Saturday, 22 Aug 2026 | 02:27 AM

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Indias First Commercial Jet Landing Via Satellite Signal

Indias First Commercial Jet Landing Via Satellite Signal

Hindi News Business Indias First Commercial Jet Landing Via Satellite Signal | Gagan System Trial नई दिल्ली8 मिनट पहले कॉपी लिंक अब खराब विजिबिलिटी में भी प्लेन सुरक्षित लैंड कर सकेंगे। क्योंकि, भारत में पहली बार किसी बड़े कमर्शियल जेट को बिना ग्राउंड रेडियो बीम के सीधे सैटेलाइट सिग्नल्स की मदद से सुरक्षित उतारने का सफल ट्रायल कर लिया गया है। विमानन नियामक DGCA की देखरेख में 27 जून को इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A320 विमान ने स्वदेशी ‘गगन’ नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर यह ऐतिहासिक लैंडिंग की। हालांकि इंडिगो ने 2022 में छोटे ATR विमानों पर इसका परीक्षण किया था, लेकिन बड़े कमर्शियल जेट के साथ देश में यह पहला सफल ट्रायल है। क्या है स्वदेशी गगन सिस्टम? गगन का पूरा नाम ‘जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GAGAN) है। यह भारत का अपना सैटेलाइट-बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने मिलकर तैयार किया है। खासियत: गगन, भारत के ‘नाविक’ (NavIC) या अमेरिका के ‘GPS’ की तरह कोई स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम नहीं है, जो सीधे लोकेशन बताता हो। बल्कि, यह पहले से मौजूद GPS सिग्नल्स की कमियों और गलतियों को ठीक करके उन्हें विमानों के लिए और ज्यादा सटीक व भरोसेमंद बनाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News Business Indias First Commercial Jet Landing Via Satellite Signal | Gagan System Trial नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक अब खराब विजिबिलिटी में भी प्लेन सुरक्षित लैंड कर सकेंगे। क्योंकि, भारत में पहली बार किसी बड़े कमर्शियल जेट को बिना ग्राउंड रेडियो बीम के सीधे सैटेलाइट सिग्नल्स की मदद से सुरक्षित उतारने का सफल ट्रायल कर लिया गया है। विमानन नियामक DGCA की देखरेख में 27 जून को इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A320 विमान ने स्वदेशी ‘गगन’ नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर यह ऐतिहासिक लैंडिंग की। हालांकि इंडिगो ने 2022 में छोटे ATR विमानों पर इसका परीक्षण किया था, लेकिन बड़े कमर्शियल जेट के साथ देश में यह पहला सफल ट्रायल है। क्या है स्वदेशी गगन सिस्टम? गगन का पूरा नाम ‘जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GAGAN) है। यह भारत का अपना सैटेलाइट-बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने मिलकर तैयार किया है। खासियत: गगन, भारत के ‘नाविक’ (NavIC) या अमेरिका के ‘GPS’ की तरह कोई स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम नहीं है, जो सीधे लोकेशन बताता हो। बल्कि, यह पहले से मौजूद GPS सिग्नल्स की कमियों और गलतियों को ठीक करके उन्हें विमानों के लिए और ज्यादा सटीक व भरोसेमंद बनाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है

राजकुमार हिरानी का ओटीटी डेब्यू:बोले- नई कहानी की तलाश में फ्रस्ट्रेशन होना तय, यही बेचैनी नई कहानी तक ले जाती है

साइबर क्राइम जैसे गंभीर विषय को मनोरंजक अंदाज में पर्दे पर लाने की तैयारी कर रहे राजकुमार हिरानी अपनी पहली वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ से ओटीटी डेब्यू कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहानी के आइडिया, फिल्म और ओटीटी में फर्क, क्रिएटिव प्रोसेस, दर्शकों की उम्मीदों और सीरीज के भावनात्मक संदेश पर बात की। सवाल: ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ की कहानी का आइडिया कैसे आया? कब लगा कि यही कहानी बनानी चाहिए? जवाब: इस कहानी की शुरुआत कुछ छोटी कहानियों से हुई। मैंने साइबर क्राइम पर लिखी कुछ शॉर्ट स्टोरी पढ़ी थीं। उनसे समझ आया कि साइबर क्राइम कैसे होता है, उसे कैसे सुलझाया जाता है और उससे कैसे बचा जा सकता है। उसी दौरान लगा कि इस विषय में एक बड़ी और दिलचस्प कहानी बन सकती है। फिर किरदारों पर काम शुरू किया। धीरे-धीरे कहानी विकसित हुई, गोवा की सेटिंग आई, एक क्राइम ब्रांच का पुलिस ऑफिसर और एक हैकर जुड़ा। इस तरह पूरी दुनिया तैयार होती चली गई। सवाल: आपकी फिल्मों में अक्सर ह्यूमर के साथ एक गहरा मैसेज भी होता है। क्या इस सीरीज में भी दर्शकों को वैसा कुछ देखने मिलेगा? जवाब: देखिए, हमारी कोशिश हमेशा पहले दर्शकों का मनोरंजन करने की होती है। हम यह सोचकर कहानी नहीं बनाते कि हर बार कोई संदेश देना है। लेकिन इंसानी रिश्तों और समाज से जुड़ी कहानी में कुछ बातें अपने आप सामने आ जाती हैं। इस सीरीज में भी ऐसा ही है। यह साइबर क्राइम की कहानी है, लेकिन इसे हल्के और मनोरंजक अंदाज में बताया गया है। कहानी के आखिर में एक छोटा सा मैसेज जरूर आता है, लेकिन वह थोपा हुआ नहीं लगेगा। सवाल: फिल्मों और ओटीटी के लिए कहानी लिखने में सबसे बड़ा फर्क क्या होता है? जवाब: कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जिन्हें आप दो या ढाई घंटे में कह सकते हैं, लेकिन कुछ कहानियों को ज्यादा समय चाहिए होता है। ओटीटी आपको किरदारों को गहराई से दिखाने, उनके सफर को विस्तार देने और कई ट्रैक साथ चलाने का मौका देता है। फिल्मों में यह आजादी कम होती है। इसलिए कुछ कहानियां वेब सीरीज के लिए ज्यादा सही होती हैं। सवाल 4: इस बार ह्यूमर में नया क्या देखने को मिलेगा? जवाब: ह्यूमर हमेशा किरदारों से निकलता है। नए किरदारों का व्यवहार और सोच भी अलग होती है। इस सीरीज में ‘पेड्रो’ ऐसा किरदार है जिसकी अपनी अलग दुनिया है। वह लोगों से जिस तरह बात करता है और केस को देखता-सुलझाता है, उसी से ह्यूमर निकलता है। सवाल: गोवा इस कहानी का हिस्सा कैसे बना? जवाब: दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में कहानी गोवा में नहीं थी। हमने पहला ड्राफ्ट हरियाणा को ध्यान में रखकर में लिखा था। लेकिन बाद में मैं और अभिजीत लिखने के लिए गोवा गए। वहां का माहौल, लोग और अनुभव अलग लगे, जिससे कहानी धीरे-धीरे बदलती गई और आखिर में इसे गोवा में सेट कर दिया। कई बार जगह खुद कहानी बदल देती है। सवाल: गोवा में शूटिंग का कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद आता हो? जवाब: एक मजेदार किस्सा यह हुआ कि हमारा एक असिस्टेंट गोवा पहुंचते ही छुट्टी वाले मूड में आ गया। एक रात वह दोस्त की कार लेकर घूमने गया और सुबह कार की हालत खराब करके लौटा। सबसे मजेदार बात यह थी कि अगले दिन वह ऐसे बैठा था जैसे कुछ हुआ ही नहीं। तब समझ आया कि गोवा ऐसी जगह है जहां कहानी अपने आप बनने लगती है। सवाल: सेट पर एक्टर्स और टीम के सुझावों को कितना महत्व देते हैं? जवाब: सिनेमा पूरी तरह टीमवर्क है। यह किसी एक इंसान का काम नहीं है। आप कहानी लिख लेते हैं, लेकिन उसके बाद कैमरा, म्यूजिक, डायरेक्शन और एक्टर्स मिलकर उसे बेहतर बनाते हैं। हर इंसान अपना नजरिया लेकर आता है। जितना खुलकर आप सबकी राय लेते हैं, काम उतना बेहतर होता जाता है। सवाल: आपकी फिल्मों से दर्शकों की उम्मीदें बहुत ज्यादा रहती हैं। क्या इसका दबाव महसूस होता है? जवाब: दबाव से ज्यादा यह एक चुनौती होती है। हर बार आपको नई कहानी खोजनी पड़ती है। मेरा मानना है कि फिल्म ऐसी चीज नहीं है जिसे लोग बार-बार एक जैसा देखना चाहें। हर बार कुछ नया देना जरूरी होता है। इसी वजह से स्क्रिप्ट को लेकर लगातार सोच चलता रहता है कि क्या नया किया जाए। कई बार फ्रस्ट्रेशन भी होता है। लगता है कि सही आइडिया क्यों नहीं मिल रहा। लेकिन जब कहानी का कोई हिस्सा खुलता है तो उसकी खुशी भी उतनी ही बड़ी होती है। राइटिंग ऐसा काम है जो कभी खत्म नहीं होता। आप काम बंद कर देते हैं, लेकिन दिमाग कहानी में लगा रहता है। कई बार नई कहानी की तलाश आपको सोने भी नहीं देती। सवाल: अगर एक लाइन में ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ को बताना हो तो क्या कहेंगे? जवाब: यह दो बिल्कुल अलग तरह के लोगों की कहानी है, जो एक साथ आते हैं। उनके जरिए हम साइबर क्राइम की दुनिया दिखाते हैं। यह एक हार्ट-वॉर्मिंग कहानी है, जिसमें मनोरंजन, रिश्ते और एक खूबसूरत सफर भी है।

CBSE Three-Language Policy New Guidelines

CBSE Three-Language Policy New Guidelines

Hindi News National CBSE Three Language Policy New Guidelines | Class 9 Students Get Exemption नई दिल्ली9 घंटे पहले कॉपी लिंक CBSE ने सोमवार को थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर नई गाइडलाइन जारी की। इसके मुताबिक, इस साल 10वीं में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी। 7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी। इन छात्रों को 10वीं में आने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। CBSE के इस फैसले से 50 लाख छात्र-छात्राओं को राहत मिली है। पहले थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के बारे में जानें CBSE की नई गाइडलाइन का सब कुछ जो आपका जानना जरूरी- वर्तमान कक्षा 10: सत्र 2026-27 के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्र पहले की तरह केवल दो भाषाओं के साथ ही बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा न पढ़नी होगी और न ही उसकी बोर्ड परीक्षा देनी होगी। वर्तमान कक्षा 9 : इस बैच के छात्रों को 3 भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम 2 भारतीय भाषाएं जरूरी होंगी। हालांकि, जब ये छात्र अगले साल क्लास 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। वर्तमान कक्षा 7 और 8: इन छात्रों के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी। तीसरी भाषा पढ़नी होगी, लेकिन 10वीं बोर्ड में उसकी परीक्षा नहीं होगी। मूल्यांकन स्कूल करेगा। वर्तमान कक्षा 6: यही पहला बैच होगा, जिस पर थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पूरी तरह लागू होगी। इन छात्रों को कक्षा छह से 3 भाषाएं पढ़नी होंगी और जब ये कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी। इन छात्रों को मिलेगी छूट दिव्यांग छात्रों को कानून के अनुसार तीसरी भाषा की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। विदेशों में स्थित CBSE स्कूलों और विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। यदि किसी छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला हो जाता है, तो छात्र पहले से चुने गए भाषाएं को जारी रख सकेगा। बोर्ड ने 15 मई को सर्कुलर जारी किया, पैरेंट्स सुप्रीम कोर्ट पहुंचे CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। इसका विरोध शुरू हो गया। स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स के 19 लोगों के एक ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इस पर सुनवाई जारी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये फैसला CBSE के पहले के फैसले से बिल्कुल उलट है। सीबीएसई ने 9 अप्रैल को साफ कहा था कि तीसरी भाषा वाला नियम (R3) 9वीं क्लास के छात्रों पर 2029-30 सत्र तक लागू नहीं होगा। 34 साल बाद नई शिक्षा नीति 2020 लाई गई नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) को भारत सरकार ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी। यह 34 साल बाद भारत की शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव है। इससे पिछली नीति 1986 में बनाई गई थी, जिसे 1992 में अपडेट किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुसार ढालना है, ताकि छात्र व्यावहारिक ज्ञान मिले और वे स्किल सीखें। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए केंद्र ने 2030 तक का लक्ष्य रखा है। शिक्षा संविधान में समवर्ती सूची का विषय है, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों का अधिकार होता है। इसलिए यह जरूरी नहीं कि राज्य सरकारें इसे पूरी तरह अप्लाई करें। टकराव होने पर दोनों पक्षों को आम सहमति से विवाद सुलझाने का सुझाव दिया गया है। ———————————- ये खबर भी पढ़ें: CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पेरेंट्स:9वीं क्लास में लागू किए जाने का विरोध, जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच करेगी सुनवाई CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं। ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। CBSE ने 15 मई को एकेडमिक सेशन 2026-27 से थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने का सर्कुलर जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

kannad actress krishi tapanda break silence after her bussinessman friend commint suicide on her flat

kannad actress krishi tapanda break silence after her bussinessman friend commint suicide on her flat

10 मिनट पहले कॉपी लिंक कुछ समय पहले ही कन्नड़ एक्ट्रेस कृषि थापंदा के घर में एक नामी बिजनेसमैन ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद कई लोग इस आत्महत्या से एक्ट्रेस का नाम जोड़ रहे हैं। अब एक्ट्रेस ने अटकलों पर चुप्पी तोड़ते हुए भावुक अपील की है। एक्ट्रेस ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा है, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा कुछ लिखना पड़ेगा। मेरे पास न तो ताकत बची है और न ही मानसिक हिम्मत कि मैं यह सब लिख सकूं या दुनिया के सामने रख सकूं। इस मुश्किल समय में आखिरी चीज जो मैं करना चाहती थी, वह कोई सार्वजनिक बयान देना था।’ आगे एक्ट्रेस ने लिखा, ‘जब हम एक ऐसे दुख से गुजर रहे हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती, तब हमसे उसकी सफाई देने की उम्मीद की जा रही है। पिछले कुछ दिनों ने मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। जो कुछ भी हुआ है, उसके बीच मैंने अपने बेहद करीबी इंसान को भी खो दिया है।’ आगे एक्ट्रेस ने लिखा, ‘उसे खोने से मेरी जिंदगी में ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इस दुख को और भी कठिन इसलिए बना दिया गया है क्योंकि मुझे ठीक से शोक मनाने का समय और मौका तक नहीं मिला। जब उसका परिवार, दोस्त और अपने लोग इस असहनीय दुख से जूझ रहे हैं, उसी दौरान लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं, तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं और किसी की मौत को कहानी बनाने की कोशिश की जा रही है।’ ‘सबसे पहला सवाल अक्सर यही होता है, “आपकी प्रतिक्रिया क्या है?”, जबकि सवाल यह होना चाहिए था “क्या आप ठीक हैं?” या “आप खुद को कैसे संभाल रहे हैं?” मैं यह बात किसी एक व्यक्ति या किसी एक मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए नहीं कह रही हूं, बल्कि उन सभी लोगों से कह रही हूं जो पूरी सच्चाई जाने बिना और अपने व्यवहार का पीछे रह गए लोगों पर क्या असर पड़ता है, यह समझे बिना जवाब तलाशते रहते हैं। किसी भी शोक में डूबे इंसान से कभी यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वह अपने दुख का कारण या सफाई दे।’ आखिर में एक्ट्रेस ने लिखा है, ‘उन सभी लोगों से, जो अब भी अटकलें लगा रहे हैं, मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि कृपया रुक जाइए। किसी के दुख को सुर्खियां या मनोरंजन का विषय मत बनाइए। मानसिक स्वास्थ्य बेहद नाजुक होता है और शोक भी।’ क्या है पूरा मामला? 24 जून को बिजनेसमैन वैशाख ने एक्ट्रेस कृषि थापंदा के घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। एक्ट्रेस बैंग्लोर के होसाकेरेहल्ली में रेंटेड अपार्टमेंट में रहती हैं। उनके अपार्टमेंट की एक चाबी उनके दोस्त वैशाख के पास भी थी। वैशाख को इसी साल एक्टॉर्शन केस में गिरफ्तार किया गया था। जेल से छूटने के बाद से वो काफी परेशान चल रहे थे। उनकी शादीशुदा जिंदगी में भी दिक्कतें चल रही थीं। 24 जून को एक्ट्रेस इवेंट में गई हुई थीं। उनकी गैर मौजूदगी में वैशाख डुप्लीकेट चाबियों की मदद से अपार्टमेंट में आए थे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने एक्ट्रेस को मैसेज कर आत्महत्या करने की बात कही थी, जिसके बाद एक्ट्रेस ने उन्हें समझाया। जब रात 11 बजकर 30 मिनट पर एक्ट्रेस घर लौटीं, तो उन्होंने वैशाख को फंदे से लटका हुआ पाया। एक्ट्रेस ने तुरंत राजेश्वरीनगर पुलिस स्टेशन में घटना की जानकारी दी। फिलहाल उनकी मौत की जांच जारी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

kannad actress krishi tapanda break silence after her bussinessman friend commint suicide on her flat

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44 मिनट पहले कॉपी लिंक कुछ समय पहले ही कन्नड़ एक्ट्रेस कृषि थापंदा के घर में एक नामी बिजनेसमैन ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद कई लोग इस आत्महत्या से एक्ट्रेस का नाम जोड़ रहे हैं। अब एक्ट्रेस ने अटकलों पर चुप्पी तोड़ते हुए भावुक अपील की है। एक्ट्रेस ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा है, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे ऐसा कुछ लिखना पड़ेगा। मेरे पास न तो ताकत बची है और न ही मानसिक हिम्मत कि मैं यह सब लिख सकूं या दुनिया के सामने रख सकूं। इस मुश्किल समय में आखिरी चीज जो मैं करना चाहती थी, वह कोई सार्वजनिक बयान देना था।’ आगे एक्ट्रेस ने लिखा, ‘जब हम एक ऐसे दुख से गुजर रहे हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती, तब हमसे उसकी सफाई देने की उम्मीद की जा रही है। पिछले कुछ दिनों ने मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। जो कुछ भी हुआ है, उसके बीच मैंने अपने बेहद करीबी इंसान को भी खो दिया है।’ आगे एक्ट्रेस ने लिखा, ‘उसे खोने से मेरी जिंदगी में ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इस दुख को और भी कठिन इसलिए बना दिया गया है क्योंकि मुझे ठीक से शोक मनाने का समय और मौका तक नहीं मिला। जब उसका परिवार, दोस्त और अपने लोग इस असहनीय दुख से जूझ रहे हैं, उसी दौरान लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं, तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं और किसी की मौत को कहानी बनाने की कोशिश की जा रही है।’ ‘सबसे पहला सवाल अक्सर यही होता है, “आपकी प्रतिक्रिया क्या है?”, जबकि सवाल यह होना चाहिए था “क्या आप ठीक हैं?” या “आप खुद को कैसे संभाल रहे हैं?” मैं यह बात किसी एक व्यक्ति या किसी एक मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए नहीं कह रही हूं, बल्कि उन सभी लोगों से कह रही हूं जो पूरी सच्चाई जाने बिना और अपने व्यवहार का पीछे रह गए लोगों पर क्या असर पड़ता है, यह समझे बिना जवाब तलाशते रहते हैं। किसी भी शोक में डूबे इंसान से कभी यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वह अपने दुख का कारण या सफाई दे।’ आखिर में एक्ट्रेस ने लिखा है, ‘उन सभी लोगों से, जो अब भी अटकलें लगा रहे हैं, मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि कृपया रुक जाइए। किसी के दुख को सुर्खियां या मनोरंजन का विषय मत बनाइए। मानसिक स्वास्थ्य बेहद नाजुक होता है और शोक भी।’ क्या है पूरा मामला? 24 जून को बिजनेसमैन वैशाख ने एक्ट्रेस कृषि थापंदा के घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। एक्ट्रेस बैंग्लोर के होसाकेरेहल्ली में रेंटेड अपार्टमेंट में रहती हैं। उनके अपार्टमेंट की एक चाबी उनके दोस्त वैशाख के पास भी थी। वैशाख को इसी साल एक्टॉर्शन केस में गिरफ्तार किया गया था। जेल से छूटने के बाद से वो काफी परेशान चल रहे थे। उनकी शादीशुदा जिंदगी में भी दिक्कतें चल रही थीं। 24 जून को एक्ट्रेस इवेंट में गई हुई थीं। उनकी गैर मौजूदगी में वैशाख डुप्लीकेट चाबियों की मदद से अपार्टमेंट में आए थे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने एक्ट्रेस को मैसेज कर आत्महत्या करने की बात कही थी, जिसके बाद एक्ट्रेस ने उन्हें समझाया। जब रात 11 बजकर 30 मिनट पर एक्ट्रेस घर लौटीं, तो उन्होंने वैशाख को फंदे से लटका हुआ पाया। एक्ट्रेस ने तुरंत राजेश्वरीनगर पुलिस स्टेशन में घटना की जानकारी दी। फिलहाल उनकी मौत की जांच जारी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको इस साल 9,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगी:खर्च घटाने और AI अपनाने के लिए कदम उठाया; ग्लोबल सिगरेट वॉल्यूम 2.5% घटने का अनुमान

ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको इस साल 9,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगी:खर्च घटाने और AI अपनाने के लिए कदम उठाया; ग्लोबल सिगरेट वॉल्यूम 2.5% घटने का अनुमान

लंदन स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तंबाकू कंपनियों में से एक ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको इस साल अपने कुल 47,000 कर्मचारियों में से लगभग पांचवें हिस्से यानी करीब 20% की कटौती करने जा रही है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह लागत कम करने और टेक्नोलॉजी इनेबल्ड बनने के लिए इस साल के अंत तक 5,500 नौकरियां खत्म करेगी और 3,500 अन्य पदों को आउटसोर्स करेगी, जिससे कुल 9,000 कर्मचारी प्रभावित होंगे। FTSE 100 में शामिल यह कंपनी वर्तमान में ट्रेडिशनल सिगरेट की घटती डिमांड और निकोटीन के अन्य विकल्पों (जैसे वेप्स और पाउच) में निवेश बढ़ाने के दबाव का सामना कर रही है। सालाना 600 मिलियन पाउंड की बचत का लक्ष्य CEO बोले- हम फ्यूचर-रेडी ऑर्गेनाइजेशन बना रहे BAT के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) टेडू मार्रोको ने कहा कि हम एक फ्यूचर-रेडी ऑर्गेनाइजेशन बना रहे हैं, जो अधिक फुर्तीला, लागत के मामले में अनुशासित और टेक्नोलॉजी इनेबल्ड है। इन बदलावों से हमारे कई सहयोगी प्रभावित हो रहे हैं और हम इस बदलाव के दौरान उन्हें देखभाल और सम्मान के साथ सहयोग देने पर फोकस कर रहे हैं, क्योंकि हम बिजनेस को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। अमेरिका में कोई छंटनी नहीं, एक्सेंचर संभालेगी काम कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका में उसके बिजनेस में कोई छंटनी नहीं होगी, जहां वह अपनी सहायक कंपनी रेनॉल्ड्स अमेरिकन के तहत काम करती है। पिछले साल BAT ने अपने कुछ कामों को आउटसोर्स करने के लिए टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी कंपनी एक्सेंचर के साथ साझेदारी की थी। CEO मार्रोको ने उस समय कहा था कि इस डील से कंपनी को एक्सेंचर के एडवांस AI सॉल्यूशंस (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉल्यूशंस) तक पहुंच मिलेगी। BAT के मुताबिक, इस डील के बाद से यूके, पोलैंड, रोमानिया, कोस्टा रिका, मैक्सिको, सिंगापुर और मलेशिया में कुछ नौकरियां एक्सेंचर द्वारा ले ली गई हैं। बिजनेस को डिजिटल और AI-फोकेस्ड बनाने की तैयारी ग्लोबल सिगरेट वॉल्यूम 2.5% घटने का अनुमान ग्रुप ने अनुमान जताया है कि इस साल ग्लोबल लेवल पर सिगरेट इंडस्ट्री के वॉल्यूम में करीब 2.5% की गिरावट आएगी। यही वजह है कि लंदन में लिस्टेड और मुख्यालय वाली यह कंपनी अब स्मोक-फ्री प्रोडक्ट्स जैसे कि व्यूज वेप्स और वेलो निकोटीन पाउच में भारी निवेश कर रही है। कंपनी ने इस महीने की शुरुआत में निवेशकों को बताया था कि बिजनेस के इस ‘न्यू कैटेगरीज’ वाले हिस्से में रेवेन्यू ग्रोथ तेज हो रही है और इस साल इसमें 15% के आसपास की ग्रोथ होने की उम्मीद है। सोमवार को BAT और कॉम्पिटिटर कंपनियों के शेयर गिरे सोमवार को शुरुआती कारोबार में BAT के शेयरों में करीब 1.4% की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि इस साल अब तक (साल-दर-तारीख) इसके शेयर लगभग 11.8% ऊपर हैं। BAT के इस फैसले का असर बाजार की दूसरी कंपनियों पर भी दिखा और शुरुआती कारोबार में इसकी कॉम्पिटिटर कंपनी इम्पीरियल ब्रांड्स के शेयर भी 1% तक गिर गए। क्या होता है FTSE 100 और आउटसोर्सिंग? FTSE 100: इसे ‘Footsie’ भी कहा जाता है। यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) पर लिस्टेड मार्केट कैप के हिसाब से 100 सबसे बड़ी कंपनियों का एक शेयर इंडेक्स है, जैसे भारत में सेंसेक्स या निफ्टी होता है। आउटसोर्सिंग: जब कोई कंपनी अपने किसी आंतरिक काम या बिजनेस प्रोसेस को खुद न करके किसी बाहरी विशेषज्ञ कंपनी को सौंप देती है, तो उसे आउटसोर्सिंग कहते हैं। इससे कंपनियों को अपनी लागत घटाने और एडवांस टेक्नोलॉजी (जैसे AI) का इस्तेमाल करने में मदद मिलती है।

जयपुर पहुंची एक्ट्रेस आलिया-शरवरी, महिला बाइकर्स के साथ ली सेल्फी:एक्ट्रेस बोलीं-फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए होती हैं, वुमन ऑरिएंटेड फिल्म जैसा कुछ नहीं होता

जयपुर पहुंची एक्ट्रेस आलिया-शरवरी, महिला बाइकर्स के साथ ली सेल्फी:एक्ट्रेस बोलीं-फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए होती हैं, वुमन ऑरिएंटेड फिल्म जैसा कुछ नहीं होता

यशराज बैनर की बहुप्रतीक्षित स्पाई यूनिवर्स फिल्म ‘अल्फा’ के प्रमोशन के लिए बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट और शरवरी सोमवार को जयपुर पहुंचीं। जवाहर सर्किल से बड़ी संख्या में महिला बाइकर्स ने दोनों का स्वागत किया। बाइक राइड के साथ उनका काफिला मिराज सिनेमा तक पहुंचा। मिराज सिनेमा पहुंचने पर आलिया और शरवरी ने महिला बाइकर्स के साथ सेल्फी ली। इतनी बड़ी संख्या में महिला बाइकर्स को एक साथ देखकर आलिया काफी उत्साहित नजर आईं। कार्यक्रम के दौरान फिल्म ‘अल्फा’ का नाम बाइकर्स के साथ मिलकर बनाने की योजना थी, लेकिन दर्शकों की भीड़ के कारण सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दोनों अभिनेत्रियों को सीधे थिएटर के अंदर आयोजित मीट एंड ग्रीट कार्यक्रम में ले जाया गया। जयपुर आकर शरवरी के गाल भी हो गए पिंक इंटरेक्शन के दौरान आलिया भट्ट ने हल्के-फुल्के अंदाज में शरवरी से कहा कि जयपुर आकर तुम्हारे गाल भी पिंक हो गए हैं। यह सुनते ही शरवरी मुस्कुरा उठीं और शर्माते हुए हामी भर दी। दोनों के बीच की यह प्यारी बातचीत दर्शकों को खूब पसंद आई और पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। जवाहर सर्किल पर आलिया और शरवरी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। अचानक बढ़ी भीड़ के कारण कुछ देर के लिए सुरक्षाकर्मियों को मशक्कत करनी पड़ी। धक्का-मुक्की के दौरान एक मीडियाकर्मी का चश्मा भी टूट गया, जिससे कुछ देर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि सुरक्षा टीम ने जल्द ही स्थिति को संभाल लिया। लगातार व्हिसल से नाराज हुईं आलिया थिएटर के भीतर फिल्म के टीजर और ट्रेलर की प्रस्तुति के दौरान दर्शक लगातार व्हिसल बजाते रहे। शोर इतना अधिक था कि डायलॉग स्पष्ट सुनाई नहीं दे रहे थे। इस पर आलिया भट्ट ने नाराजगी जताते हुए इवेंट टीम से सवाल किया कि दर्शकों को व्हिसल क्यों बांटी गई। मंच संचालक को भी बार-बार दर्शकों से व्हिसल बंद करने की अपील करनी पड़ी, जिसके बाद माहौल सामान्य हुआ। आलिया भट्ट ने कहा कि अल्फा 3 जुलाई को रिलीज हो रही है और हमने अपने प्रमोशन सिटी टूर की शुरुआत जयपुर से की है। यह हमारे लिए बेहद खास है। पिंक सिटी वास्तव में हैप्पी सिटी है। यहां की सकारात्मक ऊर्जा हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि फिल्म एक हाई-ऑक्टेन एक्शन फिल्म है और इसकी शूटिंग के दौरान कई बार चोट भी लगी, लेकिन कलाकारों का काम दर्द को भूलकर आगे बढ़ना होता है। आलिया ने कहा कि एक्शन करना बिल्कुल आसान नहीं होता। इस फिल्म के लिए हमने काफी मेहनत की है। शरवरी के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा। फिल्म में कई ऐसे गाने हैं, जो दर्शकों को बिल्कुल नए अंदाज में देखने को मिलेंगे। खासकर कश्मीर में फिल्माया गया गीत बेहद खूबसूरत है। फिल्म सिर्फ फिल्म होती है: आलिया महिला प्रधान फिल्मों को लेकर पूछे गए सवाल पर आलिया ने कहा कि फिल्म सिर्फ फिल्म होती है। उसमें मेल या फीमेल जैसी कोई बात नहीं होती। आखिरकार हमारा उद्देश्य सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना है। अच्छी कहानी सबसे बड़ी चीज होती है। उन्होंने आगे कहा कि ‘अल्फा’ का टीजर और ट्रेलर अभी सिर्फ एक झलक है। हमने अभी बहुत कुछ छिपाकर रखा है। अनिल कपूर और बॉबी देओल दोनों के किरदार बेहद अलग हैं। हम चाहते हैं कि दर्शक थिएटर आएं और पूरी फिल्म देखकर सरप्राइज महसूस करें। आलिया ने बताया कि शरवरी के साथ यह उनकी पहली फिल्म है। हर फिल्म की शूटिंग के दौरान एक नया परिवार बन जाता है। रोज साथ काम करते हैं, मस्ती भी करते हैं और सीखते भी हैं। इस फिल्म में हम सभी निर्देशक के विजन के अनुसार काम कर रहे थे। उनका मकसद था कि दर्शकों को कुछ बिल्कुल नया और बड़े पर्दे पर भरपूर मनोरंजन मिले। अनिल कपूर सर और बॉबी देओल सर जैसे कलाकारों के साथ काम करना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा। कई साल की मेहनत का फल अब मिल रहा है: शरवरी शरवरी ने कहा कि यह समय उनके करियर का सबसे खास दौर है। इस दिन तक पहुंचने में कई साल लग गए। मेरी फिल्मों को दर्शकों ने हमेशा प्यार दिया है। हाल ही में रिलीज हुई ‘मैं वापस आऊंगा’ को भी लोगों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसके लिए मैं दर्शकों की दिल से आभारी हूं। उन्होंने बताया कि ‘अल्फा’ में उनका किरदार दर्शकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज होगा। मैं इतना ही कहूंगी कि थिएटर में दर्शकों को बहुत मजा आने वाला है। शरवरी ने कहा कि आलिया भट्ट, अनिल कपूर और बॉबी देओल जैसे कलाकारों के साथ काम करना उनके लिए किसी अभिनय विद्यालय से कम नहीं था। हर कलाकार से कुछ न कुछ सीखने को मिला। यही अनुभव मेरे पूरे करियर में काम आएगा। जयपुर के स्वागत से अभिभूत शरवरी ने कहा कि यहां के लोगों ने हमें जो प्यार और ऊर्जा दी है, उसी ऊर्जा के साथ अब हम फिल्म के प्रमोशन को आगे बढ़ाएंगे।

विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

लंदन के ऑल इंग्लैंड क्लब की हरी घास पर सफेद कपड़ों में टेनिस खेलना हमेशा से परंपरा, नजाकत और एक खास शैली का प्रतीक रहा है। एक दौर था जब विम्बलडन वही खिलाड़ी जीतता था, जिसे विशुद्ध रूप से ‘ग्रास-स्पेशलिस्ट’ माना जाता था। पीट सम्प्रास, बोरिस बेकर, स्टीफन एडबर्ग, रोजर फेडरर जैसे दिग्गजों का राज उनकी घातक ‘सर्व-एंड-वॉली’ (सर्विस करके तुरंत नेट पर आना) टेक्निक पर टिका था। लेकिन नए दौर के खिलाड़ियों ने घास पर खेलने के इस पारंपरिक तरीके को इतिहास बना दिया है। अब खिलाड़ी घास की पिचों को भी ‘हार्ड-कोर्ट’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने अपने उपकरणों, फुटवर्क और खेल शैली में ऐसा बदलाव किया है कि टेनिस का पूरा व्याकरण ही बदल गया है। सोमवार से शुरू हो रहे साल के तीसरे टेनिस ग्रैंड स्लैम विम्बलडन से पहले जानिए कैसे आधुनिक खिलाड़ियों ने खेल की दशा और दिशा बदली है… 1. नए उपकरणों से मिली पावर और स्पिन पहले खिलाड़ी भारी रैकेट और प्राकृतिक (नेचुरल गट) स्ट्रिंग्स का उपयोग करते थे। इस कारण कोर्ट के पीछे से भारी स्पिन के साथ गेंद को हिट करना बहुत मुश्किल होता था। अब खिलाड़ी हल्के कार्बन-फाइबर रैकेट और पॉलिएस्टर स्ट्रिंग्स का इस्तेमाल करते हैं। यह नया कॉम्बिनेशन आधुनिक खिलाड़ियों को हाई स्पीड और भारी ‘टॉपस्पिन’ के साथ गेंद को हिट करने की अनुमति देता है। 2. नेट गेम की जगह बेसलाइन गेम का दबदबा पहले खिलाड़ी ‘सर्व-एंड-वॉली’ रणनीति अपनाते थे। वे तेज सर्विस करते और हवा में ही गेंद को हिट करने के लिए तुरंत नेट की ओर दौड़ पड़ते थे। अब आधुनिक रैकेट्स से ताकतवर शॉट्स आसान हो गए हैं, इसलिए नेट की तरफ भागना बेहद जोखिम भरा हो गया है। खिलाड़ी अब बेसलाइन पर ही जमे रहते हैं और तब तक ताकतवर शॉट्स का आदान-प्रदान करते हैं, जब तक कोई गलती न कर दे। 3. टेनिस कोर्ट की सतहें हो गईं धीमी पहले ग्रास और पारंपरिक हार्ड कोर्ट बहुत चिकने और तेज हुआ करते थे। इन पर गेंद बहुत नीची और तेज उछलती थी। अब इन ताकतवर बेसलाइन शॉट्स से निपटने के लिए टूर्नामेंट्स ने अपनी सतहों को धीमा कर दिया है। ऑल इंग्लैंड क्लब ने कोर्ट को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए घास के मिश्रण को बदल दिया। इससे गेंद ऊंची उछलने लगी और उसकी गति धीमी हो गई, जिससे लंबी रैलियां खेलना संभव हो सका। 4. खिला​ड़ियों के फुटवर्क में बड़ा बदलाव पहले घास के कोर्ट पर, खिलाड़ी किसी भी अप्रत्याशित बाउंस से निपटने के लिए छोटे और तेज कदम रखते थे। आधुनिक एथलीट हार्ड कोर्ट पर स्लाइड करना (फिसलना) सीखते हैं। घास की सतह पर भी जूते की विशेष ग्रिप की मदद से हार्ड कोर्ट जैसी आक्रामक स्लाइडिंग करते हैं। वे ‘ओपन स्टांस’ का उपयोग करते हैं और दमदार शॉट मारने के लिए संतुलन बनाए रखते हुए सुरक्षित रूप से रुकने के लिए पैरों को स्लाइड करते हैं।

विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

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लंदन के ऑल इंग्लैंड क्लब की हरी घास पर सफेद कपड़ों में टेनिस खेलना हमेशा से परंपरा, नजाकत और एक खास शैली का प्रतीक रहा है। एक दौर था जब विम्बलडन वही खिलाड़ी जीतता था, जिसे विशुद्ध रूप से ‘ग्रास-स्पेशलिस्ट’ माना जाता था। पीट सम्प्रास, बोरिस बेकर, स्टीफन एडबर्ग, रोजर फेडरर जैसे दिग्गजों का राज उनकी घातक ‘सर्व-एंड-वॉली’ (सर्विस करके तुरंत नेट पर आना) टेक्निक पर टिका था। लेकिन नए दौर के खिलाड़ियों ने घास पर खेलने के इस पारंपरिक तरीके को इतिहास बना दिया है। अब खिलाड़ी घास की पिचों को भी ‘हार्ड-कोर्ट’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने अपने उपकरणों, फुटवर्क और खेल शैली में ऐसा बदलाव किया है कि टेनिस का पूरा व्याकरण ही बदल गया है। सोमवार से शुरू हो रहे साल के तीसरे टेनिस ग्रैंड स्लैम विम्बलडन से पहले जानिए कैसे आधुनिक खिलाड़ियों ने खेल की दशा और दिशा बदली है… 1. नए उपकरणों से मिली पावर और स्पिन पहले खिलाड़ी भारी रैकेट और प्राकृतिक (नेचुरल गट) स्ट्रिंग्स का उपयोग करते थे। इस कारण कोर्ट के पीछे से भारी स्पिन के साथ गेंद को हिट करना बहुत मुश्किल होता था। अब खिलाड़ी हल्के कार्बन-फाइबर रैकेट और पॉलिएस्टर स्ट्रिंग्स का इस्तेमाल करते हैं। यह नया कॉम्बिनेशन आधुनिक खिलाड़ियों को हाई स्पीड और भारी ‘टॉपस्पिन’ के साथ गेंद को हिट करने की अनुमति देता है। 2. नेट गेम की जगह बेसलाइन गेम का दबदबा पहले खिलाड़ी ‘सर्व-एंड-वॉली’ रणनीति अपनाते थे। वे तेज सर्विस करते और हवा में ही गेंद को हिट करने के लिए तुरंत नेट की ओर दौड़ पड़ते थे। अब आधुनिक रैकेट्स से ताकतवर शॉट्स आसान हो गए हैं, इसलिए नेट की तरफ भागना बेहद जोखिम भरा हो गया है। खिलाड़ी अब बेसलाइन पर ही जमे रहते हैं और तब तक ताकतवर शॉट्स का आदान-प्रदान करते हैं, जब तक कोई गलती न कर दे। 3. टेनिस कोर्ट की सतहें हो गईं धीमी पहले ग्रास और पारंपरिक हार्ड कोर्ट बहुत चिकने और तेज हुआ करते थे। इन पर गेंद बहुत नीची और तेज उछलती थी। अब इन ताकतवर बेसलाइन शॉट्स से निपटने के लिए टूर्नामेंट्स ने अपनी सतहों को धीमा कर दिया है। ऑल इंग्लैंड क्लब ने कोर्ट को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए घास के मिश्रण को बदल दिया। इससे गेंद ऊंची उछलने लगी और उसकी गति धीमी हो गई, जिससे लंबी रैलियां खेलना संभव हो सका। 4. खिला​ड़ियों के फुटवर्क में बड़ा बदलाव पहले घास के कोर्ट पर, खिलाड़ी किसी भी अप्रत्याशित बाउंस से निपटने के लिए छोटे और तेज कदम रखते थे। आधुनिक एथलीट हार्ड कोर्ट पर स्लाइड करना (फिसलना) सीखते हैं। घास की सतह पर भी जूते की विशेष ग्रिप की मदद से हार्ड कोर्ट जैसी आक्रामक स्लाइडिंग करते हैं। वे ‘ओपन स्टांस’ का उपयोग करते हैं और दमदार शॉट मारने के लिए संतुलन बनाए रखते हुए सुरक्षित रूप से रुकने के लिए पैरों को स्लाइड करते हैं।