलाड़ी हर मूवमेंट के बारे में सोचने लगे, तो उसका खेल बिगड़ सकता है। इसलिए वह खिलाड़ियों को बाहरी चीजों पर ध्यान लगाने की सलाह देते हैं। इससे शरीर स्वाभाविक तरीके से काम करता है। 3. पहेलियों से दिमाग की नसों को सक्रिय करना दुनिया की नंबर-3 टेनिस खिलाड़ी इगा स्वातेक मैच से पहले सुडोकू और क्रॉसवर्ड हल करती हैं। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ओरियाना कॉर्नेट के मुताबिक, पहेलियां दिमाग की नई नसों को सक्रिय करती हैं और फोकस बढ़ाती हैं। साथ ही यह दिमाग को शांत भी रखती हैं। स्वातेक शुरु में मैच से पहले मैथ्स का होमवर्क करती थीं, अब उसकी जगह पजल्स ने ले ली है। 4. नकारात्मक सोच को सकारात्मकता में बदलना ओलिंपियन केंडेल विलियम्स अपने दिमाग में आने वाले नकारात्मक विचारों को ‘ANTS’ यानी ऑटोमैटिक नेगेटिव थॉट्स कहती हैं। जब भी उनके मन में ‘मैं नहीं कर पाऊंगी’ जैसे विचार आते हैं, वे खुद को याद दिलाती हैं कि यह सिर्फ एक नकारात्मक सोच है, सच नहीं। फिर वह उसे सकारात्मक सोच से बदल देती हैं। इससे आत्मविश्वास बना रहता है। 5. हर थकान का इलाज अलग स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. किर्स्टन कूपर कहती हैं कि सिर्फ सोना ही आराम नहीं होता। मानसिक थकान के लिए मानसिक आराम जरूरी है। अगर दिनभर फैसले लेने पड़े हों, तो दिमाग को कुछ समय बिना सोच-विचार के छोड़ना चाहिए। स्क्रीन से दूरी, शांत समय बिताना, अच्छे लोगों के साथ रहना और खुद को भावनात्मक दबाव से दूर रखना भी जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Learning from mistakes and moving forward

Hindi News Sports Success Mantras Of Champions: Learning From Mistakes And Moving Forward एलिस डेवलिन. द न्यूयॉर्क टाइम्स9 मिनट पहले कॉपी लिंक टेनिस स्टार इगा स्वातेक से लेकर ओलिंपियन तक, हर किसी के पास दबाव संभालने और फोकस बनाए रखने का अपना तरीका है। मैदान पर दिखने वाली सफलता सिर्फ ताकत, फिटनेस और अभ्यास का नतीजा नहीं होती। बड़े खिलाड़ी अपने दिमाग को भी उसी तरह तैयार करते हैं, जैसे शरीर को। पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों, कोच और स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट्स के बीच एक बात बार-बार सामने आई है कि चैम्पियन खिलाड़ी अपने दिमाग को संभालना जानते हैं। टेनिस स्टार इगा स्वातेक से लेकर ओलिंपियन तक, हर किसी के पास दबाव संभालने और फोकस बनाए रखने का अपना तरीका है। ये छोटे-छोटे मानसिक अभ्यास उन्हें बड़े मुकाबलों में शांत और मजबूत बनाए रखते हैं। ऐसे ही पांच तरीके दुनियाभर के खिलाड़ी अपना रहे हैं। 1. पुराने पल में फंसे नहीं रहते खिलाड़ी परफॉर्मेंस कोच सिंद्रा कैमफॉफ इस तरीके को ‘लर्न, बर्न, रिटर्न’ कहती हैं। यानी पहले गलती समझो, फिर उसे दिमाग से निकालो और आगे बढ़ो। कुछ खिलाड़ी इसके लिए खास शब्द इस्तेमाल करते हैं। एनएफएल खिलाड़ी एडम थीलेन गलती के बाद ‘फ्लश इट’ बोलते थे, जैसे बुरी बात को बाहर निकाल दिया हो। इससे खिलाड़ी पुराने पल में फंसे नहीं रहते। 2. दिमाग को बाहरी चीजों पर लगाने की सलाह अमेरिकी ओलिंपिक टीम के स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट एलेक्स कोहेन कहते हैं कि ज्यादा सोचने से खिलाड़ी अपनी लय खो देते हैं। अगर खिलाड़ी हर मूवमेंट के बारे में सोचने लगे, तो उसका खेल बिगड़ सकता है। इसलिए वह खिलाड़ियों को बाहरी चीजों पर ध्यान लगाने की सलाह देते हैं। इससे शरीर स्वाभाविक तरीके से काम करता है। 3. पहेलियों से दिमाग की नसों को सक्रिय करना दुनिया की नंबर-3 टेनिस खिलाड़ी इगा स्वातेक मैच से पहले सुडोकू और क्रॉसवर्ड हल करती हैं। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ओरियाना कॉर्नेट के मुताबिक, पहेलियां दिमाग की नई नसों को सक्रिय करती हैं और फोकस बढ़ाती हैं। साथ ही यह दिमाग को शांत भी रखती हैं। स्वातेक शुरु में मैच से पहले मैथ्स का होमवर्क करती थीं, अब उसकी जगह पजल्स ने ले ली है। 4. नकारात्मक सोच को सकारात्मकता में बदलना ओलिंपियन केंडेल विलियम्स अपने दिमाग में आने वाले नकारात्मक विचारों को ‘ANTS’ यानी ऑटोमैटिक नेगेटिव थॉट्स कहती हैं। जब भी उनके मन में ‘मैं नहीं कर पाऊंगी’ जैसे विचार आते हैं, वे खुद को याद दिलाती हैं कि यह सिर्फ एक नकारात्मक सोच है, सच नहीं। फिर वह उसे सकारात्मक सोच से बदल देती हैं। इससे आत्मविश्वास बना रहता है। 5. हर थकान का इलाज अलग स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. किर्स्टन कूपर कहती हैं कि सिर्फ सोना ही आराम नहीं होता। मानसिक थकान के लिए मानसिक आराम जरूरी है। अगर दिनभर फैसले लेने पड़े हों, तो दिमाग को कुछ समय बिना सोच-विचार के छोड़ना चाहिए। स्क्रीन से दूरी, शांत समय बिताना, अच्छे लोगों के साथ रहना और खुद को भावनात्मक दबाव से दूर रखना भी जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔








