Salman Khan Cuts SVC 63 Fees

17 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने वामशी पेडिपल्ली के निर्देशन में बन रही फिल्म SVC 63 के लिए कथित तौर पर ₹70 करोड़ की फीस तय की है। फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, सलमान खान आमतौर पर एक फिल्म के लिए ₹120 करोड़ या उससे अधिक फीस लेते हैं। ऐसे में यह रकम उनकी नॉर्मल फीस का लगभग 60% बताई जा रही है। रिपोर्ट में एक सोर्स के हवाले से बताया गया है कि सलमान के पुराने दोस्त रफी काजी इस प्रोजेक्ट में मीडिएटर का काम कर रहे हैं। उनका नाम फिल्म के प्रोड्यूसर्स में भी शामिल रहेगा। इसी दोस्ती की वजह से सलमान अपनी अपफ्रंट फीस कम करने के लिए तैयार हुए हैं। हालांकि, सूत्र ने यह साफ नहीं किया कि क्या इस समझौते में सलमान खान को फिल्म के मुनाफे में हिस्सेदारी भी मिलेगी। पिछले कई सालों से उनकी फिल्मों में इस तरह की व्यवस्था होने की बात सामने आती रही है। सलमान खान ने हाल ही में फिल्म ‘SVC63’ के मुहूर्त की झलक शेयर की थी। बता दें कि सलमान इन दिनों फिल्म ‘SVC63’ की शूटिंग कर रहे हैं। वामशी पेडिपल्ली के डायरेक्शन में बन रही इस एक्शन फिल्म को दिल राजू की श्री वेंकटेश्वर क्रिएशंस प्रोड्यूस कर रही है। फिल्म में नयनतारा पहली बार सलमान के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी। फिल्म ईद 2027 पर रिलीज होगी। 2010 के बाद कई फिल्मों में रही हिस्सेदारी रिपोर्ट के अनुसार, दबंग (2010) के बाद सलमान खान ने अधिकतर फिल्मों में अपनी हिस्सेदारी रखी है। दबंग का निर्माण उनके भाई अरबाज खान ने किया था, जबकि बॉडीगार्ड (2011) उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री ने बनाई थी। बाद की कई फिल्मों में उनके होम बैनर SKF की मौजूदगी रही। वहीं, बाहरी प्रोड्यूसर्स के साथ काम करने पर भी उन्होंने कई बार फिल्म के IPR या OTT और सैटेलाइट अधिकारों में हिस्सेदारी रखी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2010 से उनकी फिल्मों के OTT और सैटेलाइट अधिकारों का मूल्य लगभग ₹120 करोड़ से ₹140 करोड़ तक रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि YRF ने सलमान खान को एक था टाइगर (2012), टाइगर जिंदा है (2017) और टाइगर 3 (2023) जैसी फिल्मों में दूसरे एक्टर्स के मुकाबले बेहतर टर्म्स ऑफर किए, जिसमें शाहरुख खान को भी एक एक्सेप्शन बताया गया। दोस्तों के लिए बिना फीस भी किया काम रिपोर्ट के मुताबिक, सलमान खान ने कई मौकों पर अपने दोस्तों के लिए कैमियो और स्पेशल रोल बिना कोई फीस लिए किए हैं। इसमें अजय देवगन और रितेश देशमुख की फिल्म राजा शिवाजी भी शामिल है। अजय देवगन ने पहले बताया था कि सन ऑफ सरदार (2012) के ‘पो पो’ गाने में अपनी मौजूदगी के लिए उन्होंने सलमान को चेक दिया था, लेकिन सलमान ने यह कहते हुए चेक वापस कर दिया, “आप दोस्त हैं। मैं दोस्तों से पैसे नहीं लेता।” सलमान खान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ‘बिरयानी खाते हुए सलमान सिर में लगवा रहे थे इंजेक्शन’:प्रोड्यूसर शैलेन्द्र सिंह बोले- तब PRP हेयर ट्रीटमेंट की प्रोसेस इललीगल थी सलमान खान के करीबी रहे फिल्म प्रोड्यूसर शैलेन्द्र सिंह ने हाल ही में बताया कि कई साल पहले उन्होंने सलमान को बिरयानी खाते हुए हेयर ट्रीटमेंट करवाते देखा था। साइरस ब्रोचा से बातचीत में शैलेन्द्र ने बताया कि उस समय हर सोमवार रात उनकी सलमान से मुलाकात होती थी। उन्होंने कहा कि सलमान डाइनिंग टेबल पर खाना खाते समय सामने लगे शीशे में खुद को देखते रहते थे। रसोई में एक छोटी टेबल और उसके सामने शीशा लगा था, जिससे बातचीत भी शीशे के जरिए होती थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Salman Khan Cuts SVC 63 Fees

10 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर सलमान खान ने वामशी पेडिपल्ली के निर्देशन में बन रही फिल्म SVC63 के लिए कथित तौर पर ₹70 करोड़ की फीस तय की है। फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, सलमान खान आमतौर पर एक फिल्म के लिए ₹120 करोड़ या उससे अधिक फीस लेते हैं। ऐसे में यह रकम उनकी नॉर्मल फीस का लगभग 60% बताई जा रही है। रिपोर्ट में एक सोर्स के हवाले से बताया गया है कि सलमान के पुराने दोस्त रफी काजी इस प्रोजेक्ट में मीडिएटर का काम कर रहे हैं। उनका नाम फिल्म के प्रोड्यूसर्स में भी शामिल रहेगा। इसी दोस्ती की वजह से सलमान अपनी अपफ्रंट फीस कम करने के लिए तैयार हुए हैं। हालांकि, सूत्र ने यह साफ नहीं किया कि क्या इस समझौते में सलमान खान को फिल्म के मुनाफे में हिस्सेदारी भी मिलेगी। पिछले कई सालों से उनकी फिल्मों में इस तरह की व्यवस्था होने की बात सामने आती रही है। सलमान खान ने हाल ही में फिल्म ‘SVC63’ के मुहूर्त की झलक शेयर की थी। बता दें कि सलमान इन दिनों फिल्म ‘SVC63’ की शूटिंग कर रहे हैं। वामशी पेडिपल्ली के डायरेक्शन में बन रही इस एक्शन फिल्म को दिल राजू की श्री वेंकटेश्वर क्रिएशंस प्रोड्यूस कर रही है। फिल्म में नयनतारा पहली बार सलमान के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी। फिल्म ईद 2027 पर रिलीज होगी। 2010 के बाद कई फिल्मों में रही हिस्सेदारी रिपोर्ट के अनुसार, दबंग (2010) के बाद सलमान खान ने अधिकतर फिल्मों में अपनी हिस्सेदारी रखी है। दबंग का निर्माण उनके भाई अरबाज खान ने किया था, जबकि बॉडीगार्ड (2011) उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री ने बनाई थी। बाद की कई फिल्मों में उनके होम बैनर SKF की मौजूदगी रही। वहीं, बाहरी प्रोड्यूसर्स के साथ काम करने पर भी उन्होंने कई बार फिल्म के IPR या OTT और सैटेलाइट अधिकारों में हिस्सेदारी रखी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2010 से उनकी फिल्मों के OTT और सैटेलाइट अधिकारों का मूल्य लगभग ₹120 करोड़ से ₹140 करोड़ तक रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि YRF ने सलमान खान को एक था टाइगर (2012), टाइगर जिंदा है (2017) और टाइगर 3 (2023) जैसी फिल्मों में दूसरे एक्टर्स के मुकाबले बेहतर टर्म्स ऑफर किए, जिसमें शाहरुख खान को भी एक एक्सेप्शन बताया गया। SKF (सलमान खान फिल्म्स) की स्थापना साल 2011 में हुई थी। दोस्तों के लिए बिना फीस भी किया काम रिपोर्ट के मुताबिक, सलमान खान ने कई मौकों पर अपने दोस्तों के लिए कैमियो और स्पेशल रोल बिना कोई फीस लिए किए हैं। इसमें अजय देवगन और रितेश देशमुख की फिल्म राजा शिवाजी भी शामिल है। अजय देवगन ने पहले बताया था कि सन ऑफ सरदार (2012) के ‘पो पो’ गाने में अपनी मौजूदगी के लिए उन्होंने सलमान को चेक दिया था, लेकिन सलमान ने यह कहते हुए चेक वापस कर दिया, “आप दोस्त हैं। मैं दोस्तों से पैसे नहीं लेता।” सलमान खान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ‘बिरयानी खाते हुए सलमान सिर में लगवा रहे थे इंजेक्शन’:प्रोड्यूसर शैलेन्द्र सिंह बोले- तब PRP हेयर ट्रीटमेंट की प्रोसेस इललीगल थी सलमान खान के करीबी रहे फिल्म प्रोड्यूसर शैलेन्द्र सिंह ने हाल ही में बताया कि कई साल पहले उन्होंने सलमान को बिरयानी खाते हुए हेयर ट्रीटमेंट करवाते देखा था। साइरस ब्रोचा से बातचीत में शैलेन्द्र ने बताया कि उस समय हर सोमवार रात उनकी सलमान से मुलाकात होती थी। उन्होंने कहा कि सलमान डाइनिंग टेबल पर खाना खाते समय सामने लगे शीशे में खुद को देखते रहते थे। रसोई में एक छोटी टेबल और उसके सामने शीशा लगा था, जिससे बातचीत भी शीशे के जरिए होती थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Ranchi JPSC JSSC Exam Protest

Hindi News Career Ranchi JPSC JSSC Exam Protest | Students Hunger Strike & Assembly March 3 मिनट पहले कॉपी लिंक रांची की सड़कों पर जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ हजारों छात्र आंदोलन कर रहे हैं। 14वीं जेपीएससी की पीटी परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद से छात्र सड़कों पर हैं। यह आंदोलन कचहरी स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हो रहा है। आंदोलनरत छात्रों को विभिन्न राजनीतिक दलों का भी समर्थन प्राप्त हो रहा है। छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस अलर्ट मोड में है। छात्रों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर परीक्षा की व्यवस्था में तुरंत सुधार नहीं किया गया, तो उनका यह आंदोलन और भी बड़ा रूप ले लेगा। फिलहाल छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई छात्र डटे हुए हैं। छात्र यहीं रह रहे हैं। अपना खाना खुद बना रहे हैं और यहीं खा रहे हैं। इस धरने के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी है, वे टेंट के अंदर ही किताबें खोलकर पढ़ाई भी कर रहे हैं। फिलहाल बारिश के चलते उनकी परेशानी और बढ़ गई है। ऐसे में छात्रों ने तिरपाल लगाकर अपने लिए टेंट बना लिया है। छात्रों ने यह तय कर लिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की गारंटी नहीं दे देती, तब तक वे इस धरने से नहीं उठेंगे और उनका यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। 6 अगस्त को किया जाएगा विधानसभा घेराव अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन पर बैठे छात्रों द्वारा 6 अगस्त को झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधानसभा घेरा का कार्यक्रम है। विधानसभा घेराव के दौरान झारखंड के कई जिलों से हजारों की संख्या में छात्रों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में किसी भी आराजक स्थिति से निपटने के लिए पुलिस विभाग को अलर्ट किया गया है। आंदोलन का असर – स्थगित हुई परीक्षा झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC ) ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (लिखित) प्रतियोगिता परीक्षा-2025 को स्थगित कर दिया है। जेपीएससी के अध्यक्ष रहे एल. खियांगते ने इस्तीफा दे दिया है और जेपीएससी परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों मामले की जांच सीआईडी कर रही है। जेपीएससी कार्यालय के साथ-साथ खियांगते के आवास पर भी सीआईडी और रांची पुलिस की टीम ने छापेमारी की है। अब तक लगभग एक दर्जन के करीब लोगों को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है। ————- पूरी खबर यहां पढ़ें… सेंट स्टीफंस कॉलेज में शॉर्ट्स न पहनने का नोटिस जारी:पहले ही दिन जानबूझकर शॉर्ट्स पहने कॉलेज पहुंचे स्टूडेंट्स, नए नियम का विरोध किया दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में नए एकेडमिक सेशन के लिए नया ड्रेस कोड तय किया है। इसके तहत स्टूडेंट्स को क्लासरूम और कैंपस के कई दूसरे हिस्सों में शॉर्ट्स पहनने के लिए मना किया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
गाजा से इजराइली सेना हटाने पर क्यों फंसे नेतन्याहू:इजराइली PM पर ट्रम्प को खुश करने के साथ चुनाव जीतने की चुनौती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 30 जुलाई को दावा किया कि गाजा को लेकर ऐतिहासिक समझौता हो गया है। हमास हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। इसके साथ ही इजराइली सेना भी गाजा से पीछे हट जाएगी। ट्रम्प के ऐलान के बाद से सवाल पूछे जाने लगे हैं कि क्या इजराइल सच में गाजा से अपनी सेना हटा लेगा? यही शर्त अब इजराइल की राजनीति में सबसे बड़े विवाद की वजह बन गई है। इजराइल में कई नेता और वहां का मीडिया इस समझौते को लेकर नाराज हैं। एक तरफ ट्रम्प दावा कर रहे हैं कि इजराइल इस समझौते से बेहद खुश है। दूसरी तरफ इजराइल ने अब तक इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जब तक हमास के पूरी तरह हथियार छोड़ने का पक्का भरोसा नहीं हो जाता, तब तक गाजा से सेना हटाने का सवाल ही नहीं उठता। गाजा से सेना हटाने का इजराइल में इतना विरोध क्यों? 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल ने गाजा में बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। तब से अब तक 73 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और गाजा का बड़ा हिस्सा तबाह हो चुका है। इसके बावजूद इजराइल में बड़ी संख्या में लोग अब भी गाजा के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई के पक्ष में हैं। जाहिर है कि गाजा से सेना हटाने और वहां दोबारा फिलिस्तीनी सरकार बहाल करने का विचार इजराइल में कई लोगों को पसंद नहीं है। उन्हें डर है कि अगर सेना हट गई तो हमास फिर से मजबूत होकर 7 अक्टूबर जैसा हमला कर सकता है। यही वजह है कि सरकार के कई मंत्री गाजा में भी वेस्ट बैंक की तरह यहूदी बस्तियां बसाने की वकालत कर चुके हैं। ऐसे में गाजा से सेना की वापसी और पुनर्निर्माण की योजना का विरोध होना स्वाभाविक माना जा रहा है। किन नेताओं ने सबसे ज्यादा विरोध किया? बेजलेल स्मोट्रिच: वित्त मंत्री नेतन्याहू सरकार में वित्त मंत्री रहे स्मोट्रिच ने कहा कि गाजा से इजराइली सेना नहीं हटनी चाहिए। हमास के लोगों से हथियार छीनना ही पहली शर्त है। आखिरकार इजराइल पूरे गाजा पर नियंत्रण करेगा और वहां फिर से यहूदी बस्तियां बसाई जाएंगी। इतमार बेन ग्विर: राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री बेन ग्विर ट्रम्प के प्लान को बुरा बताते हुए कहा कि अगर हमास के लड़ाकों को निशाना बनाना बंद कर दिया गया, तो उन्हें अगला हमला करने का मौका मिल जाएगा। गाजा में सैन्य कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और वहां से लोगों के पलायन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। गादी आइजनकोट: पूर्व आर्मी चीफ ट्रम्प के ऐलान का विरोध सिर्फ कट्टर दक्षिणपंथी नेता ही नहीं कर रहे। पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट भी इसके खिलाफ माने जा रहे हैं। इस साल अक्टूबर में होने वाले चुनाव में गादी को नेतन्याहू का सबसे बड़ा विरोधी माना जा रहा है। गादी ने कहा कि अगर हमास की सैन्य और राजनीतिक ताकत पूरी तरह खत्म नहीं होती, तो यह इजराइल की बड़ी नाकामी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हमास पहले जितना ही मजबूत हो चुका है। नेतन्याहू सबसे मुश्किल स्थिति में क्यों हैं? प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अभी तक इस समझौते पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शायद उनकी चुप्पी ही बताती है कि वे कितनी मुश्किल स्थिति में हैं। एक तरफ ट्रम्प हैं, जो इस समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहे हैं। दूसरी तरफ नेतन्याहू के अपने कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी हैं, जो गाजा से सेना हटाने के सख्त खिलाफ हैं। अगर नेतन्याहू गाजा से सेना हटाने पर सहमत होते हैं, तो चुनाव से पहले उनके कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी और वोटर उनसे दूर हो सकते हैं। दूसरी तरफ अगर वे समझौते को पूरी तरह ठुकरा देते हैं, तो ट्रम्प और अमेरिका नाराज हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेतन्याहू शायद बीच का रास्ता अपनाएं। यानी कुछ इलाकों से सेना पीछे हटाने का दिखावा करें, लेकिन गाजा से पूरी तरह न निकलें। ट्रम्प को नाराज करना नेतन्याहू के लिए बहुत मुश्किल नेतन्याहू पर दबाव सिर्फ इजराइल के भीतर से नहीं, बल्कि अमेरिका से भी है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डोव वैक्समैन के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले नेतन्याहू ट्रम्प से रिश्ते खराब करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे। हाल के समय में इजराइल में यह चर्चा बढ़ी है कि ट्रम्प सरकार का रुख पहले जैसा नहीं रहा। लेकिन इस पर लगभग सभी की राय एक है कि अमेरिका का सैन्य और सुरक्षा समर्थन इजराइल के लिए जरूरी है। इसीलिए विपक्ष नेतन्याहू को लगातार चेतावनी देता रहा है कि अगर अमेरिका के साथ रिश्ते बिगड़े, तो इसका राजनीतिक नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ेगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों से जूझ रहे नेतन्याहू को ट्रम्प से राजनीतिक और नैतिक समर्थन की उम्मीद है। नेतन्याहू यह भी चाहते होंगे कि ट्रम्प चुनावी माहौल में उनके लिए कोई बड़ा कूटनीतिक या राजनीतिक फायदा दिला सकते हैं। इसमें सऊदी अरब और इजराइल के बीच संबंध सामान्य कराने जैसा बड़ा समझौता या उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों पर समर्थन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। क्या सच में इजराइल गाजा से निकल जाएगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल ‘नहीं’ मिलता दिख रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गाजा से इजराइली सेना की पूरी वापसी की संभावना लगभग नामुमकिन है। नेतन्याहू ट्रम्प को यह दिखा सकते हैं कि समझौता आगे बढ़ रहा है। इसके लिए वे समझौते की घोषणा, हस्ताक्षर समारोह या कुछ और करने का नाटक कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इजराइल गाजा से सेना हटा लेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गाजा से सेना न हटाना सिर्फ चुनावी या राजनीतिक मजबूरी नहीं है। यह नेतन्याहू की सुरक्षा नीति का भी अहम हिस्सा है। उनका हमेशा से मानना रहा है कि खतरों को रोकने के लिए इजराइल को अपनी सीमाओं के बाहर भी सैन्य मौजूदगी बनाए रखनी चाहिए। ऐसे में चुनाव नजदीक आने के साथ नेतन्याहू गाजा से पीछे हटने के बजाय और सख्त रुख अपना सकते हैं।
किराने के सामान के लिए भी कर्ज ले रहे अमेरिकी:महंगाई में पेट भरना मुश्किल; 2साल में दोगुने हुए 'BNPL' यूजर्स, वर्षों चुका रहे ब्याज

कल्पना कीजिए कि आपने महीनों पहले जो सब्जी, दूध और ब्रेड खरीदी और खा भी लिया, उसका ब्याज आप आज भी चुका रहे हैं। यह कोई मजाक नहीं, बल्कि हकीकत है। अमेरिका में लाखों परिवार कुछ महीनों से यही परेशानी झेल रहे हैं। किराने के सामान की कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि लोग अब उसे क्रेडिट कार्ड और “बाय नाउ, पे लेटर’ (बीएनपीएल) जैसी उधारी स्कीम्स की मदद से खरीद रहे हैं। फिर उसी कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। अमेरिका की गैर-लाभकारी संस्था ‘अर्बन इंस्टीट्यूट’ के ताजा सर्वे के मुताबिक, कामकाजी उम्र (18-64 साल) के हर चार में से एक अमेरिकी वयस्क ने किराने के सामान के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया। लेकिन उसका पूरा बिल समय पर चुकाने में उसे दिक्कत हुई। सिर्फ 35% लोग ही पूरा बिल एक साथ चुका पाए, बाकी या तो न्यूनतम राशि चुका रहे हैं या इतना भुगतान भी नहीं कर पा रहे। नतीजतन छोटी सी किराने की खरीद, रिवॉल्विंग डेट यानी घूमते-फिरते कर्ज में बदल जाती है, जिस पर वर्षों तक ब्याज चुकाना पड़ता है। यह बोझ भी किसी एसेट के लिए नहीं, बल्कि खाने-पीने की आम जरूरतों के लिए उठाया जा रहा है। बीएनपीएल सर्विसेज की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं। लेंडिंगट्री के मुताबिक, अमेरिका में करीब 29% बीएनपीएल यूजर्स अब किराने के सामान के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं, जो दो साल पहले सिर्फ 14% था। यानी हिस्सेदारी दोगुनी हो गई। जेन-जी (14 से 29 साल) में तो यह आंकड़ा 38% तक पहुंच जाता है। लेकिन सुविधा की यह चमक जल्द फीकी पड़ जाती है। करीब 47% यूजर्स ने बीते एक साल में कम से कम एक बार पेमेंट लेट की, जो एक साल पहले सिर्फ 34% थी। हर पांच में से करीब एक अमेरिकी अब किराने के लिए बचत के पैसे भी इस्तेमाल करने लगा है। कम व मध्यम आय वालों में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है। विशेषज्ञों की चिंता यह है कि बचत और क्रेडिट, दोनों ऐसे रास्ते हैं जो छोटी अवधि में राहत तो देते हैं, लेकिन बार-बार इस्तेमाल होने पर परिवारों को लंबी अवधि की वित्तीय अस्थिरता की ओर धकेल सकते हैं। इसका मतलब है कि आज की भूख मिटाने के लिए लिया गया कर्ज, आपकी की जेब को वर्षों तक हल्का करता रहेगा। तगड़ी मार – अमेरिका में 5 साल में किराने के दाम 32% बढ़ चुके पांच साल में किराने के दाम करीब 32% बढ़ चुके हैं। ऐसे में लोग बिल टालने के लिए क्रेडिट कार्ड और बीएनपीएल का सहारा लेते हैं। लेकिन मिनिमम पेमेंट चूकने पर पहले करीब 30 डॉलर (2,862) की लेट फीस, फिर अगली बार 41 डॉलर (3,912) तक की पेनल्टी लगती है। साथ ही इसमें करीब 30% सालाना ब्याज भी जुड़ जाता है। यानी सस्ता लगने वाला रास्ता असल में सबसे महंगा साबित होता है
Sahiya Film CBFC Censor Controversy

22 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्म ‘साहिया’ की सेंसर प्रक्रिया में कथित देरी को लेकर इसके प्रोड्यूसर और डायरेक्टर संजय शर्मा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फिल्म को प्रायोरिटी कैटेगरी में सबमिट किया गया था, लेकिन तय समयसीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इससे फिल्म के रिलीज प्लान पर असर पड़ रहा है और प्रोड्यूसर्स को फाइनेंशियल नुकसान हो रहा है। बता दें कि फिल्म ‘साहिया’ की शूटिंग झारखंड के नेतरहाट क्षेत्र में की गई है। फिल्म में नीरज काबी, शांतनु माहेश्वरी और रिंकू राजगुरु मुख्य भूमिकाओं में हैं। वहीं, संगीत में सोना मोहपात्रा, जावेद अली, रिचा शर्मा, कृष्णा बेउरा और स्वानंद किरकिरे ने अपनी आवाज दी है। फिल्म के गीत समीर अंजन और स्वानंद किरकिरे ने लिखे हैं। फिल्म के पोस्टर को लेकर भी विवाद है। फिल्ममेकर अविनाश दास ने दावा किया है कि यह फर्जी और बिना इजाजत का है। संजय शर्मा ने कहा कि नियमों के अनुसार तत्काल श्रेणी में आवेदन करने पर कुछ ही दिनों के भीतर फिल्म की स्क्रीनिंग हो जानी चाहिए थी, लेकिन उनकी फिल्म की स्क्रीनिंग करीब डेढ़ महीने बाद की गई। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग के दौरान यह बताया गया कि फिल्म में नक्सलवाद की पृष्ठभूमि होने के कारण इसे रिव्यू कमेटी के पास भेजा जाएगा। वहीं, संजय शर्मा का कहना है कि ‘साहिया’ नक्सलवाद पर आधारित फिल्म नहीं है, बल्कि जंगल की पृष्ठभूमि में बुनी गई एक पारिवारिक और मानवीय प्रेम कहानी है। फिल्म में किसी भी प्रकार की हिंसक विचारधारा या नक्सलवाद का समर्थन अथवा प्रचार नहीं किया गया है। संजय शर्मा वरिष्ठ पत्रकार और यूट्यूब न्यूज़ चैनल ‘4 PM’ के एडिटर-इन-चीफ हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्क्रीनिंग के बाद 10 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक यह जानकारी नहीं दी गई है कि फिल्म को औपचारिक रूप से रिव्यू कमेटी को भेजा गया है या नहीं। साथ ही, फिल्म के प्रमाणन को लेकर भी कोई अंतिम निर्णय नहीं मिला है। संजय शर्मा ने कहा कि अगर बोर्ड को किसी फिल्म पर कोई आपत्ति है, तो नियमों के हिसाब से उसकी सख्ती से जांच होनी चाहिए। हालांकि, यह प्रोसेस भी समय पर होना चाहिए, ताकि प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को बेवजह देरी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि ऐसी देरी से न सिर्फ फाइनेंशियल नुकसान होता है, बल्कि फिल्म की रिलीज स्ट्रेटेजी और प्रमोशनल कैंपेन पर भी असर पड़ता है। संजय शर्मा ने कहा कि उन्होंने पूरी मेहनत और समर्पण के साथ यह फिल्म बनाई है। इससे पहले वे दो शॉर्ट फिल्में बना चुके हैं, लेकिन ‘साहिया’ उनकी पहली बड़ी फीचर फिल्म है। उन्होंने कहा कि जब कोई नया प्रोड्यूसर-डायरेक्टर अपना सब कुछ लगाकर फिल्म बनाता है और फिर सर्टिफिकेशन प्रोसेस में महीनों की देरी होती है, तो यह बेहद निराशाजनक होता है। संजय शर्मा ने विश्वास जताया कि फिल्म को जल्द प्रमाणन मिलेगा और दर्शक इसे देख सकेंगे। उन्होंने दावा किया कि ‘साहिया’ इस साल की सबसे खूबसूरत प्रेम कहानियों में से एक साबित हो सकती है, क्योंकि इसकी कहानी जंगलों, नदियों और प्रकृति के बीच मानवीय रिश्तों को बेहद संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है। वहीं, इस मामले में CBFC का पक्ष जानने के लिए दैनिक भास्कर ने संबंधित अधिकारी से संपर्क किया। उनकी तरफ से मेल आया, कृपया ध्यान दें कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) एक क्वासी-ज्यूडिशियल बॉडी है। इसलिए बोर्ड किसी भी एक केस पर कमेंट नहीं करता है, खासकर उन मामलों में जहां प्रोसिजरल फॉर्मैलिटीज अभी भी चल रही हैं और एप्लीकेशन पर फाइनल प्रोसेसिंग CBFC ने पूरी नहीं की है।आप यह भी ध्यान दें कि सभी आवेदन संबंधित एक्ट और नियमों के तहत निर्धारित समय-सीमा के अनुसार ही प्रोसेस किए जाते हैं। प्रायोरिटी स्कीम अब लागू नहीं है, क्योंकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इसे कई सप्ताह पहले ही समाप्त कर दिया है। एप्लिकेंट फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए तय ऑनलाइन पोर्टल पर फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए किसी भी एप्लीकेशन का स्टेटस शुरू से आखिर तक ट्रैक कर सकते हैं। CBFC का जवाब। जवाब में आगे लिखा गया, प्रोसेस और इसके अलग-अलग स्टेज के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए, CBFC वेबसाइट पर फिल्म सर्टिफिकेशन के ऑनलाइन पोर्टल के FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) और यूज़र गाइड देखी जा सकती है। फिल्म सर्टिफिकेशन के लिए किए गए किसी भी आवेदन की स्थिति एप्लिकेंट फिल्म प्रमाणन के लिए निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर शुरू से अंत तक ट्रैक कर सकते हैं। प्रोसेस और उसके विभिन्न चरणों की अधिक जानकारी के लिए CBFC की वेबसाइट पर उपलब्ध FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) तथा फिल्म सर्टिफिकेशन के ऑनलाइन पोर्टल की यूजर गाइड देखी जा सकती है।सादर,अध्यक्ष कार्यालयकेंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) वहीं, फिल्म को लेकर एक और विवाद सामने आया। फिल्ममेकर अविनाश दास ने सोशल मीडिया पर फिल्म के पोस्टर पर आपत्ति जताई। उनका दावा किया कि यह पोस्टर गलत, बिना अनुमति के जारी किया गया और विवादित है। उन्होंने कहा कि ‘साहिया’ का निर्देशन सिर्फ उन्होंने किया है, लेकिन पोस्टर में उनके नाम की स्पेलिंग गलत लिखी गई और उन्हें मिलने वाला कानूनी क्रेडिट भी कम करके दिखाया गया। अविनाश दास की पोस्ट। वहीं, अविनाश दास ने सार्वजनिक बयान जारी कर दावा किया है कि फिल्म का डायरेक्शन केवल उन्होंने किया है और वह इसके को-प्रोड्यूसर भी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और ट्रेड प्लेटफॉर्म्स पर जारी पोस्टर और प्रमोशनल मटीरियल गलत, भ्रामक और बिना उनकी अनुमति के प्रसारित किए जा रहे हैं। अविनाश दास का बयान। अविनाश दास के मुताबिक, पोस्टर पर ‘A Film by Sanjay Sharma’ और ‘Directed by Sanjay Sharma and Abnav Das’ लिखा गया है, जबकि सही क्रेडिट ‘A Film by Avinash Das’ और ‘Directed by Avinash Das’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके नाम की स्पेलिंग भी गलत लिखी गई है। अविनाश दास ने इस मामले में IFTDA, IMPPA और CBFC में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
31 जुलाई तक 5.9 करोड़ ITR फाइल हुए:2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की डेडलाइन खत्म, अब ₹5000 तक लेट फीस लगेगी

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी पेनल्टी और ब्याज के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई निकल गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, इस डेडलाइन यानी 31 जुलाई तक देश में 5.9 करोड़ से अधिक टैक्सपेयर्स अपने ITR जमा कर चुके हैं। यह समयसीमा उन व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स (ITR-1 और ITR-2) के लिए थी, जिन्हें अपने खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं होती है। आईटी विभाग ने ‘X’ पर दी जानकारी इनकम टैक्स विभाग ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी देते हुए बताया कि टैक्सपेयर्स की ओर से शानदार रिस्पॉन्स मिला है। विभाग ने लिखा, “31 जुलाई तक 2025-26 के लिए 5.9 करोड़ से ज्यादा ITR दाखिल किए जा चुके हैं। हालांकि, यह संख्या पिछले साल की तुलना में अभी कम दिख रही है, क्योंकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने डेडलाइन को बढ़ाकर 16 सितंबर 2025 किया था, तब तक कुल 7.3 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल हुए थे। ITR-1 (सहज): सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला फॉर्म ITR फॉर्म 1, जिसे ‘सहज’ भी कहा जाता है, एक बेहद सरल फॉर्म है। इसका इस्तेमाल देश के छोटे और मध्यम वर्ग के टैक्सपेयर्स बड़े पैमाने पर करते हैं। कौन भर सकता है: यह फॉर्म उन भारतीय निवासियों के लिए है जिनकी सालाना कमाई ₹50 लाख तक है। कमाई का जरिया: इसमें सैलरी से आय, एक घर से होने वाली आय, अन्य स्रोतों से आय (जैसे ब्याज) और सालाना ₹5,000 तक की कृषि आय शामिल है। ITR-2: बिजनेस से अलग और कैपिटल गेन्स वाले टैक्सपेयर्स के लिए ITR-2 फॉर्म उन इंडिविजुअल्स और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिलीज (HUF) द्वारा भरा जाता है: 31 जुलाई की डेडलाइन छूट गई तो अब क्या करें? अगर आप किसी वजह से 31 जुलाई तक अपना ITR फाइल नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अभी भी बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं:
31 जुलाई तक 5.9 करोड़ ITR फाइल हुए:2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की डेडलाइन खत्म, अब ₹5000 तक लेट फीस लगेगी

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी पेनल्टी और ब्याज के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई निकल गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, इस डेडलाइन यानी 31 जुलाई तक देश में 5.9 करोड़ से अधिक टैक्सपेयर्स अपने ITR जमा कर चुके हैं। यह समयसीमा उन व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स (ITR-1 और ITR-2) के लिए थी, जिन्हें अपने खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं होती है। आईटी विभाग ने ‘X’ पर दी जानकारी इनकम टैक्स विभाग ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी देते हुए बताया कि टैक्सपेयर्स की ओर से शानदार रिस्पॉन्स मिला है। विभाग ने लिखा, “31 जुलाई तक 2025-26 के लिए 5.9 करोड़ से ज्यादा ITR दाखिल किए जा चुके हैं। हालांकि, यह संख्या पिछले साल की तुलना में अभी कम दिख रही है, क्योंकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने डेडलाइन को बढ़ाकर 16 सितंबर 2025 किया था, तब तक कुल 7.3 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल हुए थे। ITR-1 (सहज): सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला फॉर्म ITR फॉर्म 1, जिसे ‘सहज’ भी कहा जाता है, एक बेहद सरल फॉर्म है। इसका इस्तेमाल देश के छोटे और मध्यम वर्ग के टैक्सपेयर्स बड़े पैमाने पर करते हैं। कौन भर सकता है: यह फॉर्म उन भारतीय निवासियों के लिए है जिनकी सालाना कमाई ₹50 लाख तक है। कमाई का जरिया: इसमें सैलरी से आय, एक घर से होने वाली आय, अन्य स्रोतों से आय (जैसे ब्याज) और सालाना ₹5,000 तक की कृषि आय शामिल है। ITR-2: बिजनेस से अलग और कैपिटल गेन्स वाले टैक्सपेयर्स के लिए ITR-2 फॉर्म उन इंडिविजुअल्स और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिलीज (HUF) द्वारा भरा जाता है: 31 जुलाई की डेडलाइन छूट गई तो अब क्या करें? अगर आप किसी वजह से 31 जुलाई तक अपना ITR फाइल नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अभी भी बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं:
India-China Trade Resumes | Lipulekh Pass Taklakot Mandi Traders Visit

भारत-तिब्बत व्यापार फिर शुरू होने पर चीन के तकलाकोट के लिए रवाना होते भारतीय व्यापारी। उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से 6 साल बाद भारत-तिब्बत परंपरागत व्यापार शनिवार से फिर शुरू हो गया है। पहले दल में 16 भारतीय व्यापारी और 4 हेल्पर तिब्बत के तकलाकोट मंडी पहुंचे। . खास बात यह रही कि इतिहास में पहली बार भारतीय व्यापारी बिना सामान के चीन गए। सीमा पर चीनी प्रशासन ने उनके दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश दिया, जबकि व्यापारियों का सामान अब भी पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा हुआ है। वहीं, वर्ष 2019 से भारतीय व्यापारियों का करोड़ों रुपए का माल तकलाकोट में भी छूटा हुआ है। पहली बार कारोबारी बिना सामान के सीमा पार पहुंचे। जून से जुलाई तक टलता रहा व्यापार कोरोना महामारी और भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी के कारण वर्ष 2020 से दोनों देशों के बीच परंपरागत व्यापार पूरी तरह बंद था। इस साल जून में व्यापार शुरू होना था, लेकिन औपचारिकताओं और चीन की ओर से लगातार बदलते नियमों के कारण प्रक्रिया टलती रही। 8 जुलाई को व्यापारी सामान लेकर गुंजी तक पहुंच गए थे। उन्हें ट्रेड पास भी जारी कर दिए गए थे, लेकिन रवाना होने से ठीक एक दिन पहले चीन के पुरांग काउंटी प्रशासन ने व्यवस्थाएं पूरी न होने का हवाला देकर व्यापारियों की एंट्री रोक दी। इसके बाद व्यापारी अपना सामान गुंजी में छोड़कर वापस धारचूला लौट आए। लिपुलेख दर्रे से चीन में प्रवेश के दौरान भारतीय व्यापारियों के दस्तावेजों की जांच करती चीनी पुलिस। फिलहाल सिर्फ 20 लोगों को मंजूरी व्यापार शुरू होने को लेकर सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में काफी उत्साह था। प्रशासन ने 134 व्यापारियों और सहायकों के ट्रेड पास जारी किए थे। हालांकि बाद में चीन की ओर से नया आदेश जारी कर फिलहाल केवल 20 लोगों को तकलाकोट जाने की अनुमति दी गई। चीनी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश मिलेगा, जो वर्ष 2019 में तकलाकोट गए थे और जिनका सामान वहां छूट गया था। SDM बोले- भारत-चीन व्यापार विधिवत शुरू हुआ धारचूला के एसडीएम एवं ट्रेड अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि 1 अगस्त को सुबह करीब 10:15 बजे लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन परंपरागत व्यापार की औपचारिक शुरुआत हो गई। पहले दल में 16 व्यापारी और 4 हेल्पर, कुल 20 लोग तकलाकोट मंडी पहुंचे हैं। वहां वे व्यापारिक गतिविधियां शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि अगले बैचों को भेजने की तारीख तय करने के लिए चीनी प्रशासन से लगातार ईमेल के माध्यम से पत्राचार किया जा रहा है। अभी गुंजी में रखा है गुड़, मिश्री और बर्तन व्यापारियों का गुड़, मिश्री, बर्तन समेत अन्य व्यापारिक सामान अभी भी गुंजी में रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि तकलाकोट में व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद व्यापारी दोबारा सामान लेकर जाएंगे। यदि सब कुछ सामान्य रहा तो अगले कुछ दिनों में 20-20 व्यापारियों के अन्य दल भी चीन रवाना किए जाएंगे। पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा भारतीय व्यापारियों का सामान। तकलाकोट में आज भी पड़ा है करोड़ों का सामान वर्ष 2019 में कई भारतीय व्यापारी अपना माल तकलाकोट मंडी में ही छोड़कर लौटे थे। अगले ही वर्ष व्यापार बंद हो गया, जिससे करोड़ों रुपए का सामान वहीं फंस गया। व्यापारियों का कहना है कि धातु के बर्तन तो उपयोग में आ सकते हैं, लेकिन खाद्य सामग्री और अन्य सामान खराब होने की आशंका है। तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए नए स्थान पर मंडी विकसित की गई है। अब व्यापारियों को इसी नई मंडी में किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी, जहां से परंपरागत भारत-तिब्बत व्यापार संचालित होगा। भारतीय व्यापारियों की जांच और औपचारिकताएं पूरी कराती चीनी पुलिस। भारतीय व्यापारी अब पुरानी नहीं, नई मंडी में करेंगे कारोबार छह साल के लंबे अंतराल में तकलाकोट की तस्वीर भी बदल गई है। पहले भारतीय व्यापारी पुरानी मंडी में किराए पर दुकानें लेकर कारोबार करते थे, लेकिन व्यापार बंद रहने के दौरान वहां की कई दुकानें नेपाली और अन्य व्यापारियों को आवंटित कर दी गईं। अब चीन ने भारतीय और नेपाली व्यापारियों के लिए नई ट्रेड मंडी विकसित की है। इस बार भारतीय व्यापारियों को इसी नई मंडी में दुकानें मिलेंगी। व्यापार समिति का कहना है कि नई मंडी पहले से ज्यादा व्यवस्थित है और वहां सामान रखने के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। समिति ने भारतीय व्यापारियों के लिए रियायती किराए की भी मांग की है। चीन में स्थित तकलाकोट मंडी जहां पर भारत और नेपाल के व्यापारी व्यापार करेंगे। पहली बार बदल जाएगा सदियों पुराना ढुलाई मॉडल इस बार सिर्फ मंडी ही नहीं, व्यापार का पूरा ढांचा बदल जाएगा। अब तक व्यापारी धारचूला से गुंजी, कालापानी और नाभीढांग होते हुए कई दिन की कठिन यात्रा के बाद लिपुलेख दर्रे तक पहुंचते थे। सामान घोड़े-खच्चरों और पोर्टरों के सहारे ढोया जाता था। खराब मौसम और भूस्खलन कई बार व्यापार रोक देते थे। अब सड़क बनने के बाद करीब 100 किलोमीटर तक वाहन सीधे सीमा के करीब पहुंच सकेंगे। सिर्फ अंतिम करीब 200 मीटर तक ही सामान पारंपरिक तरीके से ले जाना होगा। चीन की सीमा में प्रवेश करने के बाद सड़क पहले से उपलब्ध है, जहां से व्यापारी करीब 18 किलोमीटर दूर तकलाकोट मंडी तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे परिवहन लागत और समय दोनों कम होने की उम्मीद है। पिथौरागढ़ में अभी तक करीब 134 लोगों को ट्रेड पास मिल चुका है। 2019 में 3 करोड़ से ज्यादा का कारोबार भारत-चीन व्यापार समिति के अनुसार 2019 में करीब 250 भारतीय व्यापारी तकलाकोट पहुंचे थे। उस वर्ष करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार हुआ था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और करीब 1.90 करोड़ रुपए का आयात हुआ था। इस बार सड़क, नई मंडी और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण कारोबार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि भारतीय पक्ष को देरी से अनुमति मिलने के कारण इस साल शुरुआती कारोबारी अवसर काफी हद तक निकल चुके हैं। ——————- ये खबर भी पढ़ें : भारत-चीन व्यापार पर चाइना की टेढ़ी चाल: 1 अगस्त को बिना सामान के बुलाए 20 व्यापारी, नेपाल जून से कर रहा व्यापार करीब 6 साल बाद 1 अगस्त से लिपुलेख दर्रे के जरिए
एथेनॉल से पेट्रोल पर ₹30 प्रति लीटर की बचत हुई:सरकार का दावा- ब्लेंडिंग न होती तो दिल्ली में ₹125 लीटर मिलता, अभी ₹102 में मिल रहा

क्रूड ऑयल की कीमतें जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में 135 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई थीं, तब अगर तेल कंपनियों ने पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग न की होती, तो दिल्ली में पेट्रोल का भाव लगभग 125 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया होता। शुक्रवार को पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल प्रोग्राम की लागत, खाद्य सुरक्षा पर असर और टैक्सपेयर्स की सब्सिडी से जुड़े दावों का जवाब देते हुए यह बात कही। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संकट के समय पर इस प्रोग्राम की वजह से पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 30 रुपए की बचत हुई। दिल्ली में अभी 102 रुपए लीटर है E20 पेट्रोल पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में उपभोक्ताओं को पेट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिला। इसका कारण यह था कि पूर्व-निर्धारित कीमतों पर घरेलू स्तर पर खरीदे गए एथेनॉल की हर एक लीटर पेट्रोल में 20% हिस्सेदारी थी। इसी वजह से रिटेल कीमतें क्रूड के तेज उछाल से बची रहीं। 28 फरवरी को पश्चिमी एशिया में तनाव और संघर्ष शुरू होने के बाद, सरकार ने करीब 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा था। इसके बाद मई में दामों में 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। दिल्ली में फिलहाल मानक E20 पेट्रोल (91-ऑक्टेन) की कीमत 102.12 रुपए प्रति लीटर है, जबकि 100-ऑक्टेन वाला पेट्रोल 169 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। गरीबों का अनाज या FCI का चावल डायवर्ट नहीं हुआ पेट्रोलियम मंत्रालय ने उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि गरीबों के हक का खाद्यान्न एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस प्रोग्राम को चलाने या सपोर्ट देने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सब्सिडी वाले चावल का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। माइलेज पर कितना असर: 2 से 6% तक घट सकती है एफिशिएंसी सड़क परिवहन मंत्रालय ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के एक अध्ययन का हवाला दिया। गुरुवार को लोकसभा में जानकारी देते हुए मंत्रालय ने बताया कि E10 ईंधन के लिए डिजाइन की गई BS-III, BS-IV और BS-VI गाड़ियां जब E20 पर चलाई जाती हैं, तो उनकी कैपेसिटी और उम्र के हिसाब से माइलेज (फ्यूल एफिशिएंसी) में 2 से 6% तक की गिरावट आ सकती है। इससे पहले 20 जुलाई को तेल मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया था कि ऐसी गाड़ियों में माइलेज की यह कमी लगभग 3-5% तक ही सीमित रहती है। वैज्ञानिक जांच के बाद लागू हुआ E20 दोनों मंत्रालयों ने जोर देकर कहा कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से जांचे-परखे और चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। जैसे-जैसे देश में उत्पादन क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होता गया, ब्लेंडिंग के स्तर को भी धीरे-धीरे बढ़ाया गया। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि E20 पर शिफ्ट होने का फैसला फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, ड्राइवैबिलिटी, मटीरियल कम्पैटिबिलिटी और एमिशन परफॉर्मेंस की पूरी जांच और वैलिडेशन के बाद ही लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और चीनी व अनाज उद्योग से लगातार सलाह-मशविरा किया गया। 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों पर कोई असर नहीं सरकार ने लैब स्टडीज और रियल-वर्ल्ड डेटा का हवाला देते हुए बताया कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ियों की ओवरऑल परफॉर्मेंस पर कोई विपरीत या प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। सड़कों पर चल रही 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन एथेनॉल-मिश्रित ईंधनों पर चल रही हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने का कोई भी प्रामाणिक या सत्यापित मामला सामने नहीं आया है।








