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India-China Trade Resumes | Lipulekh Pass Taklakot Mandi Traders Visit

India-China Trade Resumes | Lipulekh Pass Taklakot Mandi Traders Visit

भारत-तिब्बत व्यापार फिर शुरू होने पर चीन के तकलाकोट के लिए रवाना होते भारतीय व्यापारी।

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से 6 साल बाद भारत-तिब्बत परंपरागत व्यापार शनिवार से फिर शुरू हो गया है। पहले दल में 16 भारतीय व्यापारी और 4 हेल्पर तिब्बत के तकलाकोट मंडी पहुंचे।

.

खास बात यह रही कि इतिहास में पहली बार भारतीय व्यापारी बिना सामान के चीन गए। सीमा पर चीनी प्रशासन ने उनके दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश दिया, जबकि व्यापारियों का सामान अब भी पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा हुआ है।

वहीं, वर्ष 2019 से भारतीय व्यापारियों का करोड़ों रुपए का माल तकलाकोट में भी छूटा हुआ है।

पहली बार कारोबारी बिना सामान के सीमा पार पहुंचे।

जून से जुलाई तक टलता रहा व्यापार

कोरोना महामारी और भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी के कारण वर्ष 2020 से दोनों देशों के बीच परंपरागत व्यापार पूरी तरह बंद था। इस साल जून में व्यापार शुरू होना था, लेकिन औपचारिकताओं और चीन की ओर से लगातार बदलते नियमों के कारण प्रक्रिया टलती रही।

8 जुलाई को व्यापारी सामान लेकर गुंजी तक पहुंच गए थे। उन्हें ट्रेड पास भी जारी कर दिए गए थे, लेकिन रवाना होने से ठीक एक दिन पहले चीन के पुरांग काउंटी प्रशासन ने व्यवस्थाएं पूरी न होने का हवाला देकर व्यापारियों की एंट्री रोक दी। इसके बाद व्यापारी अपना सामान गुंजी में छोड़कर वापस धारचूला लौट आए।

लिपुलेख दर्रे से चीन में प्रवेश के दौरान भारतीय व्यापारियों के दस्तावेजों की जांच करती चीनी पुलिस।

लिपुलेख दर्रे से चीन में प्रवेश के दौरान भारतीय व्यापारियों के दस्तावेजों की जांच करती चीनी पुलिस।

फिलहाल सिर्फ 20 लोगों को मंजूरी

व्यापार शुरू होने को लेकर सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में काफी उत्साह था। प्रशासन ने 134 व्यापारियों और सहायकों के ट्रेड पास जारी किए थे। हालांकि बाद में चीन की ओर से नया आदेश जारी कर फिलहाल केवल 20 लोगों को तकलाकोट जाने की अनुमति दी गई।

चीनी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश मिलेगा, जो वर्ष 2019 में तकलाकोट गए थे और जिनका सामान वहां छूट गया था।

SDM बोले- भारत-चीन व्यापार विधिवत शुरू हुआ

धारचूला के एसडीएम एवं ट्रेड अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि 1 अगस्त को सुबह करीब 10:15 बजे लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन परंपरागत व्यापार की औपचारिक शुरुआत हो गई। पहले दल में 16 व्यापारी और 4 हेल्पर, कुल 20 लोग तकलाकोट मंडी पहुंचे हैं। वहां वे व्यापारिक गतिविधियां शुरू करेंगे।

उन्होंने कहा कि अगले बैचों को भेजने की तारीख तय करने के लिए चीनी प्रशासन से लगातार ईमेल के माध्यम से पत्राचार किया जा रहा है।

अभी गुंजी में रखा है गुड़, मिश्री और बर्तन

व्यापारियों का गुड़, मिश्री, बर्तन समेत अन्य व्यापारिक सामान अभी भी गुंजी में रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि तकलाकोट में व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद व्यापारी दोबारा सामान लेकर जाएंगे। यदि सब कुछ सामान्य रहा तो अगले कुछ दिनों में 20-20 व्यापारियों के अन्य दल भी चीन रवाना किए जाएंगे।

पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा भारतीय व्यापारियों का सामान।

पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा भारतीय व्यापारियों का सामान।

तकलाकोट में आज भी पड़ा है करोड़ों का सामान

वर्ष 2019 में कई भारतीय व्यापारी अपना माल तकलाकोट मंडी में ही छोड़कर लौटे थे। अगले ही वर्ष व्यापार बंद हो गया, जिससे करोड़ों रुपए का सामान वहीं फंस गया। व्यापारियों का कहना है कि धातु के बर्तन तो उपयोग में आ सकते हैं, लेकिन खाद्य सामग्री और अन्य सामान खराब होने की आशंका है।

तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए नए स्थान पर मंडी विकसित की गई है। अब व्यापारियों को इसी नई मंडी में किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी, जहां से परंपरागत भारत-तिब्बत व्यापार संचालित होगा।

भारतीय व्यापारियों की जांच और औपचारिकताएं पूरी कराती चीनी पुलिस।

भारतीय व्यापारियों की जांच और औपचारिकताएं पूरी कराती चीनी पुलिस।

भारतीय व्यापारी अब पुरानी नहीं, नई मंडी में करेंगे कारोबार

छह साल के लंबे अंतराल में तकलाकोट की तस्वीर भी बदल गई है। पहले भारतीय व्यापारी पुरानी मंडी में किराए पर दुकानें लेकर कारोबार करते थे, लेकिन व्यापार बंद रहने के दौरान वहां की कई दुकानें नेपाली और अन्य व्यापारियों को आवंटित कर दी गईं।

अब चीन ने भारतीय और नेपाली व्यापारियों के लिए नई ट्रेड मंडी विकसित की है। इस बार भारतीय व्यापारियों को इसी नई मंडी में दुकानें मिलेंगी। व्यापार समिति का कहना है कि नई मंडी पहले से ज्यादा व्यवस्थित है और वहां सामान रखने के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। समिति ने भारतीय व्यापारियों के लिए रियायती किराए की भी मांग की है।

चीन में स्थित तकलाकोट मंडी जहां पर भारत और नेपाल के व्यापारी व्यापार करेंगे।

चीन में स्थित तकलाकोट मंडी जहां पर भारत और नेपाल के व्यापारी व्यापार करेंगे।

पहली बार बदल जाएगा सदियों पुराना ढुलाई मॉडल

इस बार सिर्फ मंडी ही नहीं, व्यापार का पूरा ढांचा बदल जाएगा। अब तक व्यापारी धारचूला से गुंजी, कालापानी और नाभीढांग होते हुए कई दिन की कठिन यात्रा के बाद लिपुलेख दर्रे तक पहुंचते थे। सामान घोड़े-खच्चरों और पोर्टरों के सहारे ढोया जाता था। खराब मौसम और भूस्खलन कई बार व्यापार रोक देते थे।

अब सड़क बनने के बाद करीब 100 किलोमीटर तक वाहन सीधे सीमा के करीब पहुंच सकेंगे। सिर्फ अंतिम करीब 200 मीटर तक ही सामान पारंपरिक तरीके से ले जाना होगा। चीन की सीमा में प्रवेश करने के बाद सड़क पहले से उपलब्ध है, जहां से व्यापारी करीब 18 किलोमीटर दूर तकलाकोट मंडी तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे परिवहन लागत और समय दोनों कम होने की उम्मीद है।

पिथौरागढ़ में अभी तक करीब 134 लोगों को ट्रेड पास मिल चुका है।

पिथौरागढ़ में अभी तक करीब 134 लोगों को ट्रेड पास मिल चुका है।

2019 में 3 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

भारत-चीन व्यापार समिति के अनुसार 2019 में करीब 250 भारतीय व्यापारी तकलाकोट पहुंचे थे। उस वर्ष करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार हुआ था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और करीब 1.90 करोड़ रुपए का आयात हुआ था।

इस बार सड़क, नई मंडी और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण कारोबार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि भारतीय पक्ष को देरी से अनुमति मिलने के कारण इस साल शुरुआती कारोबारी अवसर काफी हद तक निकल चुके हैं।

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ये खबर भी पढ़ें :

भारत-चीन व्यापार पर चाइना की टेढ़ी चाल: 1 अगस्त को बिना सामान के बुलाए 20 व्यापारी, नेपाल जून से कर रहा व्यापार

करीब 6 साल बाद 1 अगस्त से लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस व्यापार पर एक बार फिर चीन ने टेढ़ी चाल चली है। दरअसल, चीन ने पहले बैच में सिर्फ उन्हीं व्यापारियों को तकलाकोट मंडी जाने की अनुमति दी है, जिनकी दुकानें या सामान 2019 से वहां फंसा हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…

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खास बात यह रही कि इतिहास में पहली बार भारतीय व्यापारी बिना सामान के चीन गए। सीमा पर चीनी प्रशासन ने उनके दस्तावेजों की जांच के बाद प्रवेश दिया, जबकि व्यापारियों का सामान अब भी पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा हुआ है।

वहीं, वर्ष 2019 से भारतीय व्यापारियों का करोड़ों रुपए का माल तकलाकोट में भी छूटा हुआ है।

पहली बार कारोबारी बिना सामान के सीमा पार पहुंचे।

जून से जुलाई तक टलता रहा व्यापार

कोरोना महामारी और भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी के कारण वर्ष 2020 से दोनों देशों के बीच परंपरागत व्यापार पूरी तरह बंद था। इस साल जून में व्यापार शुरू होना था, लेकिन औपचारिकताओं और चीन की ओर से लगातार बदलते नियमों के कारण प्रक्रिया टलती रही।

8 जुलाई को व्यापारी सामान लेकर गुंजी तक पहुंच गए थे। उन्हें ट्रेड पास भी जारी कर दिए गए थे, लेकिन रवाना होने से ठीक एक दिन पहले चीन के पुरांग काउंटी प्रशासन ने व्यवस्थाएं पूरी न होने का हवाला देकर व्यापारियों की एंट्री रोक दी। इसके बाद व्यापारी अपना सामान गुंजी में छोड़कर वापस धारचूला लौट आए।

लिपुलेख दर्रे से चीन में प्रवेश के दौरान भारतीय व्यापारियों के दस्तावेजों की जांच करती चीनी पुलिस।

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व्यापार शुरू होने को लेकर सीमांत क्षेत्र के व्यापारियों में काफी उत्साह था। प्रशासन ने 134 व्यापारियों और सहायकों के ट्रेड पास जारी किए थे। हालांकि बाद में चीन की ओर से नया आदेश जारी कर फिलहाल केवल 20 लोगों को तकलाकोट जाने की अनुमति दी गई।

चीनी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश मिलेगा, जो वर्ष 2019 में तकलाकोट गए थे और जिनका सामान वहां छूट गया था।

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धारचूला के एसडीएम एवं ट्रेड अधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि 1 अगस्त को सुबह करीब 10:15 बजे लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन परंपरागत व्यापार की औपचारिक शुरुआत हो गई। पहले दल में 16 व्यापारी और 4 हेल्पर, कुल 20 लोग तकलाकोट मंडी पहुंचे हैं। वहां वे व्यापारिक गतिविधियां शुरू करेंगे।

उन्होंने कहा कि अगले बैचों को भेजने की तारीख तय करने के लिए चीनी प्रशासन से लगातार ईमेल के माध्यम से पत्राचार किया जा रहा है।

अभी गुंजी में रखा है गुड़, मिश्री और बर्तन

व्यापारियों का गुड़, मिश्री, बर्तन समेत अन्य व्यापारिक सामान अभी भी गुंजी में रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि तकलाकोट में व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद व्यापारी दोबारा सामान लेकर जाएंगे। यदि सब कुछ सामान्य रहा तो अगले कुछ दिनों में 20-20 व्यापारियों के अन्य दल भी चीन रवाना किए जाएंगे।

पिथौरागढ़ के गुंजी में रखा भारतीय व्यापारियों का सामान।

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तकलाकोट में आज भी पड़ा है करोड़ों का सामान

वर्ष 2019 में कई भारतीय व्यापारी अपना माल तकलाकोट मंडी में ही छोड़कर लौटे थे। अगले ही वर्ष व्यापार बंद हो गया, जिससे करोड़ों रुपए का सामान वहीं फंस गया। व्यापारियों का कहना है कि धातु के बर्तन तो उपयोग में आ सकते हैं, लेकिन खाद्य सामग्री और अन्य सामान खराब होने की आशंका है।

तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए नए स्थान पर मंडी विकसित की गई है। अब व्यापारियों को इसी नई मंडी में किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी, जहां से परंपरागत भारत-तिब्बत व्यापार संचालित होगा।

भारतीय व्यापारियों की जांच और औपचारिकताएं पूरी कराती चीनी पुलिस।

भारतीय व्यापारियों की जांच और औपचारिकताएं पूरी कराती चीनी पुलिस।

भारतीय व्यापारी अब पुरानी नहीं, नई मंडी में करेंगे कारोबार

छह साल के लंबे अंतराल में तकलाकोट की तस्वीर भी बदल गई है। पहले भारतीय व्यापारी पुरानी मंडी में किराए पर दुकानें लेकर कारोबार करते थे, लेकिन व्यापार बंद रहने के दौरान वहां की कई दुकानें नेपाली और अन्य व्यापारियों को आवंटित कर दी गईं।

अब चीन ने भारतीय और नेपाली व्यापारियों के लिए नई ट्रेड मंडी विकसित की है। इस बार भारतीय व्यापारियों को इसी नई मंडी में दुकानें मिलेंगी। व्यापार समिति का कहना है कि नई मंडी पहले से ज्यादा व्यवस्थित है और वहां सामान रखने के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। समिति ने भारतीय व्यापारियों के लिए रियायती किराए की भी मांग की है।

चीन में स्थित तकलाकोट मंडी जहां पर भारत और नेपाल के व्यापारी व्यापार करेंगे।

चीन में स्थित तकलाकोट मंडी जहां पर भारत और नेपाल के व्यापारी व्यापार करेंगे।

पहली बार बदल जाएगा सदियों पुराना ढुलाई मॉडल

इस बार सिर्फ मंडी ही नहीं, व्यापार का पूरा ढांचा बदल जाएगा। अब तक व्यापारी धारचूला से गुंजी, कालापानी और नाभीढांग होते हुए कई दिन की कठिन यात्रा के बाद लिपुलेख दर्रे तक पहुंचते थे। सामान घोड़े-खच्चरों और पोर्टरों के सहारे ढोया जाता था। खराब मौसम और भूस्खलन कई बार व्यापार रोक देते थे।

अब सड़क बनने के बाद करीब 100 किलोमीटर तक वाहन सीधे सीमा के करीब पहुंच सकेंगे। सिर्फ अंतिम करीब 200 मीटर तक ही सामान पारंपरिक तरीके से ले जाना होगा। चीन की सीमा में प्रवेश करने के बाद सड़क पहले से उपलब्ध है, जहां से व्यापारी करीब 18 किलोमीटर दूर तकलाकोट मंडी तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे परिवहन लागत और समय दोनों कम होने की उम्मीद है।

पिथौरागढ़ में अभी तक करीब 134 लोगों को ट्रेड पास मिल चुका है।

पिथौरागढ़ में अभी तक करीब 134 लोगों को ट्रेड पास मिल चुका है।

2019 में 3 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

भारत-चीन व्यापार समिति के अनुसार 2019 में करीब 250 भारतीय व्यापारी तकलाकोट पहुंचे थे। उस वर्ष करीब 3 करोड़ रुपए से अधिक का व्यापार हुआ था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 1.25 करोड़ रुपए का निर्यात और करीब 1.90 करोड़ रुपए का आयात हुआ था।

इस बार सड़क, नई मंडी और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण कारोबार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि भारतीय पक्ष को देरी से अनुमति मिलने के कारण इस साल शुरुआती कारोबारी अवसर काफी हद तक निकल चुके हैं।

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