Peddi Film Promotion: Janhvi Kapoor Scared in Vijayawada

Hindi News Entertainment Peddi Film Promotion: Janhvi Kapoor Scared In Vijayawada | Ram Charan Lookalike Fan Incident 13 मिनट पहले कॉपी लिंक अभिनेता रामचरण और एक्ट्रेस जान्हवी कपूर की आने वाली फिल्म ‘पेद्दी’ के प्रमोशन के दौरान विजयवाड़ा में एक अजीब वाकया सामने आया है। स्टेज पर फिल्म के प्रमोशन के दौरान रामचरण जैसा दिखने वाला एक हमशक्ल फैन अचानक उनकी तरफ तेजी से दौड़ा। इस घटना से रामचरण के बगल में बैठीं जान्हवी कपूर बुरी तरह घबरा गईं। हालांकि, रामचरण के पर्सनल बॉडीगार्ड और एमएमए फाइटर केविन कुंटा ने मुस्तैदी दिखाते हुए फैन को रास्ते में ही रोक लिया और गोद में उठाकर स्टेज से बाहर कर दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रामचरण की तरह ही दिख रहा था फैन यह घटना उस समय हुई जब रामचरण, जान्हवी कपूर और फिल्म के निर्देशक बुची बाबू सना स्टेज पर बैठे थे। तभी भीड़ में से निकलकर रामचरण का एक जबरा फैन सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए स्टेज पर आ गया। यह फैन दिखने में काफी हद तक रामचरण जैसा ही लग रहा था। वह तेजी से एक्टर के करीब पहुंचने की कोशिश कर रहा था। अचानक हुए इस घटनाक्रम से स्टेज पर मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। बॉडीगार्ड ने दिखाई मुस्तैदी फैन रामचरण को छू पाता, उससे पहले ही उनके पर्सनल बॉडीगार्ड केविन कुंटा बीच में आ गए। केविन एक प्रोफेशनल एमएमए फाइटर हैं। उन्होंने तुरंत स्थिति को संभाला और फैन को अपनी बाहों में उठाकर स्टेज से दूर ले गए। केविन की इस फुर्ती की सोशल मीडिया पर काफी तारीफ हो रही है। रामचरण के फैंस उनके बॉडीगार्ड की समझदारी और चुस्ती की सराहना कर रहे हैं, जिससे स्थिति बिगड़ने से बच गई। घबरा गईं जान्हवी, बढ़ाई गई सुरक्षा सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ दिख रहा है कि फैन के अचानक करीब आने से जान्हवी कपूर काफी असहज और डरी हुई नजर आईं। वे अपनी सीट पर ही सहम गईं और उनकी घबराहट चेहरे पर साफ दिख रही थी। इस घटना के तुरंत बाद सुरक्षा टीम अलर्ट हो गई। जान्हवी और रामचरण की सुरक्षा के लिए उनके चारों तरफ बड़ी संख्या में पुलिस और निजी सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया गया, ताकि इवेंट को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके। फिल्म पेड्डी के बारे में जानिए पेड्डी एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है, जो खेल के माध्यम से अपनी पहचान तलाशने वाले एक व्यक्ति की कहानी पर आधारित है। फिल्म को बुच्ची बाबू सना ने लिखा और डायरेक्ट किया है। ‘पेड्डी’ में राम चरण क्रिकेट, कुश्ती और दौड़ जैसे खेलों में हिस्सा लेते नजर आएंगे। इसका प्रोडक्शन वेंकट सतीश किलारू ने वृद्धि सिनेमाज के बैनर तले किया है। फिल्म को मैत्री मूवी मेकर्स और सुकुमार राइटिंग्स प्रेजेंट कर रहे हैं। फिल्म में राम चरण, जाह्नवी कपूर, शिव राजकुमार, दिव्येंदु और जगपति बाबू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
अमेरिका फर्स्ट की नीति आप्रवासियों का रहना कठिन बना रही:बच्चों की डे-केयर जैसी सेवाएं घटीं; स्वास्थ्य और वित्तीय सुविधाएं तक रोकी जा रहीं

अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर ट्रम्प प्रशासन लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। पिछले एक साल में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिनसे इमिग्रेंट्स यानी अप्रवासियों का अमेरिका में रहना और काम करना कठिन हो जाए। नौकरियों, स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सुविधाओं, टैक्स लाभ और बच्चों की डे-केयर सेवाओं तक पहुंच सीमित करने जैसी नीतियों पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य उन सुविधाओं को कम करना है, जो लंबे समय से लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करती रही हैं। ट्रम्प संसद को दरकिनार रखकर एक्जीक्यूटिव आदेशों के जरिये इमिग्रेशन नीति को नया रूप दे रहे हैं। इस साल की शुरुआत में प्रमुख शहरों में मिलिट्री के छापों और डिपोर्टेशन के खिलाफ तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद ट्रम्प प्रशासन अधिक क्रिएटिव और कम विवादित तरीकों पर अमल कर रहा है। इसके तहत इमिग्रेशन व्यवस्था में बदलाव के साथ हजारों लोगों को नौकरियों से निकालने और सरकारी सुविधाएं छीनने जैसे कदम उठाए गए हैं। ट्रम्प के इमिग्रेशन एजेंडे के प्रमुख रणनीतिकार स्टीफन मिलर का तर्क है कि बड़ी संख्या में आने वाले नए प्रवासी अमेरिका की पहचान, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए चुनौती बन सकते हैं। एल सल्वाडोर की इमिग्रेंट रेक्वेल मोलिना के मामले से ट्रम्प के अभियान को समझा जा सकता है। मोलिना करीब 30 वर्षों से वैध सोशल सिक्योरिटी नंबर और काम की अनुमति के साथ बोस्टन के लोगान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों की सफाई का काम कर रही थीं। हाल ही में उन्हें और कई अन्य इमिग्रेंट कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। प्रशासन ने फैसला किया है कि एयरपोर्ट के सुरक्षित क्षेत्रों में अब केवल अमेरिकी नागरिकों, ग्रीन कार्ड धारकों और स्थायी निवासियों को ही प्रवेश मिलेगा। इसी तरह के नियमों के कारण हजारों लोगों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं। अमेरिका में शरण लेने की प्रक्रिया भी कठिन बनाई जा रही है। अपने देशों से भागकर अमेरिका पहुंचने वाले कई शरणार्थियों को वर्क परमिट जारी करने पर रोक लगाई जा रही है। इससे उनके लिए आर्थिक रूपसे आत्मनिर्भर बनना मुश्किल हो सकता है। जापान में भी कई देशों के लोग प्रभावित जापान की सरकार भी ऐसे 47 हजार विदेशियों की जांच कर रही है जो देश में बिजनेस मैनेजर वीसा के तहत रहते हैं। सरकार ने बिजनेस वीसा आवेदकों के लिए पूंजी की सीमा 31 हजार डॉलर से बढ़ाकर एक लाख 88 हजार कर दी है। नए नियम से भारत, नेपाल, श्रीलंका, वियतनाम, थाइलैंड सहित अन्य देशों के लोग अधर में लटक गए हैं। ये जापान के शहरों और गांवों में करी, फ्राइड चावल,नूडल्स और अन्य व्यंजन परोसने वाले रेस्तरां चलाते हैं। सजा की धमकियों के बीच एक लाख से अधिक लोगों ने अमेरिका छोड़ा गिरफ्तारियों और सजा की धमकियों के साथ प्रशासन की रणनीति ने कई आप्रवासियों को भूमिगत होने पर मजबूर कर दिया है। उन्हें टैक्स जमा करने, डॉक्टरों के यहां जाने और यात्रा करने से रोका जाता है। अब तक स्थायी कानूनी दर्जे के बिना रहने वाले एक लाख 16 हजार से अधिक लोग स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ चुके हैं। इनमें सरकार के सेल्फ डिपोर्टेशन प्रोग्राम के तहत गए कुछ लोग भी शामिल हैं। कई लोग सरकार को बताए बगैर जा चुके हैं। पैरेंट के नागरिक न होने पर अमेरिका में जन्मे बच्चों को भी सुविधाएं नहीं मिलेंगी ट्रम्प की रणनीति से स्थायी निवासियों, शरणार्थियों और उनके परिवारों सहित कई वैध इमिग्रेंट्स भी प्रभावित हुए हैं। किसी पैैरेंट के नागरिक न होने की स्थिति में अमेरिका में जन्मे बच्चों को डे-केयर सुविधाएं लेने से रोकने के लिए नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं। ग्रीन कार्ड होल्डरों सहित सभी गैर नागरिकों के सरकारी लोन लेने पर प्रतिबंध है। कई इमिग्रेंट्स को ट्रक ड्राइविंग के लिए कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिए गए हैं।
China is also gaining an edge over America in the pharmaceutical industry.

Hindi News Business China Is Also Gaining An Edge Over America In The Pharmaceutical Industry. द न्यूयॉर्क टाइम्सकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक शिकागो में कैंसर विशेषज्ञों की सालाना कॉन्फ्रेंस।- फाइल फोटो नई दवाओं के विकास में चीन तेजी से उभरती ताकत बनता दिख रहा है। दशकों तक कैंसर विशेषज्ञों की सालाना कॉन्फ्रेंस में दवाइयों के ट्रायल्स मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप के अस्पताल चलाते थे, लेकिन पिछले सप्ताह शिकागो में आयोजित अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी (एएससीओ) की वार्षिक बैठक ने संकेत दिया कि वैश्विक बायोटेक्नोलॉजी परिदृश्य बदल रहा है। कभी अपेक्षाकृत छोटी मानी जाने वाली चीन की बायोटेक इंडस्ट्री कुछ ही वर्षों में नई दवाओं के शोध, विकास और क्लीनिकल परीक्षण का बड़ा केंद्र बन गई है। 1989 से एएससीओ सम्मेलन में भाग ले रहे जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. ओटिस ब्रॉली के अनुसार, चीन की बायोटेक इंडस्ट्री अब वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। हालांकि इस प्रगति ने अमेरिकी अधिकारियों, दवा कंपनियों और चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। उनकी आशंका नई दवाओं के विकास पर नियंत्रण और बायोटेक क्षेत्र में अमेरिका की लंबे समय से बनी बढ़त के कमजोर पड़ने से भी जुड़ी है। अमेरिकी बायोटेक स्टार्टअप्स का कहना है कि उन्हें पेटेंट, रिसर्च पब्लिकेशन और क्लीनिकल ट्रायल्स के क्षेत्र में चीनी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चीन में विकसित दवाएं अमेरिकी मरीजों पर भी उतनी ही प्रभावी साबित होंगी, जितनी चीनी नागरिकों पर होती हैं। दरअसल, लंग कैंसर के एशियाई मरीज लंबे समय तक जीवित रहते हैं और अन्य नस्ल के लोगों की तुलना में उन्हें इलाज से ज्यादा फायदा होता है। सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा चीनी कंपनी अकेसो बायोफार्मा की कैंसर-रोधी दवा इवोनेसिमैब को लेकर रही। कंपनी इस दवा का अमेरिकी मरीजों पर भी परीक्षण कर रही है। कई बड़ी दवा कंपनियों के चीन से सौदे पिछले कुछ वर्षों से दुनिया की बड़ी फार्मास्युटिकल्स कंपनियां चीन की दवाइयां और कच्चे माल का बड़े पैमाने पर आयात कर रही हैं। इस साल अब तक ऐसे लगभग आधे सौदे चीनी कंपनियों से हुए हैं। ये 2020 से बहुत अधिक हैं। कॉन्फ्रेंस में इवोनेसिमैब सहित कैंसर की अन्य दवाइयों के सौदे फाइजर, मर्क और ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब जैसी बड़ी कंपनियों ने किए हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
China is also gaining an edge over America in the pharmaceutical industry.

Hindi News Business China Is Also Gaining An Edge Over America In The Pharmaceutical Industry. द न्यूयॉर्क टाइम्स17 मिनट पहले कॉपी लिंक शिकागो में कैंसर विशेषज्ञों की सालाना कॉन्फ्रेंस।- फाइल फोटो नई दवाओं के विकास में चीन तेजी से उभरती ताकत बनता दिख रहा है। दशकों तक कैंसर विशेषज्ञों की सालाना कॉन्फ्रेंस में दवाइयों के ट्रायल्स मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप के अस्पताल चलाते थे, लेकिन पिछले सप्ताह शिकागो में आयोजित अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी (एएससीओ) की वार्षिक बैठक ने संकेत दिया कि वैश्विक बायोटेक्नोलॉजी परिदृश्य बदल रहा है। कभी अपेक्षाकृत छोटी मानी जाने वाली चीन की बायोटेक इंडस्ट्री कुछ ही वर्षों में नई दवाओं के शोध, विकास और क्लीनिकल परीक्षण का बड़ा केंद्र बन गई है। 1989 से एएससीओ सम्मेलन में भाग ले रहे जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. ओटिस ब्रॉली के अनुसार, चीन की बायोटेक इंडस्ट्री अब वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। हालांकि इस प्रगति ने अमेरिकी अधिकारियों, दवा कंपनियों और चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। उनकी आशंका नई दवाओं के विकास पर नियंत्रण और बायोटेक क्षेत्र में अमेरिका की लंबे समय से बनी बढ़त के कमजोर पड़ने से भी जुड़ी है। अमेरिकी बायोटेक स्टार्टअप्स का कहना है कि उन्हें पेटेंट, रिसर्च पब्लिकेशन और क्लीनिकल ट्रायल्स के क्षेत्र में चीनी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चीन में विकसित दवाएं अमेरिकी मरीजों पर भी उतनी ही प्रभावी साबित होंगी, जितनी चीनी नागरिकों पर होती हैं। दरअसल, लंग कैंसर के एशियाई मरीज लंबे समय तक जीवित रहते हैं और अन्य नस्ल के लोगों की तुलना में उन्हें इलाज से ज्यादा फायदा होता है। सम्मेलन में सबसे अधिक चर्चा चीनी कंपनी अकेसो बायोफार्मा की कैंसर-रोधी दवा इवोनेसिमैब को लेकर रही। कंपनी इस दवा का अमेरिकी मरीजों पर भी परीक्षण कर रही है। कई बड़ी दवा कंपनियों के चीन से सौदे पिछले कुछ वर्षों से दुनिया की बड़ी फार्मास्युटिकल्स कंपनियां चीन की दवाइयां और कच्चे माल का बड़े पैमाने पर आयात कर रही हैं। इस साल अब तक ऐसे लगभग आधे सौदे चीनी कंपनियों से हुए हैं। ये 2020 से बहुत अधिक हैं। कॉन्फ्रेंस में इवोनेसिमैब सहित कैंसर की अन्य दवाइयों के सौदे फाइजर, मर्क और ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब जैसी बड़ी कंपनियों ने किए हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Vedanta Group ED Raid | FEMA Violation; Rs74,000 Cr Debt

नई दिल्ली13 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार, 2 जून को दिग्गज बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई ग्रुप के मुंबई और दिल्ली स्थित दफ्तरों पर की गई। ED की कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ी हुई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब कंपनी अपने कारोबार को 5 अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटने (डिमर्जर) की प्रक्रिया पर काम कर रही है। विदेश पैसा भेजने को लेकर हो रही जांच ED की इस कार्रवाई का मुख्य कनेक्शन रॉयल्टी पेमेंट से जुड़ा है। जांच एजेंसी उस रॉयल्टी भुगतान की जांच कर रही है जो भारतीय कंपनी ‘वेदांता लिमिटेड’ की तरफ से अपनी मूल यानी पैरेंट कंपनी ‘वेदांता रिसोर्सेज’ को किया गया था। वेदांता रिसोर्सेज ब्रिटेन (UK) में स्थित एक एंटिटी है, जो इस समय भारी कर्ज से जूझ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, वेदांता रिसोर्सेज पर करीब ₹74,000 करोड़ का कुल कर्ज है। इस कर्ज को चुकाने और फंड मैनेज करने के लिए भारतीय यूनिट अक्सर अपनी विदेशी पैरेंट कंपनी को मोटी रॉयल्टी देती रही है, जिसे लेकर अब जांच एजेंसी ने शिकंजा कसा है। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल। कंपनी की सफाई: हम जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं ED की छापेमारी के बीच वेदांता ग्रुप के प्रवक्ता ने बयान जारी कर अपनी स्थिति साफ की है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “हम जांच अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और उनके द्वारा मांगी जा रही सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। वेदांता सभी लागू कानूनों और नियमों के पालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मामला अभी रेगुलेटरी प्रोसेस के अधीन है, इसलिए हम इस स्टेज पर इससे ज्यादा कुछ भी कहने और करने में असमर्थ हैं।” खबर आते ही बाजार में गिरा वेदांता का शेयर ED की इस अचानक कार्रवाई का असर शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक पर भी देखने को मिला। दोपहर करीब 11:45 बजे वेदांता लिमिटेड का शेयर 0.7% की गिरावट के साथ ₹334.6 पर ट्रेड कर रहा था। आपको बता दें कि वेदांता लिमिटेड भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड एक बड़ी कंपनी है, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट कैप) लगभग ₹1.3 लाख करोड़ है। 5 हिस्सों में बंटने जा रही कंपनी, मई में मिली थी मंजूरी यह छापेमारी कंपनी के लिए इसलिए भी संवेदनशील समय पर हुई है, क्योंकि ग्रुप का डिमर्जर प्रोसेस आखिरी चरणों में है। मई महीने में ही कंपनी को इस डिमर्जर के लिए विभिन्न जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियां मिली थीं। इस योजना के तहत मौजूदा बिजनेस को 5 अलग-अलग वर्टिकल्स में स्प्लिट किया जा रहा है, जिससे बाजार में 4 नई लिस्टेड कंपनियां ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Vedanta Group ED Raid | FEMA Violation; Rs74,000 Cr Debt

नई दिल्ली29 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार, 2 जून को दिग्गज बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई ग्रुप के मुंबई और दिल्ली स्थित दफ्तरों पर की गई। ED की कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ी हुई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब कंपनी अपने कारोबार को 5 अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटने (डिमर्जर) की प्रक्रिया पर काम कर रही है। विदेश पैसा भेजने को लेकर हो रही जांच ED की इस कार्रवाई का मुख्य कनेक्शन रॉयल्टी पेमेंट से जुड़ा है। जांच एजेंसी उस रॉयल्टी भुगतान की जांच कर रही है जो भारतीय कंपनी ‘वेदांता लिमिटेड’ की तरफ से अपनी मूल यानी पैरेंट कंपनी ‘वेदांता रिसोर्सेज’ को किया गया था। वेदांता रिसोर्सेज ब्रिटेन (UK) में स्थित एक एंटिटी है, जो इस समय भारी कर्ज से जूझ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, वेदांता रिसोर्सेज पर करीब ₹74,000 करोड़ का कुल कर्ज है। इस कर्ज को चुकाने और फंड मैनेज करने के लिए भारतीय यूनिट अक्सर अपनी विदेशी पैरेंट कंपनी को मोटी रॉयल्टी देती रही है, जिसे लेकर अब जांच एजेंसी ने शिकंजा कसा है। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल। कंपनी की सफाई: हम जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं ED की छापेमारी के बीच वेदांता ग्रुप के प्रवक्ता ने बयान जारी कर अपनी स्थिति साफ की है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “हम जांच अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और उनके द्वारा मांगी जा रही सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। वेदांता सभी लागू कानूनों और नियमों के पालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मामला अभी रेगुलेटरी प्रोसेस के अधीन है, इसलिए हम इस स्टेज पर इससे ज्यादा कुछ भी कहने और करने में असमर्थ हैं।” खबर आते ही बाजार में गिरा वेदांता का शेयर ED की इस अचानक कार्रवाई का असर शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक पर भी देखने को मिला। दोपहर करीब 11:45 बजे वेदांता लिमिटेड का शेयर 0.7% की गिरावट के साथ ₹334.6 पर ट्रेड कर रहा था। आपको बता दें कि वेदांता लिमिटेड भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड एक बड़ी कंपनी है, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट कैप) लगभग ₹1.3 लाख करोड़ है। 5 हिस्सों में बंटने जा रही कंपनी, मई में मिली थी मंजूरी यह छापेमारी कंपनी के लिए इसलिए भी संवेदनशील समय पर हुई है, क्योंकि ग्रुप का डिमर्जर प्रोसेस आखिरी चरणों में है। मई महीने में ही कंपनी को इस डिमर्जर के लिए विभिन्न जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियां मिली थीं। इस योजना के तहत मौजूदा बिजनेस को 5 अलग-अलग वर्टिकल्स में स्प्लिट किया जा रहा है, जिससे बाजार में 4 नई लिस्टेड कंपनियां ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
इंपैक्ट फीचर:जेईई-एडवांस्ड 2026 में एलन का ऐतिहासिक कीर्तिमान, एलन के क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ऑल इंडिया में टॉपर, टॉप-10 में एलन क्लासरूम से

जेईई-एडवांस्ड 2026 रिजल्ट्स में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा ने लगातार तीसरे वर्ष ऑल इंडिया रैंक-1 देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इन रिजल्ट्स के साथ एलन ने अब तक आईआईटी-जेईई में 7 बार ऑल इंडिया रैंक-1 दिए हैं तथा अपने इतिहास में दूसरी बार ऑल इंडिया रैंक-1, 2 और 3 को दोहराया है। इससे पहले वर्ष 2016 में भी एलन ने यह उपलब्धि हासिल की थी। एलन के विद्यार्थियों ने देश की टॉप-10 रैंक में से 6, टॉप 50 में 24 क्लासरूम स्टूडेंट्स रहे हैं। यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि राष्ट्रीय स्तर पर टॉप रैंकर्स तैयार करने में एलन देश का सबसे सफल और लगातार प्रदर्शन करने वाला संस्थान है। देशभर में एलन की सफलता की अगुआई एलन के कोटा क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने की। शुभम ने 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। श्रेष्ठता के दौर को जारी रखते हुए एलन के ही क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने 360 में से 329 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 तथा जतिन चाहर ने 319 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-3 प्राप्त की। इसके साथ ही ऑल इंडिया गर्ल्स टॉपर आरोही देशपांडे भी एलन कोटा क्लासरूम से है। आरोही ने 280 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-77 प्राप्त की है। इसके साथ ही एलन ऑनलाइन लाइव कोर्स से यशवर्धन ने ऑल इंडिया रैंक-52 प्राप्त कर ऑनलाइन में बेस्ट रिजल्ट दिया है। टाॅप रैंकर्स की सूची में एलन क्लासरूम प्रोग्राम के स्टूडेंट्स अर्नव गौतम (एआईआर-7), कनिष्क जैन (एआईआर-8), दर्श सिक्का (एआईआर-10) हासिल करते हुए देश की टॉप-10 रैंक में सफलता की संख्या 6 तक पहुंचा दी है। टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स टॉप-10 से आगे बढ़ते हुए देश की टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स, टॉप-50 में 24 स्टूडेंट्स शामिल हैं। देश के 7 में से पांच आईआईटी जोन टाॅपर एलन क्लासरुम से हैं। इसमें दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, भुवनेश्वर और रूडकी जोन टाॅपर शामिल हैं। स्टूडेंट्स को बधाई देते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि “एलन उत्कृष्टता में विश्वास रखता है और ये परिणाम स्टूडेंट्स की सफलता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। एलन ने क्वालिटी और क्वांटिटि दोनों ही तरह से असाधारण परिणाम दिए हैं। एलन ने हर ब्रेकेट टाॅप-50, टाॅप-100, ऑफलाइन और ऑनलाइन हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम रहे हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद सभी सेंटर्स पर उत्साह का माहौल है, क्योंकि देश के हर कोने से, ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक एलन स्टूडेंट्स ने सफलता प्राप्त की है। पिछले दो वर्षों में आईआईटी में प्रवेश पाने वाला प्रत्येक चैथा स्टूडेंट एलन से रहा है। हमें अपने स्टूडेंट्स, फैकल्टीज और एलन टीम पर गर्व है। उन्होंने आगे कहा कि एलन परिणामों की पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए संस्थान पिछले तीन वर्षों से देश की अग्रणी ऑडिट फर्म ई-वाय से अपने स्टूडेंट्स के रिकाॅर्ड का वेलिडेशन करवा रहा है। इस उपलब्धि के साथ एलन ने अब तक सात बार आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक-1 प्रदान की है। इससे पहले वर्ष 2025 में रजित गुप्ता तथा वर्ष 2024 में वेद लाहोटी ने एलन कोटा के क्लासरूम प्रोग्राम से एआईआर-1 हासिल की थी। उनसे पहले चित्रांग मुर्डिया (2014), अमन बंसल (2016), कार्तिकेय गुप्ता (2019) और मृदुल अग्रवाल (2021) ने भी आईआईटी-जेईई में एआईआर-1 प्राप्त की थी। हर चुनौती मेरे लिए मोटिवेशन होती हैः शुभम कुमार एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने जेईई-एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की। शुभम ने जेईई मेन में 100 परसेंटाइल स्कोर किया था और ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल की थी। मूलतः गया बिहार के साधारण परिवार से आने वाले शुभम की सफलता लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। पिछले दो वर्षों से एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ने साबित किया है कि सही गाइडेंस, डिसिप्लिन, रेगुलर प्रेक्टिस और काॅन्फिडेंस से बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। शुभम की इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पिता शिवकुमार गया में हार्डवेयर की दुकान संचालित करते हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं। शुभम की बड़ी बहन वर्तमान में आईआईटी पटना में कंप्यूटर साइंस से बीटेक कर रही हैं। एलन के साथ घर का शैक्षणिक माहौल और परिवार का निरंतर सहयोग शुभम की सफलता की मजबूत नींव बना। शुभम ने बताया कि मेरी सक्सेस का सबसे बड़ा कारण मेरे टीचर्स और परिवार का त्याग और विश्वास बहुत महत्वपूर्ण रहा। पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, जबकि मां ने हर भावनात्मक एवं मानसिक मजबूती दी। मैंने हमेशा फैकल्टीज की हर बात को गंभीरता से सुना और उन्हीं के बताए हुए तरीके को फॉलो किया। जब भी कोई टॉपिक कठिन लगता था, मैं बार-बार डाउट पूछता था। एलन की फैकल्टीज ने हर कॉन्सेप्ट को बेसिक्स से समझाया, जिससे मेरी नींव बहुत मजबूत हुई। मुझे लगता है कि अगर छात्र अपने टीचर्स पर भरोसा करके डिसिप्लिन के साथ पढ़ाई करें, तो बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। मैं रोजाना 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते था। क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करना मेरे डेली रूटीन में शामिल था। डेली प्रश्नों की प्रैक्टिस करते थे और कमजोर टाॅपिक्स पर विशेष फोकस करता था। जेईई की तैयारी में कई बार प्रेशर आ जाता है, लेकिन मैंने उसे कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मैंने हर चुनौती को मोटिवेशन में बदला। मेरा पूरा फोकस सिर्फ अपने लक्ष्य पर था। अब मैं देश के आईआईटी, मुम्बई की सीएस ब्रांच से बीटेक करूंगा। मेरी पढ़ाई के लिए पूरा परिवार कोटा शिफ्ट हो गया: आरोही जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 77 प्राप्त करने के साथ ऑल इंडिया गर्ल टाॅपर रही आरोही देशपांडे सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित मेहनत को दिया। पुणे निवासी आरोही ने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे चार वर्षों की निरंतर तैयारी और अनुशासित दिनचर्या रही है। उसने कहा कि कभी रैंक के बारे में ज्यादा नहीं सोचा, बल्कि अपना पूरा ध्यान कॉन्सेप्ट्स को मजबूत करने और नियमित अभ्यास पर रखा। आरोही ने 10वीं कक्षा में 96.7 प्रतिशत तथा 12वीं बोर्ड परीक्षा में 97.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इससे पहले जेईई मेन में
इंपैक्ट फीचर:जेईई-एडवांस्ड 2026 में एलन का ऐतिहासिक कीर्तिमान, एलन के क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ऑल इंडिया टॉपर, टॉप-10 में एलन क्लासरूम से 6 स्टूडेंट

जेईई-एडवांस्ड 2026 रिजल्ट्स में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट कोटा ने लगातार तीसरे वर्ष ऑल इंडिया रैंक-1 देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इन रिजल्ट्स के साथ एलन ने अब तक आईआईटी-जेईई में 7 बार ऑल इंडिया रैंक-1 दिए हैं तथा अपने इतिहास में दूसरी बार ऑल इंडिया रैंक-1, 2 और 3 को दोहराया है। इससे पहले वर्ष 2016 में भी एलन ने यह उपलब्धि हासिल की थी। एलन के विद्यार्थियों ने देश की टॉप-10 रैंक में से 6, टॉप 50 में 24 क्लासरूम स्टूडेंट्स रहे हैं। यह प्रदर्शन एक बार फिर साबित करता है कि राष्ट्रीय स्तर पर टॉप रैंकर्स तैयार करने में एलन देश का सबसे सफल और लगातार प्रदर्शन करने वाला संस्थान है। देशभर में एलन की सफलता की अगुआई एलन के कोटा क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने की। शुभम ने 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। श्रेष्ठता के दौर को जारी रखते हुए एलन के ही क्लासरूम स्टूडेंट कबीर छिल्लर ने 360 में से 329 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-2 तथा जतिन चाहर ने 319 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-3 प्राप्त की। इसके साथ ही ऑल इंडिया गर्ल्स टॉपर आरोही देशपांडे भी एलन कोटा क्लासरूम से है। आरोही ने 280 अंकों के साथ ऑल इंडिया रैंक-77 प्राप्त की है। इसके साथ ही एलन ऑनलाइन लाइव कोर्स से यशवर्धन ने ऑल इंडिया रैंक-52 प्राप्त कर ऑनलाइन में बेस्ट रिजल्ट दिया है। टाॅप रैंकर्स की सूची में एलन क्लासरूम प्रोग्राम के स्टूडेंट्स अर्नव गौतम (एआईआर-7), कनिष्क जैन (एआईआर-8), दर्श सिक्का (एआईआर-10) हासिल करते हुए देश की टॉप-10 रैंक में सफलता की संख्या 6 तक पहुंचा दी है। टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स टॉप-10 से आगे बढ़ते हुए देश की टॉप-20 रैंक में एलन के 12 स्टूडेंट्स, टॉप-50 में 24 स्टूडेंट्स शामिल हैं। देश के 7 में से पांच आईआईटी जोन टाॅपर एलन क्लासरुम से हैं। इसमें दिल्ली, गुवाहाटी, कानपुर, भुवनेश्वर और रूडकी जोन टाॅपर शामिल हैं। स्टूडेंट्स को बधाई देते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के सीईओ नितिन कुकरेजा ने कहा कि “एलन उत्कृष्टता में विश्वास रखता है और ये परिणाम स्टूडेंट्स की सफलता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। एलन ने क्वालिटी और क्वांटिटि दोनों ही तरह से असाधारण परिणाम दिए हैं। एलन ने हर ब्रेकेट टाॅप-50, टाॅप-100, ऑफलाइन और ऑनलाइन हर क्षेत्र में बेहतर परिणाम रहे हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद सभी सेंटर्स पर उत्साह का माहौल है, क्योंकि देश के हर कोने से, ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक एलन स्टूडेंट्स ने सफलता प्राप्त की है। पिछले दो वर्षों में आईआईटी में प्रवेश पाने वाला प्रत्येक चैथा स्टूडेंट एलन से रहा है। हमें अपने स्टूडेंट्स, फैकल्टीज और एलन टीम पर गर्व है। उन्होंने आगे कहा कि एलन परिणामों की पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखने के लिए संस्थान पिछले तीन वर्षों से देश की अग्रणी ऑडिट फर्म ई-वाय से अपने स्टूडेंट्स के रिकाॅर्ड का वेलिडेशन करवा रहा है। इस उपलब्धि के साथ एलन ने अब तक सात बार आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक-1 प्रदान की है। इससे पहले वर्ष 2025 में रजित गुप्ता तथा वर्ष 2024 में वेद लाहोटी ने एलन कोटा के क्लासरूम प्रोग्राम से एआईआर-1 हासिल की थी। उनसे पहले चित्रांग मुर्डिया (2014), अमन बंसल (2016), कार्तिकेय गुप्ता (2019) और मृदुल अग्रवाल (2021) ने भी आईआईटी-जेईई में एआईआर-1 प्राप्त की थी। हर चुनौती मेरे लिए मोटिवेशन होती हैः शुभम कुमार एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम कुमार ने जेईई-एडवांस्ड 2026 में 360 में से 330 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त की। शुभम ने जेईई मेन में 100 परसेंटाइल स्कोर किया था और ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल की थी। मूलतः गया बिहार के साधारण परिवार से आने वाले शुभम की सफलता लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। पिछले दो वर्षों से एलन क्लासरूम स्टूडेंट शुभम ने साबित किया है कि सही गाइडेंस, डिसिप्लिन, रेगुलर प्रेक्टिस और काॅन्फिडेंस से बेहतर परिणाम दिए जा सकते हैं। शुभम की इस सफलता के बाद परिवार, रिश्तेदारों और पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। पिता शिवकुमार गया में हार्डवेयर की दुकान संचालित करते हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं। शुभम की बड़ी बहन वर्तमान में आईआईटी पटना में कंप्यूटर साइंस से बीटेक कर रही हैं। एलन के साथ घर का शैक्षणिक माहौल और परिवार का निरंतर सहयोग शुभम की सफलता की मजबूत नींव बना। शुभम ने बताया कि मेरी सक्सेस का सबसे बड़ा कारण मेरे टीचर्स और परिवार का त्याग और विश्वास बहुत महत्वपूर्ण रहा। पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, जबकि मां ने हर भावनात्मक एवं मानसिक मजबूती दी। मैंने हमेशा फैकल्टीज की हर बात को गंभीरता से सुना और उन्हीं के बताए हुए तरीके को फॉलो किया। जब भी कोई टॉपिक कठिन लगता था, मैं बार-बार डाउट पूछता था। एलन की फैकल्टीज ने हर कॉन्सेप्ट को बेसिक्स से समझाया, जिससे मेरी नींव बहुत मजबूत हुई। मुझे लगता है कि अगर छात्र अपने टीचर्स पर भरोसा करके डिसिप्लिन के साथ पढ़ाई करें, तो बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। मैं रोजाना 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते था। क्लास में पढ़ाए गए टॉपिक्स को उसी दिन रिवाइज करना मेरे डेली रूटीन में शामिल था। डेली प्रश्नों की प्रैक्टिस करते थे और कमजोर टाॅपिक्स पर विशेष फोकस करता था। जेईई की तैयारी में कई बार प्रेशर आ जाता है, लेकिन मैंने उसे कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मैंने हर चुनौती को मोटिवेशन में बदला। मेरा पूरा फोकस सिर्फ अपने लक्ष्य पर था। अब मैं देश के आईआईटी, मुम्बई की सीएस ब्रांच से बीटेक करूंगा। मेरी पढ़ाई के लिए पूरा परिवार कोटा शिफ्ट हो गया: आरोही जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 77 प्राप्त करने के साथ ऑल इंडिया गर्ल टाॅपर रही आरोही देशपांडे सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और नियमित मेहनत को दिया। पुणे निवासी आरोही ने बताया कि इस उपलब्धि के पीछे चार वर्षों की निरंतर तैयारी और अनुशासित दिनचर्या रही है। उसने कहा कि कभी रैंक के बारे में ज्यादा नहीं सोचा, बल्कि अपना पूरा ध्यान कॉन्सेप्ट्स को मजबूत करने और नियमित अभ्यास पर रखा। आरोही ने 10वीं कक्षा में 96.7 प्रतिशत तथा 12वीं बोर्ड परीक्षा में 97.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इससे पहले जेईई मेन में
अमेरिका का पहला एआई स्कूल:हाईटेक लैब होते हुए भी बच्चों को दिमाग दौड़ाने के लिए प्रोत्साहन, कोशिश यही कि इंसानी खूबियां बची रहें

जॉर्जिया राज्य के हार्मनी एलीमेंट्री स्कूल की लाइब्रेरी में पहली क्लास के बच्चे रंग-बिरंगे प्लास्टिक ब्लॉक्स से घर बनाने में जुटे हैं। टीचर शानाज लखानी प्लास्टिक के खिलौने को दिखाकर पूछती हैं,‘यह हमारा ‘यूजर’ है। हमें इसके लिए मजबूत घर बनाना है, जो भूकंप में भी न गिरे।’ टीचर यहां बच्चों को ‘यूजर एक्सपीरियंस’ और ‘एआई एप्लीकेशंस’ जैसे भारी-भरकम तकनीकी शब्द सिखा रही हैं। वाइटबोर्ड पर डेटा साइंस और प्रोग्रामिंग के रंग-बिरंगे ट्राएंगल्स बने हैं। पर, 7 साल के इन मासूमों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसका एआई से क्या कनेक्शन है, वे तो बस अपनी टीचर की गोद में बैठकर, दोस्तों के साथ मिलकर खिलौनों का घर बनाने का आनंद ले रहे हैं। भविष्य की कल्पनाओं में अक्सर ऐसे स्कूल दिखते हैं जहां रोबोट पढ़ा रहे हों और बच्चे चैटबॉट्स से बातें कर रहे हों। लेकिन, हकीकत में यह स्कूल तकनीक से ज्यादा इंसानी जुड़ाव पर टिका है। असली शिक्षा वही है जहां टीचर्स का व्यक्तिगत मार्गदर्शन, बच्चों का आपसी जुड़ाव और खुद से सोचने की क्षमता अहम रहती है। इस हाई स्कूल को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘नौकरियां बदलने वाली’ रिपोर्ट देखकर डिजाइन किया गया था। पूर्व छात्र मोहम्मद रिजवान व जोसेफ श्राग ने बताया कि ‘एआई स्कूल’ का दावा हकीकत से अलग था। उन्होंने कहा कि हम एआई का उतना इस्तेमाल नहीं करते। रोबोटिक्स जैसी कुछ क्लास छोड़ दें तो बाकी पढ़ाई पारंपरिक तरीके से होती है। भाषा व इतिहास में टीचर्स बच्चों से हाथ से निबंध लिखवाते हैं ताकि वे एआई से मदद न ले सकें। स्कूल के मैकेनिकल इंजीनियरिंग रूम में कार्डबोर्ड से बड़ा स्पिनिंग गेम बना रहे एक छात्र से जब पूछा गया कि क्या उसने इसके लिए किसी एआई टूल या चैटबॉट का इस्तेमाल किया? तो उसका जवाब था, ‘नहीं, मैं सिर्फ अपने दिमाग का इस्तेमाल कर रहा हूं।’ इतिहास की क्लास में जब बच्चे चैटबॉट से सवाल-जवाब करते हैं, तो टीचर केसी होलीक्रॉस उनका मार्गदर्शन करती हैं। पैरेंट लिडिया क्लार्क कहती हैं,‘हमारे बच्चे तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि स्कूल के सुरक्षित माहौल और बेहतरीन टीचर्स के मानवीय जुड़ाव की वजह से आगे बढ़ रहे हैं। एआई सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी ‘खान एकेडमी’ के प्रमुख सलमान खान ने स्वीकार किया है कि कई छात्रों के लिए एआई टूल से पढ़ना बेहद निराशाजनक रहा, क्योंकि मशीनें बच्चों की मानसिक उलझन को इंसानों की तरह नहीं समझ सकतीं। ’ स्कूल के अधिकारियों ने भी अंततः माना कि उनके लिए एआई का मतलब सिर्फ कोडिंग सिखाना नहीं, बल्कि उन ‘ड्यूरेबल स्किल्स’ (जैसे- नैतिक सोच, आपसी सहयोग और रचनात्मकता को बचाना है जो मशीनें कभी नहीं सीख सकतीं। आपसी चर्चा, एक्टिविटी को महत्व ताकि मौलिक सोच बनी रहे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने 800 से ज्यादा रिसर्च पेपर्स की स्टडी करके चेतावनी दी है कि एआई टूल तुरंत काम पूरा करने में तो मदद करते हैं, पर लंबे वक्त में बच्चों की खुद सोचने की क्षमता खत्म हो रही है। इसे वैज्ञानिकों ने ‘कॉग्निटिव सरेंडर’ कहा है, जहां इंसान अपने फैसले मशीनों पर छोड़ देता है। हार्मनी स्कूल इस खतरे को भांपते हुए ‘ह्यूमन टच’ पर जोर दे रहा है। यहां एआई सिर्फ टूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जबकि मुख्य फोकस आपसी चर्चा, फिजिकल एक्टिविटी और टीचर्स के मार्गदर्शन पर है ताकि बच्चों की मौलिक सोच बनी रहे।
सीएम फडणवीस की पत्नी ने ई-रिक्शा चलाया, VIDEO:एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर पैसेंजर बनीं, पिंक ई-रिक्शा पहल की शुरुआत हुई

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर रविवार को भामला फाउंडेशन के विमेन-लेड ग्रीन मोबिलिटी प्रोग्राम के तहत पिंक ई-रिक्शा सहायता पहल की शुरुआत की गई। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने ई-रिक्शा चलाया। वहीं, रिक्शा में उनके पीछे बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर बैठी थीं। देखें कार्यक्रम की 2 तस्वीरें- भूमि ने पिंक ई-रिक्शा पहल की तारीफ की मीडिया से बातचीत करते हुए भूमि ने कार्यक्रम को लेकर कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी पहल नहीं है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और आर्थिक आजादी को भी बढ़ावा देने वाला कदम है। भूमि ने कहा कि जब भामला फाउंडेशन ने उन्हें इस पहल के बारे में बताया, तो उन्होंने तुरंत इसका हिस्सा बनने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत महिला ड्राइवरों को ई-रिक्शा दिए जाएंगे, जिससे उन्हें रोजगार और आर्थिक मजबूती मिलेगी। भूमि ने कहा कि अगर देश की महिलाएं सक्षम होंगी तो देश और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की बातें तो अक्सर होती हैं, लेकिन भामला फाउंडेशन ने इसे जमीन पर उतारकर दिखाया है। मुंबई में 1000 ई-रिक्शा लॉन्च होंगे भूमि ने उम्मीद जताई कि पिंक ई-रिक्शा की यह पहल पूरे देश में फैलेगी। उन्होंने बताया कि मुंबई में 1000 पिंक ई-रिक्शा लॉन्च किए जा रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र में 12 हजार ई-रिक्शा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। भामला फाउंडेशन मुंबई की एक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) है। इसकी शुरुआत साल 1995 में आसिफ भामला ने की थी। शुरुआत में यह संस्था सामाजिक और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर काम करती थी। बाद में इसने अपने काम का दायरा बढ़ाया। आज यह संस्था पर्यावरण बचाने, स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने, युवाओं को आगे बढ़ाने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई अभियान चलाती है। वर्कफ्रंट की बात करें तो भूमि पेडनेकर आखिरी बार अमेजन प्राइम की वेब सीरीज ‘दलदल’ में नजर आई थीं। इस सीरीज में उन्होंने डीसीपी रीटा फरेरा का किरदार निभाया था। भूमि पेडनेकर से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… संघर्ष, ट्रॉमा-रिजेक्शन से उठकर स्ट्रॉन्ग एक्ट्रेस बनीं भूमि पेडनेकर:बोलीं- स्कूल में बुलिंग होती थी, तभी सोचा कि एक दिन सबको कुछ बनकर दिखाऊंगी संघर्ष, ट्रॉमा, रिजेक्शन और सामाजिक तानों के बीच खुद को साबित करने वाली अभिनेत्री का नाम है भूमि पेडनेकर। मुंबई की चमकदार फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब शुरुआत आत्म-संदेह, असुरक्षा और निजी आघातों से भरी हो। पूरी खबर यहां पढ़ें…








