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Indias First Commercial Jet Landing Via Satellite Signal

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नई दिल्ली25 मिनट पहले

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अब खराब विजिबिलिटी में भी प्लेन सुरक्षित लैंड कर सकेंगे। क्योंकि, भारत में पहली बार किसी बड़े कमर्शियल जेट को बिना ग्राउंड रेडियो बीम के सीधे सैटेलाइट सिग्नल्स की मदद से सुरक्षित उतारने का सफल ट्रायल कर लिया गया है।

विमानन नियामक DGCA की देखरेख में 27 जून को इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A320 विमान ने स्वदेशी ‘गगन’ नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर यह ऐतिहासिक लैंडिंग की। हालांकि इंडिगो ने 2022 में छोटे ATR विमानों पर इसका परीक्षण किया था, लेकिन बड़े कमर्शियल जेट के साथ देश में यह पहला सफल ट्रायल है।

क्या है स्वदेशी गगन सिस्टम?

गगन का पूरा नाम ‘जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GAGAN) है। यह भारत का अपना सैटेलाइट-बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने मिलकर तैयार किया है।

खासियत: गगन, भारत के ‘नाविक’ (NavIC) या अमेरिका के ‘GPS’ की तरह कोई स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम नहीं है, जो सीधे लोकेशन बताता हो। बल्कि, यह पहले से मौजूद GPS सिग्नल्स की कमियों और गलतियों को ठीक करके उन्हें विमानों के लिए और ज्यादा सटीक व भरोसेमंद बनाता है।

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विमानन नियामक DGCA की देखरेख में 27 जून को इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A320 विमान ने स्वदेशी ‘गगन’ नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर यह ऐतिहासिक लैंडिंग की। हालांकि इंडिगो ने 2022 में छोटे ATR विमानों पर इसका परीक्षण किया था, लेकिन बड़े कमर्शियल जेट के साथ देश में यह पहला सफल ट्रायल है।

क्या है स्वदेशी गगन सिस्टम?

गगन का पूरा नाम ‘जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GAGAN) है। यह भारत का अपना सैटेलाइट-बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने मिलकर तैयार किया है।

खासियत: गगन, भारत के ‘नाविक’ (NavIC) या अमेरिका के ‘GPS’ की तरह कोई स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम नहीं है, जो सीधे लोकेशन बताता हो। बल्कि, यह पहले से मौजूद GPS सिग्नल्स की कमियों और गलतियों को ठीक करके उन्हें विमानों के लिए और ज्यादा सटीक व भरोसेमंद बनाता है।

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