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Rupee Hits All-Time Low of 96.47 vs Dollar; Inflation Risk Looms

Rupee Hits All-Time Low of 96.47 vs Dollar; Inflation Risk Looms

मुंबई9 मिनट पहले

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रुपया आज 19 मई को डॉलर के मुकाबले 18 पैसे गिरकर पहली बार 96.47 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इससे पहले सोमवार को रुपया 96.29 के स्तर पर बंद हुआ था। पिछले कुछ दिनों से रुपए में लगातार गिरावट जारी है।

साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और जियोपॉलिटिकल तनाव कम नहीं हुआ, तो रुपया जल्द ही 100 के स्तर को भी छू सकता है।

डॉलर महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा

मिडिल ईस्ट संघर्ष को दशकों का सबसे गंभीर एनर्जी संकट माना जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है।

  • तेल की कीमतें: कच्चे तेल महंगे होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा है।
  • जरूरी सामान महंगा: LPG, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित।
  • महंगाई का डर: डॉलर महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे, जिससे रिटेल महंगाई बढ़ सकती है।
  • विदेश में पढ़ाई-घूमना महंगा: विदेश जाने या पढ़ाई के लिए डॉलर खरीदने पर अब ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे: मोबाइल, लैपटॉप और आयातित पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि भुगतान डॉलर में होता है।

करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?

डॉलर के मुकाबले किसी करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना या कमजोरी (करेंसी डेप्रिसिएशन) कहते हैं।

हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन होते हैं। इसके घटने-बढ़ने का असर करेंसी पर पड़ता है।

अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर्याप्त होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा। डॉलर घटे तो रुपया कमजोर, बढ़े तो मजबूत होगा।

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रुपया आज 19 मई को डॉलर के मुकाबले 18 पैसे गिरकर पहली बार 96.47 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इससे पहले सोमवार को रुपया 96.29 के स्तर पर बंद हुआ था। पिछले कुछ दिनों से रुपए में लगातार गिरावट जारी है।

साल 2026 की शुरुआत से ही रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर के पार गया था। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं और जियोपॉलिटिकल तनाव कम नहीं हुआ, तो रुपया जल्द ही 100 के स्तर को भी छू सकता है।

डॉलर महंगा होने से भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा

मिडिल ईस्ट संघर्ष को दशकों का सबसे गंभीर एनर्जी संकट माना जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है।

  • तेल की कीमतें: कच्चे तेल महंगे होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा है।
  • जरूरी सामान महंगा: LPG, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई प्रभावित।
  • महंगाई का डर: डॉलर महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और इम्पोर्टेड सामान महंगे होंगे, जिससे रिटेल महंगाई बढ़ सकती है।
  • विदेश में पढ़ाई-घूमना महंगा: विदेश जाने या पढ़ाई के लिए डॉलर खरीदने पर अब ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे: मोबाइल, लैपटॉप और आयातित पार्ट्स महंगे हो सकते हैं, क्योंकि भुगतान डॉलर में होता है।

करेंसी की कीमत कैसे तय होती है?

डॉलर के मुकाबले किसी करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना या कमजोरी (करेंसी डेप्रिसिएशन) कहते हैं।

हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन होते हैं। इसके घटने-बढ़ने का असर करेंसी पर पड़ता है।

अगर भारत के फॉरेन रिजर्व में डॉलर पर्याप्त होंगे तो रुपया स्थिर रहेगा। डॉलर घटे तो रुपया कमजोर, बढ़े तो मजबूत होगा।

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